TMC में बगावत से ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बड़े नेताओं के जाने के बाद कितनी बची राजनीतिक ताकत?

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ममता बनर्जी का सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. टीएमसी विधायक से लेकर सांसद तक एक-एक कर ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. अब हालत यह हो गई है कि सयानी घोष से लेकर युसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी बागी खेमे के साथ खड़े हो गए हैं। 

15 साल तक बंगाल में एकछत्र राज करने के बाद सत्ता हाथ से निकलते ही टीएमसी में असंतोष फूट पड़ा है. टीएमसी में तमाम बड़े सिपहसलार अलग राह पर चल पड़े हैं, जिससे ममता बनर्जी के हाथों से पार्टी निकलती जा रही है। 
   
टीएमसी के 19 बागी सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, जो काकोली घोष दस्तीदार के अगुवाई में अलग गुट बनाने का फैसला किया है. इस फेहरिश्त में उन सभी नेताओं के नाम है, जिन्हें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में ममता के पास कितनी ताकत बची है? 

TMC के बड़े सितारे छोड़ गए ममता का साथ
बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी ने एक जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. इसके बाद 13 साल तक ममता बनर्जी संघर्ष कर साढे तीन दशक से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उखाड़ फेका था. ममता के इस सियासी संघर्ष के रहे तमाम टीएमसी नेता धीरे-धीरे साथ छोड़ गए. अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी ने कई नए चेहरों को सियासत में लाए और सियासी पहचान दी, लेकिन सत्ता बदलते ही उनके मोहभग हो गए। 

काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीउर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ मौमिक, बापी हलधर, सायोनी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी शामिल है. ये ऐसे नाम है, जिनकी राजनीतिक को ममता बनर्जी ने सियासी पहचान दी, लेकिन अब बीजेपी खेमे के साथ खड़े होने के लिए बेताब है। 

ममता बनर्जी के पास कितने सांसद बचे
2024 के लोकसभा चुनावों में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में 29 पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 12 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी, चुनावों के बाद टीएमसी के बशीरहाट से ससद हाजी नुरुल इस्लाम की मौत हो गई थी. टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद है, जिसमें से 19 सांसद बागी हो गई है. इसके बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं। 

ममता बनर्जी के पास बचे टीएमसी लोकसभा सांसदों में फिलहाल कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, सुदीप बंधोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद हैं। 

टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिसमें  दो सांसदों ने इस्तीफा दिया है. सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों के अब बीजेपी से राज्यसभा जाने की चर्चा. इस तरह 11 राज्यसभा सांसद बच रहे हैं, लेकिन उनसे में से भी कितने सांसद ममता के साथ रहेंगे, ये कहना मुश्किल है। 

ममता बनर्जी के पास कितने विधायक बचे
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव चुनाव में टीएमसी के टिकट पर 80 विधायक जीतकर आए, जिसमें से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को ममता बनर्जी ने बाहर कर दिया था. इसके बाद  टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया और अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया. टीएमसी के कुछ अन्य विधायकों ने भी साथ छोड़ा है। 

ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि अब उनके पास 64 विधायकों का समर्थन है और एक विधायक के हमारे साथ जुड़ने के बाद संख्या 65 हो जाएगी. इस तरह 80 में से 65 विधायक अब ममता बनर्जी से अलग होकर अपना अलग गुट बना लिया है और  ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है. टीएमसी के 65 विधायकों के बागी होने के बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 15  विधायक ही बच रहे हैं. इसके अलावा बंगाल के तमाम बड़े शहरों के मेयर अपना इस्तीफा दे दिए हैं। 

मंत्री सारंग ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम से छोला मंदिर में हनुमान जी को गदा की अर्पित

मंत्री सारंग ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम से छोला मंदिर में हनुमान जी को गदा की अर्पित

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर खेड़ापति हनुमान मंदिर में भव्य महाआरती

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने पर सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को भोपाल के सबसे प्राचीन मंदिर छोला स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर में कार्यकर्ताओं के साथ भव्य महाआरती एवं सामूहिक संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ किया। मंत्री सारंग ने खेड़ापति हनुमान जी के चरणों में प्रधानमंत्री मोदी के नाम की गदा अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुदृढ़ नेतृत्व तथा राष्ट्रसेवा के सफल एवं यशस्वी भविष्य के लिए मंगलकामनाएं कीं।

मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 12 वर्षों में विकास, सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना, आत्मनिर्भरता, डिजिटल नवाचार, गरीब कल्याण एवं वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां प्राप्त की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विश्व पटल पर अपनी एक सशक्त, आत्मविश्वासी एवं निर्णायक राष्ट्र के रूप में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा, समर्पण और सुशासन को राजनीति का आधार बनाकर करोड़ों देशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। आज भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार, आर्थिक प्रगति तथा सांस्कृतिक गौरव के नए युग में प्रवेश कर चुका है।

मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक निरंतर निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने का गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की जनता के अटूट विश्वास, उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता तथा राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, कार्य संस्कृति एवं राष्ट्र प्रथम का भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

नरेला के सभी मंदिरों में आयोजित हुए कार्यक्रम

मंत्री सारंग ने बताया कि नरेला विधानसभा के समस्त प्रमुख मंदिरों पर धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन किये गये। इस अवसर पर मंदिरों में पूजन, आरती एवं राष्ट्र की समृद्धि और प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गई। उन्होंने बताया कि यह अवसर प्रत्येक भारतीय और कार्यकर्ताओं के लिए गौरव, प्रेरणा और उत्सव का विषय है।

 

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का ताबड़तोड़ पलटवार, बहरीन-कुवैत से लेकर तेल टैंकरों तक मची अफरा-तफरी

तेहरान 

अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव एक बार फिर खुली सैन्य भिड़ंत में बदलता दिखाई दे रहा है. अमेरिका के ताजा हमलों के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट को “अगले आदेश तक” बंद कर दिया गया है। 

IRGC के मुताबिक, गुरुवार तड़के कुवैत के अली अल सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर ड्रोन हमले किए गए. इनके अलावा बहरीन में शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाया गया. संगठन का दावा है कि ये कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए नए सैन्य हमलों के जवाब में की गई है और अमेरिका के 18 प्रमुख सैन्य संपत्तियों को तबाह कर दिया है. ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से “अवैध रूप से” गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर भी हमले किए गए हैं। 

ईरानी सेना ने अमेरिका पर अप्रैल में हुए युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि अमेरिकी सेना लगातार ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रही है, जिसके कारण जवाबी कदम उठाने पड़े. IRGC ने साफ चेतावनी दी कि होर्मुज से गुजरने वाला हर तरह का समुद्री यातायात अब प्रभावित होगा। 

बहरीन में ईरानी हमलों का टारगेट फिफ्थ फ्लीट
IRGC ने दावा किया कि आर्मी के ड्रोन हमलों की इस लहर में, फिफ्थ फ्लीट के पैट्रियट सिस्टम के कम्युनिकेशन एंटीना और रडार इंस्टॉलेशन को निशाना बनाया गया है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, जॉर्डन में स्थित अल-अजराक एयर बेस और मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर जोरदार विस्फोटों की खबर सामने आई है. ये दोनों सैन्य ठिकाने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौजूदगी और अमेरिकी अभियानों के समर्थन के लिए जाने जाते हैं. हालांकि विस्फोटों की वजह और नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। 

दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए गए. अमेरिका का कहना है कि ये हमले ईरान की “लगातार और अनुचित आक्रामकता” के जवाब में किए गए हैं। 

अमेरिका के ताजा हमले का कहां-कहां हुआ असर?
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद केशम द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक और करगान जैसे इलाकों में जोरदार विस्फोट हुए. दक्षिणी शहर करगान में हुए धमाकों में कम से कम दो लोगों के घायल होने की भी खबर है. इससे पहले बीते दिन अमेरिका ने केशम द्वीप, सीरिक, जास्क और बंदर अब्बास के आसपास सैन्य ठिकानों, रडार और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाया था। 

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी हेलीकॉप्टर मार गिराया गया
यह पूरी घटना उस घटना के बाद सामने आई है जिसमें होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं. बुधवार को ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और जॉर्डन के अज्राक एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया था। 

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर शांति वार्ता को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर “बहुत कड़ा प्रहार” करेगा. जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश किसी भी दबाव या धमकी के सामने झुकने वाला नहीं है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। 

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव! घुसपैठियों को खदेड़ते ही BSF-BGB के बीच बढ़ी तनातनी, हुई पत्थरबाजी

कलकत्ता

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को बवाल हो गया. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा कथित रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने की कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव की घटनाएं सामने आईं. घटना मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के महेंद्रगंज क्षेत्र स्थित नंदिर चार सीमा इलाके की बताई जा रही है। 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद BSF ने उसे बांग्लादेश की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि मामला उस समय उलझ गया जब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और सीमा पार मौजूद स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

बताया जा रहा है कि BGB के इनकार के बाद वह व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच फेंसिंग के पास ही फंस गया. इससे इलाके में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से उसे अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया गया. घटना की खबर फैलते ही सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते सैकड़ों लोग सीमा के पास पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। 

दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सीमा पर जुटी भीड़ के बीच कहासुनी के बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी बाड़ के आर-पार पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई. हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. BSF और BGB दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। 

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे हैं. इन वीडियो में सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। 

हालात पर नजर, बातचीत से समाधान की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत बातचीत की संभावना है. BSF और BGB के अधिकारी स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल नंदिर चार सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक सीमा प्रबंधन की व्यवस्था रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों की एजेंसियां बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल लेंगी और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल हो जाएगी। 

भारत की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा, 12 परमाणु हथियारों की तैनाती से बदला सुरक्षा समीकरण

बेंगलुरु 

भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है. अगर यह आकलन सही साबित होता है तो इसे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। 

रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब SIPRI ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर एक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो चुकी है. भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य आधुनिकीकरण और हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने के कारण परमाणु जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। 

भारत ने बदली परमाणु नीति?
SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 180 बताई गई थी. रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से करीब 12 परमाणु वारहेड अब ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात हो सकते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि भारत शांति काल में अपने परमाणु हथियार और मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग रखता है, ताकि किसी भी परमाणु कार्रवाई पर अंतिम नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के पास रहे । 

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संख्या में वारहेड की तैनाती भारत की अधिक तेज और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है. खासकर तब, जब भारत अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। 

आक्रमण नहीं, हिफाजत के लिए परमाणु हथियार
भारत की परमाणु नीति लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ और ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ यानी विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता के सिद्धांत पर आधारित रही है. इसका मतलब यह है कि भारत परमाणु हथियारों को आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को हमले से रोकने के लिए रखता है. SIPRI की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत दिया गया है कि रणनीतिक बलों की तैयारियों का स्तर पहले से अधिक मजबूत हुआ है। 

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा प्रभाव चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता का है. SIPRI के मुताबिक चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है. इसी वजह से भारत ने ऐसी नई मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं जो चीन के भीतर दूर तक स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक सोच अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है। 

हालांकि पाकिस्तान भी भारत की सुरक्षा गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. पिछले एक दशक में दोनों देशों ने नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु हथियारों को ले जाने वाले प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ऐसे में दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत की प्राथमिकता बना हुआ है। 

दुनियाभर में कितने परमाणु हथियार?
वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. SIPRI के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वारहेड हैं. इनमें से लगभग सभी देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण में जुटे हुए हैं. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया धीरे-धीरे एक नए न्यूक्लियर आर्म्स रेस की ओर बढ़ रही है। 

इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य में भारत की कथित ऑपरेशनल तैनाती को भी देखा जा रहा है. भले ही इसकी संख्या सीमित हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रतिरोध क्षमता को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है. खासकर ऐसे दौर में जब चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। 

‘रोल के बदले सोना चाहिए’! डायरेक्टर की डिमांड सुन हैरान रह गई एक्ट्रेस, 7 लाख के ऑफर का भी खुलासा

मुंबई 
टीवी शो जोधा अकबर में रुकैया बेगम के रोल में दिखीं लवीना टंडन ओटीटी प्लेटफॉर्म को एक्सप्लोर कर रही हैं. लवीना ने फिल्मों से दूरी बनाई हुई है। इसकी अहम वजह कास्टिंग काउच है. जिसे उन्होंने 2 बार झेला. मेकर्स की डिमांड को लवीना ने सिरे से ठुकराया. अपने उसूलों पर काम करने का फैसला किया। लवीना को 2 बार कॉम्प्रोमाइज के लिए अप्रोच किया गया. स्विच संग बातचीत में वो कहती हैं- एक बार साउथ के डायरेक्टर ने मुझे कहा था 10-15 दिन का काम है।        

मैंने जब उनसे बजट पूछा तो कहते हैं- 5 लाख तक होगा. उन्होंने कहा अगर कॉम्प्रोमाइज करने के लिए तैयार हो तो, 7 लाख बजट होगा। लवीना सुनकर चौंकीं. उन्होंने कहा- मैं आपकी ईमानदारी की कद्र करती हूं. लेकिन मैं ये सब चीजें नहीं करती हूं।  अगर आपके पास कभी कोई साफ काम होगा तो प्लीज मुझे कॉल करना, वरना तो कभी कॉल नहीं करना। 

लवीना ने कहा कि हाल ही में किसी और ने उन्हें डिमांड के लिए अप्रोच किया था. एक्ट्रेस ने उन्हें साफ इनकार किया था।लवीना ने कहा- हर कोई सोचता है ग्लैमर इंडस्ट्री से हो तो सब कुछ कर लोगे. क्योंकि हम बहुत आदमियों संग काम करते हैं. हमारे रोमांटिक सीन्स होते हैं।   लवीना ने माना कि कास्टिंग काउच हर इंडस्ट्री में होता है. लेकिन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को लेकर चीजें बाहर आती हैं, तो लोग समझते हैं हम शरीफ नहीं हैं। 

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में बड़ा खुलासा, 6.5 लाख गर्भवतियों की जांच में 1.75 लाख हाई-रिस्क श्रेणी में

भोपाल 

 मध्यप्रदेश में हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत बीते छह माह में 6.5 लाख गर्भवतियों की जांच में 1.75 लाख को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिह्नित किया गया। भोपाल में 31.1 फीसदी गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं। प्रदेश में गर्भवतियों में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की दर 26.9 प्रतिशत पाई गई। यानी हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 27 महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं।

वायु प्रदूषण से भी खतरा
भोपाल एम्स के हालिया अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं और ये कण प्लेसेंटा (अपरा) तक पहुंच सकते हैं। प्लेसेंटा में सूजन, ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस बढ़ता है। शिशु तक ऑक्सीजन, पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित होती है।

गर्भवतियों को खतरे में डाल रहे ये रोग
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी वाली गर्भवतियों में एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भकालीन मधुमेह पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण, मोटापा, जुड़वा या बहुभ्रूण गर्भावस्था और पूर्व में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के कारण भी महिलाओं की स्थिति खतरनाक हो जा रही है।

वायु प्रदूषण से प्लेसेंटा को क्या-क्या नुकसान
    जहरीले कण प्लेसेंटा के ऊतकों (tissues) को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बच्चे तक पहुंचने वाले रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित होती है।

    एम्स के इस शोध में पाया गया कि प्रदूषण के कारण IGFBP3 नामक एक आवश्यक जीन दब जाता है। यह जीन भ्रूण के स्वस्थ विकास के लिए बड़ी भूमिका निभाता है।

    सांसों के माध्यम से जहरीले तत्वों में लेड, कैडमियम और एंटीमनी जैसी भारी और जहरीली धातुएं प्लेसेंटा में जमा होने लगती हैं, जो शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को क्षति पहुंचाती हैं।

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में खतरे

एम्स और अन्य चिकित्सा अध्ययनों में हाईरिस्क प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था में जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है-

    प्रीक्लेम्पसिया और हाइपरटेंशन का बड़ा खतरा, इसमें गर्भवती का बीपी असामान्य तरीके से बढ़ जाता है।
    प्री-टर्म डिलीवरी के मामले बढ़ना। इसमें 37 सप्ताह से पहले ही गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है।
    इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। इसका असर यह होता है कि जन्म लेने वाले शिशुओं में न्यूरोलॉजिकल और व्यवहार संबंधी बदलाव का जोखिम बढ़ता है।
    स्टिलबर्थ होना। यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। इसमें गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु का खतरा होता है।

जानें क्या सावधानियां जरूरी
    औद्योगिक इलाकों के साथ ही भारी ट्रैफिक और ज्यादा वायुप्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। अगर जाना पड़ रहा है तो मास्क लगाकर जाएं। मास्क का यूज तब-तब करें जब घर से बाहर निकलना हो। ध्यान दें कि मास्क अच्छी गुणवत्ता वाला जैसे N95 या उससे बेहतर हो।

    घर के अंदर भी वायुप्रदूषण का रिस्क बढ़ा है। ऐसे में एयर प्यूरीफायर का यूज करें। घर की खिड़कियां, दरवाजे बंद रखें।

    इस दौरान नियमित रूप से जांच करवाने को लेकर अवेयर रहें। समय पर जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें।

20 प्रतिशत गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में
20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आ रही हैं। खून की कमी बीपी, थायराइड और अन्य बीमारियों के साथ ही 35 वर्ष अधिक आयु में शादी करने और प्रदूषण के कारण भी गर्भवतियों में हाई-रिस्क की स्थिति पैदा हो रही है। समय पर जांच कराने से मां और शिशु, दोनों की जान बच सकती हैं।

-डॉ. नसीमा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एम्स भोपाल

MP में चरवाहे बनेंगे वन्यजीवों के संरक्षक, क्षेत्रीय सम्मेलन होंगे आयोजित, ₹22.79 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

भोपाल
 मध्य प्रदेश के जंगलों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए वन विभाग अब एक बेहद जमीनी स्तर का प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर ‘चरवाहा सम्मेलन’ आयोजित किए जाएंगे।

इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को सीधे जागरूक किया जाएगा, जो मवेशी चराने के लिए अक्सर जंगलों के भीतर या संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे।

यह महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित ‘मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति’ की 22वीं बैठक में लिया गया। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड में पारदर्शिता और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए अब हर तीन महीने में यह बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।

22.79 करोड़ से सुधरेंगे जंगल के हालात
बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके रहन-सहन (आवास विकास) को बेहतर बनाने के लिए 22.79 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग इन मुख्य कामों में होगा:

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना: इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान।

ब्लैक बक कैप्चर ऑपरेशन: काले हिरणों के संरक्षण और उनके सुरक्षित रेस्क्यू/स्थानांतरण के लिए विशेष अभियान चलाना।

रिसर्च और क्षमता संवर्धन: वन्यजीवों के व्यवहार पर अध्ययन करना और वन अमले को आधुनिक तकनीकों से लैस करना।

वार्षिक कार्ययोजना मंजूर: इसके साथ ही समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी एनुअल प्लानिंग को भी हरी झंडी दे दी है।

बैठक के दौरान प्रदेश के तमाम टाइगर रिजर्वों (जैसे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि) के संचालकों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट पेश की।

बैठक में वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष एवं अपर पुलिस महानिदेशक सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव भी शामिल हुए। प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के संचालकों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भागीदारी की।

 

MP में 30 जून तक महा-अभियान, रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगा बिना गारंटी ₹15,000 तक का आसान लोन

भोपाल
 सड़कों और फुटपाथों पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों (पथ विक्रेताओं) को डिजीटल, वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि) योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून तक एक विशेष महा-अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत जहां एक ओर जिला मुख्यालयों पर उत्सव का माहौल रहेगा, वहीं दूसरी ओर नगरीय निकायों में ‘सेवाएं आपके द्वार’ की तर्ज पर काम होगा।

बताई जाएंगी प्रेरक कहानियां
ना के सफल लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रेरक सफलता की कहानियों को साझा किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पथ विक्रेताओं को सम्मानित कर अन्य हितग्राहियों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ पहुंचाना है।

प्रदेश में राज्य शासन, नगरीय निकायों और ऋणदाता संस्थाओं के सहयोग से अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिल चुका है।

लोक कल्याण मेलों में मिलेगी वित्तीय और डिजिटल सहायता

नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित लोक कल्याण मेलों के माध्यम से पथ विक्रेताओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें-

– बिना गारंटी के 15 हजार रुपये तक का ऋण

– न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता

– क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी

– डिजिटल लेन-देन के लिए मार्गदर्शन

– बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच

जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

बैंकर्स-वेंडर्स बैठकें और शिकायतों का समाधान
अभियान के दौरान बैंकर्स और पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। वहीं नगरीय निकाय सहायता केंद्रों के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी किया जाएगा।

दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे स्वनिधि कैंप
सेंसस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” आयोजित कर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ा जाएगा। विशेष शिविरों में नए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उनका पंजीयन कराया जाएगा तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र वेंडर योजना के लाभ से वंचित न रहे।

 

भारत में Meta का पहला AI डेटा सेंटर, रिलायंस के साथ साझेदारी, इस शहर में होगी शुरुआत

 नई दिल्ली 

फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा अब भारत में अपना पहला आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) डेटा सेंटर ओपन करने जा रही है. मेटा ने इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप की है और ये डेटा सेंटर गुजरात राज्य के जामनगर में शुरू होगा। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में सेंटर तैयार करेगी, जिसके बाद मेटा इसमें अपना ऑपरेशन शुरू करेगा. मेटा का यह AI डेटा सेंटर भारत के AI मिशन को पावर देने का काम करेगा। 

मेटा और रिलायंस पार्टनरशिप के तहत तैयार होने वाले AI डेटा सेंटर 168 मेगावॉट कैपिसिटी के साथ शुरू होगा. बाद में इसका एक्सपेंशन किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, यह सेंटर आने वाले 2 साल में शुरू होने जा रहा है। .

रिलायंस तैयार कर रही है Meta AI डेटा सेंटर 
रिलायंस इस फैक्टरी को तैयार करेगी, जबकि मेटा अपने AI सिस्टम को सपोर्ट देने के लिए इसका इस्तेमाल करेगी. यह सपोर्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्रोडक्ट में काम करता है. साथ ही यह प्रोजेक्ट मार्क जकरबर्ग की उस बड़ी प्लानिंग को आगे बढ़ाएगा, जिसको वह पर्सनल सुपर इंटेलीजेंस भी कहते हैं। 

मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि यह AI विस्तार में मदद करेगा
मार्क जुकरबर्ग ने जारी एक बयान में कहा है कि उनको गर्व है कि हम रिलायंस के साथ मिलकर भारत में अपना पहला AI डेटा सेंटर बना रहे हैं. जामनगर में तैयार होने वाला यह डेटा सेंटर ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने में मदद करेगा. साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे निवेश को और मजबूत करने में मदद करेगा। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर को सर्विस देगी 
पार्टनरशिप के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर के पूरे लाइफसाइकल के दौरान एंड-टू-एंड सर्विस देगी. इसमें डेटा सेंटर का डिजाइन, डेवलपमेंट, यूटिलिटी मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और पूरी तरह से फुली मैनेज्ड ऑपरेशनल सर्विसेज को शामिल किया गया है। 

रिलायंस अपनी स्थिति को और जमबूत करेगी 
पार्टनरशिप के तहत रिलायंस भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल-विंडो सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में अपनी स्थिति को मजूबत करेगी. ग्राहकों को एक ही कंपनी के जरिए डेटा सेंटर से जुड़ी सभी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 

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