भारत को अक्षय ऊर्जा की वैश्विक महाशक्ति बना रही पीएम सूर्य घर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। आत्मनिर्भर ऊर्जा के साथ सशक्त भारत की दिशा में केन्द्र सरकार के बढ़ते कदमों का ही सुपरिणाम है कि आज देश के 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित हो गए हैं। इनमें मध्यप्रदेश के 1 लाख 29 हजार 971 घर शामिल हैं। ये सभी घर-परिवार अब बिजली बिल की चिंता से हमेशा के लिए मुक्त होकर स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा से रौशन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में स्थापित इन सोलर संयंत्रों से 456 मेगावॉट से अधिक स्वच्छ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी हो रहा है।

केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के नेशनल पोर्टल के अनुसार इस योजना से अब तक प्रदेश के 1 लाख 34 हजार 436 परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। प्रदेश के पीएम सूर्य घर योजना हितग्राहियों को अब तक 901.92 करोड़ रुपये की अनुदान (सब्सिडी) राशि रिलीज की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदेश में 6 लाख घरों को ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ के तहत सौर ऊर्जा से रौशन करने का लक्ष्य लिया गया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए तेजी से काम जारी है। विभाग को अब तक 2 लाख 4 हजार 601 आवेदन मिल चुके हैं।

 

 

परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय और टीम भावना सर्वोपरि: सिंह

भोपाल

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी (एमपीयूडीसी) की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त प्रबंध संचालक  दिव्यांक सिंह ने परियोजना प्रबंधकों एवं संविदाकारों को निर्देशित किया है कि समस्त जलप्रदाय एवं मलजल योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च तकनीकी गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रबंधन इकाई, क्रियान्वयन इकाई, स्थानीय निकाय और संविदाकार आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें जिससे जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हो सके।  सिंह ने वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए संविदाकारों को कड़ी हिदायत दी कि वे प्राथमिकता के आधार पर सड़कों के जीर्णोद्धार (रोड रेस्टोरेशन) के शेष कार्यों को मानसून पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर जल प्रदाय के देयक वितरित करने और वाटर आईडी को प्रॉपर्टी आईडी से लिंक करने की प्रक्रिया को गति प्रदान करने के निर्देश दिए जिससे राजस्व प्रबंधन सुदृढ़ हो सके।

भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगर प्रबंधन संस्थान में आयोजित बैठक में पूर्ण तथा प्रगतिरत कुल 134 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की बिंदुवार एवं सूक्ष्म समीक्षा की गई। अतिरिक्त प्रबंध संचालक ने रेखांकित किया कि परियोजना क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्याओं से वरिष्ठ प्रबंधन को समय रहते अवगत कराया जाए जिससे उनके त्वरित निवारण में कोई विलंब न हो। उन्होंने परियोजना प्रबंधकों को अनुबंधों की शर्तों का गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन करने का परामर्श भी दिया इससे संविदात्मक स्तर पर कोई गतिरोध उत्पन्न न हो। बैठक में विभिन्न बाह्य विभागों जैसे एमपीआरडीसी, एनएचएआई, जल संसाधन तथा एमपीआरडीए से लंबित अनुमतियों और अनापत्ति प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रकरणों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिससे विकास कार्यों की गति निर्बाध बनी रहे।

समीक्षा बैठक के तकनीकी सत्र में परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का व्यापक प्रस्तुतीकरण प्रमुख अभियंता  आनंद सिंह एवं मुख्य अभियंता  शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें प्रत्येक परियोजना की अद्यतन स्थिति और आगामी कार्ययोजना को रेखांकित किया गया। बैठक का समन्वय उप परियोजना संचालक प्रशासन  राजीव रंजन पांडे द्वारा निष्पादित किया गया। बैठक में सहभागिता के रूप में एमपीयूडीसी की समस्त 10 क्षेत्रीय इकाइयों के परियोजना प्रबंधक, सहायक परियोजना प्रबंधक, संबंधित संविदाकार तथा परियोजना सलाहकार फर्मों के विषय-विशेषज्ञ एवं तकनीकी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

पन्ना पुलिस ने एपीके फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लगातार सख्त एवं तकनीकी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पन्ना पुलिस ने एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया गया है।

फरियादी गोपाल बंसकार ने 1930 साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर बताया कि उसके सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सिमरिया स्थित खाते से संचालित नवी यू.पी.आई. एप के माध्यम से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुल 1 लाख 90 हजार रुपये की साइबर ठगी की गई है।

शिकायत प्राप्‍त होते ही पुलिस अधीक्षक पन्ना मती निवेदिता नायडू के निर्देशन में पुलिस एवं साइबर सेल की एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा फरियादी के मोबाइल फोन में एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कराकर मोबाइल का अनाधिकृत एक्सेस प्राप्त किया गया था। एपीके फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल की संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग एक्सेस, यूपीआई एवं ट्रांजेक्शन ओटीपी संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से अवैध ट्रांजेक्शन किये।

पुलिस टीम द्वारा तकनीकी जांच एवं डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के दौरान पता चला कि 23 अप्रैल को फरियादी के खाते से 95 हजार रुपये तथा 27अप्रैल को पुनः 95 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किये गये थे।

विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं साइबर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने अन्‍य साथियों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया है।

मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, संदिग्ध लिंक अथवा मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन अथवा मोबाइल एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराएं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध सतर्क, सक्रिय एवं प्रतिबद्ध होकर आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत है।

 

इंदौर में नकली बायो डीजल बेचने वाले डीजल पंप पर कार्रवाई, प्रतिष्ठान सील

इंदौर

इंदौर जिले के देपालपुर मेथवाडा स्थित मे. इंदौर बायो एनर्जी प्रा.लि. बायो डीजल पंप भागीदार सुनीता पति सुभाष केसवाल एवं सुभाष पति रामचंद्र केसवाल निवासी द्वारकापुरी द्वारा अवैध रूप से नकली बायो डीजल की बिक्री करने पर खाद्य विभाग द्वारा शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने पंप को सील कर दिया है। मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप पर प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल होना पाया गया।

बताया गया कि मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप की शिकायत प्राप्त होने पर खाद्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल पाए जाने पर पंप को सील किया।

साथ ही पंप संचालक द्वारा राज्य सरकार के अधिकृत लाइसेंस प्राप्त छह कंपनी के सप्लायर से सप्लाई नहीं लेकर अनाधिकृत फर्म से सप्लाई लेना पाया।

पंप संचालक बीएस 100 मानक का ही बायो डीजल विक्रय कर सकते हैं, बायोडीजल के मानक की डेंसिटी 900 से ऊपर होती है, लेकिन मौके पर डेंसिटी 860 पाई गई।

मौके से कुल छह हजार लीटर नकली बायो डीजल जब्‍त किया। इसकी कीमत लगभग चार लाख 20 हजार रूपये से ज्यादा है।

नकली बायोडीजल के सैंपल लेकर पंप में बिक्री बंद करवाते हुए पंप, डिस्पेंसरी यूनिट और भूमिगत टैंक को सील कर दिया है।

सैंपल अधिकृत लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। नमूना रिपोर्ट आने के बाद में आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील एवं सख्त कार्यवाही

भोपाल 

महिलाओं, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संवेदनशील अपराधों के विरुद्ध लगातार सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश के राजगढ़ एवं आगर मालवा जिलों में पुलिस टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मानव तस्करी, बाल विवाह, दुष्कर्म एवं महिलाओं के शोषण से जुड़े गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि मध्यप्रदेश पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है।

राजगढ़ जिले में थाना कोतवाली पुलिस ने 12 वर्षीय नाबालिग बालिका से बाल विवाह, खरीद-फरोख्त, दैहिक शोषण एवं प्रताड़ना के अत्यंत संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए 6 नामजद आरोपियों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक  अमित तोलानी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में सामने आया कि पीड़िता के पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां की दूसरी शादी आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर निवासी गुना से कराई गई थी। इसके बाद आरोपी पीड़िता एवं उसकी मां को राजगढ़ लेकर आया, जहां सुनियोजित तरीके से 3 फरवरी 2025 को 12 वर्षीय बालिका का विवाह भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर से करा दिया गया। आरोपियों द्वारा इस बाल विवाह के एवज में लाखों रुपये नगद एवं जेवरात लिए गए। विवाह के बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म एवं लगातार शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की गई। मामले में अन्य आरोपियों द्वारा भी पीड़िता का शोषण किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामला थाना प्रभारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने अत्यंत संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बालिका की काउंसलिंग की, जिससे पीड़िता ने साहसपूर्वक अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद थाना कोतवाली राजगढ़ में पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर, देवराज गुर्जर, सागर गुर्जर, शैतानबाई तथा पीड़िता की मां शामिल हैं। वहीं मुख्य आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर फरार है, जिसकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

इसी प्रकार आगर मालवा के थाना बड़ौद पुलिस ने मानव तस्करी एवं जबरन विवाह कराने की साजिश का पर्दाफाश करते हुए त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पुलिस अधीक्षक आगर मालवा  दिलीप कुमार सोनी के निर्देशनमें यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में बैतूल निवासी युवती द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई कि वह इंदौर में कार्य करने जा रही थी, तभी शाहपुर बस स्टॉप से कुछ व्यक्तियों ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसे वाहन में बैठा लिया। आरोपियों द्वारा युवती को राजस्थान निवासी व्यक्ति से जबरन विवाह कराने एवं रुपये लेकर बेचने की योजना बनाई गई थी। विरोध करने पर युवती को जान से मारने एवं अन्य स्थान पर बेच देने की धमकी भी दी गई।

घटना के दौरान पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस कंट्रोल रूम आगर को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112, कंट्रोल रूम एवं थाना बड़ौद पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और तकनीकी विश्लेषण एवं लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्र में सघन घेराबंदी की गई। पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता एवं सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए युवती को सुरक्षित बरामद कर आरोपी ईश्वर सिंह बागरी को गिरफ्तार कर लिया।थाना बड़ौद में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस द्वारा न केवल त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण, संरक्षण एवं न्याय दिलाने हेतु संवेदनशील पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

 

मोदी सरकार की नई स्कीम का बड़ा तोहफा, मिलेगा कैश, आसान लोन और इंश्योरेंस का लाभ

नई दिल्ली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी सुविधाओं के लिए स्कीम लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत सरकार एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी में है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने दी है।

सरकार ने बढ़ाए कदम
पेडनेकर ने बताया कि सरकार गिग वर्कर्स को सुविधाएं देने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स को लागू करने की हरी झंडी दी गई है। यह बोर्ड इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर काम करेगा। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड भी बनाया जा रहा है।

इस फंड के जरिए सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद करेगी। इन योजनाओं के स्वरूप को अंतिम रूप देने के लिए सरकार फंड मैनेजर्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। सरकार की ओर से इसके लिए प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने कर्मचारियों का डेटा 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने को कहा गया है। इससे कामगारों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके।

कंपनियों के लिए क्या प्लान?
सरकार की योजना के तहत एग्रीगेटर कंपनियों का डेटा और ई-श्रम पोर्टल एक-दूसरे से सीधे जुड़ेंगे। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। कामगार मोबाइल ऐप के जरिए अपने अधिकारों और इस्तेमाल की जानकारी भी देख सकेंगे।

गिग वर्कर्स कौन हैं?
गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो पारंपरिक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से बाहर रहकर तय समय या प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र ठेकेदार और पार्ट-टाइम कर्मचारी आदि शामिल हो सकते हैं। वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे हैं जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे लोगों या कंपनियों को सेवाएं देते हैं। उदाहरण से समझें तो ओला-उबर के ड्राइवर या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी ब्वॉय प्लेटफॉर्म वर्कर की कैटेगरी में आते हैं।

भारत में पहली बार नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और सरकार को उम्मीद है कि दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत का दबदबा, राजनाथ बोले- 4 दिन में ही पाकिस्तान ने मांगा युद्धविराम

नई दिल्ली 
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने मात्र चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर कर दिया। यह जानकारी शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत की निर्णायक इच्छाशक्ति, आधुनिक सैन्य क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट तालमेल का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत द्वारा अब तक लड़े गए युद्धों और अभियानों की तुलना में ऑपरेशन सिंदूर कई मायनों में अलग और अत्यंत प्रभावशाली रहा। दरअसल देश की सैन्य शक्ति, रणनीतिक क्षमता और सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक बन चुके ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुक्रवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक सैन्य अभियान पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में भारतीय सेनाओं के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूरा वातावरण गर्व, सम्मान तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

 इस दौरान रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास की एक अभूतपूर्व सफलता बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि शुक्रवार को जारी किया गया स्मारक प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी सामने लाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते, बल्कि उनमें नेतृत्व, साहस, मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं को बेहद मानवीय और प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि जब देश के सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तब राष्ट्र के नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें। रक्षा मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस प्रकाशन से प्रेरणा लें और ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनें जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के महत्व को गहराई से समझ सकें।

समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की रणनीतिक योजना, संयुक्त सैन्य समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर पर सैनिकों के साहसिक प्रदर्शन पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। स्मारक प्रकाशन को सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगा। 

NEET मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA को लगाई फटकार; अब PM खुद कर रहे निगरानी

नई दिल्ली
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि बच्चों और उनके परिवारों के लिए यह पूरा मामला बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाला है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि लाखों छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, अपना समय, पैसा और भावनाएं इस परीक्षा में लगाते हैं। ऐसे में अगर हर साल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे तो यह पूरे सिस्टम पर बड़ा दाग है। वहीं इस मामले में केंद्र की तरफ से उचित कार्रवाई का भरोसा दियाला गया है। केंद्र की तरफ से अदालत में ये बताया गया कि पीएम मोदी खुद इस मामले में निगरानी रख रहे हैं।

एनटीए को खत्म करने की उठी मांग
गौरतलब है कि एनटीए को खत्म करने के लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन यानी फाइमा और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट यानी यूडीएफ की तरफ से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि एनटीए को या तो खत्म किया जाए या फिर उसका पूरा ढांचा बदला जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र संस्था बनाई जाए, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था कहां है: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए और पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन से सीधे सवाल पूछा कि आखिर बार-बार पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियां क्यों हो रही हैं। कोर्ट ने कहा, “आपने कहा था कि मजबूत और सुरक्षित व्यवस्था बनाई जाएगी। फिर हर बार ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं?” अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे समिति की सिफारिशें नाकाम साबित हो रही हैं या फिर उन्हें सही तरीके से लागू ही नहीं किया गया।

राधाकृष्णन समिति ने क्या कहा?
पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन भी अदालत में मौजूद थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 2024 में बनी समिति ने लगभग 35 लंबी अवधि और 60 छोटी अवधि वाली सिफारिशें दी थीं। उनके मुताबिक इनमें से ज्यादातर सुझाव लागू भी कर दिए गए हैं। हालांकि कोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा और पूछा कि अगर सुधार लागू हो चुके हैं तो फिर गड़बड़ियां कैसे जारी हैं।

जवाबदेही तय करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा जोर जवाबदेही तय करने पर दिया। अदालत ने कहा कि यह पता होना चाहिए कि आखिर इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार कौन है। कोर्ट ने कहा, “जिम्मेदारी किसी के कंधे पर तय होनी चाहिए। हमें बताइए कि आखिर जवाबदेह व्यक्ति कौन है।” यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक पेपर लीक मामलों में अक्सर सिस्टम की खामी की बात होती रही है, लेकिन व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने की मांग कम ही उठी थी।

जस्टिस नरसिम्हा ने उठाया निगरानी पर सवाल
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा ने कहा कि केवल सिफारिशें बना देना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि उनकी निगरानी और लागू करने की प्रक्रिया कितनी मजबूत थी। उन्होंने कहा कि अगर एक उच्च स्तरीय समिति बनने के बाद भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो या तो सिफारिशों में कमी है या फिर उन्हें जमीन पर ठीक से लागू नहीं किया गया।

नीट यूजी 2026 के लिए क्या नए सुरक्षा इंतजाम किए गए?
एनटीए की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि नीट यूजी 2026 के लिए कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं ताकि पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोका जा सके। इन उपायों में आधार आधारित जैविक पहचान सत्यापन, चेहरे की पहचान जांच, सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गड़बड़ी पकड़ने वाली तकनीक और मोबाइल संकेत अवरोधक शामिल हैं। इसके अलावा प्रश्न पत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। कई केंद्रों पर पुलिस तैनाती भी बढ़ाई गई है।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?
एनटीए की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दोबारा परीक्षा पूरी सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर बैठक हुई है और सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी सुरक्षा उपाय सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, क्योंकि ऐसा करने से उनका मकसद कमजोर पड़ सकता है। तुषार मेहता ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक तंत्र तैयार किया जाएगा।

चीन बना रहा ‘पाताल लोक’ जैसा खतरनाक हथियार नेटवर्क? सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा

नई दिल्ली

चीन के दूर-दराज के रेगिस्तानी इलाके में एक विशाल सैन्य परिसर तेजी से तैयार हो रहा है. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिसर ऐसा बनाया जा रहा है कि अगर अमेरिका ने चीन के परमाणु हथियारों पर पहला हमला भी कर दिया, तो भी चीन के पास जवाबी हमला करने की पूरी क्षमता बनी रहे। 

सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि चीन अपने सबसे लंबी दूरी की मिसाइलों वाले साइलो क्षेत्रों के पास सैकड़ों लॉन्च पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नेटवर्क बना रहा है. यह निर्माण चीन की परमाणु शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

चीन पहले से ही ऐसी मिसाइलें बना चुका है जो अमेरिका के किसी भी शहर तक पहुंच सकती हैं. अब वह इन मिसाइलों को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। 

क्या बन रहा है रेगिस्तान में?
पूर्वी शिनजियांग क्षेत्र में दो अष्टकोण (Octagon) आकार के विशाल सैन्य परिसर बनाए गए हैं. इनमें से एक उत्तरी अष्टकोण और दूसरा दक्षिणी अष्टकोण है. इनके चारों ओर सैकड़ों कंक्रीट पैड (Launch Pads) बनाए जा रहे हैं। 

विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये पैड मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इन अष्टकोण संरचनाओं में सैनिकों के रहने की व्यवस्था, बड़े वाहनों के लिए शेड, हथियार भंडारण बंकर और कमांड सेंटर भी हैं। 

सैटेलाइट इमेजरी में साफ दिख रहा है कि इन परिसरों के आसपास सड़कें, रेलवे लाइन, एयरफील्ड और ईंधन स्टोरेज सुविधाएं भी बनाई जा रही हैं. हाल के महीनों में इन इलाकों में बड़े सैन्य वाहनों की गतिविधियां और अभ्यास भी देखे गए हैं। 

दूसरी स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करना
चीन की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज (पहले हमला न करने) पर आधारित है. इसका मतलब है कि चीन कभी पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर हमला हुआ तो जवाब जरूर देगा. इसी सेकंड स्ट्राइक की क्षमता को और मजबूत करने के लिए चीन यह पूरा नेटवर्क बना रहा है. अगर अमेरिका या कोई दूसरा देश चीन के साइलो को नष्ट करने की कोशिश भी करे, तो मोबाइल लॉन्चर और बंकरों की मदद से चीन जवाबी हमला कर सकेगा। 

अमेरिका के साथ बढ़ता परमाणु प्रतिस्पर्धा
अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है, खासकर ताइवान को लेकर. चीन का मानना है कि अमेरिका ताइवान मुद्दे पर हस्तक्षेप कर सकता है. ऐसे में चीन अपनी परमाणु क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है. पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2030 तक 1000 परमाणु वॉरहेड बना सकता है. चीन अब साइलो-बेस्ड मिसाइलों के साथ-साथ मोबाइल लॉन्चर और सबमरीन-बेस्ड मिसाइलों पर भी जोर दे रहा है। 

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह निर्माण अभूतपूर्व है। 

    फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट के सदस्य हंस क्रिस्टेंसन ने कहा कि मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा. यह एक असाधारण प्रयास है। 

    पैसिफिक फोरम के अलेक्जेंडर नील का मानना है कि हजारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह इंफ्रास्ट्रक्चर चीन की रणनीतिक परमाणु क्षमता को बहुत मजबूत करेगा। 

    कार्नेगी एंडाउमेंट के टोंग झाओ कहते हैं कि ये अष्टकोण संरचनाएं कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन (C3) सिस्टम से जुड़ी हो सकती हैं, जो परमाणु हमले के समय बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। 

भारत के लिए क्या मायने रखता है?
चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता भारत के लिए भी चिंता का विषय है. भारत और चीन की सीमा पर तनाव बना हुआ है. अगर चीन अपनी परमाणु क्षमता को इतनी तेजी से बढ़ा रहा है, तो भारत को भी अपनी रणनीतिक क्षमता पर ध्यान देने की जरूरत है. भारत पहले से ही अग्नि-5 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर चुका है, लेकिन चीन की गति काफी तेज है। 

चीन रेगिस्तान में जो विशाल परिसर बना रहा है. वह सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि एक मजबूत परमाणु प्रतिरोध की तैयारी है. अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन सेकंड स्ट्राइक क्षमता को इतना मजबूत कर रहा है कि कोई भी देश उसे आसानी से निशाना नहीं बना सके। 

 

 

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम

छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम

दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि: मंत्री रामविचार नेताम

ठोस रसायनिक उर्वरक के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया-डीएपी को दे रहे हैं बढ़ावा

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर
धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज इस आशय की जानकारी दी।

         कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है। हमारी सरकार ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत जिसमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि हमारा किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वहीं खरीफ 2026 में हम अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है।

             राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं। राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है। हम डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।

          कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तिलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों के क्षेत्र में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है। वहीं क्लस्टर विकास, बागवानी के क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के तहत् 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है, जिसमें 461 क्लस्टर्स और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है। सॉइल हेल्थ के तहत् वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए। साथ ही, नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए राज्य के 126 पीएम स्कूलों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉइल टेस्टिंग लैब्स) स्थापित की जा चुकी हैं। 

           स्मार्ट इरिगेशन के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप‘ के तहत सूक्ष्म सिंचाई और लागत कम करने के लिए ड्रोन तकनीक व ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ (फसल + पशुपालन + मत्स्य + केंटकी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को इंटीग्रेट करके जून से जुलाई 2026 तक विशेष केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है। वहीं पीएम आशा योजना के अंतर्गत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी है। 
     
            कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कृषि विकास की गति को और तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव और अपेक्षाएं भी रखी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धान प्रधान राज्य होने के कारण, फसल विविधीकरण को गति देने के लिए केंद्र से एक पृथक प्रोत्साहन नीति की मांग की गई है। साथ ही प्राकृतिक उत्पादों का एमएसपी प्राकृतिक और जैविक खेती के उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जाए।

           मंत्री नेताम ने सम्मेलन में सप्लाई प्लान और खाद सब्सिडी उर्वरकों की समय पर उपलब्धता के लिए माहवार सप्लाई प्लान के अनुसार खाद प्रदाय की मांग के साथ ही डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अनुदान का प्रावधान किया जाए। वहीं उर्वरकों की अत्यधिक खपत और बर्बादी को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों की 25 किलोग्राम की छोटी बोरी तैयार की जानी अपेक्षित है। साथ ही राज्य के आदिवासी बाहुल्य और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज तथा डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तकनीकी व आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान की जाए।

                 इस अवसर पर संचालक कृषि राहुल देव, संचालक छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, संचालक उद्यानिकी लोकेश चंद्राकर सहित  अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu