उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एयर एम्बुलेंस एमपी पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का किया शुभारंभ

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एयर एम्बुलेंस एमपी पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का किया शुभारंभ

एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए अनुरोध की प्रक्रिया अब और अधिक सरल एवं तेज गति से होगी संपन्न

भोपाल
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल
ने मंत्रालय में “एयर एम्बुलेंस एमपी” पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत किसी भी नागरिक को समय पर उपचार के अभाव में जीवन न गंवाना पड़े। नए पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए अनुरोध की प्रक्रिया अब और अधिक सरल एवं तेज होगी। पोर्टल में एयर एम्बुलेंस फ्लीट की रियल टाइम ट्रैकिंग, सेवा अनुरोधों का सुगम डिजिटल प्रवाह, सेवा प्रदाताओं को तत्परता के लिये रियल टाइम नोटिफिकेशन तथा अनुमोदन प्राधिकारी को समयबद्ध स्वीकृति के लिए अलर्ट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।

पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में यह सेवा अब तक 140 जीवनरक्षक मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है। इनमें नवजात शिशुओं, हृदय रोग, ट्रॉमा, न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियों एवं अंग प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों का सफल एयर मेडिकल ट्रांसफर शामिल है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत आयुष्मान भारत कार्डधारकों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों से दूरी एवं आर्थिक स्थिति जीवनरक्षक उपचार में बाधा नहीं बने।  

सेवा के संचालन के लिए भोपाल में 24×7 एयर मेडिकल ऑपरेशन व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके अंतर्गत एक फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट “बीचक्राफ्ट किंग एयर सी -90” तथा एक मल्टी इंजन हेलीकॉप्टर “एडबल्यू -109” लगातार स्टैंडबाय पर उपलब्ध हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस, फ्लाईओला एविएशन के सीएमडी एस. राम ओला और फ्लाईओला एविएशन की डायरेक्टर कॉर्पोरेट अफेयर्स डॉ. मोनिका तिवारी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाए: आबकारी मंत्री देवांगन

मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाए: आबकारी मंत्री देवांगन

पड़ोसी राज्यों से आने वाली शराब रोक लगाने के दिए निर्देश

    रायपुर
प्रदेश के वाणिज्यिक कर (आबकारी) मंत्री लखन लाल देवांगन नवा रायपुर स्थित जीएसटी भवन स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और आगामी महीनों के लिए जिलेवार विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर आबकारी मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ठोस रणनीति अपनाने, दुकानवार समीक्षा करने और अनुशासन के साथ कार्य संपादन के निर्देश दिए। बैठक में वाणिज्यिक कर आबकारी विभाग सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, आबकारी आयुक्त पदुम सिंह एल्मा, विशेष सचिव आबकारी देवेन्द्र भारद्वाज, आबकारी मुख्यालय , बेवरेजेस कारपोरेशन , मार्केटिंग कारपोरेशन के अधिकारियों सहित जिले से आए मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।

    आबकारी मंत्री देवांगन ने राज्य की अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थित आबकारी जांच चौकियों को अन्य राज्यों की मदिरा के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने और सीसीटीवी कैमरों के सुचारू संचालन की निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर कोचियों के विरूद्ध प्रभावी कार्य करें। सभी जिला अधिकारी यह सुनिश्चित करें आबकारी उपनिरीक्षक एवं नीचे का अमला अवैध शराब बिक्री करने वाले के विरूद्ध समझौता न करें।

    इसके अलावा विभाग में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार मदिरा स्कंध (स्टाक) का संधारण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया किया मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं के मांग के अनुरूप मदिरा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री न हो। उन्होंने अधिकारियों को मदिरा दुकानों में नियम और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए। दुकानों में उपलब्ध मदिरा को नियमानुसार दरों सहित रैकों में प्रदर्शित करने कहा गया, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शिता और सुविधा मिल सके।

    मंत्री ने बैठक में राजस्व लक्ष्य की जिलेवार समीक्षा करते हुए जिन जिलों ने अब तक लक्ष्य की प्राप्ति की है, उन्हें सतत् कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए। वहीं लक्ष्य से पीछे चल रहे जिलों को इसके कारणों की दुकानवार समीक्षा कर कमी की पूर्ति हेतु विस्तृत कार्य-योजना बनाकर तत्परता से अमल में लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों को इस बात की स्पष्ट हिदायत दी कि मदिरा में किसी प्रकार की मिलावट न होने पाए। इसके लिए सभी जिला अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने और वहां पाई गई अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई और दोषी कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, दुकानों में पेटीएम या अन्य कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पृथक काउंटर की व्यवस्था के भी निर्देश दिए गए।
    आबकारी सचिव श्रीमती कंगाले ने प्रदेश में संचालित बारों, क्लबों, होटलों और ढाबों की आकस्मिक जांच करने तथा समय पश्चात संचालन अथवा अवैध मदिरा विक्रय करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवैध मदिरा एवं अन्य मादक पदार्थों के निर्माण, परिवहन, तस्करी और विक्रय पर सख्त नियंत्रण रखने हेतु आवश्यकता पड़ने पर पुलिस विभाग से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए।

उच्च शिक्षा विभाग की ई-प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों में उत्साह

उच्च शिक्षा विभाग की ई-प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों में उत्साह

प्रथम चरण में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में 2.78 लाख से अधिक पंजीयन, 87 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश प्रक्रिया 2026-27 अंतर्गत प्रथम चरण में विद्यार्थियों द्वारा उत्साहपूर्वक पंजीयन एवं प्रवेश प्रक्रिया में सहभागिता की जा रही है। अभी तक स्नातक, स्नातकोत्तर एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में कुल 2,78,742 पंजीयन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 2,10,460 आवेदनों का सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है।

प्रथम चरण में अब तक कुल 87 हजार 687 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जिनमें स्नातक स्तर पर 70 हजार 752 तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 16 हजार 935 विद्यार्थियों ने प्रवेश सुनिश्चित किया है।

एनसीटीई पाठ्यक्रमों में प्रथम चरण में प्रवेश के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 30 जून

एनसीटीई पाठ्यक्रमों के लिये प्रथम चरण के पंजीयन की अंतिम तिथि 30 मई 2026 निर्धारित है तथा आवंटन सूची 10 जून 2026 को जारी की जाएगी। सामान्य पाठ्यक्रमों में द्वितीय चरण के लिये पंजीयन की अंतिम तिथि 3 जून 2026 है एवं सीट आवंटन सूची 7 जून 2026 को जारी होगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं शुल्क भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण करें, जिससे समय पर प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।

 

योग और खजुराहो दोनों भारतीय संस्कृति के हैं अभिन्न स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

योग और खजुराहो दोनों भारतीय संस्कृति के हैं अभिन्न स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्व धरोहर खजुराहो में हुआ “योग महोत्सव 2026”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम को वीडियो संदेश से किया संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय योग परम्परा को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर स्वस्थ, जागरूक एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग और खजुराहो, दोनों ही सदियों से भारतीय संस्कृति के अभिन्न स्तंभ रहे हैं। हमारी सरकार योग के प्रचार के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। योग को प्रदेश के घर-घर तक पहुंचाने के लिए आयुष विभाग द्वारा इन दिनों ”घर-घर योग-हर व्यक्ति निरोग” अभियान भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 25 दिवसीय काउंटडाउन के अवसर पर यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में आयोजित “योग महोत्सव 2026” कार्यक्रम को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित किया।

वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग आज सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि ‘वन अर्थ-वन हेल्थ’ की भावना को साकार करने वाला जीवन दर्शन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार घर-घर योग हर व्यक्ति निरोध के भाव से योग और आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। आयुष विभाग के माध्यम से आरोग्य मंदिरों, योग वेलनेस सेंटर्स और विभिन्न जनजागरुकता की गतिविधियों के माध्यम से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए सफल अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले काउंटडाउन इवेंट से देशभर में लाखों लोग जुड़ रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी योग को सहर्ष स्वीकार कर रही है। हम योग को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर एक स्वस्थ, जागरूक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबके सहयोग से हम योग को हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय का यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। यह कार्यक्रम योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति केन्द्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्र और राज्य सरकार के आयुष मंत्रालय के अधिकारियों और जिला प्रशासन, छतरपुर को खजुराहो में इस विशेष आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को केंद्रीय आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और सांसद खजुराहो विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया।          

ईरान के बाद अब अमेरिका-सऊदी में तनातनी! ट्रंप की एक शर्त से बिगड़ा पूरा समीकरण

वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई जंग पर्दे के पीछे शुरू होती दिख रही है. इस बार मामला सीधे वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने अरब सहयोगी सऊदी अरब के बीच का है. वजह बनी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नई रणनीति, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ दिया।

25 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे. ट्रंप ने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही।

लेकिन ट्रंप की यह अपील खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब को बिल्कुल पसंद नहीं आई. कुछ ही घंटों बाद रियाद की तरफ से संकेत दिया गया कि सऊदी का पुराना रुख नहीं बदला है. सऊदी अधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के लिए “स्पष्ट रास्ता” तय नहीं होता, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं।

कई अरब देशों ने इजरायल संग स्थापित किए रिश्ते
इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि गाजा युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति पहले जैसी नहीं रही. 2020 में जब अब्राहम अकॉर्ड्स हुए थे, तब कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे. बाद के दौर में सऊदी अरब ने भी इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने की कोशिश की।

हालांकि, इस बीच गाजा से हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया और फिर एक बड़ी जंग शुरू हो गई. यही वजह रही कि सऊदी-इजरायल के बीच रिश्ते स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन मौजूदा हालात में सऊदी अरब किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सऊदी की नाराजगी
यह विवाद सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है. इसके पीछे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण है. मई की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी. इसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि ईरान वहां अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है।

लेकिन अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने इस ऑपरेशन की घोषणा खाड़ी सहयोगियों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी. इससे सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया. प्रिंस सुल्तान एयरबेस से अमेरिकी उड़ानों पर रोक लगा दी गई. इसके बाद अमेरिकी ऑपरेशन को भारी झटका लगा और “प्रोजेक्ट फ्रीडम” सिर्फ 36 घंटे के भीतर ठप पड़ गया।

अब सोच-समझकर फैसला लेगा सऊदी अरब!
सऊदी अरब अब अमेरिका की हर रणनीति का आंख बंद करके समर्थन नहीं करना चाहता. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का सीधा खतरा है. तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर किसी खाड़ी देश ने अमेरिकी या इजरायली सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया, तो उसे भी जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा।

2019 में सऊदी अरब के अबकैक और खुरैस तेल प्लांट्स पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले अब भी रियाद के लिए बड़ी चेतावनी बने हुए हैं. यही कारण है कि सऊदी नेतृत्व किसी सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है. इसके अलावा सऊदी अरब खुद को इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों मक्का और मदीना का संरक्षक मानता है. ऐसे में फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज करके इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करना उसके लिए आसान नहीं है. गाजा युद्ध के बाद अरब देशों की जनता में इजरायल के खिलाफ गुस्सा भी काफी बढ़ा है।

उधर ईरान इस पूरी घटना को अपने लिए रणनीतिक मौके की तरह देख रहा है. अमेरिका जहां एक बड़ा एंटी-ईरान गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान खाड़ी देशों और वॉशिंगटन के बीच बढ़ती दूरी का फायदा उठाने में लगा है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की “अब्राहम अकॉर्ड्स फर्स्ट” वाली रणनीति ने उल्टा असर किया है. इससे अमेरिका के सहयोगी देश ही असहज हो गए हैं और वे अब अपने सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

 

‘मेरे पूर्वज हिंदू थे…’ पाक रक्षा मंत्री का बड़ा कबूलनामा, बोले- बच्चों को पढ़ाया जा रहा गलत इतिहास

इस्लामाबाद

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को “गलत इतिहास” पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं।

एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, “हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे.” उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए।

ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, “हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे.” उन्होंने आगे कहा, “मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?” आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की।

पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई!
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे।

ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी।

पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, “मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो.” उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा।

पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता “समस्याओं से भरी” हो सकती है।

Gold-Silver Price Crash: अचानक धड़ाम हुए चांदी के दाम, सोना भी हुआ सस्ता… जानिए आज का नया रेट

नई दिल्ली
सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया।

सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है।

MCX पर सोना-चांदी में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया।

चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है।

अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।    

दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल?
एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली।

सोने-चांदी में गिरावट की वजह
सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।

‘गंदा धर्म’ बयान पर घिरीं ममता बनर्जी, TMC में भी उठने लगे विरोध के स्वर

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिलीगुड़ी में ममता बनर्जी के खिलाफ एक वकील की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले साल कोलकाता में ईद के एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ममता के खिलाफ धारा 351 (1)- आपराधिक धमकी, धारा 352- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान और धारा 353- विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी, नफरत या द्वेष की भावना को बढ़ावा देना के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यह शिकायत वकील रिंकी चटर्जी द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में साल 2025 में कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के कार्यक्रम में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का हवाला दिया है।

क्या कहा था ममता ने?
पिछले साल ईद के मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कथित तौर पर कहा था, “मैं उस गंदे धर्म को नहीं मानती जिसे इस ‘जुमला पार्टी’ ने जानबूझकर गढ़ा है।” आरोप है कि उन्होंने भाजपा द्वारा प्रचारित हिंदू धर्म के स्वरूप को गंदा धर्म कहकर संबोधित किया था।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख ने 31 मार्च 2025 को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, ‘क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (तत्कालीन) ममता बनर्जी के लिए सनातन धर्म एक गंदा धर्म है? उनके शासनकाल में कई हिंदू-विरोधी दंगे होने के बावजूद, उनमें हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उनकी आस्था का अपमान करने की हिम्मत है। एक बार फिर उन्होंने मुसलमानों को हिंदुओं को निशाना बनाने की खुली छूट दे दी है। इस बार एक ऐसे धार्मिक मंच से, जो ईद मनाने के लिए था। उन पर शर्म आती है।’

वहीं, शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि एक मुस्लिम धार्मिक सभा के मंच से सनातन धर्म को गंदा कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे भारत सहित दुनिया भर के हिंदुओं का अपमान हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कानून इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगा। रिंकी चटर्जी ने अपनी शिकायत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार हिंदू धर्म को निशाना बनाया है, जिसमें ममता बनर्जी का यह बयान सबसे गंभीर था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ममता बनर्जी ने साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से धमकी दी थी।

TMC के भीतर से उठे विरोध के सुर
इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है। जब इस एफआईआर को लेकर टीएमसी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और पेशे से वकील अत्री शर्मा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने पार्टी प्रवक्ता के रूप में तो कुछ नहीं कहा लेकिन व्यक्तिगत तौर पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। अत्री शर्मा ने स्वीकार किया कि जब तृणमूल सत्ता में थी तब भी पार्टी के भीतर कई लोग इस बयान के खिलाफ थे। उन्होंने कहा, “उस समय सत्ता की कमान संभालते हुए ममता बनर्जी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना वास्तव में अनुचित था। यहां तक कि हममें से जो लोग उस समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने भी उन विशेष टिप्पणियों का कभी समर्थन नहीं किया। देश के हर नागरिक को शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार है।”

मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्लासरूम और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए तय होगी प्राथमिकता
 
रायपुर
मुख्य सचिव वि
कासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी में छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वार्षिक कार्य योजना और बजट वर्ष 2026-27 का प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से समग्र शिक्षा अंतर्गत स्वीकृत नवीन कार्यों का युक्तियुक्तकरण उपरांत स्थल परिवर्तन एवं विविध बिन्दुओं के प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत अनुमोदित किये गये। स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत विविध निर्माण कार्यों को शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराये जाने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

            बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने 2026-27 के वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट प्लान को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंनें शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया।  मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बजट प्लान में केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि लर्निंग आउटकम सुधारने वाले नवाचारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए स्कूलों में संसाधन, शिक्षक और तकनीक तीनों मजबूत करने होंगे।  

छात्रों के ड्राप आउट को राकने करें प्रयास

            मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में छात्रों के ड्राप आउट की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाये। माध्यमिक-उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब स्थापित होंगी। सभी स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था होगी।  ड्रॉपआउट रोकथाम कक्षा 1, 8 और 10 में ड्रॉपआउट दर शून्य करने के लिए विशेष ट्रैकिंग सिस्टम बनेगा। शाला त्यागी बच्चों को मुख्यधारा में लाने हेतु ब्रिज कोर्स चलेंगे।

शिक्षक प्रशिक्षण

           राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसार सभी शिक्षकों का फेज-वाइज प्रशिक्षण दिया जाये। गणित-विज्ञान-अंग्रेजी के लिए विशेष मास्टर ट्रेनर पूल तैयार होगा। बुनियादी सुविधा जरूरत वाले स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, बालिका शौचालय, पेयजल, बिजली और बाउंड्रीवॉल के काम प्राथमिकता से होंगे।  

समावेशी शिक्षा

         दिव्यांग बच्चों के लिए संसाधन कक्ष, थेरेपी यूनिट और विशेष टीएलएम का प्रावधान बजट में रखा जाएगा।  कौशल विकासरू कक्षा 9 से 12 तक वोकेशनल एजुकेशन को मजबूत किया जाएगा। कृषि, आईटी, हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे ट्रेड में स्थानीय जरूरत के अनुसार कोर्स चलेंगे।

नीट यूजी में प्रवेश प्राप्त करने हेतु प्रदेश के संगठित क्षेत्र के बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई

जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

          वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

         बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

         विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

         यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

        वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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