मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिल स्टेशन कुकरू में लगाई रात्रि चौपाल, ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से सहज भाव से संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के कामों में यदि किसी भी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार से परेशान किया जाता है, तो वे निसंकोच होकर उन्हें बतायें। रात्रि चौपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मिलनसारिता और आत्मीयता से ग्रामीणों ने अभिभूत होकर मुख्यमंत्री के समक्ष खुलकर अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता और प्रेम से प्रभावित होकर रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने स्थानीय कोरकू भाषा में पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” भजन सुनाकर सभी का मन मोह लिया। रात्रि चौपाल में गंदलो सुसुम कोरकू दल के 21 सदस्यीय तथा होलेरा नृत्य दल के 19 सदस्यीय दल द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती शिपा शनवारे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर भाई के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर संवाद किया तथा बच्चों को स्नेहपूर्वक दुलार भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों से विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्चों से बचने तथा सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को भी समाज में हतोत्साहित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है। सरकार के प्रयास हैं कि समृद्ध खेती के साथ-साथ पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 25 भैंस अथवा 25 गायों के लिए 40 लाख रुपए तक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 10 लाख रुपए का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोदो-कुटकी की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर निरंतर की जाएगी। ग्राम कुकरू में पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने तथा पशुशेड निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से ग्राम में कृषि सखी, जेंडर सखी, बकरी पालन, भैंस पालन, मुर्गी पालन सहित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जुड़कर समूह की अनेक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए किसान सम्मान निधि एवं लाड़ली बहना योजना के लाभों की जानकारी ली। उन्होंने किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों की ई-केवाईसी शीघ्र कराने के निर्देश प्रशासन को देते हुए कहा कि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 79 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तालाब निर्माण कराने के निर्देश प्रशासन को दिए। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने बालिका छात्रावास की स्वीकृति एवं निर्माण, जामूखेड़ी मार्ग तथा बुंदियाखुर्द पुलिया निर्माण के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूहों के बड़े समूहों को सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जोड़कर रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। समूह की महिलाओं की मांग पर आजीविका भवन तथा कोदो-कुटकी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास तथा शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग ठकिया गायन की रोजगार संबंधी मांग पर उन्हें ट्राइसिकल उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसददुर्गादास उइके, प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायकहेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायकमहेंद्र सिंह चौहान, उपाध्यक्ष जन अभियान परिषदमोहन नागर, संभागायुक्तश्रीकांत बनोठ, आईजीमिथलेश कुमार शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षकवीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

मैहर बैंड भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में सम्मिलित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गहरी सांस्कृतिक अभिरुचि और प्रदेश की अनमोल धरोहरों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप मध्यप्रदेश की संगीत विरासत को एक और ऐतिहासिक गौरव प्राप्त हुआ है। माँ शारदा की नगरी की धरोहर और विश्वविख्यात ‘मैहर वाद्यवृंद’ (मैहर बैंड) को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की सूची में सम्मिलित कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लोक-संस्कृति और कलाओं को अक्षुण्ण रखने की नीति के अंतर्गत संस्कृति विभाग द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों का ही यह सुखद परिणाम है। अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासनशिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के प्रतिभावान कलाकारों एवं शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों में से ‘भगोरिया नृत्य’ और ‘गोंड चित्रकला’ को भी इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सूची में स्थान मिल चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कला-संस्कृति के प्रति अनुराग के अनुरूप प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग की इस सांस्कृतिक यात्रा में पूर्व में सात ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ भी प्राप्त हो चुके हैं। मैहर बैंड की इस अनूठी संगीत परंपरा को जीवंत रखने और आगामी पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से एक ‘गुरुकुल’ की स्थापना भी की जा रही है। इस गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षित होकर युवा कलाकार मैहर बैंड के अनूठे संगीत, रागों और इसकी गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को और अधिक समृद्ध कर सकेंगे।

‘मैहर बैंड’ का गौरवशाली इतिहास

स्वर और साधना के अद्भुत संगम ‘मैहर बैंड’ का इतिहास बेहद गौरवशाली और अनूठा है। इसकी स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीत मनीषी उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब ने मैहर रियासत के तत्कालीन महाराजा बृजनाथ सिंह जूदेव की प्रेरणा से की थी। भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में यह विश्व का पहला ऐसा शास्त्रीय वाद्यवृंद (ऑर्केस्ट्रा) है, जिसने संगीत प्रेमियों को एक नए वितान से परिचित कराया। बीते 108 वर्षों के अपने सुदीर्घ और यशस्वी सफर में इस बैंड ने अपनी मौलिकता और शास्त्रीय गरिमा को जीवंत रखा है। धरोहर के रूप में इसके कलाकारों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अनमोल वाद्यवृंद की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ संजोकर रखा है। मैहर बैंड की सबसे बड़ी विशेषता इसके दुर्लभ वाद्ययंत्र और उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब द्वारा तैयार की गई विशेष शास्त्रीय बंदिशें हैं। इस वाद्यवृंद में सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, सितार-बैंजो, हारमोनियम और तबला जैसे पारंपरिक एवं पाश्चात्य वाद्यों का अनूठा मेल है। इनमें सबसे अनोखा और मुख्य आकर्षण ‘नलतरंग’ है। खाँ साहब ने बंदूक की नालियों (बैरल) को काटकर, उन्हें कलात्मक ढंग से स्वरबद्ध कर ‘नलतरंग’ जैसे अद्भुत और मधुर शास्त्रीय वाद्य का आविष्कार किया था। पूरी दुनिया में मैहर बैंड के अलावा यह वाद्य कहीं और नहीं पाया जाता, जो वैश्विक संगीत जगत में कौतूहल और आकर्षण का केंद्र है।

मैहर वाद्यवृंद की राष्ट्रीय ख्याति का शंखनाद वर्ष 1924 में लखनऊ के केसर बाग में आयोजित प्रतिष्ठित ‘भातखंडे समारोह’ से हुआ था, जहाँ इसकी अद्वितीय प्रस्तुति ने समूचे भारतवर्ष को चमत्कृत कर दिया था। तब से लेकर आज तक इस बैंड ने देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत मंचों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। संगीत और कला के प्रति इसके अमूल्य योगदान को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2016 में इसे सर्वोच्च ‘शिखर सम्मान’ से भी विभूषित किया जा चुका है। वर्तमान में संस्कृति विभाग के संरक्षण में यह वाद्यवृंद भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनवरत बहती रसधारा के रूप में विश्व पटल पर मध्यप्रदेश का मस्तक ऊंचा कर रहा है।

 

अमेरिका ने बिना रडार वाले F-35 फाइटर जेट किए डिलीवर, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

वाशिंगटन
अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा। 

F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है। 

ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था। 

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं। 

F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं 
F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है। 

अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा। 

इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते। 

यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है। 

ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर 
ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था। 

भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है। 

भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता? 
एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है। 

F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है। 

F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है। 

यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं। 

 

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह ने जीता रजत पदक

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी समरदीप सिंह ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतियोगिता के चौथे दिन सायंकालीन सत्र में आयोजित पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में समरदीप सिंह ने 20.40 मीटर का प्रभावशाली थ्रो करते हुए रजत पदक अर्जित किया।

एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

समरदीप सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर एशियाई खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफिकेशन मानक भी प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल पदक हासिल किया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी सुनिश्चित किया। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त पहचान

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह का यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं की निरंतर प्रगति और खेल अकादमियों में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है। राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के साथ एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने समरदीप सिंह को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समरदीप आगामी एशियाई खेलों में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

समरदीप सिंह की यह सफलता प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की जा सकती है।

 

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर हुए विशेष सत्र

भोपाल

अंतराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश थीम पर रवींद्र भवन में शनिवार को हुई समिट के दौरान नये बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे निवेशको, उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक तथा बैंकिंग संस्थाओं के बीच सार्थक संवाद हुआ।

एमएसएमई एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए नवीन बाज़ार अवसर

इस सत्र में एमएसएमई के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों, विशेषकर सीमित बाजार पहुंच, पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा निर्यात, डिजिटल कॉमर्स, शोध एवं विकास, जोखिम कम करने तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

सुश्री अंकिता पांडे, सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट एंड यंग एलएलपी (मॉडरेटर) एवं विशेषज्ञों ने संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें फियो (FIEO) ने प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को दस्तावेजीकरण, बाजार चयन तथा वैश्विक व्यापार गतिकी के संबंध में मार्गदर्शन देकर निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। सीएसआईआर-एएमपीआरआई के डॉ. भास्कर ने कच्चे एवं अपशिष्ट पदार्थों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने में नवाचार तथा सतत प्रक्रियाओं की भूमिका पर बल दिया तथा शोध एवं उद्योग के मध्य सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। ओएनडीसी (ONDC) तथा ईसीजीसी (ECGC) के प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच विस्तार हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथा विशेष रूप से छोटे एवं नवीन निर्यातकों के लिए भुगतान जोखिमों से सुरक्षा हेतु निर्यात्त ऋण बीमा के लाभों को रेखांकित किया। चर्चा में इंडिया पोस्ट के विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक विश्वसनीय एवं किफायती समाधान के रूप में उजागर किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई डिजिटल उपकरणों, नवाचार, वित्तीय संरक्षण तथा सुदृढ़ सप्लाई चेन सहायता का लाभ उठाकर प्रभावी रूप से अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।

पूंजी तक पहुंच सत्र से एमएसएमई को मिला नया क्षेत्र

नई पीढ़ी के एमएसएमई के लिए वित्त-पोषण सत्र में मॉडरेटर सुश्री ऋचा सिंह, सीनियर मैनेजर, अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।विकसित हो रहे वित्त पोषण परिदृश्य पर चर्चा की गई तथा डिजिटल एवं वैकल्पिक वित्त-पोषण माध्यमों के द्वारा ऋण प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद, एमएसएमई को समय पर एवं सुलभ वित प्राप्त करने में कोलैटरल की कमी, अपूर्ण दस्तावेज़ीकरण तथा सीमित क्रेडिट इतिहास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चर्चा में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया, जिसमें यूपीआई डेटा को नकद प्रवाह तथा साख-योग्यता के आकलन हेतु एक उपयोगी उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैंकिंग दृष्टिकोण से एमएसएमई द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, दस्तावेजीकरण में सुधार करने तथा ऋण पात्रता बढ़ाने हेतु सुदृढ साख प्रोफाइल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ट्रेड्स (TReDS) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिससे त्वरित नकदी प्रवाह तथा औपचारिक क्रेडिट ट्रेल स्थापित करने में सहायता मिलती है। सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई को विकास के लिए पूंजी तक पहुंच तथा सतत विस्तार सक्षम बनाने में डिजिटल अंगीकरण, वित्तीय साक्षरता, वैकल्पिक वित्त पोषण तथा सुदृढ़ संस्थागत सहयोग को समाहित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। दोनों सत्रों में नव उद्यमियों के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।   

बिना सुनवाई 1 साल तक हिरासत का प्रावधान! शुभेंदु सरकार के प्रस्तावित कानून पर छिड़ा सियासी घमासान

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में शु
भेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।

अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है।

विधेयकों पर होने लगा बवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है।

सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश
पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी।

विधेयक में क्या प्रावधान है
इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में ‘गुंडा’ ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा।

इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।

 

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई

रायपुर

 कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  
        
अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 
          
अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  
            
फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
          
अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

​धमतरी का ‘नगरी’ बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब: 250 किसानों ने थामा वैज्ञानिक खेती का हाथ, 250 टन पैदावार का लक्ष्य

​धमतरी का ‘नगरी’ बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब: 250 किसानों ने थामा वैज्ञानिक खेती का हाथ, 250 टन पैदावार का लक्ष्य

​उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग तक की बनी मजबूत चेन

 छत्तीसगढ़ के वनांचल में ‘पीली क्रांति’ से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूरत

​रायपुर,

    छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का आदिवासी बहुल नगरी विकासखंड अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ‘पीली क्रांति’ (हल्दी उत्पादन) की ओर कदम बढ़ा चुका है। मुख्यमंत्री के मंशानुसार कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और वनांचल के किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां हल्दी की वैज्ञानिक खेती की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी शुरुआत की गई है।
     ​इस मुहिम के तहत नगरी और मगरलोड क्षेत्र के 250 किसानों ने 10 टन उच्च गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज (राइजोम) की बुवाई कर आगामी सीजन में 250 टन बंपर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जिला प्रशासन की इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसानों को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि ‘उत्पादन–प्रसंस्करण–ब्रांडिंग–विपणन’  की एक सशक्त वैल्यू चेन (मूल्य श्रृंखला) से जोड़ा जा रहा है।

 खेत से लेकर बाजार तक का रोडमैप

     ​कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत धमतरी, जनपद पंचायत नगरी और ‘प्रदान’ संस्था के संयुक्त त्रिकोणीय सहयोग से ग्रामीण स्तर पर यह ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत व्यवस्था को बेहद संगठित रूप दिया गया है। ‘गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी’ (FPC) के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया गया है। कच्चे माल को सीधे औने-पौने दामों में बेचने के बजाय, जिला पंचायत द्वारा ग्राम कोर्रेमुडा में एक अत्याधुनिक हल्दी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है। यहां ‘हरिभूमि किसान उत्पादक संगठन’ के जरिए हल्दी का पाउडर और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे। तैयार हल्दी पाउडर को आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ ‘गट्टासिल्ली FPC’ द्वारा सीधे बाजार में उतारा जाएगा, जिससे बिचौलियों का खात्मा होगा और किसानों को सीधा मुनाफा मिलेगा।

‘कोर्रेमुडा’ में हुआ आधुनिक खेती का शंखनाद

     ​इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए ग्राम पंचायत झुझरकस्सा के आश्रित ग्राम कोर्रेमुडा में एक दिवसीय वृहद तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों और पीआरपी (PRP) ने हिस्सा लिया।

      विशेषज्ञों ने भूमि सुधार, रोगमुक्त राइजोम चयन, बीज उपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन की बारिकियां सिखाईं।लगभग 270 दिनों की इस फसल के दौरान कृषि मित्र हर चरण में किसानों के खेतों में जाकर तकनीकी मार्गदर्शन देंगे, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

 ऊपरी भूमि का सदुपयोग और टिकाऊ आय का जरिया

    ​नगरी विकासखंड का एक बड़ा हिस्सा पथरीली या ऊपरी भूमि (Upland) के अंतर्गत आता है, जहां धान की खेती उतनी लाभदायक नहीं होती। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह भूमि हल्दी जैसी नकदी फसलों के लिए बेहद उपयुक्त है। इस नई पहल से न केवल अनुपयोगी समझी जाने वाली जमीन का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
   ​यह समन्वित प्रयास आने वाले वर्षों में धमतरी के नगरी क्षेत्र को राज्य के नक्शे पर हल्दी उत्पादन और मूल्य संवर्धन के एक बड़े कृषि-उद्यमिता केंद्र के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में नव आरक्षकों को नशामुक्त समाज निर्माण का दिया गया संदेश

भोपाल 

“नशे से दूरी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” इसी संदेश के साथ विश्व मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस प्रशिक्षण शाला, उज्जैन में संचालित 6वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक श्रीमती मनीषा पाठक सोनी द्वारा किया गया। उन्होंने मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव, नशा मुक्ति के महत्व, पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी तथा समाज में नशा विरोधी जन-जागरूकता अभियान की आवश्यकता के संबंध में जानकारी दी।

कार्यशाला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), इंदौर के निरीक्षक श्री गौरव जायसवाल ने मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव, अवैध तस्करी की कार्यप्रणाली, नशे की लत से होने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक दुष्परिणाम तथा इससे जुड़े अपराधों के संबंध में बताया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने हेतु संचालित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 की जानकारी दी गई तथा नागरिकों से इस हेल्पलाइन का अधिकाधिक उपयोग कर नशे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में युवाओं से अपील की गई कि वे स्वयं नशीले पदार्थों से दूर रहें, अपने साथियों को भी नशे की ओर बढ़ने से रोकें तथा स्वस्थ, सुरक्षित एवं नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यशाला के समापन पर उपस्थित सभी नव आरक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई। उन्होंने स्वयं नशीले पदार्थों से दूर रहने, समाज में नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने तथा युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

 

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने किया 9.32 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन; जल्द बनेगा सामुदायिक भवन

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को नर्मदापुरम रोड स्थित नट बाबा शिव मंदिर परिसर में 9 लाख 32 हजार रुपए की लागत से बनने वाली बाउंड्री वॉल एवं ‘वैष्णो भवन’ का भूमिपूजन किया। इस गरिमामय अवसर पर राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की कर्मठता और निरंतर परिश्रम के कारण ही गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र होते हैं, जो हमारी मनोकामनाओं को भी पूर्ण करते हैं। ऐसे में आस्था के इन केंद्रों को व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधा संपन्न बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि क्षेत्र की जनता की सुविधाओं का निरंतर ध्यान रखते हुए विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने क्षेत्रीय रहवासियों द्वारा की गई सामुदायिक भवन की मांग को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

वार्ड 53 में आयोजित इस भूमि-पूजन कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद श्री प्रताप वारे, श्री जितेन्द्र शुक्ला,  शीला पाटीदार और श्री किशोर पटेल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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