भारत के आमों पर नेपाल की रोक से मचा हड़कंप, बाजार में बढ़ी चिंता, महंगाई का खतरा गहराया

काठमांडू 

भारत के साथ तल्खी के बीच नेपाल ने एक और बड़ा फैसला लिया है। खबर है कि पड़ोसी मुल्क ने भारतीय आमों की देश में एंट्री पर रोक लगा दी है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इसकी वजह कीटनाशक हैं। वहीं, एक और कारण स्थानीय फलों को प्रोत्साहित करना भी माना जा रहा है। नेपाल सरकार के इस फैसले से बाजार में व्यापारी सप्लाई में आ रही परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

क्यों लगा दी रोक
पीटीआई भाषा के अनुसार, कथित रूप से अत्यधिक कीटनाशक पाए जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘क्वारंटीन’ सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए भारत से किए जाने वाले आम के आयात पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने ऐसे आमों के आयात पर अंकुश लगाया है जिनमें कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई और इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में पर्याप्त ‘क्वारंटीन’ सुविधाओं की कमी भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण है।

नेपाल के बाजार की हालत टाइट
राइजिंग नेपाल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आमों पर रोक के बाद जनकपुरधाम के बाजारों में घरेलू स्तर पर उगाए गए आमों से भरे हुए हैं। वहीं, कई फल विक्रेताओं का कहना है कि इस फैसले के चलते वह सप्लाई और बिजनेस को लेकर काफी परेशान हैं। इस रोक के चलते नेपाल के स्थानीय बाजारों में घरेलू स्तर पर उत्पादित आम की उपलब्धता बढ़ गई है। गर्मी के मौसम में आम की मांग आमतौर पर काफी अधिक रहती है।

क्या बोले व्यापारी
नेपाल की वेबसाइट से बातचीत में व्यापारियों ने बताया है कि घरेलू उत्पाद को बढ़ाना देना सही है, लेकिन लंबी रणनीति के बगैर रोक लगाने के चलते व्यापार में मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं। खास बात है कि नेपाली आमों का उत्पादन सिर्फ करीब दो महीनों तक रहता है, जिसके चलते भारतीय आयात मुल्क की आम की जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम है।

बाजार में हो सकती है कमी
जनकपुरधाम के फल और सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्बे ने वेबसाइट को बताया कि गर्मियों में आम की मांग बहुत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय आयात पर रोक से बाजार में कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सप्तरी, सिराहा, महोत्तरी, धनुषा और सर्लाही जैसे जिलों से रोजाना 50 टन से ज्यादा आम जनकपुरधाम पहुंच रहा है, लेकिन सिर्फ स्थानीय पैदावार से पूरे बाजार की मांग को पूरा करना मुश्किल होगा।

उन्होंने कहा है कि आयात पर पूरी तरह बैन लगाने के बजाए सरकार को क्वारंटीन सिस्टम को मजबूत करना चाहिए। साथ ही सुझाव दिया कि भारतीय फलों को क्वालिटी टेस्टिंग के बाद भारतीय फलों को आने की अनुमति देनी चाहिए।

केले के मामले में लग चुकी है चोट
उन्होंने बताया कि भारतीय केले सस्ते होते हैं, लेकिन सप्लाई में रोक आने के बाद कीमतें बढ़ गईं हैं। अब जब सर्दियों में घरेलू उत्पादन कम हो जाता है, तो व्यापारी भारतीय केले के आयात पर निर्भर होते हैं। व्यापारियों ने चेतावनी भी दी है कि अगर रोक लंबे समय तक जारी रहती है, तो ग्राहकों को ज्यादा दाम चुकाने होंगे और कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

जापान ने भी लगाई है रोक
जापान सरकार ने कीट नियंत्रण में कमी और ‘वेपर हीट ट्रीटमेंट’ (VHT) मानकों पर खरा न उतरने का हवाला देते हुए 25 मार्च 2026 के बाद जारी सर्टिफिकेट वाली खेप पर रोक लगा दी है। करीब दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद जापान ने ये कदम उठाया है। भारत के अमरोहा जिले से लगभग 12 हजार हेक्टेयर में फैले आम के बागों से हर साल भारी मात्रा में फल खाड़ी देशों, अमेरिका, जापान और यूरोप को निर्यात किया जाता है।

स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि जापान की यह कार्रवाई एक चेतावनी की तरह है, जिससे निपटने के लिए अब कीट नियंत्रण और पैकेजिंग के वैश्विक मानकों पर और अधिक गंभीरता से ध्यान देना होगा।

US Attacks Iran: अपाचे हेलिकॉप्टर गिरने के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान पर हमला, होर्मुज में बढ़ा तनाव

वाशिंगटन

ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आग एक बार फिर भड़क गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने होर्मुज को बदलापुर बना दिया है. जिस बात के लिए डोनाल्ड ट्रंप इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बार-बार रोक रहे थे. अपाचे हेलीकॉप्टर के गिरने के बाद खुद वो गलती कर बैठे. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर ताबड़तोड़ अटैक कर दिया है. अमेरिका का ईरान पर यह अटैक सीजफायर के बीच हुआ है. होर्मुज के पास गिराए गए अपाचे हेलीकॉप्टर का ट्रंप ने ईरान पर अटैक करके जवाब दिया है. हालांकि, तेहरान ने भी बदला लेने की कसम खाई है. इसका मतलब है कि युद्ध की आग अब और भड़कने वाली है। 

दरअसल, मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया है. यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया था. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान का हाथ था, जबकि तेहरान इस आरोप से इनकार कर रहा है. इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिका ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकन अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर गिराए जाने के कुछ घंटों बाद ईरान पर हमला किया। 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले को सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक बताया है. उसने कहा कि ईरान पर यह ताजा हमला ट्रंप के ऑर्डर पर वाशिंगटन टाइम के हिसाब से शाम 5 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरानी हमले का प्रोपोर्शनल जवाब देना था. यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने ईरान पर अपाचे को मार गिराने का आरोप लगाया और कसम खाई कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका इस हमले का जवाब देगा। 

 ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान पर अमेरिकी हमले शुरू; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

बहरहाल, इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक… हर क्षेत्र पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है. आइए जानते हैं इस पूरे मामले के कुछ बड़े अपडेट्स.

ट्रंप ने दिया सैन्य कार्रवाई का आदेश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी के बाद ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को मंजूरी दी गई. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। 

अपाचे हेलिकॉप्टर घटना बनी बड़ी वजह: दरअसल, अमेरिका का ईरान पर यह अटैक अपाचे के गिराए जाने का बदला है. ईरान पर आरोप है कि उसने अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया है. इससे ट्रंप भड़क उठे. उन्होंने अपाचे का बदला लेने के लिए ही ईरान पर अटैक करवाया. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान या उससे जुड़े समूहों की भूमिका थी. कुल मिलाकर अपाचे वाली घटना ही नई जंग की वजह बनी। 

ईरान के कई ठिकाने निशाने पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए. अमेरिका ने अब्बास समेत 3 ईरानी ठिकानों पर एक साथ हमला किया. इसके बाद तो ईरान में हर तरफ धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी। 

तेहरान में बढ़ी हलचल: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सैन्य ठिकानों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. लोगों में खौफ का मंजर है. गौरतलब है कि अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल के साथ मिलकर अटैक किया था। 

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों पर ईरान ने भी पलटवार की कसम खाई है. ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी तो पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं. इस बीच तेहरान ने भी पलटवार किया है. उसने भी कुछ मिसाइलें दागी हैं। 

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा: मिडिल ईस्ट का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जंग का अखाड़ा बन गया है. अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला बोल दिया है. इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ गया है. यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। 

बेंजामिन नेतन्याहू को रोक खुद गलती कर रहे ट्रंप: डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही इजरायल को ईरान के खिलाफ नई जंग नहीं छेड़ने के लिए चेताया था. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर इजरायल ईरान पर अटैक करता है तो वह उसे अकेले जंग लड़नी पड़ेगी. मगर अपाचे के गिरने के बाद ट्रंप खुद आपा खो बैठे और ईरान पर अटैक कर दिया। 

होर्मुज में फिर मचेगा हाहाकार: ईरान जंग पर अमेरिका अब तक शांत था. वह किसी तरह सीजफायर को मान रहा था और ईरान से डील चाहता था. मगर अपाचे के गिरने से ट्रंप का सब्र जवाब दे गया. भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अटैक करके नई जंग छेड़ दी है. इसका मतलब है कि होर्मुज में अब और हड़कंप मचेगा. इससे तेल और गैस की चिंता और बढ़ जाएगी। 

TMC को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से दिया इस्तीफा, बढ़ी सियासी हलचल

कोलकत्ता 

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद झटका पर झटका लग रहा है. कुछ दिन पहले वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसदी छोड़ दी थी और अब सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि राज्य चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक भी विरोधी गुट बना चुके हैं।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं का सामना कर रही है. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. सुष्मिता देव लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। 

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कल ही सोनिया गांधी से मुलाकात की है. ममता पार्टी में टूट रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी हुई हैं लेकिन एक-एक करके उनके साथी साथ छोड़ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 का समर्थन हासिल है. गौरतलब है कि दलबदल कानून से बचने के लिए विरोधी गुट को 19 सांसदों की जरूरत है। 

गौरतलब है कि सुष्मिता देव एक वक्त पूर्व सीएम ममता बनर्जी की बेहद खास हुआ करती थीं. लेकिन अब सुष्मिता देब ने अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया है. राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्ण को लिखे पत्र में सुष्मिता देव ने कहा है कि मैं राज्यसभा की सदस्य पद से इस्तीफा देता हूं. आपसे इसे तुरंत स्वीकार करने का आग्रह करती हूं। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। उनका यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाएं लगातार चर्चा में हैं।

सुष्मिता देव टीएमसी के उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता था। वह कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं और तब से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

टीएमसी की चुनौतियों क्या कहा था

हाल ही में बातचीत में देव ने टीएमसी के मौजूदा हालात पर चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था, ‘अच्छी खबर यह है कि ऐसा ही हमने दूसरे राज्यों में भी देखा है। इसकी वजह साफ है कि हमारे विधायकों और कैडर पर बहुत दबाव है…। जमीन पर यह पता चला है कि पुलिस और प्रशासन की तरफ से जबरदस्त दबाव है कि टीएमसी को छोड़ दें या परिणामों के लिए तैयार रहें। यह सच्चाई है। मुझे लगता है कि अगर हिंदी में कहें तो दूध का दूध और पानी का पानी होगा। मुझे लगता है कि यह हमें और मजबूत बनाएगा और आने वाले सालों के लिए तैयार करेगा।’

उन्होंने कहा था, ‘…ममता दी की ताकत उनकी जनता है, ममता दी की ताकत ईमानदारी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है, हमारे बारे में क्या नारे लगाए जा रहे हैं। ममता दी में हालात बदलने की क्षमता है। यह चुनौती है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं और यह कुछ समय की ही बात है।’

सुखेंदु शेखर रे ने लगाए थे गंभीर आरोप
रे ने इस्तीफा देने के बाद एक पत्र में लिखा था कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्ष से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा , शिक्षा, स्वास्थ्य , उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहने पर सत्ता से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा था, ‘मैं लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले को विनम्रता से स्वीकार करता हूं तथा तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।’

दुर्ग में युवती की मौत पर बड़ा एक्शन, सिविल सर्जन समेत 9 कर्मचारियों को जारी हुआ नोटिस

दुर्ग.

जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में सिविल सर्जन सहित 9 कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें 3 डॉक्टर, 3 नर्स तथा 2 लैब टेक्नीशियन शामिल है।

दरअसल, दीपिका की मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित की थी। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल किए गए। जांच टीम के दोनों सदस्य चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी-बारी से बयान लिए। इसके अलावा मृतिका के परिजनों के भी बयान दर्ज किए। सभी के बयान पूरा होने के बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया और रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर ही नोटिस जारी किया गया है। इन्हें दो दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है।

परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में कोई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। यही वजह है कि ब्लड बैंक के 2 टेक्नीशियन को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, जिन तीन चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उनमें डॉ. शमी, डॉ. तृप्ति तथा डॉ. निखिल अग्रवाल शामिल है। दीपिका के भर्ती के समय कैजुवल्टी में मौजूद नर्स पर लापरवाही बरतने आरोप लगा था। इस वजह से 3 नर्स से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। पूरे मामले में ठीक ढंग से व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर सिविल सर्जन डॉ. आशीषन को भी नोटिस थमाया गया है।

खरीफ सीजन 2026: किसानों के लिए पर्याप्त खाद का इंतजाम, जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क

बिलासपुर.

खरीफ सीजन 2026 में किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए जिला प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है. प्रशासन ने बताया कि किसानों को खाद की कमी नहीं होगी, 49,772 टन से अधिक उर्वरक का भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत अधिक है.

खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक करीब 64.98 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है. प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में उर्वरक उपलब्धता में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस वर्ष अब तक 26,131.71 टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 56.6 प्रतिशत अधिक है. भंडारित उर्वरक का 58.33 प्रतिशत हिस्सा किसानों तक पहुंच चुका है.

सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से लगातार खाद वितरण किया जा रहा है. हालांकि कई किसान अभी भी पर्याप्त खाद नहीं मिलने की आशंका जताते हुए खेती और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता व्यक्त कर रहे हैं.

NEET UG Re-Exam 2026: बिलासपुर में तैयारियां तेज, कलेक्टर-SSP ने अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक

बिलासपुर.

नीट यूजी-2026 की 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारियों को लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी ने समीक्षा बैठक की. बैठक में परीक्षा केंद्राध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया. जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी.

प्रशासन ने परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. मानसून को देखते हुए अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए सभी केंद्रों पर वाटरप्रूफ शेड बनाए जाएंगे. प्रवेश द्वारों और परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर भी बारिश से बचाव की व्यवस्था रहेगी.

इसके अलावा जल निकासी, वैकल्पिक बिजली व्यवस्था और आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी रहेगी तथा प्रश्नपत्र और OMR शीट की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे. किसी भी संवेदनशील गतिविधि पर नजर रखने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा.

PWD में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, ENC केपीएस राणा का तबादला, आरएल वर्मा को मिला अतिरिक्त प्रभार

भोपाल 
मध्य प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रभारी प्रमुख अभियंता (ईएनसी) स्तर पर तबादला आदेश जारी किया है। विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता केपीएस राणा को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भेजा गया है, जबकि आरएल वर्मा को पीडब्ल्यूडी के प्रभारी प्रमुख अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केपीएस राणा, जो वर्तमान में भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता के पद पर कार्यरत थे, उन्हें आगामी आदेश तक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी), भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता के पद पर पदस्थ किया गया है।  वहीं, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, जबलपुर परिक्षेत्र आरएल वर्मा को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक लोक निर्माण विभाग, भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह आदेश 9 जून 2026 को जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा।  

Aaj Ka Mausam: IMD का रेड अलर्ट जारी, आंधी-तूफान और भारी बारिश को लेकर बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली
 देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मॉनसून अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई और सिलिगुड़ी से होकर गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मॉनसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के कुछ और इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से जहां दक्षिण और पूर्व भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है।

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। 13 से 16 जून के बीच भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में 10 से 16 जून के बीच बारिश के आसार हैं। विशेष रूप से 12 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओले गिरने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।

जयपुर सहित पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 11 से 13 जून के बीच भीषण आंधी और धूल का गुबार छाए रहने की आशंका है। 14 से 16 जून के बीच तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में इन दो दिनों में भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है।

मुंबई में भारी बारिश, एमपी में ओले
मुंबई सहित कोंकण और गोवा के इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो चुका है। यहां 10 और 11 जून को भारी बारिश के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी 12 जून तक आंधी-बारिश का दौर रहेगा। भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि और 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 11 और 12 जून को तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट
10 जून को तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। बेंगलुरु सहित आंतरिक कर्नाटक में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे और तमिलनाडु के कई हिस्सों में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हैदराबाद सहित तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 10 से 13 जून के बीच गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है। तेलंगाना में आज भारी बारिश भी हो सकती है।

असम-मेघालय में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा
पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों (10-16 जून) तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 10 से 14 जून के बीच अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कोलकाता सहित गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 10 और 11 जून को तथा बिहार-झारखंड में 11 और 12 जून को 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण आंधी और बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि बिहार में 12 जून तक भारी बारिश हो सकती है।

बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूले, अब चुकाने पड़े 25 हजार रुपये; कारोबारी को मिला सबक

कोच्चि

 अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल में एक ग्राहक से बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?
केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।

शराब निगम ने दी ये दलील
कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी सेस’ (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए।

निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।

कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी
पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ के तहत ‘सर्विस में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है।

क्या सुनाया गया फैसला?
अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

23,000 करोड़ की मेगा डील से मजबूत होगी थल सेना, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी भारत की मारक क्षमता

नई दिल्ली

भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है। 

रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी। 

K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है। 

K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। 

भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। 

K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

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