तेंदूपत्ता अग्निकांड पर बड़ा एक्शन, बीजापुर के DFO हटाए गए

रायपुर.

बीजापुर जिले में हुए तेंदूपत्ता अग्निकांड को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत की कमाई को नुकसान पहुंचाने वाली इस गंभीर घटना पर मंत्री कश्यप ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बीजापुर के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय रायपुर में संबद्ध किया गया है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन में अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया डीएफओ नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई को शासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वनवासियों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन मंत्री कश्यप ने दो टूक कहा कि तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं, हजारों आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है।

उनकी मेहनत और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री कश्यप ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, समयबद्ध और तथ्यात्मक होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

अनुभवी अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
नवनियुक्त डीएफओ जाधव सागर रामचंद्र वर्तमान में राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। दंतेवाड़ा जिले में उनके प्रभावी कार्य और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए शासन ने बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है।

10 करोड़ से अधिक नुकसान का प्रारंभिक अनुमान
उल्लेखनीय है कि 25 मई 2026 को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में भीषण आग लगने से विभिन्न समितियों का संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 10 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। वास्तविक नुकसान का विस्तृत भौतिक सत्यापन वर्तमान में जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत
शासन ने घटना के कारणों, गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों के पालन, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तथा संभावित वित्तीय क्षति सहित सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वन संपदा की सुरक्षा और आदिवासी हितों की रक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई

जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

          वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

         बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

         विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

         यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

        वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मोमिना इकबाल विवादों में घिरीं, पाक नेता साकिब खान ने 10 करोड़ के गिफ्ट वापस मांगे

मोमिना इकबाल पाकिस्तानी सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस हैं. 33 साल की मोमिना की खूबसूरती पर फैंस मर मिटते हैं. एक्ट्रेस के दिलकश अंदाज पर पाकिस्तानी नेता साकिब खान चधर भी अपना दिल हार बैठे थे. दोनों के रिलेशनशिप में होने की खबरें थीं. मगर शादी से पहले उनका रिश्ता धोखे और फरेब में फंसकर खत्म हो गया.

मोमिना पर Pak नेता ने लगाए आरोप
एक्ट्रेस मोमिना इकबाल और साकिब खान चधर कभी प्यार में थे. मगर अब उनके बीच का प्यार नफरत में बदल चुका है. साकिब ने मोमिना पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और रिश्ता टूटने पर एक्ट्रेस से करोड़ों के तोहफे वापिस मांगे हैं.

साकिब ने अपने बयान में कहा है कि वो मोमिना इकबाल को बिल्कुल भी परेशान नहीं कर रहे हैं. वो सिर्फ उनसे अपने कीमती तोहफे वापस मांग रहे हैं, क्योंकि अब वो किसी और से शादी कर रही हैं और उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है. एमपीए ने यह आरोप भी लगाया कि मोमिना के होने वाले नए पति ने उन्हें धमकी दी थी और उन्होंने उसके खिलाफ मामला भी दर्ज करा दिया है.

मोमिना और इकबाल के बीच छिड़े विवाद पर अब पाकिस्तानी सिनेमैटोग्राफर इरशाद भट्टी ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि एमपीए साकिब के वकील मियां अली अशफाक ने उन्हें बताया है कि साकिब ने मोमिना को एक फॉर्च्यूनर (Fortuner) और एक होंडा सिविक (Honda Civic) कार तोहफे में दी थी. उस फॉर्च्यूनर का इस्तेमाल अब मोमिना की मां करती हैं.

इसके अलावा 84 लाख रुपये की एक घड़ी और अन्य लग्जरी चीजें भी गिफ्ट में दी थीं. इन सभी तोहफों की कुल कीमत करीब 10 करोड़ रुपये है, जिसे साकिब अब वापस मांग रहे हैं.

मोमिना ने गुपचुप रचाई शादी
मगर इस पूरे विवाद के बीच मोमिना इकबाल ने हमजा हबीब से गुपचुप शादी रचा ली है. शादी की खबर को खुद हमजा हबीब ने कंफर्म किया. उन्होंने मीडिया संग बातचीत में कहा कि दोनों ने सादगी से निकाह कर लिया है. उनकी ये अरेंज मैरिज है. अब वो कानूनी तौर पर खुद को मोमिना का पति मानते हैं.

वहीं, नेता साकिब संग रिश्ते के विवाद पर एक्ट्रेस मोमिना इकबाल ने चुप्पी साधी हुई है. हालांकि, कुछ समय पहले मोमिना इकबाल ने बिना किसी का नाम लिए अपने इंस्टाग्राम पर खुलासा किया था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का एक एमपीए (MPA) उन्हें धमकियां दे रहा है और उनकी शादी को खराब करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने सरकार से इस पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया था.

बाद में इस एमपीए की पहचान साकिब के रूप में हुई. उन्होंने मोमिना इकबाल संग रिलेशनशिप में होने का दावा किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि एक्ट्रेस ने उनसे करोड़ों के तोहफे लिए थे. अब कौन कितना सच बोल रहा है और कितना झूठ…इसका खुलासा भी जल्द हो जाएगा. लेकिन फिलहाल दोनों के रिश्ते का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

‘वेलकम टू द जंगल’ में होगा 5 गानों का धमाल, डार्क ह्यूमर से भरपूर होगी अक्षय कुमार की फिल्म

 अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ लगातार चर्चा में बनी हुई है. फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट और मजेदार गानों को लेकर फैंस पहले से ही काफी एक्साइटेड हैं. अब निर्देशक अहमद खान ने फिल्म को लेकर नया अपडेट दिया है. उन्होंने बताया कि फिल्म में कुल 5 गाने होंगे, जो कहानी और कॉमेडी को और ज्यादा मजेदार बनाएंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक कॉमेडी फिल्म नहीं, बल्कि एक पूरा ‘मसाला एंटरटेनर पैकेज’ है.

अहमद खान: “डार्क ह्यूमर का मिलेगा तड़का”
फिल्म के बारे में बात करते हुए अहमद खान ने बताया कि ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ एक साधारण कॉमेडी फिल्म नहीं है. इसमें डार्क ह्यूमर का भी खास तड़का देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि फिल्म को इस तरह बनाया गया है ताकि दर्शक थिएटर में बैठकर शुरुआत से आखिर तक पूरा एंटरटेन महसूस करें और बोर न हों.

फिल्म में होंगे 5 खास गाने
अहमद खान ने खुलासा किया कि इस फिल्म में 5 खास गाने रखे गए हैं. ये गाने सिर्फ नाचने-गाने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये फिल्म की कहानी और उसके मजाक को और ज्यादा बढ़ाएंगे. गानों की डांस स्टेप्स को भी इस तरह से तैयार किया गया है जिसे देखकर लोगों की हंसी छूट जाएगी. फिल्म के दो गाने पहले ही रिलीज होकर लोगों का दिल जीत चुके हैं.

निर्माता फिरोज नाडियाडवाला की तारीफ
अहमद खान ने फिल्म के निर्माता फिरोज नाडियाडवाला की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म बनाना आसान नहीं होता.

उन्होंने आगे कहा कि फिरोज फिरोज भाई बहुत हिम्मत वाले इंसान हैं. फिल्म बनाने में कई तरह की मुश्किलें और रुकावटें आईं, लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटे. उन्होंने पूरी टीम का साथ दिया ताकि फिल्म ठीक वैसे ही बने जैसी वह बनाना चाहते थे.

फिल्म में कौन-कौन से स्टार हैं?
‘वेलकम टू द जंगल’ में बहुत बड़ी स्टार कास्ट देखने को मिलेगी. फिल्म में अक्षय कुमार के साथ सुनील शेट्टी, परेश रावल, जॉनी लीवर, अरशद वारसी, राजपाल यादव, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, दिशा पटानी, जैकलीन फर्नांडिस, उर्वशी रौतेला और कई बड़े कलाकार नजर आएंगे.

करीब 30 कलाकारों वाली यह फिल्म साल की सबसे बड़ी कॉमेडी फिल्मों में से एक मानी जा रही है.

कब रिलीज होगी फिल्म?
‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म को एक बड़े फैमिली एंटरटेनर के रूप में तैयार किया गया है.

डी-लिस्टिंग पर छिड़ी सियासी बहस, UD मिंज ने किया विरोध; अरविंद नेताम बोले- होकर रहेगी

रायपुर.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम के मंच पर डी-लिस्टिंग की मांग के बाद छत्तीसगढ़ में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. अन्य धर्म अपना चुके लोगों को एसटी सूची से बाहर करने की मांग की जा रही है. इस बहस में एक और समर्थन तो दूसरी तरफ खुलकर विरोध भी किया जा रहा है. 

देर-सवेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी : नेताम
छत्तीसगढ़ से इस मांग का वनवासी सुरक्षा मंच के बैनर तले पूर्व मंत्री गणेशराम भगत और सांसद भोजराम नाग नेतृत्व कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम भी कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से वह नहीं जा पाए. उन्होंने डी-लिस्टिंग को लेकर कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर तैयारी की गई है और समाज की भावनाओं के अनुरूप यह मांग लगातार मजबूत हो रही है. देर-सबेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी. धर्मांतरण के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में कड़े कानून की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं. अरविन्द नेताम ने कहा कि यह एक संवेदनशील विषय है, जो धीरे-धीरे राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा.

डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध
जशपुर में डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध का माहौल है. पूर्व संसदीय सचिव यूडी मिंज और गीता उरांव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया. यूडी मिंज का कहना है कि डी-लिस्टिंग की मांग संविधान की भावना के विपरीत है और इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. धर्म परिवर्तन के बाद भी आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान खत्म नहीं होती है. जशपुर जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है और समाज की पहचान उसके सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी हुई है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस सरकार के दौरान रौतिया समेत अन्य समाजों को आदिवासी वर्ग में शामिल करने के लिए टीआरआई के माध्यम से प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था.

क्यो होती है डी-लिस्टिंग ?
आसान भाषा में डी-लिस्टिंग यानी लिस्ट से बाहर करना. आदिवासियों की इस मांग के सन्दर्भ में डीलिस्टिंग का मतलब, किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है.

क्या है संविधान का अनुच्छेद 342?  
केंद्र सरकार से आदिवासी नेता संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करने की मांग कर रहे हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 (article 342) राष्ट्रपति को राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद उस विशिष्ट राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जनजाति (एसटी) माने जाने वाली जनजातियों या आदिवासी समुदायों को अधिसूचित करने का अधिकार देता है.

MP के 16 शहरों में पारा 44°C के पार, खजुराहो सबसे गर्म; 28 मई से 3 दिन बारिश का अलर्ट

भोपाल 
मध्यप्रदेश में नौतपा की शुरुआत भले ही आंधी और बूंदाबांदी के साथ हुई हो, लेकिन गर्मी का सितम कम नहीं हुआ। प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 28 मई से अगले तीन दिन तक कई जिलों में प्री-मानसून एक्टिविटी तेज हो सकती है। तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।  

एमपी में नौतपा के शुरुआती 2 दिन आंधी-बारिश का दौर रहा। वहीं, 28 मई से लगातार 3 दिन तक प्रदेश के अधिकांश हिस्से में पानी गिरने का अलर्ट है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो यह प्री-मानसून की दस्तक है। 10 से 16 जून के बाद प्रदेश में मानसून एंट्री कर सकता है। 

बुधवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में तीव्र लू का रेड अलर्ट है। टीकमगढ़ में रात में पारा बढ़ा हुआ रहेगा। वहीं, ग्वालियर, जबलपुर में तीव्र लू का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में भी लू चल सकती है।

खजुराहो और नौगांव बने हीट सेंटर
मंगलवार को छतरपुर का खजुराहो प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नौगांव में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। दतिया में 45.2 डिग्री, दमोह, सतना और टीकमगढ़ में 45 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। रीवा 44.8 डिग्री और राजगढ़ 44.6 डिग्री के साथ भीषण गर्मी की चपेट में रहे। ग्वालियर, श्योपुर, गुना, नरसिंहपुर, सागर, मंडला, मुरैना और रायसेन समेत कई शहरों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास पहुंच गया। बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहां तापमान 44.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 43.2 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.2 डिग्री तापमान रहा।

नौतपा में पहली बार नहीं बदला मौसम
भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश या बूंदाबांदी का सिलसिला नया नहीं है। पिछले 14 साल में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि 2 बार हल्की बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी शुरुआती दिनों में मौसम ने करवट ली है। हालांकि 2018 और 2019 जैसे साल में नौतपा के दौरान रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी थी और औसत तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया था।

कई जिलों में लू और तीव्र लू का अलर्ट
रेड अलर्ट: निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा।

ऑरेंज अलर्ट: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, सीधी, सिंगरौली, मंडला, बालाघाट समेत 19 जिले।

येलो अलर्ट: भोपाल, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, देवास, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर सहित 22 जिले।

इधर, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा और नर्मदापुरम जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह
मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलें, पर्याप्त पानी पीते रहें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों को खास सतर्क रहने को कहा गया है।

 

बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, SIR को बताया वैध

नई दिल्ली

मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास SIR का अधिकार है. एसआईआर पर दायर यायिकाओं से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने के भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि ECI ने SIR का प्रयोग करके अपनी वैधानिक शक्तियों के बाहर जाकर कार्य किया है. इसे ‘अल्ट्रा वायर्स’ भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कार्य-प्रणाली उस सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है जो आमतौर पर अपनाई जाती है। 

SIR पर सीजेआई ने क्या कुछ कहा?
SIR पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पक्षों की अलग-अलग दलीलों पर गौर करने के बाद, और घटनाओं के क्रम को देखने के बाद, पार्टियों की ओर से पेश की गई दलीलों और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री को देखने के बाद, हमारा मानना ​​है कि इन मुद्दों का एनालिसिस करने की ज़रूरत है. सीजेआई ने तीन सवालों के जरिए अपनी बात रखीं। 

SIR पर सीजेआई के तीन सवाल
    क्या भारत के इलेक्शन कमीशन के पास SIR जैसी कार्रवाई करने का अधिकार है?
    क्या SIR के तहत जांच किसी जायज़ मकसद पर आधारित है और अगर ऐसा है, तो क्या इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाए गए उपाय, हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के हिसाब से सही हैं?
    क्या SIR के तहत जांच करने में इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाया गया तरीका रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 के नियमों के खिलाफ़ है या उनका उल्लंघन करता है?

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है, तो यह भी देखना होगा कि उसकी प्रक्रिया क्या होगी। हालांकि, केवल प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर पूरे एसआईआर को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। पीठ ने यह भी कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या इस समय एसआईआर कराने की कोई वैध आवश्यकता है। अदालत की राय में एसआईआर के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईआर बिहार में चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व से ध्यान नहीं भटकाता। उन्होंने मतदाताओं पर खुद को साबित करने का बोझ डालने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रहने लगा है, तब भी वह पुरानी एसआईआर प्रक्रिया से बाहर नहीं हो जाता। उसका या उसके परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में मौजूद होगा।

अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि एसआईआर का उद्देश्य लोगों को मतदाता सूची से बाहर करना था। अगर कोई दस्तावेज सही नहीं पाया जाता है, तो चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इनकार कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग नागरिकता तय कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए क्या-क्या टिप्पणी की, उन्हें बिंदुवार जानते हैं-

1. चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची तय करने का अधिकार है. अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून के खिलाफ नहीं है. इसलिए SIR पूरी तरह वैध है और इसे प्रोसेस करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है. आयोग इसकी शक्ति रखता है.

2. कोई प्रक्रिया थोड़ी अलग हो तो अवैध नहीं हो जाती है- सुप्रीम कोर्ट
बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने कहा, ‘यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है.”

सुप्रीम कोर्ट की खास टिप्पणी-
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR प्रक्रिया को केवल इसलिए ‘अल्ट्रा वायर्स’ (अवैध) करार देकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रोसेस से अलग है.

3. वोटर लिस्ट से नाम हटना, नागरिकता जाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि किसी की नागरिकता खत्म हो गई. यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना था कि चुनाव आयोग का SIR अभियान ‘पिछले दरवाजे से नागरिकता जांच’ जैसा है.

4. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता के सवाल को सिर्फ इस सीमित दायरे में देख सकता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या हटाया जाए. अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहा. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है.

5.  SIR ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ और संबंधित नियमों के विपरीत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR कानूनी रूप से मान्य और उचित है इसलिए यह ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RP Act) का उल्लंघन भी नहीं करता है.

पीठ ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इतने विस्तृत कार्य को देखते हुए चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, वह संदिग्ध लोगों के मामलों को केंद्र सरकार को भेज सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव आयोग जिन लोगों की नागरिकता पर संदेह जताता है, उनकी जानकारी 4 सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकरण को दे। सक्षम प्राधिकरण अगले चुनाव से पहले तक उनके बारे में निर्णय ले।

इस मामले में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, पीयूसीएल समेत कई संगठनों और विपक्षी नेताओं ने याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं में मनोज झा, महुआ मोइत्रा, के. सी. वेणुगोपाल, पप्पू यादव और राजद सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हैं।

प्रक्रिया को अमान्य नहीं ठहराया जा सकताः सुप्रीम कोर्ट
SC ने आगे कहा कि जब कानून खुद ही किसी भी समय, दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर और उस तरीके से, जिसे चुनाव आयोग उचित समझे, एक विशेष संशोधन की अनुमति देता है तो इस विवादित प्रक्रिया को केवल इसलिए अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि यह नियमित संशोधन के लिए तय की गई सामान्य प्रक्रियाओं के हर पहलू के अनुरूप नहीं है।  

SC ने कहा कि हमारी सुविचारित राय में, यह विवादित SIR, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act) और उसके नियमों की जगह नहीं लेता है. बल्कि, यह धारा 21(3) द्वारा निर्धारित सटीक कानूनी सीमाओं के भीतर, अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश में नई जान डालता है। 

छत्तीसगढ़ में निवेश को मिलेगा बढ़ावा, भूमि उपयोग और भवन अनुमति प्रणाली होगी पूरी तरह डिजिटल

रायपुर.

भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों का दायरा अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. अब केंद्र सरकार का फोकस शहरी नियोजन (Urban Planning), भूमि उपयोग (Land Use) और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर है.

इसी दिशा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को महत्वपूर्ण सुधार लागू करने की सिफारिश की गई है. इन सुधारों का उद्देश्य शहरों को अधिक लचीला, निवेश-तैयार और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियां और आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल औद्योगिक नीति या कर छूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोई राज्य निवेशकों को कितनी तेज, पारदर्शी और सरल स्वीकृति प्रणाली उपलब्ध कराता है. इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य के निवेश वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

“जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर
कैबिनेट सचिवालय ने राज्यों को “डिमांड-ड्रिवन भूमि उपयोग प्रणाली” (Demand-Driven Land Use System) अपनाने की सलाह दी है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” अर्थात “जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमति प्राप्त है” के सिद्धांत पर आधारित है. इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि अन्य सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी. इस व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल और लंबी प्रक्रियाएं कम होंगी तथा निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी. त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. त्रिपुरा ने वर्ष 2025 में “Negative List of Industries” लागू कर इस मॉडल को व्यवहार में उतार दिया है.

Flexible Zoning और Mixed Land Use को मिल रहा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन और निर्माण स्वीकृति प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा “Flexible Zoning Framework” को बढ़ावा देते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) को प्रोत्साहित किया जा रहा है. संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन एवं ब्लू श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड एवं ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा. उद्योगों का वर्गीकरण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी गई है. इसके लिए अधिकतम FAR 2.0 तथा 70 प्रतिशत भू-आच्छादन की अनुमति होगी. यह व्यवस्था “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने के साथ उद्योग आधारित किफायती आवास परियोजनाओं को गति देगी. इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध हो सकेंगे, परिवहन लागत कम होगी तथा शहरों में अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी.

ऑनलाइन सेवाओं और Deemed Approval से निवेशकों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU – Change of Land Use) प्रक्रिया को भी सरल और डिजिटाइज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों तथा उनकी बाहरी सीमाओं से लगे निर्धारित क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त की गई है. इससे भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुमोदन स्तरों का युक्तिकरण होगा और निवेशकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो प्रणाली, सभी NOC को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने तथा निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति न मिलने पर “Deemed Approval” जैसे प्रावधानों की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना होगी आसान
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में भी युक्तिकरण किया है. संशोधित नियमों के अनुसार 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन एवं व्हाइट श्रेणी के MSME उद्योगों के लिए न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर तथा 0.1 से 0.25 हेक्टेयर तक के उद्योगों के लिए 9 मीटर निर्धारित की गई है. इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा औद्योगिक क्लस्टर विकास को गति मिलेगी. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

Third Party Inspection और Self Certification से घटेगा समय
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण स्वीकृतियों में देरी को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने निरीक्षण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 96 एवं 98 में संशोधन कर प्लींथ सर्टिफिकेट, Completion Certificate और Occupancy Certificate जारी करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है. नए प्रावधानों के तहत निरीक्षण 4 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी. निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा. इसके साथ ही तृतीय पक्ष (Third Party) एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त निरीक्षण तथा आर्किटेक्ट आधारित Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है. इससे निर्माण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, भ्रष्टाचार और प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी तथा उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को गति मिलेगी.

ALBPMS सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
राज्य सरकार ने भवन अनुमति प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब ऑनलाइन आवेदन, एकीकृत भुगतान प्रणाली, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR द्वारा स्वचालित भवन परीक्षण, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्णता की ई-सूचना तथा डिजिटल Occupancy एवं Completion Certificate जारी करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और निवेशकों को तेज एवं सरल सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही विभागीय समन्वय बेहतर होगा तथा नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

छत्तीसगढ़ को मिल सकते हैं अनेक दीर्घकालिक लाभ

  • निवेश, रोजगार, अधोसंरचना और शहरी विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
  • विशेषज्ञों के अनुसार इन सुधारों के लागू होने से छत्तीसगढ़ को अनेक दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं.
  • उद्योग स्थापना और परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया तेज होगी.
  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और निजी निवेश आकर्षित होगा.
  • औद्योगिक एवं शहरी अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी.
  • MSME और स्टार्टअप इकाइयों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी.
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
  • नियोजित शहरीकरण और आधुनिक टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा.
  • डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में निवेशक केवल प्रोत्साहनों को नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की गति, पारदर्शिता और सरलता को भी प्राथमिकता देंगे. ऐसे में शहरी नियोजन और निर्माण अनुमति प्रणाली में सुधार छत्तीसगढ़ को निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकते हैं. राज्य में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक और शहरी विस्तार को देखते हुए ये सुधार भविष्य की आवश्यकता बन चुके हैं. समय रहते इन सुधारों को लागू कर छत्तीसगढ़ आधुनिक, निवेश-अनुकूल और तेज विकास वाले शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है.

भीषण गर्मी का असर, सनबर्न के मरीज बढ़े; त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें

जगदलपुर.

बस्तर में बढ़ती गर्मी अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की त्वचा और सेहत पर असर दिखाने लगी है. 40 डिग्री के करीब पहुंचते पारे ने सनबर्न और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ा दी है. मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक हर 100 मरीजों में 10 से 15 मरीज लू और गर्मी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं. सीधी धूप में निकलने वाले लोगों की त्वचा लाल और सूखी पड़ रही है. पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के असर से त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें बढ़ रही हैं. मौसम में बादल छाने के बावजूद उमस और तपिश से राहत नहीं मिल रही. बच्चों और बुजुर्गों पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.

अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से पहले पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है. साथ ही पानी में नमक और नींबू मिलाकर पीने और सूती कपड़े पहनने को कहा गया है. बस्तर में अब गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती नजर आ रही है.

MP के 2 IPS अधिकारियों को केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी, अनुभव का मिला बड़ा इनाम

रायपुर 
 प्रदेश के 2 IPS अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया है। नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी सौगात मिली है। इन दोनों अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल किया गया है जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी जिम्मेवारी
छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को यह अहम जिम्मेदारी मानी जा रही है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है।  2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण के केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल होने को एक बड़ा मुकाम माना जा रहा है।

आपको बता दें कि आईपीएस नीतू कमल मौजूदा समय में CBI  में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि डी श्रवण राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  दोनों अधिकारियों के अनुभव को देखते हुए केंद्र ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

गृह मंत्रालय की ओर से  जारी सूची में देश से वर्ष 2001 से 2008 बैच तक के 67 आईपीएस अधिकारियों को आईजी और डीआईजी स्तर के पदों के लिए इंपैनल किया गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को ये सौगात मिली है जो एक अहम बात मानी जा रही है।

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