रायपुर : रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

रायपुर : रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों की रामलीला, कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुति और कवियों की ओजस्वी रचनाओं ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

रायपुर

सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा ‘जटायु मोक्ष’ की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।

रायपुर : बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम- वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम- वन मंत्री केदार कश्यप

साहित्य और तकनीक के अभिनव समन्वय (क्यूआर कोड) की हुई सराहना

रायपुर

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साझा बाल काव्य संग्रह मोर अंगना के शोर का विमोचन किया और सभी संबंधित रचनाकारों व शिक्षकों को सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री कश्यप ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास शिक्षा, संस्कार और साहित्य के माध्यम से ही संभव है। बाल साहित्य हमारी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम करता है।

मोर अंगना के शोर साझा बाल काव्य संग्रह का हुआ विमोचन

NEP और FLN के उद्देश्यों को मिलेगी मजबूती

        मंत्री कश्यप ने पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोर अंगना के शोर केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बच्चों की कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यह अभिनव प्रयास नई शिक्षा नीति (NEP) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)उद्देश्यों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

तकनीक और साहित्य का अनूठा संगमर- क्यूआर कोड आधारित नवाचार

       इस बाल काव्य संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल तकनीकी नवाचार है। पुस्तक में प्रत्येक कविता के साथ एक क्यूआर (QR) कोड जोड़ा गया है। इस पहल की सराहना करते हुए वन मंत्री ने कहा कि इससे बच्चे केवल कविताओं को पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें सुनकर भी सीख सकेंगे। यह साहित्य और तकनीक का एक बेहतरीन समन्वय है जो शिक्षा को अधिक रोचक, सरल और समावेशी बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यह अनूठी पहल दिव्यांग बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे वे भी समान रूप से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।

राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों की भूमिका

         मंत्री कश्यप ने पुस्तक के संपादक वीरेंद्र कुमार साहू, सभी लेखकों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की दिशा और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्मोर अंगना के शोरश् छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।

         इस विमोचन एवं सम्मान समारोह में स्थानीय विधायक एवं पद्मअनुज शर्मा, अमित चिमलानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार और शिक्षक गण उपस्थित रहे।

रायपुर : विशेष लेख : नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति

रायपुर : विशेष लेख : नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति
किसान भईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी

रायपुर

छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।

    नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

    छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

    नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

    परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

    छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

    छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। 

    वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।

तेजबहादुर सिंह भुवाल,  सहा. जनसंपर्क अधिकारी

मुरैना का सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम युगांतरकारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुरैना का सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम युगांतरकारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में स्वयं के बनाये हुए रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं : केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी
देश में अपनी तरह की अनूठी 440 मेगावॉट मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना का हुआ पॉवर परचेज एग्रीमेंट
देश में सबसे कम दो रुपए 70 पैसे प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त हुई

मुरैना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश नए आयाम प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुरैना की सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजना युगांतरकारी है। मध्यप्रदेश के सभी नागरिकों विशेषकर चंबल के निवासियों के लिए यह बधाई देने का विषय भी है। इस परियोजना में मात्र दो रुपए 70 पैसे प्रति यूनिट की प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त हुई है जो देश में अब तक की न्यूनतम दर और इस श्रेणी की परियोजनाओं के लिए पूर्व राष्ट्रीय मानक से भी कम है। परियोजना के विशेषता इसका अभिनव बैटरी मॉडल है जिसमें एक बैटरी का रोजाना 2 बार इस्तेमाल करना संभव होगा। इसके साथ ही नीमच और शाजापुर सौर पार्कों को लोकार्पण इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश की एतिहासिक उपलब्धि है। कार्यक्रम को नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में देश में अपने तरह की अनूठी 440 मेगावॉट मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के पावर परचेज एग्रीमेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि यह एग्रीमेंट और 2 सौर पार्कों का लोकार्पण नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय घटना है। यह एग्रीमेंट निरंतर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के पश्चात इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश की एक नई उपलब्धि है। कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मनु श्रीवास्तव, एमडी म.प्र. ऊर्जा विकास निगम अमित तोमर सहित आज सम्पन्न एग्रीमेंट से जुड़े संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बिजली के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। सभी क्षेत्रों में नई वैज्ञानिक खोजों के कारण नागरिकों को बेहतर लाभ दिलवाने की पहल देश में हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे का 20-25 वर्ष पुराना विवाद समाप्त करवाने में पूरा सहयोग किया। उनके मार्गदर्शन में पार्वती- कालीसिंध-चंबल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना मंजूर हुई, जिसमें राजस्थान भी लाभान्वित होगा और मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा से लेकर 13 जिलों के वृहद क्षेत्र को समृद्धि का लाभ मिलेगा। इसी तरह नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पंप स्टोरेज, बैटरी स्टोरेज, कोल, हाइड्रो के साथ सोलर एनर्जी के कई प्रकार उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में मुरैना सोलर ऊर्जा भण्डारण की परियोजना वर्तमान दौर में ऊर्जा उत्पादन की नई संभावनाओं को क्रियान्वित करने का ठोस उदाहरण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में स्वयं के बनाये रिकॉर्ड तोड़ रहे: केंद्रीय मंत्री जोशी

केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अद्भुत कार्य कर दिखाया है। प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद मध्यप्रदेश को नंबर वन बनाने में मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि सभी राज्य इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश की प्रगति सबसे तेज है। नई-नई नवकरणीयऊर्जा परियोजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं। इन परियोजनाओं से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास तथा आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है। केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि गुजरात और उत्तर प्रदेश भी प्रगति कर रहे हैं लेकिन मध्यप्रदेश की प्रगति सबसे अनूठी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सूर्य की शक्ति को समझा

केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि सूर्य पहले भी था लेकिन इसका उपयोग पहले नहीं हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने सूर्य की शक्ति को समझा, अन्य लोगों ने नहीं समझा। प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े पैमाने पर इसका उपयोग किया है। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश डॉ. यादव के नेतृत्व में अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर देश में सबसे आगे है। मध्यप्रदेश सभी राज्यों में उन्नत है , नई-नई परियोजनाओं से निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो हमने सोलर पार्क में बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं पीएम सोलर पार्क और सरकारी भवनों पर सोलर एनर्जी के इस्तेमाल के बारे में आज मैंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से निवेदन किया है। एक साल के अन्दर हम सभी सरकारी बिल्डिंग को सोलाराइज करेंगे।

प्रदेश अक्षय ऊर्जा निवेश में अग्रणी

मध्यप्रदेश आज देश के अग्रणी अक्षय ऊर्जा निवेश गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर चुका है। राज्य अब केवल बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा भंडारण के माध्यम से स्वच्छ, विश्वसनीय एवं किफायती विद्युत उपलब्ध कराने की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा भंडारण आधारित अक्षय ऊर्जा खरीद मॉडल को सक्रिय रूप से अपनाने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

लगभग एक गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा राष्ट्र को समर्पित

सोमवार को 500 मेगावॉट नीमच एवं 450 मेगावॉट शाजापुर सोलर पार्कों के माध्यम से 950 मेगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता राष्ट्र को समर्पित की गई है। यह उपलब्धि रीवा सौर परियोजना से प्रारम्भ हुई मध्यप्रदेश की अक्षय ऊर्जा यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

आगर-शाजापुर-नीमच (एएसएन) सौर परियोजना से भारतीय रेल को स्वच्छ विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जबकि रीवा सौर परियोजना से दिल्ली मेट्रो को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश लगातार अक्षय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करते हुए अब देश में नवाचार आधारित अक्षय ऊर्जा मॉडलों का अग्रणी राज्य बन गया है। इन परियोजनाओं का विकास एनटीपीसी नवकरणीय ऊर्जा लिमिटेड, टाटा पॉवर तथा वारी एनर्जीस जैसे प्रतिष्ठित परियोजना विकासकों द्वारा किया गया है। इनकी सफल स्थापना डेवलपर्स, शासन, ट्रांसमिशन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों तथा स्थानीय प्रशासन के उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है। इन परियोजनाओं से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास तथा आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है।

ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में नया आयाम है मुरैना सोलर + बीईएसएस परियोजना

मुरैना सोलर + बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजना के लिए पॉवर परचेस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में एक नया आयाम है, जहाँ अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण एवं विश्वसनीय विद्युत उपलब्धता पर विशेष बल दिया जा रहा है।

इस परियोजना में ₹2.70 प्रति यूनिट की देश की अब तक की सबसे प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त हुई है, जो इस श्रेणी की परियोजनाओं के लिए पूर्व राष्ट्रीय मानक से भी कम है। परियोजना की निविदा प्रक्रिया में देश-विदेश की 16 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया तथा लगभग 12 घंटे तक चली प्रतिस्पर्धी बोली के परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक टैरिफ प्राप्त हुआ।

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अभिनव बैटरी उपयोग मॉडल है, जिसमें एक ही बैटरी का प्रतिदिन 2 बार उपयोग किया जाएगा। इससे बैटरी असैट्स की उत्पादकता बढ़ी तथा ऊर्जा भंडारण की लागत में उल्लेखनीय कमी आई। बैटरी ऊर्जा भंडारण के साथ अक्षय ऊर्जा अब अधिक किफायती और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बनती जा रही है।

स्थापित क्षमता से सुनिश्चित आपूर्ति की दिशा में अग्रसर

प्रदेश अब केवल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। अब प्रदेश में विश्वसनीय एवं सुनिश्चित विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। ऊर्जा भंडारण राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का प्रमुख आधार बन चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में घोषित विज़न के अनुरूप राज्य ने 4 घंटे एवं 6 घंटे ऊर्जा भंडारण आधारित अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की निविदाएँ जारी कर दी हैं, जिन्हें उद्योग जगत से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। इसके साथ ही भारत की अग्रणी 24×7 राउंड-द-क्लॉक अक्षय ऊर्जा परियोजना की दिशा में भी राज्य आगे बढ़ चुका है, जिसकी प्री-बिड बैठक आगामी एक जुलाई 2026 को आयोजित होगी।

प्रक्रियाओं को बनाया सरल, प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण

प्रदेश सरकार ने परियोजना स्वीकृति, भूमि आवंटन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय प्रक्रियाओं को सरल एवं समयबद्ध बनाया है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग परियोजना की अवधारणा से लेकर कमीशनिंग तक निवेशकों को सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहा है।

किसानों को दिन में भी होगी विद्युत आपूर्ति

प्रदेश में 4,022 मेगावॉट फीडर सौर ऊर्जीकरण कार्यक्रम की निविदा में ₹2.40 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड न्यूनतम दर प्राप्त हुई है। किसानों को दिन के समय गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत उपलब्ध होगी तथा ग्रामीण जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा।

20 हजार मेगावॉट का लक्ष्य, हरित ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में अग्रसर प्रदेश

राज्य में वर्तमान में सौर, पवन, बैटरी ऊर्जा भंडारण तथा पम्प्ड स्टोरेज की अनेक परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। आगामी वर्षों में 20 हजार मेगावॉट से अधिक अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य की परियोजनाओं और पीपीए हस्ताक्षर से स्पष्ट है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज मध्यप्रदेश स्वच्छ, सस्ती एवं विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित विकास तथा “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीमच सोलर पार्क एवं ग्रीनको परियोजना का किया एरियल सर्वे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीमच सोलर पार्क एवं ग्रीनको परियोजना का किया एरियल सर्वे

11,470 करोड़ की ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना से होगा 1920 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन

परियोजना से क्षेत्र में रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास को मिलेगी नई गति

नीमच 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  नीमच के 500 मेगावाट सोलर पार्क एवं ग्राम खिमला में निर्माणाधीन ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना का एरियल सर्वे किया। सर्वे के बाद मुख्यमंत्री को पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से परियोजना की प्रगति, तकनीकी विशेषताओं एवं ऊर्जा उत्पादन क्षमता की विस्तृत जानकारी दी गई।

ग्रीनको ग्रुप द्वारा लगभग 11,470 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही 1920 मेगावाट क्षमता की गांधीसागर पम्प स्टोरेज परियोजना देश की अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना की ऊर्जा भंडारण क्षमता 10,326 मेगावाट प्रति घंटा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना के तहत गांधीसागर के मौजूदा जलाशय तथा खिमला में निर्मित किए जा रहे ऊपरी जलाशय का उपयोग पम्प स्टोरेज तकनीक से बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया में पानी का पुनः उपयोग होगा तथा वाष्पीकरण से होने वाली न्यूनतम हानि को छोड़कर अतिरिक्त जल की आवश्यकता नहीं होगी। परियोजना में 240 मेगावाट की 7 तथा 120 मेगावाट की 2 द्वि-दिशात्मक टर्बाइन इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।

खिमला परियोजना के निर्माण कार्य में वर्तमान में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसके पूर्ण होने पर क्षेत्र में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी, प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, ग्रीनको के सीईओ मौर्या, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक माधव मारू, अपर मुख्य सचिव नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्त्व, कलेक्टर हिमांशु चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

 

चीन ने बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा डैम, 315 मीटर ऊंचे पावर स्टेशन से बनेगी 7.7 अरब यूनिट बिजली

बीजिंग 

चीन ने दुनिया के सबसे ऊंचे डैम के हाइड्रोपावर स्टेशन के पहले यूनिट को बिजली ग्रिड से जोड़ दिया है. यह स्टेशन चीन के सिचुआन प्रांत में बना है. शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन 315 मीटर ऊंचा है. इसकी कुल क्षमता 20 लाख किलोवॉट है. इससे हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी. यह प्रोजेक्ट बिजली बनाने के साथ यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में बाढ़ का खतरा कम करने में भी मदद करेगा। 

शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन का डैम 315 मीटर ऊंचा है. इसी के साथ यह दुनिया का सबसे ऊंचा डैम बन गया है. इसे बनाने में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा समान का इस्तेमाल हुआ है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि इससे पूरी पृथ्वी की भूमध्य रेखा के चारों ओर करीब 1 मीटर ऊंची दीवार बनाई जा सकती है। 

हर साल बनेगी 7.7 अरब यूनिट बिजली
इस हाइड्रोपावर स्टेशन की क्षमता 20 लाख किलोवॉट है. इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी. इससे साफ एनर्जी का उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही कोयला जैसे ईंधनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। 

यह प्रोजेक्ट पहाड़ों के बीच और बेहद ठंडे इलाके में बनाया गया है. इसे बनाने के दौरान इंजीनियरों को गहरी नदी और कड़ाके की ठंड जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इनसे निपटने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. इनमें हेलियोस्टैट बेस्ड सरफेस हीटिंग और पूरी तरह बंद एयर-सपोर्टेड मेम्ब्रेन सिस्टम शामिल हैं। 

बाढ़ का खतरा कम करने में भी करेगा मदद
यह हाइड्रोपावर स्टेशन सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है. यह यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में पानी के बहाव को नियंत्रित करेगा. इससे बाढ़ का खतरा कम करने और पानी के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिलेगी। 

शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन चीन के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. दुनिया का सबसे ऊंचा डैम बनने के साथ इसने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है. इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। 

तंबाकू कंपनी का बड़ा फैसला, 9,000 कर्मचारियों की होगी छंटनी! वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

मैक्सिको

दुनिया की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनियों में शामिल ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (British American Tobacco – BAT) ने एक बड़ा फैसला लिया है। तंबाकू बनाने वाली इस कंपनी ने वैश्विक स्तर पर करीब 9,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि बदलते बाजार और लगातार घटती सिगरेट की डिमांड को देखते हुए अब वह अपने कारोबार का फोकस रेगुलर सिगरेट से हटाकर वेप (Vape), ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच जैसे नए उत्पादों की ओर ले जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BAT इस साल के अंत तक 5,500 कर्मचारियों की नौकरी खत्म करेगी, जबकि करीब 3,500 पदों को आउटसोर्स किया जाएगा, यानी कई विभागों का काम दूसरी कंपनियों को सौंप दिया जाएगा। कंपनी के अमेरिका से बाहर करीब 47,000 कर्मचारी हैं और यह छंटनी उनमें से लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों को प्रभावित कर सकती है।

कंपनी का टारगेट साल 2028 तक हर साल करीब 600 मिलियन पाउंड (करीब 6,800 करोड़ रुपये से अधिक) की लागत बचत करना है। इसके लिए BAT अपने पूरे बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव कर रही है। BAT का मानना है कि दुनिया भर में लोग धीरे-धीरे सिगरेट छोड़ रहे हैं और अब धूम्रपान के विकल्प के तौर पर वेप और निकोटीन पाउच जैसे उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। यही वजह है कि कंपनी आने वाले सालों में अपनी कुल आय का आधे से ज्यादा हिस्सा इन नए उत्पादों से कमाना चाहती है।

कंपनी पहले ही अपने लोकप्रिय ब्रांड Vuse (वेपिंग डिवाइस) और Velo (निकोटीन पाउच) पर बड़ा निवेश कर चुकी है। BAT की रणनीति फिलिप मॉरिस जैसी दूसरी बड़ी तंबाकू कंपनियों से मिलती-जुलती है, जो तेजी से स्मोक-फ्री उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं।

BAT (British American Tobacco) ने यह भी अनुमान लगाया है कि साल 2026 में दुनिया भर में रेगुलर सिगरेट की बिक्री में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। यही वजह है कि कंपनी भविष्य की तैयारी अभी से कर रही है। छंटनी के साथ-साथ BAT अपनी कई फैक्ट्रियों को भी बंद कर रही है। इसी साल जनवरी में कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका में स्थित अपनी एक सिगरेट फैक्ट्री बंद करने की घोषणा की थी। कंपनी का कहना था कि अवैध तंबाकू कारोबार के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा था।

इसके अलावा BAT अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। कंपनी का मानना है कि नई तकनीक के जरिए कई काम पहले से अधिक तेजी और कम लागत में किए जा सकते हैं। यही कारण है कि कई प्रशासनिक और सर्विस से जुड़े कार्य अब बाहरी कंपनियों को सौंपे जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, BAT ने यूके, सिंगापुर, पोलैंड, मलेशिया, रोमानिया, मैक्सिको और कोस्टा रिका समेत कई देशों में अपनी सर्विस सेंटर गतिविधियों को आउटसोर्स करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान में भी कंपनी ने कुछ सेवाएं स्थानीय टेक्नोलॉजी कंपनी को सौंप दी हैं।

BAT के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टाडेउ मारोको ने कहा कि यह फैसला आसान नहीं है, क्योंकि इससे हजारों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होंगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि कंपनी प्रभावित कर्मचारियों को हर संभव सहयोग देने की कोशिश करेगी और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार करेगी।

एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले सालों में तंबाकू उद्योग में इसी तरह के बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सिगरेट की घटती डिमांड और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ने के कारण कंपनियां अब ऐसे उत्पादों पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिन्हें वे स्मोक-फ्री विकल्प के रूप में पेश कर रही हैं।

 

PM मोदी की कैबिनेट में हो सकता है बड़ा फेरबदल, कौन होगा बाहर और किन नए चेहरों को मिल सकता है मौका?

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में परिवर्तन की चर्चा काफी समय से हो रही है, लेकिन जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और अमित शाह के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ये चर्चा तेज हो गई. कैबिनेट में बदलाव कब होगा, इसको लेकर भी दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कहा जा रहा है कि 28 या 29 जून को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है या फिर मानसून सत्र के बाद बदलाव होगा. मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, फिर 21 अगस्त के बाद कैबिनेट में बदलाव संभव है। 

ये पीएम मोदी के काम करने का स्टाइल है, आखिरी समय तक किसी को कुछ नहीं पता होता कि क्या होने वाला है. कैबिनेट रीशफल में भी यही दिख रहा है. चर्चाएं और कयास लग लग रहे हैं. अब आपको बताते हैं कि मोदी कैबिनेट रीशफल में किस किस को मौका मिल सकता है. और किस-किस का पत्ता कट सकता है। 

सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि…
* उद्धव गुट और TMC से टूटे कुछ सांसदों को मौका मिल सकता है.
* उद्धव गुट से आए संजय दीना पाटिल को जगह मिल सकती है.
* एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट रैंक दिया जा सकता है.
* TMC से आए काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की भी चर्चा है. तीनों में से कोई एक कैबिनेट में शामिल हो सकता है.
* केंद्रीय मंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी को संगठन में भेजा जा सकता है. पंकज चौधरी की जगह नया मंत्री बनाया जा सकता है.
* दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी संगठन भेजा जा सकता है. हर्ष मल्होत्रा की जगह भी नया मंत्री बनाया जा सकता है.
* इसके अलावा कई वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन भेजा जा सकता है.
* इनकी जगह युवा चेहरों को कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है.

यानी उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी का साथ छोड़कर आने वाले सांसदों को मौका मिल सकता है. तो वहीं कई पुराने वरिष्ठ नेताओं को वापस संगठन भेजा जा सकता है और उनकी जगह युवाओं को मौका मिल सकता है. यानी एक तरफ उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी हैं, जिनकी पार्टी ही टूट गई है, फिर भी पुराने कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई दी है। 

25 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन था. पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू करने में धर्मेंद्र प्रधान की सराहनीय भूमिका है. पीएम मोदी की इस बधाई की बड़ी चर्चा हो रही है क्योंकि इंडी गठबंधन से लेकर कॉक्रोच पार्टी तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही है. पेपर लीक के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विपक्ष हमलावर है. ऐसे में पीएम मोदी के बधाई संदेश के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। 

सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

 जबलपुर
 हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करना सरकार और उसके अधिकारियों का संवैधानिक दायित्व है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात मानी जाएगी।

अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा में नाकाम रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जानी चाहिए। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की जा सकती है।

वर्षों तक फाइल दबाए रखने वालों को संदेश
हाई कोर्ट का यह आदेश सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के लिए सख्त संदेश माना जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारियों की लापरवाही के कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो केवल सरकारी खजाने पर इसका भार नहीं डाला जा सकता। ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कोर्ट ने प्रशासनिक निष्क्रियता को केवल सामान्य चूक नहीं माना, बल्कि इसे जनता की संपत्ति की सुरक्षा के संवैधानिक दायित्व की अनदेखी बताया।

बैतूल की 5.5 हेक्टेयर सरकारी जमीन का मामला
यह मामला बैतूल जिले के सूरगांव स्थित करीब 5.5 हेक्टेयर सरकारी भूमि के विवाद से जुड़ा है। इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जो वर्ष 2004 के निर्णय के खिलाफ लगभग 12 साल बाद दायर की गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने समय रहते आवश्यक कानूनी कदम नहीं उठाए। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना।

सार्वजनिक संसाधनों की सरकार ट्रस्टी
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने पब्लिक ट्रस्ट डाक्ट्रिन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक संसाधनों की मालिक नहीं, बल्कि उनकी ट्रस्टी होती है। इसलिए सरकारी जमीन को निजी हाथों में जाने से रोकना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में विफल रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

कलेक्टर से पटवारी तक जांच की अनुमति
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तत्कालीन कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने की स्वतंत्रता दी है।

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन 31 अक्टूबर तक

बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन 31 अक्टूबर तक

भोपाल

श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। योजना के अंतर्गत बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत संतानों को स्‍कूली शिक्षा से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा समय-सीमा में आवेदन एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।

उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर एक जून से प्रारंभ हो चुके हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने महाविद्यालयों से अधिकाधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और उनके आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है।

योजना के अंतर्गत कक्षा एक से लेकर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। कक्षा एक से चौथी तक के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये, कक्षा 5 से 8 तक 1,500 रुपये, कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये, कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों को 3,000 रुपये तथा आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं डिग्री पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 25,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है।

यह सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। योजना का लाभ बीड़ी श्रमिकों, लौह अयस्क, मैंगनीज एवं क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट खदान श्रमिकों के पात्र बच्चों को दिया जाता है। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।

 

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