वरिष्ठजन की सेवा ही मानवता की सच्ची सेवा : मंत्री कुशवाह

वरिष्ठजन की सेवा ही मानवता की सच्ची सेवा : मंत्री कुशवाह

भोपाल 

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने मंगलवार को शाहजहानाबाद स्थित आसरा वृद्धाश्रम पहुंचकर वरिष्ठजन के साथ समय व्यतीत किया और उनकी सेवा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। वृद्धाश्रम में आयोजित धार्मिक एवं सेवा कार्यक्रम के दौरान मंत्री कुशवाह ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुंदरकांड पाठ में सहभागिता की।

मंत्री कुशवाह ने वृद्धाश्रम में निवासरत वरिष्ठ नागरिकों से आत्मीय संवाद कर कुशलक्षेम जानी तथा उनकी आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मंत्री कुशवाह ने वृद्धजन को वस्त्र भेंट कर भोजन प्रसादी भी वितरित की। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठजन अनुभव, संस्कार और परंपराओं के संवाहक हैं। उनका सम्मान, सेवा और देखभाल करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।

मंत्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजन के स्नेहपूर्ण आशीर्वाद और उनके चेहरे पर आई मुस्कान से उन्हें आत्मिक शांति एवं संतोष की अनुभूति हुई। उन्होंने समाज से वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भाव बनाए रखने का आहवान किया।

वृद्धाश्रम के बुजर्गों ने मंत्री कुशवाह के इस आत्मीय प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने वरिष्ठजन की सेवा को भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त प्रतीक बताया।

 

जगदलपुर के जंगलों में दिखी दुर्लभ ‘रात की चिड़िया’, जैव विविधता संरक्षण की बड़ी खुशखबरी

जगदलपुर.

जगदलपुर के माचकोट वन क्षेत्र में एक दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी ने जंगलों की समृद्ध जैव विविधता को फिर सुर्खियों में ला दिया है. लंबी पूंछ वाले नाइटजार, जिसे स्थानीय भाषा में “कापू चड़ई” और हिंदी में “रात की चिड़िया” कहा जाता है, को कैमरे में कैद किया गया है.

यह पक्षी दिनभर झाड़ियों और पेड़ों की निचली शाखाओं में छिपकर आराम करता है, इसलिए इसे देख पाना बेहद मुश्किल माना जाता है. रात होते ही यह सक्रिय हो जाता है और उड़ते हुए कीट-पतंगों का शिकार करता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण कर किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होता है. इसकी विशेष आवाज जंगलों में इसकी उपस्थिति का संकेत देती है.

भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी यह प्रजाति पाई जाती है. वन अधिकारियों का कहना है कि माचकोट क्षेत्र दुर्लभ पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास बनता जा रहा है. इस खोज ने एक बार फिर साबित किया है कि कोंडागांव के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.

अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई : तीन चैन माउंटेन मशीन और एक हाईवा वाहन जप्त

अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई : तीन चैन माउंटेन मशीन और एक हाईवा वाहन जप्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार जारी है अभियान

केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम की कार्रवाई

रायपुर,
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग की केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम द्वारा जिला गरियाबंद में बड़ी कार्रवाई की गई है।
               खनिज विभाग के सचिव और संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने दिनांक 08 जून 2026 को औचक निरीक्षण के दौरान जिला गरियाबंद के तहसील राजिम अंतर्गत ग्राम कुरुसकेरा स्थित पैरी नदी में गौण खनिज साधारण रेत के अवैध उत्खनन एवं मशीनों के माध्यम से नियम विरुद्ध रेत उत्खनन का मामला पाया। जांच के दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए तीन चैन माउंटेन मशीनों को जप्त कर सील किया गया। साथ ही खदान संचालक एवं मशीन मालिकों को जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक हाईवा वाहन को भी जप्त कर राजिम थाना में सुरक्षार्थ खड़ा कराया गया है।
कार्रवाई के दौरान केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम तथा जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम उपस्थित रही।
               मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। अवैध उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा तथा दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। खनिज साधन विभाग के सचिव ने कहा कि प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी की जा रही है। विभागीय अमला एवं उड़नदस्ता दलों को नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अबूझमाड़ में विकास की नई कहानी, 7 पुल बनने से 1200 ग्रामीणों की राह हुई आसान

नारायणपुर.

अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल में वर्षों से मानसून के दौरान अलगाव झेल रहे ग्रामीणों के लिए इस बार बारिश राहत लेकर आएगी. आईटीबीपी की 53वीं वाहिनी ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रिकॉर्ड समय में सात नए लॉग ब्रिज तैयार किए हैं. इन पुलों के निर्माण से 15 से अधिक गांवों के करीब 1200 ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा.

हर साल बारिश में उफनते नालों के कारण गांवों का संपर्क टूट जाता था और मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. ग्रामीणों की मांग पर आईटीबीपी ने जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर यह अभियान चलाया. अब इलाज, शिक्षा और दैनिक आवागमन के लिए जोखिम भरे रास्तों पर निर्भरता कम होगी. स्थानीय लोगों ने इसे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान बताया है. सुरक्षा बलों की यह पहल केवल बुनियादी ढांचा निर्माण नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. मानसून से पहले तैयार हुए ये पुल अबूझमाड़ के विकास की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं.

बस्तर में खाद-बीज माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई, प्रशासन ने कसा शिकंजा

बस्तर.

खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है. जिला स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित कर भंडारण और वितरण पर लगातार नजर रखी जा रही है. विभाग की ताबड़तोड़ जांच कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है.

नियमों के उल्लंघन पर कई दुकानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि अनेक केंद्रों की बिक्री पर रोक लगाई गई है. कुछ लाइसेंस निलंबित और एक लाइसेंस निरस्त भी किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि किसानों के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है. कृषि विभाग का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य किसानों को सही समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है. प्रशासनिक सख्ती के चलते बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

ओमान से गुजरात तक बिछेगी गैस पाइपलाइन, होर्मुज पर निर्भरता घटाने की भारत की बड़ी तैयारी

अहमदाबाद 

वेस्‍ट एशिया में तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई रुकने के बाद सबसे ज्‍यादा प्रभातिव हुए है. इसी के मद्देनजर, भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्‍लाई को निर्बाध करने में जुटा हुआ है. अब ओमान से गुजरात के बीच एक लंबी पाइपलाइन बिछने जा रही है। 

यह अरब सागर के पार लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी. यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लंबे समय से चर्चित योजना है, क्योंकि भारत तेजी से अनिश्चित भू-राजनीतिक तना के बीच अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। 

पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक  दिक्‍कतों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब, इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्राइवेट ग्रुप SAGE द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्‍यूवेशन करने के लिए समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली है।  

कितना आएगा खर्च? 
अनुमान है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत करीब  40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन, अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी. यह नेचुरल गैस की निर्बाध सप्‍लाई करेगी. अगर ये पाइपलाइन बन जाती है, तो इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित हो सकता है, जिससे देश की होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो जाएगी। 

यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत आयातित ऊर्जा पर काफी हद तक निर्भर है. देश अपनी ज्‍यादातर कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्‍सदा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, होर्मुज के माध्‍यम से भारत पहुंचता है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट ग्‍लोबल मार्केट्स पर तुरंत असर डाल सकता है. इससे शिपिंग कॉस्‍ट, ईंधनी की कीमतें और आप‍ूर्ति चेन प्रभावित हो सकती हैं। 

कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन? 
प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्‍यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है. मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी. इतनी गहराई ज्‍यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी। 

गैस आने में कितना होगा खर्च? 
इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी. साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी। 

जोजिला सुरंग में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, फाइनल ब्रेकथ्रू पूरा; लद्दाख-श्रीनगर कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

 श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली ‘जोजिला सुरंग’ का अंतिम ‘ब्रेकथ्रू’ आज पूरा हो गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। 

इस कामयाबी के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच ऑल-वेदर रास्ता बनने का सालों पुराना सपना हकीकत के बेहद करीब पहुंच गया है. इस मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने खुशी जाहिर की. वहीं, नितिन गडकरी ने भी इस टनल की अहमियत बताई। 

एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, ‘ये एक ऐतिहासिक तारीख है कि आज लद्दाख के लोगों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी के लिए अंतिम चरण के पड़ाव को मंत्री जी (नितिन गडकरी) ने पूरा किया. मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिल से बधाई देता हूं। 

मनोज सिन्हा ने इंजीनियरों को दी बधाई
सिन्हा ने सुरंग के निर्माण में जुटे कार्यबलों की तारीफ करते हुए आगे कहा, ‘मैं इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले सभी इंजीनियरों को बधाई देता हूं, जिन्होंने इतनी ऊंचाई पर मुश्किल परिस्थितियों में काम किया है. हम सभी जानते हैं कि कनेक्टिविटी से ही विकास होता है. पिछले 12 सालों में इस क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। 

एशिया ही नहीं, दुनिया के इतिहास में नंबर-1 बनेगी ये टनल- गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस ब्रेकथ्रू को भारतीय इंजीनियरिंग के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना बताया. उन्होंने कहा, ‘आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास का सुनहरा दिन है. क्योंकि ये टनल 14 किलोमीटर लंबी है और स्टेट ऑफ आर्ट है. मुझे अभी बताया गया कि अब तक हम इसे एशिया का सबसे लंबा टनल कह रहे थे. लेकिन ये वर्ल्ड के इतिहास में भी नंबर 1 पर जाएगा, ये जानकर मुझे बहुत खुशी है. ये लेह और लद्दाख के लोगों के लिए लाइफलाइन है। 

कंपाने वाली ठंड में इंजीनियर्स और मजदूरों ने किया कमाल
केंद्रीय मंत्री ने सुरंग बनाने के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों और टीम की कड़ी मेहनत को भी सराहा. उन्होंने बताया, ‘यहां की ऊंचाई लगभग 3 हजार मीटर है. जब काम हो रहा था, तो यहां -4 डिग्री या उससे भी कम तापमान के हालात थे. ऐसी कड़ाके की ठंड में हमारे इंजीनियर्स, मजदूर, ठेकेदारों और डॉक्टर्स ने बहुत मेहनत से काम किया है। 

गडकरी ने आहे बताया कि ये टनल वर्ल्ड क्लास सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिहाज से बनाई गई है और इससे लद्दाख-लेह को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी। 

जोजिला सुरंग की अहमियत
इस अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही पहाड़ के दोनों छोर अब आपस में पूरी तरह मिल गए हैं. अब सुरंग के अंदर सड़क बनाने, लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को लगाने का काम तेजी से पूरा हो पाएगा. इस सुरंग के पूरी तरह चालू होने से सर्दियों में लद्दाख का देश से संपर्क कटना हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। 

महाराष्ट्र में मानसून का तांडव, 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; यूपी-बिहार को भी मिलेगी राहत

नई दिल्ली

देश में मौसम का रुख एक बार फिर पूरी तरह बदल चुका है. केरल में दस्तक देने के बाद मानसून ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत एंट्री कर ली है. यह एंट्री भले ही तय समय के आसपास हुई हो, लेकिन इसके असर ने पूरे देश को अलर्ट मोड पर ला दिया है. एक तरफ जहां किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों ने चिंता बढ़ा दी है। 

IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कई राज्यों को अपनी चपेट में लेगा. अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसका सीधा असर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में देखने को मिलेगा। 

अल-नीनो की परिस्थितियों के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मूसलाधार बारिश करवाता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले सात दिन कई राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 11 से 12 जून तक उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।

इन राज्यों में होने वाली है मॉनसून की एंट्री
मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बचे हुए हिस्से को कवर करने वाला है। वहीं दो से तीन दिन में ही यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर करेगा। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच चुका है और झमाझम बारिश हो रही है।

पश्चिमी विक्षोभ कराएगा बारिश
मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी इलाके में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश करवाने वाला है। इन राज्यों में 9 से 14 जून तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 10 से 14 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान में 11 और 12 जून को तेज हवाओँ के साथ बारिश हो सकती है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को धूलभरी आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक हवाओँ की गति 50 से 60 किमी प्रतिघंटे तक पहुंचने की संभावना है।

यूपी-बिहार का मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 14 जून के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 14 जून के बीच मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 10 जून के बाद बिहार के पटना, सिवान, भागलपुर, मुंगेर जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार और गंगा के आसपास के क्षेत्रों में 10 से 15 जून के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है।

दिल्ली का मौसम
आईएमडी के अनुसार, हालांकि बारिश से कुछ स्थानों पर थोड़ी राहत मिली। सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे की कुल वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, केवल पालम और आयानगर में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे के बीच किसी भी वेधशाला में बारिश दर्ज नहीं की गई। आईएमडी के अनुसार, 10 जून तक अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 43 डिग्री तक पहुंच सकता है, और उसके बाद 11 जून से आंधी की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है।

देशभर में मौसम का सिस्टम एक्टिव, तेज हवाओं और बारिश का खतरा
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर हो गया है. कहीं तेज धूप के बाद अचानक बारिश हो रही है तो कहीं आंधी-तूफान ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

    अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच सकता है.हवाओं की गति कई जगहों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। 

दिल्ली-NCR में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर
दिल्ली-NCR में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. 7 जून को आंशिक बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन आंधी और बारिश के चलते शाम तक राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। 

उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता रुख और आंधी-तूफान का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम अगले कुछ दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है. पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. 9 से 12 जून के बीच कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है. IMD ने राज्य के कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में मौसम अचानक बदल सकता है. गर्मी और उमस के बीच यह बारिश कुछ राहत भी दे सकती है, लेकिन बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। 

बिहार में मौसम का मिजाज और बारिश की गतिविधियां
बिहार में 7 और 8 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है. पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में तेज हवाएं चलने की संभावना है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में नुकसान की आशंका है. हालांकि बारिश के कारण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। 

झारखंड में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर
झारखंड में भी मौसम पूरी तरह बदल चुका है. रांची, धनबाद, बोकारो और दुमका जैसे जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। 

मध्‍य प्रदेश में प्री मानसून के दौर में बारिश शुरू हो गई है.

पश्चिम बंगाल में मौसम का असर और भारी बारिश की चेतावनी

पश्चिम बंगाल में भी मौसम ने रफ्तार पकड़ ली है. कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. हावड़ा, कोलकाता, नादिया और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है. 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 

राजस्थान में मौसम का बदलाव और गर्मी से राहत की स्थिति
राजस्थान में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं. कई जिलों में आंधी और बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है. हालांकि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 8 जून के बाद पश्चिमी राजस्थान में फिर से भीषण गर्मी और लू लौट सकती है। 

मध्य प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव और तेज हवाएं
मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, विदिशा और खंडवा जैसे जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट है. यहां 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे कई इलाकों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। 

पंजाब-हरियाणा में मौसम का बदलाव और बारिश की संभावना
    पंजाब और हरियाणा में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक काफी अस्थिर बना रह सकता है. मौसम विभाग के अनुसार दोनों राज्यों के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी-तूफान की स्थिति देखने को मिल सकती है. पटियाला, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में अचानक मौसम बदलने की संभावना जताई गई है. कई इलाकों में बादल घिरने के साथ ही तेज बारिश शुरू हो सकती है, जिससे दिन के तापमान में गिरावट भी दर्ज की जाएगी। 

    यहां 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियां और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है. खेतों में खड़ी फसलें, खासकर धान और सब्जियों की फसल, तेज हवा और बारिश से नुकसान की चपेट में आ सकती हैं. मौसम विभाग ने लोगों को खुले इलाकों में सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। 

उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में मौसम का पहाड़ी असर
    पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज इस समय काफी चुनौतीपूर्ण और अस्थिर बना हुआ है. उत्तराखंड के नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे कई जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. लगातार बारिश के कारण कई संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। 

    हिमाचल प्रदेश में शिमला, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और सोलन जैसे क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. यहां मौसम में अचानक बदलाव के कारण तापमान। 

उज्ज्वला योजना के नियमों में बड़ा बदलाव, 10 करोड़ परिवारों पर पड़ेगा असर; LPG को लेकर सरकार का नया फैसला

  नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका (PM Ujjwala Yojna Rule Change) देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की संख्या में बड़ी कटौती की है. देश में हाल ही में तेल वितरण कंपनियों द्वारा 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद, अब सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। 

उज्ज्वला योजना के नियमों में बदलाव के बाद अब PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर सब्सिडी मिलती थी। 

2016 से अब तक 10.5 करोड़ कनेक्शन 
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई थी. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, PMUY के जरिए खाना पकाने के लिए साफ-सुथरा ईंधन लाखों घरों तक पहुंचा है, जिससे महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार में मदद मिली. इस योजना का जरूरतमंदों को पूरा फायदा पहुंचा. इस सरकारी स्कीम की शुरुआत के बाद से अब तक गरीब परिवारों की महिलाओं को 10.5 करोड़ से ज्यादा मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। 

सरकार देती ही 300 रुपये सब्सिडी
उज्ज्वला योजना की शुरुआत के बाद सरकार ने एलपीजी को किफायती बनाए रखने के लिए मई 2022 में इस 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी देने की शुरुआत की थी और इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया था, जो लगातार लाभार्थियों को मिल रही हैं और LPG Subsidy का ये पैसा हर रिफिल के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा किया जाता है. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं। 

घाटे के बाद भी सब्सिडी राहत जारी
मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट के बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियां हर घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं. इस बीच सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी की गई, लेकिन सरकार ने 300 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी देना जारी रखा है, जो उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत है. जहां आम ग्राहकों के लिए 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये का है, तो वहीं सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना में पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होता है। 

12 से 9 और अब सिर्फ 4 सिलेंडर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिनकी संख्या बीते साल घटाकर 9 कर दी गई थी और अब बड़ा फैसला लेते हुए इसे चार एलपीजी सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस कदम को वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाने वाला बताया गया है। 

लाभार्थियों को कितना घाटा? 
तेल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा के मुताबिक, संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. हालांकि, प्रति रिफिल सब्सिडी की राशि अपरिवर्तित रखी गई है. ताजा बदलाव के बाद प्रति लाभार्थी वार्षिक सहायता की अधिकतम सीमा 1,200 रुपये हो गई है. लाभार्थियों पर असर की बात करें, तो अब तक 300 रुपये की सब्सिडी के साथ 9 एलपीजी सिलेंडर पर उन्हें सालाना 2700 रुपये की मदद मिलती थी, लेकिन अब इसमें एक झटके में 1500 रुपये की कमी कर दी गई है। 

सरकार की ओर से ग्लोबल एलपीजी प्राइस हाइक का हवाला देते हुए LPG Cylinder Price Hike और उज्ज्वला योजना के तहत रियायती सिलेंडरों की संख्या में कटौती के फैसले का बचाव किया है. बयान में कहा गया कि संशोधित सब्सिडी स्ट्रक्चर से सरकार पर वित्तीय बोझ कम करने में मददगार होगा, साथ ही खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। 

राम चरण की ‘पेड्डी’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाल, 150 करोड़ के पार पहुंचा कलेक्शन

राम चरण स्टारर ‘पेड्डी’ बॉक्स ऑफिस पर दमदार प्रदर्शन कर रही है. फिल्म का तेलुगु वर्जन 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुका है. शानदार कलेक्शन के बावजूद स्पोर्ट्स ड्रामा सोशल मीडिया पर कई वजहों से चर्चा और विवादों का हिस्सा बनी हुई है. हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक इवेंट के दौरान अभिनेता जगपति बाबू ने इपर रिएक्ट किया.

पेड्डी को लेकर क्या बोले जगपति बाबू
जगपति बाबू ने कहा कि ‘पेड्डी’ ने कई चुनौतियों का सामना किया और आखिरकार जीत हासिल की. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी फिल्म का असली फैसला आखिरकार वही दर्शक करते हैं, जो टिकट खरीदकर थिएटर तक पहुंचते हैं. उनके मुताबिक, 300 रुपये की टिकट खरीदने वाला दर्शक ही तय करता है कि फिल्म हिट होगी या नहीं. इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाना आसान नहीं था और निर्देशक के लिए प्रोड्यूसर ढूंढना भी चुनौतीपूर्ण रहा होगा.
नेगेटिव रिव्यू लिखने वालों को जगपति बाबू ने कहा थैंक्यू, बोले- हिट होने में की मदद

इवेंट के दौरान जगपति बाबू ने राम चरण की जमकर तारीफ की. उन्होंने साउथ स्टार को ‘सुपरमैन’ और ‘ही-मैन’ कहा. लास्ट में एक्टर ने उन लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने फिल्म की आलोचना की या नेगेटिव रिव्यू लिखे. उनका कहना था कि ऐसे रिव्यूज ने भी किसी न किसी तरह फिल्म को फायदा पहुंचाया है और ये हिट हुई.

पेड्डी के बारे में
बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी इस स्पोर्ट्स ड्रामा में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिवा राजकुमार, दिव्येंदु, रवि किशन और बोमन ईरानी जैसे कलाकार हैं. फिल्म को क्रिटिक्स से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला, जबकि दर्शकों के बीच जाह्नवी कपूर का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. पेड्डी की टक्कर बॉक्स ऑफिस पर वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ से हुई.

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