बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मृत पाये गए नर बाघ का हुआ पोस्टमॉर्टम

भोपाल 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया अंतर्गत पनपथा बफर क्षेत्र के ग्राम खेरवा टोला में 24 मई 2026 को मृत पाए गए नर बाघ का पोस्टमॉर्टम 25 मई 2026 को किया गया। पोस्टमॉर्टम 3 वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल और 2 आमंत्रित विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ। पोस्टमॉर्टम में बाघ के सभी अंगों का गहन परीक्षण किया गया और आवश्यक नमूने संग्रहित किए गए। पोस्टमॉर्टम में एकत्रित नमूनों को बीमारी, अन्य आंतरिक रोगों, तनाव अथवा विषाक्तता जैसी संभावनाओं की जांच के लिए मानक प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम में डायरेक्टर, स्टेट वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेडक्वार्टर (एसडब्ल्यूएफएच) जबलपुर, क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व तथा एनटीसीए के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।

पोस्टमॉर्टम के बाद क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए प्रतिनिधि की उपस्थिति में 25 मई 2026 को जबलपुर में बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

पोस्टमॉर्टम में चिकित्सकों और विशेषज्ञों के पैनल ने पाया कि मृत नर बाघ का स्वास्थ्य अत्यंत खराब था। उसकी मांसपेशियां पीली एवं सूखी थीं, पाचन तंत्र खाली था और त्वचा खुरदरी और बेजान हो चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट दाहिने कंधे पर लगा था, जहां रक्तस्राव नहीं पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद लगाया गया था। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में ‘कंजेस्टिव एवं हेमरेजिक’ परिवर्तन पाए गए, जो कमजोर रक्त संचार के संकेतक हैं। पोस्टमॉर्टम करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की मृत्यु कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण हुई होगी।

 

भोपाल में चार्जिंग पर लगा मोबाइल बना साइबर ठगी का जरिया, खाते से उड़े ₹1 लाख

भोपाल

ऐशबाग में रहने वाले एक ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालक साइबर ठगी का शिकार हो गए। अज्ञात साइबर जालसाजों ने उनका मोबाइल हैक कर बैंक खाते से एक लाख रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चार्जिंग पर लगे मोबाइल का लॉक हुआ था हैंग

ऐशबाग थाना प्रभारी संदीप पवार के अनुसार अफाक कालोनी, बाग फरहत अफजा निवासी मोहम्मद शरीफ (39) गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालित करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 24 मई को उनका मोबाइल घर पर चार्जिंग पर लगा था।

घर से निकलते समय जब उन्होंने मोबाइल उठाया तो स्क्रीन लॉक नहीं खुल रहा था। कई बार प्रयास करने के बाद मोबाइल चालू हुआ और उन्होंने सामान्य रूप से फोन का उपयोग भी किया।

बिना ओटीपी और बिना संदिग्ध लिंक के हुई ठगी

इसी दौरान सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर सेंट्रल बैंक खाते से एक लाख रुपए डेबिट होने का संदेश मिला। रकम किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर की गई थी।

पीड़ित के अनुसार उन्होंने न तो कोई संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड की थी और न ही किसी को ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा की थी। उन्हें शंका है कि मोबाइल हैक कर साइबर ठगी की गई है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत व पारदर्शी बनाने पर जोर

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं, अधोसंरचना विकास एवं मानव संसाधन संबंधी विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिये विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती, नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति, चिकित्सालयों के संधारण एवं रख-रखाव, सागर स्थित कैंसर हॉस्पिटल के लिये पदों की स्वीकृति, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण (लैब स्ट्रेंदनिंग) और स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने संबंधी विषयों की समीक्षा की गई।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि अंडर सर्व्ड एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे अंतिम पंक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि केवल चिकित्सकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता भी सशक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रभावी एवं ठोस प्रयास किए जाएँ।

सीएम केयर्स के अंतर्गत अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) से जुड़े प्रकरणों में अतिरिक्त व्यय की प्रतिपूर्ति संबंधी विषय पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि जरूरतमंद मरीजों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक प्रावधान किए जाएँ।उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार पैकेज को शामिल किए जाने के लिये आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे कैंसर रोगियों को उपचार में अधिक आर्थिक सहायता मिल सके और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक उनकी पहुँच आसान हो।

स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए जाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पदस्थापना, दिव्यांग आश्रित, विधवा एवं परित्यक्ता जैसे संवेदनशील प्रकरणों को स्थानांतरण प्रक्रिया में प्राथमिकता प्रदान की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

धरती की बुझी प्यास से दक्षिण पन्ना की झिरियों में फिर लौटी जैव-विविधता

भोपाल

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्राकृतिक झिरियों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य कराया गया। इसके परिणामस्वरूप इन झिरियों को पुनर्जीवन मिला और भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है। इससे झिरियों के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्य पक्षियों की वापसी हुई है तथा क्षेत्र की जैव-विविधता पुनर्जीवित हो उठी है।

प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। पक्षियों के घोंसले फिर आबाद हो गए हैं और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ी है। वन क्षेत्र में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ विहार कर रही हैं। कई पक्षियों के घोंसलों में अंडे भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों, स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान यहां की प्राकृतिक झिरियाँ सूख जाया करती थीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने इन झिरियों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत कराई। वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष इन झिरियों में जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है। जल स्रोतों से वन्यजीवों और पक्षियों को राहत मिल रही है। साथ ही मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बन गया है।

जल संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।

 

100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध हुई 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया।

सतत मॉनिटरिंग

प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी।

किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है।

संभागवार उपार्जन

रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।

 उपार्जन के समुचित प्रबंध

प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।

 

केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी, मौसम विभाग ने बताई देरी की वजह

नई दिल्ली

 देशभर में बदलते मौसम के बीच मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। अंडमान सागर और श्रीलंका तक समय से पहले पहुंचने वाला मानसून भारत की मुख्य भूमि के करीब आकर ठहर गया है।

इसकी सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवाती मौसम सिस्टम और हवाओं के बदले हुए रुख को माना जा रहा है। मौसम विभाग ने पहले 26 मई के आसपास केरल में मानसून पहुंचने का अनुमान किया था, लेकिन अब इसके तीन से चार जून के बीच दस्तक देने की संभावना है।

केरल में मानसून अब 3-4 जून को पहुंचेगा

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा शुक्रवार को मानसून का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी करेंगे, जिसके बाद स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी। मौसम विज्ञानी एवं स्काइमेट के अध्यक्ष जेपी शर्मा का कहना है कि इस बार मानसून की शुरुआत धीमी और संतुलित रह सकती है।

उनके मुताबिक अगर मानसून तीन-चार जून तक केरल पहुंच भी जाता है तो शुरुआत में इसकी रफ्तार कमजोर रहेगी और यह तेजी से उत्तर भारत की ओर आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने इसे मानसून की सॉफ्ट लैंडिंग बताया है।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुख्य कारण

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की चाल अभी पूरी तरह समुद्री हवाओं पर निर्भर है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम ने मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींच लिया है।

इससे अरब सागर से केरल की तरफ बढ़ने वाली नमी भरी दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। यही कारण है कि मानसून की प्रगति रुक गई और उत्तर की ओर बढ़ने की उसकी रफ्तार धीमी हो गई।

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अरब सागर, लक्षद्वीप एवं बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ चुका है, लेकिन केरल तट पर इसके आगमन के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। निचले स्तर की हवाएं धीरे-धीरे मजबूत हो रही हैं, मगर ऊपरी स्तर की हवाएं अभी सही दिशा में नहीं बह रहीं। इसी वजह से मानसून को आगे बढ़ने में समय लग रहा है।

श्रीलंका में भी देरी से पहुंच रहा मानसून 

श्रीलंका में मानक समय से छह दिन की देरी से आधिकारिक तौर पर मानसून पहुंच गया है। श्रीलंका पहुंचने के लगभग एक सप्ताह बाद मानसून केरल पहुंचता है। ऐसे में अब दो से चार जून के बीच केरल में मानसून के प्रवेश की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है। हालांकि केरल में अभी भारी बारिश हो रही है, लेकिन उसे प्री-मानसून की श्रेणी में रखा गया है।

एल नीनो का शुरुआती प्रभाव भी संभव

मानसून घोषित करने के लिए मौसम विभाग के तय 14 केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होना जरूरी होता है। इसके साथ हवा की गति, दिशा और बादलों की स्थिति भी तय मानकों पर खरी उतरनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और मानसून की देरी का सीधा संबंध समुद्री और वायुमंडलीय हालात पर निर्भर है। प्रशांत महासागर की स्थिति अभी धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ती दिख रही है। मौसम विभाग का कहना है कि एल-नीनो की शुरुआती छाया मानसून की गति एवं वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इसका असर शुरुआती चरण में ही माना जा रहा है।

 

भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन से मिलेगी वैश्विक पहचान — मंत्री पटेल

भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज का दिन भारत और मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। यह पावन अस्थि अवशेष न केवल हमारी अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द के प्रतीक भी हैं। मंत्री पटेल राजा भोज एयरपोर्ट पर भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना करने के कार्यक्रम के संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन करने से वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध के इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां संपूर्ण विश्व में केवल तीन देशों—भारत,लंका एवं म्यांमार में ही संरक्षित हैं, जो हमारे प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इससे मंगोलिया सहित सभी देशों के बौद्ध अनुयायी प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे।

मंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जन-जन की आस्था और देश के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि जब वे भारत के संस्कृति मंत्री थे, तब एक विशेष नीति बनाई गई थी कि जिस देश से एक लाख से अधिक पर्यटक भारत आएंगे, वहां उनकी स्थानीय भाषा में साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इसी नीति के तहतलंका से दो लाख से अधिक पर्यटकों के आगमन पर सांची में उनकी भाषा में साइन बोर्ड लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को सांची और अन्य बौद्ध स्थलों की यात्रा के दौरान सुगमता और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने बल देकर कहा कि सांची केवल अपने पाषाण स्तूपों के कारण विश्व धरोहर स्थल नहीं है, अपितु इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की पावन उपस्थिति के कारण वैश्विक श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण विश्व भर से पर्यटक यहाँ खिंचे चले आते हैं। पूर्व में इन अवशेषों की सफल थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन और प्रगाढ़ हैं, और यह यात्रा इन संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

सांची आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना — पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने सांची की महत्ता को बताते हुए कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का एक अनमोल खजाना है। बौद्ध जगत में इस स्थान की महिमा अतुलनीय है। उन्होंने पूर्व के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब ये पवित्र अस्थि अवशेष पूर्व में थाईलैंड प्रवास पर गए थे, तब वहां लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) से अधिक श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से इनकी पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों (रेलिक्स) का स्थान सर्वोपरि है और उन्हें सांची जैसी पवित्र धरा का कस्टोडियन (संरक्षक) बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मूल मंत्र ‘विकास भी, विरासत भी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रकल्प संपूर्ण विश्व को यह दिग्दर्शित करते हैं कि भारत आदि काल से विश्वगुरु रहा है और अपनी इसी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण सदैव विश्वगुरु के पद पर सुशोभित रहेगा।

कलेक्टर मिश्रा ने अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ है, जो स्वयं भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल और उनसे जुड़े अत्यंत पवित्र क्षेत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे में भोपाल की धरती पर इस पावन विदाई समारोह का साक्षी बनना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस गरिमामयी आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान मध्य एशिया के देश मंगोलिया तक सुदृढ़ रूप से पहुंचेगी। भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम अन्य देशों के साथ आयोजित किए जाएंगे, जो हमारे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण हैं क्योंकि मध्यप्रदेश ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध प्रदेश है।

इस गरिमामयी प्रस्थान समारोह में छोटे गुरु पूज्य बानगल विमल तिस्स थेरी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के संचालक कर्नल यश सक्सेना, संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध जन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी गणमान्य नागरिकों ने मंत्रोच्चार और पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के बीच भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया यात्रा के लिए भावभीनी और श्रद्धापूर्वक विदाई दी।

 

 

PNG यूजर्स के लिए राहत, LPG कनेक्शन सरेंडर करने की नहीं होगी जरूरत

नई दिल्ली

शहर बदलते हैं, तो सामान तो पैक हो जाता है, लेकिन रसोई की गैस वाली मुसीबत कई लोगों के लिए ‘गले की हड्डी’ बन जाती थी. अक्सर लोग पीएनजी यानी पाइप वाली गैस लेने से कतराते थे, क्योंकि डर यही रहता था कि अगर कल को कहीं और शिफ्ट होना पड़ा, तो फिर से नए कनेक्शन के चक्कर में कौन धक्के खाएगा. अब दिल्ली सरकार और केंद्र के नए आदेश के बाद इस मामले में भी राहत मिल रही है. दरअसल, सरकार ने एलपीजी नियमों में गजब के बदलाव किए हैं, जिसके बाद अब आपका पुराना कनेक्शन ‘डेड’ नहीं होगा, बल्कि उसे ‘पॉज’ माना जाएगा।

अगर आपके घर में भी नया पीएनजी कनेक्शन लगा है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. HPCL ने ग्राहकों को बताया है कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन एक्टिव हो चुका है, उनके पास अब 2 रास्ते हैं. या तो वे पीएनजी लगने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करके हमेशा के लिए खत्म कर दें, या फिर एक खास ट्रांसफर वाउचर ले लें. इस ट्रांसफर वाउचर का फायदा यह है कि अगर आप भविष्य में किसी ऐसे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की पाइपलाइन मौजूद नहीं है, तो आप इसी वाउचर की मदद से अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन फिर से चालू करवा सकते हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूशन को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सरकार इस दिशा में काफी तेजी से कदम उठा रही है. HPCL ने कहा है कि ये नई गाइडलाइंस 25 मई 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं. नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बदले हुए नियम के बारे में खुद को अपडेट रखें और बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से गैस सप्लाई का लाभ उठाने के लिए इन नए नियमों का पालन करें. यह पूरा फैसला असल में सरकार के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस अमेंडमेंट ऑर्डर 2026 के तहत लिया गया है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने नोटिफाई किया है।

इस समय इस तरह के कड़े और सूझबूझ वाले नियमों की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर गैस और ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. मध्य पूर्व में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे भारी तनाव और संकट की वजह से दुनिया भर में गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत की स्थिति बन गई है, जिससे कच्चे माल और गैस के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत की एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर हमारे देश की घरेलू गैस सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

कैसे मिलेगी गैस की सुविधा
नियम ये है कि पीएनजी लगवाने के 30 दिनों के भीतर आपको अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन बंद करने की अर्जी देनी होगी, लेकिन इसका फायदा ‘ट्रांसफर वाउचर’ में है. अगर आप कल किसी ऐसे शहर या इलाके में शिफ्ट होते हैं, जहां पाइप वाली गैस नहीं है, तो बस ये वाउचर दिखाइए और अपना सिलेंडर वाला कनेक्शन फिर से चालू करवा लीजिए. यानी कि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेपरवर्क की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

किसके लिए है ये काम की खबर?
खासकर उन लोगों के लिए जो काम के सिलसिले में शहर-दर-शहर भटकते हैं, या फिर वो छात्र जो रेंट पर रहते हैं. अब आप बेफिक्र होकर पीएनजी अपनाएं, क्योंकि सुरक्षा और सुविधा के बीच अब आपको किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सरकार का यह कदम वाकई में आम आदमी की ‘किचन लाइफ’ को बहुत सहूलियत देने वाला है।

कुल मिलाकर, यह नियम उन लोगों के लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं है जो बार-बार घर बदलते हैं. अब ‘ट्रांसफर वाउचर’ के जरिए आपकी गैस की गाड़ी कभी नहीं रुकेगी. बस अपने पेपर संभाल कर रखिए और बेफिक्र होकर अपनी रसोई को स्मार्ट बनाइए।

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज संकट के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार के लिए अपने घरेलू संसाधनों का सही और सटीक इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है. यही वजह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह नया संशोधन उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है जिनकी नौकरियां ट्रांसफरेबल हैं या जो अक्सर घर बदलते रहते हैं. सरकार ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले छात्रों को भविष्य में कोई दिक्कत न हो. मान लीजिए आज आप किसी ऐसे फ्लैट में रह रहे हैं जहां पीएनजी लगी है, लेकिन कल को किसी कारण से आपको किसी ऐसी जगह जाना पड़े जहां अभी पाइपलाइन नहीं बिछी है, तो आपके पास मौजूद ट्रांसफर वाउचर सिस्टम ही आपके काम आएगा।

यह नया नियम असल में केंद्र सरकार के ‘एक घर, एक गैस कनेक्शन’ वाले बड़े अभियान का एक अहम हिस्सा है. सरकार का मुख्य उद्देश्य डुप्लिकेट एलपीजी कनेक्शनों के इस्तेमाल पर लगाम लगाना, सब्सिडी का फायदा सीधे सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और होर्मुज संकट जैसी वैश्विक दिक्कतों के बीच एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी बाजारों में से एक है, जहां एचपीसीएल, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले और मार्केट रेट वाले सिलेंडरों की डिलीवरी करती हैं, इसलिए इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और व्यवस्थित करना बेहद जरूरी हो गया था।

MP में नौतपा का कहर, 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार

भोपाल

नौतपा के चौथे दिन भी मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में रहा। प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बड़े शहरों में ग्वालियर का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में हीटवेव और तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों में कई जिलों में आंधी और वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 43.8 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। इधर, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। इसके बाद वर्षा का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

नौतपा के बीच आंधी-बारिश का भी अनुमान

नौतपा के दौरान इस बार गर्मी के साथ वर्षा और तेज आंधी का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं वर्षा दर्ज की गई है। 29 से 31 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश जिलों में वर्षा और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट

मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित 10 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, विदिशा और उज्जैन समेत 32 जिलों में येलो अलर्ट जारी है।
लू से बचने के लिए सावधानी जरूरी

मौसम विज्ञानियों ने लोगों को दोपहर 12 से तीन बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मई के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और वर्षा का असर बढ़ेगा, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है।

 

त्विषा केस में बड़ा एक्शन, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार

भोपाल

नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार शाम को सीबीआई टीम ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया।

इसके लिए टीम सुबह 10 बजे घर पहुंच गई थी और करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। सीबीआई ने उन्हें भोपाल के मैनिट स्थित कैंप में रखा है। वहीं, त्विषा के पति समर्थ सिंह को पहले ही सीबीआई रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और जांच की

समर्थ 29 मई तक की रिमांड पर है। सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम ने डीआईजी अब्दुल जब्बार के नेतृत्व में गुरुवार को सुबह गिरिबाला के घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की। इसके बाद गिरिबाला से लगातार पूछताछ की गई।

देर शाम गिरफ्तारी के दौरान घर के बाहर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीबीआई टीम ने सुरक्षा कारणों से अपनी गाड़ी घर के अंदर पार्क कराई और उसी में गिरिबाला को बैठाकर मैनिट स्थित सीबीआई कैंप कार्यालय ले गई।
तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सवाल किए

पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने गिरिबाला, त्विषा व समर्थ के रिश्तों को लेकर सवाल किए। उन्होंने मामले से जुड़े कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी सवाल किए। जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त कर चुकी है।
हाई कोर्ट ने इसलिए रद की थी अग्रिम जमानत

बता दें कि बुधवार देर रात एक बजे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट ने माना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जबकि वाट्सएप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। इन तथ्यों के आधार पर न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

न्यायिक सेवा में कई अहम पदों पद रहीं हैं गिरिबाला

भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से 2024 में रिटायर्ड हुईं गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई की।

उन्होंने 1988 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर सिविल जज (क्लास-2) के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। 2010- 2011 में उच्च न्यायिक सेवा का हिस्सा बनीं। 2018 में भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं।

इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलसचिव रह चुकी हैं। गैस राहत कोर्ट भोपाल की न्यायाधीश भी रहीं। वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-2 की अध्यक्ष हैं।

 

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