मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, राघव चड्ढा की एंट्री की अटकलें, दो मंत्रियों पर सस्पेंस

 नई दिल्ली

राज्यसभा चुनाव परिणाम से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अब तक NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। कहा जा रहा है कि इस दौरान टीम मोदी से कई मंत्री बाहर जा सकते हैं और संगठन में पद संभाल सकते हैं। वहीं, चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों की भी एंट्री हो सकती है।

राघव चड्ढा के नाम की अटकलें
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी खासी सक्रिय नजर आ रही है। इसके साथ ही अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि कैबिनेट में पंजाब के चेहरों को शामिल किया जा सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट से महासचिव तरुण चुघ को मैदान में उतारा है। उनके अलावा पूर्व कांग्रेस नेता और राज्य में भाजपा की कमान संभाल चुके सुनील जाखड़ के नाम की भी अटकलें हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा को भी कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर चड्ढा या पार्टी नेता की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। दरअसल, पंजाब से आने वाले नेता रवनीत सिंह बिट्टू को इस बार भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में पंजाब के कई नए चेहरों के मंत्री परिषद में आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

2 मंत्रियों का कट सकता है टिकट
 रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि 2 मंत्री बाहर किए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि इनमें किन नेताओं नाम शामिल है और इसे लेकर आधिकारिक रूप से भी कुछ नहीं बताया गया है। खास बात है कि भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों को टिकट नहीं दिया है। इनमें बिट्टू के अलावा जॉर्ज कुरियन का नाम भी शामिल है।

दक्षिण भारतीय राज्य की किसे मिलेगी कमान
रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल में 10 से 12 मंत्री शामिल या बदले जा सकते हैं। कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। इसके अलावा कहा जा रहा है कि भाजपा किसी कैबिनेट मंत्री को कर्नाटक इकाई का प्रमुख भी बना सकती है। हालांकि, नाम अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल, पार्टी के कर्नाटक प्रमुख बीवाई विजयेंद्र हैं।

याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव चड्डा
मई में चड्ढा को उच्च सदन की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की तरफ से समिति को दोबारा बनाया गया था और 10 सदस्यों को नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी अन्य सदस्य हैं।

छत्तीसगढ़ की ‘सुपर गर्ल’ चारू पांडेय का कमाल, SSC से बैंक-रेलवे तक 19 सरकारी नौकरियों में सफलता

रायपुर 
किसी ने क्या खूब कहा है कि “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”. इस पंक्ति को छत्तीसगढ़ की एक होनहार बेटी चारू पांडे ने अपने जुनून से सच साबित कर दिया है. महज 23 साल की उम्र में चारू ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों एस्पिरेंट्स देखते हैं. उन्होंने SSC, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस समेत कुल 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी। 

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही रणनीति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
चारू पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिल्दा-नेवरा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से मैथमेटिक्स में बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू कर दी थी. चारू फिलहाल चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी उपलब्धियों की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है। 

किन परीक्षाओं में हासिल की सफलता
चारू ने SSC की कई प्रमुख परीक्षाएं जैसे SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD और SSC CPO को पास किया है. इसके अलावा उन्होंने IBPS PO, IBPS Clerk, SBI PO और SBI Clerk जैसी बैंकिंग परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की. रेलवे भर्ती बोर्ड की NTPC और ग्रुप-D परीक्षाएं भी उन्होंने पास कीं. वहीं पुलिस सेवाओं में दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर और ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता का परचम लहराया. इसके अलावा CG NHM सहित कई दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। 

असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
चारू का सफर आसान नहीं था. शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. कई परीक्षाओं में चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और लगातार सुधार किया. चारू का मानना है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है. यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। 

सफलता का मंत्र क्या है?
चारू बताती हैं कि उनकी तैयारी का आधार सब्जेक्ट वाइज रणनीति, रेग्युलर मॉक टेस्ट और लगातार सेल्फ-इवैल्यूएशन रहा. वह हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों को एनालाइज करती थीं और अगली परीक्षा में उन्हें सुधारने की कोशिश करती थीं. उनका कहना है कि अगर छात्र लक्ष्य तय करें, समय को सही से मैनेज करें और लगातार मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है। 

चारू पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां मायने नहीं रखतीं. छोटे शहर की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए उम्मीद, संघर्ष और सफलता का प्रतीक बन चुकी है. उनकी उपलब्धि न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 

डंकुनी–सूरत कॉरिडोर का असर: दुर्ग के 25 गांवों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगी रोक

दुर्ग.

जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ( डंकुनी – सूरत) परियोजना के निर्माण हेतु तहसील दुर्ग एवं पाटन के ग्रामों की भूमि पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध संबंधी आदेश में संशोधन किया गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में जारी आदेश की कंडिका-4 में उल्लेखित ग्रामों के स्थान पर संशोधित ग्रामों की सूची प्रभावशील होगी।

संशोधित आदेश के तहत दुर्ग तहसील के ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई एवं डुमरडीह, पाटन तहसील के ग्राम परेवाडीह, पहडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह एवं बटंग तथा भिलाई-3 तहसील के ग्राम सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा एवं उरला सहित कुल 25 ग्रामों को आदेश में शामिल किया गया है।

इन ग्रामों की निजी भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी- बिक्री पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा तथा परियोजना के पारदर्शी एवं सुचारू क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। आदेश की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत प्रभावी रहेंगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक पर बड़ी कार्रवाई, छापे में 9.5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

इंदौर
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया।अधिकारी को अब तक के अपने सेवाकाल में वेतन से ढाई करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन छापे में साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है। उन्होंने अपनी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। 

छापे में स्कीम-103 में एक तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट भी मिले। 30 वर्षों के सेवाकाल में वे अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। फिलहाल वे इंदौर में पदस्थ थे। कंडवाल के पास पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के तारापुर, बेकलाय और बनेड़िया में 11 प्लॉट भी मिले हैं।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने बताया कि शिकायत मिलने पर बुधवार सुबह छापे की योजना बनाई गई थी। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया गया। मकान, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर पर टीमों ने छापा मारकर कथित काली कमाई से जुटाई गई संपत्ति का पता लगाया। कंडवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।लक्ष्मीनारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर वर्ष 1996 से पदस्थ हैं। अब विभाग उनके निलंबन की कार्रवाई कर सकता है।

बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम खरीदी जमीनें
संयुक्त संचालक कंडारिया ने काली कमाई का पैसा पत्नी, बेटों, पुत्रवधु और रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें खरीदने में लगाया। इंदौर के समीप सोनवाय गांव में 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपये है। इसके अलावा पीथमपुर के समीप 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा स्कीम-103 में भूखंड क्रमांक 149-सी खरीदा और उस पर जी+3 का 13 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण कराया।

इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140 स्थित भूखंड क्रमांक 220 ए.एम. को 21 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140, सेक्टर ए-टाइप में भूखंड क्रमांक 378 भी 15 लाख रुपये में खरीदा।

ग्राम बनेडिया, जिला धार में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। तारपुरा, तहसील सागौर, जिला धार में 2.195 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी। ग्राम बेकल्या, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। आरोपी ने ज्यादातर पैसा संपत्ति खरीदने में ही लगाया।

इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसे गुरुवार को खोला जाएगा।

पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना
कंडारिया की पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना हुई थी और लोकायुक्त का छापा पड़ गया। उनका परिवार इंदौर में ही रहता था और ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। कंडारिया झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास में भी पदस्थ रहे।

जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर भी खोला
छापे के दौरान अधिकारियों को दो मंजिला आलीशान जिम भी मिला, जिसमें आधुनिक मशीनें हैं। इसके अलावा एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला, जिसका संचालन कंडारिया के परिवार के सदस्य करते हैं।

 

कंबोडिया में एक्टिव मिले 36 हजार भारतीय SIM, साइबर ठगी में 5,300 कार्ड के इस्तेमाल का खुलासा

जोधपुर/ लुधियाना

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ छापेमारी की है.  यह कार्रवाई जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना सहित कुल 7 ठिकानों पर की गई.  जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी और दुरुपयोग किए गए सिम कार्डों के जरिए भारत में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था, जिसमें स्थानीय सिम वेंडरों ने आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों सिम बिना उनकी जानकारी के एक्टिवेट किए। जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों भारतीय सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे।

भारत के लोगों से करते थे ठगी 
जांच में सामने आया कि राजस्थान के सिम विक्रेताओं ने आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 36 हजार फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए, जिन्हें मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजकर देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी. लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें कई नंबर साइबर फ्रॉड गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले. यह सिम कार्ड पहले भारत से मलेशिया भेजे जाते थे, और वहां से इन्हें कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था, जहां से भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी की जाती थी। 

5300 सिम भारत में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल
इनमें से करीब 5300 सिम कार्ड सीधे तौर पर भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार इन नंबरों के जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया।ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की।

5 जून को शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर के साथ पंजाब के लुधियाना में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान ईडी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मलेशियाई नागरिकों के जरिए भेजी जाती थीं सिम
ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आईडी का उपयोग कर लोगों को नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के बहाने बुलाते थे।कम पढ़े-लिखे और जागरूकता की कमी वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था।

पुलिस अधिकारी बनकर करते थे कॉल  
पूरे रैकेट में ठगी का तरीका बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करते थे. मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी, और शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे. कॉल के लिए भारतीय (+91) नंबरों का इस्तेमाल होने से पीड़ित इसे भरोसेमंद समझकर जाल में फंस जाते थे. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए हवाला और क्रिप्टो चैनलों से विदेश भेज दी जाती थी। 

मलेशिया के एजेंटों को सप्लाई किया 
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ POS सिम वेंडरों और एजेंटों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा था, जिन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए और उन्हें कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सप्लाई किया. छापेमारी के दौरान कई बैंक खातों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान हुई है, जबकि कई चल और अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं.  एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है और मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना है। 

मीनाक्षी नटराजन की राह में कांग्रेस के भीतर ही रोड़े? राज्यसभा सीट को लेकर बड़े दावे ने बढ़ाई हलचल

भोपाल 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यसभा चुनाव में ‘सीट चोरी’ के आरोपों को नकारते हुए बुधवार को दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का ‘खेल बिगाड़ने’ का काम उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने किया, क्योंकि उनमें से कई की नजर उस सीट पर थी। राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।

अधूरा हलफनामा
राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत की शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था।

भाजपा उम्मीदवार ने की थी शिकायत
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है।

कांग्रेस ने लगाए सीट चोरी के आरोप
कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ‘वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ‘सीट चोरी’ का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है।

सीएम मोहन यादव के आरोप
मुख्यमंत्री यादव ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ‘जानबूझकर’ और ‘षडयंत्रपूर्वक’ नटराजन के फॉर्म में गलतियां कीं। उन्होंने दावा किया, ‘इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी। जब सीट नहीं मिली तो नटराजन का खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने ही कर दिया।’ यादव ने कहा कि पंच और सरपंच के चुनाव तक में आपराधिक ब्योरा देना होता है और जब 10 से अधिक बार से चुनाव लड़ चुके लोग राज्यसभा जैसे प्रतिष्ठित चुनाव में ऐसी गलतियां करते हैं तो यह अनायास नहीं है। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया ‘षडयंत्र’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को ‘आत्मावलोकन’ करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में हराकर भाजपा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ठीक से अपने प्रत्याशी का फार्म नहीं भर सकती, विधायकों को एकजुट नहीं रख सकती और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकती तो इसमें भाजपा क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी गलतियां देखनी चाहिए और प्रत्याशी घोषित करने से पहले कम से कम उसकी पृष्ठभूमि जांच लेनी चाहिए।

इससे पहले, राज्य सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को दावा किया था नटराजन मामले में तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं ने ही जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए थे।

EC से होगी मीनाक्षी के नॉमिनेशन खारिज की शिकायत
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल थोड़ी ही देर में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा।

प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं।

मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में अनियमितताएं पाए जाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर धरना दिया था।

भाजपा का आरोप था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद कोर्ट के एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई। नटराजन का नामांकन खारिज होने को कांग्रेस ने “लोकतंत्र की हत्या” और “सीट चोरी” बताया।इधर, भोपाल में कांग्रेस के कार्यकर्ता बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) दफ्तर पहुंचे। गेट बंद मिलने पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गणवेश दफ्तर के बाहर गेट पर टांग दी और लौट गए।

कहां से मिले दस्तावेज
नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, ‘जहां तक हमें मिले दस्तावेजों का सवाल है, उन्हें हमें किसने दिया? आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस किस राज्य में है? मुद्दा यह है कि हमें तेलंगाना से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। एक ऐसा राज्य… जहां वे सत्ता में हैं। हमारे पास खुद कोई जानकारी नहीं थी। यह कांग्रेस के सदस्य होंगे जिन्होंने इसे हमें प्रदान किया होगा।’

राज्य में राज्यसभा की तीन खाली सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा के लिए, दो सीटें जीतना तय था लेकिन नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट भी उसके खाते में जाती दिख रही है। भाजपा ने अपने महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट के लिए मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केवट पर दांव लगाया है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका

रायपुर, 
 राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति तथा वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

           राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर देते हुए संबंधित समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने तथा उनके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

          राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास सुविधा, विद्यालयीन अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े विषयों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

पॉलीटेक्निक एडमिशन 2026: कल से शुरू होगी ऑनलाइन काउंसलिंग, 16 जून को आएगी मेरिट लिस्ट

दुर्ग.

प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी पॉलीटेक्निक कॉलेजों के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, सीडीडीएम/ आईडी, एमओएम / एचएमसीटी और लैटरल एंट्री) में प्रवेश के लिए राज्य- स्तरीय ऑनलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

जारी शेड्यूल के अनुसार, प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन 11 जून (पूर्वान्ह 10 बजे ) से 15 जून (रात्रि 11.59 बजे तक होगा। इसके ठीक बाद 16 जून को मेरिट सूची जारी होगी, जिस पर 17 जून तक दावा-आपत्ति की जा सकेगी। दावा-आपत्ति के निराकरण के पश्चात प्रथम चरण का सीट आवंटन 19 जून को किया जाएगा, जिसके तहत चयनित छात्रों को 20 से 24 जून के बीच आवंटित संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश लेना होगा।

यदि प्रथम चरण के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं. तो द्वितीय चरण की काउंसलिंग 26 से 30 जून तक चलेगी, जिसका आबंटन 3 जुलाई और प्रवेश प्रक्रिया 4 से 9 जुलाई तक पूरी की जाएगी। इसके बाद भी सीटें खाली रहने की स्थिति में 11 से 16 जुलाई तक संस्था स्तर ( कॉलेज लेवल) की काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन पंजीयन खोला जाएगा। इसके तहत छात्रों को 18 जुलाई को पूर्वान्ह 10.00 बजे संबंधित कॉलेज में दस्तावेज सत्यापन और आबंटन हेतु उपस्थित होना अनिवार्य होगा, जिसके पश्चात संस्था द्वारा आबंटित सीटों पर प्रवेश की कार्यवाही इसी दिन दोपहर 1 बजे से शुरू कर दी जाएगी।

काउंसलिंग से जुड़ी इस पूरी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्रों की सुविधा के लिए रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों में भी सभी सुविधा केंद्र और संबंधित कॉलेज खुले रहेंगे। इस संबंध में विस्तृत जानकारी व नियमों के लिए अभ्यर्थी विभागीय काउंसलिंग पोर्टल अवलोकन कर सकते हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अभ्यर्थी संचालनालय के हेल्पलाइन नंबर 0771-2221376 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वैवाहिक वर्षगांठ पर दी बधाई

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वैवाहिक वर्षगांठ पर दी बधाई

रायपुर 
 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह को उनकी 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी । मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. रमन सिंह एवं श्रीमती वीणा सिंह के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय दाम्पत्य जीवन की मंगलकामना की है।

पेड़ों की सुरक्षा और संवर्धन पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता – राज्यपाल डेका

पेड़ों की सुरक्षा और संवर्धन पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता – राज्यपाल डेका

रायपुर
राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त सम्बित मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त  मणिवासगन एस तथा रायपुर वन मंडल के डीएफओ लोकनाथ पटेल ने मुलाकात की । इस दौरान राज्यपाल ने शहर और नया रायपुर में लगाए गए वृक्षों के संरक्षण एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया है।

         राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही वृक्षों की कटाई की अनुमति दी जाए। राज्यपाल ने शहर में बड़े वृक्षों के पास से ट्री गार्ड हटाने तथा जहां वृक्षारोपण किया गया है, वहां पेड़ों के चारों ओर बने कंक्रीट ढांचे को हटाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेड़ों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में पानी और हवा पहुंचना जरूरी है, तभी उनका समुचित विकास हो सकेगा।

         राज्यपाल डेका ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे हैं। वृक्षारोपण के बाद उनकी देखभाल पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, जो भी पौधे लगाए जाएं, उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। राज्यपाल ने अधिकारियों से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने को कहा है।

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