ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, वॉर मेमोरियल पर किया गया अंकित

 नई दिल्ली

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है। 

यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं। 

मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। 

अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…

    सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड  
    राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री  
    लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट  
    एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट  
    हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी  
    सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग

इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है। 

रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है। 

सरकार की चुप्पी और अब खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी। 

अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे। 

राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

‘पार्टी से गद्दारी मां से धोखा देने जैसी’, ममता बनर्जी ने बागी नेताओं को दी कड़ी चेतावनी

कलकत्ता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खरी-खरी सुनाई है. उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में ममता ने पार्टी छोड़कर जाने वालों और दल बदलने वाले विधायकों-सांसदों और पार्षदों को ‘गद्दार’ करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे। 

ममता बनर्जी ने कहा, ‘जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा, जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वासघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी। 

मौजूद राजनीतिक माहौल डर और आर्थिक संकट से भरा

बैठक की शुरुआत में कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए ममता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को डर और आर्थिक संकट से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा, ‘हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं. फुटपाथ दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं। 

ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए इस माहौल में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, बीएलओ और जमीनी कैडर ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया है. ‘आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी सफलता के पीछे हमारे कार्यकर्ताओं का खून-पसीना और बलिदान है। 

पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य
टीएमसी प्रमुख ने दल-बदलने वाले नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग सिर्फ खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं. उनमें धैर्य नहीं है. जिनके खिलाफ हम लड़ते रहे, उन्हीं के साथ जाकर खड़े हो गए. अगर वे सीधे भाजपा में चले जाते तो हमें इतनी आपत्ति नहीं होती, लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य है। 

उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो दावा करते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए पार्टी छोड़ी. ममता ने कहा, ‘वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए गए हैं, लेकिन अपने ही इलाके में एंट्री नहीं कर पा रहे. वे कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि अपनी दौलत बचाने गए हैं. क्या वे आपका पैसा वापस लाएंगे? नहीं. उन्होंने धर्म, सांप्रदायिक सौहार्द और मूल्यों तक का सौदा कर दिया है और अब अहंकार के साथ घूम रहे हैं। 

ममता बनर्जी ने बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी जिन लोगों में समझ बाकी है, वे वापस लौट आएं. उन्होंने कहा, ‘जो लोग सोच रहे हैं कि वे इस रास्ते पर चलकर बच जाएंगे, वे अंत में कहीं के नहीं रहेंगे. न इधर के रहेंगे, न उधर के। 

जमीनी कार्यकर्ताओं को बताया महत्वपूर्ण
अपने भाषण में ममता ने बार-बार पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, ‘कार्यकर्ता नेता बनाते हैं और नेता कार्यकर्ताओं को तैयार करते हैं. मैं हर दिन अपने कार्यकर्ताओं से मिलती हूं और वे मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, वे कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान से लाभ उठाकर आज व्यक्तिगत हितों के लिए दल बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, “हमने खून बहाया, संघर्ष किया. जो कठिन समय में हमारे साथ नहीं रहे, अगर वे पार्टी नहीं छोड़ते तो भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं पर इतना अत्याचार करने की हिम्मत नहीं करती। 

ममता ने पुलिस और मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पुलिस का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा.’क्या पुलिस का काम लोगों से कहना है कि गाड़ी लेकर आए हैं, बैठो और उस शैतान के पास चले जाओ? पुलिस का कर्तव्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सभाओं और रैलियों की अनुमति नहीं दी जा रही है और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. क्या भाजपा का मतलब ‘वन पार्टी, वन नेशन’ है? हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 

ममता बनर्जी ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वासघात की वजह से उन्होंने अपने दो भाइयों से संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा. उन्होंने कहा कि अभिषेक को लगातार सीआईडी, ईडी और सीबीआई के समन मिलते रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. “मैं एयरपोर्ट जाती हूं तो भी उन्हें पहले से पता चल जाता है कि मैं कहां जा रही हूं। 

भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘इस रैली का आयोजन आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत और संघर्ष लगता है. लेकिन अगर सिर्फ पांच कार्यकर्ता भी आएंगे, तब भी हम यह सभा करेंगे. हमने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया. 21 जुलाई के बाद सभी लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें। 

उन्होंने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे ‘संविधान हत्या दिवस’ का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि ‘आज संविधान और कानून का राज कहां है? लोग पुलिस के जरिए डराए और धमकाए जा रहे हैं. ऐसे समय में केवल जनता और हमारे कार्यकर्ता ही एकजुट होकर इसका मुकाबला कर सकते हैं। 

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है. ऐसे में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से पहले ममता ने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी ‘ड्रोन दीदी’

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी।

उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रियंका चोपड़ा का खुलासा: “परफेक्शन नहीं, सच्चाई से बनती है सफलता”

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने लंबे सफर और कामयाबी के राज के बारे में खुलकर बात की है। उनका मानना है कि सफलता के लिए हमेशा हर चीज में एकदम सही होना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी कमियों को स्वीकार करना और इंसान बने रहना ज्यादा जरूरी है

परफेक्शन नहीं, दर्शकों से दिल का रिश्ता जरूरी
एएनआई की खबर के अनुसार, प्रियंका ने बताया कि करियर की शुरुआत में वह हर चीज को परफेक्ट करने की कोशिश करती थीं। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि दर्शक आपकी कमियों से और आपकी सच्चाई से जुड़ते हैं। जब आप अपनी गलती मान लेते हैं और यह स्वीकार करते हैं, तब फैंस के साथ दिल का रिश्ता बनता है।

‘ना’ सुनने पर दोगुनी ताकत से काम करना
प्रियंका ने अपनी कामयाबी का एक बड़ा कारण रिजेक्शन का डटकर सामना करना बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत महत्वाकांक्षी हूं। अगर मुझे किसी काम के लिए न कहा जाता है, तो मेरा मन उस काम को और भी ज्यादा करने का करता है।’

प्रियंका ने हाल ही में आई अपनी फिल्म ‘द ब्लफ’ की सफलता को लेकर खुलकर बात की। इसमें उन्होंने एक महिला समुद्री डाकू का किरदार निभाया है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में महिलाओं के आगे बढ़ने की एक सीमा तय कर दी जाती है। ऐसे में मौकों का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करनी पड़ती है। यही वजह है कि उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण करना भी शुरू किया।

दूसरों के लिए मददगार बनना
जब प्रियंका ने हॉलीवुड में कदम रखा, तो वह वहां किसी को नहीं जानती थीं। शुरुआत में उन्हें मुख्य भूमिकाएं नहीं मिल रही थीं, क्योंकि स्टूडियोज किसी भारतीय कलाकार को मुख्य रोल में नहीं सोचते थे। इसलिए उन्होंने खुद अपनी फिल्में प्रोड्यूस करना शुरू किया। अब वह अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिए नए कलाकारों और क्रिएटर्स को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म देना चाहती हैं।

इन फिल्मों में नजर आएंगी प्रियंका
प्रियंका तेलुगु फिल्म ‘वाराणसी’ में नजर आएंगी। इसे करीब 200 भाषाओं में डब किया जाएगा। इसमें प्रियंका के साथ साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन एसएस राजामौली करेंगे। इसके अलावा प्रियंका अभिनेता ऑरलैंडो ब्लूम के साथ फिल्म ‘रीसेट’ में नजर आएंगी।

Dongargarh परिक्रमा पथ भूमि अधिग्रहण मामले में कलेक्टर को सुनवाई के निर्देश, बिलासपुर हाईकोर्ट का आदेश

बिलासपुर.

हाईकोर्ट में डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने कलेक्टर राजनांदगांव को पीड़ित याचिकाकर्ता के शिकायत पत्र पर सुनवाई का अवसर देते हुए परीक्षण कर निराकरण किए जाने का निर्देश जारी किया है. बता दें, कि याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अवैध रूप से अधिग्रहित करने के प्रस्ताव एवं प्रस्तुत शिकायत पत्र पर विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा है.

दरअसल, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के अंतर्गत बुधवारी पारा वार्ड नंबर 19 निवासी फहीम अख्तर ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि, उसकी कृषि भूमि ग्राम छीरपानी पटवारी हल्का नंबर 29 खसरा नंबर 196/2 में स्थित है. कुछ दिन पूर्व जानकारी मिली कि, उसके उक्त खसरा नंबर की भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित किए जाने कार्रवाई जारी है. जबकि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक सहमति नहीं दी थी. वर्तमान में याचिकाकर्ता की उक्त भूमि पर सड़क निर्माण की कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है और याचिकाकर्ता को ज्ञापन जारी कर उसके उक्त कृषि भूमि को मनमाने अत्यधिक कम कीमत पर खरीदने के संबंध में शासन के द्वारा प्रस्ताव भी जारी कर दिया गया है. याचिकाकर्ता अपनी उक्त कृषि भूमि को बेचना नहीं चाहता और ना ही उसके बदले में किसी प्रकार का मुआवजा चाहता है.

याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए कलेक्टर जिला राजनांदगांव के समक्ष एक शिकायत पत्र भी दिया था, कि उक्त प्रस्तावित परिक्रमा पथ के लिए किसी भी प्रकार से निजी भूमि अधिग्रहित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास ही पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, जिसके माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा सकता है. स्वीकृत नक्शे के विरूद्ध निजी भूमि का चयन किया जाना अनुचित है. यदि सड़क निर्माण उपलब्ध राजस्व भूमि से किया जाता है तो शासन को भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान में होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है, साथ ही परिक्रमा पथ के लिए  पूर्व से ही मार्ग बना हुआ है. नए मार्ग की कोई जरूरत भी नहीं है.

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री ओ पी चौधरी

आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण

दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि

रायपुर,
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा। 

              मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।

              मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।

             मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है। साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।

            आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।

            मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।

           कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की श्रीमती पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।
         इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त अवनीश शरण, तथा विभाग एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारी और हितग्राही उपस्थित थे।

MP में राज्य पुलिस सेवा के 8 अधिकारी बनेंगे IPS, DPC बैठक में नाम तय; 2 अफसरों पर नहीं हुआ विचार

 भोपाल
राज्य पुलिस सेवा के आठ (1997 बैच के एक और 1998 बैच के सात) अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। गुरुवार को मंत्रालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में इनके नाम तय किए गए। लगभग दो माह में अधिसूचना जारी होने पर इन्हें आईपीएस संवर्ग आवंटित होगा।

कुल नौ पदों के लिए डीपीसी की बैठक की गई थी, जिसमें 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम विचार में लिया गया, पर निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र का मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया। राजेश मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के चलते उन्हें बाहर रखा गया है।

डीपीसी में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और एसीएस होम संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।

27-28 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति
यह डीपीसी वर्ष 2025 के लिए हुई है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित होगा। 27 से 28 वर्ष की सेवा के बाद इन्हें पदोन्नति मिलने जा रही है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में तो 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर आईपीएस बन चुके हैं। यानी पदोन्नति में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं।

बता दें, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी शीघ्र डीपीसी की बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है।

ये अधिकारी होंगे पदोन्नत
1997 बैच के सीताराम सस्त्या, 1998 बैच की मनीषा पाठक सोनी, निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, सुमन गुर्जर, सव्यसाची सराफ और समर वर्मा।

 

केतन अग्रवाल हत्याकांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस, पीड़ित परिवार से मिले CM फडणवीस

मुंबई 

महाराष्ट्र के लोनावला ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में उनके पिता विशाल अग्रवाल ने पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर बेटे के लिए न्याय की मांग की है. मुख्यमंत्री ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के साथ-साथ सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग भी तत्काल स्वीकार कर ली। 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ऑफिस से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, “लोनावला के ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की दुखद हत्या के मामले में केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने आज पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की. हम यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस मामले में दोषियों को सबसे कड़ी सज़ा मिले. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें भरोसा दिलाया कि परिवार को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। 

पोस्ट में आगे कहा गया है कि इस मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने की उनकी मांग को भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत मान लिया और कानून एवं न्याय विभाग के सचिव को इस बारे में निर्देश जारी किए. सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने भी इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम करने के लिए अपनी सहमति दे दी है। 

सिया के भाई साहिल को अफेयर के बारे में सब पता था

लोहागढ़ किले से रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल मर्डर के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस की नजर सिया गोयल के भाई साहिल गोयल पर भी टिक गई है. पुलिस ने साहिल को पूछताछ के लिए तलब किया है. सूत्रों के मुताबिक, उसे अपनी बहन सिया गोयल और चेतन चौधरी के अफेयर की पहले से जानकारी थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि  उसने यह बात परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से क्यों नहीं बताई। 

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि साहिल का बयान इस पूरे घटनाक्रम की कई अहम कड़ियों को जोड़ सकता है. फिलहाल उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और उसके बयान को केस डायरी का हिस्सा बनाया जा रहा है. जांच टीम यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि परिवार के भीतर सिया की मानसिक स्थिति, उसके रिश्तों और शादी को लेकर क्या चर्चाएं होती थीं। 

 भाई के बयान से खुल सकती हैं कई परतें

सूत्रों के अनुसार, पुलिस के पास ऐसे कुछ इनपुट हैं जिनसे संकेत मिलता है कि साहिल को सिया और चेतन की दोस्ती या संपर्क के बारे में जानकारी थी. हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी इन दोनों के संपर्क की जानकारी थी या नहीं. यदि किसी को पहले से जानकारी थी तो उसने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया, यह भी जांच का हिस्सा है। 

पूछताछ में सामने आई हत्या की कथित पूरी साजिश
इस बीच पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है. जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने पूछताछ के दौरान हत्या की पूरी योजना का क्रमवार विवरण बताया है. पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहागढ़ किले पर पहुंचने से पहले दोनों ने पूरी योजना तैयार कर ली थी. तय हुआ था कि सिया एक निश्चित स्थान पर बैठकर पहले से तय इशारा करेगी. जैसे ही संकेत मिलेगा, चेतन पीछे से आकर केतन अग्रवाल को अचानक गहरी खाई में धक्का देगा. अधिकारियों का कहना है कि घटना ठीक उसी योजना के अनुसार हुई. केतन को अंतिम क्षण तक किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, उसे खाई में धक्का दे दिया गया। 

शुरुआत में दोनों ने बचने की कोशिश की
जांच अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपी लगातार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे. चेतन चौधरी ने पहले दावा किया कि वह किले पर तो मौजूद था, लेकिन घटना वाले स्थान तक नहीं गया था. उसने यह भी कहा कि उसे नहीं पता कि आखिर वहां क्या हुआ. हालांकि पुलिस को उसके बयान पर भरोसा नहीं हुआ. तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से मिले तथ्यों और लगातार पूछताछ के बाद दोनों के बयान बदलने लगे. इसके बाद दोनों ने कथित रूप से अपराध स्वीकार करते हुए पूरी योजना पुलिस के सामने रखी 

भागकर शादी नहीं, हत्या का रास्ता क्यों चुना ?
पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से यह सवाल भी किया कि यदि वे एक-दूसरे से प्रेम करते थे तो भागकर शादी क्यों नहीं कर ली. पुलिस के अनुसार, दोनों का जवाब था कि यदि वे घर से भाग जाते तो दोनों परिवारों की सामाजिक बदनामी होती. इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. यह जवाब जांच अधिकारियों के लिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि पुलिस का मानना है कि यदि यह कथन सही है तो हत्या की साजिश पहले से सोची-समझी थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 18 जून की घटना पहली कोशिश नहीं थी. अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी आरोपी केतन अग्रवाल को दो बार लोहागढ़ किले पर लेकर गए थे. जांच के मुताबिक, दोनों मौकों पर कथित योजना किसी कारण सफल नहीं हो सकी. इसके बाद तीसरी बार मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया गया. पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है। 

नवंबर में होनी थी शाही शादी
केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई हो चुकी थी. दोनों की शादी इसी वर्ष नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में प्रस्तावित थी. दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में जुटे थे और कार्यक्रम को लेकर उत्साह था. पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि सिया कथित रूप से इस शादी से खुश नहीं थी. हालांकि परिवार का दावा है कि उसने कभी इस तरह की कोई बात उनके सामने नहीं रखी। 

पिता ने बेटी के लिए भी मांगी कठोर सजा
सिया के पिता प्रवीण गोयल मीडिया के सामने आए. उन्होंने कहा कि यदि इस अपराध में उनकी बेटी दोषी साबित होती है तो उसे भी उतनी ही कठोर सजा मिलनी चाहिए जितनी किसी अन्य आरोपी को मिलेगी. उन्होंने कहा कि केतन उनके लिए बेटे जैसा था और उसकी मौत ने दोनों परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था और किसी ने भी कभी ऐसी घटना की कल्पना नहीं की थी. सिया की मां पूजा गोयल ने भी पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा. उनके अनुसार, सिया और चेतन की पहचान एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी. परिवार को सिर्फ इतनी जानकारी थी कि दोनों एक-दूसरे को जानते हैं. उन्होंने कहा कि शादी तय करने से पहले कई बार सिया से पूछा गया था कि क्या वह केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है. हर बार उसने सकारात्मक जवाब दिया और यह भी कहा कि उसका किसी अन्य युवक से कोई संबंध नहीं है. पूजा गोयल का कहना है कि परिवार को कभी ऐसा संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि बेटी किसी मानसिक दबाव में है या शादी नहीं करना चाहती। 

परिवार ने रिश्ते की पूरी कहानी बताई
प्रवीण गोयल ने बताया कि सबसे पहले गोवा में एक पारिवारिक समारोह के दौरान रिश्ते की चर्चा हुई थी. उस समय उन्होंने बेटी की कम उम्र का हवाला देते हुए जल्दबाजी से इनकार किया था. बाद में कर्जत में आयोजित एक अन्य पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान अग्रवाल परिवार की ओर से दोबारा प्रस्ताव आया. रिश्तेदारों ने दोनों परिवारों को उपयुक्त बताते हुए इस रिश्ते पर आगे बढ़ने की सलाह दी. इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह तय हुआ. प्रवीण गोयल ने यह भी कहा कि उन्होंने चेतन चौधरी को कभी देखा तक नहीं था और न ही उससे कोई बातचीत हुई थी. उनके मुताबिक, उन्हें बेटी और चेतन के कथित संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी। 

 

रश्मिका मंदाना की ‘मैसा’ से निधि सिंह का दमदार कैरेक्टर पोस्टर रिलीज, लुक ने बढ़ाया एक्साइटमेंट

मुंबई
 पैन-इंडिया स्टार रश्मिका मंदाना की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मैसा’ से अभिनेत्री निधि सिंह का नया कैरेक्टर पोस्टर रिलीज किया गया है। मेकर्स ने निधि सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनका यह पोस्टर रिलीज करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।पोस्टर में निधि सिंह का गुस्से से भरा और निडर अंदाज नजर आ रहा है। पोस्टर साझा करते हुए मेकर्स ने लिखा, “हर आत्मा का जन्म कोमल होने के लिए नहीं होता। कुछ का निर्माण संघर्षों को सहने के लिए किया जाता है। टीम #मैसा की तरफ से बेहद प्रतिभाशाली निधि सिंह को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। शूटिंग जारी है। इस 2026 में सिनेमाघरों में।”

‘मैसा’ में रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उनका अब तक का सबसे अलग और दमदार अवतार देखने को मिलेगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह है।
अनफॉर्मूला फिल्म्स के बैनर तले निर्मित और रवींद्र पुल्ले के निर्देशन में बन रही ‘मैसा’ आदिवासी क्षेत्रों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की शूटिंग जारी है और इसके वर्ष 2026 में सिनेमाघरों में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने की संभावना है।

कार-बाइक की टक्कर में दो पत्रकार घायल, कुचलने की कोशिश का गंभीर आरोप

डोंगरगढ़.

राजनादगांव के सनसिटी क्षेत्र में बीती रात सड़क हादसा हुआ है. तेज रफ्तार कार और बाइक के बीच हुई टक्कर में दो पत्रकार घायल हो गए. एक के पैर में गंभीर चोट आई है. घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल लाया गया.

आरोप है कि मौके पर कार चालक ने पत्रकारों को कथित तौर पर कुचलने की कोशिश की. इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है. जानकरी के अनुसार, एक कार्यक्रम की कवरेज के बाद पत्रकार योगेश साहू और सौरभ अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान सनसिटी के पास एक तेज रफ्तार सफेद रंग की ब्रेजा कार (क्रमांक CG 04 NE 1199) ने अचानक सामने आ गई, जिससे बाइक सवार जा टकराए. हादसे में पत्रकार सौरभ के पैर में गंभीर चोट आई है.

पत्रकारों का आरोप है कि जब उन्होंने चालक को मोबाइल कैमरे में कैद करने की कोशिश की तब कार से कई बार कुचलने का प्रयास किया गया. घटना का वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में सफेद रंग की कार तेज रफ्तार से पत्रकार की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है और पत्रकार जान बचाने के लिए दौड़ता नजर आता है. हालांकि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच का विषय है. पत्रकारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

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