जिला पंचायतों को भी मिलेगा गौण खनिज निधि का हिस्सा

रायपुर 

 छत्तीसगढ़ सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए जिला पंचायतों को भी गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी राजस्व राशि में हिस्सा देने का आदेश जारी कर दिया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जिला पंचायतों को भी गौण खनिज निधि का हिस्सा दिए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने मंच से ही इस मांग को स्वीकार करते हुए घोषणा की थी, जिसका अब राज्य शासन द्वारा पालन कर दिया गया है।

खनिज साधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार गौण खनिजों से प्राप्त कुल राजस्व का 33 प्रतिशत हिस्सा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पूर्ववत दिया जाएगा, जबकि शेष 67 प्रतिशत राशि का वितरण ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायतों के बीच निर्धारित स्लैब के अनुसार किया जाएगा। 

जारी आदेश के तहत 7.50 लाख रुपये तक की राशि पूरी तरह ग्राम पंचायत को मिलेगी। 7.50 लाख से 10 लाख रुपये तक की राशि में 80 प्रतिशत ग्राम पंचायत, 10 प्रतिशत जनपद पंचायत और 10 प्रतिशत जिला पंचायत को दिया जाएगा। 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 70 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 15-15 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। इसी तरह 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 60 प्रतिशत और जनपद व जिला पंचायत को 20-20 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। 50 लाख रुपये से अधिक की राशि में ग्राम पंचायत को 50 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 25-25 प्रतिशत राशि मिलेगी। 

राज्य शासन ने निधि के उपयोग के दायरे का भी विस्तार किया है। अब इस राशि का उपयोग स्कूलों और अस्पतालों में रनिंग वाटर सुविधा, सामुदायिक शौचालय, मुक्तिधाम निर्माण, पहुंच मार्ग तथा वाचनालय निर्माण जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। जिला पंचायतों को मिलने वाली राशि का उपयोग उन क्षेत्रों के विकास कार्यों में किया जाएगा जहां खनन गतिविधियों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायतों को गौण खनिज निधि में हिस्सेदारी मिलने से स्थानीय विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी और त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

मुख्यमंत्री की घोषणा का पालन होने पर जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन कुमार अग्रवाल सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पंचायतों के कामकाज और संचालन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।

उज्जैन के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाने पहुँचाया

भोपाल

उज्जैन जिले के थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गए मानसिक रूप से अस्वस्थ 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाना पहुँचाया गया।

26 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र अंतर्गत कंदरिया चौराहा के पास एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल चिंतामन गणेश थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक सागर सिंह एवं पायलट लाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बालक से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा था।

डायल-112 जवानों ने बालक को सुरक्षित डायल 112 वाहन में बैठाकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु परिजनों के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद डायल-112 टीम द्वारा बालक को सुरक्षित थाना चिंतामन गणेश पहुँचाया गया।

 

इंदौर में गहराया जल संकट, 35 लाख आबादी पर पानी का खतरा

इंदौर

 देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर गंभीर जलसंकट से गुजर रहा है। हालत यह है कि 35 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाला यह शहर आज भी पानी के मामले में 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा नदी के भरोसे है। शहर में सवा लाख से ज्यादा बोरिंग हैं, लेकिन वर्षाजल को जमीन में सहेजने की प्रवृत्ति नहीं होने की वजह से इनमें से ज्यादातर सूख चुके हैं। वर्ष 2013 में नर्मदा का तीसरा चरण इंदौर आया था जो वर्ष 2024 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था।

पिछले 13 साल में भविष्य की आवश्यकता को लेकर कोई काम ही नहीं हुआ। स्थिति यह है कि आज शहर का बड़ा हिस्सा टैंकरों के भरोसे है। रोज किसी न किसी क्षेत्र में जलसंकट को लेकर चक्काजाम और प्रदर्शन हो रहे हैं। नींद से जागे नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण को लेकर काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन इसे पूरा होने में कम से कम तीन साल लगेंगे। मतलब साफ है कि शहरवासियों को आने वाले तीन साल जलसंकट झेलना ही पड़ेगा।

इन वजहों से बिगड़े हालात

1970 के आसपास इंदौर में सूखे के हालात बने थे। 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा का जल इंदौर लाने के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद नर्मदा परियोजना को स्वीकृति मिली। वर्ष 1978 में नर्मदा का पहला चरण इंदौर आया और शहर को 90 एमएलडी पानी मिलने लगा। वर्ष 1990 में नर्मदा का दूसरा चरण इंदौर आया और 90 एमएलडी पानी और मिलने लगा। वर्ष 2013 में तीसरा चरण इंदौर आया और इंदौर को 430 एमएलडी पानी मिलने लगा।

पिछले दो दशक में शहर का विस्तार तेजी से हुआ। नई कॉलोनियां, टाउनशिप आईं, जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई, लेकिन पानी की मात्रा बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं हुआ। हाल ही में नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2029 के अंत तक यह पूरा हो जाएगा। इसके बाद इंदौर को कुल 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा।

बोरिंग या तो सूख गए या दूषित पानी दे रहे हैं

शहर के 25 प्रतिशत हिस्से में आज भी नर्मदा लाइनें नहीं हैं। ये क्षेत्र पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर हैं। गर्मी के चलते ज्यादातर बोरिंग या तो सूख चुके हैं या दूषित पानी दे रहे हैं। इसके चलते ये क्षेत्र अब पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला प्रदूषित पानी खुले में छोड़ने से आसपास के क्षेत्रों का भू-जल दूषित हो गया। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 36 मौतें हुईं।

नए तालाबों की योजना नहीं बनी, पुरानों का गहरीकरण नहीं हुआ

लगभग 87 वर्ष पहले होलकरकाल में इंदौर की पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए यशवंत सागर जलाशय बनाया गया था। इसके बाद किसी नए तालाब की योजना तक नहीं बनी। शहर में सिरपुर, बिलावली, पिपल्याहाना तालाब हैं, लेकिन इनके गहरीकरण को लेकर काम ही नहीं हुआ।
प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी नहीं मिल रहा

नर्मदा के तीन चरण इंदौर लाने के बाद अधिकारियों का अनुमान था कि शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 लीटर पानी की आपूर्ति हो सकेगी, लेकिन तेजी से बढ़ती जनसंख्या की वजह से ऐसा नहीं हो सका। नर्मदा का तीसरा चरण 25 लाख जनसंख्या की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन नगर निगम सीमा में 29 गांव शामिल करने के बाद इन गांवों में नर्मदा पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। जनसंख्या भी 35 लाख से अधिक हो गई। यही वजह है कि शहर को इस वर्ष शहर में जबरदस्त जलसंकट झेलना पड़ रहा है।

चौथा चरण आने के बाद मिलेगी राहत

नर्मदा के चौथे चरण पर नगर निगम लगभग 2300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके बाद इंदौर को 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। अमृत 2.0 योजना के तहत किए जा रहे इस कार्य में शहर में 1500 किमी नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा पुराने जल कनेक्शन की लाइन भी बदली जाएगी। 1.47 लाख नए कनेक्शन भी दिए जाएंगे। इसके अलावा 40 नई टंकियां बनाई जाएंगी। अनुमान है कि नर्मदा के चौथे चरण से इंदौर की वर्ष 2045 तक की आवश्यकता पूरी होगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थो के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए विगत एक सप्‍ताह में 80 लाख रूपए से अधिक मूल्‍य के अवैध मादक पदार्थ सहित संपत्ति जब्‍त की हैं।

मंदसौर : जिले की नारायणगढ़ पुलिस द्वारा पुलिस पर फायर कर भागने वाले अंतर्राज्यीय डोडाचूरा तस्करों के विरुद्ध बडी कार्यवाही करते हुए 252 किलोग्राम डोडाचूरा डोडाचूरा, एक देशी पिस्टल मय राउण्ड, मोबाइल फोन तथा कार सहित लगभग 20 लाख 51 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं थाना शामगढ़ पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज करते हुए आरोपी के खेत में संतरे के बगीचे के बीच छुपाकर लगाए गए 384 गांजा पौधे जब्‍त किए। एक अन्‍य कार्रवाई में आरोपी से 68 ग्राम एमडी ड्रग्स पाउडर एवं 05 किलोग्राम डोडाचूरा जब्‍त किया गया। दोनों कार्रवाई में लगभग 2 लाख 3 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

गुना : जिले में मृगवास थाना पुलिस ने राजस्थान से अफीम तस्करी कर रहे बाइक सवार दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1 किलो 10 ग्राम अफीम एवं मोटरसाइकिल सहित लगभग 11 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। एक अन्‍य कार्रवाई में भी मृगवास थाना पुलिस ने नाकाबंदी कर 04 अंतर्राज्यीय गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 10 किलो 157 ग्राम अवैध गांजा एवं दो मोटरसाइकिल सहित लगभग 7 लाख 20 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में मृगवास थाना पुलिस ने 18 लाख 20 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

शिवपुरी : जिले के थाना करैरा पुलिस ने अवैध स्मैक बेचने आए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 43.06 ग्राम स्मैक जप्त की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 लाख 60 हजार रूपए है।

राजगढ़ : जिले में ऑपरेशन “शुद्धि” के तहत थाना भोजपुर पुलिस ने 46.50 ग्राम अवैध स्मैक सहित आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 4 लाख 60 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की। इसी प्रकार एक अन्‍य कार्रवाई में 35 ग्राम अवैध स्मैक के साथ 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर 3 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में भोजपुर पुलिस ने 8 लाख 10 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

भोपाल : क्राइम ब्रांच ने ट्रेन से भोपाल पहुंचे गांजा तस्करों के गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 05 महिलाओं सहित 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी घरेलू सामान की आड़ में लगभग 36 किलो गांजा भोपाल सप्लाई करने लाए थे। कार्रवाई में लगभग 4 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं एक अन्य कार्रवाई में क्राइम ब्रांच ने 7 किलो 670 ग्राम गांजा एवं मोबाइल फोन के साथ आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए लगभग 2 लाख 30 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

जीआरपी जबलपुर / शहडोल : नशे के विरुद्ध लगातार अभियान चलाते हुए जीआरपी शहडोल द्वारा ट्रेन में तस्करी कर ले जाया जा रहा 41 किलो गांजा जब्त किया गया। जप्त संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख रुपये है।

दमोह : जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पटेरा पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 02 किलो 864 ग्राम अवैध गांजा एवं एक मोबाइल फोन सहित लगभग 40 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं एक अन्‍य कार्रवाई में थाना पटेरा पुलिस ने ही कार्रवाई करते हुए 10 किलो 900 ग्राम गांजा सहित एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 62 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में पटेरा पुलिस ने 2 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

मैहर : जिले में विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 4.6 ग्राम अवैध स्मैक पाउडर एवं परिवहन में प्रयुक्त कार सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 70 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

नरसिंहपुर : “ऑपरेशन ईगल क्लॉ” के तहत नरसिंहपुर पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए 11.28 ग्राम अवैध स्मैक सहित लगभग 1 लाख 30 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

अनूपपुर : जिले में थाना जैतहरी पुलिस ने 8 किलो 207 ग्राम अवैध गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्‍त गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 56 हजार रूपए है।

सीधी : जिले में ऑपरेशन “प्रहार 2.0” के तहत थाना जमोड़ी पुलिस ने 3 हजार 480 प्रतिबंधित ONEREX कफ सिरप जब्‍त की। कफ सिरप की अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख 96 हजार रूपए है।

रीवा : जिले में थाना सगरा पुलिस ने नशे के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 115 शीशी अवैध ऑनरेक्‍स नशीली कफ सिरप एवं टीवीएस स्कूटी सहित 1 लाख 13 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की।

मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा समाज को नशामुक्त बनाने एवं युवाओं को मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु कठोर वैधानिक कार्रवाई निरंतर की जा रही है। मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा डायल-112 को दें।

 

₹45 करोड़ पेमेंट केस में फंसा HDFC Bank! जांच की खबर आते ही शेयर में बड़ी गिरावट

मुंबई

भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, HDFC बैंक ने पेमेंट संबंधित गड़बड़ी की आशंकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जरा विस्तार से इस मामले की गहराई को समझते हैं।

 रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया।

बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया।

इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई।

बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, इस मामले बैंक ने खारिज कर दिया है।

मामले पर बैंक का आधिकारिक बयान
HDFC बैंक ने बुधवार को ₹45 करोड़ पेमेंट मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैंक ने कहा कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जो सभी प्रक्रियाओं को तय नियमों के तहत संचालित करते हैं। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, “हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संभाला जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।”

बैंक की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने ₹45 करोड़ के भुगतान की औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू की है।

शेयर परफॉर्मेंस
हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ।

इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के अनुपालन में अवैध खनन एवं परिवहन पर लगातार कार्यवाही

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।
      
 खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया।

निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

केंद्रीय कैबिनेट के SARTHAK-PDS फेज-2 निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया स्वागत

रायपुर

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा SARTHAK-PDS फेज-2 के लिए 25,530 करोड़ रुपये की मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे गरीब कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों तक योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। SARTHAK-PDS फेज-2 के माध्यम से  एआई-इनेबल्ड लाभार्थी रजिस्ट्री, जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड टैगिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक सप्लाई चेन प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से राशन वितरण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे पात्र हितग्राहियों तक सस्ते अनाज और खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को राशन परिवहन, हैंडलिंग तथा उचित मूल्य दुकानों के संचालन में बढ़ती लागत के लिए आर्थिक सहयोग देकर वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाएगा। राशन दुकानों के डीलरों के पारिश्रमिक में वृद्धि का प्रावधान जमीनी स्तर पर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2031 तक संचालित होने वाली यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करोड़ों हितग्राहियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे नवाचारों के उपयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को नई मजबूती मिलेगी तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को और बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल  राशन वितरण को आधुनिक बनाने का नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में भरोसा, सुविधा और सुशासन को और मजबूत करने का निर्णय है। उन्होंने गरीब कल्याण को समर्पित इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

नागरिकों की सुविधा सर्वोपरि, भविष्य की जरुरतों के अनुरूप करें निर्माण’

रायपुर

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज सेतु परिक्षेत्र के अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेशभर में निर्माणाधीन पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय निर्माण भवन में आयोजित बैठक में नागरिकों की सुविधा, बारहमासी संपर्क, तेज और सुव्यवस्थित यातायात के लिए पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इनके प्रस्ताव और कार्ययोजना तैयार करते समय यातायात के दबाव, दोनों ओर की सड़कों, तथा आसपास स्थित वर्तमान पुलों व फ्लाईओवर्स के साथ ही भविष्य की जरुरतों का भी ध्यान रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता भी एस.के. कोरी भी बैठक में मौजूद थे। सभी सेतु संभागों के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में स्वीकृत कार्यों के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया मिशन मोड में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी स्तर पर वन व्यपवर्तन, भू-अर्जन और इलेक्ट्रिक पोल शिफ्टिंग के लंबित मामलों से यथासमय शासन को अवगत कराने को कहा, जिससे इनके निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर से सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद तकनीकी स्वीकृति, भू-अर्जन और निविदा की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से तेजी से पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों के लिए अर्जित भूमि का तत्काल नामांतरण भी कराने को कहा।

विभागीय सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों की प्राथमिकता सूची तैयार कर 10 जून तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने 31 जुलाई तक इन सभी कार्यो के प्राक्कलन भी भेजने को कहा। उन्होंने अप्रारंभ कार्यों की निविदा प्रक्रिया आगामी एक-दो महीने में पूर्ण कर बरसात के तुरंत बाद कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का परीक्षण कर हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही 30 अप्रैल तक किए कार्यों का भुगतान तत्काल करने को कहा।

श्री बंसल ने सेतु परिक्षेत्र के सभी कार्यपालन अभियंताओं और एसडीओ को अपने क्षेत्र में चल रहे सभी कार्यों और उनके कार्यस्थलों की पूरी जानकारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर ठेकेदारों से सख्ती से काम कराने और उन्हें समय-सीमा में पूर्ण कराने को कहा। उन्होंने काम में ढिलाई, लापरवाही और लेट-लतीफी करने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने मार्च-2026 तक पूर्ण हुए कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र और फाइनल बिल समीक्षा के लिए शासन को भेजने के भी निर्देश दिए।

छत्तीसगढ़ में ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ लागू करने की तैयारी तेज

रायपुर

छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नवीन ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को प्रभावी, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से लागू करने की दिशा में आज न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों, भारतीय खाद्य निगम (FCI), मार्कफेड तथा प्रदेशभर के राईस मिलर्स ने भाग लिया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि भारत सरकार आगामी खरीफ विपणन वर्ष में ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को प्राथमिकता के साथ लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के राईस मिलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तकनीकी रूप से उन्नत (अपग्रेड) करना आवश्यक होगा, ताकि गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मिलर्स द्वारा कार्यशाला में रखे गए सुझावों एवं व्यवहारिक समस्याओं का परीक्षण कर आवश्यक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाएंगे।

कार्यशाला में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से लागू की जाने वाली ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के विभिन्न प्रावधानों, गुणवत्ता मानकों, भंडारण व्यवस्था, अनुबंध प्रक्रिया, लागत एवं क्रियान्वयन संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल एवं 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के निर्धारित गुणवत्ता मानकों की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई, ताकि योजना के अनुरूप मिलिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने व्यवहारिक चुनौतियों एवं उद्योग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा। मिलर्स ने प्रदेश में उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, भारतीय खाद्य निगम में रैक मूवमेंट को तेज करने तथा मिलिंग लागत में वृद्धि जैसे विषयों पर ध्यान आकृष्ट किया। साथ ही स्कीम के सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी एवं आधारभूत सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कान्ति लाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल, कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी एवं प्रदेशभर से आए राईस मिलर्स उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने योजना लागू करने से पहले इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित करने के लिए खाद्य विभाग और खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले का आभार व्यक्त करते हुए ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर मार्कफेड के एमडी जितेन्द्र शुक्ला, भारतीय खाद्य निगम के जीएम दीपक शर्मा सहित खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं राईस मिलर्स एसोसिएशन के लगभग 60 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

नारायणपुर को मिली विकास की बड़ी सौगात

रायपुर

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने नारायणपुर प्रवास के दौरान जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। उन्होंने एजी सिनेमा हॉल में आयोजित कार्यक्रम में 12 करोड़ 29 लाख रूपए की लागत से स्वीकृत विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने नगर पालिका नारायणपुर के विकास के लिए 5 करोड़ रूपए देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप भी उपस्थित रहे।

नारायणपुर को विकसित, खुशहाल और समृद्ध बनाने का संकल्प
         
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार नारायणपुर जिले को विकसित, खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जिले के युवाओं ने शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। विशेष रूप से मलखंभ जैसे कठिन खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं की उन्होंने सराहना की। यह कार्यक्रम नारायणपुर जिले के विकास, शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

युवाओं की प्रतिभा को मिला सम्मान
       
उप मुख्यमंत्री साव ने नेशनल स्कूल ड्रामा, नई दिल्ली की प्रस्तुति “चंदा के चकोर” की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जिले की प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिला रही हैं।
उन्होंने जिले में आयोजित पांच दिवसीय करियर गाइडेंस कार्यक्रम को युवाओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर मिलेंगे। 

जिले के विकास के लिए 307 करोड़ रूपए की स्वीकृति
         
साव ने बताया कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद नारायणपुर जिले के विकास कार्यों के लिए 307 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में 32 करोड़ रूपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं, जिन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में नारायणपुर को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मॉडल नगर के रूप में विकसित होगा नारायणपुर
        
 वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नारायणपुर को एक विकसित और आधुनिक नगर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि नगरीय निकाय क्षेत्र में 120 करोड़ रूपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 23 करोड़ रूपए की लागत से लाइब्रेरी भवन का भूमिपूजन किया गया है।

मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों का सम्मान
         
कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी शॉल औरफल भेंटकर सम्मानित किया गया।

किसानों और हितग्राहियों को मिला लाभ
         
विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। कृषि विभाग द्वारा पांच किसानों को किसान समृद्धि योजना अंतर्गत बोर खनन एवं पंप स्थापना के लिए 1.99 लाख रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई। उद्यानिकी विभाग द्वारा दो किसानों को बागवानी विकास हेतु 3.85 लाख रूपए के चेक प्रदान किए गए। मत्स्य पालन विभाग द्वारा तीन हितग्राहियों को मछली पकड़ने के जाल वितरित किए गए।

विभागीय योजनाओं की जानकारी ली
     
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षा विभाग के स्टॉल में स्वयं विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।

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