अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बड़ी कार्रवाई, हमले में 11 बच्चों समेत 13 लोगों की मौत

काबुल 

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है. बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है। 

इस हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक हताहत हुए हैं. अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलावर सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन किया। 

जबीउल्लाह ने आगे बताया कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन प्रमुख प्रांतों- कुनार, खोस्त और पक्तिका में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के घरों पर अंधाधुंध बमबारी की गई, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए। 

हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 13 की मौत
इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बमबारी में कुल 13 लोग मारे गए हैं, जिन्हें अफगान प्रशासन ने शहीद घोषित किया है. मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मासूम बच्चों की है. इस हमले में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा हमले में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। 

घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है. सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद की कुछ दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित बच्चों की स्थिति देखी जा सकती है। 

अफगानिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति
इस हमले के बाद अफगान सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा, ‘हम इस अमानवीय अपराध और हमले की कड़े से कड़े शब्दों में पुरजोर निंदा करते हैं.’ अफगानिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और आम नागरिकों के खिलाफ एक क्रूर अपराध बताया है। 

अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट हामिद करजई ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने शहीदों के परिवारों के साथ गहरा दुख और एकजुटता दिखाते हुए, एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान इस इलाके में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरी कार्रवाइयों के नतीजों से जूझ रहा है. उसे ये समझना चाहिए कि वो उन नीतियों पर कायम रहकर और उन्हें आगे बढ़ाकर अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा। 

करजई के मुताबिक पाकिस्तान की भलाई अफगानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की अपनी नीति को छोड़ने और इसके बजाय अच्छे पड़ोसी और सभ्य रिश्ते चुनने में है। 

FD निवेशकों के लिए बड़ी खबर! RBI का नया ड्राफ्ट नियम, ब्याज कमाई बढ़ने के आसार

 नई दिल्‍ली

भारतीय रिजर्व बैंक ने एक ड्राफ्ट नियम प्रस्‍तावित किया है. इसके तहत अब आपके फिक्‍स डिपॉजिट और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्‍याज को अधिक लचीलापन बनाया जाएगा. बैंक मनमाने तरीके से ब्‍याज दर नहीं दे सकते हैं और पहले से ही उन्‍हें अपने वेबसाइट पर ब्‍याज दरों के बारे में जानकारी देनी होगी. अगर ये नियम लागू होते हैं तो FD निवेशकों के लिए अलग-अलग बैंकों की ब्‍याज दरों की तुलना करना आसान हो जाएगा। 

RBI ने इन ड्रॉफ्ट नियम को सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया है. इनका उद्देश्य बैंकों को रुपये में मिले बड़े डिपॉजिट्स की ब्याज दर तय करने की अधिक स्वतंत्रता देना और जमा ब्याज दरों के खुलासे में एकरूपता लाना है. 20 जून तक अपनी राय दे सकते हैं। 

इस नियम से क्या बदलने वाला है?
इन प्रस्तावित नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शिता लाना है. RBI ने प्रस्ताव दिया है कि सभी बैंक हर कारोबारी दिन शुरू होने से पहले अपनी वेबसाइट पर जमा योजनाओं की ब्याज दरें दिखा सकते हैं. इस नियम के अनुसार, जमा पर देय ब्याज दरें बैंक की वेबसाइट पर कारोबारी दिन शुरू होने से पहले घोषित ब्याज दरों के अनुसार ही होंगी। 

इसका मतलब है कि बैंक FD और अन्य जमा योजनाओं की ब्याज दरें पहले से सार्वजनिक करेंगे, जिससे ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की योजनाओं की तुलना करने में आसानी होगी. यह कदम ब्याज दरों को लेकर अस्पष्टता कम करेगा और FD में निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए अधिक स्पष्टता लाएगा। 

बल्क डिपॉजिट क्या होते हैं?
प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से बल्क डिपॉजिट से जुड़े हैं. बल्क डिपॉजिट वे बड़ी राशि वाले जमा होते हैं, जो व्यक्ति, कंपनियां, संस्थान और हाई नेटवर्थ (HNI) ग्राहक बैंकों में जमा करते हैं. नए मसौदे के तहत बैंक अपनी फंडिंग जरूरतों और नकदी की स्थिति के आधार पर इन बड़े जमाओं पर अलग-अलग ब्याज दरें दे सकेंगे। 

RBI के अनुसार, बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें देने की स्वतंत्रता होगी. अगर किसी बैंक को अधिक धन जुटाने की जरूरत होगी, तो वह बड़े जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए ज्यादा ब्याज दर दे सकता है. वहीं पर्याप्त नकदी वाले बैंक कम ब्याज दर भी दे सकते हैं। 

FD निवेशकों पर इसका क्या असर होगा?
सामान्य रिटेल FD निवेशकों पर इसका तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है क्योंकि प्रस्ताव सीधे तौर पर रिटेल FD नियमों में बदलाव नहीं करता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका असर पूरे डिपॉजिट मार्केट पर पड़ सकता है। 

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) श्वेता शास्त्री के अनुसार, पहले लगभग सभी बैंकों की FD दरें एक जैसी होती थीं, लेकिन आगे चलकर जमा राशि, अवधि और बैंक की फंडिंग जरूरत के आधार पर ब्याज दरों में उल्लेखनीय अंतर दिखाई दे सकता है. उनका सुझाव है कि FD रिन्यू कराने से पहले निवेशकों को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करनी चाहिए और बड़ी राशि जमा करने की स्थिति में बेहतर ब्याज दर के लिए बैंक से बातचीत भी करनी चाहिए. हालांकि केवल सबसे ऊंची ब्याज दर को देखकर निवेश नहीं करना चाहिए। 

एफडी में निवेश से पहले देखें ये चीजें 

    समय से पहले FD तोड़ने पर लगने वाला जुर्माना 
    स्वीप-इन FD सुविधा
    जरूरत पड़ने पर धन की उपलब्धता 
    ब्याज भुगतान का विकल्प (मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर)
    वर्तमान FD ब्याज दरें

कौन दे रहा एफडी पर ज्‍यादा रिटर्न 

    सुर्वोदय स्‍माल फाइनेंस बैंक – 8.10% तक
    उत्‍कर्ष स्‍माल फाइनेंस बैंक – 8.10% तक
    जाना स्‍माल फाइनेंस बैंक – 7.77% तक

 

सिंगल चार्ज में 1200KM की रेंज! BYD Seal U कन्फर्म, कंपनी की पहली हाइब्रिड कार होगी लॉन्च

 नई दिल्ली

चीनी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी बीवाईडी (BYD) ने भारत में अपनी नई हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को पेश कर दिया है. कंपनी ने डीएम-आई सुपर प्लग-इन हाइब्रिड ईवी (DM-i Super Plug-in Hybrid EV) को इंट्रोड्यूस किया है. इस टेक्नोलॉजी के साथ पहली कार कंपनी बीवाईडी सील यू (BYD Seal U) को लॉन्च करेगी। 

ये ब्रांड की पहली कार होगी, जो प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ भारत में आएगी. अब तक भारत में कंपनी ने सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों को लॉन्च किया है, लेकिन अब ब्रांड का फोकस हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी है. रिपोर्ट्स की मानें, तो हाइब्रिड कार को कंपनी इस साल के अंत तक लॉन्च कर सकती है। 

बैटरी और इंजन दोनों मिलेंगे
बात करें डीएम-आई सुपर प्लग-इन हाइब्रिड ईवी टेक्नोलॉजी की, तो इसमें बैटरी-मोटर के साथ एक इंजन भी मिलेगा. हालांकि, ये टेक्नोलॉजी कार को ईवी मोड में चलाने पर फोकस करेगी. कार में 1.5 लीटर का डायरेक्ट इंजेक्शन, टर्बो पेट्रोल इंजन मिलेगा. इसमें डुअल इलेक्ट्रिक मोटर और 18.3kWh की बैटरी दी जाएगी। 

बीवाईडी का दावा है कि कार में दुनिया की बेस्ट थर्मल एफिशिएंसी मिलेगी. कंपनी की मानें, तो कार 4.8 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर का सफर करेगी. वहीं इलेक्ट्रिक मोटर 97.5 फीसदी की इफिशिएंकी के साथ आएगा. दोनों को मिला दें, तो कार फुल टैंक और फुल चार्ज में 1200 किलोमीटर तक का सफर कर सकती है। 

कैसे काम करेगी टेक्नोलॉजी?
जब बैटरी पूरी तरह से चार्ज होगी तो कार ईवी मोड में चलेगी. इस मोड में कार 70 किलोमीटर तक चल सकती है. सामान्य स्थिति में कार का पेट्रोल इंजन एक पावर जनरेटर की तरह काम करेगा, जो कार को ईवी मोड में चलने में मदद करेगा. वहीं ज्यादा पावर लोड होने पर इंजन सीधे कार को पावर देना शुरू कर देगा। 

ये पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटिक होगी. यानी ये कार प्योर ईवी, सीरीज हाइब्रिड और पैरेलल हाइब्रिड मोड में ऑटोमेटिक स्विच करेगी, जिससे ड्राइवर को मोड्स मैन्युअली बदलने नहीं पड़ेंगे. दूसरी ईवी कारों की तरह ही इसमें भी वी2एल कैपेबिलिटी मिलेगी. इसका मतलब है कि कार का इंजन ना सिर्फ कार को पावर देगा बल्कि इससे तमाम इलेक्ट्रिक अप्लायंस भी चल सकेंगे। 

कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा क्रैश! Fitch ने बताया कब टूट सकते हैं भाव

 नई दिल्ली

वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी से नजर रख रहा है। 

एजेंसी ने लंबे समय से बंद Hormuz Strait के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने का अनुमान जताया है और उम्मीद जताते हुए कहा है कि ऐसा होने पर Oil-Gas सप्लाई चेन में रुकावट खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी।  

70 डॉलर पर आ जाएगा कच्चा तेल!
Fitch Ratings की एक रिपोर्ट में होर्मुज
स्ट्रेट के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने के सवाल पर कहा है कि इसका जवाब संभवतः हां है. एजेंसी के ऑयल आउटलुक के मुताबिक, वैश्विक तेल खपत के लगभग पांचवें हिस्से को संभालने वाला यह स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट 5 महीने की क्लोजिंग बंद के बाद फिर से खुलेगा। 

फिच के मुताबिक, ऐसा होने पर कच्चे तेल की कीमतों में आने वाली तेज गिरावट का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा कि जुलाई में होर्मुज ओपन होने के बाद सितंबर से ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Oil Price) गिरकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। 

तेजी से बहाल होगी ऑयल सप्लाई
फिच ने अपनी रिपोर्ट में तर्क देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल मुख्य रूप से उत्पादन क्षमता में स्थायी कमी के बजाय सप्लाई चेन में आई रुकावट से जुड़ा है. एजेंसी का मानना ​​है कि युद्ध की वजह से क्षेत्रीय तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है, जिससे शिपिंग रूट्स सामान्य होने पर मिडिल ईस्ट में प्रोडक्शन भी तेजी से बहाल हो सकता है। 

Fitch के अनुमानों पर नजर डालें, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत मई-जुलाई के दौरान 100-110 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि अगस्त में यह घटकर करीब 80 डॉलर पर आ जाएगी और सितंबर में Brent Crude Price  70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है। 

‘अनिश्चितता अभी कम नहीं हुई’
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) होने का अनुमान जताने के साथ ही कहा है कि अनिश्चितता का स्तर अभी भी काफी ऊंचा बना हुआ है. अगर होर्मुज उम्मीद से पहले खुल जाता हैं, तो तेल की कीमतें गिरेंगी, लेकिन अगर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है. इससे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख आयातकों के लिए ऊर्जा लागत में वृद्धि होगी और महंगाई का खतरा बढ़ेगा। 

BMW कार खरीदने की सोच रहे हैं? 1 जुलाई से बढ़ जाएंगी कीमतें, कंपनी का बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली
कारों की कीमतें लगातार बढ़ रही है. अलग-अलग ब्रांड्स अपनी गाड़ियों की कीमतों को समय-समय पर 2026 में बढ़ा चुके हैं. अब बीएमडब्लू (BMW) ने अपनी कारों की कीमतों में इजाफे का ऐलान किया है. 1 जुलाई से कंपनी की कारें महंगी होने वाली है. इनकी कीमतों में 2 फीसदी इजाफा किया गया है। 

ये बीएमडब्लू और मिनी रेंज की सभी कारों पर लागू होंगी. गाड़ियों की कीमतों में इस इजाफे की वजह रुपये की गिरती कीमत और लॉजिस्टिक के बढ़ते दाम हैं. जिसकी वजह से कंपनी 1 जुलाई से अपनी गाड़ियों की कीमत 2 फीसदी बढ़ा रही है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स। 

क्यों महंगी हुई बीएमडब्लू कारें?
बीएमडब्लू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ, हरदीप सिंह बरार ने बताया, ‘जबरदस्त डिमांड और बेहतरीन प्रोडक्ट रेंज होने की वजह से लग्जरी मोबिलिटी स्पेस में बीएमडब्लू ग्रुप इंडिया नई माइलस्टोन बना रही है. मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियों के बीच अपने प्रीमियम स्टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए हम अपने पोर्टफोलियो की कीमतें 2 फीसदी बढ़ा रहे हैं। 

कंपनी कई कारों को भारत में लोकली तैयार करती है. भारत में प्रोड्यूस होने वाली कारों की लिस्ट में बीएमडब्लू 2 सीरीज कूपे, बीएमडब्लू 3 सीरीज लॉन्ग व्हीलबेस, बीएमडब्लू 5 सीरीज लॉन्ग व्हीलबेस, बीएमडब्लू 7 सीरीज, बीएमडब्लू एक्स1, एक्स 3, एक्स 5, एक्स 7, बीएमडब्लू एम340आई और बीएमडब्लू आईएक्स1 लॉन्ग व्हीलबेस शामिल हैं। 

इसके अलावा कंपनी की बीएमडब्लू आई5 एम60, बीएमडब्लू आई7, बीएमडब्लू आई7 एम70, बीएमडब्लू आईएक्स, बीएमडब्लू एम440आई कन्वर्टिबल, बीएमडब्लू एम2 कूपे, बीएमडब्लू एम4 कंपटीशन, बीएमडब्लू एम5 और बीएमडब्लू एक्सएम भारत में सीबीयू के तौर पर मिलती हैं। 

फ्री सर्विस ऑफर कर रही कंपनी
हाल में ही कंपनी ने समर सर्विस कैंपेन 2026 का ऐलान किया था. इसके तहत कंपनी कई सारी सर्विसेस कॉम्प्लिमेंटरी ऑफर कर रही थी. इसमें एयर कंडीशनिंग फिल्टर की जांच, एयर फिल्टर और टायर कंडीशन शामिल हैं. वहीं नॉन-इलेक्ट्रिक मॉडल्स के लिए कंपनी फ्री बैटरी चेकअप भी ऑफर कर रही है। 

कंपनी ये इंस्पेक्शन किसी भी फॉल्ट को पहले पकड़ने के लिए कर रही है, जिससे कंज्यूमर्स को परेशानी का सामना ना करना पड़े. बेसिक चेक के साथ कंपनी सर्विस पर डिस्काउंट भी दे रही है. कंज्यूमर्स 10 फीसदी की छूट एसी फुमिगेशन सर्विस पर दे रही है. वहीं एयर कंडीशनिंग रिपेयरिंग पर कंपनी 25 फीसदी तक की छूट लेबर चार्ज पर दे रही है। 

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये

भोपाल 

मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अभियंताओं ने 400 केवी सब स्टेशन कटनी में स्थापित बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर के 400 केवी एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की सफलतापूर्वक इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की बचत कराई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा की पहल पर अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा लगभग एक सप्ताह तक सतत प्रयास कर यह कार्य पूर्ण किया गया।

बिरसिंहपुर के महत्वपूर्ण फीडर में लगा है यह ब्रेकर

यह सर्किट ब्रेकर बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण 400 केवी फीडर पर स्थापित है, जिसके माध्यम से लगभग 350 मेगावॉट विद्युत का पारेषण होता है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की दृष्टि से यह फीडर अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण फीडर पर स्थापित सर्किट ब्रेकर की सफल ओवरहॉलिंग ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि विद्युत आपूर्ति की निर्बाधता और ग्रिड सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया है।

फर्स्ट जेनरेशन का है ब्रेकर

लगभग 20 वर्ष पुराने फर्स्ट जनरेशन सर्किट ब्रेकर के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के बावजूद कटनी डिवीजन की टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए इसका निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत एवं आवश्यक पार्ट्स का प्रतिस्थापन किया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह एवं कटनी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

ऊर्जा मंत्री ने की सराहना

ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, संसाधनों के कुशल उपयोग, लागत नियंत्रण एवं आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अभियंता अपनी विशेषज्ञता के बल पर महत्वपूर्ण उपकरणों के रखरखाव एवं पुनर्संचालन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

 

जनजातीय अध्ययन को नई दिशा दे रहा इंदौर का डीएवीवी

जनजातीय अध्ययन को नई दिशा दे रहा इंदौर का डीएवीवी

जनजातीय समाज, संस्कृति और विकास के अध्ययन-शोध के लिए विशेष पाठ्यक्रम; युवाओं के लिए शोध के अवसर
डीएवीवी में एमए, एमबीए और पीएचडी में प्रवेश प्रारंभ

इंदौर

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपराओं और विकास के विविध आयामों को समझने के लिए एक अभिनव शैक्षणिक पहल की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन एवं जनजातीय विकास पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जनजातीय समुदायों के जीवन, ज्ञान परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। यह पहल विद्यार्थियों में जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ उन्हें ऐसे ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करती है, जिससे वे भविष्य में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में सार्थक योगदान दे सकें।

स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज में एम.ए. (जनजातीय अध्ययन), एम.बी.ए. (जनजातीय विकास एवं प्रबंधन) तथा पीएचडी (जनजातीय अध्ययन) जैसे विशिष्ट कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, जीवन-पद्धति, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक चुनौतियों तथा विकास संबंधी मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

वर्तमान में जनजातीय समुदायों से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ जनजातीय विकास की नीतियों, योजनाओं और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक समझ भी प्रदान करते हैं। इससे छात्र शोध, शिक्षण, सामाजिक विकास, नीति निर्माण तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहतर कॅरियर के अवसर बढ़ जाते हैं।

स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा संचालित ये पाठ्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जनजातीय अध्ययन के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को निकट से समझने और उनके विकास में सार्थक योगदान देने का अवसर उपलब्ध कराते हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से इन विशेष पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने और समय पर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।

 

होर्मुज संकट के बीच चीन का मास्टरस्ट्रोक! बना रहा समुद्री दैत्य, LNG सप्लाई की टेंशन होगी खत्म

बीजिंग 

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल-गैस की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग ने दुनिया के कई देशों को आर्थिक मंदी के मुहाने पर ला खड़ा किया है. डर यह जताया जा रहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री ट्रेड रूट में शामिल होर्मुज अगर जल्द नहीं खुला तो पेट्रोल,एलपीजी और एनएलजी की किल्लत और गहरा सकती है. इन्हीं चिंताओं के बीच चीन ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा दांव खेला है. चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी ने समुद्र में दैत्याकार जहाज उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. दुनिया के इस सबसे बड़े जहाज से एक ही बार में 2.71 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस यानी एनएलजी लाई जा सकेगी. यह जहाज न केवल शिपबिल्डिंग उद्योग में नया रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि वैश्विक गैस सप्लाई चेन को भी नई मजबूती देगा। 

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने दुनिया को यह एहसास कराया कि तेल-गैस की सप्लाई कितनी संवेदनशील है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा और LNG की महत्वपूर्ण खेपें इसी रास्ते से गुजरती हैं. ऐसे में होर्मुज की नाकेबंदी से एशिया और यूरोप के कई देशों में गैस की कमी पैदा हो गई है। 

यही वजह है कि LNG परिवहन क्षमता बढ़ाने को अब ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा माना जा रहा है. चीन का नया जहाज इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो एक बार में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा LNG ढो सकेगा। 

कितना विशाल है यह जहाज?
नया LNG कैरियर 344 मीटर लंबा होगा और इसकी क्षमता 2,71,000 क्यूबिक मीटर LNG होगी. तुलना करें तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक LNG जहाजों की क्षमता करीब 1,70,000 से 1,80,000 क्यूबिक मीटर होती है. एक आधुनिक गैस कैरियर औसतन करीब 174,000 क्यूबिक मीटर LNG लेकर चलता है। 

इस लिहाज से चीन का नया जहाज मौजूदा मानक जहाजों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत अधिक LNG ढो सकेगा. इसका मतलब है कि एक ही यात्रा में अधिक गैस पहुंचाई जा सकेगी, जिससे परिवहन लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बनेगी। 

एलएलजी जहाज क्यों कहलाते हैं ‘क्राउन ज्वेल’?
LNG कैरियर बनाना आज भी बेहद जटिल है. प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर तरल रूप में सुरक्षित रखना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इसके लिए विशेष टैंक, उन्नत इंसुलेशन सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों की जरूरत होती है. यही वजह है कि इसे शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री का ‘क्राउन ज्वेल’ यानी सबसे प्रतिष्ठित जहाज माना जाता है। 

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस नए जहाज में NO96 Super+ मेम्ब्रेन कंटेनमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो गैस को सुरक्षित रखने के साथ-साथ रिसाव और ऊर्जा हानि को भी कम करेगा। 

पर्यावरण के लिहाज से भी खास
जहाज में डुअल-फ्यूल इंजन सिस्टम होगा, जिससे यह पारंपरिक ईंधन और एलएनजी दोनों पर चल सकेगा. कंपनी का दावा है कि इससे ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होंगे. यह जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के Tier-III पर्यावरण मानकों का भी पालन करेगा। 

ऐसे समय में जब दुनिया हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, LNG को कोयले और तेल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है. इसलिए LNG परिवहन क्षमता बढ़ना एनर्जी ट्रांजिशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। 

समुद्र में चीन की बढ़ती ताकत
एक समय एलएनजी जहाज निर्माण पर दक्षिण कोरिया और कुछ पश्चिमी कंपनियों का लगभग एकाधिकार था. लेकिन अब चीन तेजी से इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एनएलजी शिपबिल्डिंग बाजार में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। 

चीन अखबार के मुताबिक, हुडोंग-झोंगहुआ शिपबिल्डिंग कंपनी के पास फिलहाल लगभग 60 LNG जहाजों के ऑर्डर हैं और उसके शिपयार्ड 2030 तक पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं. इससे साफ है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में चीन अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है। 

होर्मुज संकट और एनएलजी का भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है तो LNG परिवहन क्षमता दुनिया के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी. यूरोप, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को ऊर्जा सुरक्षा के लिए अधिक बड़े और अधिक कुशल एलएनजी जहाजों की जरूरत होगी। 

ऐसे में चीन का यह मेगा एलएनजी कैरियर सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक ऊर्जा राजनीति और सप्लाई चेन की नई तस्वीर का प्रतीक माना जा रहा है. 2028 में इसकी पहली डिलीवरी होने के बाद यह दुनिया की एलएनजी लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक नया आयाम दे सकता है। 

 

भारत में अपराध दर 6% घटी, लेकिन साइबर क्राइम बना बड़ी चुनौती; 1 लाख के पार जा सकते हैं मामले: SBI रिपोर्ट

नई दिल्ली
देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। 

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं। 

हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता। 

एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है। 

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। 

रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं। 

रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है। 

SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए। 

वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

क्या भारत में आएंगे प्लास्टिक के नोट? न फटेंगे, न पानी से खराब होंगे; जानिए कैसे बनते हैं

 नई दिल्ली

भारत में भी अब ‘प्लास्टिक’ के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है?

अभी आरबीआई का क्या कहना है?
हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है। 

इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था। 

किस मैटेरियल के होंगे ये नोट?
जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं। 

इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है। 

इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

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