₹4.99 लाख की इस कार ने Baleno, Swift और i20 को छोड़ा पीछे, 33Km माइलेज के दम पर बनी नंबर-1

मुंबई 

भारतीय मार्केट में हैचबैक कारों का जलवा हमेशा की तरह बरकरार है। अगर बीते महीने यानी अप्रैल, 2026 में हुई इस सेगमेंट की बिक्री की बात करें तो मारुति सुजुकी वैगनआर (Maruti Suzuki WagonR) ने एक बार फिर नंबर-1 की पोजीशन हासिल कर ली है। मारुति वैगनआर को बीते महीने कुल 18,648 नए ग्राहक मिले। इस दौरान सालाना आधार पर वैगनआर की बिक्री में 39.03 पर्सेंट की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। जबकि ठीक एक साल पहले यानी अप्रैल, 2025 में यह आंकड़ा 13,413 यूनिट्स था। आइए जानते हैं देश की 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक कारों की बिक्री के बारे में विस्तार से।

दूसरे नंबर पर रही बलेनो
बिक्री की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मारुति सुजुकी बलेनो रही। मारुति बलेनो ने इस दौरान 38.89 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 18,306 यूनिट कारों की बिक्री की है। जबकि तीसरे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट रही। मारुति स्विफ्ट ने इस दौरान सालाना आधार पर 22.18 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ कुल 17,829 यूनिट कारों की बिक्री की।

चौथे नंबर पर रही मारुति ऑल्टो
दूसरी ओर बिक्री की इस लिस्ट में चौथे नंबर पर मारुति सुजुकी ऑल्टो रही है। मारुति ऑल्टो ने इस दौरान 93.65 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 10,856 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि पांचवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में हुंडई i20 रही। हुंडई i20 ने इस दौरान 59.55 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,624 यूनिट कारों की बिक्री की है।

टाटा टियागो को लगा झटका
बिक्री की इस लिस्ट में छठे नंबर पर टाटा टियागो रही। टाटा टियागो ने इस दौरान 33.70 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ 5,488 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि सातवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति एस-प्रेसो रही। मारुति एस-प्रेसो ने इस दौरान 617.63 पर्सेंट की रिकॉर्ड तोड़ सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,210 यूनिट कारों की बिक्री की है।

आखिरी पोजिशन पर रही अल्ट्रोज
बिक्री की इस लिस्ट में आठवें नंबर पर हुंडई i10 नियोस रही। हुंडई i10 नियोस ने 0.29 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 4,149 यूनिट कारों की बिक्री की। वहीं, नौवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टोयोटा ग्लैंजा रही। ग्लैंजा ने इस दौरान 18.68 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ कुल 3,360 यूनिट कारों की बिक्री की है। इसके अलावा, दसवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा अल्ट्रोज रही। अल्ट्रोज ने इस दौरान 19.06 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 2,586 यूनिट कारों की बिक्री दर्ज की है।

इतनी है कार की कीमत
मारुति सुजुकी वैगनआर में 1.0-लीटर K-सीरीज इंजन और दूसरा 1.2-लीटर इंजन दिया गया है। यह कार 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है। माइलेज के लिए मशहूर यह कार पेट्रोल में लगभग 23.56 से 25.19 किमी/लीटर और CNG वैरिएंट में 33.47 किमी/किग्रा तक का जबरदस्त औसत देती है। भारतीय मार्केट में इसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग 4.99 लाख से शुरू होकर 7.45 लाख रुपये तक जाती है।

तमिलनाडु में CM विजय का बड़ा गेमप्लान, अपने दम पर बहुमत हासिल करने की तैयारी?

चेन्नई

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार बनाई जरूर है, लेकिन उनका इरादा कुछ और ही लगता है. विजय जल्दी से जल्दी अपने बूते सरकार चलाना चाहते हैं. और यह गठबंधन साथियों, खास तौर पर कांग्रेस, के लिए काफी चिंता वाली बात हो सकती है। 

एक तरफ विजय लोक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं, और ऐन उसी वक्त विरोधी खेमे में बगैर बुलडोजर के ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई चल रही होती है. विजय के सलाहकारों की टीम देश भर के नेताओं से सीखने और उस पर अमल करने की रणनीति पर काम कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने सहकारी बैंकों से लिए गए किसानों के 50,000 रुपये तक के फसल लोन माफ कर दिए हैं. सरकारी ऐलान के अनुसार, जिन बड़े किसानों ने सहकारी बैंकों से फसल लोन लिया है, उन्हें भी 5 हजार रुपये की राहत दिए जाने की बात है। 

राज्यसभा में डेब्यू, और उपचुनावों की तैयारी
तमिलनाडु में 18 जून को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होना है. तमिलनाडु की मेलम विधानसभा सीट से चुन लिए जाने के बाद सीवी शनमुगम ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मुख्यमंत्री विजय उसी सीट के जरिए टीवीके की राज्यसभा में एंट्री करना चाहते हैं। 

चर्चा है कि टीवीके में रिटायर्ड आईएएस अफसर यू सगायम को राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा रहा है. तमिलनाडु में यू सगायम ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए मशहूर रहे हैं. उनकी ईमानदारी के कई किस्से सुनाए जाते हैं। 

खास बात यह है कि यू सगायम ऐसे अफसर हैं जिनका 28 साल की सेवा में 25 बार ट्रांसफर हुआ. यू सगायम को राज्यसभा भेज कर मुख्यमंत्री थलपति विजय तमिलनाडु की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वो क्या करना चाहते हैं, और ऐसा करने से उनके पहले की डीएमके और एआईएडीएमके सरकारें अपने आप निशाने पर आ जाती हैं। 

राज्यसभा के साथ ही टीवीके नेतृत्व की नजर तमिलनाडु की चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं. एक सीट तो मुख्यमंत्री विजय ने ही खाली की है, जबकि तीन सीटें टीवीके में शामिल होने वाले विधायकों के AIADMK छोड़ने से खाली हुई हैं। 

AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया. मरगथम कुमारवेल मदुरंतकम सीट से, पी सत्यभामा धारापुरम सीट से और एस जयकुमार पेरुनदुरई सीट से AIADMK के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. धारापुरम और पेरुनदुरई को AIADMK का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जबकि मदुरंतकम चेन्नई के पास महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। 

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब सीवी शनमुगम के नेतृत्व में टीवीके सरकार को समर्थन देने वाले 25 विधायकों में से कुछ के कैबिनेट में शामिल होने पर बातचीत चल रही थी. लेकिन, वाम दलों, वीसीके और टीवीके के ही कुछ नेताओं के दबाव में अचानक यह प्लान ड्रॉप कर दिया गया। 

इस्तीफा देने वाले विधायक अब टीवीके के चुनाव निशान सीटी पर फिर से मैदान में उतरेंगे. उपचुनाव जीतने के बाद वे टीवीके के विधायक बन जाएंगे, और उसके बाद किसी भी गठबंधन साथी को कोई आपत्ति नहीं होगी – खास बात यह है कि सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। 

कांग्रेस और टीवीके का साथ कब तक
तीन विधायकों का इस्तीफा तो ट्रेलर लगता है. जननायगन के समानांतर विजय की सियासी पिक्चर अभी बाकी है. टीवीके के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कम से कम 7 से 8 विधायक अभी आने वाले दिनों में ऐसे ही इस्तीफा दे सकते हैं। 

टीवीके के पास फिलहाल 107 विधायक हैं. टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं, जिनमें मुख्यमंत्री विजय की जीती हुई दो सीटें शामिल थीं. विजय ने अपनी एक सीट खाली कर दी थी. अब अगर उपचुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल होती है, तो टीवीके के पास 111 सीटें हो जाएंगी. तमिलनाडु में बहुमत का आंकड़ा 118 है. टीवीके सरकार को कांग्रेस की पांच विधायकों का समर्थन हासिल है। 

अगर उपचुनाव घोषित होने से पहले और विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो जाते हैं, तो टीवीके को सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी. सबसे ज्यादा 5 सीटों वाली कांग्रेस से छुटकारा पाना आसान हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके के सीनियर नेताओं का मानना है कि विजय जैसे करिश्माई नेता के इर्द-गिर्द बनी पहली पीढ़ी की राजनीतिक पार्टी चुनाव के बाद बने सहयोगी दलों पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रह सकती। 

एक सीनियर टीवीके नेता का कहना है, अगर ये सीटें साथ में जाती हैं, तो बात बहुत मायने रखती है. जब लोगों को लगता है कि सरकार खुद को स्थिर कर रही है, तो जनता के बीच माहौल बदलने लगता है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की रणनीति जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला से काफी हद तक मिलती जुलती लगती है. हालांकि, दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरण में थोड़ा फर्क भी है. उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. विजय ने कांग्रेस के साथ चुनाव बाद गठबंधन किया है। 

कांग्रेस ने चुनाव से पहले तो उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया था, लेकिन सरकार में शामिल नहीं हुई. उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. धीरे धीरे गठबंधन रस्मअदायगी भर रह गया. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के 6 विधायक हैं. कहने को तो कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी की वही स्थिति है जैसी तमिलनाडु की पिछली डीएमके सरकार में थी। 

ऐसा ही एक उदाहरण दिल्ली में मिलता है. 2013 में अरविंद केजरीवाल भी बहुमत के आंकड़े से पिछड़ गए थे. पहली बार सरकार बनाने के लिए केजरीवाल ने कांग्रेस का सपोर्ट लिया था, लेकिन अपने बूते सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना पड़ा, विजय तमिलनाडु में ये सब पहले ही कर लेना चाहते हैं। 

क्या टीवीके नेता थलपति विजय का ताजा एक्शन बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसा है?

देखा जाए तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके के राजनीतिक सपोर्ट लेने की शुरुआत गठबंधन की कोशिश के रूप में हुई थी. जिसमें AIADMK के बागियों का भी समर्थन मिला था. लेकिन, अब रणनीतिक बदलाव साफ साफ नजर आने लगा है. अब जो कुछ हो रहा है, वह कुछ हद तक राजनीतिक अधिग्रहण जैसा माना जा सकता है. बीते वक्त में कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बीजेपी को ऐसे तौर तरीके अपनाते देखा जा चुका है, जिसे ‘ऑपरेशन लोटस’ के रूप में याद किया जाता है।

 रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ताधारी टीवीके जिस तरीके से कदम बढ़ा रही है, तमिलनाडु की राजनीति के कई नेता निजी तौर पर इसे कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मान कर चल रहे हैं, और टीवीके का मकसद पूरी तरह साफ है – अब एक ही मिशन है, सहयोगी दलों पर निर्भरता कम करने के साथ ही 234 सदस्यों वाली विधानसभा में सीधे 118 के महत्वपूर्ण आंकड़े तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना। 

‘लोटस’ नहीं, ऑपरेशन ‘एल’
टीवीके की रणनीति में बीजेपी की राजनीति की जो झलक देखने को मिल रही है, उसे तमिलनाडु की राजनीति में अब एक नया नाम भी मिल चुका है – ऑपरेशन एल

यह नाम बताया है AIADMK नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के करीब माने जाने वाले एक नेता ने. जब उनसे पूछा गया कि ‘एल’ का क्या मतलब है, तो उन्होंने लोटस नहीं बल्कि कई और नाम बता डाले. इंडियन एक्सप्रेस से हंसते हुए वो कहते हैं, लॉटरी, या लीमा या लीव… जो चाहो समझ लो। 

AIADMK नेता का यह कटाक्ष टीवीके में दबदबा रखने वाले नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता है. एल से लॉटरी कहने का उनका आशय टीवीके के भीतर काफी प्रभावशाली माने जाने वाले अर्जुन से है, जो लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के दामाद हैं. लीमा नाम AIADMK विधायक लीमा रोज मार्टिन की तरफ इशारा है, जो मार्टिन की पत्नी हैं. लीव का मतलब विधायकों के AIADMK छोड़ने से भी जोड़ा जा सकता है, और वैसे भी AIADMK का चुनाव निशान ‘टू लीव्स’ यानी दो पत्तियां हैं – और पार्टी के टूटने को दो में से एक पत्ती के अलग होने की तरफ इशारा है। 

 

 

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन

मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ

भोपाल 

प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार का रेशम उत्पादित हो रहा है। नर्मदापुरम प्रदेश का पहला जिला है जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। जिले के रेशमी वस्त्र अब फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी बिक रहे हैं।

मालाखेड़ी बना रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र

जिले का मुख्य रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित है। यहाँ “फार्म से फेब्रिक” तक पूरी प्रक्रिया होती है।

    वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ।

    32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी दी गई, जबकि 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये मिले।

    मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी संचालित है। यहाँ से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को 51.99 लाख रुपये की आय हुई।

    मालाखेड़ी में तैयार प्राकृत ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी बिक रहे हैं।

पचमढ़ी और मढ़ई में विस्तार

    पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम का पौधरोपण कर 500 नग ककून उत्पादन किया जा रहा है।

    मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर्यटक रेशम पालन की प्रक्रिया देखने आते हैं।

जिले में 28 केंद्र सक्रिय

नर्मदापुरम में कुल 16 मलबरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनसे हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

2025 में जिले में मलबरी रेशम ककून उत्पादन 15,426.5 किलोग्राम रहा, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।

रेशम से दवाइयाँ भी बन रहीं

मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम के धागे से दवाइयाँ और मेडिकल उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध कर यहाँ पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज बनाए जा रहे हैं।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर

रेशम केंद्रों के फिर से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जिससे लखपति दीदियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। नर्मदापुरम की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

 

भोपाल की सड़कों पर हाई-टेक ड्रोन कैमरों की नजर, लाइव फीड से कट रहे चालान

भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप पर नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए ड्रोन-माउंटेड कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस हाई-टेक मुहिम की शुरुआत सोमवार से औपचारिक रूप से कर दी गई है। सबसे ज्यादा फोकस एमपी नगर और वीआईपी रोड जैसे भारी ट्रैफिक वाले और संकरे रास्तों पर किया जा रहा है।

इन इलाकों में भी बढ़ाई गई चौकसी
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, शहर की करीब एक-तिहाई सड़कें केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण जाम रहती हैं। इसी को देखते हुए ड्रोन सर्विलांस का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब एमपी नगर और वीआईपी रोड के अलावा बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ हिस्सों पर भी ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पहले इन ड्रोन का इस्तेमाल केवल दुर्घटना स्थलों के दस्तावेज़ीकरण के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका उपयोग सीधे नियम तोड़ने वालों की पहचान करने और उनके वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए ई-चालान जेनरेट करने के लिए हो रहा है।

कंट्रोल रूम से हो रही है लाइव मॉनिटरिंग
अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक महीने तक इसका कड़ा ट्रायल किया गया था। फिलहाल विभाग के पास दो हाई-टेक ड्रोन हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा रहा है। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है। इससे न सिर्फ नो-पार्किंग वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। साथ ही, ये ड्रोन क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को पहचानने में भी मदद करेंगे।

तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश का बड़ा फैसला, भारत नहीं तो चीन से लेगा फंडिंग; बीजिंग जाएंगे तारिक रहमान

ढाका 

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान जल्द ही अपने पहले विदेश दौरे पर चीन जा सकते हैं। यूं तो तारिक रहमान को शपथ लेने के बाद भारत और भूटान जैसे दूसरे पड़ोसी देशों से भी न्योता मिला था, लेकिन बांग्लादेश के पीएम चीन को अपनी पहली प्राथमिकता बना रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश भारत से पहले चीन को रख कर आखिर हासिल क्या करना चाहता है? इस सवाल का जवाब ढूंढना इतना मुश्किल नहीं है। दरअसल बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी के लिए बेकरार है। वह तीस्ता प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए चीन से गुहार भी लगा चुका है। ऐसे में तारिक रहमान के दौरे का मुख्य एजेंडा भी यही होगा।

गौरतलब है कि बांग्लादेश ने इस महीने की शुरुआत में ही तीस्ता नदी पुनरुद्धार योजना के लिए चीन की आधिकारिक तौर पर मदद मांगी थी। यही नहीं, इसके दो दिन पहले ही बांग्लादेश की तरफ से यह बयान आया था कि सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश जल्द ही चीन का रुख करेगा। और हुआ भी कुछ ऐसा ही।

फंड देने के लिए तैयार चीन
अब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री खुद चीन जा रहे हैं। इस यात्रा का असल मकसद तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन से अरबों डॉलर का फंड हासिल करना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पुष्टि की है कि पीएम रहमान जल्द ही चीन का दौरा करेंगे और चीन का ‘एक्सिम बैंक’ तीस्ता नदी प्रबंधन और बहाली परियोजना को फंड देने के लिए तैयार है। ढाका में मौजूद चीनी राजदूत याओ वेन ने भी कहा है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।

तीस्ता नदी को लेकर क्या है विवाद?
पिछले 15 सालों से भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का समझौता लटका हुआ है। दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर का हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार इसका विरोध करती रही। इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ गंगा और कुशियारा पर ही समझौता हुआ है। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है।

भारत के लिए क्यों खतरे की घंटी है चीन की फंडिंग?
इसके लिए थोड़ा भूगोल समझते हैं। तीस्ता नदी भारत में सिक्किम से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में घुसती है। इसके बाद वह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश इस नदी के पानी के रखरखाव और सूखे से निपटने के लिए एक मेगा-प्रोजेक्ट बनाना चाहता है, जिसमें चीन निवेश करने को बेताब है। इस प्रोजेक्ट में चीनी एंट्री से भारत को बड़ा खतरा है। दरअसल बांग्लादेश का तीस्ता प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थित ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के बेहद करीब है। ऐसे में युद्ध या तनाव की स्थिति में चीन इस कॉरिडोर के पास बैठकर भारत की लाइफलाइन को काटने की कोशिश कर सकता है।

कलेक्टर्स आबकारी नीति का कड़ाई से कराएं पालन: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

कलेक्टर्स आबकारी नीति का कड़ाई से कराएं पालन: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

नियमों का उल्लंघन करने वाली मदिरा दुकानों पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जिलों के कलेक्टर्स को आबकारी व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शासन ने वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा निर्देश दिए हैं कि आबकारी विभाग अब अवैध रूप से संचालित शॉप बार, समय सीमा के उल्लंघन और ओवर रेटिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य व्यापी विशेष अभियान चलाया जाए। नियमों की अनदेखी करने वाले मदिरा ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

 उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश में राजपत्र में प्रकाशित नियमों के अनुसार आबकारी नीति का कड़ाई से पालन कराया जाएं। उन्होंने आबकारी विभाग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने सभी जिला अधिकारियों को बिंदुवार दिशा-निर्देश जारी कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार के इस कदम से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर शिकंजा कसेगा।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि नीतिगत प्रावधानों में प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह ‘ऑफ श्रेणी’ का घोषित किया गया है, जिसके तहत दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने नियमों के उल्लंघन करने की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन कर औचक निरीक्षण के बाद अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद करने के निर्देश दिये।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि इसके साथ ही, मदिरा दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और बंद होने के तय वक्त के बाद भी देर रात तक मदिरा की बिक्री किए जाने के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें गश्त करेंगी। वहीं, उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने यानी ओवर रेटिंग की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने निर्देशित किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदिरा की वास्तविक दरों के सत्यापन के लिये दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएं। कोई भी ठेकेदार यदि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ राजपत्र के प्रावधानों के तहत भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएं।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा है कि प्रदेश के पवित्र घोषित किए गए नगरों और क्षेत्रों में मदिरा की अवैध बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गये हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूर्व से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब वहां किसी भी प्रकार के शराब के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

 

MP में भाजपा का बड़ा मिशन, हर जिले में 500 ओपिनियन मेकर्स तक पहुंचेंगे सांसद-विधायक

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 26 मई को 12 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर मध्य प्रदेश भाजपा ’12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के’ अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष जनसंपर्क होगा, जिसमें प्रत्येक जिले में समाज के कम से कम 500 प्रबुद्ध व्यक्तियों (ओपिनियन मेकर्स) से सीधा संपर्क साधा जाएगा। सांसद अपनी लोकसभा की हर विधानसभा में और विधायक अपने क्षेत्र के हर मंडल में एक-एक दिन का समय बिताएंगे। इस दौरान वे मोदी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच रखेंगे।

पदाधिकारियों को भी करनी होगी मुलाकात
विधायकों, सांसदों से लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों को भी ओपिनियन मेकर्स से मुलाकात करनी होगी। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक मंडल में सघन पौधरोपण किया जाएगा।

स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। सांसद और विधायक अपने क्षेत्रों में ‘प्रगति पथ यात्रा’ और ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ के जरिए जनता से जुड़ेंगे। स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरे की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर होगा समापन
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ अभियान का समापन होगा। इस दौरान पार्टी द्वारा प्रत्येक मंडल में स्थानीय योग अभ्यास समूहों के सहयोग से योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। जहां संभव होगा, वहां 1 सप्ताह का योग प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का समन्वय नंदिता पाठक, राघवेंद्र शर्मा और मानसिंह यादव करेंगे।

उपलब्धियों की प्रदर्शनी एवं सभागार बैठकें
15 जून से 18 जून के बीच प्रत्येक जिले में मोदी सरकार की उपलब्धियों पर आधारित 3 दिवसीय प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान ऑन-द-स्पॉट चित्रकला प्रतियोगिता, वॉक्स पॉप वीडियो रिकॉर्डिंग और लाभार्थियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी होंगे। साथ ही जिलों में प्रबुद्धजन और व्यापारी वर्ग की व्यापक उपस्थिति वाली सभागार बैठकें आयोजित की जाएंगी।

प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं
19 जून से 20 जून तक किसानों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक जिले में दो स्थानों पर प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं में विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन और व्याख्यान दिए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी अर्चना सिंह और जयपाल सिंह चावड़ा की टोली को सौंपी गई है।

चौंकाने वाली स्टडी: हिमालय तक पहुंचा प्रदूषण, गंगा के मैदान में Pollution 20% बढ़ा

नई दिल्ली
 एक स्टडी में पाया गया है कि केवल एक दशक में PM प्रदूषण 20 फीसदी ये ज्यादा बढ़ गया है। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इतना ही नहीं, मैदानों से निकलने वाला प्रदूषण अब हिमालय तक भी पहुंच रहा है।

कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट ने यह स्टडी की है, जिसे ‘एटमॉस्फेरिक एनवायरनमेंट’ जर्नल में प्रकाशित करवाया गया है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि अभी तक देश में बायोमास जलाने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

अध्ययन से पता चला है कि थर्मल पावर प्लांट, बायोमास जलने और शहरी ठोस कचरा जलने से लगातार होने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण की स्थिति गंभीर होते जा रही है। यह गंगा के मैदान, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के 25 सालों के डेटा पर आधारित एक सैटेलाइट स्टडी है।

हिमालय तक कैसे पहुंच रहा प्रदूषण
स्टडी में बताया गया है कि मैदानों में हो उत्सर्जन हो रहा है, वह सीधे हिमालय में एरोसोल की मात्रा को प्रभावित कर रहा है। एरोसोल वातावरण में धूल, कालिख और रासायनिक बूंदों जैसे सूक्ष्म ठोस या तरल कणों के सस्पेंशन को कहते हैं।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली का प्रदूषण हिमालय की पश्चिमी और मध्य श्रेणियों तक पहुंच रहा है और बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदूषण पूर्वी हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे पता चलता है कि पहाड़ों की हवा में भी अब वायु प्रदूषण घुल चुका है।

चौंकाने वाले आंकड़े
हालांकि अध्ययन में ये पाया गया कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में पार्टिकुलेट मैटर के स्तरों में मापने योग्य सुधार देखने को मिले। लेकिन ये राज्य अभी भी अभी भी कार्बनयुक्त एयरोसोल के हॉटस्पॉट बने हुए हैं।

स्टडी से पता चला कि जो कार्बन प्रदूषण 2000–2009 के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तरी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में केंद्रित था, वह 2020–2024 तक पूरे पश्चिम बंगाल, बिहार, बांग्लादेश और असम, मेघालय और त्रिपुरा तक फैल गया।

अगर हिमालय न होता तो फिर क्या होता… 

अगर हिमालय न होता तो भारत कैसा होता? जवाब सीधा है कि उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश शीत रेगिस्तान होते। पंजाब और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति न होती और मध्य भारत में इतनी गर्मी होती कि वहां पर रहने लायक कुछ भी न होता। 

यूरेशिया टेक्टॉनिक प्लेट खिसकने से विशाल समुद्र टेथिस से हिमालय की उत्पत्ति हुई और भारत का वो भूगोल बना जिसमें आज एक अरब 33 करोड़ लोग रहते हैं।  इस विशाल टेथिस समुद्र का प्रतिनिधित्व अब केवल लेह से 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित पेंगोंग झील करती है। जो तीस प्रतिशत भारत क्षेत्र में है और बाकी का सत्तर फीसद चीन में। लाखों सालों की प्रक्रिया से जब हिमालय का निर्माण हुआ तो उससे तीन प्राकृतिक और भौगोलिक परिघटनायें हुई। जिससे भारत रहने योग्य बना। ये तीन परिघटनायें थीं-

1. मानसून बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न होता है और साउथ वेस्ट होते हुये हिमालय से टकराता है। बादल हिमालय से टकराकर लौटते हैं और जिससे उत्तरी भारत समेत राजस्थान तक जमकर बारिश होती है। इससे उत्तरी भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत को नई आक्सीजन मिलती है। जीवन खुशहाल रहता है।  इस बारिश से तमाम नदियां, जल धारायें, जंगल और भूजल रिचार्ज होते हैं। अगर हिमालय नहीं होता तो ये मानसून के बादल सीधे पश्चिमी चीन होते हुये मंगोलिया से रूस के साइबेरिया में दाखिल हो जाता। मतलब, भारत में जो जून 21 या 22 तारीख को मानसून आता है और सितंबर आखिरी तक रहता है। वो केवल भारत के ऊपर से गुजरते वक्त कुछ बारिश करता और आगे निकल जाता। जिससे मध्य भारत का भूजल रिचार्ज नहीं होता और हिमालय की नदियों में पानी कम रहता। मसलन, जिन इलाकों में नहरों के जरिये खरीफ की फसलें होती हैं। वहां कुछ नहीं होता। 

2. हर साल जनवरी और फरवरी माह में उत्तरी ध्रुव से साइबेरिया होते हुये बर्फीली हवायें मंगोलिया पहुंचती हैं और वहां से चीन के शिंझियांग और तिब्बत होते हुये भारत में दाखिल होती। जिससे साइबेरिया, मंगोलिया और चीन के शिनझिंगया, गिनगाई, गानसू और तिब्बत की तरह हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शीत मरूस्थल होते। लेकिन हिमालय होते हुये ये चीन से लौट जाती है। जिस कारण चीन का गोबी मरूस्थल का निर्माण हुआ और आज वो पर्यावरण के हिसाब से शून्य है। 

3. मानसून के अलावा पश्चमी, मध्य और उत्तर भारत में बारिश का एक मुख्य जरिया भू-मध्य सागर से उठने वाले पिश्चमी विक्षोभ का है। जो हर साल अपने साथ यूरोप के नीचे से भू-मध्य सागर से वाष्पीकरण कर बादल विकसित करता है और फिर ये बादल पाकिस्तान से होते हुये हिमालय से टकराते हैं। जिससे जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर को छोड़ (पोस्ट मानसून) भारत में बारिश होती है और हिमालय और इससे लगते कैचमेंट एरिया में बर्फबारी होती है। ग्लेशियर बनते हैं और फिर 12 महीने गंगा, यमुना, ब्रहमापुत्र सरीखी बड़ी नदियों में पानी रहता है। तापमान गर्मी से ठंडा हो जाता है। 

कुल मिलाकर हिमालय का हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। इसलिये इसे थर्ड पोल या तीसरा ध्रुव भी कहते हैं। एक प्रमाणिक तथ्य ये भी है कि हिमालय की अगर पूरी बर्फ भी पिघल जाये तो भी हिमालय से निकलने वाली कोई भी नदी नहीं सूखेगी। इसके पीछे मौसम विज्ञान केंद्र का शोध है। असल में, हिमालय के ग्लेशियर नदियों को 12 महीने  पानी नही देते। मसलन, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च में ग्लेश्यिर पूरी तरह से फ्रीज होते हैं। तापमान -20 डिग्री तक हो जाता है। तो ऐसे में फिर गंगा, यमुना, सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में पानी कहां से आता है? मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह बताते हैं कि ये पानी मानसून में विभिन्न जंगलों में स्टोर हुये पानी के जरिये नदियों तक पहुंचता है। उसी तरह से जैसे मध्य भारत में नर्मदा और गोदावरी में 12 महीने पानी रहता है और इन दोनों नदियों में  ग्लेशियर से पानी बिल्कुल भी नहीं आता। मैंने उनसे पूछा कि फिर अगर हिमालय की पूरी बर्फ पिघल जाये तो  क्या होगा? वो बताते हैं फिर होगा ये कि हिमालय क्षेत्र में जबरदस्त गर्मी पड़ेगी और यहां रहना मुश्किल होगा। इसलिये हिमालय को सही संरक्षण की जरूरत है। सबसे पहले इसे पॉलीथिन से बचाना होगा। क्योंकि ये ही एक ऐसा प्रदूषण है, जो हिमालय के लिये दीमक है।  इसके लिये जागरूक ही सबसे महत्पवूर्ण जरिया है। 

जल्दी-जल्दी भागो…, अवैध बांग्लादेशियों को लेकर CM शुभेंदु का तीखा बयान

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों को लेकर एक्शन मोड में आ गई हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा कि जल्दी-जल्दी भागो. हम इन्हें जेल में रखकर इन्हें खिलाना नहीं चाहते हैं. हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिए? हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने को कह दिया है। 

इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया था. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के निर्देश जारी किए थे। 

शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गई थी. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है। 

क्या है बंगाल की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति?
बंगाल में बीजेपी सरकार की नई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे हैं. उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है। 

उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे। 

बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है। 

HP के बाद Bharat Gas ने भी शुरू की पुरानी सुविधा, अब आसानी से मिलेगा LPG सिलेंडर

नई दिल्ली

 वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत गैस ने अपने ग्राहकों को अच्छी खबर दी है। एक बार फिर से कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी शुरू हो गई है। भारत गैस ने युद्ध के शुरू होने के बाद गैस की किल्लत के बीच यह सुविधा कई स्थानों पर बंद कर दी थी। खासगावं ग्रामीण इलाकों में। बता दें, इससे पहले एचपी ने भी एलपीजी सिलेंडर की बंद पड़ी होम डिलीवरी की सुविधा को फिर से शुरू कर दिया था।

क्यों बंद हो गई थी सुविधा?
युद्ध शुरू होने के बाद एक समय पर अचानक गैस की डिमांड में इजाफा हो गया था। लोग पैनिक बुकिंग करने लगे थे। जिसके बाद डीलर्स ने होम डिलीवर की सुविधा को कई इलाकों में बंद कर दिया था। लेकिन अब नियमों में हुई सख्ती के बाद एक बार फिर से LPG सिलेंडर की उन इलाकों में होम डिलीवरी शुरू हो गई है।

एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम 
सरकार ने कालाबाजारी को रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। अब बिना ओटीपी के एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलेगा। नए नियमों के अनुसार आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पहले LPG सिलेंडर की बुकिंग करनी होगी। उसके बाद आपके मोबाइल नंबर ओटीपी आएगा। इसके बाद आप उस डीलर्स के पास जाकर या फिर सिलेंडर वाली गाड़ी को ओटीपी दिखाएंगे। वो ओटीपी को वेरीफाई करेगा। उसके बाद ही नया LPG सिलेंडर मिल पाएगा। ध्यान रहे कि आपका गैस पासबुक आपके पास होना चाहिए।

नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो गांव में रहता है वो 45 दिनों के बाद ही नए सिलेंडर की बुकिंग कर पाएंगे। वहीं, शहरों में रहने वाले लोगों के लिए सरकार ने 25 दिन का कैप लगाया है।

LPG सिलेंडर के दाम स्थिर
पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 60 रुपये बढ़ाया गया था। वहीं, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 900 से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। जिसके बाद दाम 3000 रुपये के पार पहुंच गया है।

गैस की समस्या विकट? 
भारत जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलपीजी विदेशों से आयात करता था उसके लिए मौजूदा परिस्थितियां काफी कठिन है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने की वजह से एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। देश के सामने एलपीजी संकट खड़ा हो गया है। बता दें, भारत सरकार ने एलपीजी उत्पादन को घरेलू स्तर पर बढ़ाने का निर्देश दिया है।

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