PF निकालना होगा बेहद आसान! अगले महीने से ATM से भी निकाल सकेंगे पैसा, मंत्री ने दी जानकारी

 नई दिल्ली

PF अमाउंट अब ATM से निकलेगा, पिछले काफी समय से इसकी चर्चा हो रही है. अगर ATM से पीएफ के पैसे निकलेंगे लगेंगे, तो एक नौकरीपेशा लोगों की इससे जुड़ी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

दरअसल, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने कहा कि अगले महीने यानी जून से आप अपना PF अमाउंट UPI का इस्तेमाल कर ATM से निकाल पाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को पूरी तरह से डिजिटाइज किया जा रहा है, जिससे PF निकालना और भी आसान हो जाएगा, सरकार का लक्ष्य है कि पीएफ खाताधारकों को अपना ही पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और न ही लंबे-चौड़े फॉर्म भरने पड़ें।

ATM और UPI से निकाल सकेंगे पैसे
मनसुख मांडविया ने बताया कि एक नया सिस्टम सुनिश्चित किया गया है, जिसके तहत खाताधारक अपने कुल पीएफ फंड का 25% हिस्सा जमा रखकर बाकी 75% पैसा एटीएम (ATM) या यूपीआई (UPI) के जरिए जब चाहें तब निकाल सकेंगे. यह सुविधा अगले महीने से लागू करने की तैयारी है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि EPFO 2.0 और ऑटोमैटिक क्लेम प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, पहले जो 10-12 कॉलम के फॉर्म भरने पड़ते थे, उस पेचीदा सिस्टम को खत्म कर दिया गया है।

WhatsApp चैटबॉट की सुविधा
उन्होंने कहा कि पीएफ से जुड़ी जानकारियों को और आसान बनाने के लिए इसे WhatsApp चैटबॉट से जोड़ा जा रहा है. खाताधारक सिर्फ व्हाट्सऐप पर मैसेज करके अपने अकाउंट बैलेंस, ब्याज अमाउंट और बीमारी या शादी के लिए फंड विड्रॉल की पात्रता जैसी सारी जानकारियां तुरंत हासिल कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि मैसेज से लोग ये भी जान पाएंगे कि वो अभी कितना अमाउंट निकाल सकते हैं, पहले कब-कब निकाले थे, ये सारा व्हाट्सऐप पर मैसेज से कर्मचारियों को मिल जाएगा. पूरा सिस्टम डिजिटल में तब्दील हो जाएगा।

कैसे निकलेगा ATM से पैसा?
एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की इस सुविधा को आधार से लिंक किया जाएगा, आपकी पहचान पूरी तरह डिजिटल तरीके से (आधार वेरिफिकेशन के जरिए) प्रमाणित होगी, जिससे बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत पैसा ट्रांसफर हो सकेगा।

हालांकि अगर फटाफट यानी ATM से तुरंत पैसे निकलने लगेंगे तो फिर अधिकतर लोगों के PF अकाउंट खाली हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें जब जरूरत होगी, तब पीएफ के पैसे निकाल लेंगे. इसपर एक्सपर्ट्स भी चिंता जता रहे हैं. जब पैसा निकालना इतना आसान हो जाएगा तो स्वाभाविक रूप से लोगों में इसे खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट फंड समय से पहले खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खुली छूट नहीं बनाया है. केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आप चाहकर भी अपना पूरा PF अकाउंट खाली नहीं कर सकते हैं, कुल जमा राशि का 25% हिस्सा हमेशा पीएफ अकाउंट में लॉक रहेगा. आप केवल ऊपरी 75% हिस्से का ही इस्तेमाल कर पाएंगे।

बता दें, पीएफ पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज तब सबसे ज्यादा फायदा देता है जब पैसे को लंबे समय तक छुआ न जाए, बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाला अंतिम फंड बहुत छोटा हो जाएगा।

हिमाचल में झील टूटने का खतरा, 34 बस्तियां और अटल टनल पर मंडराया संकट

 नई दिल्ली
लाहौल-स्पीति के सिस्सू गांव में रहने वाले लोग अब शांतिपूर्ण पहाड़ी जीवन नहीं जी पा रहे हैं. अटल टनल खुलने के बाद यहां पर्यटकों की भारी भीड़ आ गई है, लेकिन गांव के ठीक ऊपर एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है. 4,068 मीटर की ऊंचाई पर बनी घेपन झील हर साल बड़ा होती जा रही है. वैज्ञानिकों को डर है कि अगर यह झील फट गई तो सिस्सू गांव पर बहुत बड़ा खतरा आ सकता है. एकदम 2013 में केदारनाथ में आई आपदा की तरह। 

सिस्सू गांव चंद्रा नदी के किनारे बसा है. अटल टनल से निकलते ही यह पहला बड़ा गांव है. कुछ साल पहले तक यहां शांति थी. लोग खेती और पशुपालन करते थे. लेकिन अक्टूबर 2020 में अटल टनल खुलने के बाद रोजाना हजारों गाड़ियां यहां से गुजरती हैं. पीक सीजन में 5000 गाड़ियां तक आती हैं। 

DTE की रिपोर्ट के मुताबिक नदी किनारे अब बोटिंग, जिपलाइन, ऑफ-रोड वाहन और पर्यटक गतिविधियां चल रही हैं. गांव में होमस्टे और कैफे खुल गए हैं. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है. गांव से करीब 11 किलोमीटर ऊपर हिमालय की घेपन झील (घेपांग घट) लगातार बढ़ रही है। 

झील का आकार तेजी से बढ़ रहा है
घेपन ग्लेशियर झील है. 1989 में इसका क्षेत्रफल सिर्फ 36.49 हेक्टेयर था. 2022 तक यह बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो गया है – यानी लगभग तीन गुना. वैज्ञानिकों के अनुसार, घेपन ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है. 1962 से अब तक ग्लेशियर 2.76 किलोमीटर पीछे हट चुका है. राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि यह झील अतिसंवेदनशील है. अगर झील फटी तो सबसे पहले सिस्सू गांव पर असर पड़ेगा। 

वैज्ञानिकों ने 8 अलग-अलग स्थितियों का अध्ययन किया है. सभी में सिस्सू गांव रेड जोन में आता है. सबसे खतरनाक स्थिति में झील फटने के सिर्फ 21 मिनट में बाढ़ का पानी सिस्सू पहुंच सकता है. पानी की रफ्तार 43 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. इस बाढ़ में सिर्फ पानी नहीं आएगा। 

भारी मलबा, चट्टानें, पत्थर और ग्लेशियर के टुकड़े भी साथ आएंगे. इसकी चपेट में 34 बस्तियां, 204 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन, 57 पुल और 106 किलोमीटर सड़कें आ सकती हैं. मनाली-लेह हाईवे, अटल टनल और पूरा पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो सकता है. बाढ़ का असर चिनाब नदी के रास्ते जम्मू-कश्मीर तक पहुंच सकता है। 

ग्लेशियर पिघलने के कारण
वैज्ञानिक भानु प्रताप और अनिल कुलकर्णी जैसे विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. पहले ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरती थी, अब बारिश हो रही है. बारिश बर्फ को बहुत तेजी से पिघलाती है.  1962 के बाद से घेपन ग्लेशियर हर साल औसतन 53 मीटर सिकुड़ रहा है. झील का बढ़ता पानी ग्लेशियर को और तेजी से पिघला रहा है. यह एक साइकिल बन गया है जो लगातार तेज होता जा रहा है। 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने झील को अतिसंवेदनशील घोषित किया है. NRSC, केंद्रीय जल आयोग, NCPOR और CDAC जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं. सिस्सू की कृत्रिम झील पर एक पायलट अलर्ट सिस्टम लगाया गया है, जिसमें सेंसर, कैमरा और सैटेलाइट आधारित चेतावनी व्यवस्था है. लेकिन यह टेस्टिंग फेज में है। 

समस्या यह है कि गांव में अभी कोई पूरा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, सायरन, चेतावनी बोर्ड या स्पष्ट निकासी रास्ते नहीं हैं. जमीनी स्तर पर तैयारी काफी कमजोर दिख रही है. घेपन झील अकेली नहीं है. हिमाचल प्रदेश में 2016 में 805 ग्लेशियर झीलें थीं, जो 2022 तक बढ़कर 1,619 हो गईं। 

पूरे हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण नई-नई झीलें बन रही हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे बन सकती हैं. घेपन झील सिस्सू गांव के लिए एक टाइम बम की तरह है. एक तरफ पर्यटन से हो रही कमाई, दूसरी तरफ बढ़ता पर्यावरणीय खतरा। 

वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं और झीलें बढ़ रही है. स्थानीय लोगों को डर के साथ जीना पड़ रहा है. सरकार और वैज्ञानिकों को अब जल्दी से जल्दी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, निकासी योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। 

सिस्सू की कहानी पूरे हिमालय के लिए चेतावनी है. जलवायु परिवर्तन अब दूर की समस्या नहीं रहा- यह हमारे पहाड़ों, गांवों और जिंदगियों को सीधे प्रभावित कर रहा है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एक दिन यह खतरा हकीकत बन सकता है। 

नांचल के बेटे ने बढ़ाया प्रदेश का मान, आईएफएस बनकर रचा नया इतिहास

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से  भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी अजय गुप्ता ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अजय को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर वनांचल क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय गुप्ता ने केवल अपने माता-पिता का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायी है कि एक ऐसा युवा, जिसने बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह कर परिवार का हाथ बंटाया, आज उन्हीं जंगलों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर और संकल्प मिल जाए तो दूरस्थ अंचलों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति’ तथा ‘पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति’ जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता वनांचल समाज के सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है तथा यह हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देगी।

उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव में साधारण परिवेश में पले-बढ़े अजय गुप्ता का बचपन जंगलों, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों के दौरान वे अपने माता-पिता के साथ जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ एकत्रित करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया और 10वीं में 92.66 प्रतिशत तथा 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया।

उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अजय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में प्रवेश मिला, जहां अध्ययन के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति का लाभ मिला। अजय ने कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन जारी रखते हुए भारतीय वन सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक प्राप्त की और अपने सपनों को साकार किया।

अजय गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जीवन में उनके सपने सीमित थे और लगता था कि दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन उच्च शिक्षा और नए अनुभवों ने उनके सोचने का दायरा विस्तृत किया। उन्होंने कहा कि जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और बचपन से प्रकृति के साथ बने इसी जुड़ाव ने उन्हें वन सेवा में जाने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि जंगल ने उन्हें केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा भी दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन, मेहनत और शासन के सहयोग से गांवों और वनांचल क्षेत्रों के युवा भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अजय गुप्ता जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति का संदेश देंगे तथा छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।

MP में बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तर कई दिन रहेंगे बंद, जरूरी काम पहले ही निपटा लें

भोपाल

एमपीवासियों के लिए इस वक्त एक अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, जून का महीना शुरू होने वाला है। जून के महीने में स्कूलों और बैंक आदि में निम्नलिखित अनुसार छुट्टी रहेगी। ऐसे में आपको बैंक से जुड़े जरूरी काम करने से पहले छुट्टियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं, स्कूली बच्चों के लिए भी छुट्टी किसी त्योहार से कम नहीं है। जी हां आपको बता दें कि जून 2026 में स्कूल, बैंक और सार्वजनिक अवकाश कितने दिन रहने वाले हैं और किन-किन तारीखों में छुट्टी मिलेगी।

जून में छात्रों को वैकल्पिक व सरकारी अवकाश रहेगा

17 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – छत्रसाल जयंती / महाराणा प्रताप जयंती
23 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – महेश नवमी
24 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – वीरांगना दुर्गावती बलिदान दिवस
26 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – मुहर्रम
29 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – कबीर जयंती

MP में इस दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश

26 जून 2026 – मुहर्रम

यहां जानिए बैंकों में कितने दिन रहेगी छुट्टी

7 जून 2026  – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
13 जून 2026 – दूसरा शनिवार
14 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
21 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
26 जून 2026 – मुहर्रम
27 जून 2026 – चौथा शनिवार
28 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)

यदि आप बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार करें। इस जानकारी से आप जून महीने में बैंकिंग कार्यों में किसी तरह की असुविधा से बच सकते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- हर मामले में सुरक्षा देना संभव नहीं

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है।

इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है।

याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।

धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट
वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन।

अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते।

तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।

 

MP में जन्म लेते ही हर बच्चे पर ₹55 हजार का कर्ज! सरकारी योजनाओं से बढ़ा बोझ

भोपाल 

एमपी की धरती पर पैदा होने वाले हर बेटा-बेटी पर 55323 रुपए का कर्ज है। यह कर्ज उसने या उसके मां-बाप का नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा बाजार से लिए जा रहे कर्ज के रूप में है जिसकी भरपाई सरकार प्रदेश वासियों से वसूले जाने वाले टैक्स के रूप में करती है.

प्रदेश की आबादी के वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में आएंगे पर राज्य सरकार द्वारा जो औसत आबादी मानी जा रही है वह नौ करोड़ है। इसके आधार पर एमपी के हर व्यक्ति पर कर्ज की यह राशि सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी सरकार पर कर्ज की राशि 488714.17 करोड़ रुपए हैं जो इसके बाद के दो महीने में लिए गए 9200 करोड़ के कर्ज के चलते बढ़कर अब 497914 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल 2025-26 में लिए गए कर्ज के मुकाबले 29 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए हैं। माना जा रहा है कि यह किसी बड़ी योजना के बराबर की राशि है जिसका ब्याज सरकार ने चुकाया है।

प्रदेश सरकार का मौजूदा कर्ज और कर्ज देने वाली संस्थाओं पर बकाया राशि

    वित्त विभाग ने कहा है कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में 488714.17 करोड़ का कर्ज है। कर्ज की यह राशि सरकार ने अलग-अलग सेक्टर से ली है।

    राज्य सरकार ने बाजार से 333278.21 करोड रुपए का लोन लिया है। कंपनसेशन और अदर बॉन्ड जिसमें पावर बांड्स भी शामिल हैं, के जरिये सरकार ने 4416. 45 करोड़ रुपए उधार लिए हैं।

    साथ ही वित्तीय संस्थानों से 17737.58 करोड़ रुपए सरकार ने लिए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से लोन और एडवांस राशि के रूप में 81152.31 करोड़ रुपए ले रखे हैं।

    इसके अलावा अदर लायबिलिटी कैटेगरी में 13951.57 करोड़ रुपए का कर्ज होने की जानकारी दी गई है।

    केंद्र सरकार के नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से भी सरकार ने 38178.05 करोड़ रुपए ले रखे हैं। इस तरह कुल 488714.17 करोड रुपए का कर्ज राज्य सरकार पर है।

31 मार्च 2025 की स्थिति में था 421740 करोड़ का कर्ज
पिछले साल 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 421740.27 करोड़ रुपए था। अगर 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी की आबादी 8.80 करोड़ मानी जाए तो प्रदेश के हर व्यक्ति पर कुल कर्ज 47925 रुपए होता है। यानी एक साल में प्रति व्यक्ति कर्ज घटने के बजाय छह हजार रुपए बढ़ गया है और इस स्थिति में सुधार आने की कोई गुंजाइश फिलहाल दिखाई नहीं देती है क्योंकि योजनाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में अप्रेल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया है।

लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने बढ़ाया कर्ज
राज्य सरकार पर कर्ज की बढ़ती राशि के पीछे मुफ्त में बांटी जाने वाली राशि को भी कारण बताया जा रहा है। सरकार भले ही दावे करे कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह अधोसंरचना विकास और प्रदेश के विकास के लिए खर्च हो रहा है लेकिन हकीकत यही है कि हर माह ली जाने वाली कर्ज की रकम लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना जैसे अन्य योजनाओं पर खर्च की जा रही है और प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने ले लिया है 9200 करोड़ का कर्ज
मोहन सरकार ने पिछले साल लिए गए 488714 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में अप्रेल और मई के महीनों में 9200 करोड़ रुपए का कर्ज चार बार में ले लिया है। अगर इसे भी कर्ज की कुल राशि में जोड़ दिया जाए तो वर्तमान में सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो जाता है। इस नजरिये से देखें तो प्रदेश के हर नागरिक पर कर्ज का आंकड़ा 54301 से बढ़कर 55323 रुपए हो जाता है।

MP में रिकॉर्ड गेहूं खरीदी! 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

अब तक कुल 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित

सीमांत एवं लघु कृषकों से हुआ 32.14 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन
गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी

भोपाल

मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में अव्वल है। अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इसमें से 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी की गई है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है।

मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग

मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूँ का उपार्जन हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है।

किसानों को 22,842.9 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,842.9 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।

 

मध्यप्रदेश में शराब दुकानों पर बड़ा एक्शन! ओवर रेटिंग और अवैध अहातों पर चलेगा अभियान

भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत शराब दुकानों और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में आबकारी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि शराब दुकानों पर ओवर रेटिंग, तय समय के बाद बिक्री और अवैध रूप से संचालित शॉप बार जैसी गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले मदिरा ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह “ऑफ श्रेणी” घोषित किया गया है। इसके तहत दुकान परिसर या आसपास शराब सेवन की अनुमति नहीं होगी। अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद कराने के लिए विशेष दल गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे।  

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब दुकानों के खुलने और बंद होने के निर्धारित समय का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी। वहीं उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को रोकने के लिए दुकानों पर शराब की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही पारदर्शिता के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे, ताकि ग्राहक वास्तविक कीमत की जांच कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बेचने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के पवित्र घोषित नगरों और क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सभी कम्पोजिट दुकानें ‘ऑफ श्रेणी’ की घोषित, अवैध अहाते होंगे बंद
उप मुख्यमंत्री ने नीतिगत प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह ‘ऑफ श्रेणी’ का घोषित किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन (शराब पीने) की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन किया गया है, जो औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान मिलने वाले सभी अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को तुरंत बंद कराने के निर्देश मुख्यालय द्वारा बिंदुवार दिशा-निर्देशों के माध्यम से जारी कर दिए गए हैं।

देर रात तक शराब बिक्री पर रोक, क्यूआर कोड से थमेगी ओवर रेटिंग
दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और तय वक्त के बाद देर रात तक मदिरा बेचने के मामलों को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का पालन कराने के लिए अब पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें मिलकर गश्त करेंगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने (ओवर रेटिंग) की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएंगे, जिससे मदिरा की वास्तविक दरों का सत्यापन हो सकेगा। यदि कोई ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई होगी।

पवित्र नगरों और क्षेत्रों में अवैध परिवहन व बिक्री पर रहेगी पैनी नजर
 देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के जिन नगरों और क्षेत्रों को ‘पॉली / पवित्र’ घोषित किया गया है, वहाँ मदिरा की अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहले से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब इन क्षेत्रों में शराब के किसी भी प्रकार के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र (सुरक्षा और इंटेलिजेंस) को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि सरकार के इन कदमों से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर पूरी तरह शिकंजा कसा जा सके।

कहीं ₹3 तो कहीं ₹80 किलो भिंडी! सब्जियों के दामों ने बिगाड़ा लोगों का बजट, गांव-शहर दोनों परेशान

नईदिल्ली
हरी सब्जियों के रेट कहीं आसमान पर हैं तो कहीं जमीन पर। शहर वाले जहां हैरान हैं तो वहीं गांव और छोट कस्बे के लोग मौज काट रहे हैं। छोटी मंडियों में भिंडी 3 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा जबकि, तोरई 6 रुपये किलो बिक रही। हालांकि, यही सब्जियां छोटे कस्बों और गांव की फुटकर मंडियों में 10 रुपये किलो हैं तो दिल्ली और मुंबई में 40 से 80 रुपये किलो।

सबसे पहले बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी की। यहां मंगलवार को तोरई 6 रुपये किलो बिकी, भिंडी सुबह 3 रुपये बिक रही थी, लेकिन दो घंटे बाद ही इसे 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा था। परवल इस मंडी में 100 रुपये में 5 किलो मिल रहा था।

कुशीनगर के मथौली नगर पंचायत की फुटकर मंडी में हरी सब्जियों रेट जमीन पर आ गए हैं।
मुंबई में हरी सब्जियों के दाम सुनकर रह जाएंगे दंग

अब मुंबई का रेट भी सुन लीजिए। कुशीनगर जिले के दीनानाथ रस्तोगी एक सब्जी की दुकान मुंबई में है। उन्होंने हिन्दुस्तान को जो फुटकर रेट बताया, उन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जिस भिंडी को कुशीनगर में 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में 60 से 80 रुपये किलो बिक रही है। 15 रुपये किलो वाला करेला मुंबई में 80 रुपये फुटकर में और थोक में 60 रुपये किलो है।

यहां 10 रुपये वाला बैगन भी वहां 60 रुपये किलो है। ग्वारफली 60, नेनुआ यानी तोरई 60 रुपये बिक रहा है। जो परवल कुशीनगर में 20 रुपये किलो था, वह मुंबई में 60 रुपये किलो है।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। उनके मुताबिक दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को भिंडी 16 रुपये, करेला 4 रुपये, गोभी 20 रुपये, तोरई 40 रुपये किलो बिकी। दूसरे नंबर की तोरई 6 रुपये और एक नंबर तोरई 13 -18 रुपये किलो थी। दूसरी ओर लौकी 5 रुपये, टिंडा 13 से 15 रुपये, मटर 40 से 55 रुपये, खीरा 24 रुपये, ग्वार फली 20 रुपये, ककोड़ा 45 रुपये और मूली 10 रुपये प्रति किलो के रेट से बिकी।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
दिल्ली में फुटकर में खीरा 50 रुपये किलो और गोभी 80 रुपये किलो बिक रही हैं। तोरई भी 60 रुपये और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। करेला 40 रुपये किलो और मटर 30 रुपये में 250 ग्राम यानी 120 रुपये किलो बिक रही है। टिंडा भी 100 से 120 रुपये किलो है।

थोक और फुटकर रेट में क्यों है इतना अंतर
सब्जी बिक्रेता शिवसागर बताते हैं कि मंडी से रेहड़ी तक सब्जियों को लाने में ढुलाई पहले की तुलना में अब अधिक लग रही है। कच्चा सौदा होने के कारण 10 प्रतिशत सब्जियां शाम तक खराब हो जाती हैं। ग्राहक को एक नंबर का माल चाहिए ऐसे में सब्जियों की छंटाई होती है। उन्होंनें बताया कि अगर 10 किलो तोरई मंडी से 13 रुपये के हिसाब से लाते हैं तो 130 रुपये पड़ती है। माल भाड़ा, दुकान का किराया और अपनी मेहनत जोड़ लें तो यह कुल 180 रुपये ही हो जाएगी।

धनिया-मिर्चा जिसे मुफ्त समझते हैं, वह भी फ्री नहीं मिलते
अब इसकी छंटाई करें तो मुश्किल से 6 किलो की तोरई एक नंबर की निकलेगी। यानी अब इसी खरीद रेट करीब 30 रुपये हो जाएगी। इसी तरह का नियम सभी हरी सब्जियों पर लागू होता है। वहीं, दीनानाथ रस्तोगी बताते हैं कि मुंबई में कीमतें थोक में भी बहुत अधिक हैं और मार्जिन कम है, ऊपर से मुफ्त धनिया-मिर्चा देना पड़ता है। इनका भी रेट इन्हीं सब्जियों पर रखने की मजबूरी है।

अभी और तड़पाएगी गर्मी, 29 मई से 8 डिग्री तक गिरेगा तापमान; तूफान का अलर्ट

नईदिल्ली 

दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान में कोई बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है। इसके बाद 29 से 31 मई के बीच तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

हालांकि यह राहत पूरी तरह से नहीं होगी, क्योंकि ‘नौतपा’ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। नौतपा अर्थात साल के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं। यह अवधि मई के अंत में शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक की होती है। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के काफी करीब होता है और कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिसके कारण मैदानी इलाकों का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

दूसरी ओर एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ जारी है, साथ ही 28 मई, 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में धूल भरी आंधी, हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।

फिलहाल 28 मई तक देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है। इन राज्यों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पश्चिम राजस्थान में भीषण लू चलने का अंदेशा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है। दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

वहीं पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों, कोंकण-गोवा, सौराष्ट्र-कच्छ और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम के बने रहने की आशंका है। उमस के कारण लोगों को अधिक पसीना और बेचैनी महसूस हो सकती है। समुद्री क्षेत्रों में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा परेशान करेगी।

जबकि, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में ‘वार्म नाइट’ की स्थिति रहने की आशंका जताई है। इसका मतलब है कि रात का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे लोगों को नींद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या दिल्ली-एनसीआर में भीषण लू से मिलेगी राहत?

दिल्ली-एनसीआर में 26 और 27 मई को भी गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने भीषण लू के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अधिकतम तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 29 से 32 डिग्री के बीच रहने का पूर्वानुमान है। दिनभर आसमान साफ रहेगा, जिससे धूप और ज्यादा तेज महसूस होगी। गर्म हवाओं के कारण लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।

विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में; 28, 30 और 31 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में; और 28 तथा 31 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ बारिश व 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के 70 किमी प्रति घंटे में तब्दील होने के आसार हैं। इन राज्यों में तापमान में गिरावट आएगी और तपिश से राहत मिलने की संभावना है।

कई राज्यों में आंधी और बारिश के आसार

वर्तमान में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम तेजी से बदल रहा है। बिहार, झारखंड, कर्नाटक और कई दक्षिणी राज्यों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल और पश्चिम बंगाल में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।

पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। चेरापूंजी में सात सेमी और अगरतला में आठ सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

वहीं आज, 26 मई, 2026 को भी असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका जताई है। लोगों को नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है।

दक्षिण भारत में भी बदलेगा मौसम

केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल। विभाग ने यहां बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम भी बना रहेगा।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चलने के आसार हैं। समुद्र में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

मानसून की आगे बढ़ने की स्थिति
दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मानसून अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इससे दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।

किसानों के लिए यह समय खेतों की तैयारी का है। जिन क्षेत्रों में मानसून पहुंचने वाला है वहां किसान बुवाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं। हालांकि मौसम में तेजी से बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की भी जरूरत है।

लोगों के लिए जरूरी सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को गर्मी के दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। धूप में निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए।

आंधी और बिजली गिरने के दौरान घरों के अंदर रहना सुरक्षित माना जाता है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का कम इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है। तेज हवाओं के समय खुले स्थानों से दूर रहना चाहिए।

किसानों और पशुपालकों के लिए सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह या शाम के समय ही सिंचाई करें ताकि फसलों को गर्मी से राहत मिल सके। तेज हवाओं और बारिश की संभावना को देखते हुए तैयार फसलों की कटाई समय पर कर लें। खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

पशुपालकों को अपने पशुओं को छांव में रखने और पर्याप्त पानी देने की सलाह दी गई है। गर्मी के कारण पशुओं में कमजोरी और बीमारी बढ़ सकती है। इसलिए उन्हें दोपहर के समय खुले में न छोड़ें।

आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि 29 मई के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट शुरू हो सकती है। धूल भरी आंधी और हल्की बारिश से लोगों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि गर्मी पूरी तरह खत्म होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

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