’विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर में सुधार लाने योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचे’

रायपुर

’राज्यपाल  डेका ने की पीएम जनमन योजना की समीक्षा’

राज्यपाल  रमेन डेका ने आज लोक भवन में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन योजना) की समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर मे सुधार लाने योजनाओं का लाभ उन तक प्राथमिकता से पहुंचाना सुनिश्चित करें।
              
बैठक में पीएम जनमन योजना के तहत 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई। राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में प्राथमिकता तय कर तेजी से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 

’राज्यपाल  डेका ने की पीएम जनमन योजना की समीक्षा’          

राज्यपाल ने जनजातीय क्षेत्रों की सड़कों की खराब स्थिति पर भी नाराजगी जताई और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ सड़क निर्माण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण करें और यह जानें कि पीएम जनमन योजना के तहत उनके विभाग अंतर्गत सबसे बेहतर कार्य कहां हो रहे हैं। 
                
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन अभियान चलाने तथा लोगों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से जनजातीय समुदायों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर उनके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है।
                
राज्यपाल ने बताया कि जनजातीय बच्चों के नेत्र परीक्षण और मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए एम्स के साथ एमओयू किया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए राइस मिल एसोसिएशन, जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने और डीएमएफ निधि के उपयोग का सुझाव दिया। साथ ही बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करने और पेयजल समस्या के समाधान हेतु नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।
              
राज्यपाल ने बड़े किसानों के खेतों में डबरी निर्माण, फिश फार्मिंग और प्रधानमंत्री आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में वन क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग को सहकारिता के माध्यम से करने, आंगनबाड़ी भवन निर्माण में तेजी लाने तथा मोबाइल टावर स्थापित कर इंटरनेट सुविधा बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने निजी कंपनियों के सहयोग से दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातीय बाहुल्य गांवों को रोशन करने क लिए किए गए कार्याे की सराहना की।             

राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों क्षेत्रों के उन बच्चों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए जो स्कूल और विशेष रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति, आवश्यकताओं और सुविधाओं का आकलन कर उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाए।          

राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में उन कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाए जिनकी वर्तमान समय में अधिक मांग है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कौशल विकास प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को पीएम जनमन योजना के तहत प्राथमिकता सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों की जीवनशैली और आवश्यकताओं को समझने के लिए तीन माह के भीतर विस्तृत सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सभी विभागों और संबंधित संस्थाओं का सामूहिक योगदान आवश्यक है। जहां भी कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। राज्यपाल ने बैठक में की गई चर्चा पर कार्रवाई की रिपोर्ट अगली समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।        

बैठक के दौरान राज्यपाल को छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर आधारित वर्ष 2024-25 का प्रतिवेदन सौंपा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन  मनोज कुमार पिंगुआ, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास  सोनमणि बोरा, सहित अन्य विभागों के सचिव उपस्थित थे।

कवर्धा को मिली नई सौगात-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया “मित्र मिलन चौपाटी” का भव्य लोकार्पण

रायपुर

फुटकर व्यापारियों को मिला स्थायी व्यवसाय का ठिकाना, सुरक्षित हुआ रोजगार

कवर्धा शहरवासियों को एक बड़ी सौगात देते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने नगर के हृदय स्थल में नवनिर्मित “मित्र मिलन चौपाटी” का लोकार्पण किया। इस अत्याधुनिक चौपाटी के प्रारंभ होने से नागरिकों को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। यह स्थल खानपान के साथ-साथ परिवारों और मित्रों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए एक प्रमुख आकर्षक केंद्र बनेगा। चौपाटी परिसर में रंग-रोगन, आधुनिक सजावट, रंग-बिरंगी लाइटिंग, सुव्यवस्थित पार्किंग, शुद्ध पेयजल और सर्वसुविधायुक्त शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।

फुटकर व्यापारियों को मिला स्थायी व्यवसाय का ठिकाना, सुरक्षित हुआ रोजगार

गुमटी व्यवसायियों को मिला सम्मान और स्थायी ठिकाना
           
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मित्र मिलन चौपाटी शहर के परिवारों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य साबित होगी। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जो छोटे फुटकर व्यवसायी पहले सड़कों और चौक-चौराहों पर असुरक्षित ढंग से गुमटी लगाकर व्यवसाय करने को मजबूर थे, उन्हें अब एक स्थायी और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया गया है। इससे न केवल उनका स्वरोजगार सुरक्षित होगा, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

कवर्धा में प्रगति पर हो रह हैं ऐतिहासिक विकास कार्य
          
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कवर्धा शहर तेजी से आधुनिकता और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शहर में जारी विभिन्न परियोजनाओं का विवरण साझा किया। पूर्ण हो चुके प्रमुख कार्यो में वीर स्तंभ चौक, शिवाजी चौक का सौंदर्यीकरण कार्य प्रमुख हैं। भोरमदेव कॉरिडोर और मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी, भोजली तालाब पाथवे का चौड़ीकरण, हनुमंत वाटिका का निर्माण, ठाकुरदेव चौक से बस स्टैंड तक सुगम पहुंच मार्ग प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें नियमित रूप से इसकी कड़ाई से निगरानी कर रही है। बाईपास को जोड़ने के लिए 10 करोड़ रुपये की लागत से गौरव पथ का निर्माण किया जा रहा है। 
           
इसके साथ ही नालंदा लाइब्रेरी, शिव वाटिका, बूढ़ा महादेव परिसर उन्नयन, विशाल डोम निर्माण और पुराने अस्पताल परिसर के जीर्णाेद्धार का कार्य जारी है। बुजुर्गों के मनोरंजन और बैठक के लिए जल्द ही सियान सदन का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एसडीएम कार्यालय और शुगर फैक्ट्री परिसर में क्रमशः श्बलराम सदनश् एवं श्किसान सदनश् का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है।

शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और शहर की स्वच्छता
          
शर्मा ने बताया कि युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए भोरमदेव विद्यापीठ में पीएससी और व्यापम की निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। साथ ही जिले के 50 शासकीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत की जा चुकी है। उन्होंने नगर पालिका के सामने भी जल्द ही एक और नई चौपाटी शुरू करने की घोषणा की और शहर को धूल-रहित व स्वच्छ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

यातायात व्यवस्था में आएगा सुधार- नगर पालिका अध्यक्ष
        
 नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि कवर्धा वासियों का वर्षों पुराना इंतजार आज समाप्त हुआ है। इस चौपाटी के बनने से फुटकर व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है और शहर की यातायात व्यवस्था भी पहले से अधिक सुगम व व्यवस्थित होगी। इस लोकार्पण कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, जनपद उपाध्यक्ष  गणेश तिवारी, नगर पालिका उपाध्यक्ष  पवन जायसवाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य शहरवासी उपस्थित थे।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव की मौजूदगी के मिले प्रमाण

रायपुर

 विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई है।
       
गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ  वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह प्रमाणित हुआ है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है।

स्वस्थ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव

ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है। यह नदियों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।
         
विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में तीन यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है।

विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य
          

हर वर्ष 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल स्रोतों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि ऊदबिलाव के लिए प्रमुख खतरे हैं।

छत्तीसगढ़ में संरक्षण के लिए लगातार हो रहा शोध
         

छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके बाद राज्य शासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को ऊदबिलाव पर शोध और संरक्षण अध्ययन का दायित्व सौंपा गया। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के माध्यम से ऊदबिलाव की उपस्थिति, व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारी संकलित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता मती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है। अध्ययन से राज्य के विभिन्न जिलों में ऊदबिलाव की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

जनजागरूकता से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद
          
वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि अब स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण ऊदबिलाव के संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचना स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही है।

वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ
         
वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य अपशिष्ट न फैलाएं। जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही यह संभव है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोतों के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

वन विभाग में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने आईटी ट्रेनिंग हॉल का लोकार्पण

भोपाल 

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन ने भोपाल स्थित वन भवन में अत्याधुनिक आईटी ट्रेनिंग हॉल का लोकार्पण किया। यह पहल वन विभाग में नवाचार और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  सेन ने कहा कि बदलते समय के साथ शासन-प्रशासन में तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। आईटी ट्रेनिंग हॉल के माध्यम से विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डिजिटल तकनीकों, ई-गवर्नेंस प्रणाली और आधुनिक सॉफ्टवेयर आधारित कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे विभागीय कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

 सेन ने कहा कि वन विभाग द्वारा तकनीक आधारित नवाचारों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। डिजिटल कार्य संस्कृति को सशक्त बनाने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण हॉल तैयार किया गया है। इससे विभागीय कार्यों के बेहतर प्रबंधन, डेटा विश्लेषण तथा सूचना आदान-प्रदान में सुविधा होगी। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

नरसिंहपुर पुलिस की बड़ी सफलता

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने, अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना मजबूत करने हेतु लगातार प्रभावी कार्रवाइयां की जा रही हैं। प्रदेश में सक्रिय अपराधियों की निगरानी, रात्रि गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग के साथ-साथ चोरी की घटनाओं के त्वरित खुलासे हेतु विशेष पुलिस टीमें गठित की जा रही हैं। इसी क्रम में  नरसिंहपुर जिले के थाना गाडरवारा एवं थाना सुआतला पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कुल 09 चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा करते हुए लगभग 28 लाख रुपये से अधिक की चोरी गई संपत्ति एवं वाहन जब्त कर तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

थाना गाडरवारा क्षेत्रांतर्गत 05 मई को आनंद विहार कॉलोनी स्थित एक सूने मकान से सोने के जेवर चोरी होने की रिपोर्ट पर अपराध पंजीबद्ध कर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम द्वारा तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों का संकलन कर रेलवे स्टेशन गाडरवारा के पास से एक संदेही को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी द्वारा आनंद विहार कॉलोनी स्थित सूने मकान में चोरी करना स्वीकार किया गया।  साथ ही करेली, सिहोरा एवं गाडरवारा क्षेत्र में अन्य चोरी की वारदातें  एवं दो मोटरसाइकिल चोरी की घटनाएं करना भी स्वीकार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोने के 04 कंगन, 01 हार, 03 मंगलसूत्र, 02 जोड़ी झुमकी, 01 जोड़ी टॉप्स, 01 चेन, 01 मांग टीका, 02 अंगूठी, 01 पांचाली, चांदी की 01 जोड़ी पायल एवं 200 चांदी की अंगूठियां सहित लगभग 17 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।  आरोपी के विरुद्ध थाना महाराजपुर, थाना केसली जिला सागर, थाना गाडरवारा, थाना सुआतला एवं थाना करेली जिला नरसिंहपुर में गृहभेदन, मोटरसाइकिल चोरी, मारपीट, आर्म्स एक्ट एवं आबकारी एक्ट के तहत विभिन्न अपराध पंजीबद्ध पाए गए हैं।

इसी प्रकार थाना सुआतला क्षेत्र में  06 मार्च को बरमान कला स्थित हनुमान मंदिर एवं दिनांक 17 अप्रैल को ग्राम लोलरी स्थित सूने मकान में चोरी की घटनाएं हुई थीं, जिनमें अज्ञात चोरों द्वारा ताला तोड़कर सोने-चांदी के जेवरात एवं नगदी चोरी की गई थी। विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की गई। आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करने पर उनके द्वारा मंदिर एवं सूने मकान में चोरी करना स्वीकार किया गया।

आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने  चांदी का छत्र एवं मुकुट, सोने-चांदी के जेवरात तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 11 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। 

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशभर में अपराध नियंत्रण, संपत्ति संबंधी अपराधों की रोकथाम एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। यह कार्यवाही न केवल अपराधियों के विरुद्ध सख्त संदेश है, बल्कि यह आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को भी और अधिक सुदृढ़ करती है।

अशोकनगर पुलिस की बड़ी सफलता

भोपाल 

अशोकनगर पुलिस ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए मात्र 06 घंटे के भीतर नाबालिग आदिवासी बालिका के अपहरण का सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर बालिका को सकुशल दस्तयाब किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त वाहन, एक महिला आरोपी सहित चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि 23 मई को प्रातः लगभग 05:00 बजे 17 वर्षीय नाबालिग बालिका घर से बाहर शौच हेतु निकली थी, तभी पूर्व से घात लगाए बैठे आरोपियों द्वारा उसे जबरन वाहन में बैठाकर अपहरण कर लिया गया। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस अधीक्षक अशोकनगर राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में तीन विशेष संयुक्त टीमों का गठन कर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ किया गया। एक टीम द्वारा तकनीकी संसाधनों के माध्यम से लगातार विश्लेषण किया गया, जबकि अन्य टीमों द्वारा स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर क्षेत्र के विभिन्न मार्गों, होटल, ढाबों, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन आदि पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।

तकनीकी एवं मैदानी इनपुट के आधार पर आरोपियों के राजगढ़ जिले की ओर जाने की जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस की संयुक्त टीमें तत्काल रवाना हुईं। पुलिस टीम द्वारा ब्यावरा के समीप घटना में प्रयुक्त वाहन सहित महिला आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर, नीरज जोगी एवं प्रेम गुर्जर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा नाबालिग बालिका एवं एक अन्य आरोपी को नजीराबाद क्षेत्र में छोड़ने की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा नजीराबाद क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी लखन गुर्जर को गिरफ्तार करते हुए नाबालिग बालिका को सकुशल मुक्त कराया गया।

प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता की सगी बुआ द्वारा ही 1 लाख रुपये में बालिका का सौदा आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर से किया गया था। उक्त सौदे के तहत आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर ने अपने भाई लखन गुर्जर, प्रेम सिंह गुर्जर एवं नीरज जोगी के साथ मिलकर पूरी वारदात की साजिश रचकर घटना को अंजाम दिया। पुलिस द्वारा पीड़िता की सगी बुआ को भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। ईसागढ़ पुलिस द्वारा अपहृत नाबालिग आदिवासी बालिका को सकुशल मुक्त कराकर वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित रखवाया गया है।

 

सिंहस्थ: 2028, श्रद्धालुओं को मिलेगा माँ शिप्रा के जल से स्नान का पुण्य लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 में 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई में निर्मित शिप्रा के घाट श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान का लाभ देंगे। मां शिप्रा के स्वच्छ जल की उपलब्धता आयोजन को पावन बनाएगी। लगभग छह दशक बाद यह संभव होगा जब श्रद्धालु सिर्फ माँ शिप्रा के प्रवाहमान जल से सिंहस्थ के लिए पहुंचकर स्नान कर सकेंगे। गत सिंहस्थ : 2016 में माँ नर्मदा के जल से स्नान की सुविधा प्राप्त होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने कामना की थी कि मां शिप्रा का जल पूरी तरह से प्रवाहित हो और स्नान लाभ ले सकें। श्रद्धालुओं की आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। बाबा महाकाल और संतों के आशीर्वाद से श्रेष्ठ प्रबंध कर हम सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाएंगे। सिंहस्थ के आयोजन से नए कीर्तिमान बनेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मां शिप्रा के आशीर्वाद से समारोह में अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहे हैं। दीपामलिकाएं देखकर लगता है जैसे दीप पर्व आ गया हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि सभी को यश प्राप्त हो। त्रिवेणी से सिद्धनाथ तक शिप्रा जी के घाट पवित्र माने जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से अनेक कार्य संचालित हैं, जो सिंहस्थ के आयोजन को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का कार्य करेंगे।

भारत की मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी हो रहा है। हाल ही में हुए न्यायालय के निर्णय भी परिपालन की दृष्टि से स्वर्णकाल का आभास करवाते हैं। देश के नागरिक सभी निर्णयों पर भरोसा करते हुए परस्पर सहयोग और समरसता का परिचय दे रहे हैं। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के भूमि-पूजन और लोकार्पण में ऐसे सभी लोग उपस्थित हुए जिन्होंने मंदिर के संबंध में वर्षों तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। हमारे देश में मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा है।

राजभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजाभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध है। धार में भोजशाला में मां वागदेवी की प्रतिमा स्थापित होगी। न्यायालय के निर्णय के बाद यह मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री  मोदी का शासन काल सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल की याद दिलवाता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक का हित सर्वोपरि रहा।

जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने तीन माह से अधिक अवधि के जल गंगा संवर्धन अभियान में कुओं- तालाबों, नदियों, पोखर, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण संवर्धन के कार्यों का संचालन किया है। इसमें जनता की भागीदारी भी हो रही है। मध्यप्रदेश नदी जोड़ो अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी बना है।

समारोह में दरभंगा से कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए आई गायिका और बिहार विधानसभा की सदस्य सु मैथिली ठाकुर ने भजन प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से पूर्व सु ठाकुर का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भारत भवन में सदानीरा समागम का करेंगे शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बुधवार 27 मई को भारत भवन में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव “सदानीरा समागम” का शुभारंभ करेंगे। वीर भारत न्यास द्वारा जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति, पंचमहाभूतों तथा सतत विकास के विषयों पर केंद्रित यह गरिमामयी आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कलाकार सहभागिता करेंगे। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री  विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर और संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी उपस्थित रहेंगे।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव राम तिवारी ने बताया कि इस सात दिवसीय समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूत-जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि-पर आधारित विभिन्न वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान पर देश-विदेश के विशेषज्ञ गहराई से मंथन करेंगे। इस राष्ट्रीय विमर्श में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आईआईएम बोधगया जैसी देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी शामिल होकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम में वैचारिक मंथन के साथ प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजनों की धूम रहेगी, जिसमें नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस दौरान भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही ‘जल, जंगल, जीवन’ पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के नामचीन कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन स्थल पर म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय के सहयोग से जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों पर आधारित चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी।

कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिनमें वीर भारत न्यास और मैपकॉस्ट द्वारा प्रकाशित ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ शामिल हैं। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी सहित केन्द्रीय भूजल बोर्ड, नर्मदा समग्र और जिला प्रशासन भोपाल जैसी अनेक संस्थाएं सहयोगी के रूप में अपना सक्रिय योगदान दे रही हैं।

 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरे पर नीलगंगा पहुंचकर किया माँ गंगा की प्रतिमा का पूजन और अभिषेक

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरे के पावन अवसर पर नीलगंगा पहुंचकर माँ गंगा की प्रतिमा की पूजा और अभिषेक किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ-2028 में सनातन का वैभव पूरी दुनिया देखेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में माँ शिप्रा के घाटों पर साधु-संतों की भावना अनुसार सनातन की गरिमामयी परम्परा अनुसार सिंहस्थ-2028 का आयोजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रतिवर्ष की परंपरा अनुसार नीलगंगा परिसर पहुंचे, जिसे गुप्त गंगा का स्थान माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर वर्ष यहां पर आकर पूजन-अर्चन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीलगंगा परिसर में माँ गंगा का पूजन-अभिषेक कर गुप्त गंगा के दर्शन किये और प्रदेश की जनता की शुभ मंगल स्वास्थ्य, उन्नति, तरक्की की कामना की।

नीलगंगा जूना अखाड़ा पर गंगा दशहरा के अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी महाराज, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज नारायणगिरी जी महाराज उपस्थित रहे। 

साइबर तहसील 2.0 से नामांतरण प्रक्रिया हुई डिजिटल, पारदर्शी और सरल

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं सरल, सुगम और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में प्रारंभ की गई “साइबर तहसील 2.0” पहल राजस्व प्रणाली में ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण परिवर्तन का माध्यम बनी है। भूमि नामांतरण प्रक्रिया को डिजिटल और केंद्रीकृत बनाकर इस व्यवस्था ने नागरिक सुविधाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाया है और ईज़ ऑफ़ लिविंग को मजबूत किया है।

डिजिटल व्यवस्था से त्वरित हुआ नामांतरण निराकरण

“साइबर तहसील 2.0” व्यवस्था से अब तक प्रदेश में 5.60 लाख से अधिक ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। पहले जहां नामांतरण की प्रक्रिया में लगभग 70 दिन का समय लगता था, वहीं अब अधिकांश प्रकरण मात्र 20 से 25 दिनों में पूरे हो रहे हैं। इससे नागरिकों के समय, श्रम और धन की बचत सुनिश्चित हुई है।

“साइबर तहसील 1.0” से “2.0” तक का सफल विस्तार

राज्य सरकार ने साइबर तहसील व्यवस्था की शुरुआत “साइबर तहसील 1.0” के रूप में की थी। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में पूर्ण खसरा से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को शामिल किया गया था। रजिस्ट्री के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती थी और मैन्युअल हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा गया था। इस व्यवस्था की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाते हुए “साइबर तहसील 2.0” लागू की। इसमें अब आंशिक खसरा, अर्थात भूमि के किसी हिस्से की बिक्री से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को भी डिजिटल प्रणाली में शामिल किया गया है।

आंशिक खसरा प्रकरणों का समाधान हुआ सरल

आंशिक खसरा से जुड़े मामले तकनीकी रूप से अधिक जटिल माने जाते हैं, क्योंकि इनमें भूमि के हिस्से का सीमांकन, रिकॉर्ड संशोधन और संबंधित जानकारी का सटीक अद्यतन आवश्यक होता है। “साइबर तहसील 2.0” ने इस चुनौती का समाधान डिजिटल तकनीक से किया है। इससे राजस्व रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। साथ ही भूमि संबंधी विवादों की संभावनाओं में भी कमी आई है।

प्रदेशभर में प्रभावी रूप से लागू व्यवस्था

“साइबर तहसील 2.0” वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों में प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। यह व्यवस्था प्रदेश की लगभग 1,192 क्षेत्रीय तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार अदालतों के साथ रीयल-टाइम समन्वय में कार्य कर रही है। केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली से प्रकरणों की निगरानी, प्रगति की समीक्षा और समयबद्ध निराकरण अधिक प्रभावी हुआ है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला बल

“साइबर तहसील 2.0” केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की प्रभावी पहल बनकर उभरी है। ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे नागरिकों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

राजस्व सुधारों का प्रेरक मॉडल बन रहा मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल राजस्व प्रणाली में डिजिटल सुधारों का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरी है। “साइबर तहसील 2.0” अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित सेवाओं का प्रेरक मॉडल बन रही है।

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