‘हमारे PM भीख का कटोरा लेकर चीन नहीं गए’, बांग्लादेश के विदेश मंत्री का बड़ा बयान

ढाका 

अक्सर ‘भीख का कटोरा’ की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं। 

बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता ‘भीख का कटोरा’ लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं। 

बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है। 

“प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें। 

खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी। 

बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए। 

वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे। 

इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। 

दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

भारत-चीन सीमा पर कब्जे का दावा, बॉर्डर से सटे आदिवासियों ने उठाए गंभीर सवाल

नईदिल्ली 
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय ‘नाह’ आदिवासी समुदाय ने दावा किया है कि चीन इस क्षेत्र में उनकी जमीन हथिया रहा है। उन्होंने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना ने भारतीय जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर आदिवासी संगठन ‘नाह वेलफेयर सोसाइटी’ ने जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों के अंदर चीनी सेना ने उनके पूर्वजों की खेती और मवेशियों को चराने वाले जमीन के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि, चीन पिछले 10 से 15 सालों से इस इलाके में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, लेकिन 2020 के बाद से उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
किन इलाकों पर कब्जा?

आदिवासी संगठन ने अपर सुबनसिरी के ‘ताक्सिंग’ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच अलग जगहों पर चीन की संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों की सूची प्रशासन को सौंपी है। उनके मुताबिक 2020 तक ये इलाके पूरी तरह उनके नियंत्रण में थे, लेकिन अब इस पर चीन का नियंत्रण है। ये इलाके हैं-

ओयिंग- यह स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है।

पोत्रंग (झील): यह स्थानीय लोगों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।

तिन्दिनतांग (टीजी): ताक्सिंग हेडक्वार्टर के बिल्कुल नजदीक स्थित इलाका।

पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र): स्थानीय आदिवासियों का पारंपरिक क्षेत्र।

मरपन (मर्नाफे): यहां चीनी सैनिकों की आवाजाही देखी गई है।

‘भारतीय सीमा में चीनी सड़कें और मिलिट्री कैंप’
नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने अपने ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, “हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिशें काफी साबित नहीं हो रही हैं। ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए (PLA) जिस इरादे और बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।” उन्होंने आगे कहा, “हम हर दिन, इंच-दर-इंच अपनी मातृभूमि को चीन के हाथों खो रहे हैं। चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर पक्की सड़कें और अपने मिलिट्री कैंप तक बना लिए हैं।”

इस मामले पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। विधायक नालो ने एक बयान में कहा, “यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगों ने जो आरोप लगाए हैं, जिला प्रशासन और सेना को उसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि करनी चाहिए।” वहीं इस पूरे मामले पर फिलहाल अरुणाचल प्रदेश की सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भारत का अभिन्न हिस्सा है अरुणाचल
गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता। वह इसे ‘जांगनान’ (दक्षिण तिब्बत) कहता है और इस पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है। अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए चीनी नाम जारी करता है, वहां के नागरिकों को स्टेपल वीजा देता है और सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की भी कोशिश करता है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक पहुंचा चीन, सेशेल्स के जरिए हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक घेराबंदी

नई दिल्ली

 हिंद महासागर में इन दिनों बड़ी भू-राजनीतिक शतरंज बिछी हुई है. एक तरफ चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश कर रहा है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा, जिबूती में नौसैनिक अड्डा और अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक उसकी पहुंच इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. दूसरी ओर भारत भी अब सिर्फ समुद्र की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर में अपने भरोसेमंद साझेदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा इसी बड़ी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है. पहली नजर में सेशेल्स एक छोटा सा द्वीपीय देश दिखता है. करीब 460 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग एक लाख की आबादी वाले इस देश को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगाए कि इसकी रणनीतिक अहमियत कितनी बड़ी है. लेकिन पश्चिमी हिंद महासागर में फैले इसके 115 द्वीप ऐसे समुद्री इलाके में स्थित हैं, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग गुजरते हैं। 

सेशेल्स केवल एक मित्र नहीं, समुद्री सुरक्षा का अहम साझेदार
एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इन रास्तों से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल, एलएनजी, कंटेनर कार्गो और जरूरी सामान दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. भारत के विदेशी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर है. यही वजह है कि नई दिल्ली के लिए सेशेल्स केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे अहम साझेदार बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि जमीन के लिहाज से छोटा होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 

इस विशाल समुद्री इलाके की निगरानी किसी भी छोटे देश के लिए आसान नहीं होती. भारत ने इसी जरूरत को समझते हुए पिछले कई वर्षों में सेशेल्स को डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय निगरानी रडार नेटवर्क, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और सैन्य प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. इससे न केवल सेशेल्स की समुद्री क्षमता बढ़ी है, बल्कि पूरे पश्चिमी हिंद महासागर में भारत की निगरानी और साझेदारी भी मजबूत हुई है। 

चीन की बढ़ती भूमिका को करेगा काउंटर
यह पूरी रणनीति ऐसे समय में सामने आ रही है, जब चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. बीते एक दशक में बीजिंग ने बंदरगाहों, औद्योगिक परियोजनाओं और समुद्री बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है. पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह और अफ्रीका के जिबूती में उसकी मौजूदगी पहले ही भारत की रणनीतिक चिंताओं का हिस्सा रही है. अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक चीन पहुंचने जा रहा है. चीन की इस भूमिका को भारत इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहा है. भारत जानता है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में भी तय होगी। 

हालांकि, भारत का जवाब चीन की तरह कर्ज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल नहीं है. भारत की रणनीति भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा विकास पर आधारित है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी साफ कहा है कि भारत किसी भी देश में वही परियोजना आगे बढ़ाता है, जिसे वहां की सरकार और जनता की सहमति प्राप्त हो. यही कारण है कि सेशेल्स के साथ रक्षा सहयोग के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी. उसी दौरान कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम की शुरुआत हुई, जिसने समुद्री गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी को नई मजबूती दी. भारत ने डोर्नियर विमान और अन्य रक्षा उपकरण देकर सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाई. अब 2026 की यह यात्रा दोनों देशों के बीच 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है। 

भारत की बदलती समुद्री सोच
इस यात्रा का एक और अहम संदेश भारत की बदलती समुद्री सोच है. 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सागर’ यानी सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन का विजन दिया था. अब इसे ‘महासागर’ यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सेक्युरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉल रीजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मतलब सिर्फ नौसैनिक सहयोग नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन, जलवायु सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी समुद्री रणनीति का हिस्सा बनाना है. सेशेल्स इस व्यापक रणनीति का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है. भारत और सेशेल्स के रिश्ते केवल रणनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी दो सदियों से अधिक पुराने हैं. भारतीय मूल के हजारों लोग आज भी सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, व्यापार और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

यही सामाजिक जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाता है. बदलती वैश्विक राजनीति में हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है. जो देश इस समुद्री क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और भरोसेमंद उपस्थिति बनाएगा, वही आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा. ऐसे में यदि चीन मोंगला, ग्वादर और हम्बनटोटा के जरिए अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है, तो भारत भी सेशेल्स जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ अपने समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है। 

मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, दूसरी पार्टियों से आए सांसदों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली

कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम की है। फिलहाल, साफ नहीं हो सका है कि उन्हें लेकर NDA की तरफ से क्या फैसला लिया जाएगा।

खास बात है इस बार कैबिनेट फेरबदल में हाल ही में पार्टियों की टूट के बाद NDA को समर्थन देने वाले नेताओं को भी जगह दी जा सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया था।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह 6 से 11 जुलाई के बीच तीन देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिनमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी भारत दौरे पर आ रहीं हैं और यह कार्यक्रम 1 से 3 जुलाई का है।

अब संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो अगस्त तक चलेगा। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि मंगलवार को बड़ी घोषणा की जा सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार फेरबदल होगा।

मानसून सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट फेरबदल
संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है।

पार्टी संगठन पर भी फोकस
सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः बीजेपी की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है।
‘एक व्यक्ति एक पद’ का नियम होगा लागू
इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चल रही ये चर्चा
ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।

TMC, शिवसेना-UBT, AAP से आए MPs को मिल सकता है मौका
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी अपडेट
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है।

गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

कौन हो सकता है शामिल
अब तक यह साफ नहीं है कि कैबिनेट फेरबदल में किसे मौका मिलने जा रहा है। अटकलें हैं कि नए सदस्यों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व CM नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ, राघव चड्ढा को शामिल किया जा सकता है।

इनका कट सकता है नाम
कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी को बदला जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। संभव है कि इन मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। साथ ही मंत्री बीएल वर्मा का भी राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि 6 राज्यमंत्री भी बदले जा सकते हैं। इनके अलावा मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के विभाग बदले जा सकते हैं।

संतुलन बनाने की कोशिश
एजेंसी भाषा के सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वास

रायपुर, 
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।
इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए।
प्रमाण पत्र मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है।
अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।

कबीर जयंती पर बोले मुख्यमंत्री साय, संत कबीर का संदेश आज भी समाज के लिए प्रासंगिक

रायपुर 
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल  थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री  साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

रायपुर में पुलिस सुरक्षा के बीच प्रशासन की बेदखली कार्रवाई, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर.

महीनों के उहापोह के बाद आखिरकार प्रशासन की माना क्षेत्र स्थित ग्राम नकटी में बेदखली कार्रवाई शुरू हो गई है. क्षेत्र में अवैध तरीके से बनाए गए मकानों को ढहाने के लिए आधी रात से जेसीबी के साथ करीबन हजार पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं.

जानकारी के अनुसार, गांव के वार्ड 16 और 17 में ऐसे 48 अवैध मकान हैं, जिन्हें ढहाने के लिए राजस्व विभाग ने बेदखली का नोटिस चस्पा किया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. वहीं कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जमीन पर सालों से रह रहे हैं. इनमें से कई मकान को पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं. बहरहाल, दावे और प्रतिदावे के बीच बेदखली कार्रवाई के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती से गांव में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है.

प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ जिला प्रशासन ने नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी शुरू कर दी है. एसडीएम ने बताया कि सभी परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है, आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है.

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव

रायपुर
डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय “इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।

मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।

यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

 इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला और ‘जटायु मोक्ष’ ने जीता दिल

रायपुर. 
सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा ‘जटायु मोक्ष’ की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।

इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।

हज 2026: छत्तीसगढ़ के सभी 813 हज यात्री सकुशल स्वदेश लौटे, अंतिम जत्था मुंबई पहुंचा

रायपुर 
छत्तीसगढ़ राज्य से हज कमेटी के माध्यम से हज यात्रा पर गए सभी हज यात्री हज की इबादत सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकुशल स्वदेश लौट आए हैं । राज्य के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा । मुंबई में एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने अगवानी करते हुए समस्त हाजियों की गुलपोशी की । छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, हज 2026 के लिए राज्य गठन उपरांत से अब तक की सर्वाधिक संख्या में राज्य के 29 जिलों से हज यात्री प्रस्थान किये  कुल 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष राज्य से 417 पुरुष एवं 396 महिला हज यात्रियों ने हज 2026 की सआदत  हासिल की। राज्य के हज यात्रियों द्वारा चुने गये विकल्प अनुसार मुम्बई ईम्बारकेशन प्वाइंट से 451, नागपुर से 290, दिल्ली से 14, अहमदाबाद से 02, बैंगलोर से 06, हैदराबाद से 42, जयपुर से 01, लखनऊ से 05 एवं कोलकाता से 02 हाजियों की सकुशल स्वदेश वापसी संपन्न हुई। राज्य के हज यात्रियों का मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पर आज अंतिम जत्था दिनांक 29/06/2026 को मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पहुंचा। हज यात्रियों की वापसी के अवसर पर राज्य हज कमेटी द्वारा हाजियों का एयरपोर्ट में गुलपोशी से इस्तकबाल किया गया एवं लगेज उपरांत प्रत्येक हाजी को पवित्र जल ज़म ज़म उपलब्ध कराया गया।  सभी हाजियो ने राज्य हज कमेटी के द्वारा की गई बेहतरीन व्यवस्था के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी, डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल कैबिनेट मंत्री छ.ग.शासन का आभार व्यक्त किया।

हज कमेटी के चेयरमैन बेग ने बताया कि, हज यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करते हुए हज कमेटी द्वारा हज 2026 के हज यात्रियों को, 20 दिवस शाॅर्ट हज पैकेज, ऑनलाइन डाक्यूमेंट अपलोडिंग, पासपोर्ट जमा नहीं करने की सुविधा, प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की सुविधा, संभाग स्तरीय विशेष हज प्रशिक्षण की सुविधा,  हज के दौरान बुलेट एवं मेट्रो ट्रेन से यात्रा की सुविधा, मीना में प्रत्येक हाजी का नाम एवं कवर नंबर युक्त सोफा कम बेड की सुविधा  उपलब्ध कराई गई जिससे हज यात्रियों की यात्रा  आरामदायक रही।

राज्य के  हज यात्रियों के मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट के अंतिम जत्थे की वापसी के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग, हज कमेटी के सदस्य मौलाना अमीर बेग, कार्यपालन अधिकारी/सचिव डॉ. खुशबू उस्मान उपस्थित रहें।

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