MP Weather Alert: प्री-मानसून एक्टिव, 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कई इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी

भोपाल 
मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। प्रदेश में सक्रिय दो मौसमीय प्रणालियों के कारण प्री-मानसून गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिला, जबकि गुरुवार को भी ग्वालियर, जबलपुर समेत 34 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 1 जून से लगातार कहीं न कहीं बारिश दर्ज की जा रही है। अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहने के आसार हैं और मानसून के सक्रिय होने तक प्री-मानसून सिस्टम प्रभावी रहेंगे।

ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कुछ जिलों में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।

 कई जिलों में बदला मौसम
बुधवार को छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना, उमरिया, बैतूल, मंडला, अनूपपुर, शहडोल, जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम, नरसिंहपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला।

बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार
एक ओर प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों में ग्वालियर का तापमान 43.1 डिग्री, जबलपुर 40.5 डिग्री, भोपाल 40.4 डिग्री, उज्जैन 39.5 डिग्री और इंदौर 38.9 डिग्री सेल्सियस रहा। नौगांव, दतिया, सतना, दमोह और रीवा सहित कई जिलों में भी पारा 42 डिग्री के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया।

गुरुवार को इन जिलों में बारिश और तेज हवा
मौसम विभाग ने ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 60 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। वहीं भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, उज्जैन, देवास, मंदसौर, रतलाम और आसपास के इलाकों में गर्मी का असर बना रह सकता है।

छह जिलों में ओले गिरने की आशंका
मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इन जिलों में तेज हवाओं के साथ मौसम अचानक बदल सकता है। 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।

मौसम में बदलाव की यह है वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसके अलावा ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण और एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में आंधी, बारिश और बादलों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। 

MP राज्यसभा चुनाव: BJP के तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, रिटर्निंग अफसर ने सौंपे प्रमाण पत्र; मीनाक्षी मामले पर SC में कल सुनवाई

भोपाल 

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को आज ही जीत का प्रमाण पत्र दे दिया गया। दरअसल, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद और केवल तीन पदों के लिए तीन ही नामांकन शेष रहने के चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें प्रमाण पत्र सौंपा है। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज 11 जून को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा तय है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद स्थिति यह बन गई कि तीन सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में रह गए, जिससे चुनाव निर्विरोध हो गया।

जिसके बाद बीजेपी के तीनों राज्यसभा सांसदों का स्वागत पार्टी कार्यालय में करने की भी तैयारी की जा रही है। विधायक दल के बाद ये सभी नव-निर्वाचित सांसद बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे, जहां प्रदेश अध्यक्ष उनका स्वागत करेंगे। इन सीटों से बीजेपी के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट का राज्यसभा जाना तय हो गया है।

हालांकि मीनाक्षी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि अदालत चुनाव होने दे और रिजल्ट घोषित करने पर अपने आदेश का कैप लगा दे. लेकिन अदालत ने दलील दरकिनार कर दी। 

गुजरात राज्यसभा चुनाव
गुजरात में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी के सभी चार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. राजू शुक्ल, मानसिंह परमार, मुकेश राठवा और जितेंद्र कंजारिया ने जीत दर्ज की है। 

इसके साथ अब राज्यसभा में गुजरात से 11 सांसद है, सभी सांसद बीजेपी के हैं. साल 2029 मे अब अगले राज्यसभा चुनाव होंगे तब तक गुजरात से कांग्रेस का कोई भी सांसद नहीं होगा। 

बता दें, राजस्थान में भी तीनों राज्यसभा उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीते हैं.  दो सीटों पर बीजेपी के सतीश पुनिया और अल्का गुर्जर और एक सीट पर कांग्रेस के नीरज डांगी चुनाव जीत गए हैं। 

क्यों आई ऐसी स्थिति?
यह पूरा विवाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के बाद शुरू हुआ। बीजेपी ने उन पर आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने आपत्ति सही मानते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और सड़क पर प्रदर्शन भी किया। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। आयोग ने भी आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने को आधार मानते हुए नामांकन खारिज रखने का निर्णय बरकरार रखा। फिलहाल कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

मीनाक्षी के नामांकन रद्द मामले में अब कल होगी सुनवाई
48 घंटे के भीतर कांग्रेस चुनाव आयोग से लेकर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई. कांग्रेस ने डिजिटल याचिका दायर की, लेकिन अब भी मीनाक्षी नटराजन के निलंबन के मामले में कोई राहत की तस्वीर कांग्रेस के लिए दिखाई नहीं दे रही है. चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है. उधर नामांकन वापसी की तारीख नजदीक आते देख कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट भी पहुंची और याचिका लगाई, लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई है। 

क्या था वो मामला?
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था।

छिंदवाड़ा की बेटी प्रिया मालवीय बनीं फ्लाइंग ऑफिसर, मेहनत और हौसले की सुनाई प्रेरक कहानी

छिंदवाड़ा 

 मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की बेटी प्रिया मालवीय ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. एएफसीएटी 2025 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की और चयन की अंतिम सूची में जगह बनाई. अब प्रिया भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में सेवा देंगी और हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी. एक साधारण परिवार से निकलकर देश सेवा के अपने सपने को साकार करने वाली प्रिया की यह उपलब्धि प्रेरणादायक कहानी बन गई है. खास बात यह है कि वह छिंदवाड़ा जिले की पहली बेटी हैं, जिन्हें फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव मिला है। 

पुलिस परिवार से उड़ान तक का सफर
प्रिया मालवीय छिंदवाड़ा की निवासी हैं और उनके पिता रवि मालवीय कोतवाली में एएसआई पद पर पदस्थ हैं. बचपन से पिता को वर्दी में देखकर प्रिया के मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ. उन्होंने अपने इसी सपने को लक्ष्य बनाकर मेहनत शुरू की और आखिरकार उसे हासिल कर लिया। 

एएफसीएटी 2025 में शानदार प्रदर्शन
प्रिया ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 2025 में ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की. इस परीक्षा के बाद उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद अंतिम मेरिट सूची में उनका चयन फ्लाइंग ऑफिसर के पद के लिए हुआ। 

प्रिया ने अपनी सफलता पर क्या कहा?

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ऑनलाइन तैयारी से हासिल की सफलता

प्रिया ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया. उनके अनुसार, सही रणनीति और नियमित अध्ययन की मदद से उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल किया. उन्होंने कहा कि हर छात्र को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। 

प्रिया ने गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एयरफोर्स में जाने का लक्ष्य तय किया और एएफसीएटी परीक्षा दी। 

प्रिया ने अपनी सफलता को लेकर कहा कि यह उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है. उन्होंने अन्य बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने सपनों को चुनने और पूरा करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, बस उन्हें अवसर और आत्मविश्वास की जरूरत होती है। 

पिता बोले- “बेटी ने जीवन सार्थक कर दिया”
प्रिया के पिता रवि मालवीय ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है. उन्होंने कहा कि प्रिया हमेशा पढ़ाई के प्रति गंभीर रही और अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंची है. उनके शब्दों में, “बेटी ने मेरा जीवन सार्थक कर दिया। 

जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनीं
प्रिया मालवीय को छिंदवाड़ा जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव हासिल हुआ है. उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है और युवा उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। 

अब हैदराबाद में ट्रेनिंग
चयन के बाद अब प्रिया मालवीय भारतीय वायुसेना की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाएंगी. यह प्रशिक्षण उनके करियर का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा, जहां उन्हें वायुसेना की जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा। 

प्रेरणा बनी प्रिया की कहानी
प्रिया की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत और लगन के बल पर छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उनकी उपलब्धि न केवल छिंदवाड़ा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। 

केरल में निपाह वायरस की दस्तक! 43 वर्षीय व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

कोझिकोड

केरल में निपाह वायरस के एक मामले की पुष्टि हो गई है. शुरुआती जांच में 43 साल के व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोझिकोड के फेरोक के रहने वाले संदिग्ध मरीज की शुरुआती जांच में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है. यह जांच कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में की गई थी.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आया था और माना जा रहा है कि निपाह का संदिग्ध मरीज़ माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था। 

अधिकारियों को शक है कि यह संक्रमण किसी गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके सही स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) से अंतिम पुष्टि गुरुवार को होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ की हालत अभी स्थिर है. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार सुबह मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है. कोझिकोड ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी होगी. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और पाबंदियां लगाने का फ़ैसला समीक्षा बैठकों और NIV टेस्ट के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज़ के कई लोगों के संपर्क में आने की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। 

घबराने की जरूरत नहीं: केरल के स्वास्थ्य मंत्री
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि कोझिकोड के जिस व्यक्ति की शुरुआती जांच में निपाह की पुष्टि हुई है, वह कई लोगों के संपर्क में आया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है.मंत्री ने कहा कि 43 साल के मरीज़ ने उस प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों का दौरा किया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया था, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की चिंता बढ़ गई है.मंत्री ने बताया कि एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज़ के संपर्क में आने की संभावना है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है। 

मंत्री ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है और वे हालात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के ऑफ़िस में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है. मरीज़ का सैंपल पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, जबकि ज़िला और राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तैयारी के उपाय कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि मरीज़ की हालत स्थिर बनी हुई है। 

 

‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी लौट आई: अक्षय कुमार की फिल्म में फुल ऑन मस्ती और हंगामा

 लंबे इंतजार के बाद फाइनली ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. पॉपुलर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म में अनलिमिटेड कॉमेडी देखने को मिल रही है. ट्रेलर की शुरुआत बेहद अलग तरीके से होती है, जहां एक साथ कई कलाकारों की एंट्री दिखाई जाती हैं और उनका नाम भी लिया जाता है. फिर परेश रावल कहते हैं, पहले टॉप का हीरो था, अब फ्लॉप का हीरो है.

वेलकम टू द जंगल का धांसू ट्रेलर आउट
ट्रेलर में साफ पता चलता है कि इस बार मेकर्स कॉमेडी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने वाले हैं. शुरुआत से आखिर तक फुल ऑन मस्ती, कन्फ्यूजन और मजेदार गड़बड़ियों का सिलसिला चलता रहता है, जो आपको हंसने पर मजबूर कर देगा. सबसे खास बात यह है कि वीडियो में पुराने ‘वेलकम’ के कई नॉस्टैल्जिक मोमेंट्स की झलक देखने को मिलती है. खासकर ‘मजनू भाई’ वाइब्स वाला सीक्वेंस टोटल शो-स्टीलर बनकर सामने आया है.

वेलकम टू द जंगल के बारे में
‘वेलकम टू द जंगल’ का निर्देशन अहमद खान ने किया है. फिल्म 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. मेकर्स का दावा है कि इस बार फ्रेंचाइजी एंटरटेनमेंट और कॉमेडी की सारी हदें पार कर देगी. फिल्म की स्टारकास्ट इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है. अक्षय कुमार के अलावा इसमें सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, उर्वशी रौतेला, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे स्टार्स की टोली है. फिल्म साल 2026 की सबसे बड़ी बॉलीवुड कॉमेडी फिल्मों में से एक बनने जा रही है. दर्शक इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

TMC को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा, बढ़ी ममता की मुश्किलें

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में भगदड़ मची हुई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने आज राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।  

प्रकाश चिक बराइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं. एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है. आज बराइक के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है। 

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, टीएमसी के भीतर यह असंतोष यहीं थमने वाला नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले एक हफ्ते के भीतर टीएमसी के तीन और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। 

अगर ये अटकलें सच साबित होती हैं, तो संसद में ममता बनर्जी की पार्टी का ग्राफ और नीचे गिर जाएगा.फिलहाल इन इस्तीफों के पीछे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन विपक्षी दल इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती कलह और असंतोष के रूप में देख रहे हैं। 

आ गई TMC के बागी सांसदों की लिस्ट! कुछ नाम तो चौंका देंगे

अब तक कयास लगाए जा रहे थे क‍ि ममता का साथ क‍ितने सांसद छोड़ने वाले हैं. कोई 10 कह रहा था तो कोई 20… लेकिन अब 19 सांसदों की ल‍िस्‍ट सामने आ गई है. इसमें काकोली घोष दस्‍तीदार के साथ यूसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा समेत कई चौंकाने वाले नाम हैं. गौर करने वाली बात है क‍ि इसमें सयानी घोष जैसे कई नाम भी हैं, ज‍िनकी अटकलें लगाई जा रही थीं। 

1. यूसुफ पठान (बहरामपुर)
क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान ने कांग्रेस के गढ़ बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था. लेकिन राजनीति की पिच पर यूसुफ को दीदी के लोकल नेताओं से वैसी मदद नहीं मिल रही थी, जैसी उम्मीद थी. बहरामपुर के स्थानीय संगठन से उनकी दूरी अब खुलकर सामने आ रही है। 

2. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया (कूचबिहार)
कूचबिहार की सीट हमेशा से उत्तर बंगाल की राजनीति का केंद्र रही है. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया यहां टीएमसी के मजबूत राजबंशी चेहरा माने जाते हैं. लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और स्थानीय गुटबाजी के कारण उनके सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं. क्षेत्र में अपनी पकड़ के बावजूद संगठन से अनबन की खबरें हैं। 

3. खलीलुर रहमान (जंगीपुर)
मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर से आने वाले खलीलुर रहमान बीड़ी कारोबारी से राजनेता बने हैं. मुस्लिम बहुल इस इलाके में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. हालांकि, केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आने और स्थानीय लीडरशिप से तालमेल की कमी के चलते उनके टीएमसी से दूर जाने की चर्चाएं तेज हैं। 

4. अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)
मुर्शिदाबाद के कद्दावर नेता अबू ताहेर खान का इस लिस्ट में होना चौंकाता है. कांग्रेस से टीएमसी में आए अबू ताहेर का क्षेत्र में मजबूत जनाधार है. पिछले कुछ समय से जिला स्तर पर हो रही उपेक्षा और नए नेताओं को तरजीह दिए जाने से वह काफी नाराज बताए जा रहे हैं। 

5. पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
बैरकपुर जैसी हाई-प्रोफाइल और हिंसा प्रभावित सीट से जीतने वाले पार्थ भौमिक ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे. लेकिन अर्जुन सिंह के साथ चलने वाली अंदरूनी खींचतान और पार्टी के भीतर गुटीय समीकरणों के बदलने से पार्थ भौमिक का मोहभंग होता दिख रहा है, जिससे बगावती सुर उठे हैं। 

6. काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)
डॉ. काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी की बेहद सीनियर और तेजतर्रार नेता हैं. संसद में अपनी बात मजबूती से रखने वाली काकोली के बारे में कहा जा रहा है कि वह पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और युवा ब्रिगेड के फैसलों से असहज महसूस कर रही हैं, जिससे दूरियां बढ़ी हैं। 

7. बापी हलदार (मथुरापुर)
मथुरापुर (SC) सीट से चुनकर आए बापी हलदार जमीनी स्तर के नेता हैं. दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन इलाके में उनकी मजबूत पकड़ है. स्थानीय पंचायत चुनावों और विकास कार्यों के फंड को लेकर जिला नेतृत्व के साथ उनकी अनबन अब बगावत के मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। 

8. सायोनी घोष (जादवपुर)
टीएमसी की युवा विंग की अध्यक्ष रहीं सायोनी घोष हमेशा से ममता बनर्जी की फेवरेट रही हैं. जादवपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट से जीतकर संसद पहुंचने वाली सायोनी की बगावत की खबरें हैरान करने वाली हैं. बताया जा रहा है कि संगठनात्मक फेरबदल और कुछ आंतरिक फैसलों से वह खुश नहीं हैं। 

9. माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
कोलकाता दक्षिण सीट खुद ममता बनर्जी का पुराना गढ़ रही है, जहां से माला रॉय सांसद हैं. माला रॉय का नाम इस लिस्ट में आना टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका है. कोलकाता नगर निगम और सांसद फंड के इस्तेमाल को लेकर पार्टी आलाकमान से उनके मतभेद गहरे हो चुके हैं। 

10. मिताली बाग (आरामबाग)
आरामबाग की बेहद करीबी मुकाबले वाली सीट से जीत दर्ज करने वाली मिताली बाग एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं. लेकिन सांसद बनने के बाद स्थानीय स्तर पर पार्टी के पुराने क्षत्रपों ने उन्हें काम नहीं करने दिया. इसी आंतरिक कलह और उपेक्षा के कारण मिताली ने अपने रास्ते अलग करने का मन बनाया है। 

11. देव अधिकारी (घाटाल)
बांग्ला सिनेमा के सुपरस्टार दीपक अधिकारी उर्फ देव के बागी तेवर नए नहीं हैं. वह पहले भी राजनीति छोड़ने की इच्छा जता चुके थे. ममता के मनाने पर वह माने तो थे, लेकिन घाटाल के स्थानीय टीएमसी नेताओं के भ्रष्टाचार और दखलअंदाजी से तंग आकर अब वह आर-पार के मूड में हैं। 

12. कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
आदिवासी बहुल झाड़ग्राम सीट से सांसद कालीपद सोरेन संथाली साहित्यकार और प्रतिष्ठित चेहरा हैं. टीएमसी ने इन्हें आदिवासी कार्ड के तौर पर उतारा था. लेकिन क्षेत्र में आदिवासियों की बुनियादी समस्याओं पर पार्टी के ढुलमुल रवैए और वादों से मुकरने के कारण कालीपद सोरेन ने बगावती रुख अख्तियार कर लिया है। 

13. जून मालिया (मेदिनीपुर)
मेदिनीपुर से सांसद और मशहूर अभिनेत्री जून मालिया को टीएमसी का ग्लैमरस लेकिन गंभीर चेहरा माना जाता है. विधानसभा के बाद लोकसभा तक का सफर तय करने वाली जून मालिया के बारे में खबर है कि वह जिला टीएमसी कमेटी के लगातार बढ़ते हस्तक्षेप और दबाव से बेहद परेशान हैं। 

14. अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
बांकुड़ा से सांसद अरूप चक्रवर्ती अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. बीजेपी के मजबूत गढ़ बांकुड़ा को भेदने वाले अरूप चक्रवर्ती इन दिनों पार्टी के बड़े नेताओं के रवैए से नाराज हैं. उनका मानना है कि जीतने के बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला। 

15. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
पेशे से डॉक्टर शर्मिला सरकार को टीएमसी ने बर्धमान पूर्व की सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा था. राजनीति में नई शर्मिला को उम्मीद थी कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन पार्टी के लोकल ‘सिंडिकेट’ और नेताओं के दबाव के कारण वह खुद को घुटा हुआ महसूस कर रही थीं। 

16. शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
‘बिहारी बाबू’ शत्रुघ्न सिन्हा ने आसंसोल उपचुनाव और फिर आम चुनाव में टीएमसी को बड़ी जीत दिलाई. लेकिन हमेशा अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाले शॉटगन को टीएमसी का कड़ा अनुशासन और केवल बंगाल केंद्रित राजनीति रास नहीं आ रही है. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका न देखकर उनके तेवर तल्ख हैं। 

17. असित कुमार माल (बोलपुर)
बीरभूम जिले की बोलपुर सीट से सांसद असित कुमार माल अनुब्रत मंडल के दौर से ही पार्टी का वफादार चेहरा रहे हैं. लेकिन अनुब्रत मंडल के जेल जाने और आने के बाद बदले समीकरणों में असित कुमार खुद को हाशिए पर पा रहे हैं, जिससे उनकी नाराजगी बगावत में बदल गई। 

18. शताब्दी रॉय (बीरभूम)
अभिनेत्री से नेता बनीं शताब्दी रॉय बीरभूम से लगातार जीतती आ रही हैं. बीरभूम टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी गैंगवार और गुटबाजी से शताब्दी हमेशा परेशान रही हैं. इस बार उनका धैर्य जवाब दे गया है और वह पार्टी नेतृत्व को अपनी ताकत दिखाने के मूड में नजर आ रही हैं। 

19. रचना बनर्जी (हुगली)
‘दीदी नंबर 1’ रियलिटी शो की मशहूर होस्ट रचना बनर्जी ने हुगली में बीजेपी की लॉकेट चटर्जी को हराकर सनसनी मचाई थी. हालांकि, राजनीति की इस दलदल और पार्टी के भीतर टिकट से लेकर मलाईदार पदों के लिए होने वाली नूराकुश्ती से रचना जल्द ही ऊब गईं और उनके बागी सुर गूंजने लगे हैं। 

 

TMC-DMK में सियासी उथल-पुथल, क्या परिसीमन बिल पास कराने के और करीब पहुंच गई BJP?

 नई दिल्ली

केंद्र की बीजेपी सरकार को विधानसभा चुनावों के बीच बड़े जोर का झटका लगा था. लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल गिर गया था. कांग्रेस के विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण राहुल गांधी भले ही क्रेडिट लें, लेकिन असल बात तो यह है कि तब तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के नए सिरे से जिक्र की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि दोनों ही दल अपने अपने राज्यों में सत्ता से बेदखल हो गए हैं. और, बेदखल ही नहीं हुए हैं. विधायकों के बाद टीएमसी के सांसद भी बगावत पर उतर आए हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मॉनसून सत्र में मिल सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन विधेयक संसद में पेश कर सकती है – सवाल यह है कि बदले राजनीतिक हालात में दोनों विधेयकों के पास होने की कितनी संभावना है। 

मॉनसून सेशन में महिला आरक्षण – परिसीमन बिल की संभावना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते 12 साल के कार्यकाल में पहला मौका था जब केंद्र सरकार की तरफ से पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो. संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए कानून में संशोधन और परिसीमन विधेयक के समर्थन में 298 मत पड़े, जबकि बिलों के विरोध में 230 मत पड़े थे. दरअसल, महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा क्षेत्रों की संख्या फिर से निर्धारित करने के मकसद से लाया गया परिसीमन विधेयक भी महिला आरक्षण संशोधन के साथ जुड़ा हुआ था। 

बीजेपी वैसे तो विधानसभा चुनावों के बीच मिले जोरदार झटके की पूरी तरह भरपाई कर चुकी है, लेकिन नेतृत्व को मिशन तब तक अधूरा लग रहा होगा, जब तक कि दोनों विधेयक संसद से पास नहीं हो जाते – और यही वजह है कि बीजेपी सरकार मॉनसून सत्र में फिर से दोनों बिल लाने और उन्हें पास कराने के लिए प्रयासरत है। 

पश्चिम बंगाल की चुनावी जीत का तो बीजेपी को लंबे समय से इंतजार था. कई बार के गंभीर प्रयासों के बाद जीत संभव भी हो पाई. तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के साथ भले ही थलपति विजय की सरकार बन गई हो, लेकिन डीएमके की हार तो बीजेपी को सुकून देने वाली ही है. AIADMK अगर सत्ता में लौट पाती तो गठबंधन पार्टनर बीजेपी के लिए और अच्छी बात होती. डीएमके ने तो संसद में बिल गिर जाने को वोटिंग से पहले ही जीत की तरह जश्न मनाया था, और चुनाव कैंपेन की स्ट्रैटेजी तक बदल डाली थी। 

तृणमूल कांग्रेस में जो तबाही का दौर शुरू हुआ, चल ही रहा है. डीएमके नेतृ्त्व भी सशंकित है. वैसे भी आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के छोड़कर चले जाने के बाद तो विपक्षी खेमे के शायद ही कोई राजनीतिक दल होगा जो डरा हुआ न हो. खबर है कि बीजेपी ने क्षेत्रीय दलों से नए सिरे से संपर्क किया है. और, इस मामले में डीएमके की तरफ से भी नरम रुख अपनाए जाने की बात सामने आई है. वैसे भी गठबंधन तोड़कर कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय की टीवीके के साथ चले जाने के बाद डीएमके नए रास्ते और समीकरण तलाशने के लिए आजाद भी हो गई है. सुनने में आया है कि डीएमके केंद्र सरकार के बिल के नए ड्राफ्ट और लिखित प्रस्ताव का इंतजार कर रही है. अचानक डीएमके के लिए पलटना तो संभव भी नहीं होगा, लेकिन बीच का रास्ता तो निकाला ही जा सकता है। 

राज्यसभा चुनाव से कितना फर्क पड़ेगा
देश के 10 राज्यों में राज्यसभा की 24 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होने जा रहे हैं. और, इनमें से 10 सीटों पर पहले से ही बीजेपी की जीत पक्की मानी जा रही थी. अब इसमें मध्य प्रदेश से एक सीट और भी जुड़ रही है. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश से बीजेपी को राज्यसभा की 3 सीटें मिलना पक्का माना जाने लगा है. गुजरात से राज्यसभा की चारों सीटें बीजेपी को मिलना पक्का है. राजस्थान से 2 सीटें मिल सकती हैं. मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से 1-1 सीटें मिलने वाली हैं. झारखंड में नंबर कम होने के कारण बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा कर रखी है। 

राज्यसभा में बीजेपी के पास 113 सांसद हैं. और, पूरे एनडीए की बात करें तो ये नंबर 148 है. फिर भी दो तिहाई बहुमत के लिए 15 सीटें कम पड़ रही हैं. राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत पड़ती है. मुद्दे की बात यह है कि टीएमसी के दो सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, फिर तो बहुमत का आंकड़ा भी घट जाएगा. टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के बाद सुष्मिता देव ने भी इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात भी की है, जिससे आगे का प्लान स्पष्ट हो गया है। 

लोकसभा में बदल रहा नंबर गेम
बदले माहौल में लोकसभा में नंबर गेम भी बदल रहा है. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की बगावत के बाद तो पक्का ही हो गया है. टीएमसी के बागी सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में स्पीकर को अलग बैठने और अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए पत्र भी दे दिया है। 

काकोली घोष दस्तीदार को नेता मानने वाले ऐसे ही 19 सांसदों की लिस्ट सामने आई है, जिनमें यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा  के साथ सयानी घोष का नाम भी शामिल है. जिस तरह से काकोली घोष प्रशासनिक मीटिंग में इलाके के विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ शामिल हुई थीं, इरादे तभी साफ हो गए थे। 

अब अगर डीएमके सपोर्ट के लिए तैयार हो जाए, और टीएमसी के बागी सांसदों का साथ हो जाए तो बीजेपी के लिए दोनों बिल पास कराना आसान हो जाएगा. अगर कुछ कम पड़ा तो उसे भी मैनेज करने की कोशिश हो ही सकती है। 

TMC में बगावत तेज, सांसद प्रसून बनर्जी ‘काकोली ग्रुप’ में शामिल

पश्चिम बंगाल
TMC लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी पार्टी के बागी ‘काकोली ग्रुप’ में शामिल हो गए हैं. उन्होंने संसद में एक अलग ब्लॉक बनाने की मांग वाले पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उनके इस कदम से तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में विभाजन का संकट और गहरा गया है.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही बगावत रूकने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार तक जो लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ममता के साथ खड़े थे उन्होंने अब पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावती रुख अपनाते हुए बागी सांसदों के ‘काकोली ग्रुप’ का दामन थाम लिया है.

प्रसून बनर्जी ने संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग करने वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर (साइन) भी कर दिए हैं. टीएमसी के भीतर का बागी गुट लोकसभा में खुद को एक अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिशों में जुटा है.

इस गुट में अभी तक प्रसून को मिलाकर 20 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं. वहीं अब ममता के खेमे में 8 सांसद बचे हैं. बागी गुट अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए लगातार सांसदों का समर्थन जुटा रहा है. प्रसून बनर्जी हावड़ा से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए हैं और खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी उनका बड़ा कद है.

TMC के बागी सांसदों की लिस्ट आई सामने! शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान का भी नाम
इससे पहले राज्यसभा से कई सांसदों के इस्तीफे और कुछ अन्य सांसदों के बागी गुट के संपर्क में होने की खबरें आई थीं. हालांकि, कुछ सांसदों ने इन खबरों का खंडन भी किया था, लेकिन प्रसून बनर्जी के इस कदम ने बागी गुट के दावों को मजबूत कर दिया है. 

पोस्ट ऑफिस घोटाला: 245 शिकायतें, सिर्फ 32 लाख का सेटलमेंट; आरोपी पोस्टमास्टर अब भी फरार

डोंगरगढ़.

छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले का मामला महीनों बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। सैकड़ों खाताधारकों की जमा पूंजी फंसने के बाद दर्ज हुई 245 शिकायतों में से बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं।

विभागीय जानकारी के अनुसार, अब तक केवल 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को मंजूरी मिली है, जिनमें से भी लगभग 25 लाख रुपये ही प्रभावित खाताधारकों को लौटाए जा सके हैं। फरवरी 2026 में सामने आए इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था।

प्रदर्शन के बाद आयोजित हुआ था शिविर
आरोप है कि जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में पदस्थ तत्कालीन पोस्टमास्टर आशीष मांडवी ने खाताधारकों की जमा राशि में अनियमितता करते हुए लाखों रुपये का गबन किया। मामला उजागर होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने डोंगरगढ़ उप डाकघर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद डाक विभाग को विशेष शिकायत शिविर आयोजित करना पड़ा।

विभागीय प्रक्रिया के कारण 7 लाख रुपए लंबित
डाक विभाग के विशेष शिविर में कुल 245 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के बाद विभाग ने 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को स्वीकृति दी। राजनांदगांव डाक संभाग के हेड पोस्टमास्टर एम.के. शर्मा के अनुसार स्वीकृत राशि में से लगभग 25 लाख रुपये खाताधारकों को वापस किए जा चुके हैं, जबकि शेष 7 लाख रुपये विभागीय प्रक्रिया के कारण लंबित हैं और जल्द जारी किए जाएंगे।

प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी
हालांकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 245 शिकायतों में से अब तक लगभग 100 मामलों का ही निराकरण हो पाया है। बड़ी संख्या में शिकायतें अभी भी दस्तावेजों के सत्यापन, रिकॉर्ड की कमी और जांच लंबित होने के कारण अटकी हुई हैं। इससे प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी बनी हुई है।

आरोपी अब भी फरार, पुलिस ने तेज की तलाश
मामले का मुख्य आरोपी आशीष मांडवी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस विभाग ने 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि आरोपी की लगातार तलाश की जा रही है। उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है और तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।

दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई- SDOP
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज कराने में डाक विभाग की ओर से हुई देरी के कारण आरोपी को फरार होने का मौका मिल गया, लेकिन अब पुलिस पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। एसडीओपी नायक ने कहा, “मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

245 शिकायतें, सिर्फ 32 लाख का सेटलमेंट पर्याप्त कैसे
फिलहाल जटकन्हार पोस्ट ऑफिस फ्रॉड में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 245 शिकायतों के मुकाबले केवल 32 लाख रुपये का सेटलमेंट आखिर पर्याप्त कैसे माना जा सकता है। जब तक सभी शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण नहीं होता और मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता, तब तक प्रभावित खाताधारकों की लड़ाई जारी रहने वाली है।

CM साय की फटकार के बाद बड़ा एक्शन, एमसीबी के DEO मिरे को पद से हटाया गया

मनेंद्रगढ़.

छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाते हुए राज्य में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। राज्य शासन द्वारा ‘महानदी भवन’ से जारी इस नवीन आदेश के तहत कई जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और प्राचार्यों के प्रभार में भारी फेरबदल किया गया है।

इस पूरी सूची में सबसे बड़ा और संवेदनशील एक्शन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में देखने को मिला है, जहाँ सुशासन की कसौटी पर खरे न उतरने वाले अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया गया है। रविशंकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में 16 जून से शुरू होगा एडमिशन… खाद-बीज संकट को लेकर कांग्रेस करेगी प्रदर्शन… राजधानी के कई इलाकों में आज शाम जलापूर्ति रहेगी बाधित

सुशासन तिहार की फटकार और खराब रिज़ल्ट
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे का तबादला कर दिया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में घोषित हुए कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में एमसीबी (MCB) जिला पूरे प्रदेश में सबसे आखिरी पायदान पर रहा था। शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर शासन स्तर पर भारी असंतोष था। ​इसके अलावा, ‘सुशासन तिहार’ के तहत जब मुख्यमंत्री स्वयं एमसीबी जिले के चिरमिरी में मैराथन समीक्षा बैठक ले रहे थे, तब विभागीय लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने तत्कालीन डीईओ आरपी मिरे को जमकर फटकार भी लगाई थी। मुख्यमंत्री की इसी सख्त नाराजगी और खराब परफॉर्मेंस का सीधा असर इस तबादला आदेश में देखने को मिला है, जहाँ मिरे को हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय के विकल्प पर रखा गया है।

रविकांत यादव बने प्रभारी डीईओ
जिले में पटरी से उतरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए शासन ने अब रविकांत यादव (विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी) पर भरोसा जताया है। रविकांत यादव को तत्काल प्रभाव से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके सामने अब जिले के शैक्षणिक स्तर को सुधारने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में जिले को शीर्ष पर लाने की एक बेहद चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

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