धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा दावा, बोले- गाय को लेकर देश की सोच बदल रही है

खजुराहो

पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। यह अभियान आगामी 27 जुलाई को भारत के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसमें ज्ञापन सौंपने और हस्ताक्षर अभियान शामिल होगा।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में उत्तराखंड स्थित श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर हैं। 21 दिवसीय कठिन साधना पूरी करने के बाद उन्होंने बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण भगवान की पांच दिवसीय कथा का शुभारंभ किया। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से उन्होंने देशभर के सनातनियों, गौ सेवकों और संत समाज से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।

पंडित शास्त्री बोले-गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए। साथ ही, सड़कों पर भटक रही गौ माताओं को सम्मानपूर्वक गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी। उन्होंने गौ सेवकों और सनातनियों से अपने-अपने जिलों में एकत्र होकर गौ संरक्षण के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया।

व्यासपीठ से संबोधित करते हुए बागेश्वर सरकार ने एक समाचार का उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में सामने आ रहे हैं।

बाबा बोले-गाय को खाने वाले भी राष्ट्र माता बनाने की मांग कर रहे
उन्होंने मौलाना मदनी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी भारत सरकार से यह मांग की है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हम लोग गाय को रोटी खिलाते हैं, कुछ लोग रोटी के साथ गाय खाते हैं, लेकिन अब वे भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में आगे आ रहे हैं। देश बदल रहा है।”

उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि सभी संत महात्मा और सनातनी दिल्ली पहुंचकर गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग को मजबूती प्रदान करें। बद्रीनाथ धाम में चल रही श्री सत्यनारायण कथा के दौरान यह घोषणा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और देशभर के गौ भक्तों में इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

राजा रघुवंशी मर्डर केस में नया मोड़! सोनम की जमानत रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंची मेघालय सरकार

इंदौर

देश को झकझोर कर रख देने वाले मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मेघालय राज्य सरकार ने शिलॉन्ग की एक निचली अदालत द्वारा इस खौफनाक हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत के खिलाफ मेघालय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शिलॉन्ग कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत अप्रैल 2026 में सोनम को बेल दी गई थी. पुलिस और अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामला बेहद संगीन और सुनियोजित हत्या का है, इसलिए मुख्य आरोपी का जेल से बाहर आना जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

यह पूरा मामला मई 2025 का है, जब मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी (29 साल) की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी (25 साल) से हुई थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद 20 मई को यह नवविवाहित जोड़ा हनीमून मनाने के लिए मेघालय की खूबसूरत वादियों में पहुंचा था. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रोमांटिक ट्रिप एक खौफनाक मर्डर सीन में तब्दील होने वाला है. 23 मई 2025 को चेरापूंजी (सोहरा) के नोंगिर्यत गांव में एक होमस्टे से चेकआउट करने के बाद यह जोड़ा अचानक लापता हो गया था. शुरुआत में इसे एक सामान्य लापता होने या दुर्घटना का मामला माना जा रहा था, लेकिन जब 2 जून 2025 को एनडीआरएफ के ड्रोन ने सोहरा के वेई सावदोंग झरने के पास एक गहरी खाई में राजा रघुवंशी का सड़ा-गला शव बरामद किया, तो इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा।

मेघालय पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए. पुलिस के अनुसार, यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोनम रघुवंशी द्वारा रची गई एक सोची-समझी और बर्बर हत्या थी. सोनम का इंदौर में ही राज कुशवाहा नाम के एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और उसने शादी के महज तीन दिन बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली थी. इस साजिश के तहत राज कुशवाहा ने अपने तीन दोस्तों को 50,000 रुपये देकर कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में मेघालय भेजा था. जब राजा और सोनम ट्रैकिंग कर रहे थे, तभी इन भाड़े के हत्यारों ने राजा पर धारदार हथियार से हमला किया और उन्हें गहरी खाई में धक्का दे दिया, जबकि सोनम चुपचाप खड़ी यह सब देखती रही।

हत्या को अंजाम देने के बाद सोनम खुद को पीड़ित दिखाने के लिए गायब हो गई और अलग-अलग राज्यों में छिपती रही, जबकि बाद में उसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक ढाबे से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने इस मामले में सोनम, उसके प्रेमी राज कुशवाहा और तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस सनसनीखेज मामले में अप्रैल में शिलॉन्ग की एक अदालत ने सोनम को जमानत दे दी थी, जिसका अब मेघालय सरकार पुरजोर विरोध कर रही है. हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में सरकार ने दलील दी है कि निचली अदालत ने अपराध की क्रूरता और साजिश की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए जमानत दी है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, MP सरकार से पूछा- माफिया अब तक क्यों नहीं रुके?

ग्वालियर
 देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने चंबल घड़ियाल सेंचुरी में चल रहे बड़े पैमाने पर रेत के अवैध खनन और परिवहन मामले पर सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए फटकार लगायी है. अवैध रेत खनन को लेकर लगायी गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा की, राज्य सरकारों ने भले ही रेत खनन को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती की हो, लेकिन अब भी रेत खनन की गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं।

रेत खनन से नुकसान पर चिंतित सर्वोच्च न्यायालय
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान के तहत दायर सुओ मोटो रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कहा है कि, “नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन पर्यावरणीय अपराध ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, दुर्लभ जलीय जीवों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे के लिए भी गंभीर खतरा है. ये सिर्फ जलीय जीवों तक नहीं बल्कि नेशनल हाईवे 44 पर स्थित चंबल पुल के लिए भी खतरा है. क्योंकि कोर्ट का मानना है की, नदी में लगातार रेत का खनन होने से नदी पर बने पुल की नीव और आसपास की स्टेब्लिटी पर भी इसका असर पड़ता है।

सरकार के हलफनामे पर खड़े हुए सवाल
चंबल घड़ियाल सेंचुरी में हो रहे अनियंत्रित अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर भी सर्वोच्च अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए पूछा कि, इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, सुप्रीम कोर्ट के पहले सख्त आदेशों के बावजूद चंबल क्षेत्र में रेत का अवैध खनन जारी है. क्या सरकार ने इन पर ध्यान दिया? कोर्ट ने टिप्पणी की, अदालत की सख्ती के बाद रेत माफिया ने रास्ते जरूर बदल लिए हैं लेकिन रेत खनन और परिवहन की गतिविधियां अभी भी जारी हैं. हालांकि कोर्ट ने सख्त लहजे में मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि, अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही पायी जाती है तो इसका मतलब है राज्य सरकार द्वारा गलत हलफनामा दिया गया है. ऐसे में कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार तो एक ताजा हलफनामा दाखिल कर रिपोर्ट पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाइयों को बताया अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चंबल क्षेत्र में हो रहे रेत के अवैध खनन और परिवहन पर की जा रही कार्रवाइयों को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि, अवैध परिवहन करने वाले बिना नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर जुर्माना या चालान काटना पर्यप्त कार्रवाई नहीं है, इस तरह की स्थिति में इन वाहनों को जब्त किया जाना चाहिए और साथ ही इन वाहन के मालिकों और फाइनैंसरों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए. कोर्ट ने ऐसे मामलों में वाहनों की जब्ती के साथ प्रॉसिक्यूशन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

SC के दखल के बाद चंबल में खनन पर लगाम!
आपको बता दें की, राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मध्य प्रदेश की चंबल नदी से लगे मुरैना में इन दिनों लगातार अवैध खनन और परिवहन पर पुलिस वन और खनिज विभाग की कार्रवाइयां जारी हैं, यही वजह है कि पिछले लगभग डेढ़ महीने से मुरैना के चंबल नदी स्थित राजघाट पर जहां पहले खुलेआम रेत का अवैध खनन होता था अब लगभग पूरी तरह बंद है. साथ हीं प्रशासन अंदरूनी इलाकों में भी रेत माफिया पर लगातार कार्रवाइयां कर रहा है।

अब तक 25 करोड़ का अवैध भंडारण नष्ट, आधा सैकड़ा से ज़्यादा वाहन जब्त
मुरैना खनिज विभाग के मुताबिक “पिछले एक महीने में प्रशासन ने रेत माफिया द्वारा चंबल क्षेत्र में नदी से अवैध उत्खनन कर अलग अलग इलाकों खुले में डंप किया गए रेत के विनिष्टीकरण की अलग अलग कार्रवाइयां की हैं. जिनमें लगभग 1.25 लाख ट्रॉली रेत का विनिष्टीकरण किया गया जिसकी कुल कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये है. इन कार्रवाइयों में टीम ने 55 से अधिक ट्रैक्टर ट्रॉली ट्रक, लोडर और हाइड्रा सहित अन्य वाहन जब्त किया है और उन पर मामले दर्ज किए हैं. इस दौरान पुलिस ने अवैध रेत भंडारण पर 12 मामले दर्ज किए हैं. इनके अलावा प्रशासन ने 60 से ज़्यादा वाहन स्टोन माफिया के भी जब्त किए हैं. साथ ही मुड़ाईं कलेक्टर द्वारा पेट्रोल पम्प संचालकों को भी निर्देशित किया है कि, बिना नंबरप्लेट के ट्रैक्टर ट्रॉली को ईंधन न दिया जाए।

CM मोहन यादव के अचानक दिल्ली पहुंचने से बढ़ी सियासी हलचल, मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज

भोपाल

मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती नजर आ रही हैं। संगठन में नई नियुक्तियों और आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने भी सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav का अचानक दिल्ली दौरा कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े फैसले ले सकता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर पहले से ही जारी है, वहीं प्रदेश मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री ने पार्टी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal से भी सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की।

आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय विधि और न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जी से सौजन्य भेंट की। हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन चल रहा है।

प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह नियुक्तियों और बैठकों का सिलसिला बढ़ा है, उसने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि पार्टी आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फैसलों की तैयारी में जुट चुकी है। अब सबकी नजर दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।

उर्दू शायरी का चमकता सितारा बुझा, बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन

भोपाल

उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है।प्रसिद्ध उर्दू शायर आधुनिक ग़ज़ल के उस्ताद और पद्मश्री सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 91 सालों के थे. मेरठ में एक जमाने में वह साहित्यिक आयोजन की शान होते थे. बाद में जब थोड़ी दूर पर स्थित उनके मकान के सामने से गुजरता था, तो उसकी दीवारों पर कुछ जले जैसे निशान नजर आते थे. मेरठ के 1987 के भीषण दंगों के बाद उन्होंने अपने इस शहर को हमेशा के लिए ही छोड़ दिया. लेकिन उनसे मुलाकातें, मुस्कुराहट और हर मौके के लिए मौजूं शायरियां अब तक याद तो हैं ही।

बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था।

1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर
उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे।

मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र
1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था।

शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड
उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी।

बशीर बद्र उन चुनिंदा शायरों में थे, जिनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं. उनकी लाइनें लोगों की डायरी, वॉट्सऐप स्टेटस, मोहब्बत के खत और टूटे दिलों की जुबान बन गईं।

उनका एक शेर तो जैसे हर दौर में जिंदा रहेगा-

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…’

और ये भी-

मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा
परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए…’

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वो मुश्किल अल्फाज में नहीं, सीधे दिल में उतरती थी।

मोहब्बत को उन्होंने मुश्किल नहीं, आसान बताया. उनकी शायरी में दर्द था, लेकिन उम्मीद भी थी. मोहब्बत थी, लेकिन दिखावा नहीं था.

उन्होंने लिखा-

‘सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है
बा-वजू होके भी छूते हुए डर लगता है…’

और फिर मोहब्बत को इतना आसान बना दिया कि पढ़ने वाला मुस्कुरा उठे-

‘मैं तेरे साथ सितारों से गुजर सकता हूं
कितना आसान मोहब्बत का सफर लगता है…’

बशीर बद्र सिर्फ इश्क के शायर नहीं थे. उन्होंने जिंदगी के संघर्ष को भी उतनी ही खूबसूरती से लिखा।
उनका ये शेर आज भी लाखों लोगों को हिम्मत देता है-

‘जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है
आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा…’

और फिर जिंदगी की तकलीफ को कुछ यूं बयान किया-

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा…’

उनकी शायरी में एक अजीब सी नरमी थी. ऐसा लगता था जैसे कोई बहुत धीरे से जिंदगी समझा रहा हो.

‘कहां से आई ये खुशबू, ये घर की खुशबू है
इस अजनबी के अंधेरे में कौन आया है…

‘महक रही है जमीं चांदनी के फूलों से
खुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है…’

15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र बाद में भोपाल आकर बस गए. उन्होंने उर्दू साहित्य को कई यादगार गजलें, किताबें और अशआर दिए. कई बड़े सम्मानों से उन्हें नवाजा गया. लेकिन सच ये है कि उनका सबसे बड़ा सम्मान वो लोग थे, जिन्होंने उनकी शायरी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया।

आज बशीर बद्र नहीं हैं. लेकिन उनकी लाइनें शायद हमेशा रहेंगी… किसी की याद में, किसी की मोहब्बत में, किसी की तन्हाई में. डॉ. बशीर बद्र के निधन की खबर सामने आने के बाद साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है. उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट को जल्द मिलेंगे नए जज, जस्टिस संजीव सचदेवा और शील नागू समेत कई नाम शामिल

भोपाल

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट चीफ जस्टिस व एक वरिष्ठ अधिवक्ता को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. इस कॉलेजियम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा समेत चार मुख्य न्यायधीशों को शामिल किया है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में 4 चीफ जस्टिस
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 और 27 मई, 2026 को आयोजित अपनी बैठकों में निम्निलिखित मुख्य न्यायधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की अनुशंसा की है।

मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज

    न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (पीएचसी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे उच्च न्यायालय (पीएचसी: झारखंड उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (पीएचसी: दिल्ली उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च
न्यायालय (पीएचसी: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)

    वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (सुप्रीम कोर्ट)

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का दिल्ली से संबंध, चीफ जस्टिस नागू का एमपी से
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का संबंध दिल्ली उच्च न्यायालय से है. वर्तमान में चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई चर्चित मामलों की सुनवाई की हैं और कई ऐतिहासिक फैसले भी दिए हैं. उन्हें भी इस कोलेजियम में शामिल किया गया है. वहीं, जस्टिस न्यायमूर्ति शील नागू वर्तमान में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं और उनका मूल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट है. इसके अलावा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय से हैं।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा
यदि केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी जाती है, तो सभी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होंगे. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दसवीं अधिवक्ता होंगी. वे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी महिला होंगी.

22 और 27 मई को हुई अपनी बैठक में, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली, और सीनियर एडवोकेट वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी।

तमिलनाडु की रहने वाली मोहना, अगर केंद्र इन सिफारिशों को मंजूरी दे देता है, तो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली दूसरी महिला वकील होंगी जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन मिलेगा।

इससे पहले, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​पहली महिला सीनियर एडवोकेट थीं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. 2021 में, तीन महिला जज, जस्टिस हिमा कोहली, बेला एम. त्रिवेदी, और बीवी नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट (पदोन्नत) किया गया था।

जस्टिस नागू मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से, जस्टिस चंद्रशेखर झारखंड हाई कोर्ट से, जस्टिस सचदेवा दिल्ली हाई कोर्ट से, और जस्टिस पल्ली पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से थीं।

आगे क्या होगा?
कॉलेजियम की इस सिफारिश को अब केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम मुहर और वारंट जारी होने के बाद ये सभी नाम तय हो जाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन या सुप्रीम कोर्ट में इनका शपथ ग्रहण समारोह होगा।

महेश भट्ट की पर्सनल लाइफ पर पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

फिल्ममेकर महेश भट्ट अपनी रोमांटिक-ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर रहे हैं. उन्होंने अपनी रियल लाइफ लव स्टोरी पर बेस्ड 1990s की सुपरहिट फिल्म आशिकी भी बनाई थी. हालांकि वो प्रोफेशनल से ज्यादा, अपनी पर्सनल जिंदगी को लेकर चर्चाओं में बने रहे. महेश भट्ट ने दो शादियां की थीं. इसके अलावा उनके धर्म परिवर्तन की बातें भी खूब चला करती थीं. कहा जाता है कि सोनी राजदान से शादी करने के लिए, उन्होंने मुसलमान धर्म अपना लिया था.

पिता की दूसरी शादी पर बोलीं पूजा
महेश भट्ट की जिंदगी विवादों से घिरी रही. हाल ही में उनकी बेटी पूजा भट्ट ने अपने पिता की दो शादियों और सोनी राजदान संग रिश्ते पर खुलकर बात की. विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर पूजा ने बताया कि उनके जन्म के बाद, मां किरण और पिता महेश भट्ट की लव स्टोरी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी, और महेश भट्ट घर से बाहर निकल गए. हालांकि वो कुछ समय बाद वापस घर लौटे और फिर उनके भाई राहुल भट्ट का जन्म हुआ. मगर वो भी उनके रिश्ते को बचा ना सका, जिसके बाद फिल्ममेकर की मुलाकात सोनी राजदान से हुई जिनसे उन्होंने शादी की.

पूजा ने आगे कहा- मैं सोनी (राजदान) के बारे में मेरी मां से भी पहले जान चुकी थी. मेरे पिता ने मुझे नींद से उठाकर कहा कि मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मैं एक महिला से मिला और मैं घर छोड़कर जाने वाला हूं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैं तुम्हें थोड़ा कम प्यार करता हूं और मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा. कई लोगों ने मुझसे सवाल किए कि कैसे इतनी छोटी उम्र में तुम्हारे पिता ने तुमसे सच कह दिया? लेकिन मैंने उन्हें कहा कि अगर वो मुझसे नहीं कहेंगे, तो किससे कहेंगे? मैं किसी दूसरी जगह से बेहतर ये बात अपने पिता या मां के मुंह से सुनना पसंद करूंगी.

जब सोनी राजदान को लगा बुरा
पूजा आगे उस दिन का भी जिक्र करती हैं, जब सोनी राजदान ने एक्ट्रेस से उनकी और महेश भट्ट की शादी पर खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया- एक दिन सोनी ने मुझसे अपने दिल की बात कही कि पूजा मुझे दोषी जैसा महसूस होता है. लेकिन मैंने उनसे पूरे दिल से कहा कि सोनी, तुम एक मजबूत रिश्ते को तोड़ नहीं सकती थी. एक मजबूत रिश्ते में किसी और के लिए कोई जगह नहीं होती जब तक कि उसमें कोई दरार न हो या कोई कमी न हो, ताकि कोई दूसरा आकर उस कमी को पूरा कर सके.

पूजा ने इसी बातचीत में अपनी दोनों बहनों आलिया और शहीन भट्ट संग रिश्ते पर भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि जब शहीन का जन्म हुआ था, तबसे वो उनसे करीब हो गई थीं. महेश भट्ट ने बेटी के जन्म के बाद सीधा उनकी मां किरण को कॉल किया था, जिसके बाद उन्होंने पूजा को बड़ी बहन बनने की खबर दी. वो धीरे-धीरे सोनी राजदान और उनके परिवार से करीब हो गईं. आज पूजा कहती हैं कि उनका रिश्ता आलिया, सोनी राजदान और शहीन भट्ट से काफी बेहतर है.

Gift Nifty में भारी गिरावट से बढ़ी टेंशन, क्या कल शेयर बाजार में मचेगी बड़ी हलचल?

नई दिल्ली 
भारत का शेयर बाजार शुक्रवार 29 मई को भारी दबाव के साथ खुल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स करीब 2% टूटकर 23,580 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। गुरुवार को बकरीद के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक बाजारों में आई तेज हलचल का असर अब शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखाई देने की संभावना है।

दरअसल, हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों के आसपास तनाव काफी बढ़ गया है। कुवैत में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% गिरा, दक्षिण कोरिया का KOSPI 1% टूटा और जापान का निक्केई भी लाल निशान में बंद हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, भारतीय बाजार ने बुधवार को अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 142 अंक गिरकर 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली 7 अंक टूटकर 23,907 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि India VIX यानी बाजार का डर सूचकांक 6% गिरा, जिससे यह संकेत मिला कि अभी घबराहट पूरी तरह हावी नहीं हुई है। लेकिन अब ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद बाजार का मूड बदल सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,835–23,922 का स्तर बेहद अहम रहेगा। अगर बाजार इस दायरे के नीचे फिसलता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिकता है, तो आने वाले दिनों में 24,200–24,300 तक की तेजी भी संभव है।

अब निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल-ईस्ट (Middle East) के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेंगी। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।

PF का 100% पैसा अब UPI से निकाल सकेंगे? जानिए EPFO 3.0 के नए नियम

नई दिल्ली 
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO जल्द ही एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत PF निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाली है। अब तक PF का पैसा निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य सीधे UPI के जरिए अपने बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे न केवल पेपरवर्क कम होगा, बल्कि PF निकालने में लगने वाला समय भी काफी घट जाएगा। आइए इसके बारे में जरा विस्तार से समझते हैं।

सरकार और EPFO का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर न लगाने पड़ें। खास बात यह है कि इस सुविधा की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसे जल्द शुरू किया जा सकता है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट घोषित नहीं की गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर EPFO सदस्य अपने खाते से कितना पैसा निकाल पाएंगे? नई व्यवस्था के अनुसार सदस्य अपने कुल EPF बैलेंस का लगभग 50% से 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे। हालांकि, पूरा पैसा निकालने की अनुमति हर स्थिति में नहीं होगी। EPFO के नियमों के मुताबिक कम से कम 25% राशि खाते में बनी रहना जरूरी होगा, ताकि भविष्य के लिए एक सुरक्षा फंड बचा रहे, यानी अगर किसी सदस्य के खाते में 4 लाख रुपये हैं, तो वह अधिकतम करीब 3 लाख रुपये तक निकाल सकता है, जबकि कम से कम 1 लाख रुपये खाते में रहने होंगे।

इसके अलावा EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा भी बढ़ा दी है। पहले जहां केवल 1 लाख रुपये तक का क्लेम जल्दी सेटल होता था, अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने और बनाने जैसी जरूरतों के लिए सदस्य अब ज्यादा रकम कम समय में निकाल पाएंगे। कई मामलों में पैसा सिर्फ 3 दिनों के भीतर खाते में पहुंच सकता है।

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में बताया कि UPI आधारित PF निकासी सिस्टम का परीक्षण पूरा हो चुका है। नई सुविधा के तहत सदस्य अपने खाते में उपलब्ध निकासी योग्य राशि को देख पाएंगे और UPI PIN की मदद से तुरंत ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा, जिसके बाद सदस्य चाहे तो ऑनलाइन पेमेंट करें या ATM से कैश निकाल लें।

EPFO 3.0 का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को छोटे-छोटे खर्चों या आपातकालीन जरूरतों के लिए लंबे इंतजार का सामना नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में PF क्लेम प्रोसेस में कई बार हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन नई व्यवस्था इसे डिजिटल बैंकिंग जितना आसान बना सकती है।

देश में EPFO के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और यह बदलाव करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आ सकता है। खासकर युवाओं और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आने वाले समय में PF निकालना उतना ही आसान हो सकता है, जितना आज UPI से किसी को पैसे भेजना है।

खैरागढ़ के दल्लीखोली जंगल में वन्यजीवों की रहस्यमयी मौत, जलस्रोत के पास मिले मोर समेत कई शव

खैरागढ़.

खैरागढ़ जिले के ग्राम दल्लीखोली– लछना के जंगल से सामने आए एक भयावह घटनाक्रम ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। जंगल के भीतर स्थित एक जलस्रोत के आसपास बड़ी संख्या में पक्षियों और जंगली जानवरों के शव मिलने से वन विभाग सहित वन्यजीव प्रेमियों में चिंता और आक्रोश का माहौल है।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। जानकारी के अनुसार, वन्यजीव एवं प्रकृति प्रेमी मुकेश वर्मा दोपहर के समय बर्ड वॉचिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए दल्लीखोली के जंगल पहुंचे थे। जंगल के भीतर भ्रमण के दौरान उन्हें सबसे पहले एक ग्रेटर रैकेट- टेल्ड ड्रॉन्गो मृत अवस्था में दिखाई दिया। जब उन्होंने आसपास का क्षेत्र देखा तो वे स्तब्ध रह गए। जलस्रोत के किनारे कई पक्षी और वन्यजीव मृत पड़े थे।

मुकेश वर्मा ने घटनास्थल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वायरल वीडियो में एक नर मोर, दो मादा मोर, तीन एशियन पाम सिवेट सहित कई दुर्लभ पक्षियों के शव दिखाई दे रहे हैं। इनमें रुफस ट्रीपाई, ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन और जंगल आउलेट जैसे पक्षियों भी मृत मिलने की बात सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है। कि एक ही स्थान पर इतने अलग-अलग वन्यजीवों की मौत आखिर कैसे हुई।

मुकेश वर्मा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आशंका जताई है कि जंगल के जलस्रोत में किसी जहरीले रसायन या पदार्थ को मिलाया गया हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि दूषित पानी पीने के बाद इन बेजुबान वन्यजीवों की मौत हुई होगी हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम तत्काल सक्रिय हो गई है। विभाग द्वारा घटनास्थल से पानी और अन्य नमूनों को जांच के लिए संग्रहित किया गया है। मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी भी की जा रही है. ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

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