मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

24 हजार करोड़ रुपये का किसानों को किया जा चुका है भुगतान

प्रदेश में सबसे लम्बे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन पर वीडियो संदेश के माध्यम से दी जानकारी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में अपने सभी लक्ष्य हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। प्रदेश में किसानों से अब तक रिकॉर्ड 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को 2585 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रति क्विंटल 40 रुपए बोनस का लाभ दिया है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान किया। अब तक किसानों को गेहूं उपार्जन की 24 हजार करोड़ राशि दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में आज वीडियो संदेश के माध्यम से ये जानकारी दी।

किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं खरीदने के लिए किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की पैदावार बढ़ी है। देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश सर्वाधिक लंबे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू करने वाला एकमात्र राज्य है।

सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं गोदामों तक पहुंच चुका है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों से पहले गेहूं खरीदा गया। यह व्यवस्था प्रदेश में पहली बार लागू की गई। छोटे किसानों से अब तक लगभग 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। इसके बाद बड़े किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला। अब तक लगभग पौने 14 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन कर लिया गया है। सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसान भाई-बहनों का गेहूं गोदाम तक पहुंच चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और विश्व में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। इस कठिन दौर में भी रिकॉर्ड गेहूं खरीदी की गई है। राज्य सरकार किसानों के लिए अनेक जन हितैषी निर्णय ले रही है। अन्नदाता भाई-बहनों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार ने यह पूरा वर्ष कृषक कल्याण को समर्पित किया है। प्रदेश का हर किसान समृद्ध और खुशहाल हो, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फसल उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग से किसानों की आय में वृद्धि हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है।

जल संरक्षण और संवर्धन के पुनीत कार्य में देश का अग्रणी राज्य बना मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन का मुख्य आधार है और हमारी पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित और संवर्धित करना हमारा परम सामाजिक और पर्यावरणीय कर्तव्य है। इसी पावन उद्देश्य के साथ राज्य में शुरू किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ आज केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सहयोग से एक पवित्र जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पुनर्जीवन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है, जिसके अंतर्गत अब तक रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल सहेजने के इस पुनीत कार्य में पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

6 हजार 330 करोड़ रुपये की राशि से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य हुए पूरे

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के तहत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार पूरा किया जा चुका है, जबकि 1,51,093 कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं। इस विशाल अभियान को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 10,644.02 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये (लगभग 59.5%) की राशि का उपयोग किया गया है, जो विकास की वास्तविक गति को दर्शाती है।

कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई जल क्रांति

ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड 57,794 खेत तालाब और 91,838 डग वेल रिचार्ज (कुआं पुनर्भरण) संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक और नए जल स्रोतों को सहेजने के उद्देश्य से 29,906 जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाओं तथा 126 भव्य ‘अमृत सरोवरों’ का कार्य शत्-प्रतिशत् पूरा किया जा चुका है। सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,152 विशेष सिंचाई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए 2,721 मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक स्तर पर भी विशेष प्रयास किए गए हैं। वाटरशेड प्रबंधन के तहत 4,822 कार्यों को पूर्ण किया गया है, जिससे भूमिगत जल स्तर में व्यापक सुधार होगा। वहीं, स्कूलों में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए ‘WoW मोबाइल ऐप’ के माध्यम से 5,275 पानी की टंकियों की सफाई का कार्य संपन्न कराया गया है। इसके अलावा, ‘जल संसद जल बंधन 2.0’ (JSJB 2.0) पहल के तहत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का सफल पंजीकरण किया गया है, जिसमें समय पर कार्य पूर्ण करने की उत्कृष्ट दर 91.3% दर्ज की गई है।

देश के लिए मिसाल बनेगा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय प्रदेश की जागरूक जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समर्पित प्रशासनिक अमले को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का यह सशक्त जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक नई और अनुकरणीय दिशा तय करेगा। आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मध्यप्रदेश इस दिशा में निरंतर नवाचार करता रहेगा।

 

ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, गिरिबाला और समर्थ सिंह 2 जून तक CBI रिमांड में; होगा वर्चुअल रीक्रिएशन

भोपाल 

एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी के वकील ने दोनों की 5-5 दिन की रिमांड मांगी। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की। जिसके बाद स्पेशल कोर्ट की जज शोभना भलावे ने सीबीआई रिमांड को मंजूरी दे दी।

बता दें कि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर था। शुक्रवार को ये रिमांड खत्म होने पर उसे कोर्ट में पेश किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। समर्थ ने फरारी कहां और किसके साथ काटी, इसको लेकर भी सवाल-जवाब होंगे।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अब जांच के लिए टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके।

अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड मंजूर
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ शांत मुद्रा में नजर आए। 

वकीलों ने रिमांड का विरोध नहीं किया
गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया, बल्कि यह कहा कि एसआईटी के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से सीबीआई को सौंपा जाए. इस पर सीबीआई ने बताया कि उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज मिल चुके है। 

कोर्ट में हुई बहस, CBI ने रोका दखल
सुनवाई के दौरान कटघरे में खड़े गिरिबाला सिंह की सीबीआई अधिकारियों से बहस भी हुई. अधिकारी ने उन्हें वकीलों से अधिक बोलने और मामले से इतर विषय उठाने से रोका, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल गर्म हो गया। 

घटना के दिन के हालात पर होगी पूछताछ
सीबीआई अब घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अहम सवाल करेगी. इसमें यह जानने की कोशिश होगी कि कटारा हिल्स स्थित घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था और अंदर क्या घटनाक्रम हुआ था। 

शादी के 5 महीने बाद मौत पर सवाल
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शादी के महज 5 महीने बाद ऐसी स्थिति कैसे बनी कि ट्विशा शर्मा की मौत हो गई. साथ ही परिवार के भीतर चल रहे विवादों और उत्पीड़न के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी। 

सबूतों और पुलिस जांच पर संदेह
सीबीआई पुलिस जांच के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाएगी. जैसे- मौत की सूचना देने में देरी क्यों हुई, शव को नीचे लाकर CPR देने का फैसला किसने लिया और पुलिस रिकॉर्ड में लंबाई जैसी जानकारी गलत कैसे दर्ज हुई। 

40 मिनट की घटनाओं पर फोकस
जांच का सबसे अहम हिस्सा वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा जिम एरिया में गईं और फिर उनकी मौत हुई. सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि उस दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उन्हें नीचे लाया गया। 

वायरल वीडियो पर भी सवाल
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि केवल छत से नीचे लाने का वीडियो ही क्यों वायरल हुआ, उसके पहले या बाद का कोई फुटेज क्यों सामने नहीं आया. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। 

समर्थ सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीबीआई समर्थ सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच करेगी. उनके बयानों में विरोधाभास, फरार रहने के दौरान मदद और पूरे घटनाक्रम में उनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी। 

परिजनों के आरोपों की पड़ताल
ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच में अहम होंगे. इनमें कथित उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। 

जांच में खुल सकती हैं नई परतें
सीबीआई की इस पूछताछ से मामले के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठने की संभावना है. अब सबकी नजर 2 जून तक की रिमांड अवधि पर टिकी है, जहां से इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम खुलासे हो सकते हैं। 

दहेज प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला- जिनसे पैसे लेते हो, उन्हें ही भिखारी कहते हो

 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना को लेकर समाज को कड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने बहू-बेटियों के अपमान पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. एक मामले की सुनवाई के दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कहा कि लड़कों को शादी के बाद दूसरों की बेटियों और उनके परिवार का अपमान करने का कोई हक नहीं है. सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में पूछा, ‘आप जिनसे पैसे लेते हो, आखिर उनको ही भिखारी कैसे कह सकते हो?’ इसी सख्त रुख के साथ जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने आरोपी पति तथा उसके परिवार को कोई राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें जेल भेजने का फैसला लिया।

दरअसल, यह पूरा मामला दहेज हत्या और खुदकुशी के लिए उकसाने से जुड़ा हुआ था. इस केस में आरोपी पक्ष कोर्ट से कानूनी राहत की उम्मीद कर रहा था. हालांकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लड़के वालों के पुराने बर्ताव पर बार-बार गहरी नाराजगी जताई. जजों का साफ मानना था कि ऐसे गंभीर मामलों में ढिलाई बरतने से समाज में गलत संदेश जाता है. इसी वजह से अदालत ने आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने हमारे समाज की इस कड़वी हकीकत पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने सवाल किया, ‘आखिर लड़के, लड़कियों से शादी ही क्यों करते हैं, जब उन्हें बाद में लड़की और उसके पूरे परिवार का अपमान ही करना होता है?

इसी बीच, जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर तो सिर्फ आईपीसी की धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) के तहत आरोप लगे हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. जस्टिस नागरत्ना ने वकील की दलील पर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि आपको तो खुश होना चाहिए कि आप पर सिर्फ धारा 498A लगी है और इसमें केवल तीन साल की ही सजा का प्रावधान है। 

बहू को पैसा निकालने वाली मशीन न समझें: सुप्रीम कोर्ट
इसके आगे सुप्रीम कोर्ट ने शादियों के बाद लड़कियों के ससुराल में होने वाले आर्थिक शोषण पर भी गहरी चिंता जताई. इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने लड़के वालों की मानसिकता पर चोट करते हुए टिप्पणी की कि आजकल शादी के बाद ससुराल में दुल्हन तथा उसके माता-पिता को पूरी तरह से निचोड़ लेने यानी पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है। 

इतना ही नहीं, अदालत ने लड़की के मायके वालों से पैसे मांगने और फिर उन्हें ही नीचा दिखाने वाले रवैए को बेहद शर्मनाक माना है. बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि समाज में अब यह मैसेज जाना चाहिए कि कोई भी परिवार किसी की बेटी को लाकर उसका या उसके माता-पिता का मानसिक तथा आर्थिक उत्पीड़न नहीं कर सकता. आरोपियों की याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने यह जता दिया कि देश का कानून अब बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। 

जनगणना 2027 को लेकर बड़ा ऐलान, बंगाल में अगस्त से शुरू होगी प्रक्रिया

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि राज्य में जनगणना 1 अगस्त से शुरू होगी और अगले साल फरवरी के आखिर तक चलेगी. उन्होंने साफ कहा कि जनगणना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और सभी लोगों से इसमें हिस्सा लेने की अपील की। 

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय नबान्ना में ‘जनगणना, 2027’ के पहले चरण से जुड़ी एक बैठक में शामिल हुए. इसी बैठक के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल में जनगणना को लेकर बड़ी जानकारी दी। 

उन्होंने बताया कि बंगाल में जनगणना 1 अगस्त से शुरू होगी और अगले साल फरवरी के आखिरी दिन रात 12 बजे तक चलेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जहां पूरे देश में जनगणना का काम काफी आगे बढ़ चुका है, वहीं पश्चिम बंगाल इस मामले में पिछड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, देश जनगणना में काफी आगे निकल चुका है, लेकिन हम पीछे रह गए हैं। 

इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु ने राज्य के कुछ हिस्सों में आबादी के बदलते ढांचे का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने इसके लिए बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगती 600 किलोमीटर लंबी सीमा पर अभी तक पूरी बाड़ नहीं लग पाई है. इसकी वजह यह बताई कि पिछली राज्य सरकार ने BSF को जमीन नहीं सौंपी, जिससे बाड़ लगाने का काम अटका रहा. नतीजा यह हुआ कि घुसपैठ होती रही और राज्य के कुछ इलाकों में आबादी की बनावट बदल गई। 

मुख्यमंत्री शुभेंदु ने जनगणना को सरकारी काम और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि सही आंकड़े होंगे तभी सरकार ठीक से काम कर पाएगी और लोगों तक सही फायदे पहुंच पाएंगे. उन्होंने बंगाल के सभी लोगों से अपील की कि वे इस जनगणना में जरूर हिस्सा लें। 

मौसम का बड़ा अपडेट! भारत की ओर बढ़ रहे 2500 किमी चौड़े बादल, 5 राज्यों में होगी झमाझम बारिश

नई दिल्ली

भीषण गर्मी का सामना कर रहे उत्तर पश्चिम भारत को मौसम जल्द ही गुड न्यूज दे सकता है। खबर है कि भारत की ओर 2500 किलोमीटर चौड़े बादलों का समूह बढ़ रहा है। भारत के इनसैट-3डीएस उपग्रह ने ये तस्वीरें कैद की हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम सैटेलाइट द्वारा ली गई यह तस्वीर इस उपमहाद्वीप के ऊपर बारिश लाने वाले सिस्टम के सक्रिय होने का संकेत है।

बादलों का यह समूह उत्तरी भारत में 2000 से 2500 किमी से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। मौसम विभाग ने इन तस्वीरों को शेयर किया है। तस्वीरों में उत्तर और मध्य भारत में फैला हुआ बादलों का विशाल झुंड दिख रहा है। बादलों का जमावड़ा आने वाले तूफानों व भीषण गर्मी के बाद राहत का संकेत है। बादलों का यह घना झुंड पाकिस्तान व उत्तर-पश्चिमी भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक फैला है।

दिल्ली में झमाझम बारिश शुरू
दिल्ली के कई हिस्सों में गुरुवार शाम को तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने से शहर में जारी भीषण गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी आई, जिस दौरान पालम में हवा की अधिकतम गति 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। गुरुवार को दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया।

गिरा राजधानी का तापमान
मौसम में यह बदलाव कई दिनों की भीषण गर्मी के बाद आया है, जिसके दौरान दिल्ली के विभिन्न केंद्रों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में गुरुवार को शहर भर में अधिकतम तापमान में करीब तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।

31 मई तक होती रहेगी बारिश
मौसम कार्यालय ने कहा कि शहर में बारिश और गरज-चमक की यह मौजूदा गतिविधि 31 मई तक जारी रहने की उम्मीद है। स्काईमेट वेदर के महेश पालावत ने कहा, ‘राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही गरज के साथ बारिश शुरू हो चुकी है और शाम तक इस मौसम प्रणाली के दिल्ली तक पहुंचने और रात भर जारी रहने की संभावना है।’

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को तूफान की तीव्रता बढ़ने की संभावना है और यह सिलसिला 30 मई तक जारी रहने के आसार हैं। इसके बाद मौसम प्रणाली के 30 और 31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है।

पालावत ने कहा, ‘मॉनसून पूर्व वर्षा के इस दौर के दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में और अप्रैल में हुई मॉनसून पूर्व वर्षा से अधिक तीव्र रहने की संभावना है, जिससे पूरे शहर में व्यापक वर्षा होगी।’ उन्होंने मौसम में आए इन बदलावों का कारण पर्वतों के ऊपर मौजूद पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को बताया, जिनसे शहर में नमी का स्तर बढ़ गया है।

लाखों शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, TET पास करने की समय सीमा बढ़ाई गई

 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी की पात्रता हासिल करने की समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है। शीर्ष अदालत ने कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए अब 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। पहले यह डेडलाइन 31 अगस्त 2027 थी। कोर्ट ने यह फैसला कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया है। हालांकि अदालत ने उन याचिकाओं को फिर से खारिज कर दिया है जिसमें 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी टीचर्स को अनिवार्य टीईटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि देश में काम कर रहे सभी टीचरों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। ऐसे में टीईटी अनिवार्यता मामले में देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा अभी भी कायम है।

कुछ दिन पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने राहत की मांग कर रहे शिक्षकों को दो टूक कहा था कि वे स्वार्थी न बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें, बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें जिन्हें क्वालिटी वाली एजुकेशन की आवश्यकता है। अदालत ने यह कड़ी टिप्पणी तब की जब वह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा पश्चिम बंगाल व केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई कईं टीईटी अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सर्वोच्छ न्यायालय के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का निर्देश दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या है पूरा मामला

आपको बता दें कि टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 3 साल ( सितंबर 2025 कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। यानी इन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु, यूपी, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं।

स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे
कुछ दिन पहले सुनावाई के दौरान तमिलनाडु ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अकेले उस राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। राज्य ने यह भी कहा था कि यदि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया गया, तो राज्य को शिक्षकों के बिना कक्षाएं चलानी पड़ेंगी। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता ने कहा, ‘बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) बच्चों के लिए बनाया गया है। केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में सोचकर मतलबी मत बनिए और यह मत कहिए कि मुझे केवल अदालत से अपनी नौकरी की सुरक्षा के आदेश चाहिए और मैं बच्चों के बारे में नहीं सोचूंगा।’वे न्यायमूर्ति मनमोहन के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे और समीक्षा याचिकाकर्ताओं पर जवाब दे रहे थे।

जस्टिस दत्ता ने याद दिलाई टीईटी वाली धारा
जस्टिस दत्ता ने शिक्षा का अधिकार 2009 अधिनियम की धारा 23(2) का जिक्र किया था, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और शिक्षक शिक्षा संस्थानों की अपर्याप्तता के मामलों में शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। इसके बाद न्यायाधीश ने धारा 23(2) के दूसरे प्रावधान की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे 2017 में अधिनियम में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था। इसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत उन शिक्षकों को अतिरिक्त राहत दी गई थी, जिनके पास न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। उन्हें यह योग्यता प्राप्त करने के लिए चार वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया था।

हाईकोर्ट में नौकरी पाने के लिए फर्जी सर्कुलर पेश, डॉक्टर ने मानी गलती; याचिका खारिज

बिलासपुर.

संविदा नियुक्त एक महिला आयुर्वेदिक डॉक्टर की नियमितीकरण की मांग को लेकर दायर याचिका मामले में हाईकोर्ट ने अपना ही आदेश वापस ले लिया है. दरअसल, मामले में याचिकाकर्ता महिला डॉक्टर ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष एक सर्कुलर पेश किया. बाद में पता चला कि सर्कुलर पूरी तरह फर्जी था.

महिला डॉक्टर को अपनी गलती का अहसास हुआ और कोर्ट में एक रिव्यू पिटिशन दायर करते हुए कोर्ट से माफी मांगी, जिस पर कोर्ट ने अपना पुराना आदेश वापस लेते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए उसे दोबारा बहाल किया. बता दें, कि बलौदाबाजार-भाटापारा के मोपका प्राथमिक स्वास्थ्य आयुष केंद्र में संविदा पर कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ ममता मिश्रा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने 28 मई 2010 को जारी सरकारी सर्कुलर पेश किया, इसमें संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार करने के निर्देश दिए गए थे. याचिका में सेवाकाल के 18 साल पूरा करने की बात कही गई, लिहाजा नियमितीकरण के लिए खुद को पात्र बताया.

हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए बीते 5 जनवरी को याचिकाकर्ता को नए सिरे से अभ्यावेदन करने और संबंधित अधिकारियों को 4 महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश जारी किया था. इधर कोर्ट के निर्णय के बाद पता चला कि पेश किया गया सर्कुलर ही फर्जी है. बाद में महिला डॉक्टर ने अपनी चूक स्वीकारते हुए हाईकोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर की. हाईकोर्ट ने केस को दोबारा बहाल कर दिया है, जिससे याचिकाकर्ता को मिली अंतरिम राहत खत्म हो गई है.

‘राजा शिवाजी’ का बॉक्स ऑफिस पर तूफान जारी, 28वें दिन भी की ताबड़तोड़ कमाई

मुंबई 

मराठी ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की सफलता का सिलसिला जारी है. रितेश देशमुख द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने सिनेमाघरों में चार हफ्ते पूरे कर लिए हैं और इस दौरान इसने न केवल धमाकेदार कमाई कर डाली है बल्कि कई बड़े रिकॉर्ड पर भी कब्जा कर लिया है. चलिए यहां जानते हैं इस फिल्म ने रिलीज के 28वें दिन  कितना कलेक्शन किया है?

‘राजा शिवाजी’ ने रिलीज के 28वें दिन कितनी की कमाई?
मराठी सिनेमा की सभी फिल्मों को पछाड़कर नंबर 1 मूवी बन चुकी ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल  का परफॉर्म किय़ा है. तमाम सितारों से सजी इस मूवी की कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस ने दर्शकों के दिलों को छुआ है इसी के चलते ये फिल्म चार हफ्तों से बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार कमाई कर रही है. हालांकि इसके कलेक्शन में मंदी और तेजी भी देखी जाती रही. दिलचस्प बात ये है कि इस दौरान कई नई फिल्में भी रिलीज हुई लेकिन ‘राजा शिवाजी’ की बॉक्स ऑफिस पर हूकुमत बरकरार रही. जानकर हैरानी होगी कि इसने 28वें दिन भी कमाई में तेजी दिखाई है। 

    फिल्म के कलेक्शन की बात करें तो सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘राजा शिवाजी’ ने रिलीज के 28वें दिन यानी चौथे गुरुवार 756 शो में 45 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है। 
    इसके साथ ही फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 110.80 करोड़ और नेट कलेक्शन अब तक 93.75 करोड़ हो गया है। 

‘राजा शिवाजी’ ने 28 दिनों में वर्ल्डवाइड कितनी की कमाई?
‘राजा शिवाजी’ ने ओवरसीज में रिलीज के 28वें दिन 0.01 करोड़ का कलेक्शन किया है. जिससे इसकी कुल विदेशी कमाई 4.27 करोड़ रुपये हो गई है. इसके साथ ही फिल्म का 28 दिनों का वर्ल्डवाइड कलेक्शन अब 115.07 करोड़ हो गया है। 

‘राजा शिवाजी’ स्टार कास्ट
‘राजा शिवाजी’ की कमाई की रफ्तार थम नहीं रही है. दिलचस्प बात ये है कि चौथे हफ्ते तक अमूमन फिल्में दम तोड़ती सी नजर आती हैं वहीं ये ऐतिहासिक ड्रामा अब भी पूरे जोश में दिख रही है और हर दिन अपने कुल कलेक्शन में इजाफा कर रही है. देखने वाली बात होगी की पांचवें वीकेंड पर ये कैसा परफॉ़र्म करती है. वहीं फिल्म की स्टार कास्ट की बात ककें तो ‘राजा शिवाजी’ में रितेश देशमुख के आलावा संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, जेनेलिया डिसूजा, भाग्यश्री, महेश मांजरेकर और विद्या बालन सहित कई कलाकारों ने अहम रोल प्ले किया हैं. फिल्म में सलमान खान का भी कैमियो है। 

शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1100 अंक लुढ़का, निवेशकों में मची दहशत

मुंबई 

बाजार बंद के दौरान,शुक्रवार को अचानक स्‍टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई. सेंसेक्‍स-निफ्टी सभी इंडेक्‍स दबाव में रहे. दोपहर 3 बजे निफ्टी करीब 400 अंक टूटकर 23,500 पर पहुंच गया. वहीं सेंसेक्‍स 1150 अंक टूटकर 74,800 के ऊपर था. सबसे ज्‍यादा दबाव मिडकैप और स्‍मॉलकैप में दिखाई दिया, जहां सबसे ज्‍यादा मुनाफावसूली हुई। 

BSE टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 4 शेयर ही मामूली तेजी पर कारोबार कर रहे थे, बाकी सभी 26 शेयर बिखर गए हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट इंडिगो, टाटा स्‍टील और पावरग्रिड जैसे शेयरों में आई है। 

हालांकि कारोबार बंद होने तक, निफ्टी 360 अंक या 1.50 फीसदी गिरकर 23,547 पर था और सेंसेक्‍स 1092 अंक या 1.45 फीसदी गिरकर 74775 पर था. बैंक निफ्टी में भी 600 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई। 

5.56 लाख करोड़ का नुकसान
बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देखें तो बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 470.75 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 5.56 लाख करोड़ रुपये गिरकर 45.19 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों की वैल्‍यूवेशन 5.56 लाख करोड़ कम हुई है। 

क्‍यों गिरा शेयर बाजार? 
अमेरिका ईरान जंग: अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान गुरुवार को अपने युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक समझौते पर पहुंच गए हैं, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं किया है, और ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। 

वीआईएक्‍स में तेजी: इंडिया VIX में तगड़ी बढ़ोतरी हो गई है, जो 6% बढ़कर 15.91 पर पहुंच गया है. यह एक बड़े गिरावट का संकेत देता है। 

FII की सेलिंग: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं. सबसे जयादा बिकवाली साल 2026 में देखी जा रही है, जो अभी तक 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की है. बुधवार को 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए थे। 

मुनाफावसूली: सबसे बड़ा कारण दो दिनों की छुट्टी के कारण बाजार में अचानक से मुनाफावसूली मानी जा रही है. ग्‍लोबल इम्‍पैक्‍ट के कारण गिरावट के साथ ज्‍यादातर सेक्‍टर में बिकवाली देखने को मिली. ऑटो से लेकर फाइनेंशियल, मेटल, ऑयल एंड गैस सेक्‍टर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट रही. हालांकि, आईटी और कंज्‍यूमर गूड्स ने थोड़ा सपोर्ट देने का प्रयास किया, लेकिन यह बड़ी गिरावट को रोकने में नाकाम रहे। 

मानसून देरी से आने का अनुमान 
बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह मानी जा रही है, वह मानसून के देरी से आने का अनुमान है. देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी की लहरें जारी रहने के बावजूद, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान को दीर्घकालिक औसत के 92% से घटाकर 90% कर दिया, जो इस बात का संकेत है कि जून से सितंबर के दौरान भारत में सामान्य से कम वर्षा होने का खतरा है। 

हैवीवेट शेयरों में बड़ी गिरावट
मार्केट में हैबीवेटज रखने वाले स्‍टॉक रिलायंस के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट रही. टीसीएस में भी 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट रही. बजाज फाइनेंस के शेयर 2.45 फीसदी, सन फार्मा के शेयर 2 फीसदी और पावरग्रिड के शेयर 4 फीसदी तक गिरे, जिसने सेंसेक्‍स को बड़ी गिरावट में बड़ा योगदान दिया। 

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