मध्यप्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात को जीआई-टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों का हुआ पहला वाणिज्यिक निर्यात

भोपाल

रीवा का सुंदरजा आम अब वैश्व‍िक बाजारों की शान बन गया है। केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आम मध्यप्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पहले वाणिज्यिक निर्यात के रूप में पहुंच गये हैं। वैश्विक बाजारों में भारत के वि‍शिष्‍ट कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कृषक कल्याण वर्ष के चलते यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

पिछले कई महीनों से एपीडा ने मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), पैकिंग हाउस संचालकों और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर इस उत्‍कृष्‍ट किस्म के आम के निर्यात के लिए संपर्क स्थापित करने का काम किया है। इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात में एक खरीदार की पहचान हुई जिससे प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम के अंतर्राष्ट्रीय विपणन का मार्ग खुला।

जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप में एक मीट्रिक टन आम शामिल थे और यह 26 जून 2026 को मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात की गई। यह ऐतिहासिक खेप रीवा सुंदरजा आम की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है और आने वाले समय में नियमित निर्यात का मार्ग प्रशस्त करने की उम्मीद है।

निर्यात खेप में उच्च गुणवत्ता वाले जीआई टैग से युक्त रीवा सुंदरजा आम शामिल थे जिन्हें मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ निवासी से ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और प्रगतिशील किसानसोनू गुप्ता से प्राप्त किया गया था। आमों की कटाई निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार की गई थी और उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित त्रिसागर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के एपीडा-सुविधा प्राप्त पैक हाउस में इनकी ग्रेडिंग, छँटाई और निर्यात-योग्य पैकेजिंग की गई थी। निर्यात पैकेजिंग और पौध स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद आमों की खेप को वाराणसी हवाई अड्डे लाया गया जहां से उसे हवाई मार्ग द्वारा आगे संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया।

इस व्यावसायिक निर्यात से रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय बाजार में रीवा सुंदरजा आम का मौजूदा भाव लगभग 100 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि निर्यातक ने इसे 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा है। प्रति किलोग्राम 40 से 50 रुपये का यह लाभ किसानों को सीधे तौर पर मिलता है जो निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं में उत्पादकों को शामिल करने के आर्थिक लाभों को दर्शाता है। इस पहल से अधिक से अधि‍क किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ने की भी उम्मीद है।

इस सफल निर्यात से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्षेत्र-विशिष्ट कृषि उत्पादों को एक अलग पहचान दिलाने में भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण के महत्व पर और जोर दिया गया है। असाधारण मिठास, भरपूर सुगंध, रेशे रहित गूदे और विशिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। वाणिज्यिक निर्यात से इस स्वदेशी किस्म की वैश्विक पहचान बढ़ने की उम्मीद है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश उत्‍कृष्‍ट कि‍स्‍म के आम निर्यात के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

संयुक्त अरब अमीरात को जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 26 जून 2026 को ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन मध्यप्रदेश से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍ध‍ि साबित हुआ और एपीडा मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, पैक हाउस संचालकों और किसानों के बीच सहयोग की सफलता दर्शाता है।

एपीडा निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करके, अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कर, बाजार संपर्क विकसित करके और वैश्विक बाजारों में भारत के कृषि उत्पादों को बढ़ावा देकर जीआई-टैग वाले और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रीवा सुंदरजा आमों के वाणिज्यिक निर्यात की सफल शुरुआत से भारत से जीआई उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा होने, कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत करने और रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों की स्थायी आय में वृद्धि में योगदान देने की उम्मीद है।

सुंदरजा की विशेषता

दो साल पहले रीवा ज़िले के गोविंदगढ़ में उगने वाले सुंदरजा आम को जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन टैग मिला। 1968 में सुंदरजा पर एक पोस्टेज स्टैम्प जारी किया गया था। यह दिखने में सुंदर और स्वाद में लाजवाब होता है और इसकी खुशबू भी बहुत अच्छी होती है। यह पहली बारिश के बाद पक जाता है और सिर्फ़ गोविंदगढ़ के माहौल में ही उगता है क्योंकि यहाँ की मिट्टी और तापमान सुंदरजा के पेड़ के फलने-फूलने के लिए सही हैं। पत्ती, छाल, बीज हर हिस्सा काम का होता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है और इसमें विटामिन-A, विटामिन-C और आयरन भरपूर होता है। डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे पसंद करते हैं क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा कम होती है। सुंदरजा रीवा ज़िले और पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बन गया है।

रीवा के फ्रूट रिसर्च सेंटर, कथुलिया में आम पर और रिसर्च चल रही है। यहाँ अलग-अलग वैरायटी के 2345 आम के पेड़ उगाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से बॉम्बे ग्रीन, इंदिरा, दशहरी, लंगड़ा, गधुवा, आम्रपाली, मल्लिका शामिल हैं। बाणसागर डैम नहर रीवा और आस-पास के जिलों में बागवानी फसलों के लिए लाइफलाइन साबित हुई है, जिससे फूड प्रोसेसिंग के छोटे उद्योगों के लिए काफी अवसरA बने हैं। गोविंदगढ़ इलाके में ही आम के अच्छे बाग हैं। यहां करीब 237 तरह के आम उगाए जाते हैं। सभी का स्वाद बहुत अच्छा होता है। रीवा फ्रांस, USA, UK और UAE को आम एक्सपोर्ट कर रहा है। 

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रिटायर्ड शिक्षकों के 50 दिन वाले आदेश पर रोक; 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता साफ

इंदौर 

 मध्यप्रदेश में टीचर्स के लिए अर्जित अवकाश पर इंदौर हाईकोर्ट नया फैसला आया है। हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सहायक शिक्षकों को 300 दिन की अर्जित अवकाश (लीव एनकैशमेंट) का लाभ न देने के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार के सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट देने संबंधी आदेशों को रद्द कर नए सिरे से विचार के लिए अफसरों को भेज दिया। इसी के साथ रिटायर्ड टीचर्स के लिए 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता खुल गया है। जस्टिस दीपक खोट की एकलपीठ ने 11 याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया। खास बात यह है कि वित्त विभाग ने भी हाल ही में प्रदेश में कर्मचारी के लिए अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं।

अभिभाषक अभिनव धानोतकर ने बताया, इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा है, अफसरों ने वित्त विभाग के 1991 और 2008 के परिपत्रों के आधार पर शिक्षकों को सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट का लाभ दिया, जबकि 28 जुलाई 2018 को मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम, में संशोधन व 8 मार्च 2019 के प्रपत्र पर विचार नहीं किया।

कोर्ट की टिप्पणी…
कोर्ट ने टिप्पणी की, विवादित आदेशों में यह भी नहीं बताया गया कि वर्ष वार अवकाश की गणना कैसे की गई और 50 दिन कैसे तय किए। इसलिए आदेश विधिसम्मत नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा, सिविल सेवा के नियमानुसार कर्मचारियों के अवकाश का पूरा रिकॉर्ड संधारित करना विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अवकाश की गणना ही वर्ष वार उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कर्मचारी के अधिकारों का सही निर्धारण नहीं किया जा सकता। संशोधन व 8 मार्च 2019 के नवीनतम परिपत्र पर विचार नहीं किया।

कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान
बता दें कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान है। इसको लेकर वित्त विभाग ने हाल ही में सभी विभागों को निर्देश जारी कर कर्मचारी के पूरे सेवाकाल में अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने को कहा है। अधिक अवकाश होने पर उसका कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।

विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति
प्रदेश के विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति बनी है। वित्त विभाग के नए निर्देश से इसकी समाप्ति के साथ ही बड़ी स्पष्टता भी मिल गई है।

वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी प्रक्रिया
सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, असमर्थता पेंशन अथवा सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अवकाश नकदीकरण की गणना की प्रक्रिया भी वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी है।

पुतिन के करीबी ‘स्पाई’ इवानोव की मौत पर रहस्य, आखिर क्या है पूरा मामला?

मॉस्को

 कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे। 

खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है। 

पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था। 

द सोवियत जेम्स बॉन्ड
लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले। 

इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।  

इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी। 

पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब ‘ऑल द क्रेमलिन मेन्स’ में लिखा, “वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह ‘द मैट्रिक्स’ के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. “1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं। 

SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया। 

इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे
जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें। 

इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर
कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं। 

इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया। 

2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया। 

यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

भोपाल को 3900 करोड़ की बड़ी सौगात, बनेगा 10-लेन ईस्टर्न बायपास; ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

 राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है।

शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर
प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा।

वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली
वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा
पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा।

एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।

वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी।

रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।

पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी
परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है।

रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी।

प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन की मांग, राज्यमंत्री गौर ने केंद्रीय मंत्री मांडविया को लिखा पत्र

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग की

केंद्रीय मंत्री मांडविया को राज्यमंत्री गौर ने लिखा पत्र

भोपाल

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, सोनागिरी के उन्नयन के संबंध में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उल्लेख किया है कि यह अस्पताल भोपाल, मंडीदीप, सतलापुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों तथा उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। वर्तमान में लगभग 6.5 लाख बीमित कामगार इस अस्पताल से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में यह अस्पताल राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं द्वारा संचालित था, लेकिन दिनांक 22 जून 2023 को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसका संचालन अपने हाथ में ले लिया और आज भी भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के नियंत्रण में है। इसलिए बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए इसका 300 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेष चिकित्सकों एवं मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता और सेकेंडरी व सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 10वें अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश समित के पूर्व रवींद्र भवन में ही दो पवेलियन में विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के एमएसएमई एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उद्यमिता, नवाचार तथा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनेक उत्पादों की जानकारी ली और स्टार्टअप एवं सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यमियों से चर्चा कर उनका उत्साह वर्धन किया

प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टाल लगाये गए थे ।ड्रोन निर्माण समाधान, आईओटी-आधारित फिजियोथेरेपी उपकरण, सोलर वाटर हीटर एवं डीट पंप, रेलवे तथा रक्षा इंजीनियरिंग उत्पाद, पेटेंटयुक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स एवं ईवी चार्जिंग समाधान, कृषि-अवशेष पैलेट्स तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उत्पादों सहित विविध नवाचारी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘बाजार से’ नामक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो ग्राहकों एवं व्यवसायों को जोड़ता है तथा इसे देश के पहले एआई-संचालित बाज़ार के रूप में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांसकारी स्टॉल पर बांस से बनी अनेक वस्तुओं की जानकारी ली।

एमएसएमई विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के सात जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक समर्पित पवेलियन (एमपी पवेलियन) भी स्थापित किया गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीतियों एवं योजनाओं संबंधी एमएसएमई की जिज्ञासाओं के निवारण संबंधी एक हेल्पडेस्क तथा उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेसिलिटेशन डेस्क की भी स्थापना की गई।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) सहित विभिन्न संस्थानों ने भी राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के विकास के लिये इस प्रदर्शनी में सहभागिता की। 

पेपर लीक के आरोपों के बाद महाराष्ट्र TET परीक्षा स्थगित, परीक्षा से पहले सवाल हुए वायरल

मुंबई 

सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर से पेपर लीक का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है. अब बेहद चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र से आया है. 28 जून 2026 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने भिवंडी में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है, जो इस रविवार को परीक्षा देने की पूरी तैयारी कर चुके थे। 

महाराष्ट्र टीईटी (Maha TET 2026) को लेकर छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ देखी जा सकती है. भिवंडी में कुछ संदिग्धों के पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी बरामद हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा. महाराष्ट्री टीईटी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस खुलासे ने परीक्षा कराने वाली सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की पोल खोल दी है. .भिवंडी पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है. परिषद का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इसे टालना बेहद जरूरी था। 

भिवंडी में पुलिस की छापेमारी से हुआ खुलासा
भिवंडी पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और प्रश्नपत्र से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की गुप्त सूचना मिली थी. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद की. भिवंडी पुलिस के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लग गए, जिसने महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा कराने वाली परिषद के होश उड़ा दिए. इसके तुरंत बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। 

बरामद दस्तावेज और असली पेपर में निकली समानता
शुरुआती जांच में जब पुलिस की तरफ से बरामद की गई सामग्री का मिलान 28 जून को होने वाली असली TET 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र से किया गया तो अधिकारी हैरान रह गए. बरामद सामग्री और परीक्षा के कुछ प्रश्नों में गजब की समानता पाई गई. इसका साफ मतलब था कि पेपर लीक की पूरी तैयारी हो चुकी थी और कुछ चुनिंदा लोगों तक सवाल पहुंच चुके थे. इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आते ही परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। 

पारदर्शिता के लिए टाली परीक्षा
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की. परिषद ने साफ किया कि उनके लिए परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे ऊपर है. अगर इस स्थिति में परीक्षा कराई जाती तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता. इसलिए 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 2026 को फिलहाल रोकने का सख्त फैसला लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को दागदार होने से बचाया जा सके। 

उम्मीदवारों के भविष्य पर सस्पेंस, कब होगी परीक्षा?
इस अचानक आए फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है जो महीनों से दिन-रात एक करके इस शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया पर छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इस रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है. परीक्षा की नई तारीखों और आगे के शेड्यूल को लेकर जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। 

दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
परीक्षा परिषद की डिप्टी कमिश्नर प्रिया शिंदे ने बताया कि पुणे परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य के 37 शहरों के 1728 केंद्रों पर होने वाली थी. इसमें करीब 6 लाख 12 हजार 500 उम्मीदवारों को शामिल होना था. लेकिन ठाणे और भिवंडी में पेपर लीक होने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है. इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए न तो रजिस्ट्रेशन कराना होगा और न ही कोई फीस देनी होगी. डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एक परीक्षा आयोजित करने में करीब 3 हफ्ते लगते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

 

इंदौर बना EV और ग्रीन एनर्जी का नया हब, कॉन्क्लेव में जुटे देशभर के निवेशक और स्टार्टअप

इंदौर 

इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों।

ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई।

कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए।

सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया।

एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

 

प्रियदर्शन की फिल्म ‘हैवान’ का ऐलान, अक्षय कुमार–सैफ अली खान की जोड़ी 11 सितंबर 2026 को मचाएगी धमाल

प्रियदर्शन की अपकमिंग क्राइम थ्रिलर फिल्म हैवाल की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। फिल्म के लिए फैंस को 11 सितंबर, 2026 तक का इंतजार करना होगा। हैवान में एक बार फिर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी दमदार वापसी करेगी। फिल्म को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। फिल्म के प्रोडक्शन हाउस ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर करते हुए रिलीज डेट का ऐलान किया है।

कब रिलीज होगी अक्षय कुमार की हैवान?
केवीएन प्रोडक्शन ने हैवान को प्रोड्यूस किया है। जो पोस्टर शेयर किया गया है उसपर लिखा है- सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। 60 ब्लॉकबस्टर्स , एक मास्टर स्टोरीटेलर। फिल्म बाय प्रियदर्शन- हैवान। हैवान पोस्टर पर बड़े-बड़े लाल रंग के अक्षरों से लिखा गया है।

हैवान की रिलीज डेट के ऐलान पर क्या बोले सोशल मीडिया यूजर्स
इस पोस्टर के साथ कैप्शन लिखा गया है – एक ऑब्सेशन। एक अटूट लगन। एक ऐसी तारीख जो आप याद रखना चाहेंगे। हैवान- प्रियदर्शन की फिल्म जिसमें सैफ अली खान और अक्षय कुमार नजर आएंगे। सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। अपने कैलेंडर में तारीख मार्क कर लीजिए।

इस पोस्टर पर तमाम लोगों के कमेंट्स आए हैं। एक ने लिखा- खिलाड़ी कुमार। अब इंतजार नहीं होता। एक ने लिखा- ये फिल्म अच्छी होगी। एक ने लिखा जेलर 2 से होगी क्लैश। बहुत सारे यूजर्स ने पोस्ट पर हार्ट और फायर इमोजी बनाकर रिएक्ट किया है।

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी सैफ अली खान की कर्तव्य
सैफ अली खान की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कर्तव्य नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। सैफ अली खान की कर्तव्य एक क्राइम थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म में जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी विलेन के रोल में नजर आए हैं। सैफ अली खान ये क्राइम थ्रिलर लोगों पर अपना कमाल दिखा पाने से चूक गई है।

अक्षय कुमार की वेलकम टू द जंगल का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
अक्षय कुमार की बात करें तो उनकी फिल्म वेलकम बैक टू द जंगल 26 जून को ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। वेलकम बैक टू जंगल एक मल्टी-स्टारर फिल्म है। फिल्म लोगों को पसंद भी आ रही है। सोशल मीडिया पर फिल्म को पॉजिटिव रिव्यूज मिले हैं। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म का असर देखने को मिला है। sacnilk.com के मुताबिक, अक्षय कुमार की फिल्म ने अब तक (27 जून, दोपहर 2 बजे) 22.48 करोड़ की कमाई कर ली है। अक्षय कुमार की वेलकम बैक टू द जंगल अहमद खान ने डायरेक्ट की है।

रायपुर : नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज निभाए अग्रणी भूमिका : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर : नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज निभाए अग्रणी भूमिका : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक में सामाजिक एकता, वन संरक्षण और देवस्थलों के संरक्षण पर दिया जोर

रायपुर

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर के नव निर्माण में समाज की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। विकास, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए समाज को संगठित होकर आगे आना होगा। उन्होंने यह बात आज नारायणपुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए कही।

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

       उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद कुछ लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि अब जंगलों की कटाई होगी या बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने समाज प्रमुखों से ऐसे भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने और लोगों को सही जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के नवनिर्माण का जिम्मा अब बस्तर के युवाओं के मजबूत कंधों पर टिका है और सरकार विकास के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

          उन्होंने कहा कि समाज के भीतर आदिवासी परंपरा का पालन करने वाले लोगों और उससे अलग हो चुके लोगों के बीच अनावश्यक द्वंद की स्थिति बन रही है। यह समाज के हित में नहीं है। समाज प्रमुखों को आगे आकर आपसी वैमनस्य समाप्त करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

        उप मुख्यमंत्री ने सामाजिक स्थलों एवं देवस्थलों का राजस्व अभिलेखों में चिन्हांकन कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शासन और प्रशासन के सहयोग से देवभूमियों का सफलतापूर्वक चिन्हांकन कराया जा रहा है। इसी तर्ज पर नारायणपुर में भी सभी समाज प्रमुख मिलकर एक समिति का गठन करें, ताकि सामाजिक एवं धार्मिक स्थलों का चिन्हांकन शीघ्र पूरा हो सके और भविष्य में उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

        बैठक के दौरान समाज प्रमुखों द्वारा गढ़िया बाबा के देवस्थल के संरक्षण का विषय उठाए जाने पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने तत्काल बाउंड्री वॉल, नलकूप तथा सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों का संरक्षण समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

        उप मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण को समाज का साझा दायित्व बताते हुए कहा कि जंगलों को बचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से लघु वनोपजों का संग्रहण एवं दोहन किया जाए तो वन भी सुरक्षित रहेंगे और ग्रामीणों को खेती की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने समाज प्रमुखों से इस विषय पर गांव-गांव लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया।

       उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। शर्मा ने कहा कि जैविक कृषि अपनाने से लोगों का खुद का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, भूमि की उर्वरता बनी रहेगी और जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार बस्तर में सहकारी रूप से दुग्ध उत्पादन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

       उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अबूझमाड़ की पहाड़ी क्षेत्रों में स्थाई कृषि को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अबूझमाड़ के 10-10 युवाओं का दल बनाकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों का शैक्षणिक भ्रमण कराकर ऊंचाइयों पर खेती के आधुनिक कृषि तकनीक सिखाने को कहा। उन्होंने अबूझमाड़ के ग्रामों में पर्यटन को विकसित करने के लिए होम स्टे विकसित करने को कहा ताकि ग्रामीणों को स्थायी आय का नया माध्यम प्राप्त हो सके।

       बैठक में समाज प्रमुखों ने क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकास संबंधी समस्याओं और सुझावों से उप मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से ही नक्सल मुक्त बस्तर का समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य तैयार किया जा सकेगा।

       इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, ओरछा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष मंगलूराम नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, छोटे डोंगर की सरपंच श्रीमती संध्या पवार, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

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