8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, DA Hike पर जल्द फैसला संभव

नई दिल्ली

केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनसे जुड़े सभी हितधारक इस समय दो बड़े फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। पहला, महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन की घोषणा और दूसरा, 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रही प्रगति। चूंकि 8वां वेतन आयोग अभी विचार-विमर्श के दौर में है, इसलिए मौजूदा 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत जल्द ही एक और डीए में इजाफे की घोषणा हो सकती है। डीए में बढ़ोतरी सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स को साल में दो बार दी जाती है। आइए, 26 जून 2026 तक के सबसे ताजा अपडेट को समझते हैं…

DA की चर्चा क्यों हो रही है?
महंगाई भत्ते में संशोधन साल में दो बार किया जाता है, एक बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में। ऐसा बढ़ती जीवन लागत की भरपाई के लिए किया जाता है और सरकार इसे केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लाभ के लिए प्रदान करती है। यह संशोधन अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है।

चूंकि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हुई हैं, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत ही डीए संशोधन मिलता रहेगा। जुलाई 2026 के डीए संशोधन की आज व्यापक चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि महंगाई और CPI-IW के ट्रेंड एक और इजाफे की ओर इशारा कर रहे हैं।

महंगाई के लेटेस्ट आंकड़े क्या बताते हैं?
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़े साफ दिखाते हैं कि खुदरा महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें अब भी अहम वजह बनी हुई हैं। मई 2026 में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 की तुलना में बढ़ गई। समग्र सीपीआई मुद्रास्फीति मई में 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 3.48 प्रतिशत से अधिक है।

ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 3.74 प्रतिशत से बढ़कर 4.25 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी महंगाई 3.16 प्रतिशत से उछलकर 3.53 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य महंगाई भी अप्रैल के 4.20 प्रतिशत के मुकाबले मई में 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई।

महंगाई में खासकर खाने-पीने की कीमतों में आई यह तेजी इस उम्मीद को बल देती है कि सरकार जल्द ही डीए में एक और संशोधन और समायोजन पर विचार कर सकती है। हालांकि, अंतिम वृद्धि का निर्णय सीपीआई-आईडब्ल्यू के आंकड़ों और कैबिनेट की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।

अभी कितना महंगाई भत्ता मिल रहा है और कितना बढ़ सकता है?
सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस समय नवीनतम संशोधन के बाद मूल वेतन का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। जुलाई 2026 की डीए वृद्धि की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जबकि महीना शुरू होने में बस कुछ ही दिन बाकी हैं।

मुद्रास्फीति के रुझानों और CPI-IW की गतिविधियों के आधार पर 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद बन रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ा आधिकारिक गणना और केंद्र सरकार के अपडेट के बाद ही तय होगा। यह लाभ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों की क्या मांगें हैं?
पिछले कुछ महीनों से कर्मचारी संघों, स्टेक होल्डर ग्रुप्स और विभिन्न संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें महंगाई से निपटने के लिए उच्च न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने, भत्तों में संशोधन और भुगतान ढांचे में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी एवं कामगार परिसंघ ने ज्यादा न्यूनतम वेतन, बेहतर पेंशन लाभ और भत्तों की समीक्षा की बात रखी है।

ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने सैलरी स्ट्रक्चर में संशोधन, विसंगतियों को दूर करने और बेहतर सेवा लाभों की मांग की है। वहीं, नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) से जुड़े समूह बेहतर फिटमेंट फैक्टर, वेतन असमानताओं में सुधार और कर्मचारी-हितैषी सुधारों पर जोर दे रहे हैं।

कर्मचारी समूहों का मानना है कि अगली वेतन संरचना तय करते समय बढ़ती लागत, लगातार बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों का मनोबल, उनकी आजीविका का भविष्य और जीवन-यापन के खर्चों में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर ताजा अपडेट
8वां वेतन आयोग अब विचार-विमर्श के चरण में प्रवेश कर चुका है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद से इसे सात महीने पूरे हो चुके हैं। आयोग सिफारिशें तैयार करने से पहले फीडबैक जुटाने के लिए दिल्ली, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों से मुलाकात कर रहा है।

हाल ही में 22-23 जून 2026 को लखनऊ में बैठकें हुईं, जिनमें कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों और वेतन संबंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। आयोग के ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी विचार-विमर्श जारी रखने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है और फिटमेंट फैक्टर, संशोधित सैलरी मैट्रिक्स, पेंशन सुधार या लागू होने की तारीख को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

हमारी आत्मीयता, साम्यता का मंच स्थापना दिवस
लोक भवन में मनाया गया पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी।

राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में श्रीमती सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार श्रीमती महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया।

राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।

 

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर और अरविंद मोघे सम्मानित

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. शालिगराम तोमर राष्ट्र सेवी थे। उन्होंने राष्ट्र की सेवा करने वाले अनेक कार्यकर्ता भी तैयार किए। राष्ट्र सेवा और राष्ट्रसेवियों का निर्माण उनके जीवन का प्रमुख ध्येय था। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अनूठा परिवार भाव रखते थे। उनकी कार्य शैली से युवा सहज ही उनके सेवा प्रकल्पों के साथ जुड़ जाते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानस भवन में स्व. शालिगराम तोमर स्मृति राष्ट्र सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। नवलय संस्था द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर पुणे और अरविंद मोघे को सम्मानित किया गया। दोनों समाज सेवियों ने विद्यार्थी परिषद, श्रमिक कल्याण, वनवासी कल्याण के साथ ही अनेक सामाजिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शालिगराम तोमर ने एक कक्ष के कार्यालय से संगठन से कार्य करते हुए उसे विराट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। उनके आदर्श जीवन से हजारों लाखों युवाओं ने प्रेरणा ली और सामाजिक क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित समाज सेवियों को बधाई दी और संस्था के उद्देश्यों एवं सम्मान कार्यक्रम की सराहना की। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को संवारने में स्व. शालिगराम का समर्पण और सहयोग यादगार रहेगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्व. शालिगराम के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाये। सेवानिवृत्त न्यायाधीश और संगठन पदाधिकारी अशोक पांडे ने कहा कि स्व. शालिगराम राष्ट्र सेवा का भाव रखते थे। राज्यसभा सदस्य रजनीश अग्रवाल ने नवलय संस्था को एक प्रेरणापुंज की स्मृति में सम्मान स्थापित करने के लिए बधाई दी। महासमुंद छत्तीसगढ़ से आए डॉ. विमल चोपड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने सम्मान के लिए चयनित समाज सेवियों देवधर और मोघे को एक लाख रूपए की सम्मान निधि, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। दोनों समाजसेवियों के प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया गया।

कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, वरिष्ठ समाज सेवी शशि भाई सेठ, विभीषण सिंह, अनेक लोकतंत्र सेनानी, नागरिक और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

कान्हा में CDV का खतरा, ग्वालियर जू अलर्ट पर; बाघिन मीरा के तीनों शावक फिलहाल आइसोलेशन में रहेंगे

ग्वालियर
 कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से सात बाघों की मृत्यु होने के बाद अब गांधी प्राणी उद्यान (ZOO) प्रबंधन अलर्ट पर आ गया है। यही कारण है कि दो माह पहले जन्मे सफेद बाघिन मीरा के शावकों को फिलहाल आइसोलेशन में ही रखा जाएगा।

सैलानियों को इन नन्हें शावकों की पहली झलक पाने और अठखेलियों को देखकर आनंद लेने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि तीनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं, लेकिन कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से हुई बाघों की मौत के बाद जू प्रबंधन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

चिड़ियाघर में सफेद बाघिन मीरा ने गत पांच अप्रैल को तीन शावकों को जन्म दिया था। इनमें दो शावक पीले और एक सफेद शावक है। बीते दो माह दिनों से शावक आइसोलेशन में ही अपनी मां की देखरेख में सुरक्षित हैं और उनकी गतिविधियां भी सामान्य हैं। इन शावकों को एक माह पूरा होने पर ही केज से बाहर निकालने की तैयारी की गई थी, लेकिन इस दौरान भीषण गर्मी को देखते हुए शावकों को केज से बाहर नहीं निकाला गया।

अब जब शावकों को बाहर निकालने की बारी आई, तो कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की संभावना को देखते हुए इस निर्णय को टाल दिया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी एडवायजरी जारी कर वन्य जीवों को इस वायरस से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। यह वायरस जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और खासतौर पर शावकों के लिए अधिक खतरनाक साबित होता है।

 

Maruti Cars Price Hike: बदल गईं मारुति की कई कारों की कीमतें, जानें अब कितनी चुकानी होगी रकम

 नई दिल्ली

मारुति सुजुकी ने अपनी कारों की कीमतों में इजाफे का ऐलान पिछले महीने किया था. जून 2026 से कारों की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे मारुति की कारों की बढ़ी हुई कीमतें सामने आ रही हैं. ब्रांड ने गाड़ियों की कीमतों को 30 हजार रुपये तक बढ़ाने का ऐलान किया है. कई कारों की नई कीमतें सामने आ गई थी और कुछ की अब आ रही हैं। 

ब्रांड ने वैगनआर से लेकर जिम्नी तक सभी मॉडल्स की कीमतों में इजाफा किया है. वैगनआर की कीमत कंपनी ने 5 हजार रुपये बढ़ाई है. अब ये कार 4.99 लाख रुपये से 7.24 लाख रुपये की एक्स शोरूम कीमत पर आती है. इसके अलावा कंपनी ने पॉपुलर ऑफ-रोडर जिम्नी (Jimny) की कीमतों को बढ़ा दिया है। 

इस कार की कीमत भी 7500 रुपये बढ़ी है. बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 12.39 लाख रुपये से शुरू होकर 14.36 लाख रुपये तक जाती है. ये ब्रांड की 5-डोर फोर वील ड्राइव एसयूवी है. कीमतों के इजाफे का असर जीटा और अल्फा, मैन्युअल और ऑटोमेटिक के साथ डुअल टोन और मोनोटोन सभी वेरिएंट्स पर पड़ा है। 

कई कारों की कीमतें बढ़ी हैं
मारुति ने जिम्नी के अलावा दूसरी कारों की कीमतों में भी इजाफा किया है. स्विफ्ट की कीमत 7500 रुपये बढ़ी है. इसकी कीमत 5.79 लाख रुपये से 8.69 लाख रुपये तक है. वहीं बलेनो की कीमत में 7500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद कार की कीमतें 5.99 लाख रुपये से शुरू होती है और 9.17 लाख रुपये तक जाती है। 

वहीं डिजायर की कीमत भी 7500 रुपये बढ़ी है. ये कार अब 6.25 लाख रुपये से 9.36 लाख रुपये तक की कीमत पर आती है. फ्रॉन्क्स के दाम में भी 7500 रुपये का इजाफा हुआ है. मारुति सुजुकी अर्टिगा के लिए अब 10 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे. ये कार 8.85 लाख रुपये से शुरू होकर 12.99 लाख रुपये तक की एक्स शोरूम कीमत पर आती है. एक्सएल 6 भी 10 हजार रुपये महंगी हुई है। 

वहीं इनविक्टो का प्राइस 25 हजार रुपये बढ़ा है. ये कार अब 24.97 लाख रुपये से शुरू होती है और 28.60 लाख तक जाती है. ई-विटारा की कीमतों में 30 हजार रुपये और मारुति ईको वैन की कीमत में 5 हजार रुपये का इजाफा हुआ है. वैसे इन सभी गाड़ियों की कीमतें जून में ही बढ़ा दी गई हैं। 

NDA में बदला सियासी गणित! नायडू-नीतीश के बिना भी बहुमत, शिंदे का बढ़ा कद, क्या बेटा बनेगा मंत्री?

नई दिल्ली

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए थे, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) 240 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्ण बहुमत के 272 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा था। उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे थे। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की चाबी इन्हीं दोनों नेताओं के हाथ में है और इनके बिना NDA का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को और मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर दिया है।

महाराष्ट्र: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी
हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत एक बड़ा उलटफेर हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है।

शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसद:

    ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)
    नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)
    संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)
    संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)
    भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)
    संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम)

इस बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब मात्र 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने आसानी से पार कर लिया।

बंगाल में तो खेला ही हो गया, NDA में सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस बड़ी बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर नेता कर रही हैं। इन सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

दल-बदल कानून के तहत संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद चालाक रणनीतिक कदम उठाया है। कानूनन दल-बदल से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था। इन सभी ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने गुट का विलय कर लिया है। 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और NDA के भीतर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है।

NDA का मजबूत अंकगणित और कैसे कम हुई निर्भरता?
शिंदे के 6 नए सांसदों और NCPI के 20 सांसदों के NDA में शामिल होने से गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में काफी मजबूत हो गया है। 2024 में सरकार गठन के समय NDA के पास लगभग 293 सांसद थे। अब यह आंकड़ा 318 तक पहुंच गया है।

ऐसे में मौजूदा स्थिति यह है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16) और नीतीश कुमार (12) किसी बात पर नाराज होकर NDA से अपना समर्थन वापस भी ले लेते हैं, तब भी नए सांसदों और अन्य छोटे दलों के समर्थन से मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के आंकड़े के ऊपर ही रहेगी। यानी सरकार पर से ‘किंगमेकर्स’ का दबाव अब खत्म हो गया है।

लोकसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों और उनकी सीटों की मौजूदा स्थिति की टेबल नीचे दी गई है:

 

क्र. सं. राजनीतिक दल लोकसभा सीटें
1 BJP (भारतीय जनता पार्टी) 240
2 NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) 20
3 TDP (तेलुगु देशम पार्टी) 16
4 SHS (शिवसेना – शिंदे गुट) 13
5 JD(U) (जनता दल – यूनाइटेड) 12
6 LJP(RV) (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास) 5
7 JD(S) (जनता दल – सेक्युलर) 2
8 JSP (जनसेना पार्टी) 2
9 RLD (राष्ट्रीय लोक दल) 2
10 AD(S) (अपना दल – सोनेलाल) 1
11 AGP (असम गण परिषद) 1
12 AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन) 1
13 HAM(S) (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा – सेक्युलर) 1
14 NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – अजीत पवार गुट) 1
15 SKM (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) 1
  कुल (Total NDA Seats) 318

NDA में बढ़ा शिंदे का रुतबा 

इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद काफी बढ़ा दिया है। 2022 में विधायकों की बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब लोकसभा में भी शिंदे ने यह साबित कर दिया है कि ‘असली शिवसेना’ उन्हीं के पास है और उनके पास जमीनी नेताओं का समर्थन है। 

मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम?

उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने वाले इस गुप्त अभियान ‘ऑपरेशन टाइगर’ को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही इस ऑपरेशन की रणनीति बना रहे थे। बागी सांसदों को दिल्ली लाने के लिए निजी विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर से मुलाकात तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने ही संभाला था।

अब दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका बड़ा इनाम मिल सकता है। NDA के कुनबे में 6 नए सांसद जोड़ने और गठबंधन को मजबूती प्रदान करने के ‘रिटर्न गिफ्ट’ के तौर पर श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिंदे गुट के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत होगी। 

बंगाल में TMC का ‘एंडगेम’?

वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। एक तरफ राज्य विधानसभा में 60 से ज्यादा विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली में उनकी पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद छिटक कर उस NDA के पाले में बैठ गए हैं, जिसके खिलाफ ‘दीदी’ ने पिछले एक दशक से सबसे मुखर राजनीति की है।

9 साल का इंतजार खत्म, मध्यप्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण ने शुरू की सुनवाई

विवेक झा, भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू होने के लगभग नौ वर्ष बाद मध्यप्रदेश के करदाताओं, उद्योगों और टैक्स पेशेवरों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के समक्ष द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुक्रवार से प्रारंभ होने जा रही है। इसे जीएसटी व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कदम माना जा रहा है, जिससे वर्षों से लंबित कर विवादों के निस्तारण का रास्ता खुल गया है।

प्रारंभिक चरण में भोपाल बेंच के समक्ष 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। इससे प्रदेश के सैकड़ों करदाताओं और उद्योगों को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

26 जून से भोपाल बेंच में होगी नियमित सुनवाई

जानकारी के अनुसार भोपाल स्थित GSTAT बेंच में 26 जून 2026 से अपीलों की सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शुक्रवार को ही मामलों की सुनवाई निर्धारित की गई है।

विशेष बात यह है कि सुनवाई हाइब्रिड मोड में होगी। यानी करदाता और उनके अधिवक्ता आवश्यकता अनुसार न्यायाधिकरण में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से भी अपनी पैरवी कर सकेंगे।

लंबे समय से लंबित थे हजारों कर विवाद

जीएसटी लागू होने के बाद अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन में हुई देरी के कारण देशभर में बड़ी संख्या में द्वितीय अपीलें लंबित थीं। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा। प्रदेश में अनेक करदाता अंतिम न्यायिक मंच उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्षों से अपने मामलों के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब न्यायाधिकरण की नियमित सुनवाई शुरू होने से कर विवादों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और करदाताओं को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।

पुराने वैट मामलों के निस्तारण की भी बड़ी चुनौती

जीएसटी मामलों के अलावा मध्यप्रदेश में पूर्व कर कानूनों, विशेषकर वैट से संबंधित करीब 3,500 अपीलें भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। कर विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत किए जाने पर इन मामलों के निस्तारण में भी तेजी लाई जा सकेगी।

व्यापारिक संगठनों की लंबे समय से थी मांग

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन और नियमित सुनवाई की मांग विभिन्न व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों और टैक्स प्रोफेशनल्स द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। उनका कहना था कि अंतिम अपीलीय मंच उपलब्ध नहीं होने से करदाताओं को अनावश्यक आर्थिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

करदाताओं को मिलेगा प्रभावी न्यायिक मंच : मनोज पारख

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज कुमार पारख ने कहा कि GSTAT की नियमित सुनवाई शुरू होना करदाताओं और उद्योग जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि अब वर्षों से लंबित विवादों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, जिससे कर प्रशासन और व्यापार जगत दोनों को लाभ मिलेगा। न्यायिक प्रक्रिया में गति आने से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और करदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।

30 जून तक अपील दाखिल करने का अंतिम अवसर

एडवोकेट मनोज पारख ने करदाताओं और कर सलाहकारों को आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान में 30 जून 2026 GSTAT के समक्ष अपील दायर करने की महत्वपूर्ण अंतिम तिथि है। पात्र करदाताओं को निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे अपील के अधिकार से वंचित न हों।

उन्होंने कहा कि समय पर अपील दाखिल करने से करदाताओं को कानूनी राहत प्राप्त करने का पूरा अवसर मिलेगा।

कर व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता और विश्वास

कर विशेषज्ञों का मानना है कि GSTAT की शुरुआत से न केवल विवादों का शीघ्र समाधान होगा बल्कि कर प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा। उद्योग जगत को इससे बड़ी राहत मिलेगी और निवेश एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी सकारात्मक वातावरण मिलेगा।


GSTAT से जुड़ी प्रमुख बातें

  • करीब 9 वर्ष बाद मध्यप्रदेश में द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुरू।
  • भोपाल बेंच में 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध।
  • 26 जून 2026 से सुनवाई प्रारंभ।
  • प्रत्येक गुरुवार और शुक्रवार होगी सुनवाई।
  • हाइब्रिड मोड (फिजिकल + वर्चुअल) में होगी कार्यवाही।
  • प्रदेश में लगभग 3,500 पुराने वैट अपीलों के निस्तारण की भी चुनौती।
  • 30 जून 2026 तक GSTAT में अपील दाखिल करने की महत्वपूर्ण समय-सीमा।

क्या है GSTAT?

GST Appellate Tribunal (GSTAT) वस्तु एवं सेवा कर कानून के अंतर्गत गठित एक वैधानिक अपीलीय न्यायाधिकरण है, जहां प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों के विरुद्ध द्वितीय अपील की जाती है। इसका उद्देश्य कर विवादों का विशेषज्ञ और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है, जिससे करदाताओं को उच्च न्यायालय जाने से पहले प्रभावी न्यायिक मंच उपलब्ध हो सके।

MP School Education: विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, जानें पूरी जानकारी

भोपाल
 समग्र शिक्षा अभियान मिशन के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को 20 सितंबर 2026 तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड स्रोत केंद्र कार्यालय में विकासखंड अकादमिक समन्वयक के पांच पद भरे जाएंगे। वहीं, प्रत्येक 21 विद्यालयों पर एक जनशिक्षा केंद्र के मान से प्रति जनशिक्षा केंद्र में 2 जन शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

52 वर्ष से अधिक न हो आयु
राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि विकासखंड अकादमिक समन्वयक एवं जन शिक्षक के लिए वही उच्च श्रेणी या माध्यमिक शिक्षक पात्र होंगे, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 52 वर्ष से अधिक न हो। साथ ही उनके विरुद्ध कोई विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या लंबे समय तक अनुपस्थित रहने की शिकायत लंबित नहीं होनी चाहिए।

चयन के लिए बनेगी समिति
चयन प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त (जनजातीय कार्य), प्राचार्य डाइट, जिला परियोजना समन्वयक, सहायक परियोजना समन्वयक तथा कलेक्टर का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।

यह रहेगा चयन कार्यक्रम

– 25 जुलाई तक विषय एवं समूहवार वरिष्ठता सूची तैयार होगी।

– 5 अगस्त को जिला स्तर पर काउंसलिंग आयोजित की जाएगी।

– 13 अगस्त को अंतिम चयन सूची प्रकाशित की जाएगी।

– 20 सितंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

MP में निर्माण कार्य के नए नियम: बिना सूचना घर या दुकान बनाई तो हो सकती है जेल, श्रम विभाग का सख्त आदेश

भोपाल
 मध्य प्रदेश में अब घर, दुकान, बहुमंजिला इमारत या किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मकान मालिकों, ठेकेदारों और बिल्डर्स को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। श्रम विभाग ने नए और सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम शुरू करने से कम से कम 30 दिन पहले इसकी लिखित या ऑनलाइन सूचना विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

श्रम विभाग के अनुसार, नियमों की अनदेखी करने वाले नियोक्ताओं और बिल्डर्स के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की हवा खाने से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान शामिल है।

क्यों सख्त हुआ श्रम विभाग?
श्रम विभाग ने यह कदम निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए उठाया है। ‘भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ के तहत अब हर कंस्ट्रक्शन साइट पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य होगी।

‘श्रम सेवा पोर्टल’ पर देनी होगी तमाम जानकारी
नियोजकों को ‘श्रम सेवा पोर्टल’ मोबाइल ऐप के जरिए निर्माण स्थल की सटीक लोकेशन, वहां काम कर रहे श्रमिकों की कुल संख्या और उन्हें दी जा रही मूलभूत सुविधाओं (जैसे साफ पानी, शौचालय आदि) का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज करना होगा।

30 दिन पहले सूचना नहीं दी, तो 3 महीने की जेल
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण अधिनियम 1996 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई भी नियोक्ता धारा 46 के तहत काम शुरू होने की पूर्व सूचना देने में विफल रहता है, तो उसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
दोषी पाए जाने पर संबंधित बिल्डर, ठेकेदार या मकान मालिक को 3 महीने तक का कारावास , 2 हजार रुपए तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी निर्माण विभागों जिनमें PWD, नगर निगम आदि को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे भी कोई भी काम शुरू करने से पहले श्रम विभाग को अनिवार्य रूप से लूप में लें।

‘श्रम प्रहरी’ बनकर आम जनता भी दे सकेगी सूचना
निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने और मजदूरों के हक की रक्षा के लिए विभाग ने आम नागरिकों को भी एक बड़ी ताकत दी है। शहर का कोई भी जागरूक नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभा सकता है।

शिकायत के किलए टोल फ्री नंबर जारी
अगर आपके आसपास कोई ऐसा निर्माण कार्य चल रहा है, जिसकी सूचना श्रम विभाग को नहीं दी गई है या जहां मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, तो आप इसकी गुप्त शिकायत विभाग के विशेष कंट्रोल रूम नंबर पर कर सकते हैं। इसके लिए श्रम प्रहरी हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर: 1800-233-8888 दिया गया है।

MP को मिली बड़ी मेजबानी, इंदौर में पहली बार होगी विश्व स्नूकर चैंपियनशिप; नवंबर में होगा आयोजन

इंदौर
 दुनिया को स्नूकर का खेल सिखाने वाले मध्य प्रदेश में 100 साल में पहली बार विश्व स्नूकर चैंपियनशिप होने जा रही है। यह प्रतिष्ठित आयोजन 12 से 23 नवंबर तक इंदौर के यशवंत क्लब में होगा। इस दौरान दुनिया के करीब 50 देशों के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने आएंगे। चैंपियनशिप का कुल व्यय पांच करोड़ रुपये होगा। कुल पुरस्कार राशि 40 हजार डालर यानी 37 लाख, 75 हजार रुपये के करीब होगी।

भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ के सचिव सुनील बजाज ने बताया कि देश में 2014 में बेंगलुरू में विश्व चैंपियनशिप हुई थी, जिसके बाद अब यह टूर्नामेंट भारत में होने जा रहा है। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ की स्थापना के 100 वर्ष के यादगार अवसर पर इंदौर को मेजबानी के लिए चुना गया है।

विश्व चैंपियनशिप के दौरान पुरुष और महिला दोनों वर्गों के मैच होंगे। पुरुषों के वर्ग में 100 से 125 के करीब खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जबकि महिला वर्गों में 40 से 60 खिलाड़ी शामिल होंगी। इनमें 15 के करीब विश्व चैंपियन खिलाड़ी भी होंगे। स्पर्धा के मुकाबले 12 टेबलों पर खेले जाएंगे जबकि पांच टेबलें अभ्यास के लिए होंगी। विश्व चैंपियनशिप के लिए 17 टेबलें बाहर से आयात की जा रही हैं।

मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाए
हाल ही में चीन में वर्ल्ड टीम स्नूकर चैंपियनशिप में रजत विजेता भारतीय टीम में इंदौर के केतन चावला भी शामिल थे। नेहरू स्टेडियम स्थित अकादमी में केतन चावला को मप्र बिलियर्ड्स व स्नूकर संघ द्वारा सम्मानित किया गया। उनसे पहले मप्र की खिलाड़ी अमी कमानी, सान्वी शाह, इशिका शाह, कनिष्का जुरानी, ऋतिक जैन, ओवेश खान सहित कई अन्य युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

 

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