अब अधिकारियों को भी लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी, सरकारी स्कूलों में लागू हुआ नया नियम

भोपाल.

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक ई-अटेंडेंस (E-Attendance Mandatory) केवल शिक्षकों के लिए लागू थी, लेकिन अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे।

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हमारे शिक्षक प्रणाली के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही अवकाश संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा।

सभी स्तरों पर लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था
नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि E-Attendance प्रणाली अब स्कूल शिक्षा विभाग के सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की उपस्थिति की बेहतर निगरानी करना है। एक जुलाई 2026 से पूरी व्यवस्था डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम
DPI के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू रहेगी। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), राज्य शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, जिला शिक्षा केंद्र और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित रूप से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। साथ ही अवकाश से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रणाली में अपडेट करनी होगी।

कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जिम्मेदारी
डीपीआई ने आदेश में संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान प्रमुखों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी स्तर पर व्यवस्था के पालन में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

कटनी के जंगल में तालाब में जहर घोलने से 14 चीतल-सांभरों की मौत, बाघों पर भी मंडराया खतरा

कटनी.

जिले में वन्य प्राणियों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वन्य प्राणियों से जहां आमजन को खतरा है तो वहीं वन्य प्राणी भी आमजन से सुरक्षित नहीं है। इसका एक उदाहरण सामने आया है कि विजयराघगढ़ क्षेत्र में करौंदी-घुघरी के पास तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्य प्राणियों (चीतल व सांभर) का शिकार किया गया।

जिले के बरही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में बाघों का ठिकाना है, तो इसके साथ ही शाहडार के जंगल में बाघ और तेंदुए सहित वन्य प्राणियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है। घटना सामने आने के बाद अब बाघों और अन्य प्राणियों के जीवन को भी खतरा बना हुआ है।

जलस्त्रोतों की बढ़ा दी गई है सुरक्षा
जिले में सक्रिय शिकारी वन विभाग के जल स्रोतों के आसपास निगरानी न रखने का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना से पहले भी जिले में एक बार जलस्त्रोत में जहर मिलाने की घटना हो चुकी है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में कुंड में जहर मिलाने से तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों की जान गई थी। घटना सामने आने के बाद अब वन विभाग अलर्ट हुआ है। जिले में जलस्त्रोतों के आसपास सुरक्षा व गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर शिकार करने वाले पकड़े गए तीनों आरोपियों को वन विभाग ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं है।

बरही, शाहडार का जंगल स्थाई ठिकाना
जिले के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी है, जिसमें विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया, सलैया, कुआं सहित अन्य कई गांवों हैं, जिनके जंगलों में वनराज का ठिकाना है। विशेष रूप से कुआं बीट में बाघों की स्थाई मौजूदगी है और लगभग आठ बाघों का मूवमेंट यहां रहता है। इसके साथ ही बगल से लगे बांधवगढ़ के जंगल से भी बाघों का आना-जाना रहता है। दूसरी ओर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंद का ठिकाना है। यहां पर भी बाघ का स्थाई ठिकाना है और उसके साथ तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणी बड़ी संख्या में हैं। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी रात को प्यास बुझाने के लिए जंगल के किनारे से लगे गांवों के जलस्त्रोतों तक पहुंचते रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना सामने आने के बाद अब बड़े वन्य प्राणियों पर जान का खतरा मंडराने लगा है।

ढीमरखेड़ा में सामने आई थी घटना
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में तालाब के पानी में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों के शिकार की घटना जिले में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2010-11 में भी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के करौंदी बीट के पास ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें एक प्राकृतिक जलस्त्रोत में शिकारियों ने जहर मिलाया था। उसका पानी पीने से तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही इस साल अप्रैल माह में वन विभाग की टीम ने तीन शिकारियों को वन्य प्राणियों को मारने लगाए गए करंट के तार के साथ पकड़ा था तो उमरियापान, ढीमरखेड़ा, बड़वारा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

घटना के बाद जागा वन अमला
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में शुक्रवार की सुबह तालाब के किनारे 12 चीतल व दो सांभर मृत अवस्था में मिले थे। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग सकते में आ गया था। आनन-फानन में डॉग स्क्वाड बुलाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई, जिसमें वन विभाग ने शिकार करने वाले तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद सामने आया कि जंगल की सीमा से लगे जलस्त्रोतों के आसपास शिकारी सक्रिय न हों, इसको लेकर वन विभाग का फील्ड का अमला नजर नहीं रख रहा है और उसी का नतीजा था कि 14 निर्दोष वन्य प्राणियों की जान चली गई। घटना के बाद विभाग ने जहां तालाब का पानी खाली करा दिया है तो वहीं जलस्त्रोतों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और अब नजर रखी जा रही है।

अमले को दिया प्रशिक्षण
वन्य प्राणियों की मौत के बाद अब वन विभाग के वनरक्षकों व अधिकारियों को जिले भर में ऐसे जलस्त्रोत जहां पर वन्य प्राणियों का आना-जाना रहता है, वहां पर तैनात करने के साथ गश्त करने और निगरानी रखने को लगाया गया है। शनिवार को डीएफओ सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड के अमले को पानी में जहर की जांच करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया, जिससे गश्त करते समय कर्मचारी पता लगा सकें कि पानी कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं घोला गया है। वन विभाग की टीम बड़वारा के बांधवगढ़ की सीमा से लगे गांवों, बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के ठिकानों के आसपास, ढीमरखेड़ा के शाहडार व अन्य वन क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी कर रही है।

इनका कहना है
विजयराघवगढ़ की घटना के बाद आरोपितों को पकड़ा गया है और उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा रही है। जिले में बाघों का ठिकाना है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी कराई जा रही है। जंगलों से लगे जलस्त्रोतों के आसपास गश्त बढ़ाने के साथ ही अमले को पानी की जांच करने के लिए भी जानकारी दी गई है।
– गर्वित गंगवार, जिला वनमंडल अधिकारी

वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही, 1430 मौतों और हजारों लोगों के लापता होने की आशंका

नई दिल्ली
दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है।

खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग
वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है।

जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें
बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

तिरुपति बालाजी दर्शन: अनंत अंबानी ने मुंडन कर भगवान के चरणों में अर्पित किए बाल

तिरुमाला
दुनिया के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित परिवारों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा का परिचय देते हुए भगवान के चरणों में अपने बाल समर्पित किए (मुंडन संस्कार करवाया)।

सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की इस सादगी और धार्मिक निष्ठा की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे अध्यात्म की पराकाष्ठा मान रहे हैं, जहाँ दुनिया की तमाम दौलत, शोहरत और नाम पीछे छूट जाते हैं और केवल ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही मायने रखता है।

आस्था से बड़ा कोई आभूषण नही
अक्सर कहा जाता है कि भगवान के दरबार में अमीर हो या गरीब, हर कोई एक समान है। अनंत अंबानी के इस कदम ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है। भौतिक सुख-सुविधाओं और वैश्विक स्तर पर पहचान होने के बावजूद, उन्होंने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए तिरुपति बालाजी के चरणों में अपना शीश नवाया।

एक संदेश जो दिल को छू गया:
“सब कुछ पाकर भी जो भगवान को चुनता है, वही सबसे धनवान है। जहाँ नाम, दौलत और शोहरत पीछे रह जाते हैं… वहाँ सिर्फ़ आस्था साथ चलती है। दुनिया की सबसे बड़ी दौलत भी, भगवान के दरबार में सिर्फ़ श्रद्धा बन जाती है।”

तिरुपति में मुंडन परंपरा का महत्व
सनातन धर्म में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुंडन कराने (बालों का दान करने) की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे अहंकार के त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अनंत अंबानी का यह रूप दिखाता है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत है।

सादगी की मिसाल: अनंत अंबानी ने तिरुपति देवस्थानम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दर्शन किए।

परंपरा का सम्मान: आधुनिक जीवनशैली के बीच सनातन संस्कृति और मुंडन की परंपरा का निर्वहन किया।

सोशल मीडिया पर चर्चा: नेटिजन्स अनंत अंबानी के इस धार्मिक झुकाव और अहंकार-रहित व्यक्तित्व की सराहना कर रहे हैं।

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा, शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री बनाए जाने की अटकलें

 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। वहीं विवादों में रहे मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि पूर्व आईएएस अधिकारी और आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री बनाया जा सकता है और निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिल सकता है। बता दें कि NEET पेपर लीक मामले के बाद धर्मेंद्र प्रधान का विरोध तेज हो गया है। कई संगठन उनके इस्तीफे का मांग कर रहे हैं। ऐसे में मोदी कैबिनेट में फेरबदल करके बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

मोदी कैबिनेट के संभावित नए मंत्री
1- नीतीश कुमार

2- शक्तिकांत दास

3- सुखेंदु शेखर राय

4- तरुण चुग

5- राघव चड्ढा

6- श्रीकांत शिंदे

7- अनुराग ठाकुर
इनके बदल सकते हैं पोर्टफोलिया, या फिर बाहर का रास्ता

1- मनोहरलाल खट्टर

2- रवनीत सिंह बिट्टू

3- अश्विनी वैष्णव

4- धर्मेंद्र प्रधान

5- निर्मला सीतारमण

6- हरदीप सिंह पुरी

7- नितिन गडकरी

शक्तिकांत दास के अनुभव का फायदा उठाना चाहती है सरकार?
पूर्व आईएएस और आरबीआई गवनर्र शक्तिकांत दास इस समय 69 साल के हैं। सरकार के साथ काम करने और वित्तीय मामलों का उनका लंबा अनुभव है। अगर उन्हें वित्त मंत्री बनाया जाता है तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री सीडी देशमुख की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। सीडी देशमुख आरबीआई के पहले गवर्नर थे और उन्हें 1950 से 1956 तक वित्त मंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक आरबीआई गवर्नर रहे। इसके बाद 1991 से 1996 तक देश के वित्त मंत्री रहे। इसके बाद 2004 से 2014 तक वह देश के प्रधानमंत्री भी रहे। डॉ. मनमोहन सिंह ऐसे अकेले ही व्यक्ति थे जो कि आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

शक्तिकांत दास की बात करें तो वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हालांकि उन्हें 6 महीने के अंदर ही राज्यसभा भेजा जा सकता है। अटकलें हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है। नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो जाएंगी।

क्यों वित्त मंत्रालय के लिए योग्य माने जा रहे शक्तिकांत दास?
शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री के पद के लिए योग्य माना जा रहा है। उन्हें टैक्स और निवेश के साथ ही आर्थिक नीति की गहरी जानकारी है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय में काम करते हुए वह 8 बजट तैयार करने में शामिल रह चुके हैं। इसके अलावा 2018 से 2024 तक आरबीआई गवर्नर रहने के दौरान उन्हें वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें A+ रेटिंग के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार भी मिले हैं।

विधानसभा चुनावों का भी रखा जाएगा ध्यान
कैबिनेट में फेरबदल में आने वाले यूपी, पंजाब के विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा जाएगा। नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विवादों में घिर गए हैं। ऐसे में उनपर कार्रवाई हो सकती है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह भी पंजाब से राघव चड्ढा या फिर किसी सिख चेहरे को लाया जा सकता है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

पंजाब से इस समय रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा नए चेहरों में महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम शामिल हो सकता है जो कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे है। श्रीकांत शिंदे ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को एनडीए के साथ लेकर आए हैं। वहीं टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में जाने वाले सुखेंदु शेखर को भी केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है।

कैबिनेट रीशफल में सबकी निगाहें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी होंगी। हालांकि अटकलें यही हैं कि निर्मला सीतारमण को कैबिनेट से बाहर नहीं किया जाएगा बल्कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। वहीं कई जानकारों का कहना है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय ले लिया जाता है तो यह संदेश जाएगा कि सरकार झुक गई है। इसके अलावा नौकरशाही से कैबिनेट में आए दो मंत्रियों की भूमिका कम की जा सकी है। इनमें अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल में आरएसएस की पसंद का ध्यान रखा जा सकता है। बीते दिनों आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ बीजेपी की बैठक भी हुई थी। विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रवनीत बिट्टू को पंजाब में चुनाव का जिम्मा दिया जा सका है और तरुण चुग को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

तमिलनाडु में बड़ा सियासी बदलाव: एमडीएमके ने डीएमके से 9 साल पुराना गठबंधन तोड़ा

 चेन्नई
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ अपना 9 साल पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है।

यह फैसला आज पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया। हालांकि, एमडीएमके ने अभी औपचारिक रूप से सत्ताधारी टीवीके (टीवीके) के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके साफ संकेत मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत
अपनी जनरल काउंसिल बैठक में पारित प्रस्तावों में एमडीएमके ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत किया। इसके साथ ही पार्टी ने नई सरकार से अपने प्रमुख चुनावी वादों पर अडिग रहने का आग्रह किया, जिसमें भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना और मेकेदातू बांध परियोजना जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है।

हालांकि, पार्टी के प्रस्तावों में टीवीके (टीवीके) गठबंधन में शामिल होने का कोई सीधा जिक्र नहीं किया गया है, भले ही तमाम राजनीतिक संकेत इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।

डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप
गठबंधन से बाहर निकलने के फैसले को सही ठहराते हुए एमडीएमके ने आरोप लगाया कि डीएमके के भीतर एमडीएमके को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही थीं। पार्टी ने यह दावा भी किया कि एआईएडीएमके को सरकार बनाने में मदद करने के लिए एक गुप्त योजना पर काम चल रहा था, जिसके कारण एमडीएमके के लिए इस गठबंधन में बने रहना नामुमकिन हो गया था।

दूसरी तरफ, डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके के सैयद हफीजुल्लाह ने कहा यह डीएमके ही थी जिसने एमडीएमके को विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व दिलाने में मदद की।

वाइको के बेटे दुरई वाइको को एमडीएमके में आगे बढ़ाना ही पार्टी के कमजोर होने की असली वजह है, क्योंकि यह वंशवादी राजनीति के खिलाफ खुद वाइको के पुराने अभियानों के बिल्कुल विपरीत है।

एमडीएमके के दो विधायकों का बगावती रुख
यह घटनाक्रम जहां एक तरफ डीएमके के लिए एक झटका है, वहीं खुद एमडीएमके को भी इससे नुकसान उठाना पड़ा है। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में डीएमके के उगते सूरज चुनाव चिह्न पर चुने गए एमडीएमके के दो विधायकों ने इस जनरल काउंसिल बैठक का बहिष्कार कर दिया।

इन विधायकों ने संकेत दिया है कि वे डीएमके के साथ ही बने रहेंगे। उनके इस फैसले का मतलब यह है कि अगर एमडीएमके औपचारिक रूप से टीवीके के साथ गठबंधन कर भी लेती है, तो भी सत्ताधारी दल की विधायी संख्या में तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और न ही कोई सीट खाली होगी जिससे उपचुनाव की नौबत आए।

टीवीके सरकार के साथ बढ़ती नजदीकियां
एमडीएमके के इस अलगाव के संकेत पहले ही मिल चुके थे, जब पार्टी ने टीवीके सरकार के विश्वास मत (Trust vote) के दौरान मतदान से दूरी बना ली थी। इसके बाद एमडीएमके प्रमुख वाइको, उनके बेटे और सांसद दुरई वाइको ने मुख्यमंत्री विजय और टीवीके के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें भी की थीं।

एमडीएमके के बाहर निकलने के बाद अब कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके सत्ताधारी टीवीके के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस नई सरकार में कांग्रेस दो मंत्रियों के साथ गठबंधन सहयोगी बन चुकी है, जबकि VCK और IUML के पास कैबिनेट में एक-एक मंत्री पद है। वहीं, सीपीआई और सीपीएम जैसी वामपंथी पार्टियां बाहर से अल्पसंख्यक टीवीके सरकार को अपना समर्थन दे रही हैं।

डीएमके के भीतर अकेले चुनाव लड़ने की उठ रही मांग
यह सियासी बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब डीएमके के भीतर भी भविष्य के चुनाव अकेले दम पर लड़ने की आवाजें तेज हो रही हैं। सबसे पहले डीएमके सांसद कनिमोझी ने यह विचार सामने रखा था, जिसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और डीएमके सांसद ए. राजा ने भी इसी सुर में अपनी बात दोहराई।

राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो वाइको को कभी पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का राजनीतिक उत्तराधिकारी (Protege) माना जाता था। हालांकि, 1993 में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन के लिए एक चुनौती के रूप में देखे जाने के कारण उन्हें डीएमके से निष्कासित कर दिया गया था।
डीएमके के साथ उनका यह ‘खट्टा-मीठा’ रिश्ता सालों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जहां वे कई बार गठबंधन के अंदर और बाहर आते-जाते रहे हैं। अब एक बार फिर वाइको ने एमडीएमके की कश्ती को डीएमके के किनारे से अलग कर लिया है।

नक्सल प्रभावित 5 लोगों और 2 सरेंडर नक्सलियों को मिलेगी सरकारी नौकरी, सरकार का बड़ा फैसला

मोहला.

मोहला–मानपुर –अंबागढ़ चौकी जिले में शासन की पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल पीड़ितों को पुनर्वास नीति का लाभ देने एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 24 जून को कार्यालय कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलवादी पुनर्वास समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में समिति के अध्यक्ष कलेक्टर तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय पी सिंह, जिला वनमंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में पात्र 5 नक्सल पीड़ितों एवं 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों कुल 7 लोगों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत शासकीय सेवा में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा 1 एक नक्सल पीड़ित परिवार को उसके जीवन यापन करने हेतु 15 लाख रुपए प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा समिति के अध्यक्ष के द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मीटिंग में सम्मिलित किया गया था जिसमें अध्यक्ष के द्वारा सभी पीड़ितों से बात कर उनकी अन्य योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं उनके आवेदन अनुसार शीघ्र लाभ प्रदाय सनिश्चित करने हेत संबंधित विभाग को आदेश किया जा गया है।

जिला पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास एवं विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत हो रहा है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। शासकीय नौकरी मिलने से लाभार्थियों को स्थायी रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले आत्म समर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी 31 मार्च 2026 को पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो चुका है।

मार्को रुबियो ने की पीएम मोदी की सराहना, भारत को बताया तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति

नई दिल्ली
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की है। साथ ही, उन्होंने भारत को तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति बताया है। व्हाइट हाउस में समाचार एजेंसी IANS को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को अपना करीबी साझेदार और सहयोगी मानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है और अब वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले अहम फैसलों में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। रुबियो ने कहा, “हम प्रधानमंत्री मोदी और उनके काम के बड़े प्रशंसक हैं।”

मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को पहले से कहीं अधिक मजबूत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध हैं, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। उनके अनुसार, यह समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा हो सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप कब करेंगे भारत की यात्रा
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले वर्ष की शुरुआत में भारत की यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की तैयारियां जारी हैं और इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका रक्षा, ऊर्जा, खनिज, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी बड़ी भूमिका निभाना चाहता है और दोनों देशों के बीच क्वाड सहयोग भी आगे बढ़ेगा।

मार्को रुबियो ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका के विकास में अहम योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में सेतु का काम किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के बीच कई साझा मूल्य और हित हैं, जिनके आधार पर भविष्य में और व्यापक सहयोग संभव है। रुबियो के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत-अमेरिका व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।

मन की बात: पीएम मोदी ने हरगिला संरक्षण की सफलता और जनता के सहयोग की मिसाल पेश की

 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मनिर्भरता के कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक सुरक्षित और आत्म निर्भर है। पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश-विदेश में हुए कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा प्रस्तावित योग दिवस के मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने योग किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों की दी गई सलाहों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने न सिर्फ इन सलाहों को माना, बल्कि उस पर अमल भी किया।

पीएम मोदी ने कहा कि देश के कई परिवारों ने फैसला किया है कि वह शादी विवाह में सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी भी तो वह पुराने सोने को गलाकर नए जेवर बना लेंगे। इसके अलावा पीएम ने बताया कि कई लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं रद्द कर दी, तो कई लोगों ने साथ मिलकर कार पूलिंग को भी अपनाने का काम किया है। इसके अलावा लोगों ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को भी कम करने का जबरदस्त प्रयास किया है। बता दें, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से निपटने के लिए लोगों को सोने को न खरीदकर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सोना न खरीदने और कार पुलिंग करने की सलाह दी थी।

हरगिला की यात्रा, अविश्वास से विश्वास तक की यात्रा
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में असम के हरगिला पक्षी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कैसे असम में विलुप्ती की कगार पर आए हरगीला पक्षी को लोग अंधविश्वास की वजह से मार रहे थे। पीएम ने बताया कि हरगिला पक्षी हमारे पर्यावरण को साफ करने में मदद करता है। लेकिन असम में लोग अंधविश्वास की वजह से इसे मिटाने पर तुले हुए थे। आलम यह था कि जिस पेड़ पर हरगिला के घोंसले होते थे, वह उस पेड़ को ही काट देते थे। इसके बाद एक जीव विज्ञानी ने इस पर ध्यान दिया और लोगों को इससे जोड़ा। इसके बाद आज लोग हरगिला को लेकर अपने विचार बदल रहे हैं। हरगिला को बचाने वाली इस टीम को हरगीला आर्मी कहते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, सर्जियो गोर बोले- बस कुछ मुद्दों पर सहमति बाकी

वाशिंगटन 
 भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, “समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”
गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, “देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं। 

यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, ‘इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?’ हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।”प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो।

उन्होंने कहा, “मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।”

अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं।

गोर ने कहा, “मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, ‘तो मैं कब आ रहा हूं?’ वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।”हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है।

अमेरिकी राजदूत ने कहा, “अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।”

गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।”

भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं।

व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।

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