शहडोल की रॉयल अरहर वेरायटी बनेगी किसानों की कमाई का नया जरिया, मिलेगा बेहतर दाम

शहडोल 
 खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं। 

कैसे करें अरहर दाल की खेती?
शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, ” अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए। 

वे आगे कहते हैं, ” अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है। 

अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें
कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, ” सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा। 

खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन
वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है। 

खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल 
ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें। 

इतनी होती है अरहर की पैदावार
कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, ” जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा। 

मालवा में किसानों का बढ़ा इंतजार, बारिश की कमी से अटकी सोयाबीन की बुवाई; बीज ₹10 हजार के पार

नागदा 
 अब तक दो इंच बरसात हुई है। हालांकि कृषि विज्ञानियों का कहना है कि सोयाबीन फसल की बोवनी के लिए अभी और वर्षा की दरकार है। 6 से 7 इंच वर्षा के बाद बोवनी अच्छी रहेगी। इस बीच दावा किया जा रहा है कि इस बार किसानों को खाद के लिए दुकानदारों के यहां लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। किसान द्वारा घर बैठे खाद बुक करने पर तीन दिन में खाद मिल जाएगी।

दुकानदार गड़बड़ करता है तो उसके लायसेंस निरस्त करने व पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। नागदा क्षेत्र में दो बार हुई झमाझम बरसात में अभी तक 56.2 एमएम लगभग 2 इंच से कुछ ज्यादा बरसात हुई है। पिछले वर्ष अभी तक लगभग 5 इंच बरसात हो गई थी।

क्षेत्र के किसानों द्वारा बोवनी की पूरी तैयारी की जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पर्याप्त बरसात हो गई है, वहां बोवनी हो सकती है। नागदा-खाचरौद क्षेत्र में अभी बरसात का इंतजार है।

सोयाबीन बीज के भाव 10 से 12 हजार रुपये तक
सोयाबीन बीज के भाव इस बार 10 से 12 हजार रुपये तक हैं। ऐसे में दुकानदार तो ठीक, कई किसान भी पिछले वर्ष की रखी सोयाबीन को ग्रेडिंग कराकर बीज के नाम पर बेचने रहे हैं। कृषि अधिकारी द्वारा दुकानों से सोयाबीन के 52 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आना बाकी है।

अधिकारियों के अनुसार किसान घर से बेचता है तो इस पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन की बीज कंपनी का टैग देखकर ही खरीदें। बिना टैग के सोयाबीन बीज के लिए नहीं खरीदें। दुकानदार बिना टैग के बीज बेचता है तो उसकी शिकायत विभाग के अधिकारी से करें।

किसानों को खाद के लिए नहीं होगी परेशानी
प्रतिवर्ष किसानों को खाद के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। किसानों को दो-तीन गुना भाव में खाद की बोरी लेना पड़ती थी। इस बार शासन ने ऑनलाइन सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई है, घर बैठकर ही ऑनलाइन खाद बुक करवा सकते हैं और जिस दुकान से खाद लेना है, वहां से तीन दिन में खाद मिल जाएगा।

दुकानदार देने में आना-कानी करता है तो इसकी शिकायत कृषि विभाग अधिकारी से करने पर दुकानदार के खिलाफ लायसेंस निलंबित व निरस्त करने के अलावा पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

‘तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं’, पत्नी की टिप्पणी को कोर्ट ने माना उकसाने वाला; पति की सजा में दी राहत

छिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में पति की सजा कम कर दी है। कोर्ट ने अपने पति पर पत्नी की इस टिप्पणी, कि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं को उकसावा माना है। इस केस में पति ने तैश में आकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में पति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट ने इस सजा को बदलकर सात साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने इस तरह की टिप्पणी, दिखाती है कि पति की कोई वैल्यू नहीं है। यह न सिर्फ पति बल्कि उसके इंसानी अस्तित्व के लिए भी खतरा है। ऐसी टिप्पणी सुनकर पति ने आपा खो दिया और घटना को अंजाम दिया।

क्या है मामला
यह मामला, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला स्थित चौरई का है। यहां पर 18-19 जुलाई की रात शिवा और उसकी पत्नी किरण के बीच झगड़ा हुआ। यह झगड़ा कुलबहेरी नदी के खर्रा घाट के पास हुआ। आरोप के मुताबिक झगड़े के दौरान किरण ने अपने पति पर कटाक्ष करते हुए कहाकि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं। इसके बाद शिवा ने गुस्से में पत्थर उठाकर अपनी पत्नी के ऊपर दे मारा और उसकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बाद में शिवा ने फोन करके पुलिस और पत्नी के परिजनों को घटना के बारे में पूरी जानकारी दी। शिवा की तरफ से पेश वकील ने पक्ष रखते हुए कहाकि शिवा के खिलाफ भरोसे लायक सबूत नहीं हैं। इसके अलावा, साक्ष्यों में विरोधाभास भी है। इस आधार पर उसने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करने की मांग उठाई थी।

हाई कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई
के दौरान डिवीजन बेंच ने माना कि शिवा ने अपनी पत्नी को चोट पहुंचाई और इससे उसकी मौत हुई। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहाकि यह घटना अचानक झगड़े के चलते हुई। कहीं से भी यह सिद्ध नहीं होता कि आरोपी हत्या की योजना बनाकर वहां पहुंचा था। इसके अलावा कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ने पुलिस और अपनी पत्नी के रिश्तेदारों को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने पत्नी की टिप्पणी को गंभीर और अचानक उकसावे वाला मामला बताया।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने मामले में यह भी कहाकि अगर आरोपी अपनी पत्नी की हत्या के इरादे से वहां गया होता तो वह घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो जाता। वह इसके बारे में पुलिस या पत्नी के रिश्तेदारों को जानकारी नहीं देता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके मुताबिक अगर कोई शख्स अचानक उकसावे के चलते खुद पर से नियंत्रण खो देता है तो अपराध का आंकलन उसी आधार पर होना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहाकि यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने बार-बार पत्नी के ऊपर पत्थर से हमला किया। कुछ चोटें घटनास्थल पर मौजूद पत्थरों पर गिरने के चलते भी लग सकती हैं।

MP के 14 जिलों को बड़ी सौगात, केन-मंदाकिनी लिंक प्रोजेक्ट से 6 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ेगा

भोपाल
 मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और अगले छह माह में इनके लोकार्पण के साथ लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।

वहीं, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है और स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी जल्द किया जाएगा।इससे 93 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास होगा। वहीं, नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा।

14 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसकी तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। अब इनका लोकार्पण होना है।

अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना पर फोकस
केन-मंदाकिनी लिंक अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। 20 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जाएगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होगा।

परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है।

संशोधित पार्वती काली सिंध चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के काम पूरा हो गया है।

सिंहस्थ को लेकर तैयारी
सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम हो चुका है। कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत काम प्रगति पर है। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत पूरा हो गया है।

जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन
बरगी नहर से ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी के निर्देश दिए।

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। टनल का काम डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही

भोपाल 

प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। विगत एक सप्ताह में विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाही करते हुए लगभग 2 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक की मादक पदार्थ एवं संपत्ति जब्त की है।

रतलाम : पुलिस ने तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में बड़ी सफलता प्राप्त की। थाना रिंगनोद पुलिस ने एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 01 किलोग्राम एम.डी. ड्रग्स जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ रुपये है।

वहीं थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 46 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा एवं दो ट्रक जब्त कर पंजाब के तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। उक्त कार्रवाई में लगभग 32 लाख 30 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

इस प्रकार रतलाम जिले में कुल लगभग 1 करोड़ 32 लाख 30 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है।

गुना : जिले के म्याना थाना पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान से मध्यप्रदेश लाई जा रही 106 किलो 460 ग्राम डोडाचूरा सहित लगभग 70 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जप्‍त की। कार्रवाई के दौरान एक अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया।

नीमच : थाना नीमच सिटी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 108 किलोग्राम अवैध अफीम का बिना चीरा वाला सीपीएस डोडाचूरा बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामग्री का मूल्य लगभग 25 लाख 20 हजार रुपये है।

छतरपुर : थाना सिविल लाइन पुलिस ने ग्राम कदारी के पास से 20 किलोग्राम से अधिक अवैध गांजा एवं कार सहित लगभग 22 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।

वहीं थाना कोतवाली पुलिस ने राजनगर रोड फोरलेन ब्रिज के पास से 3.5 किलोग्राम से अधिक गांजा सहित एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार जिले में लगभग 22 लाख 60 हजार रुपये मूल्य की मादक सामग्री एवं वाहन जब्त किए गए।

दमोह : थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उड़ीसा निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 35 किलोग्राम अवैध गांजा सहित लगभग 8 लाख 77 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

जबलपुर : पुलिस ने नशे के कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक विधि-विवादित बालक को अभिरक्षा में लेकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 14 किलोग्राम 572 ग्राम गांजा तथा घटना में प्रयुक्त दो स्कूटी सहित लगभग 7 लाख 28 हजार 600 रुपये की संपत्ति जब्त की है।

इसके अतिरिक्त मऊगंज पुलिस ने 5 किलोग्राम से अधिक गांजा तथा 29 शीशी कोरेक्स सिरप जब्त करते हुए लगभग 1 लाख 86 हजार 250 रुपये मूल्य की संपत्ति तथा नरसिंहपुर पुलिस ने 12.5 ग्राम स्मैक सहित लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति जप्‍त की है।

प्रदेशभर में की जा रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों एवं गिरोहों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

 

Modi Cabinet Reshuffle: नए चेहरों को मिल सकता है मौका, MP से वीडी शर्मा का नाम चर्चा में

भोपाल
 मोदी कैबिनेट के विस्तार की अटकलें हैं। संभावना है कि जून के अंत तक मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि कैबिनेट का विस्तार होगा। कैबिनेट में कई नए चेहरों के शामिल होने की अटकलें हैं। साथ ही संभावित नामों की चर्चा भी हो रही है। इसमें मध्य प्रदेश के खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा के नाम की भी चर्चा चल रही है।

खजुराहो से सांसद हैं वीडी शर्मा
दरअसल, संभावित सूची में मध्य प्रदेश के खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा के नाम की भी चर्चा है। उन्हें संगठन में काम करने का लंबा अनुभव रहा है। लंबे समय तक मध्य प्रदेश में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी को प्रचंड सफलता मिली है। 2023 के विधानसभा चुनाव में उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते ही लड़ा गया और पार्टी को ऐतिहासिक सफलता मिली। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी वीडी शर्मा ही प्रदेश अध्यक्ष थे। पार्टी ने पहली बार मध्य प्रदेश में 29-29 की सीटें जीत ली।

सबको साथ लेकर चले
वीडी शर्मा के कार्यकाल में मध्य प्रदेश में संगठन ने एक नई ऊंचाई हासिल की थी। उनके कार्यकाल के दौरान ही ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से अपने विधायकों के साथ पार्टी में आए थे। वीडी शर्मा के लिए उस दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी कि नए और पुराने लोगों को साथ लेकर चलना है। उन्होंने इसे बखूबी अंजाम दिया और समन्वय बनाकर चले। विवादों को सरकार और संगठन के स्तर पर सुलझाकर चले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं तारीफ
वहीं, केंद्रीय नेतृत्व भी वीडी शर्मा की मुरीद रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से वीडी शर्मा की तारीफ कर चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि खजुराहो से हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा जी को भारी मतों से विजयी बनाना है। ये विष्णुदत्त शर्मा जी दिखते पतले दुबले हैं। लेकिन उनके नेतृत्व में भाजपा ने मध्य प्रदेश में इस बार नया इतिहास रच दिया है।

संगठन में भी किए ऐतिहासिक काम
वीडी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए मध्य प्रदेश में संगठन ने भी कई ऐतिहासिक काम किए हैं। उनके नेतृत्व में सदस्यता अभियान के दौरान पार्टी ने एक नई कीर्तिमान स्थापित की थी। डेढ़ महीने में ही बीजेपी ने डेढ़ करोड़ सदस्य बनाए थे। साथ ही चुनावों में बूथ मैनजमेंट फॉर्मूला को अन्य राज्यों ने भी फॉलो किया था।

वीडी शर्मा हैं कौन

    वीडी शर्मा का पूरा नाम विष्णुदत्त शर्मा है
    उन्होंने अखिल भारती विद्यार्थी परिषद से सियासी करियर की शुरुआत की
    वीडी शर्मा लंबे समय तक विद्यार्थी परिषद में काम किया है
    2019 में पहली बार वह खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद बने
    2024 में पार्टी ने उन्हें फिर से मौका दिया और सांसद बने
    15 फरवरी 2020 को मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने
    दो जुलाई 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं
    मूल रूप से वह मध्य प्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं

गौरतलब है कि प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व में उनके अच्छे संबंध हैं। गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी उनकी ट्यूनिंग अच्छी है। चुनावों में अमित शाह उनके साथ बाइक की सवारी कर चुके हैं। साथ ही वीडी शर्मा को जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे बखूबी निभाया है। 2024 में भी अटकलें थीं कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिलेगी क्योंकि चुनावों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। एक बार फिर से उनके नाम की चर्चा चली है। 

Al-Niño Effect: केरल में कमजोर पड़ा मानसून, 33% कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली
केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं। 

IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे ‘बारिश की कमी’ (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है। 

खेती पर कम बारिश का असर
बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है। 

मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर?
सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है। 

पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित
केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप ‘तिरुवाथिरा नजट्टुवेला’ कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है। 

IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू, लेकिन GRP में सैकड़ों पद खाली; करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल

उज्जैन 
 वर्ष 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु रेल मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

इसी बीच सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जीआरपी (गवर्मेंट रेलवे पुलिस) में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जिससे सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेलवे पुलिस के कुल स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अभी भी रिक्त है। दूसरी ओर विभाग का दावा है कि तकनीक और अतिरिक्त बल के जरिए इस कमी को पूरा किया जाएगा।

रेलवे पुलिस में पदों की स्थिति

इकाई- स्वीकृत पद- उपलब्ध कर्मचारी- रिक्त पद

भोपाल जीआरपी- 951- 328- 623

इंदौर जीआरपी- 785- 460- 325

जबलपुर जीआरपी- 724- 467- 257

कुल-2460- 1255- 1205

भोपाल ईकाई में सबसे अधिक कमी
सबसे अधिक कमी भोपाल इकाई में दर्ज की गई है। नेतृत्व स्तर पर भी कमी। रेलवे सुरक्षा केवल जवानों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि अधिकारी स्तर की मौजूदगी भी जरूरी होती है। लेकिन उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे) स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है।

पद- स्वीकृत- उपलब्ध -रिक्त

उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे- 12-6-6)
रिक्त स्थान

भोपाल इकाई – बीना, ग्वालियर

इंदौर इकाई – रतलाम, उज्जैन

जबलपुर इकाई- जबलपुर, रीवा

उज्जैन में डिप्टी एसपी स्तर का पद खाली होना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सिंहस्थ के दौरान रेलवे संचालन और सुरक्षा का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।

सिंहस्थ को लेकर क्या तैयारी?

    रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्म पर सीसीटीवी आधारित निगरानी
    कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम
    डिजिटल संचार नेटवर्क
    भीड़ विश्लेषण तकनीक
    रनिंग ट्रेनों में विशेष निगरानी
    खोया-पाया और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था लागू की जाएगी

75 हजार अतिरिक्त बल की मांग
विभाग ने सिंहस्थ के लिए करीब 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग भी की है। इसमें सिविल पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा इकाइयों की तैनाती प्रस्तावित है। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने या वैकल्पिक तैनाती पर काम किया जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, तब क्या 2028 से पहले खाली पद भरकर मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकेगा या फिर सिंहस्थ जैसी विशाल व्यवस्था को सीमित मानव बल और तकनीक के भरोसे संभालना पड़ेगा।

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा- कोई तैयारी नहीं

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा कि भोपाल में बहुत जरूरी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। जिसमें DGP MP, DG RPF, DRM भोपाल, DRM रतलाम, ADRM झांसी के अलावा RPF के चार IG  IG RPF भोपाल, IG RPF मुंबई, IG RPF प्रयागराज, IG RPF कोलकाता उपस्थित थे। कमिश्न उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, ADG-IG उज्जैन और पुलिस अधीक्षक DIG भी मौजूद थें। DGP रेलवे उत्तर प्रदेश ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव बताए।

राजा बाबू सिंह ने कहा हमारी जो GRP इकाई इंदौर है, जिस पर सिंहस्थ 2028 का जिम्मा होगा उसने कोई होमवर्क नहीं किया है। वहां, पुलिस अधीक्षक, 2 DSP उज्जैन और रतलाम के पद रिक्त हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर जो अस्थायी थाने और चौकी या मेला क्षेत्र बनेंगे उसके लिए अभी से अतिरिक्त बल मिल जाना चाहिए, जो अभी तक नहीं मिला है। 

प्रयागराज महाकुंभ से सीख, इस बार ज्यादा फोकस क्राउड मैनेजमेंट पर

बैठक में  पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हो सकती है।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख स्टेशनों और मेला क्षेत्र में अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएं ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदलने से बचने के निर्देश भी दिए गए, क्योंकि इससे अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

AI और CCTV से होगी निगरानी

सिंहस्थ 2028 में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, होल्डिंग एरिया, पार्किंग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC से जोड़ा जाएगा।

यह कंट्रोल सेंटर रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम, डिजिटल साइन बोर्ड और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दिशा-निर्देश मिल सकें।

रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटी दूरी की मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल इंजन वाली ट्रेनें और दिशा आधारित प्लेटफॉर्म व्यवस्था लागू की जाएगी। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों का पहले से डायवर्जन भी तय किया जाएगा ताकि मुख्य रूट पर दबाव कम किया जा सके।

रेलवे द्वारा उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल, ओंकारेश्वर रोड और सीहोर के स्टेशनों पर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट स्टेशन और साइडिंग लाइन विकसित की जाएंगी।

घाटों का विस्तार और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार

उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। मेले के लिए लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घाटों का विस्तार करीब 37 किलोमीटर तक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके।

वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जा रहा है कि एक निश्चित समय में एक किलोमीटर घाट पर कितने श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि इंदौर-देवास मार्ग से सबसे ज्यादा यातायात रहेगा। इसी को देखते हुए सड़क और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

बैठक में जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। सभी स्टेशनों और भीड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा।

सोनाली मिश्रा ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए रेलवे जोनों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण जरूरी है।

आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी

सिंहस्थ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम, एनडीआरएफ और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती की जाएगी। सभी प्रमुख स्थानों पर बैकअप पावर सिस्टम और आपातकालीन सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।

अधिकारियों ने कहा कि इस बार तकनीक, बेहतर योजना और विभिन्न विभागों के समन्वय के जरिए सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां तेज
सिंहस्थ 2028 को लेकर जीआरपी ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सीमित स्टाफ के बावजूद सीसीटीवी निगरानी, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल संचार नेटवर्क, भीड़ विश्लेषण तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। एडीजी जीआरपी राजाबाबू।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा और उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

 रायपुर
 राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी।

इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है।

आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण
जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा।

उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर
उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ”रूढ़िवादी प्रथाओं” द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ”अपवाद” या ”छूट” का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी।

गोवा के यूसीसी में लिंग समानता
गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता ‘सामुदायिक संपत्ति” है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है।

उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान
उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है।

सक्रिय है राज्य सरकार
    संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।

    – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

 

‘पति पोर्न दिखाकर करता था अप्राकृतिक कृत्य’, महिला ने लगाए गंभीर आरोप; पुलिस में पहुंचा मामला

अहमदाबाद
गुजरात के अहमदाबाद में एक महिला को ससुराल में ऐसी यातनाएं मिलीं, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं. महिला ने पति पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका कहना है कि पति उसे पोर्न दिखाता था. मारपीट करता था और अप्राकृतिक कृत्य करता था. पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में पति, सास और देवर के खिलाफ शिकायत की है। 

ये पूरी कहानी शहर के शाहीबाग इलाके की है. पीड़ित महिला ने शिकायत में कहा है कि उसका पति उसे जबरन पोर्न फिल्में दिखाता था. विकृत तरीके से जबरन संबंध बनाता था. साथ ही, प्रेग्नेंसी के दौरान लात मारकर अबॉर्शन कराने का दबाव भी डालता था। 

ससुराल वालों द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना किया गया. जान से मारने की धमकी दी गई. इससे तंग आकर महिला अहमदाबाद महिला पुलिस स्टेशन में पहुंची और आपबीती सुनाई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

शिकायत के अनुसार, महिला की शादी साल 2011 में हुई थी, लेकिन शादी के 15 दिन बाद ही उसकी ससुराल में उसके साथ गलत व्यवहार शुरू हो गया. शादी के समय ससुराल वालों ने महिला से यह बात छिपाई थी कि पति की पहले भी शादी हो चुकी थी और उसका एक बच्चा भी है। 

शादी के तुरंत बाद सास और देवर ने दहेज को लेकर ताने मारने शुरू कर दिए थे. महिला के प्रेग्नेंट होने के बावजूद उसे पर्याप्त आराम नहीं करने दिया गया. घर के भारी-भरकम काम कराए जाते थे. बेटी के जन्म के बाद भी पति का दुर्व्यवहार कम नहीं हुआ. पति अक्सर देर रात घर आता, पार्टियों में जाता और पत्नी की इच्छा के बिना उससे जबरन संबंध बनाता था। 

अगर पत्नी बीमार होती, तो भी उसे उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाएं देकर संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता और मना करने पर बुरी तरह पीटा जाता था. कुछ समय बाद जब पत्नी दोबारा प्रेग्नेंट हुई, तो पति ने अबॉर्शन कराने का दबाव डाला और धमकी दी कि अगर उसने बात नहीं मानी तो वह तलाक दे देगा। 

इन सब बातों से तंग आकर पत्नी मायके चली गई, लेकिन पति वहां पहुंच गया और उसे जबरदस्ती ससुराल ले आया. सास और देवर भी लगातार ताने मारते थे कि तुम हमारे बेटे को पसंद नहीं हो, तुम्हें तो बस समाज की वजह से रखना पड़ रहा है. तुमने हमारा घर बर्बाद कर दिया. तुम तलाक लेकर अलग हो जाओ। 

‘रात में दूसरे देशों की युवतियों को कर रहा था वीडियो कॉल’
पत्नी ने आधी रात को अपने पति को दूसरे देशों की युवतियों के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए पकड़ा था. पति उसे उन युवतियों के साथ के आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर उसी तरह संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था. तीसरी बेटी को जन्म देने के बाद भी ससुराल वालों का रवैया नहीं बदला. जब पत्नी ने पति के अफेयर की बात सास को बताई, तो सास भड़क गईं और झगड़ा करके पत्नी को घर से निकाल दिया। 

पांच महीने मायके में रहने के बाद जब वह वापस आई, तब भी पति ने अश्लील वीडियो दिखाकर अप्राकृतिक संबंध बनाने का दबाव डाला. फिर महिला और उसकी तीनों बेटियों को दूसरे घर पर भेज दिया और पति अलग रहने लगा. पति ने पत्नी को गंभीर धमकियां दीं. उसने कहा कि अगर तुमने हमारे खिलाफ कोई अर्जी या शिकायत की तो जान से मार देंगे. फिलहाल पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत की है. पुलिस ने पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 

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