शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा आश्वासन, बोले- किसी भी छात्र की शिकायत लंबित नहीं रहेगी

नई दिल्ली

CBSE की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और छात्रों के हित में बनाई गई है. उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन कर छात्रों को भरोसेमंद और निष्पक्ष परिणाम देने की कोशिश की गई है. CBSE OSM में गड़बड़ियों पर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत अनसुलझी नहीं रहेगी।

40 करोड़ पेज स्कैन:पहली बार हुआ इतना बड़ा डिजिटल मूल्यांकन
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी. इन परीक्षाओं में लगभग 98 लाख आंसर शीट्स को सुरक्षित रखा गया. हर आंसर शीट औसतन 40 पन्नों की थी यानी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए.उन्होंने कहा कि CBSE ने पहली बार OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए मूल्यांकन किया जो दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज और संस्थानों में तेजी से अपनाई जा रही आधुनिक प्रणाली है।

छात्रों के लिए फायदेमंद
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक OSM पूरी तरह स्टूडेंट फ्रेंडली सिस्टम है. इससे छात्रों को अपने अंकों की जानकारी पारदर्शी तरीके से मिलती है और मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बढ़ता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

आंकड़े खुद बता रहे हैं छात्रों का भरोसा
बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक कुल 18.57 लाख पंजीकृत छात्रों में से केवल 4.06 लाख छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया.OSM के तहत कुल 98.66 लाख आंसर बुक्स स्कैन की गईं, जबकि 11.38 लाख आंसर बुक्स ही देखने के लिए मांगी गईं. इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं।

अफवाहों से निपटने के लिए CBSE की सख्त रणनीति
OSM एक तकनीक आधारित सुधार है इसलिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अफवाहों से बचने के लिए मजबूत कम्युनिकेशन रणनीति अपनाई.CBSE ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स @cbseindia29 के जरिए लगातार जानकारी दी, ताकि गलत या भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जा सके और सिस्टम की संरचना व सुरक्षा उपायों को समझाया जा सके।

केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील
बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर छात्रों, अभिभावकों और मीडिया से अपील की है कि वे असत्यापित और सनसनीखेज सोशल मीडिया दावों से बचें और केवल CBSE वेबसाइट पर जारी आधिकारिक सर्कुलर पर ही भरोसा करें. इस पूरे माहौल में कई छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल सामने आए हैं और उन्होंने OSM के जरिए हुई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं.CBSE ने साफ किया है कि बोर्ड ने न तो कोई लिखित आदेश जारी किया है और न ही किसी पर दबाव डाला गया है कि वे इस प्रक्रिया के समर्थन में बयान दें।

खलनायक 2 में संजय दत्त की वापसी तय, लेकिन डायरेक्टर की तलाश अब भी जारी

बॉलीवुड स्टार संजय दत्त कितनी भी फिल्में कर डालें, मगर पक्के इंडियन सिनेमा फैंस के लिए वो हमेशा ओरिजिनल खलनायक (1993) ही रहेंगे. सुभाष घई की इस फिल्म का जनता पर ऐसा असर पड़ा कि लोग संजय को ‘खलनायक’ ही बुलाने लगे और आज भी बुलाते हैं. इसलिए अप्रैल के अंत में जब इसका सीक्वल खलनायक 2 अनाउंस हुआ तो फैंस में खुशी की लहर दौड़ गई. संजय दत्त तो खलनायक के रोल में लौट रहे हैं, मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि फिल्म को डायरेक्ट कौन करेगा? क्योंकि खलनायक 2 की अनाउंसमेंट बिना किसी डायरेक्टर के नाम के हुई थी.

फिल्म अनाउंस होने के कुछ दिन बाद ही ओरिजिनल फिल्म के डायरेक्टर सुभाष घई ने साफ कर दिया था कि वो बतौर ‘मेंटर’ ही इस फिल्म के साथ जुड़ेंगे, लेकिन इसे डायरेक्ट नहीं करेंगे. अब सामने आया है कि 90 के दशक के एक और धमाकेदार मसाला एंटरटेनर डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने भी खलनायक 2 का निर्देशन करने से इनकार कर दिया है.

राजकुमार संतोषी भी नहीं डायरेक्ट करना चाहते खलनायक 2
बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट बताती है कि संजय दत्त को ये फिल्म राजकुमार संतोषी के हाथों में सौंपने की बड़ी इच्छा थी. एक सूत्र ने बताया, ‘संजय को लगता है कि राज जी को कमर्शियल सिनेमा की बहुत शानदार समझ है, इसलिए वो इस कहानी के साथ पूरा न्याय कर सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों दिग्गजों ने कभी साथ काम भी नहीं किया है. संजय दत्त को लगा कि अगर फाइनली वो और राजकुमार साथ आ जाएं, वो भी इतने स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए, तो स्क्रीन पर मजा आ जाएगा.’

इसी उम्मीद के साथ संजय दत्त ने राजकुमार संतोषी के साथ मुलाकात की थी, लेकिन संतोषी ने पूरे सम्मानजनक तरीके से फिल्म डायरेक्ट करने से मना कर दिया. सूत्र ने आगे बताया, ‘वो आजकल सनी देओल स्टारर अपनी फिल्म लाहौर 1947 को फाइनल टच देने में काफी व्यस्त हैं. इसके अलावा उन्होंने कुछ नई स्क्रिप्ट भी लिखी हैं, जो वो सनी देओल और आमिर खान को पिच करने वाले हैं. इसलिए उन्होंने संजय को साफ बता दिया कि उनके पास समय की काफी कमी है.’ हालांकि, संतोषी ने संजय दत्त को इस फिल्म के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं और संजू बाबा को उनका यह जेस्चर बहुत पसंद आया.

संजय दत्त को जेल में आया था खलनायक रिटर्न्स का आइडिया
इससे पहले खलनायक के ओरिजिनल डायरेक्टर सुभाष घई ने यह कहते हुए फिल्म डायरेक्ट करने से इनकार कर दिया था कि वो अपनी ही फिल्म का सीक्वल नहीं बनाना चाहते. उनका मानना था कि 80 साल की उम्र में इस तरह की कड़क एक्शन-मसाला फिल्म संभालना उनके लिए थोड़ा मुश्किल होगा.

मजेदार बात यह है कि खलनायक रिटर्न्स के लॉन्च इवेंट में संजय दत्त ने खुद खुलासा किया था कि उन्हें इस फिल्म का आइडिया जेल में आया था. जेल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि जब वो वहां गाने बजाते थे, तो उनके साथी कैदी उनसे बार-बार खलनायक के गाने लगाने की फरमाइश करते थे.

रिपोर्ट्स के अनुसार संजय ने बताया था, ‘जब मैंने कैदियों से पूछा कि अगर खलनायक फिर से बनाएं तो कौन-कौन देखना चाहेगा? तो वहां मौजूद सारे 4000 कैदियों ने एकसाथ हाथ उठाकर कहा कि वो ये फिल्म जरूर देखना चाहेंगे. इसके बाद मैंने उन सबसे फिल्म के लिए एक-एक पेज का आइडिया भेजने को कहा. मुझे वो 4000 पन्ने पढ़ने में काफी समय लगा, लेकिन उनमें से एक आइडिया मुझे बेहद पसंद आया.’

अब कहानी तो संजू बाबा के पास रेडी है, लेकिन देखना यह है कि ओरिजिनल ‘खलनायक’ की इस विरासत को आगे बढ़ाने की कमान बॉलीवुड का कौन सा डायरेक्टर थामता है.

पूजा भट्ट ने बॉबी देओल संग पुराने रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों नहीं चला प्यार

पूजा भट्ट 90 के दशक की खूबसूरत और मंझी हुई एक्ट्रेसेस में शुमार हैं. बहुत कम होता है जब पूजा ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर बात की हो. सालों बाद उन्होंने बॉबी देओल संग रिश्ते का सच बयां किया है. जानते हैं कि उनका और बॉबी का रिश्ता क्यों टूटा था.

अधूरी रही मोहब्बत
बॉबी देओल और तान्या देओल बॉलीवुड के शांत-शालीन कपल में से एक हैं. दोनों जब भी साथ आते हैं चाहने वालों का दिल खुश कर देते हैं. पर तान्या से पहले बॉबी का दिल पूजा भट्ट पर आया था. वो और पूजा लंबे समय तक रिलेशनशिप में भी रहे. पूजा भट्ट ने विक्की लालवानी संग बातचीत में इस अधूरी मोहब्बत का जिक्र किया है.

पूजा भट्ट ने बॉबी को लेकर कहा कि उन्होंने उनके पिता की फिल्म आशिकी का लीड रोल ठुकरा दिया था. वो उस समय फिल्मी करियर के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं थे. एक्ट्रेस कहती हैं कि हम दोनों में प्यार था. हमने कभी इससे इनकार नहीं किया. वो मेरे जीवन का एक जादुई समय था और उनके साथ होना एक जादुई अनुभव था. वो एक मैजिकल इंसान हैं. फिर हम अलग दिशाओं में बढ़ गए.

जब पूजा भट्ट से पूछा गया कि उनका और बॉबी का रिश्ता क्यों टूटा, तो उन्होंने कहा कि बॉबी अब परिवार वाले हैं और करियर के एक नए दौर में हैं, तो सार्वजनिक रूप से पिछले रिश्ते के बारे में बात करने का मतलब नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आज बैठकर बताना अच्छा लगेगा कि मेरा उनसे रिश्ता क्यों खत्म हुआ या क्या हुआ ही था. हमने कभी इसे नकारा नहीं. वो आज शादीशुदा आदमी हैं, बड़े बच्चे के पिता हैं और करियर में शानदार तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. मुझे वो एनिमल में अच्छे लगे. मेरे हिसाब से उन्होंने ही फिल्म बनाई. मुझे उनके लिए बहुत खुशी है.

पूजा ने कहा कि अतीत के बारे में कुछ भी बताकर अपने रिश्ते को छोटा नहीं करना चाहती हैं. वो कहती हैं कि किसी के साथ अच्छा समय बिताया वो काफी है. ये बताना जरूर नहीं है कि रिश्ता क्यों नहीं चला. वर्तमान के लिए गरिमा और शालीनता बनाए रखना बहुत जरूरी है. यही हम सबके लिए अच्छा भी है. 

जापान में बैन के बाद सिंगापुर में भारतीय आमों की भारी डिमांड, सुपरमार्केट से मिनटों में हो रहे गायब

नई दिल्ली
भारत को दुनिया में आमों का राजा माना जाता है, और उत्पादन से लेकर निर्यात तक में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। लेकिन हाल ही में भारतीय आमों को लेकर एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। दरअसल, जापान के प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन (कीटाणुशोधन) और सुरक्षा उपायों में कमियों का हवाला देते हुए भारत की प्रीमियम आम किस्मों के आयात पर रोक लगा दी थी।

इस रोक में केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी टॉप क्लास किस्में शामिल थीं। जापान की इस रोक के बावजूद भारतीय आमों की वैश्विक साख पर कोई असर नहीं पड़ा। अब यही आम सिंगापुर के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं।

सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी दी कि वहां भारतीय आमों का जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे ये प्रीमियम आम सुपरमार्केट्स में आते ही फटाफट बिक हो रहे हैं।

भारत है दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। पीआईबी (PIB) के अनुसार, साल 2024-25 के दौरान देश में रिकॉर्ड 228.37 लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। भारत से अल्फांसो, तोतापुरी, केसर, नीलम और मल्लिका जैसी किस्में विदेशों में खूब निर्यात की जाती हैं।

खासतौर पर खाड़ी देशों और अमेरिका-ब्रिटेन में भारतीय आमों की भारी डिमांड है। APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, केवल साल 2024 में भारत ने अकेले यूएई (UAE) को 20 मिलियन डॉलर मूल्य के 12,897 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए थे।

इसके अलावा नेपाल, कतर और कुवैत में भी इसकी भारी मांग है। भारत में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश मुख्य आम उत्पादक राज्य हैं, जिनके स्वाद का जादू आज पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है।

1 जून से रेलवे स्टेशनों पर महंगा होगा खाना, सेंट्रल रेलवे ने बढ़ाए रेट

नई दिल्ली
ट्रेन से सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका है, जहां रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाला खान-पान अब और महंगा होने जा रहा है। सेंट्रल रेलवे ने 1 जून 2026 से खान-पान की विभिन्न वस्तुओं की दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह बढ़ोतरी तेल और गैस की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे के कारण की गई है।

इन चीजों के बढ़े दाम
नई दरों के मुताबिक, सबसे लोकप्रिय स्नैक वड़ा पाव की कीमत में लगभग 54% की भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले 13 रुपये में मिलने वाला वड़ा पाव अब 20 रुपये में मिलेगा, जिसमें 50 ग्राम आलू वड़ा 15 रुपये और पाव 5 रुपये प्रति पीस तय किया गया है। इसके अलावा वेज समोसा, वेज पफ और साबूदाना वड़ा भी अब 20 रुपये प्रति पीस की दर से मिलेंगे। वहीं, पाव भाजी और वेज पिज्जा के शौकीनों को अब 50 रुपये प्रति पीस चुकाने होंगे।

कौन-कौन सी चीजें कितने में मिलेगी, पूरी लिस्ट?

क्रमांक खाद्य पदार्थ कीमत
1 आलू वड़ा 15 रुपये
2 रगड़ा/उसल प्लेट + 1 पाव 25 रुपये
3 वेज समोसा 20 रुपये
4 पाव 5 रुपये
5 वेज सैंडविच + सॉस 35 रुपये
6 वेज चीज सैंडविच + सॉस 45 रुपये
7 वेज पफ/पेटिस 20 रुपये
8 साबूदाना वड़ा 20 रुपये
9 ढोकला 25 रुपये
10 सभी प्रकार के लड्डू 20 रुपये
11 वेज फ्रेंकी 30 रुपये
12 वेज चीज फ्रेंकी 45 रुपये
13 सूखा भेल 25 रुपये
14 चटनी भेल 30 रुपये
15 पोहा नमकीन 20 रुपये
16 सादा डोसा + चटनी + सांभर 25 रुपये
17 मसाला डोसा + चटनी + सांभर 35 रुपये
18 प्याज डोसा/उत्तपम + चटनी/सांभर 30 रुपये
19 रवा डोसा/मसाला उत्तपम + चटनी + सांभर 35 रुपये
20 रवा इडली + चटनी + सांभर (2 नग) 35 रुपये
21 पाव भाजी (2 पाव) 50 रुपये
22 दही वड़ा (2 नग) 35 रुपये
23 वेज कटलेट (2 नग) + सॉस/चटनी 35 रुपये
24 छोले पूरी (5 पूरी + छोले) 40 रुपये
25 मेदु वड़ा + चटनी/सांभर (2 नग) 35 रुपये
26 इडली सांभर/चटनी (2 नग) 30 रुपये
27 चना दाल वड़ा + चटनी (2 नग) 35 रुपये
28 ब्रेड पकोड़ा 25 रुपये
29 प्याज के पकोड़े/मिली-जुली भजिया 25 रुपये
30 मूंग भजिया 30 रुपये
31 वेज Roll 30 रुपये
32 वेज पिज्जा 50 रुपये
33 टमाटर का सूप 20 रुपये

गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश
मूल्य वृद्धि को मंजूरी देने के साथ ही रेलवे ने सभी लाइसेंसधारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि दरों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुधार के रूप में दिखना चाहिए। इसके अलावा, नए टैरिफ लागू होने के 6 महीने बाद बिक्री का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर लाइसेंस शुल्क की समीक्षा होगी।

राहत की बात यह है कि कचौड़ी, गुलाब जामुन, ताजे जूस, मिसल पाव और वेज नूडल्स समेत 16 लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, जूस और सोडा उत्पादों के दाम भी पहले की तरह ही बने रहेंगे।

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, 2 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम, चांदी भी टूटी

मुंबई 
इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को सोने की कीमतों में 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और स्पॉट गोल्ड 4,406.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह दो महीने का सबसे निचला स्तर है। स्पॉट सिल्वर भी 1.7% टूटकर 73.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इसकी वजह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए हमले हैं, जिससे क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर अनिश्चितता और गहरा गई है।

अमेरिकी हमलों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर नए हमले किए हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बताया गया था। यह घटना तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए समझौता हो गया है।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की एक वजह डॉलर भी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है, जिससे डॉलर में मूल्यवान सोना अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो गया है। अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो प्लैटिनम: 0.5% गिरकर 1,909.15 डॉलर और पैलेडियम 0.7% कमजोर होकर 1,381.64 डॉलर पर आ गया।

फेड अधिकारियों के बयान से बढ़ी बेचैनी
फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक ने कहा कि केंद्रीय बैंक को फिलहाल कम अवधि के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ, ईरान संघर्ष और एआई से जुड़े निवेश से दबाव बढ़ रहा है, और जरूरत पड़ने पर दरों में बढ़ोतरी संभव है। वहीं, फेड के फिलिप जेफर्सन ने कहा कि महंगाई के जोखिमों को देखते हुए मौजूदा मौद्रिक नीति उपयुक्त है। बाजार अब आज देर शाम जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा का इंतजार कर रहा है, जो Fed की आगे की नीति दिशा का संकेत देगा।

गोल्ड की रेंज और अहम सपोर्ट
कमोडिटी एक्सपर्ट और एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फिलहाल 4,500–4,540 डॉलर के दायरे में सिमट रहा है। उन्होंने बताया गोल्ड के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 4,560–4,600 डॉलर है। इसके ऊपर सस्टेन होने पर तेजी आ सकती है और कीमतें 4,660–4,700 डॉलर तक जा सकती हैं। दूसरी ओर गोल्ड पर तत्काल सपोर्ट 4,500–4,460 डॉलर प्रति औंस है और इस स्तर के नीचे जाने पर गिरावट बढ़कर 4,400–4,350 डॉलर तक आ सकती है। 

‘आलाकमान का फैसला मंजूर’, इस्तीफे के बाद बोले सिद्धारमैया; DK शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

बेंगलुरु

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे. सत्ता परिवर्तन के इस बड़े कदम के बीच सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि राज्य में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत बरकरार है, इसलिए संविधान के अनुसार नई सरकार बनाने का अधिकार भी उनकी पार्टी को ही मिलना चाहिए. इस बड़े सियासी उलटफेर के दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का यह अवसर प्रदान किया था. अब पूरे राज्य की नजरें राजभवन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिक गई हैं।

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी. बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।

बताया जाता है कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह तर्क दिया कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर कायम रहे. पार्टी नेतृत्व ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया पहले ही आठ वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को अवसर देने का समय है. सूत्रों के मुताबिक, बाद में सिद्दारमैया ने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी हाईकमान के निर्देश को मानने की सलाह दी. शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी सहयोगियों से मुलाकात की। कुछ मंत्रियों ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे. सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने सहयोगियों से कहा, ‘मैं शुरू से कहता आया हूं कि राहुल गांधी जब कहेंगे, मैं इस्तीफा दे दूंगा. अब जब उन्होंने कहा है, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा।

कांग्रेस के लिए अहम
कांग्रेस नेतृत्व इस फैसले को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से अहम मान रहा है. 2014 के बाद कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं पर नियंत्रण बनाए रखने में संघर्ष करती रही है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो सका था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का यह कदम पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले सर्वोपरि होंगे।

 इस्तीफा देने के प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक हुए सिद्धारमैया
सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक के राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिद्धारमैया काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है.’ सिद्धारमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और संवैधानिक रूप से नई सरकार बनाने का अधिकार भी कांग्रेस को ही मिलना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया।

BJP का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दिल्ली-हरियाणा समेत 4 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त

नई दिल्ली

बीजेपी संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने गुरुवार (28 मई) को चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने का ऐलान किया है. दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा की जगह केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को कमान सौंपी गई है. इसके अलावा, भाजपा ने पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों का ऐलान किया है. इसको लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

कौन हैं दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा?
हर्ष मल्होत्रा बीजेपी के सीनियर नेता और दिल्ली से सांसद हैं. वह अभी तक केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं. लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय मल्होत्रा ने दिल्ली भाजपा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह जनसंपर्क, संगठन क्षमता और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के लिए जाने जाते हैं।

अर्चना गुप्ता बनीं हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष
डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जबकि सरदार केवल सिंह ढिल्लो को पंजाब और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कौन हैं पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष
केवल सिंह ढिल्लों बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2022 की संगरूर लोकसभा की उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा की उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था. ढिल्लों देश और पंजाब के एक बड़े उद्योगपति हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी रहे हैं, उन्हें बरनाला के लोग विकास पुरुष के तौर पर जानते हैं, उन्होंने अपनी राजनीति हमेशा विकास के मुद्दे पर लड़ी है, जबकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ कभी भी विवाद की राजनीति में वह नहीं पड़े।

पंजाब बीजेपी की कमान केवल सिंह ढिल्लों को
सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था।

उद्योगपति से नेता तक का सफर
केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी भी रहे हैं। बरनाला में लोग उन्हें विकास कार्यों के लिए जानते हैं।

हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में भी नए चेहरे को मौका मिला है। बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, अभिषेक देवराय को त्रिपुरा बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है।

जांजगीर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, SP ने कई अफसरों के किए तबादले

जांजगीर-चांपा.

पुलिस महकमे की कार्यशैली में कसावट के लिहाज से जांजगीर-चाम्पा पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने कई अहम तबादले किए हैं. पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, चार निरीक्षकों के थानों बदलाव किया गया है.

इसके साथ पांच उपनिरीक्षकों और दो सहायक उप निरीक्षक का तबादला किया गया है. इनमें शिवरीनारायण थाना प्रभारी राजीव श्रीवास्तव को बिर्रा थाना का प्रभार दिया गया है, वहीं बिर्रा थाना प्रभारी जय साहू को यातायात शाखा भेजा गया है.

              इनका किया गया तबादला

  • निरीक्षक राजीव श्रीवास्तव को थाना प्रभारी शिवरीनारायण से थाना प्रभारी बिर्रा।
  • निरीक्षक जय कुमार साहू को थाना प्रभारी बिर्रा से यातायात शाखा।
  • निरीक्षक कमलेश कुमार शेन्डे को रक्षित जांजगीर से थाना प्रभारी अजाक।
  • निरीक्षक रंजीत सिंह कंवर थाना प्रभारी अजाक से चौकी प्रभारी नैला।
  • उप निरीक्षक कृष्णपाल सिंह थाना प्रभारी बम्हनीडीह को थाना प्रभ्ज्ञारी शिवरीनारायण।
  • उप निरीक्षक दिलीप कुमार सिंह चैकी प्रभारी पंतोरा से थाना प्रभारी बम्हनीडीह।
  • उप निरीक्षक कृष्ण कुार साहू थाना पामगढ़ से चौकी प्रभारी पंतोरा।
  • उप निरीक्षक विनोद कुमार जाटवर थाना अकलतरा को पुसके प्रभारी कोटमी सोनार, थाना अकलतरा।
  • उप निरीक्षक कमलदास बनर्जी को थाना जांजगीर से थाना अकलतरा।
  • सउनि कुष्ण कुमार कोशले रक्षित केंद्र जांजगीर से थाना पामगढ़।
  • सउनि प्रतीभा राठौर को पुसके कोटमी सोनार, थाना अकलतरा से महिला थाना।

राष्ट्रीय पर्वों से गायब रहना शिक्षक को पड़ा महंगा, संयुक्त संचालक ने किया निलंबित

लोरमी/मुंगेली.

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी स्कूल से गायब रहना शिक्षक को भारी पड़ गया. कलेक्टर जनदर्शन में मिली ग्रामीणों से शिकायत की जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर संयुक्त संचालक ने संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया है.

दरअसल, लोरमी विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, झझपुरी कला में पदस्थ शिक्षक हरेराम साहू के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं. कलेक्टर जनदर्शन में ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था. जांच दल के प्रतिवेदन में पुष्टि हुई है कि शिक्षक हरेराम साहू न केवल स्कूल समय में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहते थे, बल्कि वे स्थानीय पंचायत के कार्यों में भी बेवजह दखलअंदाजी करते थे. यही नहीं वे राष्ट्रीय पर्वों पर भी शाला से नदारद रहते थे.

इस पर मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी के प्रस्ताव पर संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर ने निलंबन की कार्रवाई की है. निलंबन की इस अवधि में शिक्षक का मुख्यालय लोरमी विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नियत किया गया है. इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. इस सख्त कार्रवाई के बाद से इलाके के लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है.

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