इंदौर-उज्जैन रोड पर बस पलटी, 20 यात्री घायल; शराब के नशे में मिला ड्राइवर

उज्जैन.

इंदौर-उज्जैन रोड पर शनिवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। इंदौर से उज्जैन आ रही सपना ट्रैवल्स की यात्रियों से भरी बस मेघदूत होटल के समीप अनियंत्रित होकर पलट गई। दुर्घटना में करीब 20 यात्री घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं।

घायलों को तत्काल उपचार के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार हादसा रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ। सपना ट्रैवल्स की बस इंदौर बस स्टैंड से सवारियां लेकर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के लिए रवाना हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे और कई लोग खड़े होकर सफर कर रहे थे। इसी दौरान मेघदूत होटल के पास चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय तेज बारिश हो रही थी। यात्रियों का आरोप है कि चालक शराब के नशे में बस चला रहा था, जिससे दुर्घटना हुई। बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया।सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। चालक के मेडिकल परीक्षण सहित दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

ये यात्री हुए घायल
दुर्घटना में वर्षा पत्नी गोविंद अग्रवाल (54) एवं पुत्र सुधीर अग्रवाल (25) निवासी ग्वालियर, खुशी पुत्री नीरज तिवारी (15) निवासी विजयनगर इंदौर, वंश पुत्र मोहन खत्री (10), वंदना पत्नी मोहन खत्री (32) निवासी साइन धाम कॉलोनी उज्जैन, हरविंदर सिंह पुत्र अर्जुन सिंह (32) निवासी जीवनखेड़ी सहित करीब 20 यात्री घायल हुए हैं। सभी को उपचार के लिए चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कराची में रेंजर्स कैंप पर बड़ा आतंकी हमला, 4 सुरक्षाकर्मी और 6 आतंकी मारे गए

नई दिल्ली
पाकिस्तान के शहर कराची में शनिवार देर रात सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला हुआ है। इस हमले में चार पाकिस्तानी रेंजर्स की मौत हुई है, जबकि 6 आतंकी भी मारे गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया है। शनिवार देर शाम हुए इस हमले में सबसे पहले एक धमाका हुआ इसके बाद गोलियां चलने की आवाज आने लगी। तुरंत ही पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया इसके बाद मुठभेड शुरू हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार देर रात कराची के मौसमियात चौरंगी इलाके में सिंध रेंजर्स के कैंप पर हमला हुआ था। इसी इलाके में कई कॉलेज और पाकिस्तानी मौसम विभाग का केंद्र भी है। हमले के तुरंत बाद रेंजर्स ने पूरे घटनास्थल को घेर लिया। फिर गोलीबारी शुरु हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हमला करीब 8.30 बजे शुरु हुआ था। आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के ठिकानों को निशाना बनाया और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 90 मिनट तक चली इस गोलीबारी में 6 आतंकवागी मारे गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया है

ग्रेनेड से हुआ था हमला
इससे पहले रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि उसे सबसे पहले गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास हमले की जानकारी मिली थी। इसके बाद तुरंत ही सेंट्र्ल कमांड को सूचित किया गया और पाकिस्तानी सेना का आतंकरोधी दस्ता वहां पहुंच गया।

पाकिस्तानी पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक, हमलावर कार से आए थे। उन्होंने सीधे जाकर रेंजर्स के कैंप से अपनी कार को टकरा दिया और सीधा अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अंदर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद उनके और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो कि करीब 90 मिनट तक चली।

TTP के सहयोगी ने ली हमले की जिम्मेदारी
पाकिस्तानी सेना की नाक में दम करने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सहयोगी आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बता दें, टीटीपी मुख्य रूप से पाकिस्तान में अफगानिस्तान की तरह ही तालिबान शासन स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह खैबर पख्तूनख्वा से अपना अभियान चलाता है। आमतौर पर वह पाकिस्तानी सेना और उसके सैनिकों को निशाना बनाता है।

पिछले कई वर्षों से यह संगठन पाकिस्तान सैन्य जनरलों, सैनिकों और पुलिस को निशाना बनाता आ रहा है। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि हमला करके यह लड़ाके अफगानिस्तान भाग जाते हैं। इन्हीं तालिबान लड़ाकों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान में हमला करता रहता है।

जीएसटी के 10 साल: सरकार एआई आधारित टैक्स सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है

 नई दिल्ली
 देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सिस्टम लागू होने के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार का ध्यान केवल कर संग्रह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एआई आधारित अनुपालन, तेज रिफंड, डेटा इंटीग्रेशन और टैक्स प्रोसेस को सरल बनाने पर केंद्रित हो गया है। इसका उद्देश्य कारोबार क्षेत्रों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अनुपालन लागत कम करना और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है ताकि जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सके, टैक्स चोरी की पहचान आसान हो और मैन्युअल हस्तक्षेप कम किया जा सके।

सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिनती
एआई और डेटा विश्लेषण के जरिये अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एफिशिएंट बनाया जा रहा है। जीएसटी को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, करदाताओं का दायरा बढ़ाया है, अनुपालन को मजबूत किया है और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
एक जुलाई, 2017 को आधी रात में संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरुआत की थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बताते हुए कहा था कि इससे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।

‘एक राष्ट्र, एक टैक्स’ की अवधारणा
जीएसटी लागू करने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 प्रकार के कर तथा 13 तरह के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी में इन्हें समाहित कर पूरे देश के लिए एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को बल मिला।
इस व्यापक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए लंबी बातचीत की थी। जेटली ने इसे दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक के पुनर्गठन की बड़ी उपलब्धि बताया था।

टैक्स रेट में बदलाव
जीएसटी लागू होने के समय देश में पंजीकृत करदाताओं की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। इसे अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में जीएसटी में चार कर स्लैब-5, 12, 18 और 28 प्रतिशत थे।
वहीं विलासिता वाली वस्तुओं और अहितकर उत्पादों मसलन तंबाकू आदि पर 28 प्रतिशत के कर के अलावा अतिरिक्त उपकर भी लगाया गया। बाद में कर प्रणाली में सुधार के तहत 22 सितंबर, 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई।
इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को पांच प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया। वहीं केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक नकदी बच रही है।

एवरेज जीएसटी कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपये
वित्त मंत्री निमला सीतारमण के अनुसार नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना है। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी परिषद करती है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के समय औसत मासिक जीएसटी संग्रह 89,700 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये प्रति माह पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था।

पेट्रोलियम उत्पादों पर चर्चा जारी
वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी संविधान संशोधन के तहत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाएगा।

हालांकि, यह फैसला जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया था कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस को किस तारीख से जीएसटी के तहत लाया जाए। इस संबंध में जीएसटी परिषद में विमान ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर कुछ चर्चा हुई थी, लेकिन राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ऐसे में इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर फिलहाल राज्यों की पहल का इंतजार कर रही है। यानी जब तक राज्य इस संबंध में प्रस्ताव नहीं लाते, तब तक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।

 

यूपी में INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव, कांग्रेस ने 50-50 हिस्सेदारी की मांग रखी

नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर अभी से शह और मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जिम्मेदारी संभालते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने ‘बराबर-बराबर’ सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग रख दी है। गौतम ने न सिर्फ आधी सीटों पर दावा ठोका, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की जमकर तारीफ भी की जिसने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम ने साफ-साफ कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं चाहूंगा कि गठबंधन में दोनों पार्टियों की बराबर की हिस्सेदारी हो। हालांकि, जब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत होगी तब अंतिम फैसला होगा। मुझे पहले से कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से आधी सीटों के लिए अपनी बात मजबूती से रखेंगे।”

403 सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। अगर इतिहास पर नजर डालें तो ठीक 10 साल पहले भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, कई सीटों पर दोनों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ भी हुई थी और अंततः बीजेपी की प्रचंड लहर में वह गठबंधन बिखर गया था।

इसके बाद दोनों दल लोकसभा चुनावों में साथ आए, जहां उन्हें बड़ी सफलता मिली। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा ने 62 पर चुनाव लड़कर 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटों पर कब्जा जमाया।

दावों और उम्मीदों का टकराव
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के उत्साह से लबरेज कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सपा से करीब 150 सीटों की मांग कर सकती है। शुरुआती संकेतों की मानें तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 70 से 80 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम का ‘बराबर हिस्सेदारी’ वाला बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब 2017 में सपा सत्ता में थी, तब भी उन्होंने कांग्रेस को 105 सीटें दी थीं तो इस बार उनका हिस्सा और बड़ा होना चाहिए। कांग्रेस रणनीतिकारों को लगता है कि चूंकि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं, इसलिए वे कांग्रेस को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएंगे। उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को गठबंधन में मजबूत भूमिका मिलती है तो वह सपा के पाले में दलित और ब्राह्मण वोटों का ट्रांसफर आसानी से करवा सकती है।

मायावती पर डोरे और कांसीराम कार्ड
राजेंद्र पाल गौतम ने बातचीत के दौरान बसपा प्रमुख मायावती को भी साथ आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा, “संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बहुजन समाज के मुद्दों पर काम करने वाले सभी लोगों को इस दमनकारी मनुवादी सरकार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।” मायावती की तारीफ करते हुए गौतम ने कहा, “बहनजी हमारे समाज की एक बड़ी और कद्दावर नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं। वे हमेशा एक मजबूत नेता रही हैं। समझ नहीं आता कि आज उनकी क्या मजबूरियां हैं

दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने ही राजेंद्र पाल गौतम अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ बिना किसी तय कार्यक्रम के लखनऊ में मायावती के घर पहुंचे थे, हालांकि तब उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी।

चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते कद को रोकने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय से आने वाले सांसद चंद्रशेखर आजाद का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में दलित समुदाय के ही राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का जिम्मा सौंपकर कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साधना चाहती है। वह मायावती के छिटक रहे दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को भी नियंत्रित करना चाहती है। यही वजह है कि अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में मान्यवर कांसीराम की तस्वीरें भी दिखाई देने लगी हैं।

भले ही राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल की वजह से अंत में कोई बीच का रास्ता निकल आए, लेकिन नए प्रभारी के इन बयानों ने समाजवादी पार्टी के भीतर असहजता जरूर पैदा कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि सपा ने 111 सीटें जीती थीं। अब देखना होगा कि जमीन पर कमजोर सांगठनिक ढांचे के बावजूद कांग्रेस का यह बराबर का दांव कितना कामयाब होता है।

रायपुर का निरीक्षण करने में स्कूटी से निकले उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लगभग तीन घंटे तक स्कूटी से बिलासपुर शहर का भ्रमण कर नगर निगम, स्मार्ट सिटी तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।

उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि कार्यों में अनावश्यक विलंब या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी और नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे भी उनके निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री साव ने आज बिलासपुर में मंगला स्थित 10 एमएलडी एवं 6 एमएलडी क्षमता के निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कोनी कन्वेंशन सेंटर, शिवघाट बैराज, रामसेतु के बाईं ओर अटल पथ निर्माण, अशोकनगर-बिरकोना सड़क गौरव पथ निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया।

उन्होंने अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने में आ रही बाधाओं का निराकरण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसटीपी निर्माण में विलंब पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ठेकेदार निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि अरपा नदी बिलासपुर की जीवनदायिनी है और शहरवासियों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। इसके संरक्षण एवं पुनरुद्धार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। उन्होंने अरपा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और उसके पुनरुद्धार के लिए तैयार 250 करोड़ 93 लाख रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए इसे शीघ्र धरातल पर उतारने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में शहर के लगभग 70 नालों का दूषित पानी सीधे अरपा नदी में गिर रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम द्वारा 250 करोड़ 93 लाखि रुपये की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया गया है। इसके तहत नगर निगम सीमा क्षेत्र में 17 किलोमीटर लंबाई में प्रवाहित 70 नालों के दूषित जल को उपचारित करने की व्यापक योजना बनाई गई है। परियोजना में 57 स्थानों पर इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन स्ट्रक्चर, 13 स्थानों पर डाइवर्जन वियर, 9.99 किलोमीटर डाइवर्जन सीवर, 2.77 किलोमीटर सीवरेज पंपिंग राइजिंग मेन, 3 सीवेज पंपिंग स्टेशन, 2 नए एसटीपी सहित विद्युतीकरण एवं इंस्ट्रूमेंटेशन कार्य शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नालों का गंदा पानी नदी में जाने से पहले उपचारित किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण कर राज्य शासन स्तर पर त्वरित स्वीकृति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अरपा नदी के संरक्षण का कार्य जल्द प्रारंभ हो सके। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शहर में बेतरतीब ढंग से लगे बिजली के खंभों एवं ट्रांसफार्मरों को व्यवस्थित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही भविष्य में नए बिजली खंभे अथवा ट्रांसफार्मर स्थापित करने से पूर्व नगर निगम की अनिवार्य सहमति लेने के निर्देश दिए। कोनी स्थित कन्वेंशन सेंटर के लिए पर्याप्त वाहन पार्किंग विकसित करने तथा उसके पीछे स्थित शासकीय भूमि का उपयोग पार्किंग के रूप में किए जाने के निर्देश भी उन्होंने अधिकारियों को दिए।

उन्होंने कहा कि जनहित के सभी काम समय पर पूर्ण हों, और लोगों को त्वरित रूप से इनका लाभ मिले। ठेकेदारों को पेनाल्टी अथवा सजा दिलाना हमारा उद्देश्य नहीं है। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी विकास परियोजनाओं के समयबद्ध पूर्ण होने से बिलासपुर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी और शहर की दशा एवं दिशा में व्यापक परिवर्तन आएगा।

उप मुख्यमंत्री साव के निरीक्षण के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला भी पूरे समय साथ थे। उन्होंने भी अधिकारियों को लम्बे समय से अधूरे पड़े इन कार्यों को जल्द पूर्ण करने का व्यवहारिक समाधान सुझाया। निरीक्षण के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजना, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, सीएसईबी, जल संसाधन विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

उपमुख्यमंत्री साव ने एटीआर क्षेत्र के गांवों में लगाई जनचौपाल

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के अचानकमार क्षेत्र के सुदूर वनांचल ग्रामों- जमुनाही, जकड़बांधा, सुरही और बम्हनी, कटामी और अचानकमार में जनचौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने इस दौरान अनेक विकास कार्यों की घोषणाएं भी की।

ग्राम जमुनाही में उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिवतराई से केवची तक बहुप्रतीक्षित सड़क को स्वीकृति मिल चुकी है। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं बिजराकछार से औरापानी सड़क को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।  ग्रामीणों द्वारा बिजली एवं पेयजल की समस्या उठाए जाने पर उन्होंने तत्काल अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने जमुनाही में सड़क की मरम्मत, गांव में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण, देवभूमि में हैंडपंप स्थापना की घोषणा की तथा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि महतारी वंदन योजना, पेंशन, राशन सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण के निर्देश देते हुए मंच निर्माण के लिए 2 लाख रुपये तथा गणेश चौक में गणेश पंडाल हेतु शेड निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कोटरा-पथरा-मनियारी मार्ग पर पुल निर्माण का सर्वे पूरा हो चुका है और कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाएगा। उन्होंने जनचौपाल के दौरान पेयजल समस्या के समाधान के निर्देश देने के साथ ही स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों को खेल सामग्री भी वितरित किए।

सुरही में उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वनांचल क्षेत्रों में बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सुरही में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्राम बम्हनी में जनचौपाल के दौरान उप मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव के 111 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा 206 महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने निवासखार में पुलिया निर्माण के लिए भी शीघ्र प्रयास करने का भरोसा दिलाया।

उप मुख्यमंत्री ने ग्राम कटामी एवं छपरवा में हैंडपंप एवं पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम बिंदावल में सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की घोषणा की तथा पानी एवं बिजली की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। जनचौपालों में मुंगेली के कलेक्टर कुंदन कुमार और वनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

MP Police में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1 IPS और 64 SPS अधिकारियों के तबादले

भोपाल.

मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग ने 1 आईपीएस (IPS) और 64 राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों समेत कुल 65 पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के आदेश जारी किए हैं।

नई सूची में एसडीओपी, नगर पुलिस अधीक्षक (CSP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), उप पुलिस अधीक्षक (DSP) और सहायक सेनानी जैसे पदों पर अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है। 

सबसे ज्यादा SDOP और Assistant Commandant बदले
तबादला सूची में सबसे ज्यादा बदलाव 22 SDOP और 30 Assistant Commandant के पदों पर हुए हैं। बड़ी संख्या में अधिकारियों को हॉकफोर्स बालाघाट और विशेष सशस्त्र बल (विसबल) की अलग-अलग वाहिनियों में भेजा गया है। वहीं कई जिलों में नए SDOP की तैनाती की गई है। इसके अलावा 9 CSP, 7 ACP, 7 DSP और 1 ASP की भी नई पदस्थापना की गई है। इससे जिला और शहर स्तर पर पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों में नई जिम्मेदारी
तबादला आदेश के तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, धार, बुरहानपुर और पीथमपुर जैसे शहरों में नए CSP और ACP की तैनाती की गई है। वहीं कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय भोपाल में DSP के रूप में पदस्थ किया गया है। कुछ प्रशिक्षु अधिकारियों को पहली बार अलग-अलग जिलों में SDOP की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इन बदलावों से पुलिस व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कई जिलों में नए अधिकारी संभालेंगे कमान
मुरैना, शिवपुरी, अलीराजपुर, मंदसौर, सिवनी, दमोह, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बैतूल, नीमच, बड़वानी, धार, ग्वालियर, सिंगरौली और बालाघाट सहित कई जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा हॉकफोर्स और विशेष सशस्त्र बल की अलग-अलग इकाइयों में भी बड़ी संख्या में अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का मानना है कि समय-समय पर ऐसे प्रशासनिक बदलाव से पुलिस व्यवस्था में बेहतर समन्वय और कामकाज में तेजी आती है।

तुरंत प्रभाव से लागू होंगे आदेश
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों की नई पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। संबंधित अधिकारियों को जल्द अपनी नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने भी आदेश के पालन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आम लोगों को बेहतर कानून व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं।

लोहगढ़ किले मर्डर केस: आरोपियों ने हत्या से पहले Google पर तरीका सर्च करने का खुलासा

मुंबई
महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में कारोबारी केतन अग्रवाल की पहाड़ी से धकेलकर हत्या करने के मामले में हर दिन रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले बाकायदा गूगल पर हत्या करने के तरीके सर्च किए थे। इतना ही नहीं दोनों ने हत्या की जगह का चुनाव करने और पकड़े जाने पर पुलिस को क्या जवाब देना है, इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी।

इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार को दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां पूरे क्राइम सीन को री-क्रिएट किया गया।

पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाया था प्लान B
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिया और चेतन ने इस खौफनाक हत्याकांड को किसी मंझे हुए अपराधियों की तरह अंजाम दिया था। वारदात से पहले दोनों अकेले लोहगढ़ किले गए थे ताकि उस सटीक जगह की पहचान कर सकें जहां से केतन को नीचे धकेला जा सके। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उन्होंने भेष बदलने की भी योजना बनाई थी।

चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिर्फ एक ही योजना नहीं बनाई थी, बल्कि अगर मुख्य प्लान फेल हो जाता तो उनके पास ‘प्लान सी’ भी तैयार था। पकड़े जाने की सूरत में पुलिस के सामने क्या कहानी सुनानी है इसकी स्क्रिप्ट उन्होंने पहले ही रट ली थी। सबूत मिटाने के लिए दोनों ने मोबाइल की पूरी चैट हिस्ट्री और रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, सांप का बहाना बनाया
पुलिस फाइलों से पता चला है कि 18 जून को केतन की हत्या करने से पहले भी सिया ने उसे मारने की कोशिश की थी। बीती 14 जून को सिया केतन को लेकर इसी किले पर आई थी और उसने केतन को धक्का दे दिया था। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने पहाड़ी के किनारे उगी एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई।

उस समय अपनी साजिश पर पर्दा डालने के लिए सिया ने तुरंत नाटक रचा। वह ‘सांप-सांप’ चिल्लाने लगी और केतन को गले लगा लिया, जिससे केतन को लगा कि सिया सचमुच डर गई थी और सांप से बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा था।

जन्मदिन के बहाने दोबारा बुलाया
14 जून को नाकाम होने के बाद सिया ने हार नहीं मानी। 18 जून को अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर वह केतन को दोबारा ट्रेकिंग के लिए लोहगढ़ किला ले आई। इस बार उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी को भी वहां बुला लिया था। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत जैसे ही सिया पहाड़ी के किनारे एक तय जगह पर बैठी वैसे ही पीछे से छिपकर आ रहे चेतन चौधरी ने केतन को जोरदार धक्का दे दिया। केतन संभल पाता उससे पहले ही वह 300 फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसकी मौत हो गई।

17 करोड़ का महल, 2 प्राइवेट प्लेन
केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और आगामी नवंबर में दोनों की बेहद भव्य शादी होने वाली थी। केतन के परिवार ने राजस्थान के जयपुर में एक आलीशान महल को 17 करोड़ रुपये में बुक किया था। यही नहीं बारात और मेहमानों को ले जाने के लिए दो प्राइवेट विमानों की व्यवस्था भी की जा चुकी थी। लेकिन सिया अपने परिवार के सामने चेतन से प्यार की बात स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पुलिस हिरासत में उसने बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि परिवार से बगावत करने और सगाई तोड़ने से ज्यादा आसान केतन को रास्ते से हटाना था।

बिलखते पिता की भावुक अपील
इस बीच शनिवार रात केतन अग्रवाल के गहुंजे स्थित निवास की हाउसिंग सोसाइटी में समाज के लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद रहे पर्यटकों से सामने आने की अपील की। विशाल अग्रवाल ने कहा, “कुछ लोग हमें सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे उस दिन किले पर मौजूद थे और उन्होंने कुछ संदिग्ध देखा था, लेकिन वे पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं। मैं उन सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि कृपया आगे आएं और मेरे बेटे को न्याय दिलाने में पुलिस की मदद करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको किसी कानूनी पचड़े या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले हर उस रास्ते और लोकेशन की वीडियोग्राफी कर रही है, जिसका इस्तेमाल इस वीभत्स हत्याकांड में किया गया था।

दुर्ग में 100 साल पुराने DEO कार्यालय भवन का होगा नवनिर्माण, जल्द शुरू होगा काम

दुर्ग.

दुर्ग जिला मुख्यालय स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय भवन का शीघ्र ही नवनिर्माण किया जाएगा। लंबे समय से जिले की शिक्षा व्यवस्था के संचालन का केंद्र रहे इस ऐतिहासिक भवन को आधुनिक सुविधाओं युक्त नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

जर्जर हो चुके वर्तमान भवन के स्थान पर बनने वाला नया कार्यालय शिक्षा प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी, पारदर्शी एवं जनसुविधा के अनुरूप बनाएगा। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि जिले की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र होता है। यहीं से विद्यालयों के संचालन, शिक्षकों की व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों के हितों, शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचारों तथा शासन की शिक्षा संबंधी योजनाओं का प्रभावी संचालन और अनुश्रवण किया जाता है।

इसलिए इस कार्यालय का आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नया भवन राशि स्वीकृति होने के बाद निर्माण प्रारंभ होगा। आज इंजीनियर के साथ पुराना भवन का निरीक्षण कर जल्द ही ड्राइंग डिज़ाइन तैयार करने निर्देश दिए।

दुर्ग में BSP कार्मिकों का सम्मान, 119 कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मिले पुरस्कार

भिलाई नगर.

सेल – भिलाई इस्पात संयंत्र की ऐतिहासिक नेहरू अवार्ड योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 के लिए नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह का प्रथम चरण शनिवार को आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिन संयंत्र के कुल 119 पुरस्कारों को तीन श्रेणियों-जवाहर पुरस्कार, नेहरू पुरस्कार तथा जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक प्रभारी (बीएसपी) एवं कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अजय कुमार चक्रवर्ती रहें व विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) तुषार कांत, कार्यपालक निदेशक (माइंस) कमल भास्कर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ। विनीता द्विवेदी उपस्थित रहीं। नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिवस जवाहर पुरस्कार श्रेणी में 33 अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए सम्मानित किया गया। नेहरू पुरस्कार श्रेणी में 63 कमर्चारियों को व्यक्तिगत उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार श्रेणी में 23 समूहों को उनके सामूहिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

प्रथम चरण में कुल 119 पुरस्कारों से अधिकारियों एवं कमर्चारियों को संयंत्र की प्रगति एवं उत्कृष्ट कार्य निष्पादन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में ए।के। चक्रवर्ती ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ये पुरस्कार उनके समर्पण, प्रतिबद्धता तथा संगठन की प्रगति में दिए गए उत्कृष्ट योगदान का सम्मान हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि ये पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से प्रदान किए जाते हैं, किंतु वे पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों के भी प्रतीक हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) जे एन ठाकुर ने अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए नेहरू पुरस्कार योजना की रूपरेखा एवं वर्ष 2025 के पुरस्कारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने संयंत्र की सतत प्रगति एवं उत्कृष्ट निष्पादन के लिए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री प्रियंका मीणा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) श्री निवेश विजयन ने दिया। प्रशस्ति पत्र हेतु विजेताओं के नाम का वाचन सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) मिहिर मनोहर तथा उप प्रबंधक (मानव संसाधन) समायला अंसारी ने किया। इस अवसर पर इस्पात बिरादरी के सदस्य एवं पुरस्कार विजेताओं के परिजन उपस्थित रहे।

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