उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने “एयर एम्बुलेंस एमपी” पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का किया शुभारंभ

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में “एयर एम्बुलेंस एमपी” पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत किसी भी नागरिक को समय पर उपचार के अभाव में जीवन न गंवाना पड़े। नए पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए अनुरोध की प्रक्रिया अब और अधिक सरल एवं तेज होगी। पोर्टल में एयर एम्बुलेंस फ्लीट की रियल टाइम ट्रैकिंग, सेवा अनुरोधों का सुगम डिजिटल प्रवाह, सेवा प्रदाताओं को तत्परता के लिये रियल टाइम नोटिफिकेशन तथा अनुमोदन प्राधिकारी को समयबद्ध स्वीकृति के लिए अलर्ट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।

पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में यह सेवा अब तक 140 जीवनरक्षक मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है। इनमें नवजात शिशुओं, हृदय रोग, ट्रॉमा, न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियों एवं अंग प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों का सफल एयर मेडिकल ट्रांसफर शामिल है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत आयुष्मान भारत कार्डधारकों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों से दूरी एवं आर्थिक स्थिति जीवनरक्षक उपचार में बाधा नहीं बने।  

सेवा के संचालन के लिए भोपाल में 24×7 एयर मेडिकल ऑपरेशन व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके अंतर्गत एक फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट “बीचक्राफ्ट किंग एयर सी -90” तथा एक मल्टी इंजन हेलीकॉप्टर “एडबल्यू -109” लगातार स्टैंडबाय पर उपलब्ध हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस, फ्लाईओला एविएशन के सीएमडी एस. राम ओला और फ्लाईओला एविएशन की डायरेक्टर कॉर्पोरेट अफेयर्स डॉ. मोनिका तिवारी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

ईरान युद्ध का Air India पर बड़ा असर, एयरलाइन को अचानक लेना पड़ा बड़ा फैसला

 नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran War) के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने से गहराए तेल संकट का बुरा असर तमाम देशों में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की किल्लत देखने को मिली. हालांकि, मोदी सरकार ने तत्काल उठाए गए बड़े कदमों के जरिए इस संकट को कम करने का प्रयास किया।  

ईरान युद्ध और ईंधन की ऊंची कीमत का असर भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी एअर इंडिया (Air India) पर भी पड़ा है और उसे बड़ा फैसला लेना पड़ा है. इसके तहत एयरलाइंस अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में 22 फीसदी कटौती करेगी।

जून-जुलाई में पड़ेगा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम में आए उछाल ने जेट फ्यूल महंगा किया है और इसने एयरलाइन कंपनियों का गणित बिगाड़ा है. इसकी वजह से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए एअर इंडिया ने अचानक जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती करने का फैसला किया है।

Air India ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जबकि वेस्ट एशिया टेंशन के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावट जारी है और एविएशन सेक्टर को लागत में भारी बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है. जून-जुलाई के लिए कंपनी ने फैसला ले लिया है, जबकि अगस्त के लिए अभी बाकी है।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर ₹1 लाख प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है. वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹26,800 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है. ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।

उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है, जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं. 22 प्रतिशत की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।

कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है. विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है. मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।

प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा. इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

    वैकल्पिक उड़ान: यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी.
    तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी.
    पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं.

एअर इंडिया ने दिया ये बयान
एअर इंडिया की ओर से पुष्टि करते हुए एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा है कि जेट फ्यूल प्राइस में उछाल के परिचालन पर दबाव जारी है, इसे देखते हुए उड़ानों में कटौती का कदम उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थितियों के स्थिर होते ही उड़ानों की संख्या बहाल की जा सकती है. इससे घरेलू उड़ानों में करीब 10% तक कटौती हो सकती है।

न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo भी जून और अगस्त के बीच घरेलू उड़ानों में 7% तक कटौती कर सकती है. हालांकि, इंडिगो ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।  

ऊंचे रह सकते हैं टिकट के दाम
Iran War के चलते बीते कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और ये एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में से एक है, जो आमतौर पर परिचालन लागत का लगभग एक चौथाई होता है।

इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर खर्च में इजाफा हुआ है और वैश्विक स्तर पर एयरलाइनों को टिकटों की कीमतें बढ़ाने, घाटे वाले रूट्स को बंद करने और उड़ानों की संख्या कम करने के लिए मजबूर हो पड़ा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Jet Fuel की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू हवाई किराया भी ऊंचा रह सकता है. इसके पीछे वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे एयरलाइंस भी प्रभावित होती हैं।

मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एअर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ में खाली सरकारी जमीनों का होगा रिडेवलपमेंट, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश

रायपुर.

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासकीय विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों के स्वामित्व वाली अनुपयोगी व खाली जमीनों के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए एक व्यापक रिडेवलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित की गई भूमियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी सरकारी जमीनों से न तो शासन को कोई आय हो रही है और न ही जनता को इसका लाभ मिल रहा है। इस रिडेवलपमेंट योजना से जहां शहरों को एक नियोजित विकास मिलेगा, वहीं शासकीय परिसंपत्तियों का मूल्य भी कई गुना बढ़ जाएगा।

डिजिटल लैंड बैंक और जीआईएस मैपिंग से होगी निगरानी
बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षों से खाली पड़ी या अतिक्रमण की आशंका वाली सरकारी जमीनों को चिन्हित कर उनका व्यावसायिक व जनहित में बेहतर उपयोग किया जाएगा। शासकीय विभागों के अंतर्गत आने वाली सभी खाली जमीनों का एक केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। मैपिंग के जरिए हर प्लॉट की सटीक लोकेशन, रकबा (क्षेत्रफल) और वर्तमान स्थिति का डेटा जीआईएस (GIS) मैपिंग ऑनलाइन दर्ज होगा। शहरों में प्राइम लोकेशन पर स्थित खाली जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और नए सरकारी कार्यालय बनाए जाएंगे। बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को राजस्व भी मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास
ग्रामीण इलाकों की जमीनों पर कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस या कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centers) प्रस्तावित किए जाएंगे। बड़ी जमीनों के सुनियोजित विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।

जर्जर भवनों को ढहाकर होगा नवनिर्माण, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
योजना के तहत ऐसे शासकीय भवनों और परिसरों को चिन्हित किया जाएगा, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत करना वित्तीय दृष्टि से फायदेमंद नहीं है। ऐसी जगहों पर पुरानी संरचनाओं को हटाकर शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सरकारी विभागों या उनके उपक्रमों के लिए नए और आधुनिक निर्माण किए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से चिन्हित जमीनों पर तत्काल फेंसिंग (घेराबंदी) की जाएगी और शासकीय स्वामित्व का बोर्ड लगाया जाएगा। इन जमीनों पर अवैध कब्जे रोकने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी रखेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी संभागायुक्त व कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

मंत्री परमार ने कुआं हादसे में दिवंगत श्रमिकों के परिजन से की भेंट

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम बीहरपुरवा के नयापुरवा पहुंचकर गत मंगलवार को कुआं धसकने की हृदय विदारक घटना में दिवंगत पांच श्रमिकों के परिजनों से भेंट की। मंत्री  परमार ने शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।

प्रभारी मंत्री  परमार ने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक एवं दुःखद दुर्घटना है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। दिवंगत श्रमिक अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए कठिन परिश्रम कर रहे थे। इस दुःख की घड़ी में प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

मंत्री  परमार ने आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बेटियों की शिक्षा सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा।

मंत्री  परमार ने घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए तथा कहा कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी निरंतर पीड़ित परिवारों के संपर्क में रहकर हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएं।

इस दौरान सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक एवं पूर्व मंत्री  ब्रजेंद्र प्रताप सिंह,  बृजेंद्र मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मीना राजे, कलेक्टर मती ऊषा परमार एवं पुलिस अधीक्षक मती निवेदिता नायडू भी उपस्थित थीं। 

योग और खजुराहो दोनों भारतीय संस्कृति के हैं अभिन्न स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय योग परम्परा को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर स्वस्थ, जागरूक एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग और खजुराहो, दोनों ही सदियों से भारतीय संस्कृति के अभिन्न स्तंभ रहे हैं। हमारी सरकार योग के प्रचार के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। योग को प्रदेश के घर-घर तक पहुंचाने के लिए आयुष विभाग द्वारा इन दिनों ”घर-घर योग-हर व्यक्ति निरोग” अभियान भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 25 दिवसीय काउंटडाउन के अवसर पर यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में आयोजित “योग महोत्सव 2026” कार्यक्रम को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित किया।

वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग आज सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि ‘वन अर्थ-वन हेल्थ’ की भावना को साकार करने वाला जीवन दर्शन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार घर-घर योग हर व्यक्ति निरोध के भाव से योग और आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। आयुष विभाग के माध्यम से आरोग्य मंदिरों, योग वेलनेस सेंटर्स और विभिन्न जनजागरुकता की गतिविधियों के माध्यम से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए सफल अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले काउंटडाउन इवेंट से देशभर में लाखों लोग जुड़ रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी योग को सहर्ष स्वीकार कर रही है। हम योग को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर एक स्वस्थ, जागरूक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबके सहयोग से हम योग को हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय का यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। यह कार्यक्रम योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति केन्द्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्र और राज्य सरकार के आयुष मंत्रालय के अधिकारियों और जिला प्रशासन, छतरपुर को खजुराहो में इस विशेष आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को केंद्रीय आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और सांसद खजुराहो विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया।                           

सदानीरा समागम का शुभारंभ

भोपाल 

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति, पंचमहाभूतों तथा सतत् विकास के विषयों पर केन्द्रित ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ भारत भवन में हुआ। शुभारंभ अवसर पर अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व एवं सामान्य प्रशासन शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि यह आयोजन जल, प्रकृति और मानव सभ्यता के संबंधों पर केंद्रित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय चिंतन-यात्रा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। भारतीय संस्कृति में जल जीवन, चेतना और सभ्यता का आधार है तथा सदानीरा समागम परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

अपर मुख्य सचिव शुक्ला ने कहा कि समागम में देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के विशेषज्ञों के साथ नौ देशों के राजनयिक प्रतिनिधि भी सहभागी हो रहे हैं। जल, पर्यावरण, नवकरणीय ऊर्जा और सतत विकास पर केंद्रित यह आयोजन वैश्विक सहयोग और जनभागीदारी को नई दिशा प्रदान करेगा। इस अवसर पर जेके ट्रस्ट के सीएसआर प्रमुख राम भटनागर, प्रख्यात जलविद् राजेन्द्र सिंह, हिन्दुस्तान यूनिलिवर फाउंडेशन के सीईओ डॉ. श्रमण झा, आईजीआरएमएस के डायरेक्टर डॉ. अमिताभ पांडेय, आईआईएम बोधगया की डायरेक्टर डॉ. विनिता सहाय, वीर भारत न्यास के न्यासी सचिवराम तिवारी, यूनाइटेड कॉनसियसनेस के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर उपस्थित थे।

जलतत्व पर केन्द्रित प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए प्रख्यात जलविद् राजेन्द्र सिंह ने कहा कि ऋग्वेद और अथर्ववेद में जल संरक्षण को लेकर वैज्ञानिक और दूरदर्शी दृष्टि प्रस्तुत की गई है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जल को जीवन और सृष्टि के संतुलन का आधार माना गया है। उन्होंने कहा कि पंचमहाभूतों के संतुलन के बिना मानव जीवन संभव नहीं है तथा पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा और ज्ञान का अंतर बताते हुए कहा कि ज्ञान मनुष्य को संस्कृति, प्रकृति और समाज से जोड़कर जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाती है तथा शिक्षा मनुष्य की दृष्टि को व्यवसायिक बनाती है।

इस अवसर पर जेके ट्रस्ट के सीएसआर प्रमुख राम भटनागर ने कहा कि मध्यप्रदेश में कॉर्पोरेट क्षेत्र की सहभागिता से ग्रामीण अंचलों में पशुओं के स्वास्थ्य, संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन और डेयरी विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में सतत् प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीक, उन्नत पशु स्वास्थ्य सेवाओं, संतुलित पोषण तथा ग्रामीण सहभागिता को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

हिन्दुस्तान यूनिलिवर फाउंडेशन के सीईओ डॉ. श्रमण झा ने कहा कि जल संकट विश्व के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। जल स्रोतों के क्षरण, अनियमित वर्षा, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। जल संरक्षण और प्रभावी जल प्रबंधन के बिना जलवायु परिवर्तन की किसी भी रणनीति को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने जल संरक्षण के लिए समर्पित बजट प्रावधान, जनभागीदारी, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर बल दिया।

आईजीआरएमएस के डायरेक्टर डॉ. अमिताभ पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जीवन-मूल्यों का विशेष महत्व है और इन्हीं मूल्यों से प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। भारतीय परंपरा जल को जीवन और लोककल्याण का आधार मानती है, इसलिए जल के उपयोग में संयम, सामूहिकता और जिम्मेदारी का भाव आवश्यक है। नई पीढ़ी में जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता नहीं, बल्कि व्यवहारिक आचरण से ही जल और पर्यावरण को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

आईआईएम बोधगया की डायरेक्टर डॉ. विनिता सहाय ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी भारतीय ज्ञान, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। भारतीय समाज ने हमेशा सीमित संसाधनों में प्रकृति-सम्मत जीवन शैली अपनाई, लेकिन आधुनिक तकनीक और बदलती जीवनशैली के कारण यह परंपरा कमजोर हुई है। संयुक्त परिवारों के विघटन और मोबाइल-गैजेट्स के बढ़ते प्रभाव से संस्कारों एवं जीवन के अनुभवों का हस्तांतरण कम हुआ है। भविष्य में पानी सबसे मूल्यवान करेंसी साबित होगा। इसलिए युवाओं को जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भारतीय जीवन-मूल्यों को अपनाकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

प्रकृति को सम्मान देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : सुश्री जायसवाल

 दूसरे सत्र पृथ्वी तत्व को संबोधित करते हुए जेके सीमेंट सीएसआर प्रमुख सुश्री शिल्पा जायसवाल ने कहा कि भारतीय परिवारों में पूजा-पाठ , संस्कारों और परंपराओं के माध्यम से बच्चों को प्रकृति एवं पंचतत्वों का ज्ञान दिया जाता रहा है। प्रकृति मनुष्य को प्रेम और सम्मान का पाठ पढ़ाती है, किंतु जब तक प्रेम के साथ सम्मान का भाव नहीं जुड़ता, तब तक प्रकृति का संरक्षण संभव नहीं है। कोविड के बाद मौसम और हवाओं में आए बदलाव पर्यावरणीय असंतुलन के संकेत हैं। विकास आवश्यक है, लेकिन वह प्रकृति के अनुकूल होना चाहिए। जलवायु परिवर्तन से महिलाएँ और युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को छोटे-छोटे प्रयासों से प्रकृति को कुछ लौटाने का संकल्प लेना चाहिए।

प्राकृतिक संसाधन भावी पीढ़ियों की अमानत हैं : आर. पवित्र कुमार

जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन के सीईओ आर. पवित्र कुमार ने कहा कि मानव जीवन पंचतत्व-जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश-पर आधारित है। वर्तमान में उपयोग किए जा रहे प्राकृतिक संसाधन वास्तव में आने वाली पीढ़ियों से लिया गया उधार हैं, इसलिए उनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन जलवायु संरक्षण और प्रकृति-आधारित समाधानों पर कार्य कर रहा है तथा समाज के सक्षम वर्ग से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

ईको-टूरिज्म प्रकृति संरक्षण और आजीविका का प्रभावी माध्यम : एल. कृष्णमूर्ति

एमपीईडीबी के सीईओ एल. कृष्णमूर्ति ने पर्यटन एवं ईको टूरिज्म विषय पर विचार रखते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक टाइगर रिजर्व वाला राज्य है, जहाँ नौ टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। जंगल को समझने के लिए दृष्टि और संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है, क्योंकि वन केवल बाघ देखने का स्थान नहीं, बल्कि जैव विविधता का जीवंत संसार हैं। भारतीय संस्कृति में पशु-पक्षी और वन्यजीव सदैव आस्था और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

नदियों को एनवायरमेंटल पर्सनहुड का दर्जा देने की आवश्यकता : डॉ.श्रीवास्तव

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. प्रदीपवास्तव ने कहा पानी के बारे में सोचना दरअसल पूरी पृथ्वी और उसके पारिस्थितिक तंत्र के बारे में सोचना है। नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि नदी के किसी एक हिस्से में होने वाला परिवर्तन सैकडों किलोमीटर दूर तक प्रभाव डालता है। डॉ.वास्तव ने नदियों को एनवायरमेंटल पर्सनहुड का दर्जा देने की आवश्यकता बताते हुए संदेश दिया- थिंक ग्लोबली, एक्ट लोकली तथा पानी वस्तु नहीं, देवता है।

तीसरा सत्र वायु तत्व पर रहा केन्द्रित

सदानीरा समागम के प्रथम दिवस का तीसरा सत्र वायु तत्व पर केन्द्रित रहा। इस सत्र में इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र के समूह निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनुवास्तव, आईआईएफएम भोपाल के प्रो. योगेश दुबे, पर्यावरणविद् पतंजलि झा ने वायु प्रदूषण, वायु गुणवत्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छ वायु अभियानों पर चर्चा की।

समागम के दूसरे दिन अग्नि तत्व और आकाश तत्व पर होगी चर्चा

सदानीरा समामग के दूसरे दिन अग्नि तत्व और आकाश तत्व पर देश-प्रदेश के विद्वानों द्वारा विमर्श किया जायेगा, जिसमें इसरो के निदेशक प्रकाश चौहान, इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र के समूह निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास, टाटा ट्रस्ट के सलाहकार एच.एन.निवास, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. विनय कुमार पांडे, ओएनजीसी के पीयूष प्रेरित आर्य तथा प्रो. राम नारायण द्विवेदी, टाटा संस के चाको थॉमस, हिंडाल्को के सीएसआर प्रमुख अविजित, वेदांता समूह की अनुपम निधि तथा कैल्डेरिस की उत्सवी दीपक रहेंगे।

 

जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही प्रदेश सरकार : मंत्री डॉ. शाह

जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही प्रदेश सरकार : मंत्री डॉ. शाह

विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कोचिंग और आधुनिक सुविधाओं से किया जा रहा सशक्त

भोपाल

प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जनजातीय कार्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में प्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिये अनेक योजनायें संचालित की जा रही हैं। विभाग द्वारा हजारों स्कूलों, छात्रावासों और आश्रमों का संचालन किया जा रहा है, जहां लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि सरकार जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समाज का हर बच्चा आधुनिक शिक्षा से जुड़े और अपने सपनों को पूरा कर सके। छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रदेश में 17 हजार 794 प्राथमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 5 हजार 493 माध्यमिक विद्यालय, 1109 उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा 804 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा 8 आदर्श आवासीय विद्यालय एवं 82 माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में 94 सांदीपनि विद्यालय और 26 क्रीड़ा परिसर संचालित किए जा रहे हैं। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में 1 लाख 49 हजार 104 विद्यार्थियों को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें 92 हजार 547 बालक तथा 56 हजार 557 बालिकाएं शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति आश्रमों में 1078 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्‍त कर रहे हैं। इनमें 568 बालक और 510 बालिकाएं शामिल हैं। जूनियर छात्रावासों में 9 हजार 981 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्‍त कर रहे है। सीनियर छात्रावासों में 68 हजार 670 तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 8 हजार 710 विद्यार्थियों को सुविधा दी जा रही है।

मंत्री डॉ. शाह ने कहा है कि छात्रावास एवं आश्रमों में विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 5 हजार रुपये की खेलकूद  सामग्री उपलब्ध कराई जाती हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 5 हजार रुपये तथा फर्नीचर एवं उपकरणों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों को 2 हजार रुपये तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 1 हजार रुपये प्रतिवर्ष स्टेशनरी सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों को प्रतिमाह 200 रुपये पोषण आहार के रूप में दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं आश्रमों में समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लिए 5 हजार रुपये , इंटरनेट सुविधा के लिए 2500 रुपये, अध्ययन भ्रमण के लिए 25 हजार रुपये तथा संधारण एवं अनुरक्षण के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष उपलब्ध कराए जाते हैं।

मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जिला एवं विकासखंड स्तर पर संचालित उत्कृष्ट छात्रावासों में 10 माह की कोचिंग व्यवस्था भी की गई है, जिसमें 5 विषय पढ़ाए जाते हैं। अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं आश्रमों में विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति के रूप में बालकों को 1650 रुपये तथा बालिकाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

 

स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री काश्यप

स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री काश्यप

मंत्री काश्यप से युवा उद्यमी रत्नेश ने की सौजन्य भेंट
युवा उद्यमी द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स किया का निर्यात

भोपाल

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने भोपाल के युवा स्टार्टअप उद्यमी एवं प्रमाणित टी टेस्टर आरिन रत्नेश की अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

भोपाल स्थित स्टार्टअप कंपनी हरितिमा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स का सफल निर्यात किए जाने पर आरिन रत्नेश ने मंत्री काश्यप से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की तथा उन्हें अपने उत्पादों की श्रृंखला भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह तथा उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।

मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने नवाचारों को सफल व्यवसाय में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि आरिन रत्नेश की उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की अपार क्षमता है।

मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, विपणन अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा आरिन रत्नेश को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित India International Trade Fair (IITF-2025) में मध्यप्रदेश पवेलियन के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संभावनाओं को विस्तार मिला।

आरिन रत्नेश ने राज्य शासन एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहायता और उचित मंच मिलने से उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे युवा उद्यमियों की सफलता मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

 

12 साल बाद PM मोदी से मिले थलपति विजय, दिल्ली में हुई अहम मुलाकात

 नई दिल्ली

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री, जोसेफ विजय अपनी कुर्सी संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री से तमिलनाडु की उन मांगों को लेकर बात की जो केंद्र सरकार के सामने काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. विजय, तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. उनकी मुलाकात का पूरा एजेंडा तो सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री के अलावा और भी कई राजनीतिक हस्तियों से मिल सकते हैं।

तमिलनाडु हाउस पहुंचे विजय
दिल्ली पहुंचने के बाद विजय सबसे पहले, सेंट्रल दिल्ली में तमिलनाडु हाउस पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात शाम 4 बजकर 30 मिनट के लिए शिड्यूल थी. शाम को प्रधानमंत्री से मिलने विजय सेवा तीर्थ पहुंचे. वहां करीब 25 मिनट तक दोनों की मीटिंग चली. इस मीटिंग में विजय और पीएम मोदी की बातचीत के बारे में डिटेल्स सामने आने का अभी इंतजार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर दी थी बधाई
विजय का सिनेमा सुपरस्टार से, पॉलिटिक्स का हीरो बनना बड़ी खबर थी. जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. पीएम के एक्स हैन्डल से शेयर हुए पोस्ट में लिखा था, ‘थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई. उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं. केंद्र सरकार लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

दो साल पहले ही अपनी पार्टी TVK के साथ विजय ने राजनीति में एंट्री ली थी. तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बावजूद उनके पास बहुमत की कमी थी जिसके चलते उनका मुख्यमंत्री बन पाना लगातार खबरों में था. लेकिन की दशकों के बाद राज्य में तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे विजय, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं।

असम में UCC विधेयक पास! उत्तराखंड-गुजरात के बाद ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बना

गुवाहाटी
असम विधानसभा चुनाव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता ) बिल को पास कर दिया है। इसी के साथ देश में उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य बन गया है। जहां की विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल काेड बिल को पास किया है। बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में यूनिफॉर्म सिविल काेड लागू करने का वादा किया था। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सीएम बने हिमंत बिस्वा सरमा ने पहली कैबिनेट में यूसीसी बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। असम में बहुविवाह के साथ लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रवाधान किया गया है।

UCC संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है : सीएम हिमंता

‘समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- प्रस्तावित कानून विपक्ष के बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, समान नागरिक संहिता का लंबा इतिहास है. इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस ने 1925 में की थी. 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था. वही कांग्रेस आज इसका विरोध कुरान और शरीयत के नजरिए से कर रही है, न कि हिंदू, ईसाई या आदिवासी दृष्टिकोण से।

कांग्रेस केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है : सीएम हिमंता
हिमंता ने कहा- कांग्रेस समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है. वह सभी जातियों, पंथों और धर्मों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है. कांग्रेस असम की भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करती. मुख्यमंत्री ने कहा, आज की कांग्रेस को देखकर बहुत दुख और पीड़ा होती है. हमारे वक्तव्यों में सभी धर्मों और सभी लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. मुझे लगता है कि कांग्रेस को सांप्रदायिक पार्टी में बदलने के बजाय भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का पालन करना चाहिए।

असम यूसीसी बिल की बड़ी बातें:

    शादी-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: सभी शादियों और तलाक का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है
    विवाह की न्यूनतम आयु: आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल तय की गई है।

    धोखे से शादी पर सजा: पहचान छिपाकर, धोखे या जबरदस्ती से शादी करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।

    बहुविवाह पर प्रतिबंध: सभी धर्मों में एक से अधिक शादियां करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। विवाहित रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।

    लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, संबंध टूटने पर भी सरकार को जानकारी देनी होगी। लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा।

    महिलाओं को समान अधिकार: सभी महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा और माता-पिता की संपत्ति में बेटी का भी पूरा हक होगा। इसके अलावा, छोटे बच्चों (5 वर्ष से कम) की कस्टडी का अधिकार आमतौर पर मां को दिया गया है।

    आदिवासी समुदायों (ST) को छूट: राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को इन नए यूसीसी नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। वे अपनी पारंपरिक रूढ़ियों और सामुदायिक कानूनों का पालन करना जारी रख सकते हैं।

(नोट: उत्तराखंड और गुजरात ने भी इसी तरह के नियम बनाए हैं। असम तीसरा राज्य है जिसकी विधानसभा में यूसीसी पास हुआ है।)

यूसीसी विधेयक की मूल बातें
154 पन्नों के इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विवाह और तलाक़, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्तों से संबंधित क़ानूनों को नियंत्रित और विनियमित करना है और इससे जुड़े मामलों का संचालन करना है।

असम सरकार ने इस बिल के संदर्भ में एक बयान जारी कर कहा, “अगर यह बिल पास हो जाता है, तो धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी शादियों और तलाक़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो जाएगा. जोड़ों को समारोह के 60 दिनों के भीतर उप-रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा।

विवाह संबंधी प्रावधानों के तहत, यह विधेयक एक विवाह को अनिवार्य बनाता है और दूल्हों के लिए 21 वर्ष और दुल्हनों के लिए 18 वर्ष की एक समान क़ानूनी आयु निर्धारित करता है।

विधेयक में कहा गया है, “यह प्रस्तावित क़ानून रीति-रिवाजों की पूरी आज़ादी देकर सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है. इसके तहत शादियाँ किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न की जा सकती हैं. इनमें वैदिक विवाह, अहोम
चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कारज शामिल हैं।

अतुल बोरा ने पेश किया था बिल
असम की विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने पेश किया था। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। वे ‘पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों’ को करती रहेंगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड चार विषयों को कवर करेगा। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामले शामिल हैं। यह सभी धर्मों पर लागू होगा। जब हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने इस बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने विरोध किया था। यूसीसी बीजेपी का बड़ा वादा था, जिस सीएम सरमा ने पूरा कर दिया है।

 

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