Climate Change या El Niño? भारत ने 365 में 360 दिन झेली भीषण गर्मी, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

 नई दिल्ली

साल 2025 भारत के लिए मौसम के लिहाज से बेहद मुश्किल था. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट – CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल में 365 में से 360 दिन देश के किसी न किसी हिस्से में मौसम की भयानक घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 4421 लोगों की मौत हुई. करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. बढ़ता क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो जैसे मौसमीय पैटर्न भारत में मौसम को पहले से ज्यादा अनिश्चित बना रहे हैं। 

2025 में मौसम ने तोड़े कई रिकॉर्ड
2025 में देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में किसी न किसी तरह का बिगड़ा हुआ मौसम दर्ज किया गया. यानी पूरे साल ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां मौसम का असर न दिखा हो. 2025 में देश के करीब 99% दिनों में कहीं न कहीं लू, भारी बारिश, बाढ़, बिजली गिरने, ओला पड़ने या तूफान जैसी घटनाएं हुईं. यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. 2024 में ऐसे मौसम की घटनाएं साल के 88 फीसदी दिनों में दर्ज हुई थीं। 

मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. 2024 में 3393 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 4421 हो गई. खेती को हुआ नुकसान भी कई गुना बढ़ गया. 2024 में करीब 36 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन 2025 में यह बढ़कर 1.74 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गई। 

सबसे ज्यादा फसल का नुकसान महाराष्ट्र में हुआ, जहां करीब 84 लाख हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई. इसके बाद कर्नाटक और मध्य प्रदेश का नंबर रहा. वहीं हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 267 दिन भयानक मौसम दर्ज किया गया. केरल में 173 दिन और मध्य प्रदेश में 162 दिन ऐसे हालात बने रहे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में 1.81 लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा। 

अब सिर्फ मानसून नहीं, पूरे साल बदल रहा है मौसम
रिपोर्ट बताती है कि अब चरम मौसम सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं है. मार्च, अप्रैल और मई जैसे महीनों में भी तेज गर्मी, अचानक बारिश, आंधी और ओले पड़ने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं. कई जगहों पर कुछ ही दिनों के अंदर मौसम पूरी तरह बदल जाता है. इसका सीधा असर खेती, पानी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। 

अल-नीनो से क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
वैज्ञानिकों का कहना है कि हर खतरनाक मौसम की घटना की वजह अल-नीनो नहीं होता. लेकिन जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत के मौसम का पैटर्न बदल सकता है. कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. वहीं कुछ जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश भी हो सकती है। 

अगर अल-नीनो का असर और क्लाइमेट चेंज साथ-साथ हों, तो मौसम और ज्यादा असामान्य हो सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लगातार ऐसे मौसम पर नजर रखने की बात कहते हैं। 

2025 के आंकड़े साफ बताते हैं कि बेहद खराब मौसम अब भारत में पहले से ज्यादा आम होता जा रहा है. इसका असर सिर्फ लोगों की जान पर नहीं, बल्कि खेती, घरों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर क्लाइमेट चेंज की रफ्तार नहीं थमी और अल-नीनो जैसे मौसमी पैटर्न असर दिखाते रहे, तो आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। 

ईरान सस्ते दाम पर दे रहा तेल, फिर भी भारत क्यों नहीं खरीद रहा? जानिए बड़ी वजह

 नई दिल्‍ली

अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमी हुई है और शांति वार्ता चल रही है. इस समझौते के दौरान अमेरिका ने ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा दिया है और 60 दिनों की छूट दी है, जिसके बाद ईरानी तेल मार्केट में आ चुका है. वहीं स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खुल चुका है, जिसके बाद टैंकर पहले से ज्‍यादा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजर रहे हैं। 

इस बीच, रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की छूट के बाद कई बिचौलियों ने ईरानी तेल को भारत को बेचने के लिए ऑफर दे रहे हैं. इन्‍होंने भारतीय रिफाइनरों को ईरानी तेल कम दाम पर बेचने का ऑफर दिया है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) की ओर से और बिचौलियों के माध्यम से किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें ईरानी राज्य उत्पादक द्वारा तेल आवंटित किया गया है। 

कितना सस्‍ता होगा ईरानी तेल? 
रॉयटर्स ने कहा कि ऑयल रिफाइनर्स से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि एनआईओसी के अलावा, कई व्‍यापारी ईरानी तेल को बेचने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हमारी प्राथमिता एनआईओसी को मौका देना है. उन्होंने बताया कि एनआईओसी भारतीय खरीदारों को बता रहा है कि ईरानी कच्चा तेल क्षेत्रीय स्तर पर समान गुणवत्ता वाले कच्चे तेल की तुलना में प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर सस्ता होगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिफाइनर से संपर्क करने वाले व्यापारी मुख्य रूप से सिंगापुर और दुबई स्थित छोटी और मध्यम आकार की व्यापारिक कंपनियों से हैं. इस सप्ताह ईरानी पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत को कच्चे तेल और LPG की संभावित आपूर्ति पर भी चर्चा हुई। 

भारत बढ़ा सकता है आयात
हालांकि, भारतीय रिफाइनर के पास फ्यूचर में ईरानी कच्चे तेल को रखने की सीमित गुंजाइश है, क्योंकि अधिकांश ने अगस्त तक आपूर्ति सुरक्षित कर ली है और मिडिल ईस्‍ट आपूर्तिकर्ता खरीदारों पर प्राथमिकता को लेकर दबाव बना रहे हैं. भारत पहले से ही व्यापारियों के माध्यम से ईरान से एलपीजी आयात कर रहा था और प्रतिबंधों में छूट मिलने के बाद यह आयात और बढ़ सकता है। 

भारत क्‍यों नहीं खरीद सकता ज्‍यादा कच्‍चा तेल? 
केप्‍लर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने अपने तेल की आपूर्ति के लिए कई देशों से कॉन्‍ट्रैक्‍ट कर लिया है. वहीं कई जगहों से तेल मंगा रहा है और बहुत से तेल को रिजर्व करके भी रख लिया है. इस कारण, उसे सस्‍ते पर तेल मिलने के बाद भी ज्‍यादा खरीदारी नहीं कर सकता है। 

एक महीने की छूट पर भी भारत ने खरीदा था तेल 
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद तेल के दाम को नीचे लाने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल पर छूट दी थी. अमेरिका की ओर से 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद भारत को अप्रैल में ईरानी तेल की दो खेपें मिली थीं, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू में कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया आत्मीय संवाद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के हिल स्टेशन कुकरू में शनिवार को कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने समूह द्वारा तैयार किए गया मावा और रबड़ी का स्वाद लिया तथा महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से समूह की गतिविधियों, आय के स्रोत तथा शासकीय योजनाओं से प्राप्त सहयोग की जानकारी ली और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुकान में उपलब्ध मावा बनाने की प्रोसेस को देखा और महिलाओं से आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि योजना की राशि नियमित रूप से प्राप्त हो रही है या नहीं। महिलाओं ने योजना का लाभ मिलने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह कुकरू की अध्यक्ष श्रीमती शोभा गायने ने बताया कि समूह को विभिन्न योजनाओं में सीसीएल से 3 लाख रुपये, सीआईएफ से 1 लाख रुपये, आरएफ से 11 हजार रुपये तथा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि समूह में 11 सदस्य कार्यरत हैं। आजीविका मिशन से मावा बनाने की स्वचलित मशीन क्रय की गई। इससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपए की मासिक आय प्राप्त हो रही है।

समूह की सदस्य महिलाओं ने बताया कि वे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मावा, रबड़ी एवं श्रीखंड निर्माण के साथ-साथ कृषि कार्य भी कर रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की महिलाओं को लगभग 15 से 18 हजार की मासिक आय प्राप्त हो रही है। जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसद श्री दुर्गादास उइके, बैतूल विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मप्र जन अभियान परिषद उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, कमिश्नर श्री श्रीकांत बनोठ, आईजी श्री मिथलेश कुमार शुक्ल, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल के हिल स्टेशन कुकरू में देखा सनसेट पॉइंट

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल प्रवास के दौरान जिले के सुप्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू का भ्रमण किया। उन्होंने कुकरू स्थित सिपना सनसेट पॉइंट पर पहुंचकर सूर्यास्त के मनोहारी एवं अलौकिक दृश्य के साथ क्षेत्र के अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुकरू की पर्वत श्रृंखलाओं, हरित वनों और प्राकृतिक छटा से अभिभूत हुए। उन्होंने कहा कि कुकरू प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित होने की अपार संभावनाएं रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक सौन्दर्य से समृद्ध कुकरू न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेगा।

 

अंतरिक्ष की ओर बढ़े रायपुर की बेटी के कदम, गौरवान्वित हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय ShakthiSAT Mission के लिए चयनित रायपुर की प्रतिभाशाली छात्रा महिमा राजपूत को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि महज 14 वर्ष की आयु में 108 देशों के विद्यार्थियों के साथ इस प्रतिष्ठित अंतरिक्ष मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित होना न केवल महिमा की असाधारण प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिमा राजपूत ने अपनी लगन, प्रतिभा और समर्पण से अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अवसर मिलने पर वैश्विक मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।

मुख्यमंत्रीसाय ने विश्वास व्यक्त किया कि महिमा की यह प्रेरणादायी सफलता प्रदेश के लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और विज्ञान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने महिमा राजपूत को पुनः हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की तथा आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाती रहेंगी।

खेत में करंट लगने से किसान की मौत, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

रायपुर 

दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र के ग्राम चिंगरी निवासी 60 वर्षीय किसान बिरेन्द्र देशमुख की खेत में काम करने के दौरान करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, वे सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच अपने खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

दोपहर करीब 1 बजे घटना की सूचना अंडा थाना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल दुर्ग भेज दिया।

घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक अपने पीछे पत्नी अनुसुईया देशमुख, पुत्र जागेश्वर देशमुख और गावेश देशमुख सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने के बजाय अंडा स्थित बिजली विभाग कार्यालय के सामने शव रखकर करीब 4 से 5 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर डटे रहे और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि हादसा बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि जिस विद्युत पोल के पास यह घटना हुई, वह लंबे समय से झुका हुआ था। इसे लेकर करीब दो वर्ष पहले विभाग को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, पोल झुकने के कारण बिजली के तार नीचे आ गए थे और उन्हें अस्थायी रूप से लोहे के घेरे से बांधकर रखा गया था। समय के साथ केबल में खराबी आने से लोहे के घेरे में करंट प्रवाहित होने लगा, जिसकी चपेट में आने से किसान की मौत हो गई।

ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई तथा पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारी, अंडा थाना प्रभारी श्रद्धा पाठक और तहसीलदार मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों से भी घटना को लेकर जवाब मांगा गया है।

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. बुधरी ताती ने चार दशक से अधिक समय तक बस्तर अंचल सहित वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सतत कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती जैसे व्यक्तित्व हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत, लोक संस्कृति और सेवा की परंपरा के सशक्त प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को समाज के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती के परिजन उपस्थित थे।

संभाग स्तरीय रोजगार मेले में युवाओं का बढ़ाया उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल बोले— प्रतिभा और कौशल को मिलेगा बेहतर अवसर

रायपुर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को अंबिकापुर स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित संभाग स्तरीय रोजगार मेले में सहभागिता कर क्षेत्र के युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने रोजगार के लिए पहुंचे युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता युवाओं को उनकी प्रतिभा, योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने युवाओं से निरंतर परिश्रम, कौशल विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रोजगार मेले केवल नियुक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का सशक्त मंच हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की राह और अधिक मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में कौशल और दक्षता ही सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विभिन्न विभागों के माध्यम से कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सके।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रोजगार मेले के माध्यम से चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रोजगार मेले में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्रीशर्मा ने लगाई जनचौपाल

रायपुर

कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।
       
गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
    
ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।
    
जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे “भारत माता की जय” के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेरनिलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपीआकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओहरेश मंडावी, एडीएमएएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

भोपाल में वर्ष 2027 में होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। समिट में प्रधानमंत्रीमोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवीन्द्र भवन में “विश्व एमएसएमई दिवस” पर हुई “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बुरहानपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपए उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्यप्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतरा हैं।

नई नीतियां और नियम बने लाभकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत 2 वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्यप्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य सरकार सभी की कठिनाइयों को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, शुचिता और पारदर्शी निर्णयों के बलबूते आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया।

मध्यप्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्यप्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर के अतिरिक्त कई सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, क्लस्टर्स स्कीम जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं। पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार से उद्यमी निरंतर जुड़ रहे हैं।

उद्यमियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान यह बात कही। विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गजमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम के अध्यक्षसत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्तदिलीप कुमार, सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

एमएसएमई मंत्रीचेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि प्रदेश में आज उद्योगों के विकास का नया वातावरण बना है और यह सब संभव हुआ है गतिशील और प्रबल इच्छा शक्ति के धनी नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से। पिछले 2 वर्षों में ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग के बजट को 1100 करोड़ से 3100 करोड़ तक पहुंचा दिया है। नई एमएसएमई और स्टार्ट-अप पॉलिसी से उद्यमियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ लगभग 1100 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन मिला है। मंत्रीकाश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिश्रम की पराकाष्ठा का ही परिणाम है कि विभाग ने पिछले 2 सालों में 1200 औद्योगिक भूखंड दिए हैं और आगामी वर्षों में 3000 भूखंड उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में 34 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में किसान,कृषि और उद्योग क्षेत्र के विकास का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कहा कि सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों की महत्ता पूरे विश्व ने पहचानी है। मध्यप्रदेश भी एमएसएमई के क्षेत्र में पीछे नहीं है। प्रदेश में होने वाले मैन्युफैक्चरिंग में एमएसएमई का योगदान 45 प्रतिशत और निर्यात 49 प्रतिशत होना ऐतिहासिक है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने रोजगार देने में महत्वपूर्ण काम किया है और हम एक साल में देश में 14 से 11 वे स्थान पर पहुंच गए हैं। मुख्य सचिवजैन ने कहा कि “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” के तहत नई पॉलिसी बनाई गई है, सैकड़ों कानून खत्म किए गये हैं। लगभग 100 कानूनों में जेल भेजने जैसी सजा के स्थान पर अर्थ दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। सब मिलाकर उद्यमियों के लिये मध्यप्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण मौजूद है। इसके साथ ही आज बैंक से वित्तीय संसाधन भी आसानी से उपलब्ध करवाये जा रहे है। यही वजह है कि कुल 21 प्रतिशत वित्त में से एक लाख 45 हजार करोड़ यानि 11 प्रतिशत एमएसएमई को उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए आगे आकर नेतृत्व करने का आव्हान किया।

उद्यमियों ने कहा – मध्यप्रदेश उद्योगों को बढ़ाने वाला राज्य

समिट में उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आगामी दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च के लिए हमारी कंपनी राज्य में 50 करोड़ का नया निवेश करेगी। मध्यप्रदेश तेजी से फॉर्मा सेक्टर में अनुसंधान का हब बन रहा है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्षराजेश मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। निश्चित ही यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेशराघवेंद्र सिंह ने कहा कि गत ढाई वर्ष में सभी तरह के उद्योगों को 11 हजार 500 करोड़ की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गयी है। मध्यप्रदेश में नए उद्योगों में भरपूर निवेश हो रहा है। ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट : 2025 में 30 लाख 77 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत धरातल पर आ गाए हैं। मध्यप्रदेश की एमएसएमई ने अपने उत्पादों की क्वालिटी को बेहतर किया है और 19 हजार प्रमाणन इसका उदाहरण है। प्रमुख सचिवसिंह ने प्रदेश में बदलते उद्योग परिवेश के बारे में भी जानकारी दी। कैंसर के उपचार की दवा के निर्माण और रिसर्च में संलग्न फार्मा कंपनी भी मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों के सहयोग से आज दुनिया के अनेक देशों तक पहुंच गई है।

समिट की प्रमुख गतिविधियां

  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 750 से अधिक इकाइयों को प्रोत्सान राशि वितरित की।
  •          मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 137 स्टार्ट-अप को 1.5 करोड़ की सहायता राशि अंतरित की।
  •          मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन आशय पत्र एवं लोन स्वीकृति-पत्र वितरित किए। इनमें विदिशा, मंदसौर की तीन-तीन इकाइयां शामिल हैं।
  •          प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया गया।
  •          मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में कटनी, खरगोन और रायसेन जिले के 4 हितग्राहियों को एक करोड़ 57 लाख रुपए की ऋण राशि प्रदान की गई।
  •          मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत 30 लोगों को रोजगार देने वाली इकाई को सहायता राशि प्रदान की गई।
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