माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

बेंगलुरु
भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, स्थिरता, चेतना अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब इस संस्था ने मानवीय सेवा के 45 वर्ष में प्रवेश किया हैं और इसी माह 70 वर्ष के हुए गुरुदेव रवि शंकर के शांति, कल्याण एवं मानवीय मूल्यों के प्रति उनके जीवनपर्यंत योगदान को रेखांकित किया गया है।

माननीय उपराष्ट्रपति ने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ एक स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया, जो व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक शांति में द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों के योगदान का प्रतीक है।शुरू की गई पहलों में युवा करियर उत्कृष्टता कार्यक्रम (यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम), पूर्वी ज्ञान प्रणाली संकाय (फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स), नवाचार एवं उद्यमिता (आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन), चेतना अध्ययन और मानव क्षमता उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडी एंड ह्यूमन पोटेंशियल), तथा इको शांति सम्मिलित हैं। ये पहलें शिक्षा, नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव विकास पर संगठन के बढ़ते ध्यान को प्रतिबिंबित करती हैं।

यह शुभारंभ समारोह द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महीने भर चले उत्सव का चरमोत्कर्ष था, जिसमें भारत और विश्व भर के 678 प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के राष्ट्रीय नेता, व्यापारिक दिग्गज, खिलाड़ी, उद्यमी, शिक्षाविद, आध्यात्मिक गुरु, राजनयिक, कलाकार और सामाजिक परिवर्तनकर्ता सम्मिलित थे।सभा को संबोधित करते हुए माननीय उपराष्ट्रपति ने गुरुदेव रवि शंकर द्वारा स्थापित इस आंदोलन की असाधारण वैश्विक पहुंच पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा, आज उस महान दूरदर्शिता का उत्सव है जिसने विभिन्न महाद्वीपों में करोड़ों जीवनों को स्पर्श किया है। मैं यह जानकर विस्मित रह गया कि द आर्ट ऑफ लिविंग 182 देशों में विद्यमान है। मानव जाति की लगभग संपूर्ण सभ्यता इस आंदोलन के माध्यम से परस्पर जुड़ रही है।

संगठन की यात्रा का वर्णन करते हुए उन्होंने आगे कहा, पैंतालीस वर्ष पूर्व, एक सरल किंतु गहन विचार के साथ एक आंदोलन का सूत्रपात हुआ था कि आंतरिक शांति ही बाह्य सामंजस्य की आधारशिला है। संघर्ष और अनिश्चितता से घिरे इस संसार में, गुरुदेव रवि शंकर विवेक, जागरूकता, शांति और सद्भाव के मूल्यों से मानवता को निरंतर अनुप्राणित कर रहे हैं।गुरुदेव की सरलता और उनके प्रभाव की प्रशंसा करते हुए राधाकृष्णन ने टिप्पणी की, उनकी मुस्कान, उनकी विनम्रता और उनका स्नेह प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को छू लेता है। जो बात उनके योगदान को असाधारण बनाती है, वह उनके भीतर समाहित विनम्रता और मानवता है।

माननीय उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए गुरुदेव रवि शंकर ने समकालीन चुनौतियों के समाधान में आंतरिक विकास की शाश्वत प्रासंगिकता पर बल दिया।

गुरुदेव ने कहा, आज विश्व ने स्वीकार कर लिया है कि ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है। विश्व ध्यान दिवस घोषित करने के लिए 192 देशों के एक साथ आने से यह समझ सुदृढ़ हुई है कि एक स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए ध्यान एक मूलभूत आवश्यकता है।
मानव विकास के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने आगे कहा, जीवन भर तीन चीजें सदैव हमारे साथ होनी चाहिए: ज्ञान, ध्यान और संगीत।वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए गुरुदेव ने कहा, आइए हम एक ऐसे वसुधैव कुटुम्बकम् का स्वप्न देखें, जो भय, तनाव और घृणा से मुक्त एक वैश्विक परिवार हो। एक शांत और सौहार्दपूर्ण विश्व का प्रारंभ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यक्तियों से ही होता है।

कर्नाटक के माननीय राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी सभा को संबोधित किया और संगठन के उद्गम के साथ कर्नाटक के गहन संबंध को रेखांकित किया।उन्होंने कहा, यह कर्नाटक के लिए गौरव का विषय है कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें हमारी इस पवित्र भूमि से जुड़ी हुई हैं। चार दशकों से अधिक समय से, द आर्ट ऑफ लिविंग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत, सामुदायिक और वैश्विक स्तर पर शांति और कल्याण को बढ़ावा दे रहा है।शांति स्थापना में गुरुदेव के योगदान पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने आगे कहा, मानवीय सेवा से परे, गुरुदेव के शांति-स्थापना के प्रयासों ने दीर्घकालिक संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के माध्यम से एक हिंसा-मुक्त और तनाव-मुक्त समाज की उनकी दूरदर्शिता को संपूर्ण विश्व में सराहना और मान्यता प्राप्त हुई है।

इस आयोजन के दौरान शुरू की गई पांच पहलें शिक्षा, नवाचार, स्थिरता और मानव विकास के माध्यम से समकालीन समाज की कुछ अत्यंत तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं।यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम युवाओं को सिविल सेवा में करियर के लिए तैयार करेगा, साथ ही ग्रामीण और शहरी युवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग-उन्मुख आतिथ्य प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करेगा जो पूर्वी ज्ञान परंपराओं को समकालीन शिक्षा और अनुसंधान के साथ एकीकृत करेगा, जिससे आधुनिक नैतिक, सामाजिक और पारिस्थितिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन पहल का उद्देश्य मार्गदर्शन, प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण सहायता के माध्यम से नवाचार-संचालित और हार्डवेयर-केंद्रित स्टार्टअप को पोषित करना है, जिसका लक्ष्य 500 स्टार्टअप को सक्षम बनाना है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल चेतना, संज्ञान, मानसिक कल्याण और मानव क्षमता में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के लिए एक अंतःविषय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा।द आर्ट ऑफ लिविंग की एक स्थिरता पहल इको शांति का उद्देश्य संधारणीय विकल्पों के माध्यम से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग को प्रतिवर्ष कम से कम 1,00,000 टन कम करना है।

आश्रम प्रवास के दौरान, माननीय उपराष्ट्रपति ने संगठन की विभिन्न सुविधाओं और पहलों का अवलोकन किया। उन्होंने गुरुकुलम का भ्रमण किया, छात्रों से संवाद किया, प्रताप गणपति मंदिर में प्रार्थना की, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए और लगभग 1,600 स्वदेशी गायों के निवास स्थान गौशाला का भी भ्रमण किया।

इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण द आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम के अभ्यासकर्ताओं द्वारा दी गई प्रस्तुति थी, जहां बच्चों ने व्यवस्थित प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से विकसित अपनी सहज ज्ञान संबंधी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
सेवा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का महीना भर चला उत्सव लगभग एक महीने तक, द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से आने वाले लोगों का स्वागत किया, जो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी एक विश्व परिवार की भावना को दर्शाता है।

इस उत्सव में सम्मिलित होने वाली प्रतिष्ठित विभूतियों में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, माननीय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सर्बानंद सोनोवाल, माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एन. चंद्रबाबू नायडू और प्रमोद सावंत, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, महान अभिनेता रजनीकांत, अभिनेता विक्रांत मैसी, उद्योगपति मुकेश अंबानी, अनंत अंबानी और निरंजन हिरानंदानी के साथ-साथ प्रमुख आध्यात्मिक गुरु, कलाकार, राजनयिक और विद्वान उपस्थित थे।

इस पूरे महीने के दौरान नवनिर्मित ध्यान मंदिर में वैश्विक ध्यान सत्र, भारत की कलात्मक विरासत का उत्सव मनाते सांस्कृतिक कार्यक्रम, मानसिक कल्याण एवं चेतना पर परिचर्चाएं, और उन व्यक्तियों के जीवन परिवर्तन की गाथाएं प्रस्तुत की गईं, जिनके जीवन को पिछले साढ़े चार दशकों में गुरुदेव के कार्यों ने प्रभावित किया है।

मूल रूप से, यह उत्सव आंतरिक शांति, सेवा और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक तनाव-मुक्त, हिंसा-मुक्त समाज के गुरुदेव के निरंतर चले आ रहे दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करने का माध्यम बना।

क्या भारत में शुरू होने वाले हैं प्लास्टिक के नोट? RBI की तैयारी ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली
 भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है।

पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लागत के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है।

प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की जगह क्यों लाए जा रहे?
इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लागत और नोटों का टिकाऊपन है। RBI सूत्रों के अनुसार, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत तकनीकी रूप से आधुनिक हो चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा।

पुराने और गंदे नोटों को नष्ट करने में क्या दिक्कतें आ रही हैं?
कागजी नोट ज्यादा साल तक नहीं चल पाते हैं, जिससे वे मूल कागज और गंदे नोटों की तुलना में निम्न गुणवत्ता के होते हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में ही लगभग ₹23.8 अरब मूल्य के नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष ₹21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या ₹500 और ₹100 के नोटो की थी।

इतनी बड़ी मात्रा में करेंसी नोटों को नष्ट करना और नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने की लागत ₹6,372.8 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष (₹5,101.4 करोड़) की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी।

डिजिटल पेमेंट के युग में भी कैश की मांग क्यों बढ़ी?
देश में यूपीआई और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी (कैश) की मांग में कोई बदलाव नहीं आया है। 15 मई तक, बाजार में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गई। छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजूद, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.7% और 0.8% है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।

2012 का ट्रायल फेल, अब क्या नया बदलाव?
भारत में प्लास्टिक नोटों पर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। 2012 में, तत्कालीन यूपीए सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर 1 अरब प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, एटीएम और बैंकों में तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया था।

हालांकि, पिछले एक दशक में तकनीक में काफी बदलाव आया है। रिपोर्ट्स का कहना है कि अब एटीएम इन टूल्स से आसानी से पुराने और पुराने तकनीकी छात्रों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

दुनिया में किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?
पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट वर्तमान में लगभग 60 देशों में चल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी करने वाला पहला देश था। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा जैसे देशों ने भी बाद में इन्हें अपना लिया। वहीं, अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के विशेष मिश्रण से बनाया जाता है।

 

स्वामी आत्मानंद स्कूलों में निकली संविदा भर्ती, 8 जून तक करें ऑनलाइन आवेदन

दुर्ग.

जिले में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शिक्षकीय एवं गैर शिक्षकीय विभिन्न रिक्त पदों पर संविदा हेतु विज्ञापन जारी किया गया है। कलेक्टर दुर्ग की अनुमोदन से जिला शिक्षा अधिकारी/सचिव स्वा.आ.उ. अं.मा. विद्यालय संचालन एवं प्रबंधन समिति जिला-दुर्ग द्वारा 28 मई को यह विज्ञापन प्रसारित किया गया है।

विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु इच्छुक आवेदकों से आवेदन ऑनलाइन लिंक पर जिसका अवलोकन जिले की वेबसाईट दुर्ग डाट जीओवी डाट इन पर भी किया जा सकता है। आवेदन 28 मई से 8 जून तक प्रेषित करना अनिवार्य होगा। संविदा हेतु आवेदन सीधे कार्यालय में (स्पीड पोस्ट / डाक/ अन्य किसी माध्यम) स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
निर्धारित तिथि के पश्चात् कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जावेगा। आवेदन ऑनलाईन माध्यम से वेबसाईट दुर्ग डाट जीओवी डाट इन में जाकर उक्त लिंक के माध्यम से भरा जा सकता है। रिक्त पदों में व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक विज्ञान, कम्प्यूटर शिक्षक सहित अन्य पद शामिल है।

जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा से मिली जानकारी के अनुसार. सेजस उतई 5 पद, जामगांव आर 4, निकुम 6, बेल्हारी 5, पाटन 3, छावनी 2, सेक्टर 6 में 4, जंजगिरी 3, जामगांव एम 7, सेलूद 2, सेक्टर 9 में 7, अंडा 13, पुरैना 18, तिरगा 14, पाउवारा 18, कातरो 18, बालाजी नगर 1, अहिवारा 5, फरीद नगर 1, तमेर पारा धमधा 6, रानीतराई 6, मर्रा 5, अमलेश्वर 5, दीपक नगर 4, जामुल 7, खम्हरिया 1, कुम्हारी 7, भिलाई 3 में 1, नगपुरा 3, बोरसी 9, तितुरडीह 1, चरोदा 1, रिसाली 1, कुगदा 18, जेपी नगर 7, घुघवा क 4, अंजोरा ख में 3 रिक्त पद बताए गए हैं।

पानी बचाने की बड़ी पहल! सार्वजनिक नलों का होगा सर्वे, समीक्षा बैठक में बना प्लान

दुर्ग.

महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त सुमित अग्रवाल द्वारा निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 21 से 30 तक के पार्षदों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वार्ड 21 से 30 वार्डवार विकास कार्यों, मूलभूत सुविधाओं तथा जनसमस्याओं को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

महापौर अलका बाघमार ने कहा कि बेवजह बह रहे सार्वजनिक एवं अवैध रूप से नल कनेक्शनों का सर्वे कराया जाए तथा अनुपयोगी सार्वजनिक नलों को बंद कराने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग सभी घरों में व्यक्तिगत नल कनेक्शन उपलब्ध हैं, ऐसे में सार्वजनिक नलों से पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकना आवश्यक है। बैठक में सड़क निर्माण, पाइप लाइन विस्तार, पाइप लाइन लीकेज, नाली एवं पुलिया निर्माण / मरम्मत, पोल, विद्युत व्यवस्था, सुलभ शौचालयों की मरम्मत सहित विभिन्न जनसमस्याओं पर एक- एक कर समीक्षा की गई।

पार्षदों ने अपने- अपने वार्डों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को महापौर और आयुक्त के समक्ष रखते हुए त्वरित निराकरण की मांग की। महापौर ने कहा कि निगम द्वारा पाइप लाइन सुधार एवं जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने लगातार कार्य किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। उन्होंने स्टेशन रोड दीपक नगर सड़क सीमा क्षेत्र अंतर्गत नाली के ऊपर बने अवैध रूप से अतिक्रमण को कार्रवाही कर हटवाने की बात कही।

छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्रांति की तैयारी, 500 करोड़ निवेश से बदलेगा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर

रायपुर 
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।

बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, किसानों से सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाला राज्य बना

भोपाल
 किसानों से गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार लगातार किसानों के लिए काम करती रहेगी। मोहन यादव ने कहा है कि किसी राज्य ने अगर पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा है, तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों की संख्या सबसे ज्यादा होने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। और, सर्वाधिक लंबे समय तक किसी राज्य ने गेहूं खरीदी की व्यवस्था जारी रखी, तो वो भी मध्यप्रदेश है। 

लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार
मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया.

किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। 

लघु किसानों से खरीदी पहले
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं अपने सर्वाधिक गेहूं उपार्जन वाले राज्य की तरफ देखता हूं तो गेहूं की मात्रा में भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है, जिसके पास गेहूं का इतना विपुल उत्पादन होने के बाद उसने खरीदी की है। मध्यप्रदेश में पहली बार हमने लघु किसान, मध्यम श्रेणी के किसान का गेहूं खरीदने का निर्णय किया। हमने छोटे किसानों से लगभग 32. 72 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। मुझे बताया गया है कि लगभग पौने चौदह लाख किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनका गेहूं गोडाउन तक पहुंच चुका है। 

किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह गेहूं खरीदी की है। किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास है। हमने 24 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि प्रेषित की है। हमने किसानों से समर्थन मूल्य 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस अर्थात 2625 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। आने वाले समय में एमएसपी बढ़ती जाएगी और किसान कल्याण के काम तेज होंगे। गेहूं का इतना उत्पादन होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सरकार किसान कल्याण के काम लगातार करती रहेगी।

10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी
प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है। 

राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। 

हवाई यात्रियों को बड़ा झटका! जून से बंद होंगी 250 फ्लाइट्स, महंगे होंगे टिकट

मुंबई 

भारतीय घरेलू विमानन (एविएशन) क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते ईंधन के दाम, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश की बड़ी विमानन कंपनियां भारी दबाव में हैं. इस गंभीर संकट से निपटने और खुद को वित्तीय घाटे से बचाने के लिए एयरलाइंस ने अब विस्तार की जगह ‘सर्वाइवल मोड’ अपना लिया है. इसके तहत जून 2026 से देश में रोजाना लगभग 250 घरेलू उड़ानों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है। 

इस कटौती का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है, जिससे आगामी महीनों में हवाई सफर बेहद महंगा और सीमित हो जाएगा। 

किन एयरलाइंस ने कितनी की कटौती?

भारत के घरेलू विमानन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली तीन बड़ी कंपनियां—एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस—मिलकर अपनी उड़ानों में भारी कटौती कर रही हैं:

एयर इंडिया: कंपनी जून और जुलाई के महीनों में अपने घरेलू परिचालन में करीब 22 प्रतिशत की कटौती करेगी. एयर इंडिया रोजाना लगभग 500 उड़ानों का संचालन करती है, जिसमें से हर दिन करीब 110 उड़ानें रद्द रहेंगी. आंकड़ों के अनुसार, जहां अप्रैल-मई में कंपनी ने 31,184 उड़ानें संचालित की थीं, वहीं जून-जुलाई के लिए केवल 22,868 उड़ानें ही शेड्यूल की गई हैं। 

कितनी कटौती करेगी एयरलाइंस
इंडिगो: देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो भी अपनी घरेलू क्षमता में 5 से 7 प्रतिशत की कमी कर रही है. इसके तहत कंपनी रोजाना अपनी करीब 110 उड़ानों को रोक देगी। 

एयर इंडिया एक्सप्रेस: टाटा समूह की यह सहयोगी एयरलाइन भी अपने घरेलू नेटवर्क से लगभग 10 प्रतिशत उड़ानों को कम करने जा रही है। 

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर गिरेगी सबसे गाज
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इस कटौती का सबसे पहला और गंभीर असर देश के छोटे और टियर-2 शहरों पर पड़ेगा. एयरलाइंस अब केवल उन्हीं रूटों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। 

विशेषज्ञ अजय जसरा के मुताबिक, नागपुर, इंदौर, रायपुर, रांची, सूरत, वडोदरा, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों की कनेक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी. ये ऐसे रूट हैं जो मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के यात्रियों और बजट ग्राहकों पर निर्भर करते हैं, जहां प्रीमियम या बिजनेस क्लास के यात्री बहुत कम होते हैं। 

प्रभावित होने वाले मुख्य रूट: नागपुर-बेंगलुरु, नागपुर-कोलकाता, इंदौर-अहमदाबाद, सूरत-हैदराबाद और विशाखापत्तनम-पुणे जैसे मार्गों पर उड़ानों की संख्या काफी कम कर दी जाएगी। 

हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की आशंका
उड़ानों की संख्या घटने और सीटों की उपलब्धता कम होने के कारण टिकटों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि:

    मेट्रो रूट (बड़े शहर): दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के बीच किराए में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.
    टियर-2 रूट (छोटे शहर): सीमित उड़ानों के कारण इन शहरों के किराए 20 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे.
    लास्ट-मिनट बुकिंग
: यदि कोई यात्री यात्रा से ठीक पहले या वीकेंड पर टिकट बुक करता है, तो उसे 50 से 80 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है.

संकट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं?
विमानन क्षेत्र के इस अचानक ‘सुरक्षात्मक रवैये’ के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:

एटीएफ (विमानन ईंधन) की आसमान छूती कीमतें
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है. इसके कारण घरेलू हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में 25 प्रतिशत तक का उछाल आया है। 

अंतरराष्ट्रीय परिचालन का खर्च
पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है. इससे विदेशी उड़ानों का ईंधन खर्च करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसका असर घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है। 

कैश बचाने की मजबूरी
एविएशन एक्सपर्ट और एवियालाज कंसल्टेंट्स के सीईओ संजय लाजर के अनुसार, एयरलाइंस इस समय केवल नगदी (Cash) बचाने और अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, उद्योग के लिए अगली दो तिमाहियां बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली हैं। 

मांग में सुस्ती
गर्मियों की मुख्य छु
ट्टियों के बाद जून और जुलाई में वैसे भी पर्यटन यात्राएं कम हो जाती हैं. आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राओं पर खर्च करने से बच रहे हैं। 

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी लगा ब्रेक
घरेलू उड़ानों के साथ-साथ एयर इंडिया ने अपने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित या कम कर दिया है. दिल्ली-शिकागो, दिल्ली-शंघाई, चेन्नई-सिंगापुर और मुंबई-ढाका जैसी उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है. इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, पेरिस और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न व सिडनी जाने वाली उड़ानों के फेरे (Frequencies) भी घटा दिए गए हैं। 

आने वाले कुछ महीने भारतीय हवाई यात्रियों के लिए काफी परेशानी भरे हो सकते हैं. यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी यात्रा की योजना काफी पहले बनाएं और किसी भी असुविधा से बचने के लिए एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस लगातार चेक करते रहें। 

शिप्रा डैम के पानी पर विवाद गहराया, देवास से मांगलिया पंचायत को सप्लाई पर उठे सवाल

देवास
 शिप्रा डैम से मांगलिया पंचायत को पानी देने के मामले में देवास नगर निगम के जिम्मेदार घिरे हुए हैं। नेता सत्तापक्ष के विरोध के बाद अब चौतरफा विरोध हो रहा। पूर्व महापौरों ने मोर्चा संभालकर प्रतिक्रियाएं देना शुरू की हैं और देवास में जलसंकट की आशंका जताई है।

सांसद ने भी एमआईसी के निर्णय को गलत बताया है। पूरी निगम परिषद बैकफुट पर है। विधायक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जल संसाधन मंत्री के दबाव में यह सब किया जा रहा है।

बता दें कि गत दिनों एमआइसी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके तहत शिप्रा डैम से 2.20 एमएलडी पानी मांगलिया पंचायत को दिया जाएगा। महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने बताया था कि एनवीडीए और मांगलिया पंचायत के बीच यह करार हुआ है। देवास के हिस्से का पानी नहीं दिया जाएगा। एनवीडीए अलग से पानी देगा, जो मांगलिया तक जाएगा।

यह देवासवासियों के साथ अन्याय है
देवास का काम बस ये रहेगा कि शिप्रा डैम में पानी स्टोर करना है। बदले में मांगलिया पंचायत से मेंटेनेंस शुल्क लिया जाएगा। इस निर्णय के बाद भाजपा नेता ही विरोध में आए। सबसे पहले नेता सत्तापक्ष मनीष सेन ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और कहा कि यह देवासवासियों के साथ अन्याय है। इस पर पुनर्विचार किया जाए। हालांकि अगले ही दिन सेन ने इंटरनेट मीडिया में वीडियो प्रसारित कर बात पलट दी और कहा कि मुझे विषय की पूरी जानकारी थी, इसलिए पत्र लिखा था। अब लोग कह रहे कि इस वीडियो जारी करने के पीछे राजनीतिक दबाव है या स्वेच्छा, क्योंकि यदि एेसा था तो पहले पत्र क्यों लिखा।

पूर्व महापौर ने लिखा पत्र
 पूर्व महापौर सुभाष शर्मा ने निगमायुक्त दलीप कुमार व महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल के नाम पत्र लिखा है। हालांकि पत्र में तारीख तो ठीक है,लेकिन 2025 लिख दिया। इस पर ट्रोल भी हुए। पत्र में उल्लेख किया कि शिप्रा डेम से इंदौर के अन्य क्षेत्रों को पानी देने की योजना पर काम हो रहा है। इसके बाबद देवास नगर निगम से एनओसी या अनुमति मांगी गई है।

बढ़ते हुए देवास शहर को पेयजल देने के साथ ही इंडस्ट्रीज में भी शिप्रा डेम में वाटर सप्लाय होता है। पहले भी आसपास के कई गांवों से मांग आई थी कि हमें पानी दिया जाए, लेकिन डेम की क्षमता देखते हुए ज्यादा पानी स्टोर नहीं किया जा सकता। इसलिए डेम से दूसरे स्थानों को पानी देने से सारी व्यवस्था चौपट हो जाएगी। इंदौर जिले के गांवों में इंदौर नगर निगम या नर्मदा माइक्रो से पानी दिया जा सकता है।

पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी
इंदौर निगम की सीमा देवास नाका तक है, जो मांगलिया से दो किमी दूर ही है। इसलिए इस प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। एमआईसी प्रस्ताव पास करती है तो विशेष सम्मेलन बुलाकर पक्ष-विपक्ष से विचार-विमर्श कर ही निर्णय लें। पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी। कहा कि चालीस-पचास सालों के संघर्ष के बाद हमारे कार्यकाल में शिप्रा डेम की सौगात मिली थी। इसके जल का उपयोग स्थानीय लोगों के लिए करना होगा, दूसरे शहर या गांवों के लिए नहीं। वरना जनता को परेशान होना पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष अहिल्या पंवार ने भी उक्त निर्णय के विरोध में पत्र लिखा है।

विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए
सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है क्योंकि महापौर से मेरी बात ही नहीं हो पाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए। देवास में खुद ही जलसंकट है, एेसे में यहां का पानी कहीं और देना देवास की जनता के साथ अन्याय होगा। एेसा निर्णय होता है तो मैं विरोध करूंगा। देवास की जनता के साथ खडा़ हूं। फिलहाल आधिकारिक रूप से मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया। कांग्रेस नेता पं. रितेश त्रिपाठी के नेतृत्व में खेड़ापति मंदिर के बाहर कांग्रेसजन एकत्र हुए। यहां एमआइसी के निर्णय के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया। पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह अभियान निरंतर चलेगा। त्रिपाठी ने बताया कि एमआइसी ने गलत निर्णय लिया है। देवास के हिस्से का पानी दूसरे जिले के गांवों को देना गलत है।

उज्जैन में ‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ की टेस्टिंग शुरू, 914 गांवों को मिलेगा पानी

 उज्जैन
 मालवांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट काे स्थायी रूप से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भूमिपूजित 1275 करोड़ रुपये की ‘नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना’ अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।

उज्जैन के गंभीर बांध पर नया विशाल इंटकवेल और झिरन्या गांव में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया है। सिस्टम की मजबूती जांचने के लिए जल निगम ने अब जलप्रदाय का परीक्षण (टेस्टिंग) भी प्रारम्भ कर दिया है। अब केवल बची हुई पाइपलाइन जोड़ने का काम शेष है। अफसर से पूछा गया कि घर-घर पानी नियमित रूप से कब से मिलेगा, इस पर जवाब मिला- बहुत जल्द।

तस्वीरें दे रही हैं गवाही, ढांचागत काम लगभग पूरा
योजना के धरातल पर आने की तस्वीर इन दो निर्माण कार्यों से साफ देखी जा सकती है। पहली तस्वीर घटि्टया विकासखंड के ग्राम झिरन्या (उन्हेल रोड) में बने अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) की है, जिसका काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं दूसरी तस्वीर गंभीर बांध के जल भंडारण क्षेत्र में बने नए विशाल इंटकवेल की है, जो पानी की लिफ्टिंग के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।

परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर जब मध्य प्रदेश जल निगम के अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना है कि योजना के मुख्यतः समस्त अवयव जैसे—इंटेक वेल, जल शोधन संयंत्र, एम बी आर (मास्टर बैलेंसिंग रिज़ैवर), आई पी एस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) और टंकियां इत्यादि लगभग पूर्ण हो गए हैं। अफसरों के मुताबिक, अब केवल कुछ पाइपलाइन बिछाने और जोड़ने का कार्य ही शेष बचा है, जिसे बहुत शीघ्रता से पूर्ण किया जा रहा है।

2023 में हुआ था प्रोजेक्ट शुरू, 2025 में हो जाना था पूरा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जमीनी स्तर पर काम सितंबर-2023 में शुरू हुआ था। काम शुरू होने के चार महीने बाद 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विधिवत भूमि पूजन किया था। जल निगम ने इस काम को पूरा करने की अंतिम तारीख 7 नवंबर 2025 तय की थी।

गंभीर बांध के पास 20 मीटर गहरा और 14 मीटर व्यास वाला इंटकवेल, पंप हाउस तो समय पर आकार ले चुका था मगर परियोजना की असली रीढ़- झिरन्या का जल शोध संयंत्र और ग्रामीण इलाकों में आंतरिक पाइपलाइन बिछाने तथा पानी की टंकियों का निर्माण कार्य सबसे अधिक लंबित रहा। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में 1856 करोड़ रुपये की नर्मदा–शिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना की पाइपलाइन भी बाधा बनी।

‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ के लटकने से उन हजारों ग्रामीण परिवारों का इंतजार लंबा हुआ है, जो बरसों से घरों में नर्मदा जल आने की आस लगाए बैठे हैं। योजना के तहत दो जिलों (उज्जैन के 830 और इंदौर के देपालपुर विकासखंड के 84) के कुल 914 गांवों में घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है।

ग्वालियर में सजेगा IPL फैन पार्क, बड़ी स्क्रीन पर लाइव मैच के साथ मस्ती का डबल डोज

ग्वालियर 

 ग्वालियर में शुक्रवार को आईपीएल के इस सीजन के फ़ैनपार्क का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आईपीएल क्रिकेट के फैन्स यहाँ बैठे-बैठे स्टेडियम के माहौल का मजा लेंगे. आईपीएल फैन पार्क की व्यवस्थाओं और तैयारियों की जानकारी बीसीसीआई की और से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। 

ग्वालियर में शुक्रवार को होगा आईपीएल फैन पार्क का आयोजन
देश चार अन्य शहरों के साथ ग्वालियर में शुक्रवार को बीसीसीआई द्वारा आईपीएल फैन पार्क का आयोजन किया जा रहा है. ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम के पास बने श्रीमंत माधवराव खेल परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन होगा. जिसमें एक बड़ी स्क्रीन पर आईपीएल क्रिकेट के दीवाने लाइव मैच का प्रसारण देख सकेंगे. इसके साथ ही यहाँ आईपीएल फैन्स के लिए कई तरह की एक्टिविटीज भी होंगी। 

एंट्री फ्री लेकिन रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीसीसीआई के सीनियर मैनेजर संदीप वागड़े ने बताया, हर सीजन में बीसीसीआई की और से 50 फैन पार्क आयोजित किए जाते हैं. इस हफ्ते शुक्रवार को ये आयोजन ग्वालियर समेत देश के पाँच शहरों में होगा. शुक्रवार को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच होने वाले प्लेऑफ मैच का सीधा प्रसारण एक बड़ी स्क्रीन के साथ फैन पार्क में किया जाएगा जहाँ आने वाले सभी क्रिकेट फैन्स इसका लुत्फ उठा सकेंगे. इसमें एंट्री पूरी तरह फ्री रहेगी हालांकि इसके लिए आने वाले क्रिकेट प्रेमियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 

लॉटरी से मिलेगा आईपीएल टीम की सिग्नेचर की गई टीशर्ट जीतने का मौका
रजिस्ट्रेशन के साथ ही एंट्री करने वालों को एक कूपन दिया जाएगा जो अंदर रखे बॉक्स में सबमिट करना होगा. ब्रेक टाइम में बीसीसीआई की टीम उस बॉक्स में से दो कूपन्स निकालेगी. इन विजेताओं को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस दोनों टीमों की टी-शर्ट दी जाएगी जिन पर पूरे टीम प्लेयर्स के सिग्नेचर होंगे। 

फन इवेंट होगा आईपीएल का फ़ैनपार्क
ये फ़ैनपार्क एक फ़न इवेंट होगा जहाँ आने वाले लोगों को कई तरह की एक्टिविटीज भी मिलेंगी जिनमे बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए कई तरह के गेम्स होंगे. फूड स्टॉल्स होंगे, मैच का लाइव प्रसारण तो होगा ही, साथ ही लाइव म्यूजिक भी होगा. एक तरह से जैसे स्टेडियम में बैठ कर लोग क्रिकेट का मजा लेते हैं ठीक उसी तरह इस फैन पार्क में आने वाले लोगों को भी वहीं आनंद और माहौल मिलेगा जो मैच का मजा बढ़ा देगा। 

12 हज़ार लोग एक साथ उठायेंगे आईपीएल का आनंद
बीसीसीआई के सीनियर मैनेजर संदीप वागड़े के मुताबिक, एंट्री के साथ ही फैन्स के लिए सभी सुविधाओं और सुरक्षा का ध्यान भी रखा जा रहा है. सुरक्षाकर्मियों के साथ ही किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी के एक एंबुलेंस वाहन मौजूद रहेगी. इस फैनपार्क में लगभग 12 हज़ार लोग एक समय पर मौजूद रह कर आईपीएल का आनंद ले सकेंगे। 

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