वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर

रायपुर

 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उद्यमों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप 

12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन शासन की वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय तथा संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर

समूह को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इससे समूह की विश्वसनीयता बढ़ी और नए बाजारों के द्वार खुले।

38.90 लाख रूपए का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे सदस्यों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा
जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम है।

हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपए वार्षिक

इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य समूहों के लिए प्रेरणा

हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह सफलता आज पूरे प्रदेश और देश के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई

क्या भगवान मंत्रियों का इंतजार करते हैं? VIP दर्शन व्यवस्था पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए बीते  पूछा कि भगवान के सामने तो सभी लोग समान होते हैं तो मंदिरों में VIP दर्शन जैसी व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। इसकी वजह से आम श्रद्धालुओं को मंदिर के बाहर इंतजार करना पड़ता है। दरअसल, जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच मंदिरों में वीआईपी दर्शन और स्पेशल दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, तब उन्होंने यह टिप्पणी की।

‘मंदिर में मंत्रियों की प्रतीक्षा नहीं कर रहे भगवान’
सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मंत्रियों और विधायकों को यह ना समझने दें कि वे किसी भी वक्त मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और भगवान उनकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे। VIP दर्शन की जरूरत ही क्या है? भगवान के सामने सभी समान हैं।’

याचिका में की गई VIP दर्शन को खत्म करने की मांग
लाइव लॉ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, मंदिर कला से जुड़े कलाकार, नवविवाहित जोड़े, राज्य के प्रमुख, संवैधानिक पदाधिकारी और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी लोगों के लिए VIP दर्शन और विशेष दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने पहले यह भी पूछा था कि क्या 15 मई को किसी मंत्री के दर्शन के लिए तिरुपरंकुंद्रम सुब्रमण्यस्वामी मंदिर के बंद होने का वक्त बढ़ाया गया था।

6 हफ्ते बाद होगी मामले की अगली सुनवाई
इस पर एडिशनल एडवोकेट जनरल पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच को बताया कि मंदिर के बंद होने के वक्त में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस संबंध में एक रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई है। फिर, पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। मद्रास हाईकोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए केस की अगली सुनवाई 6 हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

VHP के पदाधिकारी ने दाखिल की है याचिका
जान लें कि यह याचिका, मद्रास हाईकोर्ट में विश्व हिंदू परिषद की उत्तर तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष पी. चोक्कलिंगम ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम की धारा 6(15)(b) के अंतर्गत उनकी अर्जी विचार योग्य है।

सनातन धर्म नहीं सिखाता भेदभाव
पी. चोक्कलिंगम ने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म, जाति, आर्थिक संपन्नता या सामाजिक हैसियत के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म सभी मनुष्यों को एक बराबर मानने की शिक्षा देता है, इसलिए मंदिरों के अंदर वीआईपी और आम श्रद्धालु या अमीर और गरीब के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के दौरे को लेकर है। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दर्शन के लिए तिरुपरनकुंड्रम स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर को बंद करवा दिया था। इसके बाद जब उन्होंने दर्शन कर लिए उसके बाद मंदिर खोला गया। विपक्ष के इन आरोपों को विजय सरकार ने खारिज किया है।

मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला विश्व हिंदू परिषद तमिलनाडु ईकाई के नेता पी, चोकलिंगम की याचिका पर शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि निर्मल कुमार की तरह ही कई बार मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए जाते हैं, जिसकी वजह से आम जनता को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में धन, सामाजिक स्थिति या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता है और सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

हालांकि, चोकलिंगम ने अपनी याचिका में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में सेवा करने वाले कलाकारों, राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक अधिकारियों सहित कुछ श्रेणियों के लिए छूट की मांग की।

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में रचा इतिहास, उत्पादन और बिक्री ने बनाए नए रिकॉर्ड

हैदराबाद    

 सरकार के स्वामित्व वाली लौह अयस्क की प्रमुख कंपनी एनएमडीसी ने अब तक के सबसे मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को समाप्त किया। उत्पादन में मजबूत वृद्धि और अनुशासित निष्पादन ने कंपनी को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में मदद की।

वित्त वर्ष 26 में लौह अयस्क उत्पादन 21% बढ़कर 53.16 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और बिक्री 13% बढ़कर 50.24 मिलियन टन हो गई, जिससे एनएमडीसी ने  अपने इतिहास में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक मात्रा दर्ज की। ये दोनों मील के पत्थर घरेलू इस्पात की सुदृढ़ मांग और भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक की बढ़ती क्षमताओं दोनों का संकेत देते हैं। 

उत्पादन और प्रेषण में वृद्धि ने सीधे एनएमडीसी के वित्तीय प्रदर्शन को बढ़ावा दिया, जिससे वित्त वर्ष 26 में टर्न ओवर 33% बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 31,554 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। । ईबीआईटीडीए 9% बढ़कर रु. 10,737 करोड़ हो गया जबकि कर पूर्व लाभ 9% बढ़कर रु. 10,155 करोड़ और निवल लाभ 11% बढ़कर रु. 7,421 करोड़.हो गया। 

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में 3,690 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया साथ ही शेयरधारक रिटर्न को सुदृढ़ बनाए रखा। बोर्ड ने शेयरधारक अनुमोदन के अधीन, 1 रुपये प्रति शेयर के अंतिम लाभांश की सिफारिश की। साथ ही वित्त वर्ष26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर रु. 2.5 के अंतरिम लाभांश घोषित किया। इस प्रकार वर्ष के लिए कुल लाभांश की राशि रु. 3,077 करोड़ होती है।.

एनएमडीसी ने उत्पादन, बिक्री और वित्तीय मेट्रिक्स में व्यापक आधार पर वृद्धि के साथ चौथी तिमाही के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को एक मजबूत स्थिति में समाप्त किया। लौह अयस्क का उत्पादन वर्ष -दर-वर्ष 22% बढ़कर 16.27 मिलियन टन हो गया, जबकि बिक्री 21% बढ़कर 15.30 मिलियन टन हो गई।

मात्रा में मजबूत वृद्धि ने वित्तीय प्रदर्शन में तेजी से वृद्धि की, जिसमें टर्न ओवर 61% बढ़कर रु. 11,173 करोड़ हो गया। कर पूर्व लाभ 22% बढ़कर रु. हो गया। 2,875 करोड़, जबकि कर पश्चात लाभ 35% बढ़कर रु. 2,020 करोड़ रुपये हो गया। इसे बेहतर प्राप्ति और स्थिर परिचालन दक्षता द्वारा समर्थन मिला। ईबीआईटीडीए 21% बढ़कर रु. 3,072 करोड़ हो गया।  तिमाही के प्रदर्शन ने इस सेक्टर क्षेत्र में एनएमडीसी के प्रभुत्व को और मजबूत किया।
 
एनएमडीसी के सीएमडी  अमिताभ मुखर्जी ने कहा, “रिकॉर्ड उत्पादन, टॉप लाइन में वृद्धि, रणनीतिक पूंजी नियोजन और सभी क्षेत्रों में मजबूत वित्तीय मेट्रिक्स के साथ, एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 को एक ऐसी गति के साथ बंद किया जो हमें भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में एक विशिष्ट उच्च स्थान में रखता है। हम इस मात्रात्मक वृद्धि को बनाए रखने, परिसंपत्ति उत्पादकता बढ़ाने और भविष्य के लिए तैयार खनन क्षमता का निर्माण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।“ 
 
यह प्रदर्शन कंपनी के भीतर चल रहे परिवर्तन को दर्शाता है, जो मुख्य रूप से उच्च-नकदी-प्रवाह खनन पीएसयू से एक बड़े पैमाने वाले, पूंजी-गहन संसाधन उद्यम के रूप में उभर रहा है, जिसमें परिचालन और वित्तीय पैमाना बढ़ रहा है।

वृद्धि , नकदी प्रवाह और क्षमता एनएमडीसी के वित्त वर्ष 26 रिकॉर्ड प्रदर्शन को परिभाषित करते हैं – टॉपलाइन में 33% की वृद्धि, आउटपुट में 21% की वृद्धि

वि.व. 26    वि.व.25    वृद्धि     4थी तिमाही वि.व.26    4थी तिमाही वि.व.25    वृद्धि

उत्पादन    53.16    44.07    21%    16.27    13.31    22%
बिक्री    50.24    44.40    13%    15.30    12.67    21%
टर्नओवर    31,554    23,668    33%    11,173    6,953    61%
पीबीटी    10,155    9,296    9%    2,875    2,351    22%
पी ए टी    7,421    6,693    11%    2,020    1,496    35%
ईबीआईटीडीए    10,737    9,847    9%    3,072    2,538    21%
उत्पादन और बिक्री मिलियन टन में, और वित्तीय आंकड़े करोड़ रुपये में

पितृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DNA टेस्ट को बताया न्याय के लिए जरूरी

महासमुंद.

महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पलसापाली से जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका समाधान किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायहित में वैज्ञानिक जांच आवश्यक हो जाती है।

यह मामला कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। विवाद उस युवक द्वारा दायर दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें उसने स्वयं को संबंधित व्यक्ति का पुत्र बताते हुए संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया था। युवक की माता का कहना था कि वर्ष 1999 में दोनों के बीच संबंध बने थे, जिसके बाद युवक का जन्म हुआ। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति लगातार पितृत्व से इंकार करता रहा। मामले में पहले भरण-पोषण को लेकर भी कई कानूनी कार्यवाहियां हुई थीं। निचली अदालतों और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पितृत्व का स्पष्ट निर्धारण डीएनए परीक्षण के बिना संभव नहीं है। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए सैंपल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से कहा गया कि लगातार पितृत्व से इंकार किए जाने के कारण सच्चाई सामने लाने का एकमात्र प्रभावी माध्यम डीएनए परीक्षण ही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डीएनए परीक्षण सामान्य रूप से आदेशित नहीं किया जाता, लेकिन जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका उत्तर किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायालय वैज्ञानिक जांच का आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जो विवाद का अंतिम समाधान दे सके। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर कभी सामने नहीं आया, तो संबंधित युवक अपने वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों से वंचित हो सकता है।

निजता के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं होता और न्यायहित में उसका संतुलन दूसरे पक्ष के अधिकारों के साथ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के हितों का संतुलन डीएनए परीक्षण के पक्ष में जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अपील खारिज करते हुए संबंधित दीवानी न्यायालय को डीएनए परीक्षण की तिथि निर्धारित कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से अभिनव श्रीवास्तव व स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल की पुत्री अधिवक्ता बरखा अग्रवाल ने पैरवी की। 

गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान सत्य, सेवा और मानवता की रक्षा का अमर संदेश : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज  गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सुशासन तिहार बना लोगों की राहत का जरिया, घर के पास ही सुलझ रहीं समस्याएं

रायपुर.

छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने और जनता की समस्याओं को उनके घर के पास ही सुलझाने का महाअभियान ”सुशासन तिहार 2026” लगातार सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत घठुला में आयोजित क्लस्टर स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते एक ही छत के नीचे 509 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।

इस शिविर में घठुला, लटियारा, पाईकभाठा, रतावा, पोड़ागांव, लखनपुरी, फरसगांव, पांवद्वार, गिधावा, बोरई, घुटकेल, मैनपुर, बिरनासिली एवं लिखमा सहित कुल 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिविर में न केवल लोगों की शिकायतें सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की लाइव जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे लोगों को जागरूक होने का अवसर मिला। शिविर के दौरान कुल 528 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 523 आवेदन विभिन्न मांगों से संबंधित और 05 आवेदन जनता की शिकायतों से जुड़े थे। शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राप्त आवेदनों में से 509 का मौके पर ही निपटारा कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई, जबकि शेष बचे आवेदनों के लिए उपस्थित आला अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए। 

हितग्राहियों को योजनाओं की  दी सौगात
शिविर स्थल पर ही हितग्राहियों को योजनाओं की सौगात दी गई, जिसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को सुपोषण किट, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा 01 हितग्राही को दिव्यांग सहायक उपकरण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को मनरेगा जॉब कार्ड का वितरण किया गया।

शासन और जनता के बीच का फासला हुआ कम
शिविर में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार का असली मकसद आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत समाधान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

मध्य भारत की हृदयस्थली में नई संभावनाओं को साकार करने वाला राजमार्ग : बोरगांव से शाहपुर तक

भोपाल 

मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे कृषि क्षेत्र और मध्य भारत के केले के प्रमुख केन्द्र खंडवा और बुरहानपुर में प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। यहां से प्रतिदिन 140 भारी-भरकम ट्रक घरेलू बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक केले पहुंचाते हैं। वर्षों से इन ट्रकों को संकरी और जर्जर सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था। इससे आवागमन धीमा हो जाता था, यात्रा का समय बढ़ जाता था और परिवहन एक कठिन कार्य बन जाता था। लेकिन महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-753एल के बोरगांव से शाहपुर खंड के आधुनिक चार-लेन वाले राजमार्ग गलियारे के रूप में विकसित होने से अब यह स्थिति बदलने वाली है।

एनएच-753एल का बोरगांव से शाहपुर तक का खंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह महाराष्ट्र में बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का हिस्सा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित इस गलियारे से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर-राज्यीय संपर्क को नया रूप मिलने की उम्मीद है। लगभग 944 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा यह गलियारा लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और इसका 85 प्रतिशत निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पूर्ण रूप से निर्मित होने के बाद, यह मार्ग इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के बीच एक तेज, सुरक्षित एवं  अधिक कुशल वैकल्पिक संपर्क के रूप में उभरेगा और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए अंतर-राज्यीय परिवहन की एक प्रमुख धुरी बन जाएगा।

खेत से बाजार तक के संपर्क को मजबूती

यह परियोजना केले, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध कृषि प्रधान क्षेत्रों से होकर गुजरती है। स्थानीय किसानों और ट्रांसपोर्टरों के लिए, इन बेहतर सड़कों का सीधा लाभ यह होगा कि उनकी बाजार तक तेजी से पहुंच संभव होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी।

इस क्षेत्र के गांवों के लिए, यह राजमार्ग पहले से ही दैनिक जीवन में एक बड़ा सुधार साबित हो रहा है। बुरहानपुर जिले की झीरी पंचायत की सरपंच आशा कैथवास बताती हैं कि पुरानी सड़क की खराब हालत के कारण परिवहन कितना कठिन हो गया था। उनके अनुसार, क्षतिग्रस्त सतहों और गड्ढों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पहले बेहद चुनौतीपूर्ण थी। नए राजमार्ग के बनने से ट्रकों की आवाजाही काफी सुगम हो गई है। इससे किसानों और ट्रांसपोर्टरों, दोनों को कृषि उपज को अधिक कुशलता से ले जाने में मदद मिल रही है।

इस गलियारे में 1 रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 3 हल्के वाहनों के लिए अंडरपास (एलवीयूपी), 5 छोटे वाहनों के लिए अंडरपास (एसवीयूपी) और 6 वाहनों के लिए अंडरपास (वीयूपी) शामिल हैं। इनमें से कई संरचनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि स्थानीय संपर्क बाधित न हो और गांवों, खेतों एवं आसपास के इलाकों के बीच आवागमन सुचारू व निर्बाध बना रहे।

शहरों को करीब लाना

शाहपुर-बुरहानपुर इलाके के कोल्ड स्टोरेज संचालक गोपाल कडुतेमकर बताते हैं कि जलगांव लगभग 90 किलोमीटर दूर है, जबकि महाराष्ट्र की सीमा यहां से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है। उनका मानना ​​है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मालवा क्षेत्र एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे। तेज यात्रा, परिवहन की लागत में कमी और सुगम आवागमन से स्थानीय व्यवसायों, आपातकालीन यात्रा तथा दैनिक आवागमन को लाभ होने की उम्मीद है।

शाहपुर और बुरहानपुर के आसपास रहने वाले कई निवासियों के लिए, महाराष्ट्र से संपर्क हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की सीमा के निकट है। पूरा होने पर, यह नया राजमार्ग आसपास के शहरों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को काफी आसान बना देगा।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण: एनएच-753एल का बोरेगांव-शाहपुर खंड

  •     परियोजना की लागत: 944 करोड़ रुपये
  •     कुल लंबाई: लगभग 47 किलोमीटर
  •     निर्माण में प्रगति: लगभग 85 प्रतिशत पूर्ण
  •     जुड़ने वाले प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र
  •     प्रमुख संपर्क मार्ग: इंदौर – खंडवा – बुरहानपुर – जलगांव – छत्रपति संभाजीनगर
  •     प्रमुख अवसंरचना: 1 आरओबी, 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 14 अंडरपास
  •     कस्बों और शहरी क्षेत्रों में भीड़ कम करने के लिए लगभग 26 किलोमीटर का बाईपास
  •     सुरक्षित स्थानीय आवागमन हेतु 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड तेज और सुरक्षित आवागमन हेतु डिजाइन किया गया

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका सुनियोजित भविष्योन्मुखी अवसंरचना विकास है। इसमें लगभग 26 किलोमीटर लंबी एक व्यापक बाईपास प्रणाली का विकास शामिल है, जो कुल मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारी एवं द्रुत यातायात को शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर मोड़ना है। इससे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़, प्रदूषण और यात्रा में होने वाली देरी में कमी आएगी। साथ ही, स्थानीय यातायात की सुरक्षित और सुगम आवाजाही के लिए 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोडों का निर्माण किया जा रहा है। ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और छोटी बस्तियों को जोड़ेगी। इससे स्थानीय यात्री मुख्य राजमार्ग पर आए बिना सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेंगे।

अंतर-राज्यीय संपर्क को बढ़ावा

यह मार्ग महाराष्ट्र के मुक्तईनगर क्षेत्र की ओर आगे बढ़ता है, जिससे एक मजबूत अंतर-राज्यीय संपर्क स्थापित होता है। यह गलियारा स्थानीय संपर्क से कहीं आगे बढ़कर इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर को जोड़ने वाले एक सुव्यवस्थित परिवहन नेटवर्क के निर्माण में योगदान देता है।

इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एक सशक्त वैकल्पिक आर्थिक गलियारे के रूप में इसकी भूमिका है। वर्तमान में, इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर के बीच यातायात काफी हद तक पारंपरिक मार्गों पर निर्भर करता है, जहां अक्सर जाम, संकरी सड़कें और लंबी यात्रा अवधि जैसी समस्याएं होती हैं। इससे यात्री और माल ढुलाई, दोनों प्रभावित होती हैं। बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक के पूरे मार्ग को आधुनिक चार-लेन वाले गलियारे के रूप में विकसित करने से एक तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, विशेष रूप से भारी वाहनों और माल परिवहन के लिए।

इस गलियारे के विकास से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।

आशा की एक नई किरण

शाहपुर-बुरहानपुर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए, एनएच-753एल का बोरगांव-शाहपुर खंड कंक्रीट और डामर की एक पट्टी से कहीं अधिक मायने रखता है। स्थानीय कोल्ड स्टोरेज संचालक कडुतेमकर बताते हैं कि यह सड़क अस्पतालों, बाजारों, उद्योगों और अवसरों को उन समुदायों के करीब लाएगी जो लंबे समय से बुनियादी जरूरतों के लिए भी दूर के संपर्कों पर निर्भर रहे हैं।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संबंधों को मजबूत करते हुए और इंदौर तथा मालवा क्षेत्र को पहले से कहीं अधिक करीब लाते हुए, यह गलियारा रोजमर्रा की जिंदगी को नया रूप देने के लिए तैयार है – यह लंबी व अनिश्चित यात्राओं को तेज, सुरक्षित एवं अपेक्षाकृत अधिक जुड़ाव वाली यात्राओं में बदल रहा है।

 

20 साल बाद MP में लौटेगी सरकारी बस सेवा, केसरिया रंग की बसें दौड़ेंगी सड़कों पर

भोपाल

 सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत प्रदेश में केसरिया रंग की बसें दौड़ेंगी। बीच में सफेद रंग की पट्टी होगी। पीएम ई-बस सेवा की बसों का रंग भी लगभग इसी तरह का है। सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेश भर में 10 हजार से अधिक बसें चलेंगी।

पहले चरण में शहरी, उपनगरीय और दूसरे राज्यों के लिए एक साथ बसें चलाने की तैयारी है। इसकी शुरुआत जुलाई से इंदौर संभाग से करने का प्रयास है। शीघ्र ही बोर्ड की मीटिंग होने वाली है। इसके बाद कंपनी में भर्ती शुरू होगी। सरकार निजी बसों को अनुबंधित कर अपने नियंत्रण में संचालित करेगी। संचालन के लिए संभागीय स्तर पर सात कंपनियां बनाई गई हैं।

मप्र राज्य सड़क परिवहन सेवा की बसें चलती थीं

बता दें कि प्रदेश में मप्र राज्य सड़क परिवहन सेवा की बसें चलती थीं। घाटे के चलते तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने दिसंबर 2002 में सेवा बंद करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2005 से यह बसें बंद हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालने के दो माह के भीतर फिर शासकीय नियंत्रण में सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

लगभग दो वर्ष की तैयारी के बाद अब बसों का संचालन शीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है, जिनका किराए को लेकर निर्णय अभी होना है। बस संचालक किराया बढ़ाने की लगातार मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्ष 2021 से किराया नहीं बढ़ाया गया है, जबकि डीजल की कीमतें व अन्य खर्च बढ़े हैं।

पहले चरण में दो वर्ष में 5206 बसें चलेंगी

योजना के पहले चरण में प्रदेश के कुल 1,164 मार्गों पर लगभग 5,206 बसों का संचालन अगले दो वर्षों में किया जाएगा। इनमें इंदौर क्षेत्र के कुल 121 मार्गों पर कुल 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र के 120 मार्गों पर 371 बसें, भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों पर 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र के 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र के 92 मार्गों पर 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र के 65 मार्गों पर 298 बसें और रीवा क्षेत्र के 35 मार्गों पर 184 बसें चलाई जाएंगी। क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्ग स्वीकृति के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। बसों की निगरानी के लिए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैंनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) स्थापित किया जा रहा है।

जबलपुर में ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगी आग, बड़ा हादसा टला

जबलपुर

 शक्ति भवन स्थित तरंग ओडिटोरियम शनिवार की शाम करीब सात बजे उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शार्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग लगते हैं लाइट बंद हो गई और ओडिटोरियम सहित परिसर में अंधेरा छा गया।

आग लगने और कक्ष से धुआं निकलता देख दर्शक और कलाकार बाहर की तरफ भागने लगे। आयोजकों ने मोबाइल के टार्च की रोशनी अभिनेता आशुतोष राणा सहित मंडली के अन्य कलाकारों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं नगर निगम के फायर बिग्रेड को भी सूचना दी गई।

ग्रीन रूम में लगी आग

प्रत्यक्षदर्शियों के दौरान शनिवार की ‘ हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शाम करीब सात बजे ग्रीन के पास पास शार्ट सर्किट से आग लग गई। बिजली भी बंद हो गई। आग धीरे-धीरे भड़कने लगी और पूरे ग्रीन सहित आस-पास धुआं का गुबार छा गया। बिजली गुल होने आग लगने से आयोजन स्थल में अफरातफरी मच गई। दर्शक सीट छोड़कर बाहर आ गए।

पर्याप्त नही थे अग्नि सुरक्षा के इंतजाम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तरंगा ओडिटोरियम में आग से बचाव के सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त नही थे। आयोजक व ओडिटोरियम के कर्मचारियों ने मौजूद अग्निशमन संयंत्रों से आग बुझाने की कोशिश की परंतु सफलता नही मिली। नगर निगम के फायर बिग्रेड ने सूचना मिलते ही एक दमकल वाहन रवाना किया। दमकल कर्मियों कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। गनीमत रही कि आग भड़की नही वरना बड़े हादसे भी इंकार नही किया जा सकता।

 

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल

अमरकंटक धाम में तीन दिवसीय ‘स्वच्छता व कुण्ड सेवा अभियान में स्वयं किया श्रमदान

भोपाल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि माँ नर्मदा केवल आस्था की प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। हमारी नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक को अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। मंत्री पटेल ने यह विचार अमरकंटक धाम स्थित माँ नर्मदा नदी के पावन उद्गम स्थल पर 29 से 31 मई तक आयोजित इस विशेष स्वच्छता अभियान में श्रमदान के दौरान व्यक्त कियें। मंत्री पटेल ने विशेष बल देते हुए कहा कि नदियों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार है, क्योंकि यदि आज हम जल स्रोतों और उद्गम स्थलों को संरक्षित करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी।

मंत्री पटेल ने स्वयं उपस्थित होकर जनभागीदारी के साथ सक्रिय रूप से श्रमदान किया। ‘मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन’ एवं ‘निर्विकार पथ’ के सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर उद्गम और कुण्ड क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण तथा सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया, जिससे यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लंबे समय से जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और जनजागरण के कार्यों को व्यापक गति मिली है। अमरकंटक में माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पर किया गया यह श्रमदान उसी पर्यावरण-संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा और जनसहभागिता से जल संरक्षण के इस प्रयास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

 

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