रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े

कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रेस-वार्ता में कहा— सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर, सरकार समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध

रायपुर
दो दिवसीय प्रवास पर बीजापुर पहुंचीं  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शनिवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से अब जिले में विकास का नया दौर शुरू हो चुका है और शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बीजापुर वासियों को दी बधाई

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जिलेवासियों को सशस्त्र माओवाद से मुक्ति के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे बस्तर अंचल और देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में माओवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब बीजापुर सहित बस्तर संभाग शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

अब विकास की रफ्तार होगी और तेज

प्रेस-वार्ता में मंत्री ने कहा कि वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के कारण जिले के कई अंदरूनी क्षेत्रों तक विकास कार्य पूरी गति से नहीं पहुंच पाए थे। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और शासन-प्रशासन पूरी क्षमता एवं प्रतिबद्धता के साथ उन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगी शासन की योजनाएं

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी है। महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की व्यक्ति-मूलक योजनाओं से जिले के अंतिम व्यक्ति को जोड़कर समावेशी विकास का मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे हर परिवार विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन सके।

शांति और विकास साथ-साथ चलेंगे

मंत्री ने कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। अब जब बीजापुर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का दायरा लगातार बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर आने वाले समय में विकास, सुशासन और जनकल्याण का एक नया उदाहरण बनेगा। सरकार जिले के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य कर रही है।

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

रायपुर ,
 छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मंजूरी, अब अलग-अलग फ्लेवर की फ्रेश क्राफ्ट बीयर मिलेगी

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में अब स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर का दौर शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में पहली बार निवेशकों को माइक्रो ब्रुअरी संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पर्यटन, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति मिलेगी, निजी निवेश आकर्षित होगा और आबकारी विभाग के राजस्व में भी वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ में बीयर पसंद करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब राज्य में अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर का स्वाद मिल सकेगा। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा।

रेस्तरां में बनेगी फ्रेश बीयर :
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी ऐसे रेस्तरां या होटल परिसर में स्थापित की जा सकेगी, जहां सीमित मात्रा में बीयर तैयार कर उसी स्थान पर ग्राहकों को परोसी जाएगी। यहां तैयार होने वाली बीयर को क्राफ्ट बीयर कहा जाता है, जो अपने ताजे स्वाद, गुणवत्ता और विभिन्न फ्लेवर के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय मानी जाती है। अभी तक छत्तीसगढ़ में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी और उपभोक्ताओं को केवल बड़े ब्रांडों की औद्योगिक स्तर पर बनी बीयर ही उपलब्ध होती थी।

सरकार का कहना है कि इससे लोगों को नया विकल्प मिलेगा और होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से चल रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की ‘क्राफ्ट बीयर कैपिटल’ माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। लाइसेंस के लिए 10 लाख फीस होगी। 4 हजार वर्गफीट परिसर जरूरी होगा।

छोटे बैच में होगी तैयार :
माइक्रो ब्रुअरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बीयर छोटे-छोटे बैच में तैयार की जाती है। उत्पादन सीमित होने के कारण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स, यीस्ट और अन्य प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है। चूंकि यह बीयर तैयार होने के तुरंत बाद ग्राहकों को परोसी जाती है, इसलिए इसका स्वाद सामान्य बीयर की तुलना में अधिक ताजा और बेहतर माना जाता है। साथ ही उपभोक्ताओं को विभिन्न फ्लेवर और विशेष किस्मों की बीयर का विकल्प भी मिलता है।

नए मानक तैयार :
राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए कुछ अनिवार्य मानक भी तय किए हैं। इसके अनुसार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कम से कम 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल वाला परिसर होना आवश्यक होगा। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और अन्य वैधानिक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित रेस्तरां और माइक्रो ब्रुअरी एक ही परिसर में संचालित किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों को ताजा तैयार की गई क्राफ्ट बीयर का अनुभव मिल सके।

10 लाख का लाइसेंस :
नई व्यवस्था के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर वर्ष 10 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक इकाई को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। तैयार बीयर पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित उत्पाद शुल्क भी लागू होगा। उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि अंतिम कीमत स्थान, ब्रांड और फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

पर्यटन को बढ़ावा :
सरकार का मानना है कि यह नीति केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे राज्य के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलेगा। देश के कई राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी होटल, रेस्तरां और पर्यटन स्थलों पर इस तरह की इकाइयों के खुलने से नए निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। 

साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आबकारी विभाग का कहना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू होने से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। लाइसेंस शुल्क, उत्पाद शुल्क और इससे जुड़े अन्य करों के माध्यम से सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। वहीं होटल और रेस्तरां उद्योग को अपने कारोबार का विस्तार करने का नया अवसर मिलेगा।

कमाई बढ़ाने की स्कीम :
नई आबकारी नीति के इस फैसले को राज्य में आतिथ्य और पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि राज्य में कितने निवेशक माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने में रुचि दिखाते हैं और छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर लोगों के बीच कितनी लोकप्रिय हो पाती है।

सामान्य बीयर से कैसे अलग होगी क्राफ्ट बीयर
क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसके स्वाद, गुणवत्ता और ताजगी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है। इसमें अलग-अलग फ्लेवर भी मिलते हैं और इसे ताजा परोसा जाता है।

4 हजार वर्गफीट जगह होना जरूरी
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4 हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सालाना 10 लाख रुपए देनी होगी लाइसेंस फीस
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर साल 10 लाख रुपए लाइसेंस फीस देनी होगी। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां सालाना लाइसेंस फीस 25 लाख रुपए थी, उसे घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है।हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा सुरक्षा राशि के रूप में पहले से जमा करना होगा।

एक गिलास की कीमत 250 से 300 रुपए तक
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपए प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क तय किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपए के बीच हो सकती है।

सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी शुरू होने से होटल, रेस्तरां और पर्यटन क्षेत्र को फायदा मिलेगा। नए निवेश आएंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य को लाइसेंस फीस और उत्पाद शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

उत्पादन की सीमा तय
नई नीति के तहत एक माइक्रो ब्रुअरी सालभर में अधिकतम 3 लाख 65 हजार बल्क लीटर क्राफ्ट बीयर का ही उत्पादन कर सकेगी। यानी रोजाना औसतन 1,000 बल्क लीटर उत्पादन की सीमा तय की गई है।सरकार ने इस बार माइक्रो ब्रुअरी के संचालन पर निगरानी भी बढ़ा दी है। उत्पादन, बिक्री और टैक्स भुगतान पर लगातार नजर रखी जाएगी। यानी कारोबार शुरू करना भले आसान हुआ हो, लेकिन नियमों का पालन पहले से ज्यादा सख्ती से करना होगा।

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

गांवों के विकास में सहभागी बनने का किया आह्वान, सिंचाई व्यवस्था के दिए निर्देश

रायपुर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा  नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी  

        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील  

         गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश  

         उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की। 

सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं

        चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें।

पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार  

       उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप  

            वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।

            इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सागर में ‘लुटेरी दुल्हन’ का खेल! शादी के तीसरे दिन ₹1.20 लाख नकद और जेवर लेकर फरार

सागर/ जैसीनगर
 जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया।

महिला को विधवा बताकर की ठगी
पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था।

सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी
नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली।

तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की।

बिचौलिए से की जा रही पूछताछ
पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

 

उज्जैन से भोपाल तक डीपफेक का जाल, MBBS छात्रा और मां-बेटी बने निशाना; रिश्तेदार और प्रेमिका पर आरोप

उज्जैन / भोपाल

मध्यप्रदेश के उज्जैन में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का फेक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार छात्रा और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा तरक्की से जलन रखने वाले रिश्तेदारों ने ही उसे बदनाम करने की साजिश रची थी. आरोपियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान जमा कराई गई छात्रा की तस्वीर हासिल की और तकनीकी माध्यमों से उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। 

पिता की शिकायत के बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार मक्सी रोड क्षेत्र के एक किसान ने 20 जून की रात पंवासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो आया, जिसमें उनकी नाबालिग बेटी के नाम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो दिनों तक गोपनीय रूप से जांच की और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया। 

BLO से हासिल की गई छात्रा की तस्वीर
जांच में सामने आया कि छात्रा की तस्वीर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जमा दस्तावेजों से हासिल की गई थी. पुलिस के अनुसार बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने एसआईआर फॉर्म में लगी छात्रा की फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी. बाद में यह तस्वीर अन्य आरोपियों तक पहुंची. इसी तस्वीर का उपयोग कर AI और डीपफेक जैसी डिजिटल एडिटिंग के जरिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। 

MBBS की पढ़ाई और परिवार की तरक्की बनी वजह
पंवासा थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता अपने गांव और समाज की पहली लड़की है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है. पुलिस का दावा है कि छात्रा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से कुछ रिश्तेदार नाराज थे. परिवार की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखते हुए आरोपियों ने उसे बदनाम करने की साजिश रची. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का उद्देश्य कथित तौर पर परिवार पर सामाजिक दबाव बनाना था ताकि छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सके। 

उज्जैन: MBBS कर रही छात्रा बनी रिश्तेदार की साजिश का शिकार
उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक MBBS छात्रा के फोटो को अश्लील वीडियो से जोड़कर सोशल मीडिया और गांव के वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह साजिश छात्रा के ही रिश्तेदार ने रची थी। उसका मकसद छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छात्रा का फोटो सरकारी रिकॉर्ड से एक महिला BLO ने आरोपियों को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद फोटो को एडिट कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और गांव के ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। महिला BLO को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

सरकारी रिकॉर्ड से मिला फोटो
पुलिस के मुताबिक, छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी फोटो जुटाना आसान नहीं था। आरोपी को पता चला कि छात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान BLO को अपना फोटो दिया था। वहीं से फोटो हासिल कर उसे डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश को घटना की वजह माना जा रहा है।

भोपाल: शादी से इनकार पर मां-बहन को बनाया निशाना
भोपाल के करोंद इलाके में एक युवक को अपनी प्रेमिका से शादी से इनकार करना भारी पड़ गया। आरोप है कि युवती ने बदला लेने के लिए युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की AI से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल कर दिए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी तनाव में है और पूरा परिवार बदनामी झेल रहा है।

परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
पीड़ित परिवार ने पहले छोला थाना में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी युवती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि AI और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करने में सावधानी बरतने और संदिग्ध कंटेंट दिखने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दे रहे हैं।

चार महीने पहले तैयार किया गया था फेक वीडियो
पुलिस जांच में पता चला कि कथित फेक वीडियो करीब चार महीने पहले तैयार किया गया था. बताया जा रहा है कि छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी तस्वीर जुटाना आसान नहीं था. आरोपियों को जब पता चला कि छात्रा की फोटो सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध है, तो उसी का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किया गया. कुछ समय बाद यह वीडियो छात्रा के पिता तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली। 

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आबिद पटेल, एहसान पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार बताया जा रहा है। 

मोबाइल जब्त, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
जांच एजेंसियों ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि वीडियो बनाने, एडिट करने और प्रसारित करने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाया जा सके. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और इसके प्रसार में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। 

BLO के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस जांच में बीएलओ की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है. पंवासा थाना पुलिस ने संबंधित बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के संबंध में कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा है. प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। 

परिवार को बदनाम करने की साजिश का खुलासा
पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर अपराध के साथ-साथ किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश से भी जुड़ा है. फिलहाल फरार आरोपी की तलाश जारी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। 

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला
स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प
करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, हर दिन करीब 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान
शिप्रा नदी पर हो रहा 853.46 करोड़ रूपए से 22 नए पुलों का निर्माण
सिंहस्थ हमारी आस्था का महासंगम, उज्जैन और करीबी जिलों में चल रहे हैं 25 हजार करोड़ के विकास कार्य
अधोसंरचना विकास कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन
उज्जैन में सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प पर हुई वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में की सहभागिता

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से पापों का शमन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : 2028 एक नई मिसाल कायम करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प’ विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य जनों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखने हम सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने पर उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य के काल का वैभव पुन: प्राप्त कर धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा के नवीन घाटों और मौजूदा घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। सभी श्रद्धालु मां शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें, इसके लिए हमारी सरकार हर तरह के प्रबंध कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। देशभर में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है। हमारी धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियां देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को लालायित कर रही हैं। उज्जैन काल और महाकाल की नगरी है। सौभाग्यशाली लोगों को ही उज्जैन आने का अवसर मिलता है। सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए उज्जैन में दूरगामी दृष्टि के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य जारी हैं। यहां किए जा रहे कार्य परमात्मा के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए हर बार पिछली चुनौतियों को लेकर मंथन हुआ है। यह कार्यशाला भी इसी उद्देश्य के लिए आयोजित की गई है।

सिंहस्थ : 2028 के लिए समितियों का होगा गठन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं भी स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति की बैठकों में शामिल होने का अवसर भी मिला। सिंहस्थ समितियों में हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते हैं। आगामी सिंहस्थ के लिए सभी समितियों का गठन होना है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सिंहस्थ है। पहले के सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराने की चुनौती थी। लेकिन वर्ष 2022 के बाद उज्जैन शहर में होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य शुरू हुए। श्रद्धालुओं के सुविधाजनक आवागमन के लिए अब कोई सड़क ऐसी नहीं बच रही है, जिसे चौड़ा न किया गया हो। शिप्रा नदी पर घाटों का निर्माण कार्य जारी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना शिप्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने देवस्थानों पर सुविधाएं विकसित करने का काम कर रही है। शिप्रा में पक्के घाटों के निर्माण से मिट्टी का कटाव थमेगा, साथ ही नदी की धारा अविरल और एक जैसी बनी रहेगी।

विकसित की जा रही है बेहतर रोड कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने-जाने के लिए आसपास के सभी शहरों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। पड़ोसी राज्यों से भी चर्चा कर श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। दूसरी ओर रेलवे लाइन के विकास कार्य भी आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब फतेहाबाद का ट्रैक चालू हो गया है और नागदा जाने के लिए रेलगाड़ियों को अब उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री ने उज्जैन में एक नए रेलवे स्टेशन की सौगात दी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के जरिए पिछले सिंहस्थ आयोजनों में उज्जैन में सेवाएं दे चुके सभी अनुभवी अधिकारियों और नागरिकों से जो भी सुझाव मिलेंगे, हम उन सुझावों पर बेहतर अमल कर सिंहस्थ : 2028 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में सिंहस्थ 2028 को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त, सुरक्षित एवं सुविधाजनक स्नान स्थल उपलब्ध कराने के लिए 778 करोड़ रुपए की लागत से मां शिप्रा के दोनों तटों पर 29 किमी से अधिक लंबाई के नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही 120 करोड़ रुपए राशि से मौजूदा 7.8 किमी के स्थायी घाटों का उन्नयन किया जा रहा है। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए उज्जैन को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जोड़ा जा रहा है। उज्जैन की चारों दिशाओं में 6 लेन 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। करीब 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड तो लगभग पूर्ण हो गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन और आंतरिक मार्गों पर यातायात अवरुद्ध ना हो इसके लिए 853.46 करोड़ रुपए राशि से 22 नवीन पुलों का निर्माण एवं वर्तमान पुलों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। 17 पुल नदी पर और 5 रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण प्रगतिरत है। सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीय डिजिटल कमांड सेंटर का विकास 139 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। सेंटर में शहर और मेला क्षेत्र की एकीकृत सीसीटीवी निगरानी, एआई आधारित भीड़ प्रबंधन आदि की सुविधा रहेगी। सिंहस्थ को सुरक्षित बनाने के लिए एकीकृत आपदा प्रबन्धन, मानव संसाधन प्रशिक्षण और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 5,017 करोड़ रुपए से उज्जैन-जावरा मार्ग एवं 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, 2,523 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-झालावाड़ 2 लेन से फोरलेन, 351 करोड़ रुपए से उज्जैन-मक्सी 2 लेन से फोरलेन, 2,660 करोड़ रुपए से उज्जैन-गरोठ मार्ग, 7.02 करोड़ रुपए से सिंहस्थ बाईपास निर्माण कर श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम बनाया जाएगा। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुगम और निर्बाध रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 236 स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इसके साथ ही 7 रेलवे स्टेशन उज्जैन, नई खेड़ी, चिंतामन, पंवासा, मोहनपुरा, पिंगलेश्वर और विक्रम नगर का उन्नयन एवं आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम कनेक्टिविटी के लिए उज्जैन-देवास रोड पर करीब 457 एकड़ भूमि पर नवीन हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। करीब 13.45 करोड़ रुपए से सदावल में 4 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है।

कार्यशाला में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। कमिश्नर उज्जैन एवं मेलाधिकारी आशीष सिंह ने सिंहस्थ के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। कार्यशाला में कलेक्टर उज्जैन रोशन कुमार सिंह, पिछले सिंहस्थ में सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त एवं वर्तमान में सेवारत प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। अपर पुलिस महानिदेशक उज्जैन राकेश गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।

 

तीन दिवसीय दौरे पर सेशल्स पहुंचे PM मोदी, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने किया भव्य स्वागत

विक्टोरिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया। अपने स्वागत से गदगद पीएम मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति का आभार भी जताया। पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर में हमारा एक अहम समुद्री साझेदार और करीबी दोस्त है। मैं इस यात्रा को लेकर उत्साहित हूं, जिसका मकसद हमारे पुराने रिश्तों को और मजबूत करना और दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए सहयोग बढ़ाना है। वह सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर वहां की राजकीय यात्रा कर रहे हैं।

एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान कच्छ के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन पहुंचे, जहां उन्होंने पौधा लगाया और वहां मौजूद सेशेल्स के मूल निवासी एल्डाब्रा जाइंट कछुओं को खाना खिलाया।

मोदी 29 जून को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यह समारोह देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधोंपर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

सेशेल्स में पीएम मोदी का कार्यक्रम
पीएम मोदी अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेंगे और संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री ने यात्रा पर रवाना होने से पहले एक बयान में कहा कि सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर’ तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की साझा प्रतिबद्धता का प्रमुख साझेदार है। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से होने वाली द्विपक्षीय वार्ता को लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि हम मिलकर अपने-अपने लोगों की प्रगति को आगे बढ़ाने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे।

मैं सेशेल्स जा रहा हूं, जहां मैं उनके राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लूंगा। इस साल यह और भी खास है क्योंकि यह स्वर्ण जयंती समारोह है। इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ भी है। दोनों देशों के संबंध पारस्परिक विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे आत्मीय संबंधों पर आधारित हैं।

भारतीय युद्धपोत और सैनिक भी सेशेल्स पहुंचे
सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2015 में सेशेल्स की यात्रा की थी। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर दोनों देशों को जोड़ने वाले मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का प्रतीक है।

सेशेल्स कहां स्थित है?
सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित और लगभग 455 वर्ग किलोमीटर में फैले 115 द्वीपों का एक द्वीपीय देश है। यह मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका (केन्या) से लगभग 1,600 किलोमीटर पूर्व में स्थित है यह अपनी प्राचीन सफेद रेत वाले समुद्र तटों, मूंगा चट्टानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मशहूर है। सेशेल्स में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां के समुद्र तटों और प्रकृति को देखने आते हैं। सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया है, जो माहे द्वीप पर स्थित है।

भारत-सेशेल्स संबंध
भारत और सेशेल्स के बीच साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित लंबे समय से घनिष्ठ साझेदारी रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स का भारत के ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) तथा ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान है। भारत और सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती (पायरेसी) की रोकथाम, गश्त और समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के रक्षा बल आपस में घनिष्ठ सहयोग करते हैं। भारत ने सेशेल्स के कोस्ट गार्ड को कई नौसैनिक जहाज और डोर्नियर विमान सौंपे हैं।

भारत के लिए सेशेल्स का महत्व
सेशेल्स हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में ‘ब्लू इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए भारत का एक प्रमुख समुद्री और रक्षा साझेदार है। भारत और सेशेल्स समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और आतंकवाद को रोकने के लिए लगातार एक साथ काम कर रहे हैं। सेशेल्स का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) बहुत बड़ा है, जो समुद्री संसाधनों, तेल और गैस की खोज और बेहतर आर्थिक उपयोग के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है। सेशेल्स की लगभग 11% आबादी भारतीय मूल की है, जो आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं।

सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर
दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है।

दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था।

वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है।

कछुओं के ज्यादा जीने के पीछे 2 मुख्य कारण

1. धीमी रफ्तार: कछुओं की जीवनशैली धीमी होती है, वह शरीर धीरे-धीरे काम करता है, इसलिए उनकी ऊर्जा कम खर्च होती है और शरीर की कोशिकाएं जल्दी खराब नहीं होतीं। इससे उनका शरीर जल्दी बूढ़ा नहीं होता।

2. मजबूत कवच: कछुओं का सख्त कवच उन्हें चोट और दुश्मनों से बचाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करने और कई बीमारियों से लड़ने में भी बेहतर होता है। इसी कारण कई कछुए 100 से 150 साल या उससे भी ज्यादा जी लेते हैं।

मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे
पीएम मोदी ने सेशल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर (MAHASAGAR)’ का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं।

फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है।

मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।

मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी ने साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था।

उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।

मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके।

मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था।

उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।

वीकेंड पर ओटीटी धमाका: ZEE5 पर देखें राजसी साज़िश से लेकर क्राइम थ्रिलर तक का पूरा पैकेज

अगर आप इस वीकेंड ओटीटी पर कुछ धमाकेदार देखने के लिए तलाश रहे हैं, तो जी5 का पिटारा खुल चुका है. यहां राजसी साजिशों से लेकर बैंकिंग घोटालों और डार्क कॉमेडी का ऐसा कॉकटेल मौजूद है, जो आपको स्क्रीन से हिलने नहीं देगा. आइए जानते हैं कि जी5 की बेहतरीन सीरीज और फिल्मों के बारे में, जो आपके वीकेंड को मनोरंजन से भर देंगी.

ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड
यह एक ऐतिहासिक ड्रामा शो है. इसमें मुगल साम्राज्य के अंदर की राजनीति बारीकी से दिखाई गई है. कहानी बादशाह अकबर के समय की है. अकबर अपने तीन बेटों (सलीम, मुराद और दानियाल) में से अपना उत्तराधिकारी चुनना चाहते हैं. इसके बाद गद्दी के लिए भाइयों में खूनी जंग और साजिशें शुरू हो जाती हैं. इसमें सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है.

क्यों देखें: अगर आपको इतिहास, राजशाही ड्रामे और राजसी ठाट-बाट पसंद हैं, तो यह सीरीज आपको बांधकर रखेगी.
कास्ट: नसीरुद्दीन शाह, धर्मेंद्र, अदिति राव हैदरी, आशिम गुलाटी

जानवर
यह छत्तीसगढ़ के जंगलों पर बनी एक सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर सीरीज है. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जंगली इलाके में एक मर्डर की जांच शुरू होती है. पुलिस ऑफिसर को जांच के दौरान एक के बाद एक कई लाशें मिलने लगती हैं. धीरे-धीरे केस बहुत उलझ जाता है. कहानी इंसान के अंदर छिपे जानवर और अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है.

क्यों देखें: इसकी कहानी काफी डार्क और सस्पेंस से भरी है. थ्रिलर के शौकीनों के लिए यह अच्छा ऑप्शन है.

कास्ट: भुवन अरोड़ा, भगवान तिवारी, अतुल काले

शब्द: रीत और रिवाज
यह एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली ड्रामा सीरीज है. यह कहानी 16 साल के लड़के घुप्पी सिंह की है. घुप्पी को हकलाने की बीमारी है. उसका दिल फुटबॉल खेलने में लगता है. दूसरी तरफ, उसके पिता चाहते हैं कि वो परिवार की ‘रागी’ परंपरा को आगे बढ़ाए. घुप्पी अपने सपनों और पिता की उम्मीदों के बीच पिसता है.

क्यों देखें: यह सीरीज समाज के नियमों, पारिवारिक दबाव और अपने सपनों को चुनने की जद्दोजहद को बहुत खूबसूरती से दिखाती है.

कास्ट: सुविंदर विक्की, मिहिर आहूजा और तरनजीत कौर.

4. तेहरान (Tehran)
यह एक स्पाई-थ्रिलर फिल्म है, जो सच्ची राजनीतिक घटनाओं से प्रेरित है. दिल्ली में एक बम ब्लास्ट होता है, जिसमें एक मासूम बच्ची की जान चली जाती है. स्पेशल सेल के एसीपी राजीव कुमार इसकी जांच करते हैं. जांच के तार भारत, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इंटरनेशनल जासूसी नेटवर्क से जुड़ जाते हैं. राजीव को अपनी ही एजेंसी से मदद मिलना बंद हो जाती है, जिसके बाद वो अकेले इस मिशन पर निकलता है.

कास्ट: जॉन अब्राहम, मानुषी छिल्लर, नीरू बाजवा और हादी खंजनपोर.

हिसाब बराबर
यह एक सोशल-सटायर और क्राइम थ्रिलर फिल्म है. यह फिल्म बैंकिंग सिस्टम में होने वाले फ्रॉड और आम आदमी की जेब पर डाका डालने वाले बड़े घोटालों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाती है.

मेड़ पर लगाए कुछ अनानास के पौधे, आज हर साल ₹2.5 लाख कमा रहे रायगढ़ के किसान अरुण साहू

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई  

रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर
कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  

        अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 
 
          अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  

            फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

          अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

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