समर्थ सिंह को 29 मई तक CBI रिमांड, त्विषा शर्मा मौत मामले में पूछताछ तेज

भोपाल

मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आरोपित पति समर्थ सिंह को 29 मई तक की सीबीआई रिमांड पर सौंप दिया गया। वह अभी तक पुलिस रिमांड पर था। बुधवार को पुलिस ने उसे भोपाल जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया। यहां सीबीआई ने उसकी रिमांड मांगी थी।
पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी

वहीं, आरोपित सास और पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत के विरुद्ध प्रदेश सरकार व त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट जबलपुर में बुधवार को सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली। फिलहाल आदेश रोक लिया गया है।

CBI ने घर पहुंचकर किया क्राइम सीन रिक्रिएट

समर्थ सिंह की रिमांड मिलने के बाद सीबीआई टीम उसे लेकर उसके बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित घर पहुंची और घटनाक्रम को समझने के लिए क्राइम सीन रिक्रिएट किया। दिल्ली से आई विशेष फोरेंसिक टीम ने घर से वैज्ञानिक साक्ष्य, फिंगर प्रिंट्स और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए। बुधवार को ही गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई।

भोपाल में अस्थायी कंट्रोल रूम बनाएगी CBI

इस बीच, सीबीआई ने भोपाल में अस्थायी कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी की है। दिल्ली सीबीआइ की ओर से भोपाल पुलिस कमिश्नर को एक आवेदन भेजकर मांग की गई है कि टीम को शहर में ऐसा स्थान मुहैया कराया जाए, जहां मामले से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज और साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पड़ने पर आरोपितों व संदिग्धों को रोककर उनसे पूछताछ की जा सके।

CBI का इंटरविनर बनने का आवेदन हाई कोर्ट ने किया स्वीकार

जबलपुर प्रतिनिधि के अनुसार हाई कोर्ट में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद करने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि वह अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं कर रही हैं। पुलिस ने उन्हें 13 से 23 मई के बीच पांच नोटिस दिए थे लेकिन वह पूछताछ के लिए नहीं पहुंचीं। इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने 18 मई को पत्रकार वार्ता कर मृतका के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाए थे। वह भौतिक साक्ष्य जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं करवा रही हैं।

CBI ने इंटरविनर बनकर की जमानत निरस्त करने की मांग

सीबीआई की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश करते हुए भी अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग की गई। सीबीआइ की ओर से तर्क दिया गया कि त्विषा के पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की रिश्ते में लगने वाली बहन व एक अन्य व्यक्ति मौजूद था, जिन्हें उपस्थित नहीं रहना चाहिए था और यह जांच का विषय है। इसके अलावा दोनों आरोपितों के क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गिरिबाला सिंह की अभिरक्षा आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने आरोपों को नकारा और दी अपनी दलीलें

गिरिबाला सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि डॉक्टरों ने एंग्जायटी, ड्रग्स के कारण त्विषा की स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थीं। त्विषा ने जिस मंजिल पर फांसी लगाई वहीं उसका किचन, बाथरूम व बेडरूम था। घटना के अगले दिन 13 मई को पुलिस ने उसे सील कर दिया था। उन्होंने और समर्थ सिंह ने शादी के बाद त्विषा को यूपीआई के माध्यम से सात लाख रुपये से अधिक दिए।

त्विषा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने और प्रताड़ित करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी। त्विषा के सभी आरोप अपने पति के खिलाफ हैं, सास के खिलाफ नहीं।

 

पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम

भोपाल 

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PHPS) न्यासी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिसकर्मियों एवं उनके आश्रित परिवारजनों को अधिक प्रभावी, सरल एवं व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों एवं सुधारात्मक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे नागरिकों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए समर्पित रहते हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य एवं परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में विशेष परिस्थितियों एवं मानवीय आधार पर हितकारी निर्णय लिए जा सकें, इसके लिए विशेष मामलों में निर्णय लेने हेतु विशेषाधिकार का प्रावधान भी आवश्यक है। उन्होंने सभी इकाई प्रमुखों को योजना अंतर्गत लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं उपचार संबंधी बिलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक संवेदनशील एवं व्यावहारिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान योजना के अंतर्गत आश्रित सदस्यों की पात्रता, कैशलेस उपचार की सुविधा, गंभीर बीमारियों के उपचार, आकस्मिक परिस्थितियों में चिकित्सा सहायता तथा उपचार प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

इसके साथ ही अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त पुलिस कर्मचारियों पर आश्रित छोटे भाई-बहनों एवं दिव्‍यांगजनों को भी योजना का लाभ प्रदान करने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय उन कर्मचारियों के सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन पर अपने छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी है।

बैठक में प्रदेश के अधिक से अधिक शासकीय मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालयों को योजना से जोड़ने पर बल दिया गया, ताकि पुलिसकर्मियों को अपने जिले अथवा निकटतम क्षेत्र में कैशलेस उपचार की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। वर्तमान में प्रदेश के अंदर 55 तथा प्रदेश के बाहर 4 निजी चिकित्सालयों सहित कुल 59 अस्पतालों से योजना अंतर्गत अनुबंध किया गया है। सभी इकाई प्रमुखों को स्थानीय स्तर पर और अधिक अस्पतालों से समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।

पुलिसकर्मियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि आकस्मिक परिस्थितियों, विशेष रूप से हार्ट अटैक एवं गंभीर सड़क दुर्घटना जैसी जानलेवा स्थितियों में यदि उपचार गैर-अनुबंधित अथवा गैर-मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में प्रारंभ करना पड़े, तो मरीज के स्थिर (Stable) होने तक वहां कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा सके।

बैठक में निर्णय पारित किया गया कि कानून-व्यवस्था ड्यूटी, अपराध विवेचना के दौरान हिंसा, पुलिस वाहन अथवा किराये के पुलिस वाहनों की दुर्घटना में घायल पुलिसकर्मियों सहित कैंसर, किडनी एवं लीवर ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी जैसे गंभीर उपचार मामलों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बाद शेष राशि का भुगतान पीएचपीएस निधि से किया जाए। साथ ही कोमा अथवा पैरालिसिस की स्थिति में भी सहायता प्रदान की जाएगी। वर्तमान 50 प्रतिशत अंतर राशि को बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

बैठक में विभिन्न इकाइयों से प्राप्त सुझावों पर भी विस्तृत चर्चा की गई तथा पुलिसकर्मियों के हित में व्यावहारिक एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विशेष पुलिस महानिदेशक आदर्श कटियार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर, योगेश चौधरी, सोलोमन यश कुमार मिंज उप पुलिस महानिरीक्षक अवधेश गोस्वामी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रूही चंद्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

अधिक तापमान में रखें सभी नागरिक स्वास्थ्य का ध्यान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रीष्मकाल के दौरान प्रदेश में बढ़े हुए तापमान और अधिक गर्मी से होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए प्रदेशवासियों से अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने और बचाव के आवश्यक उपाय अपनाने का आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी देश के विभिन्न भागों में तापमान के लगातार बढ़ने और दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयों के बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए देशवासियों से अधिक से अधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से स्वयं और विशेष रूप से बच्चों को हाइड्रेटेड बने रहने और घर से बाहर निकलते समय अपने साथ वॉटर बॉटल रखने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्यासे व्यक्तियों को पानी उपलब्ध करवाने के लिए अपने घरों और दुकानों के बाहर मटके में पेयजल की व्यवस्था रखने वाले सेवाभावी नागरिकों की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड आदि स्थानों पर यात्रियों को पानी पिलाने वाले सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों को इस नेक कार्य के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई है।

 

हर गौशाला में न्यूनतम पाँच हजार गौवंश का होगा पालन, 30 प्रतिशत रखे जाएंगे दुधारू नस्ल के गौवंश

भोपाल 

गोकुल धाम स्थापना नीति-2025

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने बुधवार को मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग अंतर्गत गौसंवर्धन बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 गोकुल धाम स्थापना नीति अंतर्गत जारी निविदा में प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि उक्त नीति अंतर्गत परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पाँच हजार गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिसमें से 30 प्रतिशत गौवंश दुधारू नस्ल के होने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक 5000 गौवंश के लिये अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग के अधिकार (User Rights) के आधार पर दी जाएगी। अतिरिक्त 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जाएगी। इसके साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जा सकेगी। वहीं, निराश्रित गौवंशों के लिए शासन की नीति अनुसार प्रति दिवस प्रति गौवंश अनुदान राशि 40 रुपये दी जा रही है।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वावलंबी गौशाला (गोकुल धाम) की स्थापना की नीति 2025 का मुख्य उद्देश्य है प्रदेश में वृहद स्वावलंबी गौशालाओं का मॉडल तैयार करना, निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, जहां उन्हे संतुलित आहार, व्यवस्थित आवास एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही बजट पर न्यूनतम भार पर अधिकाधिक निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, वृहद गौशालाओं की परियोजनाओं के माध्यम से पड़त भूमि का विकास तथा निजी भागीदारी के माध्यम से गौ-उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की श्रृंखला तैयार करना है। इसके अलावा वैकल्पिक ऊर्जा निर्मित करने की नवीन तकनीकों के लिए निजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी तैयार करना है।

दुग्ध उत्पादन व प्रोसेसिंग उद्योग को दिया जाएगा बढ़ावा

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि निराश्रित गौवंश के प्रबंधन, उपयोगिता वृद्धि एवं बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इकाइयों के लिये स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की जाएगी। निजी निवेश व भागीदारी के माध्यम से गोपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, जैविक खाद, पंचगव्य, बायो-CNG, औषधि व पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्नत नस्लें (गिर, साहीवाल, थारपारकर) + कृत्रिम गर्भाधान एवं सेक्सड सॉर्टड सीमेन से उच्च दुग्ध उत्पादन, गौ उत्पादों का निर्माण और विपणन की श्रृंखला तैयार की जाएगी। 30 प्रतिशत उच्च उत्पादक नस्ल की गायें, दुग्ध उत्पादन व प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। गोबर व कृषि अवशेष से NPK युक्त जैविक खाद, मिट्टी की उर्वरता व उत्पादन में वृद्धि होगी। बायोगैस-CNG व सोलर ऊर्जा संयंत्र; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन। प्रकृति के नज़दीक रमणीक स्थानों पर स्थित गौशालाएं; प्रदर्शन, प्रबंधन व प्रोसेसिंग से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। बैठक में 13 जिले रायसेन, दमोह, जबलपुर, सागर, अशोकनगर, खरगोन, रीवा, बैतूल, पन्ना, भिण्ड, राजगढ़, भोपाल और मंडला में प्राप्त जमीनों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि निविदा के तहत 14 स्थलों के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसमें निवेशकों की संख्या 16 और कुल भूमि 3,457 एकड़ व गौवंश की क्षमता 1,30,000 है।

बैठक में पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी.एस. पटेल, गौसंवर्धन बोर्ड के रजिस्टार डॉ. अनुपम अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री श्काश्यप

भोपाल 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने भोपाल के युवा स्टार्टअप उद्यमी एवं प्रमाणित टी टेस्टर आरिन रत्नेश की अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

भोपाल स्थित स्टार्टअप कंपनी हरितिमा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स का सफल निर्यात किए जाने पर आरिन रत्नेश ने मंत्री काश्यप से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की तथा उन्हें अपने उत्पादों की श्रृंखला भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह तथा उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।

मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने नवाचारों को सफल व्यवसाय में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि आरिन रत्नेश की उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की अपार क्षमता है।

मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, विपणन अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा आरिन रत्नेश को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित India International Trade Fair (IITF-2025) में मध्यप्रदेश पवेलियन के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संभावनाओं को विस्तार मिला।

श्री आरिन रत्नेश ने राज्य शासन एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहायता और उचित मंच मिलने से उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे युवा उद्यमियों की सफलता मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

 

बकरीद से पहले बंगाल में बड़ा एक्शन, बांग्लादेशी घुसपैठियों की घर वापसी शुरू

कलकत्ता
एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं। 

अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी           
एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, ‘हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। 
 
बंगाल सरकार का सख्त एक्शन
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, ‘बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 

हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                    
उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है। 

दलाल की मदद से आए भारत             
हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. “सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे,” सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, ‘क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?’

बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़
बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। 

1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई:
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं। 

2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता:
बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी। 

3. 5 रुपये में ‘माछ-भात’ योजना और नई पाबंदियां:
चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश:
वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में ‘चोर-चोर’ के नारे लगने की खबरें हैं। 

5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें:
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके। 

जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया
    बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी. 
इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सेवा प्रदायगी की दक्षता को करें मजबूत: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सेवा प्रदायगी की दक्षता को और अधिक मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित न रहकर मरीजों को समयबद्ध, सुगम एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का माध्यम बने। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में डिजीटल तकनीक के उपयोग से सशक्तीकरण की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा की और प्रावधानों पर गहन विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में जांच, पंजीयन, प्रिस्क्रिप्शन, दवा वितरण, भर्ती एवं डिस्चार्ज जैसी सेवाओं को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ा जाए, जिससे मरीजों को एकीकृत एवं सहज स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें।

आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस ने प्रदेश में प्रस्तावित डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन एवं स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण की चरणबद्ध कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि ओपीडी, आईपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन, फार्मेसी, लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस), रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) और डिस्चार्ज सेवाओं को चरणबद्ध रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना के अनुसार पोर्टल एवं सॉफ्टवेयर विकास, अस्पतालों की आवश्यकताओं का निर्धारण, मरीजों की डिजिटल यात्रा (पेशेंट जर्नी) का निर्धारण और चिकित्सकीय टेम्पलेट्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। ओपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन एवं फार्मेसी मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जिला स्तरीय ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे।

आईपीडी एडमिशन एवं डिस्चार्ज मॉड्यूल सहित अस्पतालों में डेमो वर्जन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ प्रणाली का अभ्यास कर सकें। अगले चरण में चयनित मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों में प्रथम पायलट चरण प्रारंभ करने का प्रस्ताव है। इसके साथ लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस) के एकीकरण, प्रशिक्षण सत्रों तथा जिला स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा केंद्रों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात अन्य मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों तक व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा तथा रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) का एकीकरण किया जाएगा। विभिन्न मॉड्यूल्स को चरणबद्ध रूप से लाइव करने तथा दिसंबर तक प्रदेशव्यापी रोलआउट की तैयारी की जाएगी।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम के माध्यम से जांच, पंजीयन, दवा वितरण एवं उपचार संबंधी सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे मरीजों को अस्पतालों में अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही डेटा आधारित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश में हीमोडायलिसिस सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी विशेष तैयारी योजना प्रस्तुत की गई। योजना के अंतर्गत पुराने एवं जर्जर हो रहे उपकरणों को चरणबद्ध रूप से प्रतिस्थापित करने और आवश्यकता अनुसार नई मशीनों एवं सुविधाओं को सशक्त करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे गंभीर किडनी रोगियों को बेहतर एवं निरंतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

सेंधवा में जनशिक्षकों का सामूहिक इस्तीफा, शिक्षा विभाग कि कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बड़वानी

बड़वानी जिले के विकासखंड सेंधवा में शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत जनशिक्षकों ने सामूहिक रूप से अपने पद से त्यागपत्र सौंप दिया है। इस घटनाक्रम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जनशिक्षकों ने जिला पंचायत CEO को संबोधित पत्र में अधिकारियों पर मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और अवकाश अवधि में भी लगातार कार्य कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

27 जून 2026 को दिए गए पत्र में जनशिक्षकों ने उल्लेख किया कि शासन द्वारा 1 मई से 30 मई तक अवकाश घोषित होने के बावजूद उनसे विभागीय कार्य कराए गए। उन्होंने दावा किया कि लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद भी अधिकारियों द्वारा लगातार लापरवाही के आरोप लगाकर दबाव बनाया गया।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शिक्षकों और जनशिक्षकों के लिए अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया जाता है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। जनशिक्षकों ने कहा कि भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्य जैसे S.I.R. और जनगणना जैसे कार्य भी शिक्षा विभाग द्वारा सफलतापूर्वक कराए जाते रहे हैं, इसके बावजूद सम्मान नहीं मिल रहा।

मानसिक प्रताड़ना और लगातार दबाव से परेशान होकर सेंधवा विकासखंड के 17 जनशिक्षकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। पत्र में जिला प्रशासन से त्यागपत्र स्वीकार कर उन्हें कार्यमुक्त करने की मांग की गई है।

इस सामूहिक इस्तीफे ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों के रवैये पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

बहुसंख्यक सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक” बयान पर घिरे दिग्विजय सिंह, BJP ने बताया हिंदू समाज का अपमान

 भोपाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है। भोपाल में बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है।
नेहरू के विचारों का हवाला देकर कही यह बात

नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि सांप्रदायिकता समाज में नफरत फैलाती है। उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग की सांप्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है और आज देश के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है।

 

प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर मंगोलिया में श्रद्धालु करेंगे भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अवशेषों के दर्शन

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप से भगवान बुद्ध के परम शिष्य अरिहंत, सारिपुत्र एवं महामोद्ल्यायन के पवित्र अवशेष सार्वजनिक दर्शन के लिये मंगोलिया भेजे जा रहे हैं। राजाभोज विमान तल पर गुरुवार, 28 मई को इन पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिए रवाना किया जाएगा। पहल संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), पर्यटन और संस्कृति, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल बौद्ध कन्फेडरेशन (IBC) के संयुक्त समन्वय से आयोजित की जा रही है। इस ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करना, साझा आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करना और बौद्ध तीर्थ पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। यह पहल केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली में अवशेषों का सार्वजनिक दर्शन

अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में 29 मई को पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस अवसर पर ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के पूज्य भिक्षु पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।

भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से 30 मई को मंगोलिया के लिए होंगे रवाना

पवित्र अवशेषों को 30 मई के दिन भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया के लिए रवाना किया जाएगा।इस पवित्र यात्रा के दौरान धार्मिक परंपराओं की पवित्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये मध्यप्रदेश पर्यटन और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया का एक प्रतिनिधि दल अवशेषों के साथ रहेगा।

मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई को पवित्र अवशेषों का होगा सार्वजनिक दर्शन

मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई 2026 से शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी अनुमानित रूप से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगी। इससे भारत के बौद्ध तीर्थ सर्किट, विशेषकर सांची जैसे स्थलों में वैश्विक रुचि बढ़ेगी और मंगोलिया की अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ाव भी और मजबूत होगा। भारत की बौद्ध विरासत को मंगोलिया जैसे बौद्ध परंपरा से जुड़े देश में ले जाकर यह भारत की “बौद्ध धर्म की जन्मभूमि” के रूप में भूमिका को और सशक्त करती है तथा अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देती है।

मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर

मध्यप्रदेश के लिए यह वैश्विक मंच पर अपने बौद्ध सर्किट को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या, प्रवास अवधि और सांस्कृतिक सहभागिता में वृद्धि होगी। यह पहल दोनों देशों के मठों, सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के बीच निरंतर सहयोग के नए मार्ग भी खोलेगी, जिससे साझा विरासत पर आधारित दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंध विकसित होंगे।

सांची स्तूप: यूनेस्को विश्व धरोहर और आस्था का वैश्विक केंद्र

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘सांची स्तूप’ विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन बौद्ध स्थलों में से एक है।यहाँ संरक्षित पवित्र अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा और पूजनीय भाव से देखा जाता है। भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन थे, जिन्हें बुद्ध का “अग्र युग्म” माना जाता था। सारिपुत्र को प्रज्ञा (बुद्धिमत्ता) में और मौद्गल्यायन को अलौकिक शक्तियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। दोनों ही शिष्य बौद्ध संघ के अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ थे और उन्होंने धम्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई।इनकी शिक्षाएँ आज भी बौद्ध दर्शन और साधना परंपरा में अत्यंत सम्मान के साथ स्मरण की जाती हैं।विशेष बात यह है कि सांची के 30 किमी के दायरे में कई ऐसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल मौजूद हैं, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की गूंज आज भी संजोए हुए हैं।

 

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