कांग्रेस में बदलाव की आहट! नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज, कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में

रायपुर 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है।

वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।

मालवा-निमाड़ में फसल विविधीकरण का असर, केला-चिया-सीताफल जैसी हाई वैल्यू फसलों से बढ़ रही किसानों की आय

मालवा-निमाड़
लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान

आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर

आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके।

झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान
झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है।

बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि
बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार
खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है।

खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती
खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है।

धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग
धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा
बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके।

उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।

मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।

 

मॉनसून की रफ्तार तेज! 14 राज्यों में पहुंचा, अगले 4 दिनों में बिहार-झारखंड में झमाझम बारिश के आसार

भोपाल 

मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद तेज रफ्तार बरकरार रखी है. वो अब तक 14 राज्यों के पार निकल गया है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अगले 3-4 दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा पहुंच सकता है.दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा। 

बुधवार को भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान जारी किया. अगले 5-7 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है. साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हो सकती है। 

मॉनसून दिल्ली-यूपी कब पहुंचेगा
मॉनसून ने मंगलवार को सभी उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को कवर कर लिया था.भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले सात दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा पहुंच चुका है. मॉनसून दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो में 25 जून तक पहुंच सकता है. जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में मॉनसून जून के अंत तक या जुलाई में पहुंच सकता है। 

दिल्ली, यूपी में कल से झमाझम बारिश
मॉनसून अभी भले ही उत्तर भारत न पहुंचा हो, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गुरुवार से दो दिन बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में गुरुवार से बारिश देखने को मिल सकती है. दिल्ली में बारिश के साथ गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी। 

दिल्ली एनसीआर में पिछले हफ्ते भी दो दिन तेज बारिश देखने को मिली थी. जबकि मंगलवार रात को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई थी. दिल्ली एनसीआर में 11-12 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का अलर्ट है। 

केरल में ऑरेंज अलर्ट
मॉनसून सीजन के पहले हफ्ते में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हो रही है. केरल के अलपुझा और एर्नाकुलम जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. केरल के कोल्लम, पथनमिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मल्लपुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। 

तेलंगाना भी भारी बारिश
तेलंगाना के विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलांबा गडवाल में भी भारी बारिश हो रही है. हालांकि मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की भविष्यवाणी की है, जो मॉनसूनी बारिश के लिए खतरा साबित हो सकता है. बारिश में कमी से जून-जुलाई के दौरान तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। 

पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट राज्यसभा पहुंचे तो बनेंगे सीधे पार्लियामेंट मेंबर

ओरछा 

निवाड़ी जिले के ओरछा कस्बे के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मुहल्ले में रहने वाले महेश केवट के राज्यसभा जाने का रास्ता लगभग साफ है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद यदि कांग्रेस को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार, भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद होंगे।

पत्नी हार गई थी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव
महेश केवट 2000 से लेकर 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। महेश की पत्नी ने ओरछा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

बीजेपी ने कर दिया था निष्कासित,
2022 के नगर परिषद ओरछ़ा के चुनाव में उस समय स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने महेश केवट पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में उन्हें निष्कासित कर दिया था। महेश के साथ उन कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया गया था जिन्होंने भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

महेश के साथ करीब दर्जन भर भाजपाई और पार्टी से बाहर किए गए थे। लेकिन, महेश और निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में महेश केवट के निष्कासन की फाइल निकलवाई तो यहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। महेश ने पार्टी को यह जानकारी दी कि उन्होंने और उनके परिवार के किसी सदस्य ने बागी होकर चुनाव नहीं लड़ा है।

बल्कि सोशल मीडिया में कई ऐसे पत्र वायरल हुए जिनमें महेश के निष्कासन के आदेश में कुछ और नाम जोड़कर उन्हें भी बीजेपी से निष्कासित बताया गया। इसके बाद पार्टी ने अधिकारिक तौर पर 2023 में महेश के निष्कासन को समाप्त करने का आदेश तत्कालीन प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी की तरफ से जारी किया गया।

हरदौल बैठका पर सेवा करता है परिवार
महेश केवट के परिवार के सदस्य ओरछा के फूलबाग में स्थित हरदौल बैठका की सेवा करते हैं। लाला हरदौल बुन्देलखंड के लोकदेवता हैं। महेश के छोटे भाई हरदौल बैठका में आज भी नियमित सेवा कार्य करते हैं। महेश सीमेंट व्यवसायी हैं।

ऐसे बीजेपी की नजर में आए महेश केवट हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के संगठन और सरकार के विभिन्न बोर्ड, निगम मंडलों में नए ऐसे चेहरों को शामिल करने पर मंथन चल रहा था कि ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए जो अब तक किसी अहम जिम्मेदारी पर न रहे हों।

यह भी तय हुआ कि उन जातियों में से नेताओं को छांटा जाए जिन वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बहुत कम रही हो। ऐसे में मल्लाह, केवट, मांझी समाज से शिवपुरी भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजू बाथम और महेश केवट के नाम सामने आए। सीताराम बाथम पहले कई पदों पर रह चुके थे। ऐसे में महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के लिए चुना गया।

जैसे ही महेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने उसके तुरंत बाद उनके विरोधी भाजपाई एक्टिव हुए और उन्हें भाजपा से निष्कासित नेता बताते हुए उनके निष्कासन के आदेशों को सोशल मीडिया पर शेयर कराना शुरु कर दिया।

इसके बाद भोपाल में एक दिन निवाड़ी भाजपा के नेताओं, विधायक, जिलाध्यक्ष सहित चुनिंदा पदाधिकारियों की भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक ली। इस बैठक में तत्कालीन जिलाध्यक्ष अखिलेश अयाची से कहा गया कि आप महेश के निष्कासन के मामले का पटाक्षेप कीजिए। सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी विस्तार से लिखिए। उसके बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने अपने फेसबुक पर सिर्फ लेटर पोस्ट कर दिया।

राज्यसभा के लिए कैसे चुने गए
बीजेपी ने एमपी में बीजेपी के कब्जे वाली दो सीटों पर राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को घोषित किया। रजनीश को वीडी शर्मा की सिफारिश पर उम्मीदवार बताया गया।

इसके बाद सीएम डॉ मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने यह तय किया कि उम्मीदवार सामाजिक जातिगत समीकरणों के हिसाब से उतारा जाएगा। कई नामों पर विचार-मंथन हुआ लेकिन, जब जीत के लिए जरूरी 58 विधायकों के आंकड़े को लेकर टेंशन दिखी तो तय किया गया कि ऐसे केंडिडेट को उतारा जाए जिसकी उम्मीदवारी मात्र से बड़ा संदेश जाए।

यूपी चुनाव में महेश की भूमिका होगी अहम
अगले साल फरवरी- मार्च में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चूंकि ओरछा तीन तरफ से एमपी-यूपी के बॉर्डर पर लगा हुआ है। बुन्देलखंड के मुख्य शहर झांसी की ओरछा से दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। ओरछा में धार्मिक स्थल के साथ ही बडे़ होटल भी हैं। ऐसे में यूपी सरकार और राजनीतिक दलों की बैठकें और नेताओं का आना-जाना होता रहता है।

यूपी की राजनीति में अकेले भाजपा ही नहीं, सपा बसपा में भी केवट निषाद समाज के नेता बडे़ पदों पर रहे हैं। ऐसे में अब महेश केवट का उपयोग पार्टी यूपी के चुनाव में करेगी। झांसी से लेकर पूरे गंगा किनारे केवट समाज में महेश भाजपा के प्रचारक के तौर पर काम करेंगे।

यूपी में केवट समाज की राजनीतिक पकड़ समझिए

सबसे पहले बीजेपी में निषाद समाज का दबदबा देखिए

    डॉ संजय निषाद : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
    साध्वी निरंजन ज्योति: फतेहपुर से लोकसभा सांसद और केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुकी हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं।
    जयप्रकाश निषाद: पूर्वांचल (गोरखपुर क्षेत्र) में भाजपा संगठन के बेहद मजबूत स्तंभ हैं। भाजपा में क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न दायित्वों को संभालने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (मत्स्य एवं पशुधन विभाग) के पद पर रह चुके हैं। वे बीजेपी के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।
    बाबूराम निषाद : बाबूराम निषाद हमीरपुर से जिला अध्यक्ष, भाजयुमो क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष, बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहने के बाद वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।
    भगवान दास निषाद: बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र के पुराने भाजपा नेता हैं। पार्टी संगठन में विभिन्न जिला व क्षेत्रीय पदों पर रहने के साथ-साथ इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के तहत मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) बनाकर समाज के संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया गया था।

अब सपा में समाज की हिस्सेदारी

    रामभुआल निषाद: वर्तमान में समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद हैं और वह पहले बसपा और सपा सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
    राजपाल कश्यप: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी (MLC) हैं। वह सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बहुजन समाज पार्टी

    लालचंद निषाद: बसपा के बहुत पुराने और कद्दावर नेता रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश विधानसभा में पूर्व एमएलसी (MLC) और मायावती सरकार में अति पिछड़ा वर्ग के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।
    हरिप्रकाश निषाद: वर्तमान में बसपा संगठन में गोरखपुर के जिला अध्यक्ष पद पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
    राम प्रसाद निषाद:
बसपा शासनकाल में विभिन्न आयोगों में पूर्व अध्यक्ष/सदस्य और संगठन के मुख्य पदों पर काम कर चुके हैं।

एमपी में चंबल से महाकौशल तक प्रभावी हैं केवट समाज

ग्वालियर-चंबल: मेहगांव, अटेर, लहार, मुरैना, दिमनी, अंबाह, दतिया इन सीटों पर केवट और मल्लाह मतदाताओं की संख्या 15,000 से 25,000 तक है, जो किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकते हैं।

बुंदेलखंड: टीकमगढ़, जतारा, पृथ्वीपुर, खरगापुर, निवाड़ी,चंदला, पन्ना, इस क्षेत्र में रैकवार और केवट समाज के पारंपरिक वोट बैंक का झुकाव बेहद निर्णायक होता है।

विंध्य और महाकौशल: रीवा, सेमरिया, अमरपाटन, मैहर, सिहोरा, जबलपुर उत्तर, पूर्व विधानसभा सीटों पर माझी बर्मन और बिंद समाज चुनावी नतीजों को सीधा प्रभावित करते हैं।

मध्य क्षेत्र: होशंगाबाद, बाबई (सोहागपुर), बुधनी, उदयपुरा नर्मदा किनारे की इन सीटों पर केवट, कहार और ढ़ीमर समाज के वोट निर्णायक माने जाते हैं।

सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा! 8वें वेतन आयोग के फॉर्मूले से ₹53 लाख तक एरियर की चर्चा, लखनऊ में अहम बैठक

नई दिल्ली

भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है।

वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations)
लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट
लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक
लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख

लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है।

अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है।

8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000

8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600

8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520

8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780
लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880

2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर

लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर
11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440
12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360
13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320
14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240

 

ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है।

8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

रूस ने भारत को दिया सस्ते तेल का बड़ा ऑफर, एक के बाद एक डील से बदले ऊर्जा समीकरण

नई दिल्ली

ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है। 

रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है। 

क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा
सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी। 

चीन ने कर द‍िया था मना
चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

छत्तीसगढ़ को 2047 तक विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाना हमारा लक्ष्य : राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा

रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल योजनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सटीक आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति से संभव होगा।

नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आयोजित स्टेट सपोर्ट मिशन (SSM), प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) एवं मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (M&E) यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  मिश्रा ने कहा कि राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ राज्य के दीर्घकालिक विकास का व्यापक रोडमैप है, जिसमें आर्थिक विकास, सुशासन, सामाजिक प्रगति, निवेश संवर्धन और मानव विकास से जुड़े स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और अंजोर विजन-2047 एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का मूल उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को इन लक्ष्यों के अनुरूप क्रियान्वित करना होगा। इस दिशा में राज्य नीति आयोग के अंतर्गत गठित SSM, PIU एवं M&E इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब राज्य का लक्ष्य केवल सूचकांकों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाना है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, महिला श्रम भागीदारी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाना हमारी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग के साथ कार्य कर रही विशेषज्ञ टीमों को विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर KPI आधारित समीक्षा, नीति विश्लेषण, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा साक्ष्य आधारित सुझावों के माध्यम से विकास की गति को और तेज करना होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से नवाचार, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का आह्वान किया।

उपाध्यक्ष  मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और राज्य नीति आयोग के संयुक्त प्रयासों से अंजोर विजन-2047 के लक्ष्य निर्धारित समयावधि में प्राप्त किए जा सकेंगे तथा छत्तीसगढ़ समावेशी, सतत और विकसित राज्य के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जब छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हुआ। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसमें बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की बात कही गई थी।  मिश्रा ने कहा कि बस्तर संभाग राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और ‘‘बस्तर अंजोर’’ पहल के तहत सात प्रमुख नवाचारों के माध्यम से क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को मूर्त रूप दिया जाएगा। इससे बस्तर विकास, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

इस दौरान राज्य नीति आयोग के सदस्य सचिव  आशीष कुमार भट्ट, सदस्य डॉ के सुब्रह्मण्यम सहित यूएनडीपी के विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे।

शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

रायपुर

छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
            
अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार  महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।
           
जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय  बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर  हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक  एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर  विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर  रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।
         
स्कूल शिक्षा  गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।

सीधी के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल दम्पति एवं दो बच्चों को त्वरित सहायता पहुँचाकर अस्पताल में भर्ती कराया

भोपाल 

सीधी जिले के थाना चुरहट क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक दम्पति एवं उनके दो बच्चों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायलों को समय रहते चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी।

10 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चुरहट क्षेत्र अंतर्गत बड़खरा में मोटर साइकिल से गिरने के कारण एक दम्पति एवं दो बच्चे घायल हो गए हैं तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल थाना चुरहट क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजय साकेत एवं पायलट  वेंकटेश्वर मिश्रा ने  मौके पर पहुँचकर पाया कि मोटर साइकिल दुर्घटना में एक दम्पति एवं दो बच्चे घायल हो गए थे। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित एफआरव्ही वाहन की सहायता से शासकीय चिकित्सालय, चुरहट पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया से घायलों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की स्थिति में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, तत्परता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की सहायता कर रहे हैं।

 

इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर छापा

इंदौर

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल पर लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कंडवाल के ठिकानों पर छापा मारते हुए 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार से ज्यादा की संपत्ति निकाली है। 30 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान उनकी कुल वैध आय लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।

एसपी (लोकायुक्त) डॉ. राजेश सहाय के अनुसार कार्रवाई गुप्त शिकायत के बाद हुई है। पुलिस ने लक्ष्मी नारायण के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर सुबह करीब 6 बजे आनंद विहार कालोनी (स्कीम-103) में छापा मारा। पांच मंजिला इस भवन में कंडवाल का सुपर मार्केट, जिम भी संचालित हो रहा था। इस संपत्ति की कीमत 2 करोड़ 66 लाख से ज्यादा बताई गई है। सुपर मार्केट उनका बेटा पवन और अभिषेक चलाते हैं जबकि जिम 1 लाख 15 हजार रुपये प्रति माह किराये पर दे रखी है।

ठिकानों से मिली अचल संपत्तियों और भूखंडों का ब्यौरा

  •     ग्राम सोनवाय में 664170 रुपये कीमती 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि
  •     ग्राम तारपुरा (धार) में 9,36,655 रुपये कीमत की सर्वे क्रमांक 33 रकबा 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि
  •     भूखण्ड क्रमांक 149-सी, आनंद विहार कालोनी (स्कीम नम्बर-103) में भूखंड (सी-149) मिला है। इस पर जी 3 करीब 13560 वर्गफीट भवन निर्माण है। इसकी अनुमानित कीमत 2,66,57,450 रुपये है।
  •     इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम-140 स्थित भूखण्ड क्रमांक- 220 (54 वर्गमीटर) मिला है। उसकी कीमत 21,90,806 रुपये है।
  •     इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक- 140 के सेक्टर ए में टाईप एम का भूखण्ड (378) मिला है। इसकी कीमत 15,34,572 रुपये है।
  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 12,26,118 रुपये है।

धार और पीथमपुर में मिली करोड़ों की कृषि भूमि

  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 1.176 हेक्टेयर कृषि भूमि मिली है। इसकी कीमत 22,71,327 रुपये बताई है।
  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 2.100 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 40,55,940 रुपये है।
  •     ग्राम तारपुरा सागौर (धार) में 2.195 कृषि भूमि है। इसकी कीमत 1,53,15,350 रुपये है।
  •     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 0.345 हेक्टेयर एवं 0.606 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 67,27,239 रुपये है।
  •     ग्राम बेकल्या पीथमपुर (धार) में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 11,94,185 रुपये है।
  •     Gram बेकल्या पीथमपुर (धार) में 2.435 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 2,28,97,007 है।
  •     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 1.212 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 25,00,000 रुपये है।

बैंक लॉकर से मिला सोना, मिली 287.7% अनुपातहीन संपत्ति

कुल अचल संपत्ति में 9,76,15,004 रुपये व्यय किया गया है। सांठा बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया में लॉकर मिला है। उसमें 1.89 ग्राम सोना मिला है। एसपी के अनुसार आरोपित की 30 साल की नौकरी में कुल आय 2,80,00,000 रुपये है जबकि सर्चिंग में 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये की संपत्ति मिली है। उक्त संपत्ति 287.7 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति मिली है।

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