LPG सिलेंडर के दाम स्थिर, घरेलू उपभोक्ताओं को नहीं मिली कोई राहत या बढ़ोतरी

 नई दिल्ली
एक तरफ कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में लगातार गिर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ एलपीजी सिलेंडर दे दाम स्थिर है। युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दो बार इजाफा किया गया था। पहली बार सिलेंडर का रेट 7 मार्च 2026 को बढ़ा था। तब एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, दूसरी बार कीमतों में 7 जून को इजाफा हुआ था। तब दाम 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। बता दें, आज रविवार को एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। कीमतें पुराने स्तर पर ही हैं।

कॉमर्शियर सिलेंडर की कीमतों में युद्ध के शुरू होने के बाद तेज इजाफा दर्ज किया है। मौजूदा समय में देश के कई बड़े शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट 3100 रुपये को क्रॉस कर गया।

घरेलू सिलेंडर का क्या है दाम? (LPG Cylinder Rates)
नई दिल्ली – 942 रुपये

कोलकाता – 968 रुपये

मुंबई – 941.50 रुपये

चेन्नई – 957.50 रुपये

गुरुग्राम – 950.50 रुपये

नोएडा – 939.50 रुपये

बेंगलुरू – 944.50 रुपये

भुवनेश्वर – 968 रुपये

चंडीगढ़ – 951.50 रुपये

हैदराबाद – 994 रुपये

जयपुर – 945.50 रुपये

लखनऊ – 979.50 रुपये

पटना – 1031.50 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 951 रुपये

कॉमर्शियल सिलेंडर का क्या है रेट?
नई दिल्ली – 3113.50 रुपये

कोलकाता – 3255.50 रुपये

मुंबई – 3067.50 रुपये

चेन्नई – 3283 रुपये

गुरुग्राम – 3130 रुपये

नोएडा – 3113.50 रुपये

बेंगलुरू – 3198 रुपये

भुवनेश्वर – 3290 रुपये

चंडीगढ़ – 3136 रुपये

हैदराबाद – 3367 रुपये

जयपुर – 3141 रुपये

पटना – 3400 रुपये

लखनऊ – 3236 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 3152 रुपये

स्थिति में हो रहा है सुधार
केंद्र सरकार ने बीते दिनों इंडस्ट्री को सप्लाई किए जाने वाले एलपीजी सिलेंडर की लिमिट को हटा लिया है। यानी अब उनके डिमांड के हिसाब से एलपीजी सिलेंडर मिलेंगे। सरकार ने कहा कि हालिया स्तर पर एलपीजी की बेहतर स्थिति के बाद यह फैसला लिया गया है। बता दें, युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने इंडस्ट्रीयल एलपीजी सिलेंडर पर कैप लगा दिया था

भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तक हिस्सा कतर सहित कई अन्य अरब देशों से मंगाता है। लेकिन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई थी। जिसके बाद देश में एलपीजी की किल्लत देखने को मिली। सरकार ने स्थिति को देखते हुए इंडस्ट्रीयल सप्लाई पर सीमा लगा दिया। वहीं, शहरों और गांवों में बुकिंग एक निश्चित दिन तय कर दिए। इन सबके अलावा केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने का भी निर्देश ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दिया था।

अमित शाह की नागा विधायकों से बैठक पर मणिपुर की सियासत गरमाई, कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठख में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे, लेकिन इस बैठक के बाद अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सवाल उठाया कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की बैठक के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह मौजूद क्यों नहीं थे? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर मणिपुर के नागा विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के

बीच में बैठक मणिपुर सीएम के बिना कैसे आयोजित हो सकती है?
इस बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मणिपुर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र सिंह ने कहा कि इस बैठख के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच की बैठक से मुख्यमंत्री को अलग रखना यह पद की गरिमा और उसके अधिकार को कम करता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने के लिए पहुंचे उप मुख्यमंत्री लोसी दीखो पर भी सवाल उठाया।

विधायकों को अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं- कांग्रेस
मेघचंद्र ने कहा, “यह बैठक दिखाती है कि उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो और नागा विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है। इसलिए तो वह बिना मुख्यमंत्री के सीधे नागा विधायकों से मिलने के लिए पहुंचे हैं।” इसके अलावा उन्होंने बैठक में मौजूद नागालैंड के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रशासन राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से होना चाहिए न कि पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा आखिर

मणिपुर के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नागालैंड के सीएम ने क्यों किया?
दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर कटाक्ष करते हुए मेघचंद्र ने कहा कि राज्य में पर्याप्त सुरक्षा होने के कबाद भी डिप्टी सीएम का दिल्ली में रहना यह दिखाता है कि उनकी प्राथमिकता क्या है। वह राज्य की नहीं केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं। इतना ही नहीं मेघचंद्र ने सीएम को कागजी शेर करार देते हुए कहा कि राज्य के शासन पर उनका प्रभाव खत्म हो गया है।

कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इन सवालों का अभी तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें, युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है ज्यादा प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली
 केंद्र सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज हो चली हैं। बताया जा रहा है कि इस फेरबदल के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक संदेश के नजरिए से इस फेरबदल में तीन अहम मतदाता समूहों युवा, पिछड़ी जातियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई सांसदों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश
विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों और नीट पेपर लीक मामले पर सरकार के खिलाफ रुख के मद्देनजर इस फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश की जाएगी। बताया जा रहा है कि जहां एक दर्जन से ज्यादा राज्य मंत्रियों की जगह युवा सांसदों (शायद कुछ अपने पहले कार्यकाल वाले भी) को लाया जा सकता है, वहीं मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की अपनी कोशिश के तहत मंत्रिपरिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ा सकते हैं।

यूपी में कायम रखना चाहेंगे पिछड़ी जातियां को समर्थन आधार
उत्तर प्रदेश में किसी भी चुनावी जीत के लिए पिछड़ी जातियां आधार होती हैं, इसलिए उम्मीद है कि प्रधानमंत्री जुलाई 2021 के फेरबदल वाले तरीके को ही अपनाएंगे और अलग-अलग पिछड़ी जातियों के सांसदों को शामिल करेंगे, ताकि अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनावों में उनके बीच पार्टी का समर्थन आधार बना रहे।

राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय करना चाहेगी बीजेपी
वहीं बीजेपी और उसके NDA गठबंधन के सूत्रों का कहना है कि इस कवायद से राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय हो सकता है, जो मोदी के तीसरे कार्यकाल के बाकी समय में केंद्र के कामकाज और उससे भी अहम, 2029 के लोकसभा चुनावों और उससे पहले होने वाले कई विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की चुनावी रणनीति को आकार देगा। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या इसमें बेरोजगारी पर काबू पाने, ईंधन की बढ़ती कीमतों और बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने जैसे मामलों में केंद्र के खराब रिकॉर्ड के लिए जवाबदेही भी तय की जाएगी या नहीं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कोविड-19 को आधार बनाकर नहीं रोकी जा सकती अनुकंपा नियुक्ति

बिलासपुर.

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन के चन्द्रवंशी की एकलपीठ ने कहा है, कि कोरोना महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) समय पर आयोजित नहीं होने का नुकसान अनुकंपा नियुक्ति के आवेदक को नहीं भुगतना पड़ेगा. कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है.

दरअसल, धमतरी निवासी वासुदेव साहू के पिता, जो सहायक शिक्षक थे, का वर्ष 2017 में सेवा के दौरान निधन हो गया था. इसके बाद वासुदेव ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया. आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए उन्हें तीन वर्ष का समय दिया गया था. उन्होंने डी.एल.एड. की परीक्षा समय पर उत्तीर्ण कर ली, लेकिन मार्च 2020 में होने वाली टेट परीक्षा कोविड-19 के कारण निरस्त हो गई. बाद में जनवरी 2022 में आयोजित परीक्षा में उन्होंने सफलता प्राप्त की. इसके बावजूद पंचायत विभाग ने निर्धारित समय में योग्यता प्राप्त न करने का हवाला देकर उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा अस्वीकार कर दिया. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि, टेट परीक्षा समय पर आयोजित न होना अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति थी. इसलिए उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा, कि कोविड अवधि में समय-सीमा संबंधी राहत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश इस मामले में भी लागू होंगे. हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2022 का अयोग्यता आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को वासुदेव साहू के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है.

छत्तीसगढ़ में दर्दनाक हादसा, दीवार ढहने से दो बच्चों की मौत, महिला गंभीर घायल

बेमेतरा.

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दीवार ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना से गांव में कोहराम मच गया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरु कर दी है।

यह पूरा मामला नवागढ़ विधानसभा के ग्राम राउरपुर का है। बच्चियों की पहचान वंशिका (11) और राधिका (7) पिता ओमप्रकाश कोशले के रूप में हुई है और घायल महिला की पहचान शशिकला के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि आज दोनों बच्चे घर के आंगन में बर्तन धो रहे थे। इसी दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई, जिसकी चपेट में दोनों बच्चे और महिला आ गई।

दोनों बच्चों की मौत, महिला घायल
चीख पुकार मचते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आनन फानन में 108 के जरिए सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मौत हो चुकी थी। वहीं महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच में जुट गई।

‘मन की बात’ जनभागीदारी और जनप्रेरणा का सशक्त माध्यम बना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 135वीं कड़ी जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ सुनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ आज जनता और नेतृत्व के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार देशवासियों को प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कड़ी में देशभर से नवाचार, जनभागीदारी और प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ की अनेक कड़ियों में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और उपलब्धियों का उल्लेख होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा वर्षा जल के प्रत्येक बूंद के संरक्षण का संदेश देते हुए जल संचय को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेघालय के जीवित रूट ब्रिज का उल्लेख करते हुए प्रकृति और मानव के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान, तर्क और जागरूकता के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। असम की महिलाओं द्वारा ‘हरगिला आर्मी’ के माध्यम से दुर्लभ पक्षी हरगिला के संरक्षण और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास जनजागरूकता का प्रेरक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नागालैंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संचालित नागालैंड बेबी लीग और नागालैंड वुमन फुटसाल लीग जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय एवं सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि डोमिनिकन रिपब्लिक में ‘ब्रह्मकमल डोमिनिकाना’ के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति से जुड़ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट से सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने की पहल स्वच्छता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने, अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रेलवे कर्मचारियों के अनुकंपा नियुक्ति वालों को मिलेगी पुरानी पेंशन, बड़ा फैसला

भोपाल.

रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने वाले रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार अब मृतक रेल कर्मचारी के आश्रित द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए पहली बार आवेदन जमा करने की तारीख को ही भर्ती की मुख्य तिथि यानी क्रूशियल डेट माना जाएगा।

इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिनका आवेदन 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले जमा किया गया था, लेकिन उनकी वास्तविक नियुक्ति एक जनवरी 2004 के बाद हुई। ऐसे कर्मचारियों को भी अब पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा।

आवेदन की तारीख होगी भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत
अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में पहले कोई सीधा विज्ञापन या अधिसूचना जारी नहीं होती थी। इसी वजह से इन नियुक्तियों की कट-ऑफ तारीख तय करने में परेशानी आती थी। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत किस तारीख से मानी जाए। रेलवे बोर्ड के नए आदेश के बाद अब यह तय कर दिया गया है कि जिस दिन अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा किया गया था, वही तारीख भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख मानी जाएगी।

रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को दिए निर्देश
रेलवे बोर्ड के उप निदेशक वित्त रमेश चंद्र पांडेय ने 24 जून को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। आदेश में उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोन, उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों और मुख्य वित्तीय सलाहकारों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अब उन सभी लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा, जिनमें तकनीकी तारीखों के कारण आश्रित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

पहले क्या था नियम?
अब तक पुरानी पेंशन का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलता था, जिनकी भर्ती प्रक्रिया एक जनवरी 2004 से पहले शुरू हो गई थी या जिन्हें उस तारीख से पहले नियुक्ति मिल गई थी। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को लेकर असमंजस बना रहता था। नए आदेश से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है और कई कर्मचारियों को पेंशन संबंधी लाभ मिल सकेगा।

यूनियनों ने फैसले का किया स्वागत
मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव और इंप्लाइज संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे रेलकर्मियों के परिवारों के हित में ऐतिहासिक और न्यायसंगत कदम बताया। CPRO शशिकांत त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इन सभी कर्मचारियों को रेलवे सेवा पेंशन नियम 2026 के तहत कवर किया जाएगा।

इंदौर-उज्जैन रोड पर बस पलटी, 20 यात्री घायल; शराब के नशे में मिला ड्राइवर

उज्जैन.

इंदौर-उज्जैन रोड पर शनिवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। इंदौर से उज्जैन आ रही सपना ट्रैवल्स की यात्रियों से भरी बस मेघदूत होटल के समीप अनियंत्रित होकर पलट गई। दुर्घटना में करीब 20 यात्री घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं।

घायलों को तत्काल उपचार के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार हादसा रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ। सपना ट्रैवल्स की बस इंदौर बस स्टैंड से सवारियां लेकर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के लिए रवाना हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे और कई लोग खड़े होकर सफर कर रहे थे। इसी दौरान मेघदूत होटल के पास चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय तेज बारिश हो रही थी। यात्रियों का आरोप है कि चालक शराब के नशे में बस चला रहा था, जिससे दुर्घटना हुई। बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया।सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। चालक के मेडिकल परीक्षण सहित दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

ये यात्री हुए घायल
दुर्घटना में वर्षा पत्नी गोविंद अग्रवाल (54) एवं पुत्र सुधीर अग्रवाल (25) निवासी ग्वालियर, खुशी पुत्री नीरज तिवारी (15) निवासी विजयनगर इंदौर, वंश पुत्र मोहन खत्री (10), वंदना पत्नी मोहन खत्री (32) निवासी साइन धाम कॉलोनी उज्जैन, हरविंदर सिंह पुत्र अर्जुन सिंह (32) निवासी जीवनखेड़ी सहित करीब 20 यात्री घायल हुए हैं। सभी को उपचार के लिए चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कराची में रेंजर्स कैंप पर बड़ा आतंकी हमला, 4 सुरक्षाकर्मी और 6 आतंकी मारे गए

नई दिल्ली
पाकिस्तान के शहर कराची में शनिवार देर रात सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला हुआ है। इस हमले में चार पाकिस्तानी रेंजर्स की मौत हुई है, जबकि 6 आतंकी भी मारे गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया है। शनिवार देर शाम हुए इस हमले में सबसे पहले एक धमाका हुआ इसके बाद गोलियां चलने की आवाज आने लगी। तुरंत ही पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया इसके बाद मुठभेड शुरू हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार देर रात कराची के मौसमियात चौरंगी इलाके में सिंध रेंजर्स के कैंप पर हमला हुआ था। इसी इलाके में कई कॉलेज और पाकिस्तानी मौसम विभाग का केंद्र भी है। हमले के तुरंत बाद रेंजर्स ने पूरे घटनास्थल को घेर लिया। फिर गोलीबारी शुरु हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हमला करीब 8.30 बजे शुरु हुआ था। आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के ठिकानों को निशाना बनाया और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 90 मिनट तक चली इस गोलीबारी में 6 आतंकवागी मारे गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया है

ग्रेनेड से हुआ था हमला
इससे पहले रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि उसे सबसे पहले गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास हमले की जानकारी मिली थी। इसके बाद तुरंत ही सेंट्र्ल कमांड को सूचित किया गया और पाकिस्तानी सेना का आतंकरोधी दस्ता वहां पहुंच गया।

पाकिस्तानी पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक, हमलावर कार से आए थे। उन्होंने सीधे जाकर रेंजर्स के कैंप से अपनी कार को टकरा दिया और सीधा अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अंदर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद उनके और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो कि करीब 90 मिनट तक चली।

TTP के सहयोगी ने ली हमले की जिम्मेदारी
पाकिस्तानी सेना की नाक में दम करने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सहयोगी आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बता दें, टीटीपी मुख्य रूप से पाकिस्तान में अफगानिस्तान की तरह ही तालिबान शासन स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह खैबर पख्तूनख्वा से अपना अभियान चलाता है। आमतौर पर वह पाकिस्तानी सेना और उसके सैनिकों को निशाना बनाता है।

पिछले कई वर्षों से यह संगठन पाकिस्तान सैन्य जनरलों, सैनिकों और पुलिस को निशाना बनाता आ रहा है। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि हमला करके यह लड़ाके अफगानिस्तान भाग जाते हैं। इन्हीं तालिबान लड़ाकों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान में हमला करता रहता है।

जीएसटी के 10 साल: सरकार एआई आधारित टैक्स सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है

 नई दिल्ली
 देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सिस्टम लागू होने के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार का ध्यान केवल कर संग्रह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एआई आधारित अनुपालन, तेज रिफंड, डेटा इंटीग्रेशन और टैक्स प्रोसेस को सरल बनाने पर केंद्रित हो गया है। इसका उद्देश्य कारोबार क्षेत्रों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अनुपालन लागत कम करना और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है ताकि जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सके, टैक्स चोरी की पहचान आसान हो और मैन्युअल हस्तक्षेप कम किया जा सके।

सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिनती
एआई और डेटा विश्लेषण के जरिये अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एफिशिएंट बनाया जा रहा है। जीएसटी को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, करदाताओं का दायरा बढ़ाया है, अनुपालन को मजबूत किया है और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
एक जुलाई, 2017 को आधी रात में संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरुआत की थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बताते हुए कहा था कि इससे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।

‘एक राष्ट्र, एक टैक्स’ की अवधारणा
जीएसटी लागू करने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 प्रकार के कर तथा 13 तरह के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी में इन्हें समाहित कर पूरे देश के लिए एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को बल मिला।
इस व्यापक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए लंबी बातचीत की थी। जेटली ने इसे दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक के पुनर्गठन की बड़ी उपलब्धि बताया था।

टैक्स रेट में बदलाव
जीएसटी लागू होने के समय देश में पंजीकृत करदाताओं की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। इसे अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में जीएसटी में चार कर स्लैब-5, 12, 18 और 28 प्रतिशत थे।
वहीं विलासिता वाली वस्तुओं और अहितकर उत्पादों मसलन तंबाकू आदि पर 28 प्रतिशत के कर के अलावा अतिरिक्त उपकर भी लगाया गया। बाद में कर प्रणाली में सुधार के तहत 22 सितंबर, 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई।
इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को पांच प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया। वहीं केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक नकदी बच रही है।

एवरेज जीएसटी कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपये
वित्त मंत्री निमला सीतारमण के अनुसार नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना है। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी परिषद करती है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के समय औसत मासिक जीएसटी संग्रह 89,700 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये प्रति माह पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था।

पेट्रोलियम उत्पादों पर चर्चा जारी
वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी संविधान संशोधन के तहत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाएगा।

हालांकि, यह फैसला जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया था कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस को किस तारीख से जीएसटी के तहत लाया जाए। इस संबंध में जीएसटी परिषद में विमान ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर कुछ चर्चा हुई थी, लेकिन राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ऐसे में इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर फिलहाल राज्यों की पहल का इंतजार कर रही है। यानी जब तक राज्य इस संबंध में प्रस्ताव नहीं लाते, तब तक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।

 

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