मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, दूसरी पार्टियों से आए सांसदों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली

कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम की है। फिलहाल, साफ नहीं हो सका है कि उन्हें लेकर NDA की तरफ से क्या फैसला लिया जाएगा।

खास बात है इस बार कैबिनेट फेरबदल में हाल ही में पार्टियों की टूट के बाद NDA को समर्थन देने वाले नेताओं को भी जगह दी जा सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया था।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह 6 से 11 जुलाई के बीच तीन देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिनमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी भारत दौरे पर आ रहीं हैं और यह कार्यक्रम 1 से 3 जुलाई का है।

अब संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो अगस्त तक चलेगा। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि मंगलवार को बड़ी घोषणा की जा सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार फेरबदल होगा।

मानसून सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट फेरबदल
संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है।

पार्टी संगठन पर भी फोकस
सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः बीजेपी की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है।
‘एक व्यक्ति एक पद’ का नियम होगा लागू
इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चल रही ये चर्चा
ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।

TMC, शिवसेना-UBT, AAP से आए MPs को मिल सकता है मौका
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी अपडेट
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है।

गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

कौन हो सकता है शामिल
अब तक यह साफ नहीं है कि कैबिनेट फेरबदल में किसे मौका मिलने जा रहा है। अटकलें हैं कि नए सदस्यों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व CM नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ, राघव चड्ढा को शामिल किया जा सकता है।

इनका कट सकता है नाम
कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी को बदला जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। संभव है कि इन मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। साथ ही मंत्री बीएल वर्मा का भी राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि 6 राज्यमंत्री भी बदले जा सकते हैं। इनके अलावा मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के विभाग बदले जा सकते हैं।

संतुलन बनाने की कोशिश
एजेंसी भाषा के सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वास

रायपुर, 
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।
इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए।
प्रमाण पत्र मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है।
अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।

कबीर जयंती पर बोले मुख्यमंत्री साय, संत कबीर का संदेश आज भी समाज के लिए प्रासंगिक

रायपुर 
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल  थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

रायपुर में पुलिस सुरक्षा के बीच प्रशासन की बेदखली कार्रवाई, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर.

महीनों के उहापोह के बाद आखिरकार प्रशासन की माना क्षेत्र स्थित ग्राम नकटी में बेदखली कार्रवाई शुरू हो गई है. क्षेत्र में अवैध तरीके से बनाए गए मकानों को ढहाने के लिए आधी रात से जेसीबी के साथ करीबन हजार पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं.

जानकारी के अनुसार, गांव के वार्ड 16 और 17 में ऐसे 48 अवैध मकान हैं, जिन्हें ढहाने के लिए राजस्व विभाग ने बेदखली का नोटिस चस्पा किया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. वहीं कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जमीन पर सालों से रह रहे हैं. इनमें से कई मकान को पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं. बहरहाल, दावे और प्रतिदावे के बीच बेदखली कार्रवाई के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती से गांव में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है.

प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ जिला प्रशासन ने नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी शुरू कर दी है. एसडीएम ने बताया कि सभी परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है, आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है.

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव

रायपुर
डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय “इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।

मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।

यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

 इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला और ‘जटायु मोक्ष’ ने जीता दिल

रायपुर. 
सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा ‘जटायु मोक्ष’ की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।

इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।

हज 2026: छत्तीसगढ़ के सभी 813 हज यात्री सकुशल स्वदेश लौटे, अंतिम जत्था मुंबई पहुंचा

रायपुर 
छत्तीसगढ़ राज्य से हज कमेटी के माध्यम से हज यात्रा पर गए सभी हज यात्री हज की इबादत सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकुशल स्वदेश लौट आए हैं । राज्य के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा । मुंबई में एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने अगवानी करते हुए समस्त हाजियों की गुलपोशी की । छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, हज 2026 के लिए राज्य गठन उपरांत से अब तक की सर्वाधिक संख्या में राज्य के 29 जिलों से हज यात्री प्रस्थान किये  कुल 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष राज्य से 417 पुरुष एवं 396 महिला हज यात्रियों ने हज 2026 की सआदत  हासिल की। राज्य के हज यात्रियों द्वारा चुने गये विकल्प अनुसार मुम्बई ईम्बारकेशन प्वाइंट से 451, नागपुर से 290, दिल्ली से 14, अहमदाबाद से 02, बैंगलोर से 06, हैदराबाद से 42, जयपुर से 01, लखनऊ से 05 एवं कोलकाता से 02 हाजियों की सकुशल स्वदेश वापसी संपन्न हुई। राज्य के हज यात्रियों का मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पर आज अंतिम जत्था दिनांक 29/06/2026 को मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पहुंचा। हज यात्रियों की वापसी के अवसर पर राज्य हज कमेटी द्वारा हाजियों का एयरपोर्ट में गुलपोशी से इस्तकबाल किया गया एवं लगेज उपरांत प्रत्येक हाजी को पवित्र जल ज़म ज़म उपलब्ध कराया गया।  सभी हाजियो ने राज्य हज कमेटी के द्वारा की गई बेहतरीन व्यवस्था के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी, डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल कैबिनेट मंत्री छ.ग.शासन का आभार व्यक्त किया।

हज कमेटी के चेयरमैन बेग ने बताया कि, हज यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करते हुए हज कमेटी द्वारा हज 2026 के हज यात्रियों को, 20 दिवस शाॅर्ट हज पैकेज, ऑनलाइन डाक्यूमेंट अपलोडिंग, पासपोर्ट जमा नहीं करने की सुविधा, प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की सुविधा, संभाग स्तरीय विशेष हज प्रशिक्षण की सुविधा,  हज के दौरान बुलेट एवं मेट्रो ट्रेन से यात्रा की सुविधा, मीना में प्रत्येक हाजी का नाम एवं कवर नंबर युक्त सोफा कम बेड की सुविधा  उपलब्ध कराई गई जिससे हज यात्रियों की यात्रा  आरामदायक रही।

राज्य के  हज यात्रियों के मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट के अंतिम जत्थे की वापसी के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग, हज कमेटी के सदस्य मौलाना अमीर बेग, कार्यपालन अधिकारी/सचिव डॉ. खुशबू उस्मान उपस्थित रहें।

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब

10 लाख रुपये की फिरौती की मांग करने वाले आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश जारी

पन्ना

“देशभक्ति, जनसेवा” के मूल मंत्र के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस ने पन्ना जिले में अपहरण के एक गंभीर प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृत युवक को सकुशल दस्तयाब कर मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता एवं प्रभावी पुलिसिंग का परिचय दिया है। विषम परिस्थितियों में पूरी रात चलाए गए सर्च ऑपरेशन के परिणामस्वरूप युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

27 जून की रात्रि लगभग 8:00 बजे थाना पवई क्षेत्र से सूचना प्राप्त हुई कि स्थानीय कपड़ा व्यापारी श्री राजेश कुमार डेंगरे के 20 वर्षीय पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया है तथा उसकी रिहाई के लिए 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की जा रही है। सूचना मिलते ही थाना पवई पुलिस ने मामले की गंभीरता से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया।

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। साथ ही तकनीकी विश्लेषण एवं डिजिटल इनपुट के लिए साइबर सेल को तत्काल सक्रिय किया गया।

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की। रात्रि के दौरान लगातार वर्षा, घने जंगल एवं दुर्गम मार्ग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस बल ने कई किलोमीटर तक पैदल सर्च अभियान संचालित किया। लगातार प्रयासों एवं सुनियोजित रणनीति के परिणामस्वरूप पुलिस टीम ने हथकुरी के समीप जंगल क्षेत्र से अपहृत युवक अंशुल उर्फ कान्हा को सकुशल दस्तयाब कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार दबिशें दी जा रही है।

पुलिस द्वारा प्रकरण के सभी पहलुओं की गंभीरता एवं निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। मामले में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी गंभीर अपराध की सूचना पर त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सतत कार्यरत है।

 

45 की उम्र में IAS अवनीश शरण की फिटनेस जर्नी बनी मिसाल, खुद शेयर किया ट्रांसफॉर्मेशन

रायपुर.

छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश शरण इन दिनों किसी प्रशासनिक फैसले नहीं, बल्कि अपनी प्रेरणादायक फिटनेस यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी पोस्ट हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।

इसमें उन्होंने बताया है कि किस अनुशासित प्रयासों ने न सिर्फ उनके शरीर का कायाकल्प किया, बल्कि उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट भी पूरी तरह बदल दी। आईएएस अवनीश शरण ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि कोविड के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने फिटनेस की शुरुआत की थी। हालांकि नौकरी की व्यस्तता, पारिवारिक जिम्मेदारियों और वर्ष 2024 में हुई सर्जरी के कारण उनकी दिनचर्या बार-बार बाधित होती रही। लेकिन जून 2025 में उन्होंने एक बार फिर नई शुरुआत की। इस बार उनका लक्ष्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि खुद को पहले से अधिक स्वस्थ बनाना था।

उन्होंने नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित एवं उच्च-प्रोटीन आहार, कैलोरी ट्रैकिंग, रोजाना पैदल चलना, पर्याप्त नींद और रिकवरी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उन्होंने लिखा कि 1 जनवरी 2026 को उन्होंने अपनी बेटी वेदिका के 27 जून के जन्मदिन तक अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस हासिल करने का लक्ष्य तय किया था। इस पूरी यात्रा में उनकी पत्नी रुद्राणी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। अवनीश शरण के मुताबिक इस अनुशासित जीवनशैली का असर केवल उनके शरीर पर ही नहीं, बल्कि उनकी ब्लड रिपोर्ट में भी साफ दिखाई दिया।

सितंबर 2025 से मई 2026 के बीच उनका कुल कोलेस्ट्रॉल 278 से घटकर 158, एलडीएल 205.2 से घटकर 83, एचडीएल 51 से बढ़कर 62.8 और ट्राइग्लिसराइड्स 109 से घटकर 61.9 पर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि उनका बॉडी फैट 30 प्रतिशत से अधिक से घटकर सिंगल डिजिट में आ गया, जिससे हृदय रोगों का जोखिम भी काफी कम हुआ। अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि किसी भी बदलाव के लिए प्रेरणा से ज्यादा जरूरी अनुशासन और निरंतरता है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य का आकलन केवल वजन से नहीं, बल्कि ब्लड रिपोर्ट, शरीर की क्षमता और ऊर्जा के स्तर से भी होना चाहिए। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन, अच्छी नींद और संतुलित जीवनशैली अपनाने की अपील की।

पोस्ट के अंत में अवनीश शरण ने लिखा, “मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि वजन कम करना नहीं है, बल्कि 45 वर्ष की उम्र में 39 वर्ष की उम्र से अधिक स्वस्थ होना है। इस यात्रा ने मुझे सिखाया कि अनुशासन प्रेरणा से अधिक शक्तिशाली है, निरंतरता पूर्णता से अधिक मूल्यवान है और स्वास्थ्य से बड़ा कोई निवेश नहीं।”

मध्यप्रदेश में जनजातीय छात्रावास-आश्रम के विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दरों में बढ़ोतरी

भोपाल 
मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग ने वर्ष 2026-27 में छात्रावास एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति की दरों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों की बेहतर शिक्षा के लिए सतत‍निर्णय ले रही है। इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि अनुसूचित जनजाति के छात्रावास/आश्रमों में रहने वाले छात्र/छात्राओं की शिष्यवृत्ति की दरों को प्रत्येक वर्ष माह मार्च के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर निर्धारित कर माह जुलाई में छात्रावास / आश्रम प्रारंभ होने से प्रभावशील होगी।

जारी आदेश के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर वर्ष 2026-27 के लिए शिष्यवृत्ति की नई दरें निर्धारित की गई हैं। अब छात्रावास एवं आश्रमों में रहने वाले बालक विद्यार्थियों को 1,720 रुपये प्रतिमाह तथा बालिका विद्यार्थियों को 1,770 रुपये प्रतिमाह शिष्यवृत्ति प्रदान की जाएगी।

 

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