Passport Rule Change: 14 साल बाद पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा, 1 जुलाई से बढ़ेंगी फीस, जानें नई रेट लिस्ट

 नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सर्विस की फीस में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण माने जाने को लेकर बहस चल रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए इसे अगले महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए हैं। 

साल 2012 में आखिरी बार हुआ था फीस में बदलाव
नए नियमों के तहत 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट के नए शुल्क लागू होंगे. इस बदलाव के तहत अब पासपोर्ट बनवाना दो हजार रुपये तक महंगा पड़ सकता है. इससे पहले साल 2012 में आखिरी बार पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ाई गई थी. इस तरह ये बदलाव 14 साल बाद हुआ है। 

सरकार ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद नया पासपोर्ट बनवाने, पासपोर्ट रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क देना होगा. इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को हटाकर नई शुल्क सूची लागू कर दी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 से सभी पासपोर्ट सेवाओं पर नए शुल्क लागू होंगे। 

फीस में कितना हुआ बदलाव

1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में बदलाव, जानिए अब कितना देना होगा
 
36 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
पहले: ₹1,500 → अब: ₹2,500 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,500 → अब: ₹5,000 (तत्काल)

60 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
पहले: ₹2,000 → अब: ₹3,500 (नॉर्मल)
पहले: ₹4,000 → अब: ₹6,000 (तत्काल)

36 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹1,500 → अब: ₹5,000 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,500 → अब: ₹7,500 (तत्काल)

60 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹2,000 → अब: ₹6,000 (नॉर्मल)
पहले: ₹4,000 → अब: ₹8,500 (तत्काल)

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पेज का पासपोर्ट:
पहले: ₹1,000 → अब: ₹1,750 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,000 → अब: ₹4,250 (तत्काल)

नाबालिगों का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹1,000 → अब: ₹4,250 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,000 → अब: ₹6,750 (तत्काल)

LPG Rule Change: कच्चा तेल सस्ता होते ही बड़ा फैसला, आज से हटीं ये पाबंदियां, उपभोक्ताओं को राहत

 नई दिल्‍ली

एलपीजी को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. अभी तक जो भी नियम कायदे और पाबंदियां लागू थीं, उसे अब खत्‍म कर दिया गया है. लेकिन यह सिर्फ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल LPG ग्राहकों के लिए ही है. सरकार ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं और सप्लाई को वेस्ट एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि संकट की शुरुआत में रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है. इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है, जिससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्‍टमर्स को काफी राहत मिली है. यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है.  सरल शब्‍दों में कहें तो 50 फीसदी एलपीजी की सप्‍लाई अब कमर्शियल और इंडस्‍ट्री कस्‍टमर्स को की जाएंगी। 

वेस्ट एशिया संकट के दौरान, घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत आदेश जारी किए थे. इन आदेशों के तहत C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ़ LPG उत्पादन के लिए करना जरूरी कर दिया गया था और उन्हें पेट्रोकेमिकल व अन्य डाउनस्ट्रीम इस्तेमाल से हटाकर LPG उत्पादन में लगाया गया था। 

C3-C4 स्ट्रीम्स को लेकर बदलाव
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन में सुधार और इम्पोर्टेड LPG कार्गो की अनुमानित उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने LPG पूल में C3/C4 स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का भी फैसला किया है. नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम्स का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू LPG की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े। 

घरेलू एलपीजी पर कोई असर नहीं
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए C3-C4 गैसों का आवंटन बढ़ाने के बावजूद आम जनता के लिए घरेलू एलपीजी की उपलब्‍धता को कम नहीं किया जाएगा. सरकार यह तय करेगी कि घरेलू एलपीजी का उत्‍पादन कम से कम 40 टीएमटी हर दिन बना रहे. इसका मतलब है कि रसोई एलपीजी गैस की सप्‍लाई बनी रहेगी।

कच्‍चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट 
जंग शुरू होने से पहले कच्‍चा तेल जिस लेवल पर पहुंचा था, अब उससे भी नीचे आ चुका है. ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है. तेल की कीमतों में यह गिरावट तब आई है, जब होर्मुज को फिर से खोल दिया गया है और जहाज तेजी से होर्मुज पार कर रहे हैं। 

76 करोड़ की फर्जी बिल ट्रेडिंग का भंडाफोड़, ट्रेड लिंक का संचालक आदेश्वर चौरड़िया गिरफ्तार

राजनांदगांव.

राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) द्वारा कर चोरी एवं फर्जी बिलिंग उजागर के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव स्थित मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार किया गया है।

विभागीय जांच में सामने आया है कि फर्म द्वारा पिछले लगभग छह माह के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये के लेन-देन केवल कागजी रूप से दर्शाए गए। उपलब्ध अभिलेखों, जीएसटी रिटर्न तथा अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) संदिग्ध पाई गई, जिसके माध्यम से शासन को राजस्व हानि पहुंचाने का प्रयास किया गया।

प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि फर्म ने पश्चिम बंगाल स्थित संदिग्ध फर्मों से आयरन एवं स्टील की वास्तविक खरीदी किए बिना करोड़ों रुपये के खरीदी बिल प्राप्त किए थे। इन बिलों के आधार पर फर्जी आईटीसी का लाभ लिया गया तथा आगे अन्य करदाताओं को भी इसका जांच के दौरान अधिकांश आपूर्तिकर्ता लाभ हस्तांतरित किया गया। फर्मों के जीएसटी पंजीयन निरस्त पाए गए। तथा उनके द्वारा वास्तविक व्यापार किए जाने के कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुए।

विभाग के अनुसार, यह पूरा लेन- देन केवल पेपर ट्रेडिंग (कागजी बिलिंग ) एवं बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्मों से खरीदी दर्शाई गई थी, उनमें से कई केवल फर्जी बिल जारी करने एवं अवैध आईटीसी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही थीं। उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि माल का वास्तविक आवागमन नहीं हुआ और केवल बिलों के माध्यम से कर लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था बनाई गई थी।

प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। विभाग बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। राज्य कर विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

Raipur Traffic Alert: मुहर्रम पर ताजिया जुलूस, इन रास्तों पर रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन

रायपुर.

देशभर में आज हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम का पर्व मुहर्रम मनाया जाएगा. राजधानी रायपुर में भी पर्व को लेकर तैयारियां की गई है. प्रशासन और पुलिस की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. शहर में 26 जून को शहर में यातायात परिचालन में बदलाव किया गया है.

पुलिस के एडवाइजरी के मुताबिक, रायपुर में लगभग दोपहर 2 बजे से कई इलाकों से ताजिया जुलूस निकालेगे. विभिन्न मार्गों से रात 10 बजे से चौबे कॉलोनी स्थित करबला तालाब में समापन होगा. रायपुर के राजा तालाब, मोमीन पारा, अमीन पारा, छोटापारा, बैजनाथपारा, नेहरू नगर, संजय नगर, टिकरा पारा सहित शहर के कुछ क्षेत्रों से ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे. इस कारण यहां ट्रैफिक का दबाव देखने को मिल सकता है. रायपुर पुलिस ने जनता से डायवर्टेड रूट इस्तेमाल करने की सलाह दी है.

ताजिया सवारी का निर्धारित मार्ग

ताजिया जुलूस का मुख्य निर्धारित मार्ग नुरानी चौक से चौबे कॉलोनी के कर्बला तालाब तक रहेगा. ताजनगर, ईरानी डेरा और राजातालाब से निकलने वाले ताजिए नुरानी चौक पहुंचने के बाद पंडरी बस स्टैंड, मरही माता चौक, मौदहापारा मस्जिद गली, गुरूनानक चौक, राठौर चौक, रामसागर पारा, बढ़ई पारा, मोमिन पारा, आजाद चौक और आमापारा होते हुए आरकेसी के सामने से गुजरकर चौबे कॉलोनी स्थित कर्बला तालाब पहुंचेंगे. रायपुर शहर और जीई रोड से दुर्ग-भिलाई की ओर जाने वाले वाहन चालक शास्त्री चौक से महिला थाना चौक, कालीबाड़ी चौक और पचपेड़ी नाका होते हुए रिंग रोड-1 का उपयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं.

जीई रोड पर संचालित सिटी बसों के रूट में भी बदलाव किया गया है. शास्त्री चौक से जयस्तंभ चौक की ओर जाने के बजाय बसें कालीबाड़ी चौक, पचपेड़ी नाका और रिंग रोड-1 के रास्ते संचालित होंगी. ताजिया जुलूस के जीई रोड पर पहुंचने के दौरान टाटीबंध से शहर की ओर आने वाले वाहनों को टाटीबंध चौक से रिंग रोड-1 की तरफ और एनआईटी के पास से डंगनिया गोल चौक मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा.शहर से पुरानी बस्ती, लाखेनगर होते हुए सुंदर नगर, डंगनिया और दुर्ग-भिलाई जाने वाले लोग कालीबाड़ी चौक से संतोषी नगर जलगृह मार्ग और भाठागांव चौक होकर आवागमन कर सकते हैं. जुलूस के दौरान आजाद चौक से आश्रम तिराहा और चौबे कॉलोनी तक जीई रोड से जुड़ने वाले सभी संपर्क मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. इन मार्गों से आने वाले ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों की ओर डायवर्ट किया जाएगा.

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक शास्त्री चौक से चौबे कॉलोनी टर्निंग के बीच जीई रोड का उपयोग करने से बचें. जुलूस के समय जीई रोड पर आजाद चौक से आश्रम तिराहा- चौबे कॉलोनी तक मुख्य मार्ग के सभी संपर्क मार्गों से GE रोड पर आने वाले सभी वाहनों को डाइवर्ट किया जाएगा. पुलिस की अपील है कि दोपहर 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक जीई रोड में शास्त्री चौक से चौबे कॉलोनी टर्निंग तक का उपयोग न करें.

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ विजेताओं को 26 जून को वितरित होंगे उपहार

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ विजेताओं को 26 जून को वितरित होंगे उपहार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे नवीन लोगो का विमोचन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे प्रेस वार्ता को संबोधित

रायपुर
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 के अंतर्गत लक्की ड्रॉ में चयनित हितग्राहियों को उपहार वितरण समारोह 26 जून 2026 को न्यू सर्किट हाउस परिसर, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा। इसी अवसर पर मंडल के नवीन लोगो का भी विमोचन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा 23 नवम्बर 2025 से 31 दिसम्बर 2025 तक विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों के लिए 22 जून 2026 को विशेष लक्की ड्रॉ आयोजित किया गया था। इस ड्रॉ में विजेताओं का चयन मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन सहित अनेक आकर्षक उपहारों के लिए किया गया है।

Electricity Bill Rule: 1 जुलाई से बदलेंगे बिजली बिल के नियम, जेब पर बढ़ेगा बोझ; लेट फीस में मिलेगी राहत

रायपुर
छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली बिल भुगतान और टैरिफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब बिजली बिल देर से जमा करने पर पूरे महीने का जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि जितने दिन की देरी होगी, उसी हिसाब से लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाएगा।

अब तक उपभोक्ताओं को बिजली बिल की निर्धारित तिथि निकलने के बाद डेढ़ प्रतिशत प्रतिमाह की दर से सरचार्ज देना पड़ता था। ऐसे में एक-दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। लेकिन 1 जुलाई से लागू होने वाले नए नियम के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।

प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा जुर्माना
नई व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल देर से जमा करने पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो ड्यू डेट के कुछ दिन बाद बिल जमा करते हैं।

बिजली दरों में भी बढ़ोतरी
एक तरफ जहां लेट पेमेंट नियम में राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। नए टैरिफ के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। इसके चलते मासिक बिजली बिल में लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है।

कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी असर
नए टैरिफ के तहत कमर्शियल श्रेणी में भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्थानीय निकायों और सरकारी कार्यालयों को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। गैर-सब्सिडी कृषि पंपों को ऊर्जा प्रभार में 40 प्रतिशत तक की छूट दी गई है।

राहत भी, बढ़ा खर्च भी
नई व्यवस्था से देर से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण नियमित बिलों का खर्च बढ़ सकता है। विभाग का दावा है कि यह बदलाव बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

CISF में बड़ा फेरबदल, नागेंद्र नाथ का NCR ट्रांसफर; भिलाई में चंदन झा के DIG बनने की चर्चा तेज

बोकारो
 Steel Authority Of India Limited (SAIL) की महत्वपूर्ण इकाई में Bhilai Steel Plant में हुए करोड़ाे रुपये की स्क्रैप चोरी की घटना के बाद CISF HQ Bhilai के CISF DIG नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी का तबादला NCR Delhi HQ में कर दिया गया है। एनएन त्रिपाठी 2009 बैंच के पश्चिम बंगाल कैडर के आइपीएस अधिकारी है तथा वर्तमान समय में सीआइएसएफ में प्रतिनियुक्ति के आधार पर डीआइजी के पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं।

त्रिपाठी की जगह फिलहाल किसी अधिकारी की पोस्टिंग भिलाई स्टील में नही की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है की हाल ही में झारखंड कैडर से सीआइएसएफ में प्रतिनियुक्ति पर गए बोकारो के पूर्व एसपी चंदन झा को इस इकाई की कमान बतौर डीआइजी पद पर मिल सकती है।

वहीं, भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत उप कमांडेंट निधि सिंह को भी यहां से स्थानांतरित करते हुए केओपीए कोलकाता इकाई भेजा गया है। जबकि सेल के इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र यूनिट के डीआइजी एलके हाकिप का तबादला कोलकाता एयरपोर्ट में कर दिया गया है।

उनकी जगह नागपुर एयरपोर्ट में सीनियर कमांडेंट के पद पर कार्यरत दिलीप कुमार को डीआइजी बनाते हुए इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र के सुरक्षा की नई जिम्मेवारी सौंपी गई है।

 

पद अधिकारी का नाम वर्तमान पदस्थापना नई पदस्थापना
डीआईजी अपूर्ण पाण्डेय अहमदाबाद एयरपोर्ट दिल्ली मुख्यालय
डीआईजी विनोद कुमार चौरसिया नॉर्थ ईस्ट जोन, गुवाहाटी मुख्यालय अहमदाबाद एयरपोर्ट
डीआईजी अजय कुमार खंडेलवाल साउथ जोन, चेन्नई मुख्यालय नॉर्थ ईस्ट जोन, गुवाहाटी मुख्यालय
डीआईजी अजय कुमार कोलकाता एयरपोर्ट हैदराबाद एयरपोर्ट
सीनियर कमांडेंट विपिन कुमार तोमर सलाल इकाई एसएसजी, नोएडा
सीनियर कमांडेंट वैभव कुमार दूबे ताज महल, आगरा रिजर्व बटालियन, भिलाई
सीनियर कमांडेंट बिरेन्द्र कुमार तिवारी रिजर्व बटालियन, जयपुर रिजर्व बटालियन, किश्तवाड़
सीनियर कमांडेंट दीपक कुमार रिजर्व बटालियन, भिलाई सलाल इकाई
उप कमांडेंट रोहन गोवा एयरपोर्ट रायपुर एयरपोर्ट
उप कमांडेंट हकीम आसिफ कोयम्बटूर एयरपोर्ट नेशनल म्यूजियम, नई दिल्ली
उप कमांडेंट दुर्गेश चंद्र शुक्ला टिहरी बड़ोदरा एयरपोर्ट
उप कमांडेंट एस. गौतम NISA, हैदराबाद कोयम्बटूर एयरपोर्ट

सीआईएसएफ में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों की सूची

वर्तमान पद अधिकारी का नाम पदोन्नति के बाद पद वर्तमान पदस्थापना नई पदस्थापना
डीआईजी शिव कुमार आईजी हैदराबाद एयरपोर्ट नॉर्थ ईस्ट सेक्टर, कोलकाता मुख्यालय
सीनियर कमांडेंट सी. अमोल डीआईजी आरटीसी, बरवा
सीनियर कमांडेंट राजेश डीआईजी मुंडली मुख्यालय
कमांडेंट गौरव तोमर सीनियर कमांडेंट
कमांडेंट लक्ष्मीनारायण चौधरी सीनियर कमांडेंट
कमांडेंट एस. वेंटलॉग सीनियर कमांडेंट
उप कमांडेंट मनिंदर सिंह कमांडेंट रायपुर एयरपोर्ट नागपुर एयरपोर्ट
उप कमांडेंट ऋषि कौशिक कमांडेंट नेशनल म्यूजियम, नई दिल्ली ताज महल, आगरा
उप कमांडेंट कृष्ण प्रकाश कमांडेंट बड़ोदरा एयरपोर्ट भोगापुरम एयरपोर्ट, आंध्र प्रदेश

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार किसानों को निर्धारित दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सरगुजा जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अंबिकापुर के नेहरूनगर (डीगमा) स्थित एक उर्वरक विक्रय केंद्र पर औचक निरीक्षण कर 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए हैं तथा विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक कृषक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी कि नेहरूनगर (डीगमा) स्थित मेसर्स सरगुजा कृषि राय केंद्र द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरकों का विक्रय किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच प्रारंभ की।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता किसान के बयान एवं ऑनलाइन भुगतान से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय किए जाने की पुष्टि होने पर जिला स्तरीय टीम ने 25 जून को संबंधित प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान परिसर में उपलब्ध 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए तथा संपूर्ण विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया। कृषि विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जिले के उर्वरक विक्रेताओं में स्पष्ट संदेश गया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्रवाई के दौरान सहायक संचालक कृषिकुंवर साय पैंकरा, उर्वरक निरीक्षकजे. आलम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारीसीताराम भगत सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध आगे भी लगातार निरीक्षण एवं कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अनियमितता की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 अथवा कृषि विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

भोपाल में व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क खत्म होने की जगी उम्मीद

भोपाल, 25 जून। राजधानी के व्यापारियों को व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन से मुलाकात कर भोपाल में लागू व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क को समाप्त करने की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि मध्यप्रदेश के अन्य किसी भी नगरीय निकाय में यह शुल्क लागू नहीं है, जबकि केवल भोपाल के व्यापारियों पर इसका भार डाला जा रहा है।

नगर निगम आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित दस्तावेजों और शासन के आदेशों का अध्ययन कर विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

‘एक प्रदेश, दो कानून’ जैसी स्थिति : चेंबर

बैठक के दौरान भोपाल चेंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क केवल भोपाल में लागू होना व्यापारियों के साथ असमानता है। उन्होंने बताया कि चेंबर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक संगठनों में शामिल है और इसके सदस्य बड़े उद्योगपति, उद्यमी तथा व्यापारी हैं, जिनकी ओर से यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।

उन्होंने आयुक्त से आग्रह किया कि व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने और कारोबारियों को राहत देने के लिए इस शुल्क को तत्काल समाप्त किया जाए।

2023 में प्रदेशभर में स्थगित हुआ, लेकिन भोपाल में जारी

भोपाल चेंबर के संचालक एवं समिति संयोजक अनिल चुग ने बैठक में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 21 अप्रैल 2023 को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क लागू किया गया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध और विभिन्न विसंगतियों को देखते हुए 25 अप्रैल 2023 को इसे पूरे प्रदेश में स्थगित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भोपाल में यह शुल्क प्रभावी बना हुआ है, जिससे “एक प्रदेश–दो कानून” जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने इसे व्यापारियों के साथ अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग दोहराई।

नगर निगम आयुक्त ने दिया सकारात्मक संकेत

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क से जुड़े सभी दस्तावेजों, नियमों और शासन के आदेशों का अध्ययन करेंगी। उन्होंने कहा कि विषय की विस्तृत समीक्षा के बाद इसके निराकरण और संभावित समाप्ति के संबंध में सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे।

आयुक्त के इस आश्वासन के बाद व्यापारी वर्ग में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित यह मुद्दा जल्द सुलझ सकता है।

व्यापारियों की आवाज लगातार उठा रहा है चेंबर

गोविंद गोयल ने बताया कि भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रयासरत है। चेंबर द्वारा प्रदेश के सांसदों, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री, भोपाल की महापौर, विभिन्न विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ज्ञापन और पत्र सौंपे गए हैं।

उन्होंने कहा कि व्यापारिक संगठनों की राय है कि यदि यह शुल्क समाप्त होता है तो कारोबारियों को राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध : गोयल

बैठक के बाद गोविंद गोयल ने कहा कि भोपाल चेंबर सदैव व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी इसी दिशा में कार्य करता रहेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन व्यापारियों की समस्याओं को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेगा।

प्रतिनिधिमंडल में ये सदस्य रहे शामिल

नगर निगम आयुक्त से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में गोविंद गोयल के अलावा सुनील जैन (जैनाविन), अजय देवनानी, वात्स्यायन जैन (सोनू भाभा), अनिल चुग, अनिल मिश्रा, आदित्य सिंघई और मनोज नागरानी भी शामिल रहे।

व्यापारियों की प्रमुख मांगें

  • भोपाल नगर निगम द्वारा लगाए गए व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क को तत्काल समाप्त किया जाए।
  • प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों की तरह भोपाल के व्यापारियों को भी समान राहत मिले।
  • व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए कर संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए।
  • “एक प्रदेश–दो कानून” जैसी स्थिति समाप्त कर पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था लागू की जाए।

क्या बोले आयुक्त?

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क से संबंधित सभी दस्तावेजों और शासन के आदेशों का अध्ययन करने के बाद विषय पर उचित और सकारात्मक कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।

MP कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 300 EL का मिलेगा पैसा; सरकार ने जारी किया कैलकुलेशन फॉर्मूला

भोपाल 

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव इनकैशमेंट राशि को लेकर आदेश जारी किया है। अब कर्मचारी रिटायरमेंट या ड्यूटी के दौरान मौत की स्थिति में मिलने वाली छुट्टी लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान खुद लगा सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों, कार्यालयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है।

सरकार के फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से अवकाश नकदीकरण की गणना को लेकर अलग-अलग विभागों में भ्रम और विवाद की स्थिति बनती रही है। नए निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू होगी।

अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड रखने के निर्देश
वित्त विभाग के आदेश में सभी विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अवकाश नकदीकरण की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए।

भुगतान के समय एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी न हो और गणना में गलतियां न हों।

अधिकतम 300 दिन के अवकाश का मिलेगा भुगतान
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण लाभ दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के खाते में 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश मौजूद है, तब भी भुगतान केवल 300 दिनों तक ही सीमित रहेगा।

पहले लाभ लिया है तो घटेंगे उतने दिन
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी पहले किसी अवसर पर अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ ले चुका है, तो जितने दिनों का लाभ पहले लिया गया है, उसे 300 दिनों की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा। कर्मचारी को कुल मिलाकर 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं मिल सकेगा।

कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
    नए आदेश के बाद सरकारी कर्मचारियों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।
    कर्मचारी पहले से अपनी संभावित लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान लगा सकेंगे।
    विभागों में गणना को लेकर होने वाली गलतियों में कमी आएगी।
    भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे।
    सभी विभागों में एक समान नियम और प्रक्रिया लागू होगी।
    रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की पारदर्शिता बढ़ेगी।

ईएल इनकैशमेंट पर पारदर्शी लाना
राज्य सरकार का कहना है कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अर्जित अवकाश नकदीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और एकरूप बनाना है। अलग-अलग विभागों में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण कई बार कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब वित्त विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी।

क्या होता है लीव इनकैशमेंट
सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। कई कर्मचारी अपने पूरे अर्जित अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके खाते में बड़ी संख्या में छुट्टी बचे रह जाते हैं।

जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तब उसके खाते में बचे हुए ईएल के बदले सरकार नकद भुगतान करती है। इसी भुगतान को अवकाश नकदीकरण या लीव इनकैशमेंट कहा जाता है। यह राशि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई मामलों में यह लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।

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