65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नितिका आकरे ने जीता कांस्य पदक

भोपाल 

मध्यप्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित एथलेटिक्स अकादमी की प्रतिभावान खिलाड़ी नितिका आकरे ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को गौरवान्वित किया है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन सायंकालीन सत्र में आयोजित महिला पोल वॉल्ट स्पर्धा में नितिका ने 4.10 मीटर की ऊंचाई पार कर कांस्य पदक अर्जित किया।

एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफा

नितिका आकरे ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर एशियाई खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफिकेशन मानक भी हासिल कर लिया। महिला पोल वॉल्ट स्पर्धा में कुल तीन खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया, जिनमें नितिका भी शामिल रहीं। यह उपलब्धि उनकी निरंतर मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का परिणाम है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने के साथ एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं की बढ़ती क्षमता और खेल अकादमियों में उपलब्ध उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था को दर्शाता है। नितिका की यह सफलता प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है।

खेल मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने नितिका आकरे को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नितिका आगामी एशियाई खेलों में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए मिसाल बनी नितिका

नितिका आकरे की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों, विशेषकर महिला एथलीटों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के साथ राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

 

आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, 2 हजार मीसाबंदी परिवारों का होगा सम्मान

भोपाल

भोपाल के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में आपातकाल दिवस के अवसर पर आज  शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे।कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक के साथ-साथ आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शिरकत करेंगे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं मीसाबंदियों तथा उनके परिजनों को मंच से सम्मानित करेंगे, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्ष और बलिदान के प्रति सरकार की कृतज्ञता को प्रकट करेगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान वे आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों को सम्मानित करेंगे।

लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद
समारोह में आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों के योगदान और बलिदान को याद किया जाएगा। राज्य सरकार उनके संघर्ष के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मंच से सम्मान प्रदान करेगी।

2000 परिवारों की रहेगी मौजूदगी
कार्यक्रम में प्रदेशभर से करीब 2000 मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। आयोजन का उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए त्याग और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे। 

25 जून 1975 को लगा था आपातकाल
उल्लेखनीय है कि देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किया गया था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय के 50 वर्ष पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम भी उसी श्रृंखला का हिस्सा होगा, जिसमें लोकतंत्र सेनानियों को विशेष सम्मान दिया जाएगा।

25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

क्या है आपातकाल दिवस ?
आपातकाल दिवस भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के उस सबसे काले अध्याय की याद दिलाता है, जिसकी शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान हुई थी। 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आधिकारिक रूप से आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की गई थी, जो 21 महीनों तक यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रही।

इस दौरान भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस और मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी, और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी मुकदमे के जेलों में डाल दिया गया था।

MP में फिर शुरू होंगे प्रमोशन! 4.50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा लाभ

भोपाल 

मध्यप्रदेश के सरकारी सेवकों के लिए अच्छी खबर आई है। प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारियों की 10 साल से अटकी पदोन्नति की प्रक्रिया 10-15 दिन में शुरू हो सकती है। राज्य सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। पदोन्नति की प्रक्रिया में बाधा बन रहे कानूनी मसले को सुलझाने के लिए अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी परामर्श लिया गया है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जबलपुर के अलावा दिल्ली के वरिष्ठ वकीलों और विधि विशेषज्ञों की राय ली है। संबंधित अधिकारियों ने सलाह के आधार पर ही मसौदा तैयार किया है। सीएम मोहन यादव CM Mohan Yadav ने 2016 से बंद पदोन्नति चालू करने का 2025 में ऐलान किया था। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 4.50 लाख सरकारी सेवकों को फायदा होगा। कर्मचारियों, अधिकारियों के प्रमोशन से कई पद भी खाली होंगे जिनपर युवाओं को भर्ती के मौके मिलेंगे।

सरकार ने अलग से अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, भारसाधक सचिवों व विभागाध्यक्षों को मौखिक रूप से पदोन्नति शुरू करने को कहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, अधिकारियों के पदोन्नत होने से करीब दो लाख पद खाली होने की उम्मीद है। इससे युवाओं की नौकरी का रास्ता साफ होगा।

प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों से कहा कि वर्षों पुराने बने गैर जरूरी कानूनों को खत्म करने पर काम करें। वे गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नरों संग वीसी करेंगे, उसके लिए सभी विभाग प्रमुखों को तैयार रहने के लिए कहा है।

प्रदेश में 10 साल से पदोन्नतियों पर रोक लगी है, 2016 मई से पदोन्नति बंद
बता दें कि प्रदेश में 10 साल से पदोन्नतियों पर रोक लगी है, 2016 मई से पदोन्नति बंद है। इससे कर्मचारी, अधिकारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर्ड हो रहे हैं। अभी तक लाखों सरकारी सेवक रिटायर्ड हो चुके हैं। सीएम मोहन यादव ने पिछले साल प्रदेश के कर्मचारियों, अधिकारियों के हित में पदोन्नतियां देने की घोषणा की थी। तब से इस संबंध में अनेक बैठकें हो चुकी हैं।

17 जून को कैबिनेट ने मप्र लोकसेवा पदोन्नति नियम- 2025 को मंजूरी दी। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारी, कोर्ट केस प्राथमिकता से निराकृत करने, केंद्र-राज्य के काम को गंभीरता से करने, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का निपटारा करने के लिए कहा। बताते हैं, बैठक में पदोन्नति संबंधी बात भी कही।

10 साल में ऐसे हालात
2016 मई से प्रदेश में पदोन्नति बंद है।
10 साल से बिना पदोन्नति ही रिटायर्ड हो रहे कर्मचारी
2026 मई तक लाखों सरकारी सेवक रिटायर्ड हुए
सीएम यादव ने पदोन्नति देने की घोषणा की
2025 में बंद पदोन्नति चालू करने का किया ऐलान
10 दिन में शुरु करने की कवायद
4.50 लाख सरकारी सेवकों को फायदा
पदोन्न्ति से दो लाख पद खाली होंगे
युवाओं की नौकरी का रास्ता साफ होगा

सिंगापुर में फंसे सैकड़ों भारतीय कामगार, कंपनियों पर सैलरी और आवास हड़पने के आरोप

 नई दिल्ली

सिंगापुर में भारतीय हाई कमीशन ने शाम को कहा कि वे सिंगापुर की उन तीन कंपनियों के कर्मचारियों के संपर्क में हैं, जिन्हें महीनों से सैलरी नहीं मिली है. वे ‘नेशनल ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस’ और ‘मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर’ के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं, जो प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं. SK इंडस्ट्रीज, KPA इंजीनियरिंग और VVR प्लांट इंजीनियरिंग ने भारत और बांग्लादेश के 400 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना वेतन और रहने की जगह के छोड़ दिया है। 

 रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों कंपनियों के एक कॉमन डायरेक्टर की पहचान भारतीय नागरिक रामू पलानी वेलु के तौर पर हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंगापुर के स्थायी निवासी रामू के बारे में माना जा रहा है कि वे देश छोड़कर चले गए हैं। 

कॉर्पोरेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘सयारी’ की जांच से पता चला है कि वे सिंगापुर में सात कंपनियों के डायरेक्टर हैं, जो एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग और बिल्डिंग से जुड़ी सेवाएं देती हैं।

मजदूरों को दिए गए शॉपिंग वाउचर
NTUC के सेक्रेटरी-जनरल एनजी ची मेंग, माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर के प्रतिनिधि और मैनपावर राज्य मंत्री दिनेश वासु डैश ने बुधवार को मजदूरों से मुलाकात की और उन्हें मदद का भरोसा दिलाया. मजदूरों को SGD200 नकद और सुपरमार्केट शॉपिंग वाउचर दिए जा रहे हैं. इसके साथ ही, उनके रहने के लिए दूसरी जगह का इंतजाम किया जा रहा है और उन्हें नौकरी दिलाने की कोशिशें भी चल रही हैं। 

जिन प्रवासी मजदूरों को वेतन नहीं मिला था, उन्होंने सोमवार को मैनपावर मंत्रालय को इस मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वे एयर-कंडीशनिंग मेंटेनेंस सर्विस देने वाली KPA इंजीनियरिंग और उससे जुड़ी कंपनी SK Industries में अपने मालिकों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. एनजी ने कहा कि ‘ट्राइपार्टाइट अलायंस फॉर डिस्प्यूट मैनेजमेंट’ और ट्राइपार्टाइट पार्टनर इस मामले से जुड़े मालिकों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, रामू ने 2025 में VVR प्लांट इंजीनियरिंग का कामकाज संभाला. इससे पहले यह कंपनी भारतीय नागरिक रवि विक्टर और रवि विजयारानी, ​​और उनके सिंगापुर में रहने वाले बेटे रवि मार्टिन अब्राहम की थी. 23 साल के मार्टिन ने बताया कि परिवार ने यह कंपनी रामू को बेच दी थी. उन्होंने कहा, ‘नई कंपनियों के लिए परमिट मिलना आसान नहीं है, इसलिए हमें लगा कि उन्होंने इसी वजह से हमारा पारिवारिक बिजनेस खरीदा है। 

इस कंपनी को काफी कीमती माना जाता था क्योंकि इसके पास खास प्रोसेस सेक्टर के लिए वर्क परमिट थे, जिनसे जुरोंग आइलैंड जैसी जगहों पर प्रोसेस कंस्ट्रक्शन और मेंटेनेंस का काम किया जा सकता है। 

रामू ने साल 2014 में अपना पहला बिजनेस KPA इंजीनियरिंग शुरू किया था और आखिरी बार इसकी कैपिटल SGD 1 मिलियन दर्ज की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नागरिक सुंदरमूर्ति कोमथी ने 2016 से 2018 के बीच रामू के साथ कंपनी डायरेक्टर के तौर पर काम किया.  उनके जाने के बाद कृष्णमूर्ति सुंदरमूर्ति 2020 में डायरेक्टर बने और अभी भी एक्टिव डायरेक्टर हैं। KPA इंजीनियरिंग में काम करने वाले सैम ने बताया कि कर्मचारी रामू को ‘बिग बॉस’ के तौर पर जानते थे, जबकि रोजमर्रा का कामकाज मूर्ति नाम का एक भारतीय नागरिक संभालता था. सैम ने कहा, ‘हम मूर्ति से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया है। 

साल 2019 में रामू ने SGD 100,000 की रजिस्टर्ड कैपिटल के साथ ‘कम्फर्ट एयर इंजीनियरिंग’ शुरू की और वह इसके अकेले डायरेक्टर हैं. साल 2023 में, उन्होंने SGD200,000 की कैपिटल के साथ ‘SK इंडस्ट्रीज’ रजिस्टर की और इसके भी अकेले डायरेक्टर हैं, जबकि सुंदरमूर्ति कोमथी इसके शेयरहोल्डर हैं। 

साल 2025 में रामू ने एक ही दिन में तीन और कंपनियां रजिस्टर कीं- KMS इंटीग्रेटेड, GM इंटीग्रेटेड और HVS इंडस्ट्रीज. वे इन तीनों के अकेले डायरेक्टर हैं. KMS को SGD100,000 की कैपिटल के साथ रजिस्टर किया गया था, जबकि GM और HVS में से हर एक की कैपिटल SGD10,000 थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर ने इशारा किया है कि वह नियमों के संभावित उल्लंघन के लिए KPA इंजीनियरिंग और SK इंडस्ट्रीज की जांच कर रही है. यह मामला 400 से ज्याजा ऐसे कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्हें बिना सैलरी और रहने की जगह के छोड़ दिया गया था. अब भारत और सिंगापुर के अधिकारी, ट्रेड यूनियन और वर्कर ग्रुप उनकी मदद करने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। 

 

‘पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं’ : बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले ने साफ की कानूनी स्थिति

मुंबई 

भारतीय नागरिकता के प्रमाण को लेकर चल रही बहस के बीच एक बार फिर यह सवाल केंद्र में आ गया है कि आखिर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय करने का अंतिम आधार क्या है. कानूनी सूत्रों और उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार, भारत में नागरिकता से जुड़े सवालों के निपटारे के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 ही मुख्य और कानून है. यही कानून तय करता है कि कौन भारतीय नागरिक हो सकता है, किन आधारों पर नागरिकता प्राप्त की जा सकती है और किन परिस्थितियों में नागरिकता समाप्त भी हो सकती है. बॉम्‍बे हाईकोर्ट 13 साल पुराने एक मामले में भारतीय पासपोर्ट और इंडियन सिटिजनशिप पर बड़ा फैसला दिया था। 

सूत्रों के मुताबिक, आम धारणा के विपरीत पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज अपने आप में किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं हैं. इन दस्तावेजों का अपना प्रशासनिक और वैधानिक महत्व जरूर है, लेकिन इनका उद्देश्य मुख्य रूप से ट्रैवल की अनुमति देना, पहचान स्थापित करना, कर व्यवस्था, कल्याणकारी सेवाओं का लाभ या चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना है. नागरिकता का सवाल इन दस्तावेजों से ऊपर उठकर नागरिकता अधिनियम, 1955 में निर्धारित कानूनी कसौटियों पर तय होता है। 

क्‍या है एक्‍सपर्ट की राय?
जानकारों का कहना है कि नागरिकता अधिनियम भारत में राष्ट्रीयता के प्रश्न पर सबसे महत्वपूर्ण कानून है. इसके तहत नागरिकता जन्म, वंश, रजिस्‍ट्रेशन, नैचुरलाइजेशन और किसी क्षेत्र के भारत में विलय जैसे विभिन्न आधारों पर प्राप्त की जा सकती है. साथ ही यह कानून यह भी स्पष्ट करता है कि कौन सी श्रेणियां ऐसी हैं, जिन्हें नागरिकता पाने के अधिकार से बाहर रखा गया है. खासतौर पर अवैध प्रवासी यानी ऐसे लोग जो बिना वैलिड दस्तावेज या कानूनी अनुमति के भारत में आए हों या तय शर्तों का उल्लंघन करते हुए यहां रह रहे हों, उनके लिए नागरिकता प्राप्त करने के अधिकांश रास्ते बंद हैं। 

गैर-नागरिकों को भी मिल चुका है पासपोर्ट?
सूत्रों के अनुसार, कानून में नागरिक और अवैध प्रवासी के बीच यह स्पष्ट विभाजन महज तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा विषय है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों के लिए निर्धारित संवैधानिक अधिकारों, सरकारी लाभों और कानूनी सुरक्षा का अनुचित इस्तेमाल ऐसे लोग न कर सकें, जिनके पास भारत में रहने का वैध आधार ही नहीं है. इसी संदर्भ में पासपोर्ट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है. सूत्रों का कहना है कि पासपोर्ट को भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना कोई नया फैसला नहीं है. यह न तो हाल में लिया गया कोई निर्णय है और न ही पिछले कुछ वर्षों में बदली हुई व्याख्या. कानूनी रूप से पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं रहा है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में भी ऐसे प्रावधानों का उल्लेख मिलता है, जिनके तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। 

बॉम्‍बे हाईकोर्ट का 13 साल पुराना फैसला
सूत्रों का कहना है कि 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कहा था कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. इस पृष्ठभूमि में यह समझना महत्वपूर्ण है कि पासपोर्ट, आधार, पैन या वोटर आईडी जैसे दस्तावेज किसी व्यक्ति की पहचान, निवास, करदाता स्थिति या चुनावी पंजीकरण को दर्शा सकते हैं, लेकिन नागरिकता का अंतिम परीक्षण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही होगा. ऐसे में नागरिकता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कानूनी स्थिति यही है कि भारत में नागरिकता का निर्धारण भावनात्मक या दस्तावेजों की सामान्य उपलब्धता से नहीं, बल्कि विधि द्वारा निर्धारित शर्तों और प्रमाणों के आधार पर किया जाएगा. यही वजह है कि नागरिकता के मुद्दे पर किसी भी दावे की जांच में मूल कानून और उसके तहत तय मानदंडों को ही सर्वोपरि माना जाता है। 

AMCA प्रोजेक्ट में नया संकट, अमेरिकी इंजन की कीमत दोगुनी से ज्यादा; दूसरे विकल्प की तलाश

 नई दिल्ली

भारत का महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट नई मुश्किल में फंस गया है. अमेरिका की GE एयरोस्पेस कंपनी का F414 इंजन, जो AMCA Mk-1 और तेजस Mk-2 दोनों के लिए चुना गया था, अब महंगा हो गया है. पहले एक इंजन की कीमत करीब 70-80 करोड़ रुपये थी, जो अब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है। 

यह बढ़ोतरी DRDO और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के लिए बड़ी चिंता बन गई है. तकनीकी बातचीत में प्रगति हुई थी, लेकिन कीमत, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोडक्शन और निवेश जैसे व्यावसायिक मुद्दों पर गतिरोध है. GE ने भारत में F414 इंजन की असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6000 करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश की मांग की गई है। 

F414 इंजन मूल रूप से तेजस Mk-2 के लिए चुना गया था. AMCA Mk-1 के शुरुआती संस्करणों के लिए अंतरिम इंजन के रूप में रखा गया है. योजना के अनुसार पहले 2-4 स्क्वॉड्रनों में यह इंजन लगेगा. बाद में ज्यादा शक्तिशाली स्वदेशी इंजन आएगा. AMCA ट्विन इंजन वाला स्टेल्थ फाइटर है, इसलिए प्रोटोटाइप में 5 प्रोटोटाइप्स के लिए करीब 15 इंजनों की जरूरत पड़ेगी। 

कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने प्रोटोटाइप विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए हैं. उड़ान परीक्षण में 1800 सॉर्टीज और सात साल लगेंगे. इंजन की समस्या से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। 

GE के साथ समझौते की चुनौतियां
GE F414 पर भारत और अमेरिका के बीच मोदी और बाइडेन के समय मजबूत राजनीतिक समर्थन मिला था. HAL और GE के बीच MoU को रक्षा सहयोग की बड़ी उपलब्धि माना गया. लेकिन व्यावसायिक बातचीत जटिल हो गई है. GE की फैक्ट्री न सिर्फ AMCA बल्कि तेजस Mk-2 और ट्विन इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) की जरूरतें भी पूरी कर सकती है। 

फिर भी कीमत में अचानक वृद्धि और निवेश की ऊंची मांग ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है. कुछ चर्चाओं में शुरुआती इंजन खरीद की संख्या घटाने पर भी विचार हुआ, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 

विकल्पों की तलाश: सैफ्रान और रोल्स-रॉयस
अब भारतीय एजेंसियां विकल्प देख रही हैं. फ्रांस की सैफ्रान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस कंपनियां पहले भी भारत के साथ इंजन विकास में साझेदारी के लिए इच्छुक रही हैं. दोनों कंपनियां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक सहयोग का बेहतर प्रस्ताव दे सकती हैं।  

हालांकि इंजन बदलना आसान नहीं है क्योंकि यह उड़ान नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, परीक्षण और परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है. एयरफ्रेम डिजाइन लगभग फाइनल हो चुका है, इसलिए नया इंजन अनुकूलित करना पड़ेगा, पूरी डिजाइन नहीं बदलनी होगी। 

तेजस Mk-1A पहले ही इंजन सप्लाई की समस्या से देरी झेल रहा है. AMCA में भी यही समस्या समयरेखा प्रभावित कर सकती है. यह कार्यक्रम भारत की स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की स्टेल्थ तकनीक हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को मजबूत वार्ता करनी चाहिए. अगर GE से समझौता नहीं होता तो विकल्पों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा. AMCA की सफलता न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक बनाने में भी मदद करेगी। 

वर्तमान में तीन निजी कंपनियों – टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T-BEL और भारत फोर्ज-BEML को प्रोटोटाइप विकास के लिए RFP जारी किए गए हैं. इंजन मुद्दे का जल्द समाधान AMCA कार्यक्रम की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। 

देश के बड़े शहरों में खत्म हो रही जमीन, बढ़ती आबादी के बीच कहां रहेंगे लोग?

 नई दिल्ली

पिछले कुछ दशकों में भारत की तस्वीर तेजी से बदली है, कभी गांवों का देश कहा जाने वाले भारत की एक बहुत बड़ी आबादी रोजगार, बेहतर शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली की तलाश में शहरों का रुख कर चुकी है, लेकिन इस सामूहिक पलायन ने एक गंभीर और डरावने सवाल को जन्म दे दिया है, जब शहरों में ज़मीन सीमित है, तो आने वाले समय में ये लोग रहेंगे कहां रहेंगे। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2030 तक भारत की 40% से अधिक आबादी शहरों में रह रही होगी, इतनी बड़ी आबादी का दबाव झेलने के लिए हमारे शहरों के पास पर्याप्त जगह ही नहीं बची है. ज़मीन का यह संकट अब केवल एक अंदेशा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है। 

देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र इस समय ज़मीन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. मुंबई भौगोलिक रूप से तीन तरफ से पानी से घिरा है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि मुंबई के पास अब हॉरिजॉन्टल विस्तार के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं बचा है. यही वजह है कि यहां झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ी और रीडेवलपमेंट ही एकमात्र रास्ता रह गया. जमीन की कमी के कारण मुंबई भारत का सबसे महंगा और घना शहर बन चुका है। 

नोएडा में जमीन खत्म होने के कगार पर 
दिल्ली-NCR का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन माना जाने वाला नोएडा भी अब इसी संकट के मुहाने पर खड़ा है. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और नोएडा अथॉरिटी की बैठकों से यह साफ हुआ है कि मूल नोएडा (Noida Master Plan 2031 के तहत) में अब नया अलॉटमेंट करने के लिए ज़मीन लगभग खत्म हो चुकी है. औद्योगिक, कमर्शियल और आवासीय प्लॉट्स के लिए अथॉरिटी के पास जगह नहीं बची है. यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश सरकार को ‘न्यू नोएडा’ (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इनवेस्टमेंट रीजन) बसाने के लिए मास्टर प्लान 2041 को मंजूरी देनी पड़ी है, जिसके तहत बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। 

क्या है इसका विकल्प? 
जब ज़मीन खत्म हो रही हो, तो शहरों के पास फैलने का नहीं, बल्कि ऊपर उठने का ही विकल्प बचता है, आने वाले समय में शहरी आबादी पूरी तरह से हाईराइज इमारतों और वर्टिकल लिविंग पर निर्भर हो जाएगी. आने वाले समय में सरकारें FSI यानी ज़मीन के मुकाबले कितनी ऊंची इमारत बनाई जा सकती है के नियमों को और ढीला करेंगी, जहां पहले 4 से 5 मंजिला इमारतें बनती थीं, अब 40 से 50 मंजिला आवासीय टावर आम हो जाएंगे, एक ही एकड़ ज़मीन पर अब 50 परिवारों के बजाय 500 परिवार रह सकेंगे। 

भविष्य के शहर हाईराइज सोसायटियों के अंदर सिमट जाएंगे. इन्हें ‘वर्टिकल विलेज’ कहा जाता है, जहां एक ही गगनचुंबी इमारत या परिसर के भीतर पार्क, जिम, स्विमिंग पूल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और यहां तक कि स्कूल-अस्पताल भी मौजूद होंगे. लोगों की जमीन से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी. नोएडा की तर्ज पर अब हर बड़े शहर के पास जैसे न्यू नोएडा, नवी मुंबई, न्यू गुड़गांव बसाए जा रहे हैं. साथ ही रेलवे और मेट्रो स्टेशनों के आसपास हाई-डेंसिटी ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं ताकि लोग कम ज़मीन में रहकर सीधे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें। 

क्या हैं चुनौतियां?
बेशक हाईराइज इमारतें जमीन की कमी का समाधान हैं, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है. 50 मंजिला इमारत में रहने वाले लोगों के लिए पानी, बिजली और सीवरेज सिस्टम का मैनेजमेंट करना बेहद जटिल होता जा रहा है. कंक्रीट के इन ऊंचे जंगलों के कारण शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ बन रहे हैं, जिससे शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 3 से 5 डिग्री तक ज्यादा रहता है. भूकंप या आग लगने की स्थिति में इतनी ऊंची इमारतों से लोगों को सुरक्षित निकालना आज भी एक बड़ी चुनौती है। 

गांवों से शहरों की तरफ बढ़ता इंसानी सैलाब रुकने वाला नहीं है और जमीन को रबर की तरह खींचा नहीं जा सकता, इसलिए भविष्य के भारत को ‘आसमान’ में ही अपनी जगह ढूंढनी होगी। 

BRICS में PM मोदी की कूटनीतिक चाल, ट्रंप का पैंतरा पड़ा फीका; चीन भी बढ़ाना चाहता है दोस्ती का हाथ

नई दिल्ली
इस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप की डील और अमेरिका-ईरान की बातचीत पर चर्चा कर रही है.
लेकिन ग्लोबल पॉलिटिक्स की असली हलचल भारत में मची हुई है. ट्रंप की डील अब पूरी तरह कबाड़ होती दिख रही है. ईरान कुछ और कह रहा है और ट्रंप के बयान अलग आ रहे हैं. दुनिया यह तमाशा देख रही है कि अमेरिका में चल क्या रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ा ग्लोबल मैसेज दे दिया है. अमेरिका से ईरान हैंडल नहीं हो रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने चीन-अमेरिका और ईरान-इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को एक जगह ला दिया है. भारत अब इन सभी देशों के साथ बड़ी डील कर रहा है. नरेंद्र मोदी वह काम कर रहे हैं जो दुनिया में कोई सोच भी नहीं सकता. ग्लोबल पॉलिटिक्स का पूरा नैरेटिव अब भारत ने चेंज कर दिया है. मोदी ने भारत की डिप्लोमेसी को सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ा दिया है. दुनिया अब अमेरिका नहीं बल्कि भारत की तरफ देख रही है। 

ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका?
कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है। 

भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया। 

पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया। 

ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?
    अमेरिका में मध्‍यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं। 

    ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है। 

    ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है। 

चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया?
ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी। 

ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है। 

ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?

    ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है। 

    ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं। 

    उधर भारत इजराइल से भी अपने रिश्तों को लगातार और ज्यादा मजबूत कर रहा है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल के रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल से मिले. दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ज्वाइंट प्रोडक्शन पर अहम बातचीत हुई है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ इजराइल के साथ भारत का यह बैलेंस अमेरिका को हैरान कर रहा है। 

मोदी सरकार ने कौन सी विदेशी फंडिंग रोक दी जिससे इकोसिस्टम की कमर टूट गई?

नरेंद्र मोदी एक तरफ भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स के सेंटर में पूरी तरह ला रहे हैं. दूसरी तरफ मोदी उस इकोसिस्टम पर भी कड़ी स्ट्राइक कर रहे हैं जो सरकार गिराने का काम करता है. यह विदेशी इकोसिस्टम पीएम मोदी को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन मोदी सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने इस इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी है. सरकार ने विदेशी फंडिंग वाले कई बड़े एनजीओ के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं। 

देश में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए विदेशों से भारी फंडिंग आती थी. मोदी सरकार ने इस अवैध फंडिंग के पाइपलाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. विदेशी पैसे से चलने वाला सरकार गिराने का यह बड़ा ‘हथियार’ अब हमेशा के लिए निपट गया है. इसी वजह से इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम में अब भारी हंगामा मचा हुआ है. बिना विदेशी पैसे के यह गैंग अब भारत में अपना झूठा एजेंडा नहीं चला पा रहा है. भारत के खिलाफ काम करने वाले सभी संगठनों की फंडिंग पर अब सरकार की सख्त नजर है। 

एफएटीएफ के डर से पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं और यूएई को क्या चाहिए?
    डॉनल्ड ट्रंप ने ग्लोबल कूटनीति में अमेरिका का जो भरोसा था उसे पूरी तरह हिला दिया है. आज दुनिया भारत की तरफ एक भरोसेमंद और पावरफुल पार्टनर के रूप में देख रही है. पाकिस्तान से अपना मुल्क नहीं संभल रहा है और वह भारत पर अटैक करने की बातें करता है. पाकिस्तान बुरी तरह से अलबलाया हुआ है क्योंकि उसे भारत की ताकत का अंदाजा है. पाकिस्तान को डर है कि भारत कभी भी उस पर एक बड़ा मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है। 

    दूसरी तरफ एफएटीएफ की नंगी तलवार भी पाकिस्तान की गर्दन पर लगातार लटकी हुई है. एफएटीएफ की ग्लोबल मीटिंग में पाकिस्तान के टेरर फंडिंग को लेकर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. पाकिस्तान अगर आतंकवाद को पालेगा तो एफएटीएफ उसे फिर से अपनी ब्लैक लिस्ट में डाल देगा. भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान के सभी काले कारनामों के पक्के सबूत पेश करने की तैयारी कर चुका है.
    इधर गल्फ के देश अब डिफेंस के लिए अमेरिका की जगह भारत की तरफ देख रहे हैं. यूएई भारत से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए बहुत अहम बातचीत कर रहा है. यूएई को ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत का फुली ऑटोमेटेड आकाशतीर सिस्टम भी तुरंत चाहिए. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही ऑपरेशन सिंदूर में कमाल किया था और पाकिस्तान के एयरबेस फोड़ दिए थे। 

भारत का डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट किस तरह से दुनिया के रिकॉर्ड तोड़ रहा है?
भारत का डिफेंस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमा रहा है. भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को अपने हथियार बेच भी रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार ग्लोबल मंच पर भारत को एक पावरफुल मिलिट्री प्लेयर बना रहे हैं. भारत एक ऐसा देश बन गया है जिस पर अब पूरी दुनिया आंख बंद करके भरोसा कर सकती है. इसी भरोसे की वजह से इस साल कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं. इस साल अभी तक पीएम मोदी 27 ग्लोबल लीडर्स को भारत बुलाकर मीटिंग कर चुके हैं. यूरोपियन यूनियन के अलावा फ्रांस और जर्मनी के बड़े नेता भी भारत का चक्कर लगा चुके हैं। 

भारत का डिफेंस प्रोडक्शन आज के समय में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2013-14 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन सिर्फ 43746 करोड़ रुपये के करीब था. लेकिन साल 2025-26 में यह प्रोडक्शन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी अब पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़कर आसमान छू रहा है. साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. अब यह एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगाकर 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 

पाइल्स ऑपरेशन के दौरान 22 वर्षीय युवक की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

खरसिया

 यहां के सिविल अस्पताल में एक बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। अस्पताल के पास दो भाई चाय की स्टाल लगते थे। कुछ समय पहले छोटे भाई की तबीयत खराब होने पर खूनी दस्त होने लगी। इस पर पिता और भाई ने खरसिया सिविल अस्पताल में जांच कराकर परामर्श लिया।

पिता राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि छोटे बेटे ताम्रेश्वर शर्मा को खूनी दस्त होने पर खरसिया सिविल अस्पताल के डाक्टर विक्रम राठिया से जांच कराई। जांच के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की जरुरत बताई। इस पर पिता ने आपरेशन के लिए सहमति दे दी। गुरुवार ताम्रेश्वर को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

यहां जांच के बाद आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। पिता ऑपरेशन थियेटर के गेट पर अपने बेटे का आपरेशन पूरा होने का इंतजार करते रहे। कुछ समय बाद आपरेशन थिएटर से निकले डाक्टर और उनके सहयोगी नर्स ने पिता को बताया गया कि ताम्रेश्वर को होश नहीं आ रहा है उसे मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर किया जाएगा।

इसके बाद पिता मरीज को लेकर रायगढ़ पहुंचे। यहां बताया गया कि तम्रेश्वर की मौत खरसिया में ही हो गई थी। इस बात की जानकारी से परिजन आक्रोशित हुए और खरसिया अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे। नौजवान की मृत्यु से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया।

इसकी जानकारी होने पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति पर काबू पाने की कोशिश करती रही। पिता का आरोप है कि पुत्र की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही से हुई है। पुत्र को केवल पाइल्स की शिकायत थी। इसके आपरेशन से किसी की मृत्यु नहीं होती। 22 साल के युवक की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही के कारण हुई है।

खरसिया नगर कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने खरसिया सिविल अस्पताल में युवक की मृत्यु के विरोध में चक्का जाम को अपना समर्थन दिया।

पूर्व में किडनी कांड के लिप्त व्यक्ति को खरसिया सिविल अस्पताल का प्रभारी बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बवासीर के ऑपरेशन से युवक की मृत्यु की घटना ने सिविल अस्पताल की शाख को कलंकित किया है। ऐसे डाक्टरों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

 

शिक्षा से ही संवरता है भविष्य, संस्कारों से बनता है सशक्त समाज: मंत्रीराजेश अग्रवाल

रायपुर 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल आज लखनपुर में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पुष्प एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें अध्ययन सामग्री प्रदान कर नए शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर गया।

अपने संबोधन में मंत्रीराजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों के साथ अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, अनुशासन, शिक्षकों का सम्मान और माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मार्ग है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए पूरी निष्ठा एवं लगन से प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षक, प्रशासक और जनप्रतिनिधि बनकर देश एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा, ज्ञान और संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यही तीनों किसी भी विद्यार्थी की सफलता का मजबूत आधार बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासन का पालन करने, अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने तथा निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों का भी विकास करें, जबकि अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में निरंतर सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला है।

मंत्रीअग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी पूरे मनोयोग से अध्ययन कर अपने विद्यालय, परिवार, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में लुण्ड्रा विधायकप्रबोध मिंज, शिक्षकगण, अभिभावक, बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नवप्रवेशी विद्यार्थियों के सम्मान और सामूहिक सहभागिता ने शाला प्रवेश उत्सव को उत्साहपूर्ण बना दिया।

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