ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त सोलर बिजली निर्धारित दर पर खरीदी जाएगी

रायपुर

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त (सरप्लस) सोलर बिजली की खरीदी दर (बायबैक रेट) तय की है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने इस दर को अपनाने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

 छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ से मिली जानकारी के अनुसार, निर्धारित दर को अंतिम अनुमोदन और मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) के पास भेज दिया गया है। आयोग से हरी झंडी मिलते ही उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली की राशि अगले बिजली बिलों में क्रेडिट (छूट) के रूप में दिखाई देने लगेगी।

ऐसे काम करती है नेट मीटरिंग और बायबैक व्यवस्था
         

पावर कंपनी ने इसकी पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत, सोलर संयंत्र से जितनी बिजली बनती है, उसका सबसे पहले उपभोक्ता की मासिक बिजली खपत में समायोजन (अडजस्टमेंट) किया जाता है। यदि उपभोक्ता की जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है और वह ग्रिड में वापस जाती है, तो उसकी बची हुई यूनिट हर महीने उपभोक्ता के खाते में जुड़ती चली जाती है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर खाते में बची हुई इन सभी अतिरिक्त यूनिटों का नियमानुसार पावर कंपनी द्वारा बायबैक (खरीद) किया जाता है। तय दर के हिसाब से बनने वाली कुल राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर दी जाती है।

नए वित्तीय वर्ष में शून्य से शुरू होता है लेखा-जोखा
    
 उपभोक्ताओं के बीच भ्रम को दूर करते हुए कंपनी ने साफ किया है कि प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष में यूनिट का लेखा-जोखा नए सिरे से (शून्य से) शुरू होता है। यही कारण है कि पिछले वित्तीय वर्ष की बची हुई अतिरिक्त यूनिट नए बिजली बिल में यूनिट के रूप में दिखाई नहीं देती हैं। हालांकि, उनका मौद्रिक मूल्य (पैसा) उपभोक्ता के खाते में पूरी तरह सुरक्षित रहता है और आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में घटा दिया जाता है।
     
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अधिशेष बिजली के समायोजन और बायबैक की यह पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के प्रचलित नियमों के तहत बेहद पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है, जिससे राज्य के हजारों सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य और अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रमुख पर्यटन स्थल राजमेरगढ़ का किया दौरा

रायपुर

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रवास के दौरान जिले की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया तथा जिले की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को समेटे जीपीएम पर्यटन कॉफी टेबल बुक भेंट कर जिले की पर्यटन उपलब्धियों और संभावनाओं से अवगत कराया गया।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि जिले के पर्यटन स्थलों को स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जोड़कर विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिल रही है।

प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने जीपीएम जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल राजमेरगढ़  का  भ्रमण किया।

 उन्होंने पर्यटन समितियों द्वारा संचालित गतिविधियों, पर्यटकों के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों का अवलोकन किया। इस दौरान स्थानीय पर्यटन समितियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जनसहभागिता के माध्यम से पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है।

भ्रमण के दौरान पर्यटन समितियों ने स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यटन के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी हैं।

प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। यहां पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करता है।

उन्होंने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यटन समितियां जिस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने समितियों से भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण, पर्यटक-अनुकूल, स्वच्छ, सुरक्षित एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही राज्य के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके।
इस अवसर पर पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, पर्यटन समितियों के प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में छत्तीसगढ़ बना देश का अग्रणी राज्य

रायपुर 

 प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के पंजीयन के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक संचालित विशेष अभियान में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य ने अभियान के शुरुआती मात्र 9 दिनों में ही निर्धारित लक्ष्य का 72 प्रतिशत पूरा कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

प्रदेश ने न केवल हितग्राहियों के पंजीयन में देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, बल्कि प्री-रजिस्टर्ड हितग्राहियों के निराकरण में भी सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए सर्वाधिक उपलब्धि अर्जित की है। यह उपलब्धि महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों, मैदानी अमले तथा सभी संबंधित हितधारकों के समन्वित और समर्पित प्रयासों का परिणाम है।

विशेष अभियान के अंतर्गत जिला जांजगीर-चांपा ने 96 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि मातृ एवं शिशु कल्याण के प्रति जिले की संवेदनशीलता, सक्रियता और प्रभावी कार्यप्रणाली को प्रतिबिंबित करती है।

 मातृ वंदना योजना (PMMVY) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण मातृ कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित मातृत्व के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के जन्म पर पात्र महिलाओं को 5,000 रूपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है, जबकि दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने तथा शिशुओं के बेहतर पोषण और समग्र विकास सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम, मैदानी अमले और सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व प्रदान करने के साथ-साथ शिशुओं के स्वस्थ भविष्य की मजबूत आधारशिला तैयार कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आगामी दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सभी हितधारकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रतिबद्धता, सतत निगरानी और जनकल्याण के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक पात्र गर्भवती एवं शिशुवती माता प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ प्राप्त कर सके।

उन्होंने प्रदेश की सभी पात्र महिलाओं से अपील की कि वे 15 जुलाई तक संचालित विशेष अभियान का लाभ उठाते हुए अपना पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि मातृत्व के इस महत्वपूर्ण चरण में उन्हें शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।

इंदौर के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित दादा के सुपुर्द किया

भोपाल

इंदौर जिले के थाना खजराना क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से घर से निकलकर रास्ता भटक गए 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुँचाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालक को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका।

27 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना खजराना क्षेत्र अंतर्गत सेरेटन होटल के सामने एक 10 वर्षीय बालक अकेला मिला है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही खजराना थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक  महेंद्र सिंह तोमर, आरक्षक  महेश कुशवाह एवं पायलट  अंकित बंसल ने मौके पर पहुँचकर बालक को सुरक्षित संरक्षण में लिया। इसके पश्चात डायल-112 टीम ने तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ आसपास क्षेत्र में पूछताछ कर उसके परिजनों की तलाश प्रारंभ की। पूछताछ के दौरान बालक के दादा का पता चला। बालक द्वारा पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसे सुरक्षित उसके दादा के सुपुर्द किया गया।डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालक को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

 

झाबुआ से देश को पोलियो मुक्त रखने का संकल्प

भोपाल 

देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने रविवार को झाबुआ जिले में तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान’ का शुभारंभ किया। जिला चिकित्सालय झाबुआ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री  भूरिया ने फीता काटकर इस राष्ट्रव्यापी अभियान के जिला स्तरीय चरण की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं बच्चों को पोलियो रोधक दवा की दो बूंद पिलाकर आम जनता को जागरूकता का संदेश दिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री  भूरिया ने पोलियो उन्मूलन की दिशा में भारत की ऐतिहासिक सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पोलियो उन्मूलन की दिशा में हमारे देश ने दुनिया के सामने एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम की है, लेकिन इस बड़ी सफलता और सुरक्षा चक्र को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हर पीढ़ी के प्रत्येक बच्चे को समय पर पोलियो रोधक दवा की खुराक मिले। मंत्री  भूरिया ने बल देकर कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और उनका सुरक्षित भविष्य हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी नागरिकों और अभिभावकों से भावुक अपील की कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो बूथ पर ले जाकर दवा अवश्य पिलवाएं और इस जनहितकारी अभियान को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मंत्री  भूरिया द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के तहत झाबुआ जिले में 0 से 5 वर्ष तक के कुल 2,13,504 बच्चों को दवा पिलाने का शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) श्री एम.एल. चोपड़ा ने बताया कि जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिसके तहत जिले में कुल 1,185 टीमें मुस्तैद की गई हैं। इन टीमों में निर्धारित केंद्रों पर दवा पिलाने के लिए 424 बूथ टीमें, छूटे हुए बच्चों को कवर करने के लिए 610 घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं मुख्य चौराहों पर सक्रिय रहने वाली 44 ट्रांजिट टीमें तथा सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों के लिए 07 मोबाइल टीमें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पूरे अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए विशेष सुपरवाइजरी टीमों का भी गठन किया गया है।

 

जुलाई से ‘वीबीजीराम-जी’ योजना होगी लागू, मध्य प्रदेश में तैयारियां पूरी

भोपाल

मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण’ (वीबीजीराम-जी) योजना एक जुलाई से स्थान लेने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी तैयारी हो गई है। सभी जिलों को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है।

इसके पहले मनरेगा के अंतर्गत उन कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो नई योजना में नहीं हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इस अवधि तक काम पूरे नहीं हुए तो बचे कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का बोझ राज्य सरकार पर आएगा। इनमें गैर-अनुमत कार्य जैसे तालाबों में पानी का कटाव रोकने के लिए पत्थर का बंधान बनाना आदि शामिल हैं।

100 की जगह मिलेंगे 125 दिन रोजगार

योजना लागू होने के बाद कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा यह कि मनरेगा में 266 तरह के कार्य थे, जबकि नई योजना में 318 तरह के सम्मिलित किए गए हैं। वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी रहेगी, जबकि मनरेगा में सौ दिन की थी।

वर्ष में 60 दिन का ड्राई पीरियड रहेगा, यानी इस अवधि में काम नहीं होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि, खेती की कटाई का समय इसके लिए रखा जा सकता है। कारण, इस समय मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं।

बनाए जाएंगे नए जॉब कार्ड, तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें

मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक नहीं बनते पुराने कार्ड के आधार पर ही उन्हें रोजगार दिया जाएगा। पंचायतों को तीन श्रेणी में बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे।

पिछड़ी, जिला मुख्यालय से दूर और अधिक एससी-एसटी आबादी वाली पंचायतों को ‘सी’ श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, यहां ज्यादा काम कराए जाएंगे। इसके बाद ‘बी’ श्रेणी की पंचायतों में इससे कम और ‘ए’ श्रेणी वाली में सबसे कम काम होंगे। वर्गीकरण का आधार अभी तक हुए विकास कार्य होंगे।

 

दिल्ली में राहुल गांधी के ‘गुमशुदा’ पोस्टर, सियासत तेज—किसने लगाए सवाल अनसुलझा

नई दिल्ली
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर दिल्ली के कुछ इलाकों में पोस्टर लगे हैं। इन पोस्टर्स में राहुल गांधी को ‘गुमशुदा’ बताया गया है। इसमें उनके नाम के साथ पहचान का भी जिक्र किया गया है। दिल्ली के फिरोजशाह रोड समेत कई जगह पर राहुल गांधी के गुमशुदा होने के पोस्टर सामने आए हैं। जैसे ही ये पोस्टर सामने सवाल उठा कि आखिर इसे किसने लगाया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पोस्टर में इसे लगवाने वालों को संदर्भ में कोई जानकारी नहीं दी गई है। उधर बीजेपी ने कांग्रेस नेता के इस पोस्टर पर निशाना साधा है।

राहुल गांधी के ये पोस्टर किसने लगवाए?
दिल्ली में राहुल गांधी के गुमशुदा होने के पोस्टर रविवार को नजर आए। यह सब ऐसे वक्त में हुआ है जब केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा को लेकर उन पर लगातार हमले कर रही है। एक दिन पहले ही केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि जब भी संसद, चुनाव या उनकी पार्टी को उनकी जरूरत होती है, तो वह गायब रहते हैं। यही नहीं राहुल गांधी ‘एक और विदेश यात्रा’ पर चले जाते हैं।

बीजेपी के निशाने पर राहुल गांधी
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस संबंध में कांग्रेस सांसद पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए LoP का मतलब ‘Leader of the Opposition’ (विपक्ष के नेता) नहीं, बल्कि ‘Leader of Paryatan (लीडर ऑफ पर्यटन) and Partying’ (पर्यटन और पार्टी करने वाले नेता) है। शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो बयान में कहा कि राहुल गांधी को LoP का नाम बदलकर ‘Leader of Paryatan and Partying’ कर देना चाहिए क्योंकि वह हमेशा यही करते हैं- पार्टी करना, घूमना-फिरना और यात्रा करना।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने क्या कहा
    बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से ज्यादा विदेश यात्राओं को अहमियत देते हैं।
    उन्होंने ये भी दावा किया कि वह लोगों, संसद या देश को प्राथमिकता नहीं देते। वह घूमना-फिरना ज्यादा पसंद करते हैं।
    बीजेपी नेता बोले- अहम मौकों पर, जब पार्टी को संगठनात्मक मदद की जरूरत होती है, तो वह बाहर चले जाते हैं।
    ‘संसद सत्र के दौरान भी वह चले जाते हैं। राहुल गांधी हमेशा छुट्टियों के मूड में रहते हैं।’
    शहजाद पूनावाला ने ये टिप्पणी ऐसे समय में की है जब राष्ट्रीय राजधानी में कई अहम जगहों पर राहुल गांधी की तस्वीर के साथ ‘गुमशुदा’ लिखे पोस्टर देखे गए। यह तुरंत पता नहीं चल सका कि ये पोस्टर किसने लगाए थे।

पीएम मोदी और राहुल गांधी की तुलनाकर ये बोले पूनावाला
शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता के बीच तुलना की और दावा किया कि बार-बार विदेश यात्राओं के कारण राहुल गांधी ‘सबसे लंबे समय तक विपक्ष के नेता’ बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ, प्रधानमंत्री मोदी देश के सबसे लंबे समय तक चुने गए प्रधानमंत्री बन गए हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर, सरकार के प्रमुख के रूप में 9,000 से ज्यादा दिनों तक उन्होंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। इसे ही काम करने का तरीका या सेवा भाव कहते हैं। दूसरी तरफ, राहुल गांधी सबसे लंबे समय तक विपक्ष के नेता बन सकते हैं क्योंकि वह तो बस छुट्टियों पर ही रहते हैं।”

 

हर बच्चे तक पहुंचे पोलियो की सुरक्षा का कवच : पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पिलाई जीवनरक्षक खुराक

रायपुर

प्रदेश में चल रहे राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज अंबिकापुर जिले के लखनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंद पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक अभियान में हर बच्चे को समय पर पोलियो की खुराक पिलाना अत्यंत आवश्यक है।

मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि भारत ने वर्षों के सतत प्रयास, जनभागीदारी और स्वास्थ्यकर्मियों की अथक मेहनत से पोलियो पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। अब इस उपलब्धि को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने परिवार, मोहल्ले और आसपास के 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं, ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि “दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार” केवल एक संदेश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आजीवन स्वस्थ रखने का राष्ट्रीय संकल्प है। यदि कोई बच्चा बूथ तक नहीं पहुंच पाता है तो अभिभावक घर-घर आने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम को अवश्य जानकारी दें और सुनिश्चित करें कि बच्चे को पोलियो की खुराक मिल जाए।
 राजेश अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पित प्रयासों से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता और जागरूकता के बल पर छत्तीसगढ़ भविष्य में भी अपनी पोलियोमुक्त पहचान को सुदृढ़ बनाए रखेगा।

उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। स्वस्थ बचपन ही सशक्त भारत की आधारशिला है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपने आसपास किसी भी बच्चे को पोलियो की खुराक से वंचित न रहने दे तथा अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करे।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। बच्चों को उत्साहपूर्वक पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाई गई तथा अभिभावकों को नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया गया।

छत्तीसगढ़ में 36 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य

प्रदेश में 28 से 30 जून 2026 तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत राज्य के लगभग 35 लाख 98 हजार 904 (करीब 36 लाख) बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पूरे प्रदेश में 14 हजार 396 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, जहां 28 जून को बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है।

अभियान को सफल बनाने के लिए 28 हजार 791 टीमें तथा 57 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। बूथ दिवस के बाद 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके।
विशेष क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के सभी 33 जिलों में अभियान की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों, शहरी मलिन बस्तियों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों पर रहने वाले श्रमिक परिवारों, प्रवासी एवं घुमंतू समुदायों के बच्चों तक विशेष रूप से पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की सुरक्षा से वंचित न रहे।

देशभर में लगभग 17 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य

वर्तमान राष्ट्रव्यापी पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत देशभर में लगभग 17 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि बच्चे को हाल ही में कोई अन्य टीका लगाया गया हो, तब भी पोलियो की खुराक पूरी तरह सुरक्षित है और अवश्य दी जानी चाहिए। हल्की सर्दी, खांसी या सामान्य बुखार होने पर भी बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जा सकती हैं।

“दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार”

पोलियोमुक्त भारत और पोलियोमुक्त छत्तीसगढ़ की पहचान बनाए रखने के लिए प्रत्येक परिवार की सहभागिता आवश्यक है।  हम सभी संकल्प लें कि हमारे आसपास का कोई भी बच्चा पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंद से वंचित न रहे। यही स्वस्थ बचपन, सुरक्षित भविष्य और सशक्त राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव है।

दो बूंदों से सुरक्षित बचपन की ओर बढ़ा जीपीएम, राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, 53 हजार से अधिक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य

रायपुर

 जीपीएम जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ रविवार को जिला चिकित्सालय में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को समय पर पोलियो की खुराक दिलाना केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि वे शून्य से पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं, ताकि पोलियो मुक्त भारत का संकल्प और अधिक सशक्त हो सके। उन्होंने कहा कि “दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत रहे बरकरार” केवल एक संदेश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का संकल्प है।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. के.के. सोनी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। अभियान के शुभारंभ के साथ ही जिले के सभी निर्धारित पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का कार्य प्रारंभ किया गया। बूथों पर सुबह से ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचे और उत्साहपूर्वक अभियान में भागीदारी निभाई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष जिले में 53 हजार 490 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के प्रथम चरण में 28 जून को सभी पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई, जबकि दूसरे एवं तीसरे चरण में 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। इसके लिए जिले भर में विशेष स्वास्थ्य दलों का गठन किया गया है, जिन्हें प्रत्येक गांव, मोहल्ले और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है तथा पोलियो की दवा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर ली गई हैं। दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विशेष दल तैनात किए गए हैं ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि यदि उनके घर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचे तो उसका पूरा सहयोग करें और सुनिश्चित करें कि परिवार के शून्य से पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलाई जाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि पोलियो की नियमित खुराक ही इस गंभीर बीमारी से बच्चों को स्थायी सुरक्षा प्रदान करती है। जनसहभागिता और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से ही पोलियो मुक्त समाज का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है।

विदेशी डॉक्टरों को प्रैक्टिस की अनुमति पर स्वास्थ्य मंत्री का पलटवार, बोले- बयानबाजी छोड़ छत्तीसगढ़ की भी करें चिंता

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस की अनुमति देने के स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है. इस कदम के पीछे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश में डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि जो डॉक्टर सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं, वो प्रदेश की भी चिंता करें.

दरअसल, सरकार के इस फैसले का प्रदेश के डॉक्टर लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे स्थानीय डॉक्टरों के हित प्रभावित होंगे. लेकिन स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि केवल वही डॉक्टर अनुमति के पात्र होंगे, जिनका दूसरे राज्यों में वैध रजिस्ट्रेशन हो, और जो एनएमसी से पंजीकृत हों. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर डॉक्टरों से जल्द बातचीत की जाएगी. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम सोच समझकर उठाया है. वैसे भी छत्तीसगढ़ पहला राज्य नहीं जहां यह पैटर्न लागू किया जा रहा है, देश के चार-पांच राज्यों ने भी इस पैटर्न को अपनाया है. उन्होंने बताया कि प्रोफेसर के 125 पदों पर हमने रेगुलर भर्ती निकाली थी, इसमें कुल 78 आए हैं. हमारे पास वेकेन्सी की कमी नहीं है. भर्ती निकाल रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी डॉक्टर न मिले तो हम क्या करें.

मंत्री ने बच्चों को पिलाई ‘जिंदगी की दो बूंद’
राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई. इस दौरान लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को पोलियो पीनी चाहिए. जो 5 साल के कम उम्र के बच्चे हैं. उन्हें पोलियो पिलाने के लिए अलग-अलग जिलों में स्वास्थ्य केंद्र में पोलियो का कार्यक्रम किया जा रहा है.

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