सुवेंदु अधिकारी का नया कानून चर्चा में, गुंडई पर सख्त कार्रवाई का दावा; ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कड़ा बताया

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े धमाके की तरह होगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के 54 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है. एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ लाने जा रहे हैं, जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ देगा. इस नए कानून को उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कई गुना अधिक घातक और सख्त माना जा रहा है. इसे लेकर पूरे बंगाल के गुंडा-बवालियों में अभी से मौत का खौफ है. जानते हैं पूरी कहानी। 

54 साल पुराने कानूनों की विदाई
बंगाल राज्य सरकार1972 में बने कानून The West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972 उसमें संशोधन करने जा रही है.  इसे 1972 में पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित किया गया था और उसी वर्ष राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हुआ था। 

इस कानून का संक्षिप्त इतिहास
1960 और 70 का दशक के दौर में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक आंदोलन और कानून-व्यवस्था की भारी समस्याएं थीं. सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) को बनाए रखने, उग्रवादी गतिविधियों को रोकने और अवैध हथियारों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को विशेष शक्तियों की जरूरत थी, जिसके लिए यह कानून 1972 में लाया गया था। 

 ‘पश्चिम बंगाल में नया कानून?
लेकिन अब बंगाल सरकार ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने जा रही है. उसने दशकों पुराने ढर्रे को बदल दिया है. 1972 के कानून अब आधुनिक संगठित अपराध और दंगाई मानसिकता से लड़ने के लिए नाकाफी साबित हो रहे थे. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बंगाल में ‘कानून का राज’ होगा, न कि ‘सिंडिकेट का राज’. 54 सालों से चली आ रही ढील अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। 

7 पीढ़ियों तक होगी वसूली, कोई नहीं बचेगा!
इस कानून का सबसे खौफनाक पहलू इसका ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ है. यदि कोई दंगाई सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई सिर्फ अपराधी से नहीं, बल्कि उसकी संपत्ति से होगी. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि एक बार दंगा करने पर अपराधी की आने वाली सात पीढ़ियां हर्जाना भरते-भरते कंगाल हो जाएंगी. यह केवल दंड नहीं, बल्कि ‘आर्थिक खात्मा’ है, जो दंगाइयों को कानून हाथ में लेने से पहले सोचने पर मजबूर कर देगा। 

बुलडोजर मॉडल का भी ‘बाप’ है ये बिल
उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ के मॉडल ने देशभर में दंगाइयों के बीच खौफ पैदा किया था, लेकिन सुवेंदु अधिकारी का यह नया बिल उससे भी दो कदम आगे है. इसमें ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन’ (बिना मुकदमे हिरासत) और ‘एक्सटर्नमेंट’ (जिले से निष्कासन) जैसी शक्तियां पुलिस को असीमित अधिकार देती हैं. यह बिल दंगाइयों को पनाह देने वालों के खिलाफ भी ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है. किसी को पनाह देना भी अब दो साल की सीधी जेल का निमंत्रण होगा। 

विपक्ष की रूह क्यों कांप रही है?
जैसे ही इस बिल का ड्राफ्ट सामने आया, विपक्ष के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है. जिन नेताओं को लगता था कि वे दंगों के जरिए अपनी राजनीति चमका लेंगे, उनकी रूह अब कांप रही है. वे जानते हैं कि यह कानून न केवल गुंडों को खत्म करेगा, बल्कि उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब करेगा जो दंगों को स्पॉन्सर करते हैं. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि दंगा करना है, तो कीमत चुकाने के लिए तैयार रहो। 

शांति और सुरक्षा का नया युग
यह बिल बंगाल की बदलती तस्वीर का गवाह है. सरकार का कहना है कि यह कानून शरीफ नागरिकों की रक्षा के लिए एक ढाल है. जो बंगाल कल तक अराजकता की आग में जलता था. वह अब अपराधियों के लिए एक बड़ी जेल साबित होगा. सोमवार को जब यह कानून विधानसभा में बहस के लिए आएगा तो देखना यह होगा कि असल में क्या हुआ। 

मिडिल ईस्ट में फिर जंग की आहट! नेतन्याहू के ऐलान पर ईरान की जंगी धमकी, लेबनान बॉर्डर पर बढ़ा तनाव

बेरूत

लेबनान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण देश है. यहां इजरायल की सीमा से लगा दक्षिणी इलाका लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है. हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित एक मजबूत संगठन है, यहां सक्रिय है. हाल के वर्षों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार झड़पें हुई हैं। 

2026  में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इजरायल ने साफ कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, उसके सैनिक लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेंगे. वहीं ईरान का रुख है कि इजरायल को पहले पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. यह जिद दोनों तरफ से नई जंग की स्क्रिप्ट लिख रही है। 

विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं है. यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, हथियार नियंत्रण और बड़े देशों की रणनीति से जुड़ा मुद्दा है. लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और अगर नई जंग छिड़ी तो मानवीय संकट और बढ़ जाएगा। 

इजरायल का रुख: सुरक्षा पहले, हथियार छोड़ो
इजरायल बार-बार कह रहा है कि उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. हिज्बुल्लाह के पास हजारों रॉकेट और हथियार हैं जो इजरायल के शहरों को निशाना बना सकते हैं. इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना जरूरी है. अगर हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता तो इजरायली सेना वहां बनी रहेगी। 

इजरायल का तर्क है कि पिछले समझौतों में हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. इसलिए अब वे भरोसा नहीं कर रहे. इजरायल के अनुसार, हिज्बुल्लाह का हथियार रखना न सिर्फ इजरायल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान की संप्रभुता को भी कमजोर करता है. इजरायल ने कई बार हवाई हमले किए हैं ताकि हिज्बुल्लाह की क्षमता कम हो. लेकिन इससे तनाव और बढ़ा है. अगर हिज्बुल्लाह फिर से हमला करता है तो इजरायल बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकता है। 

हिज्बुल्लाह और लेबनान की स्थिति 
हिज्बुल्लाह खुद को लेबनान का रक्षक बताता है. उसके नेता कहते हैं कि इजरायल की मौजूदगी के खिलाफ वे हथियार नहीं छोड़ेंगे. हिज्बुल्लाह का मानना है कि इजरायल पहले लेबनान की जमीन छोड़े, तब बात हो सकती है. उन्होंने कुछ हथियार लेबनानी सेना को सौंपे लेकिन पूरी तरह से हथियार छोड़ने की बात नहीं मानी। 

लेबनान सरकार कमजोर है. देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं. हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में भी मजबूत है. अगर इजरायल नहीं हटता तो हिज्बुल्लाह समर्थकों में गुस्सा बढ़ेगा और नई लड़ाई शुरू हो सकती है. लेबनानी सेना दक्षिण में तैनात है लेकिन हिज्बुल्लाह की ताकत के आगे उसकी भूमिका सीमित लगती है। 

ईरान का रणनीतिक खेल: इजरायल पहले हटे
ईरान हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है. वह हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देता है. ईरान का कहना है कि इजरायल को लेबनान से पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल हमले जारी रखता है तो वह जवाब देगा. ईरान-इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध लंबे समय से चल रहा है। 

ईरान के लिए लेबनान सिर्फ एक मोर्चा है. वह पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अगर इजरायल लेबनान में बना रहा तो ईरान दूसरे मोर्चों पर भी दबाव डाल सकता है. हाल के बयानों में ईरान ने कहा कि कोई भी समझौता लेबनान को कवर करे. इससे अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है। 

नई जंग की संभावित स्क्रिप्ट: क्या हो सकता है?
विश्लेषक मानते हैं कि अगर बात नहीं बनी तो नई जंग की स्क्रिप्ट इस तरह हो सकती है. पहले छोटी-छोटी झड़पें बढ़ेंगी. हिज्बुल्लाह रॉकेट दागेगा, इजरायल हवाई हमले करेगा. इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में और अंदर घुस सकती है. ईरान हिज्बुल्लाह को और मदद भेजेगा या दूसरे इलाकों से दबाव डालेगा। 

इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही होगी। हजारों लोग मारे जा सकते हैं, लाखों विस्थापित होंगे. बुनियादी ढांचा बर्बाद होगा. इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सैनिकों की तैनाती महंगी है. अमेरिका, जो शांति चाहता है, बीच में फंस सकता है। 

संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दोनों पक्षों की जिद इसे मुश्किल बना रही है. अगर इजरायल हटने से इनकार करता रहा और हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ा तो युद्ध टलना मुश्किल होगा। 

लेबनान की जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है. यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगी. सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश प्रभावित होंगे. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. मानवीय संकट गहराएगा. लेबनान में पहले से लाखों शरणार्थी हैं. नई जंग से भूख, बीमारी और बेघर होने की समस्या बढ़ेगी. बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे, अस्पताल नष्ट हो जाएंगे। 

क्या है समाधान?
समाधान मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं. दोनों पक्षों को समझौता करना होगा. इजरायल को सुरक्षा गारंटी मिले और हिज्बुल्लाह हथियारों का कुछ हिस्सा लेबनानी सेना को सौंप दे. ईरान को भी आश्वासन चाहिए कि उसके हित सुरक्षित हैं. अमेरिका और अन्य शक्तियां मध्यस्थता कर सकती हैं. लेबनान की सरकार को मजबूत होना चाहिए ताकि वह अपने पूरे इलाके पर नियंत्रण रख सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आर्थिक मदद देकर लेबनान को स्थिर करना चाहिए। 

CG Deputy CM साव का कांग्रेस पर हमला, बोले- UCC पर फैला रही दुष्प्रचार; आदिवासी परंपराएं रहेंगी सुरक्षित

रायपुर.

भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता याने UCC लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार की तैयारियों के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरजीत भगत ने इसे सत्ता बचाने के लिए भाजपा का प्रपंच करार दिया है. इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर हर बात पर गलत प्रचार करने का आरोप मढ़ा है.

वहीं भाजपा नेता केदार गुप्ता ने प्रदेश में UCC लागू होने के बाद भी आदिवासी समाज की परंपराओं के पूरी तरह सुरक्षित रहने का भरोसा दिलाया है. समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने मीडिया से चर्चा में कहा कि UCC देश के लिए एक पेचीदा विषय है. भारत विविधताओं का देश है, जहां सभी पर एक कानून उचित नहीं है. जंगल में रहने वाले आदिवासी को UCC की जानकारी तक नहीं है, ऐसे में जनता पर UCC का सकारात्मक असर नहीं होगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के बयान पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि UCC लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जो विभिन्न वर्गों के लोगों से बातचीत करेगी.

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी. रही बात अमरजीत भगत के बयान की तो कांग्रेस पार्टी हर बात पर भ्रम फैलाने का काम करती है. UCC से आदिवासी समाज को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वहीं केदार गुप्ता ने कहा कि अमरजीत भगत आदिवासी समाज से आते हैं, फिर भी आदिवासियों की समझ पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा बेहद समृद्ध है. UCC लागू होने पर भी आदिवासी समाज की परंपराएं पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी. UCC लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में भी मददगार होगा. अगर कांग्रेस इन सब बातों को समय रहते समझ जाती, तो आज उसकी यह दुर्गति नहीं होती.

कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर से बढ़ा BJP का BP
पूर्व मंत्री अमरजीत ने मीडिया से चर्चा में कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर के संबंध में कहा कि इससे भाजपा का BP बढ़ेगा. भाजपा कांग्रेस की विचारधारा से घबराई हुई है. भाजपा नेता डॉक्टरों से बीपी चेक करा कर देखें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मजबूत हो रही है, इसलिए भाजपा बेचैन है. सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने जमीनी लड़ाई तेज कर दी है. प्रशिक्षण के बाद जिलाध्यक्षों का नया कलेवर दिखेगा. भगत के बयान पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बीपी किसका बढ़ा हुआ है, यह प्रदेश की जनता बता देगी. देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी पर बीजेपी की सरकार है. इनके गठबंधन के दल इनको छोड़कर जा रहे हैं. बीपी तो कांग्रेस का बढ़ा हुआ है. वहीं बीपी बढ़ने वाले बयान पर केदार गुप्ता ने कहा कि भाजपा का ब्लड प्रेशर, शुगर और मेंटल लेवल एक जैसा रहता है. कांग्रेस को पूरा बॉडी चेकअप करवाना चाहिए. 22 राज्यों में उन्हें खदेड़ दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह बात भूपेश बघेल के बयान में दिखता है, जब वह बार-बार कहते है ‘कका अभी जिंदा है.’ भूपेश बघेल दीर्घायु हों, चिरायु हों, पर अमरजीत भगत को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. कांग्रेस का स्वास्थ्य इससे पता चल रहा है.

खाद-बीज संकट पर सरकार असहाय
कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने प्रदेश में खाद-बीज के संकट के साथ मानसून की बेरुखी का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है. कृषि पर आधारित जीवन है. अगर खेती नहीं हो रही है, तो समस्या खड़ी हो जाएगी. किसान को खाद-बीज और पानी चाहिए. कांग्रेस सरकार ने अच्छी व्यवस्था की थी, लेकिन इस सरकार में खाद नहीं मिल रहा है. बड़े पैमाने पर काला बाजारी हो रही है. किसान आखिर कहां जाएगा. पूरी परिस्थिति प्रदेश के किसानों के विरुद्ध है. कुछ करने में सरकार निसहाय दिख रही है.
इस विषय पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार ने खाद बीज के वितरण की पूरी व्यवस्था की है. किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. कांग्रेस किसानों को भ्रमित करने का काम कर रही है. किसान समझ रहे हैं. इसके साथ उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने किसानों को परेशान किया, आज किस मुँह से किसानों की बात कर रहे हैं. 

RBI का नया नियम: किन लोगों को मिलेंगे ₹25,000? जानिए कौन उठा सकेगा इस सुविधा का लाभ

  नई दिल्‍ली

सोचिए एक दिन आपके फोन पर एक मैसेज आता है कि आपके 20,000 रुपये कट गए हैं, जबकि आपने कभी इसका पेमेंट नहीं किया था और ना ही कोई अप्रूवल दिया था. फिर तुरंत आप इसकी जांच करते हुए बैंक से बात करते हैं, बैंक भी ये बताने में असमर्थ होता है कि पैसे कैसे मिलेंगे। 

आपने शिकायत भी दर्ज करा दी कि आपके खाते से 20,000 रुपये का ऑनलाइन फ्रॉड हो चुका है, लेकिन सवाल हमेशा से रहेगा कि आपको पैसा वापस मिलेगा या नहीं? क्‍योंकि ज्‍यादातर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कस्‍टमर्स का पैसा रिकवर नहीं हो पाता है. हालांकि, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सीधे तौर पर शामिल हो चुका है।  

RBI ने एक नया नियम निकाला है, जिसके तहत अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड या UPI के जरिए स्‍कैम होता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको मुआवजे का भुगतान करेगा. 24 जून 2026 को, आरबीआई ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

किस तरह के फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा
ये नियम स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं और 1 जनवरी, 2027 से उस तारीख को या उसके बाद किए गए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए प्रभावी होंगे। 

सरल शब्दों में कहें तो, इसमें आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं, वे सभी शामिल हैं, जैसे यूपीआई ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान, चाहे वे कार्ड स्वाइप या टैप करके किए गए हों या कार्ड की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करके किए गए हों. अगर आपने डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन किया है, तो इसे इस कैटेगरी में रखा जाएगा। 

कौन करेगा भुगतान? 
जब कोई धोखाधड़ी वाला लेनदेन होता है, तो नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है, आप, बैंक, या कोई और? RBI ने यह भी जानकारी दी है कि यह तय किस आधार पर किया जाएगा. आरबीआई का कहना है कि बैंक सिर्फ यह कहकर हट नहीं सकता कि फ्रॉड के दौरान कस्‍टमर्स लापरवाह थे, अब उन्‍हें साबित भी करना होगा। 

RBI ने रखा तीन कंडीशन
    अगर धोखाधड़ी बैंक की गलती के कारण हुई है, जैसे कि सुरक्षा में चूक, सिस्टम में गड़बड़ी, या बैंक द्वारा आपको धोखाधड़ी की सूचना न भेजना, तो नियम स्पष्ट है. बैंक को पूरे पैसे का भुगतान करना होगा, चाहे कस्‍टमर ने इसकी जानकारी दी हो या नहीं। 

    अगर धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे कि भुगतान ऐप, भुगतान गेटवे या दूरसंचार प्रदाता के कारण हुई है, न कि आपके या बैंक के कारण, तो भी आपको शून्य दायित्व और पूर्ण धनवापसी प्राप्त होगी, लेकिन केवल तभी जब कस्‍टमर धोखाधड़ी की घटना की तारीख से पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना देता है. पांच दिन बाद रिपोर्ट करें, और आपकी देनदारी बैंक की अपनी आंतरिक नीति के अनुसार तय की जाएगी। 

    अगर धोखाधड़ी आपकी लापरवाही के कारण हुई है, जैसे कि आपने अपना ओटीपी साझा किया, अपने बैंक से मिली स्पष्ट धोखाधड़ी की चेतावनी को अनदेखा किया, या कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया, तो नियम अधिक जटिल हैं, और यहीं पर इस अधिसूचना का वास्तव में नया हिस्सा सामने आता है। 

आपकी गलती पर भी मिल सकती है रकम
नए नियमों के तहत, भले ही आप तकनीकी रूप से लापरवाह रहे हों, जैसे कि आपने किसी फ़िशिंग लिंक पर क्लिक किया हो या कोई ऐसा ओटीपी शेयर किया हो जो आपको नहीं करना चाहिए था, फिर भी आपको मुआवजा मिल सकता है, बशर्ते नुकसान कम हो और आपने तुरंत कार्रवाई की हो। 

कितना मिलेगा मुआवजा? 
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुआवजे का भुगतान पूरे लाइफ में एक ही बार किसी एक व्‍यक्ति को किया जाएगा. यह भुगतान 25,000 रुपये या 85 फीसदी जो भी कम हो किया जाएगा. अगर मान लीजिए किसी व्‍यक्ति के साथ 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है और कस्‍टमर ने शिकायत दर्ज कराई है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये का ही मुआवजा दिया जाएगा. अगर उसके साथ दोबारा फ्रॉड होता है तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। 

कौन कितना करेगा पेमेंट? 
छोटे धोखाधड़ी के मामलों में, खासकर 29,412 रुपये से कम के नुकसान वाले मामलों में, जहां मुआवजा नुकसान का 85 प्रतिशत होता है. घरेलू धोखाधड़ी के मामलों में, 65 प्रतिशत रिजर्व बैंक द्वारा, 10 प्रतिशत ग्राहक के बैंक द्वारा और बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा. लाभार्थी बैंक, वह बैंक है जिसने सबसे पहले आपका चोरी हुआ पैसा प्राप्त किया था। 

29,412 रुपये और 50,000 रुपये के बीच के थोड़े बड़े नुकसान के लिए, जहां मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है, RBI, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक क्रमशः 19118 रुपये, 2941 रुपये और 2941 रुपये का योगदान करेंगे। 

 

Kawardha के सरकारी स्कूल में शराब पीते पकड़ा गया शिक्षक, DEO ने जांच के दिए निर्देश

कवर्धा.

कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. सुदूर वनांचल ग्राम तेलियापानी लेदरा के शासकीय स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. स्कूल में पदस्थ शिक्षक को शराब सेवन करते पकड़ा गया है.  

जानकारी के अनुसार, यह घटना स्कूल समय के दौरान की बताई जा रही है. एक शिक्षक स्कूल के कमरे में शराब का सेवन नजर आए. कमरे में दो शराब की बोतलें और खाने के पैकेट भी मिले. मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने संबंधित प्रधान पाठक से प्रतिवेदन तलब किया है. उनका कहना है कि वीडियो की जांच कराई जाएगी. घटना कब की है, शराब सेवन कहां हुआ है, इसकी पुष्टि के लिए जांच की जाएगी. जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

बिलासपुर में भी शराबी शिक्षक पकड़ाया –
बिलासपुर में मस्तूरी विकासखंड के मचहा जनपद प्राथमिक शाला में विगत महीनों टीचर संतोष केवट स्कूल में दिनदहाड़े शराब पीता नजर आया. स्कूल संचालन के दौरान शिक्षक ने महिला प्रधान पाठक तुलसी गणेश चौहान के सामने बैठकर शराब पी थी. उसे निलंबित कर दिया गया था. आरोपी टीचर मूंछों पर ताव देकर धौंस भी दे रहा है कि जाओ कलेक्टर को बता दो, मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता है. ये पूरा मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के एक शासकीय स्कूल का है. शिक्षा विभाग ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया है. जिला शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वो अब इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज कर उक्त शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. जैसे ही डीईओ के सामने यह वीडियो आया. उन्होंने एक्शन लेते हुए शराबी शिक्षक को निलंबित कर दिया.

न्यूयॉर्कवासियों को जोहरान ममदानी का बड़ा वादा, 2 साल तक नहीं बढ़ेगा घर का किराया

न्यूयॉर्क 

न्यूयॉर्क शहर के हाउसिंग बोर्ड ने  करीब दस लाख रेगुलेटेड अपार्टमेंट के किराए को दो साल तक न बढ़ाने के लिए वोट किया. मेयर जोहरान ममदानी ने अपने कार्यकाल के कुछ ही महीनों में अपने मुख्य चुनावी वादे को पूरा किया है। 

शहर के ‘रेंट गाइडलाइंस बोर्ड’ ने 7-1 के वोट से अक्टूबर से शुरू होने वाले एक-साल और दो-साल के लीज के लिए किराए में बढ़ोतरी को जीरो तय किया है। मैनहट्टन के एक म्यूजियम ऑडिटोरियम में जमा हुए सैकड़ों किराएदारों ने इस नतीजे पर खुशी मनाई और सीटियां बजाईं। 

ममदानी ने बताया ऐतिहासिक जीत
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने एक बयान में कहा, “यह शहर के किराएदारों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है. यह वह राहत है, जिसके हमारे शहर के कामकाजी लोग हकदार हैं। 

यह वोट हफ्तों तक चली उस सालाना प्रक्रिया का नतीजा था, जिसमें यह तय किया जाता है कि मकान-मालिक ‘रेंट-स्टेबलाइज़्ड’ अपार्टमेंट यानी ‘जिनका किराया एक सीमा से ज़्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता’ उनका किराया कितना बढ़ा सकते हैं. इन अपार्टमेंट में न्यूयॉर्क के करीब एक-चौथाई लोग रहते हैं. रेंट गाइडलाइंस बोर्ड वेतन, महंगाई, रखरखाव की लागत, टैक्स और मकान-मालिकों की आय जैसे कारकों पर विचार करता है। 

बोर्ड की 2025 की स्टडी के मुताबिक, रेगुलेटेड अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 1,599 डॉलर था. वहीं, लिस्टिंग एजेंसी StreetEasy के मुताबिक, शहर में नए किराए पर दिए गए अपार्टमेंट का मीडियन किराया 3,950 डॉलर है। 

जनवरी में पद संभालने के बाद से डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान ममदानी ने बोर्ड के नौ में से छह सदस्यों को नियुक्त किया है. उन्होंने ऐसे लोगों को चुना है, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि वे किराएदारों के प्रति सहानुभूति रखते हैं. बता दें कि ममदानी ने  शहर को ज्यादा किफायती बनाने का वादा किया है। 

बोर्ड मेंबर ने दिया इस्तीफा
 वोटिंग से कुछ घंटे पहले, मकान मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड में अपने लोगों को भरकर उसे एकतरफा बनाया जा रहा है और बोर्ड निष्पक्ष रहने की अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर रहा है. इस्तीफा देते हुए, क्रिस्टीना स्मिथ ने कहा कि नतीजे मेयर ने पहले ही तय कर लिए थे। 

उन्होंने कहा, “नए सिरे से बने बोर्ड को किराया न बढ़ाने यानी रेंट फ्रीज का फैसला लेना था. उसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह सब बस दिखावा था। 

ममदानी के द्वारा नियुक्त की गईं बोर्ड की चेयर चैंटेला मिशेल ने कहा कि बोर्ड के सदस्यों और स्टाफ ने आजादी और ईमानदारी से काम किया। 

बोर्ड में मकान मालिकों के दूसरे प्रतिनिधि, ममदानी द्वारा नियुक्त मैक्सिम विन, जब वोटिंग से पहले एक लंबा बयान पढ़ रहे थे, तो किराएदारों ने उनकी हूटिंग की. लेकिन जब कुछ मिनटों बाद उन्होंने अपनी बात खत्म की और किराया न बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया, तो भीड़ का गुस्सा खुशी में बदल गया। 

वोटिंग से पहले हुई पब्लिक हियरिंग में किराएदारों ने रेंट न बढ़ाने की मांग की या किराया कम करने की भी मांग की. उनका कहना था कि महंगाई और बढ़ते बिलों के मुकाबले उनकी आमदनी नहीं बढ़ रही है. जैसा कि मेयर बिल डी ब्लासियो के कार्यकाल में 2015 से 2021 के बीच सिर्फ़ एक साल के लीज़ के लिए तीन बार हुआ था। 

मकान मालिकों के समूहों का तर्क था कि किराया न बढ़ाने से प्रॉपर्टी मालिकों के लिए अपनी बिल्डिंग का रखरखाव करना और मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मकान मालिक अपने मॉर्गेज यानी होम लोन की किस्तें भी नहीं चुका पा रहे हैं। 

कुछ मकान मालिकों का कहना है कि उन्हें बिना रेगुलेशन वाले, मार्केट-रेट वाले अपार्टमेंट का किराया बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे वे अपने रेंट-स्टेबलाइज़्ड यानी किराया-नियंत्रित यूनिट्स से हुए नुकसान की भरपाई कर सकें. इनमें एक बिल्डिंग के मालिक छोटे-मोटे मालिकों से लेकर अमीर प्राइवेट इक्विटी निवेशक तक शामिल हैं। 

चुनाव जीतने के बाद, जोहरान ममदानी क्वींस में करीब 2,300 डॉलर प्रति महीने के किराए वाले, रेगुलेटेड रेंट वाले वन-बेडरूम अपार्टमेंट से मैनहट्टन में मेयर के फाइव-बेडरूम वाले सरकारी आवास में चले गए। 

गुरुवार को हुए मतदान ने जोहरान ममदानी के लिए एक सफल हफ्ते को और भी यादगार बना दिया. उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में न्यूयॉर्क की सीटों के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बनने की कड़ी टक्कर वाली दौड़ में तीनों वामपंथी उम्मीदवारों की जीत का भी जश्न मनाया। 

भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए 1 जुलाई को भारत आएंगी जापान की प्रधानमंत्री, कई अहम समझौतों पर रहेगी नजर

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जापान की पीएम साने ताकाइची तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचेंगी. पीएम ताकाइची 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगी. यह उनका पहला भारत दौरा है. प्रधानमंत्री ताकाइची 1-3 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी. यह समिट दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और मजबूत करने के साथ-साथ परस्पर हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर देगा। 

यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी अगस्त 2025 में जापान के दौरे पर पहुंचे थे, जहां वे 15वें भारत-जापान सालाना समिट में शामिल हुए. यह भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में टोक्यो में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ भारत-जापान आर्थिक मंच कार्यक्रम के दौरान शीर्ष उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी पर प्रकाश डाला और द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए पांच-पॉइंट रोडमैप पेश किया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा अभी भारत-जापान बिजनेस फोरम की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इसमें कंपनियों के बीच हुई बिजनेस डील का विस्तार से वर्णन दिया गया है. इस प्रगति के लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं. दो दिवसीय जापान दौरे पर पीएम मोदी ने प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के एक समूह के साथ एक बैठक की. इस दौरान भारत और जापान के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों पर चर्चा हुई. इसके अलावा, उन्होंने टोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के राज्यपालों से मुलाकात की थी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने से संबंधित कई समझौते पर मुहर लगी। 

ताकाइची का पहला भारत दौरा

यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा अगस्त 2025 में 15वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के टोक्यो दौरे के बाद हो रहा है। यह दौरा भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ मियागी प्रांत के सेंडाई शहर का दौरा किया था. इस दौरान दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (टीईएल मियागी) का दौरा किया. कारखाने में उन्हें टीईएल की वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भूमिका, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और भारत के साथ वर्तमान व भविष्य के सहयोग के बारे में जानकारी दी गई थी। 

इस दौरे से दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण, टेस्टिंग और सप्लाई चेन में सहयोग के अवसरों की व्यावहारिक समझ बनी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और जापान की उन्नत तकनीक के बीच सामंजस्य के तौर पर रेखांकित किया गया। 

दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में सहयोग गहन करने, जापान-भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन साझेदारी के लिए सहमति को आगे बढ़ाने और भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा व आर्थिक सुरक्षा वार्ता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. इस दौरान मजबूत, लचीली और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने के साझा लक्ष्य पर भी जोर दिया गया। 

ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, वॉर मेमोरियल पर किया गया अंकित

 नई दिल्ली

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है। 

यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं। 

मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। 

अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…

    सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड  
    राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री  
    लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट  
    एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट  
    हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी  
    सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग

इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है। 

रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है। 

सरकार की चुप्पी और अब खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी। 

अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे। 

राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

‘पार्टी से गद्दारी मां से धोखा देने जैसी’, ममता बनर्जी ने बागी नेताओं को दी कड़ी चेतावनी

कलकत्ता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खरी-खरी सुनाई है. उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में ममता ने पार्टी छोड़कर जाने वालों और दल बदलने वाले विधायकों-सांसदों और पार्षदों को ‘गद्दार’ करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे। 

ममता बनर्जी ने कहा, ‘जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा, जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वासघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी। 

मौजूद राजनीतिक माहौल डर और आर्थिक संकट से भरा

बैठक की शुरुआत में कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए ममता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को डर और आर्थिक संकट से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा, ‘हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं. फुटपाथ दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं। 

ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए इस माहौल में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, बीएलओ और जमीनी कैडर ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया है. ‘आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी सफलता के पीछे हमारे कार्यकर्ताओं का खून-पसीना और बलिदान है। 

पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य
टीएमसी प्रमुख ने दल-बदलने वाले नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग सिर्फ खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं. उनमें धैर्य नहीं है. जिनके खिलाफ हम लड़ते रहे, उन्हीं के साथ जाकर खड़े हो गए. अगर वे सीधे भाजपा में चले जाते तो हमें इतनी आपत्ति नहीं होती, लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य है। 

उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो दावा करते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए पार्टी छोड़ी. ममता ने कहा, ‘वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए गए हैं, लेकिन अपने ही इलाके में एंट्री नहीं कर पा रहे. वे कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि अपनी दौलत बचाने गए हैं. क्या वे आपका पैसा वापस लाएंगे? नहीं. उन्होंने धर्म, सांप्रदायिक सौहार्द और मूल्यों तक का सौदा कर दिया है और अब अहंकार के साथ घूम रहे हैं। 

ममता बनर्जी ने बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी जिन लोगों में समझ बाकी है, वे वापस लौट आएं. उन्होंने कहा, ‘जो लोग सोच रहे हैं कि वे इस रास्ते पर चलकर बच जाएंगे, वे अंत में कहीं के नहीं रहेंगे. न इधर के रहेंगे, न उधर के। 

जमीनी कार्यकर्ताओं को बताया महत्वपूर्ण
अपने भाषण में ममता ने बार-बार पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, ‘कार्यकर्ता नेता बनाते हैं और नेता कार्यकर्ताओं को तैयार करते हैं. मैं हर दिन अपने कार्यकर्ताओं से मिलती हूं और वे मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, वे कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान से लाभ उठाकर आज व्यक्तिगत हितों के लिए दल बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, “हमने खून बहाया, संघर्ष किया. जो कठिन समय में हमारे साथ नहीं रहे, अगर वे पार्टी नहीं छोड़ते तो भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं पर इतना अत्याचार करने की हिम्मत नहीं करती। 

ममता ने पुलिस और मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पुलिस का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा.’क्या पुलिस का काम लोगों से कहना है कि गाड़ी लेकर आए हैं, बैठो और उस शैतान के पास चले जाओ? पुलिस का कर्तव्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सभाओं और रैलियों की अनुमति नहीं दी जा रही है और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. क्या भाजपा का मतलब ‘वन पार्टी, वन नेशन’ है? हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 

ममता बनर्जी ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वासघात की वजह से उन्होंने अपने दो भाइयों से संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा. उन्होंने कहा कि अभिषेक को लगातार सीआईडी, ईडी और सीबीआई के समन मिलते रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. “मैं एयरपोर्ट जाती हूं तो भी उन्हें पहले से पता चल जाता है कि मैं कहां जा रही हूं। 

भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘इस रैली का आयोजन आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत और संघर्ष लगता है. लेकिन अगर सिर्फ पांच कार्यकर्ता भी आएंगे, तब भी हम यह सभा करेंगे. हमने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया. 21 जुलाई के बाद सभी लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें। 

उन्होंने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे ‘संविधान हत्या दिवस’ का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि ‘आज संविधान और कानून का राज कहां है? लोग पुलिस के जरिए डराए और धमकाए जा रहे हैं. ऐसे समय में केवल जनता और हमारे कार्यकर्ता ही एकजुट होकर इसका मुकाबला कर सकते हैं। 

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है. ऐसे में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से पहले ममता ने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी ‘ड्रोन दीदी’

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी।

उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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