MP की मंत्री प्रतिमा बागरी पर बढ़ा सियासी संकट, विधायकी और मंत्री पद पर लटकी तलवार

भोपाल 

मध्यप्रदेश की एक महिला मंत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट के एक आदेश के कारण वे बुरी तरह घिर गई हैं। यहां तक कि मंत्रिमंडल से बाहर होने का खतरा भी मंडराने लगा है। प्रदेश की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी फर्जी जाति प्रमाण पत्र में घिरीं हैं। उन्हें राज्यस्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने तलब किया है। प्रतिमा बागरी को उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें उनकी अनुसूचित जाति प्रमाणित हो सके। ऐसा नहीं करने पर उनका मंत्रीपद भी जा सकता है। पद पर खतरा मंडराने के बीच मंत्री प्रतिमा बागरी भोपाल में एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने नदी बचाने का संदेश दिया।

एससी कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की हाईकोर्ट में दायर याचिका पर निर्देश के बाद यह आदेश जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने छानबीन समिति को संबंधित पक्षों को बुलाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करने के आदेश दिए थे। समिति को यह तय करने को कहा गया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं।

हाईकोर्ट ने समिति द्वारा जांच पूरी करने और इसके बाद उचित आदेश पारित करने के लिए समय सीमा भी तय की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि 30 जून 2026 तक समिति द्वारा निर्णय नहीं लेने पर याचिका को पुनर्जीवित (रिवाइव) किया जा सकेगा।

गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने याचिका में प्रतिमा बागरी पर गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बागरी ने अनुचित तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर रैगांव सीट से चुनाव लडा।

याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि संबंधित इलाके में बागरी जाति, अनुसूचित जाति यानि एससी की सूची में शामिल नहीं है। उनका यह भी कहना है कि प्रतिमा बागरी राजपूत जाति से संबंधित हैं।

उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो
अनूसचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र के आरोपों से घिरीं नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें मंगलवार को उस समय बढ़ गई जब उन्हें राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने 6 जुलाई को तलब किया। उन्हें उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो। दस्तावेज न देने पर मंत्रीमंडल से उनकी छुट्टी हो सकती है। प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त कार्यालय ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होते ही मंत्री प्रतिमा बागरी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।

जाति प्रमाणपत्र पर घिरीं मंत्री प्रतिमा बागरी ने नदी बचाने का संदेश दिया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जल है तो कल है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक्स हेंडल पर लिखा—

भोपाल स्थित होटल मैरियट में आयोजित नमामि गंगे मिशन अंतर्गत “डीपीआर तैयार करने एवं बेतवा नदी पुनर्जीवन विषयक क्षमता संवर्धन कार्यशाला” को संबोधित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में बेतवा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं दीर्घकालिक जल संवर्धन की दिशा में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। हमारी नदियाँ केवल जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं।

सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी एवं प्रभावी योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

जल है तो कल है — नदी बचेगी, तभी प्रकृति और भविष्य सुरक्षित रहेगा।

उज्जैन में ₹1200 करोड़ का PepsiCo प्लांट, CM मोहन यादव ने किया शुभारंभ; आलू किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

उज्जैन
 मध्य प्रदेश के उद्योगिक विकास में एक बड़ा नाम मंगलवार को जुड़ गया. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वर्चुअल कार्यक्रम से जुड़ इसकी शुरुआत की. मुख्यमंत्री सारंगपुर से कार्यक्रम से जुड़े, जबकि उज्जैन स्थित प्लांट परिसर में फीता काटकर संयंत्र का शुभारंभ किया गया. दरअसल, पेप्सिको फ्लेवर कंसंट्रेट प्लांट इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी में 1200 करोड़ से अधिक की लागत से शुरुआत की गई है, जो कि देश में दूसरा और दुनिया में 9वां प्लांट है। 

इस प्लांट के आने के बाद अब और भी उद्योग मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए आगे आ सकते हैं. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और खास बात यह है आलू उगाने वाले किसानों को बड़ा फायदा होगा. इस कार्यक्रम में वर्चुअल जुड़े मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, मंत्री प्रह्लाद पटेल और मौके पर कंपनी के सीईओ यूजीन विलियम, सीईओ इंटरनेशनल ब्रेवरेज, सीईओ जागृत कोटेचा भारत व उज्जैन के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। 

10 जिलों से 40 हजार टन आलू खरीदा जा रहा
कंपनी के साउथ एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने बताया, ”हम फिलहाल मध्य प्रदेश के 10 जिलों से 40 हजार टन आलू हर साल खरीद रहे हैं. हमारा लक्ष्य है 10 जिलों से नहीं 32 जिलों से हम आलू खरीदे. इस प्लांट के माध्यम से स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया जाएगा. यह प्लांट अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. जहां रोबोट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है. इसकी शुरुआत महाकाल की नगरी में होना हमारे लिए सौभाग्य है और गर्व का क्षण है. कंपनी के मुख्य ब्रांड में पेप्सिको, माउंटेन ड्यू, ट्रॉपिकाना, लेज़, कुरकुरे, क्वेकर, गेटोरेड हैं, जिनके फ्लैवर कंसंट्रेट का उत्पादन इस प्लांट में होगा. जिसके बाद यहां से VBL कंपनी से हमारा टाइअप है वहां से बॉटलिंग पैकेज रहेगा और फिर पूरे भारत में सप्लाई किया जाएगा। 

22 एकड़ में फैला है प्लांट
MPIDC के निर्देशक राजेश राठौर ने ETV भारत से कहा, ”विक्रम उद्योगपुरी के लिए बड़े गर्व का विषय है. यहां कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश सरकार के निर्देशन में हर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं. लगभग 1266 करोड़ का ये निवेश है. लगभग 800 लोगों को इससे रोजगार मिलने की संभावना है. साथ ही ब्रांड वैल्यू की वजह से और भी उद्योग यहां निवेश कर सकते हैं। 

ग्लोबल निवेश का हब बन रहा मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विनिर्माण इकाई का शुभारंभ होने पर शुभकामनाएं दी. मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, ”ये दिन मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में अत्यंत महत्‍वपूर्ण है. उज्‍जैन जो पहले धार्मिक नगरी के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध था अब औद्योगिक विस्तार की नई इबारत भी लिख रहा है. हमारे लिए यह अत्यंत गौरव शाली क्षण है. मध्य प्रदेश शासन के निरंतर प्रयासों से आज मध्य प्रदेश ग्लोबल निवेश का हब बन रहा है. औद्योगिक विस्तारीकरण से प्रदेश के कई युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्‍त होंगे। 

उन्होंने आगे कहा कि, ”सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में उज्‍जैन विश्व के सबसे समृद्ध और सम्पन्न व्यापारिक नगरों में शीर्ष पर गिनी जाती थी. हमारा लक्ष्य है कि यह नगरी उसी वैभव को पुन: प्राप्‍त करें. आस्‍था के साथ उज्‍जैन उद्योग निवेश और रोजगार का भी अग्रणी केंद्र बनें. उद्योग स्थापित कर मालवा की प्रगति को निरंतर गति दी जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए सशक्त उद्यमी समृद्ध मध्य प्रदेश का सफल आयोजन किया जा रहा है। 

MP Weather: मध्य प्रदेश के 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, बालाघाट-डिंडौरी में अति भारी वर्षा की चेतावनी

​भोपाल
 ​मध्य प्रदेश में जून के महीने में मानसून की सुस्ती के कारण औसत से काफी कम पानी बरसा है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे राज्य में दीर्घावधि औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई. हालांकि जून के आखिरी दिन मानसून ने जोरदार वापसी की है. जिसको देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल ने राज्य के सभी 55 जिलों में आंधी-तूफान, वज्रपात और तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसमें बालाघाट और डिंडौरी समेत 7 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की विशेष चेतावनी दी गई है. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 2 से 4 दिनों में मानसून पूरे राज्य को कवर कर लेगा। 

​7 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट
​मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय परिसंचरण के प्रभाव से प्रदेश में सिस्टम बेहद मजबूत हो गया है. इसके चलते जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में अलर्ट पर रखा गया है. बालाघाट और डिंडौरी जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और झंझावात के साथ अति भारी बारिश की चेतावनी है. यहां 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. जबकि देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन सहित प्रदेश के बाकी सभी जिलों में आंधी-बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। 

​जून महीने में पूर्वी मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा सूखा
​इस साल जून के महीने में मानसून की रफ्तार बेहद असमान रही. पूरे जून महीने में राज्य में कुल 88.2 मिमी पानी गिरा, जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा 131.1 मिमी होना चाहिए था. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, ​पूर्वी मध्य प्रदेश के हिस्से में सबसे अधिक सूखे जैसे हालात रहे. यहां दीर्घावधि औसत से -59 प्रतिशत कम बारिश रिकार्ड की गई. रीवा, सीधी, सतना और शहडोल संभागों में जून के दौरान सूखे जैसे हालात रहे. इसके अलावा ​पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति काफी बेहतर रही, जहा औसत से केवल -7 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 

​आंधी-बारिश से गिरा पारा, कई जिलों में जलभराव और हादसे
​मंगलवार को प्रदेश के 23 जिलों में बारिश रिकार्ड की गई. सतना में डेढ़ इंच पानी गिरा, जिससे सड़कों पर जलभराव हो गया. वहीं आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में गिरावट आई है. भोपाल में अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री, इंदौर में 33 डिग्री और जबलपुर में 32 डिग्री दर्ज किया गया. हालांकि, इस दौरान बिजली गिरने से हरदा और खरगोन में 3 लोगों की मृत्यु हो गई। 

यह है ​मानसून की मौजूदा स्थिति
​30 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश के कुछ और भागों को कवर कर लिया है. इस समय मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, सागर और सीधी से होकर गुजर रही है. मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ”अगले 2 से 4 दिनों में भोपाल, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के बाकी हिस्सों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. इसके साथ ही गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 

राजा रघुवंशी केस: सोनम को कैसे मिली जमानत? मेघालय हाईकोर्ट ने बताई पूरी वजह, परिवार जाएगा सुप्रीम कोर्ट

 इंदौर
मेघालय हाई कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखने के एक दिन बाद राजा रघुवंशी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने मंगलवार को कहा कि परिवार जल्द ही सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगा। 

विपिन रघुवंशी ने कहा कि उन्हें अभियोजन पक्ष की पैरवी से संतुष्टि नहीं है. इसलिए अब उनका परिवार न्याय की लड़ाई अपने दम पर लड़ेगा और इसके लिए निजी वकील नियुक्त करेगा. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सोनम को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी क्यों नहीं दी. उनके मुताबिक, इसी कानूनी चूक का फायदा सोनम को जमानत मिलने में मिला। 

दरअसल, मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें निचली अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दी गई सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया और सोनम को प्रभावी तरीके से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए. अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) का उल्लंघन माना। 

मेघालय हाईकोर्ट ने साफ की तस्वीर
मेघालय हाई कोर्ट ने  ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सोनम रघुवंशी को ज़मानत दी गई थी. सोनम पर 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की सिंगल-जज बेंच ने राज्य सरकार की आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया. सरकार ने 27 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत को रद्द करने की मांग की थी। 

जस्टिस डिएंगडोह ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार जिस तरह से तैयार किए गए थे, उससे पता चलता है कि उसमें “न्यायिक सोच का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया”.  कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि ऐसी तैयारी बिना किसी सोच-विचार के की गई थी और कहीं भी कोई खास आरोप या जानकारी नहीं मिलती. पुलिस स्पष्ट भी नहीं कर सकी कि आखिर सोनम रघुवंशी के खिलाफ असल में क्या आरोप हैं?

कोर्ट ने राज्य की याचिका खारिज की
कोर्ट ने कहा कि अगर गिरफ्तारी के आधार की जानकारी इस तरह दी जाती है तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी की ओर से न्यायिक सोच के पूरी तरह से इस्तेमाल न किए जाने को दिखाता है. कोर्ट ने राज्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके पास ज़मानत रद्द करने के लिए अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं है। 

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई 2025 को इंदौर में हुई थी. दोनों 20 मई को हनीमून मनाने मेघालय गए थे. 23 मई को सोनम के लापता होने की खबर सामने आई, जबकि 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) स्थित एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था। 

किसे हई थी सजा?
इस मामले में पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उसके तीन दोस्तों को हत्या की साजिश और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. सोनम करीब 10 महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुई है। 

उज्जैन अब लिख रहा है औद्योगिक विस्तार की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन अब लिख रहा है औद्योगिक विस्तार की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रम उद्योगपुरी में 1200 करोड़ रूपए से अधिक की लागत से निर्मित पेप्सिको के फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण संयंत्र का किया वर्चुअली लोकार्पण

उज्जैन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि  दिन मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उज्जैन जो पहले से ही धार्मिक नगरी के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है अब औद्योगिक विस्तार की भी नई इबारत भी लिख रहा है। हमारे लिए यह अत्यंत गौरवशाली क्षण है। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्लोबल निवेश का हब बन रहा है। औद्योगिक विस्तारीकरण से प्रदेश के कई युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी के ग्राम नरवर स्थित 1266 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित पेप्सिको फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण संयंत्र के लोकार्पण समारोह को भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन नगरी विश्व के सबसे समृद्ध और सम्पन्न व्यापारिक नगरों में गिनी जाती थी। हमारा लक्ष्य है कि उज्जैन नगरी उसी वैभव को पुन: प्राप्त करें। आस्था के साथ उज्जैन उद्योग निवेश और रोजगार का भी अग्रणी केंद्र बनें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापित कर मालवा की प्रगति को निरंतर गति दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए सशक्त उद्यमी समृद्ध मध्यप्रदेश का सफल आयोजन किया जा रहा है।

देश का फ्लेवर कंसनट्रेट का दूसरा संयंत्र उज्जैन में हुआ प्रारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की इस अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई का शुभारंभ होने पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारत में इस विशिष्ट और उच्च तकनीकी फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण के केवल 02 संयंत्र है, जिनमें से 01 आज से उज्जैन में प्रारंभ हो रहा है। विक्रम उद्योगपुरी में 22 एकड़ क्षेत्र में 1226 करोड़ रुपए के निवेश से इस संयंत्र की स्थापना की गई है। पूरी तरह ऑटोमेशन पर आधारित इस संयंत्र से 800 युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह नया संयंत्र भारत में कंपनी की विनिर्माण क्षमता को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ क्षेत्र में सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पेप्सिको इंडिया और साउथ एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने कहा कि हमारे लिए यह अत्यंत हर्ष का क्षण है कि हमारी कंपनी को बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में म.प्र. शासन के सहयोग से संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिला। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव, म.प्र. शासन और एमपीआईडीसी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेंश नाथ जी महाराज ने कहा कि उज्जैनवासियों के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे विशेष प्रयासों से औद्योगिक क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। नवीन उद्योगों की स्थापना हो रही है। उज्जैन नगरी धार्मिक पहचान के साथ औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।

कार्यक्रम में म.प्र. हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन, नगर निगम सभापती श्रीमती कलावती यादव, प्रबंध निर्देशक एमपीआईडीसी चंद्रमौली शुक्ला, एमपीआईडीसी उज्जैन के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर, पेप्सिको कंपनी के हरदीप भाटिया, कंपनी के सीईओ इंटरनेशनल बेवरेजेस यूजीन विलेमसेन, जनरल मैनेजर एवं सीनियर वाईस प्रेसिडेंट इवान नॉर्टन सहित नागरिक उपस्थित थे।

 

ऋषिकेश से इंदौर आ रही बस में भीषण आग, 8 यात्रियों की दर्दनाक मौत; अधिकांश मृतक इंदौर के

इंदौर / दौसा
ऋषिकेश से इंदौर आ रही एक निजी बस में टक्कर के बाद आग लगने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, राजस्थान के दौसा में हुए इस हादसे में मारे गए ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से बताए जा रहे हैं. वहीं, कई लापता ओंकारेश्वर के पास के भी बताए जा रहे हैं. इस भीषण दुर्घटना में 29 लोग घायल भी हुए. वहीं, इंदौर से मृतकों के परिजन राजस्थान के दौसा के लिए रवाना हो गए हैं। 

मरने वालों में ज्यादातर इंदौर से
ऋषिकेश से इंदौर चलने वाली हंस ट्रेवल्स की एक बस से कई यात्री इंदौर आने के लिए निकले थे लेकिन बुधवार अल सुबह दौसा के पास बस की टक्कर सामने चल रहे ट्रक से हो गई, जिसके बाद अचानक आग लग गई. आग लगने से बस में सवार 8 लोग जिंदा जल गए. वहीं, तकरीबन 29 घायल हो गए, जिनका इलाज दौसा स्थित सरकारी अस्पताल में चल रहा है. मृतकों में इंदौर की याचिका, नेहा, दिशा, सुवानंद, प्रदीप, महक, योगिनी, जितेंद्र शामिल हैं. इस बात की पुष्टि मृतकों के परिजनों द्वारा की जा रही है. वहीं, इंदौर के पास रहने वाली निर्मला, प्रियंका और भूमि घटना के बाद से लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही। 

मृतकों के परिजनों का बुरा हाल, बोले- कुछ पता नहीं चल रहा
पूरे घटनाक्रम की जानकारी इंदौर में रहने वाले अभिनव पांडे के परिजनों को लगी तो वह दौसा के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने ईटीवी भारत से कहा, ” घटना कैसे हुई और कौन कहां है इसे लेकर कुछ साफ जानकारी नहीं मिल पा रही है. इसलिए सभी घटनास्थल के लिए इंदौर से रवाना हो गए हैं और उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे.” प्रारंभिक तौर पर बताया जा रहा है कि जिन लोगों की इस पूरे घटनाक्रम में मौत हुई है वह ऋषिकेश और हरिद्वार घूमने के लिए गए हुए थे और देर रात वहां से बस के माध्यम से इंदौर के लिए निकले थे, तभी राजस्थान में हादसा हो गया। 

दौसा एडिशनल एसपी योगेंद्र फौजदार ने बताया कि घटनाक्रम रात करीब 3 बजे के आसपास का है. हादसे में अब तक 6 लोगों के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया जा चुका है. मामुली घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है. उन्होंने बताया कि घायलों को अभी मृतकों के बारे में जानकारी नहीं दी गई है. एडिशनल एसपी ने बताया कि बस में 39 से अधिक सवारियां होने का अनुमान लगाया है. हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है. हादसे के दौरान आगे चल ट्रेलर का चालक और खलासी भी घायल हुए हैं। 

जानकारी के अनुसार, हादसा शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुआ. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और देखते ही देखते उसमें आग लग गई. बस में फंसे 6 यात्रियों की जिंदा जलने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 अन्य यात्रियों ने सिर में गंभीर चोट लगने के कारण दम तोड़ दिया. हादसे की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया. वहीं, दौसा की जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा का कहना है कि बस ऋषिकेश से इंदौर जा रही थी, तभी सुबह करीब 3:15 या 3:30 बजे जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेसवे पर टक्कर के बाद उसमें आग लग गई. करीब 24 या 25 लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे और उन्हें बचा लिया गया. वे अभी ठीक हैं. कुल हताहतों की संख्या के बारे में हम इस समय केवल अनुमानित आंकड़ा ही बता सकते हैं, अंतिम संख्या अभी पक्की नहीं है. करीब सात से आठ लोगों की मौत हुई है। 

समय पर पहुंचती फायर ब्रिगेड टीम तो कई जान बच जाती : इस दर्दनाक हादसे के बाद राहत कार्य को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटना की सूचना पुलिस और एक्सप्रेसवे प्रबंधन को तत्काल दे दी गई थी, लेकिन करीब एक घंटे तक फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू हो जाता तो बस में फंसे कई यात्रियों की जान बचाई जा सकती थी. उनका दावा है कि मदद के इंतजार में यात्री बस के भीतर ही फंसे रहे, जिससे पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई. फिलहाल पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जबकि घायलों का उपचार जारी है. प्रशासन दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। 

घटना को लेकर CM और सांसद ने दुख जताया : हादसे को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट पर दुख जताया. उन्होंने लिखा कि दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई सड़क दुर्घटना में जनहानि का समाचार पीड़ादायक है. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं. दौसा सांसद मुरारीलाल मीना ने भी दुख प्रकट किया है. साथ ही सरकार से पैसेंजरों की सुरक्षा को लेकर काम करने की बात कही है। 

राज्यपाल और पूर्व सीएम ने भी व्यक्त की संवेदना : राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस पर हुए भीषण सड़क हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ईश्वर से मृतकों की पुण्यात्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है. साथ ही घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है. हादसे को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में कई लोगों की मृत्यु होने का समाचार बेहद दुखद है. इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में संबल प्रदान करें एवं दिवंगतों की आत्मा को शांति प्रदान करें. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। 

CM साय आज रहेंगे एक्शन मोड में, शासकीय कार्यों में व्यस्त रहेंगे, उच्च शिक्षा मंत्री की भी अहम बैठक

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में शासकीय कार्यों में व्यस्त रहेंगे. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास से मंत्रालय के लिए रवाना होंगे.

मुख्यमंत्री सुबह 11:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक मंत्रालय में विभिन्न विभागों से जुड़े शासकीय कार्यों का संचालन करेंगे. इसके बाद शाम 5:30 बजे मंत्रालय से मुख्यमंत्री निवास के लिए रवाना होंगे.

उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आज
रायपुर
. उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा 1 जुलाई को सुबह 11 बजे मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक लेंगे. बैठक में रिक्त पदों पर भर्ती, पदोन्नति, लंबित विभागीय प्रकरणों के निराकरण, प्रभार व्यवस्था, पुलिस सत्यापन, प्रशासनिक कार्यों की प्रगति तथा समयबद्ध कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही विभिन्न विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुसंधान व गुणवत्ता सुधार से जुड़े विषयों तथा लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे.

उप मुख्यमंत्री करेंगे छात्रों का तिलक लगाकर स्वागत
बिलासपुर.
जिले में नवीन शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन 1 जुलाई को सवेरे सेजेस लाल बहादुर शास्त्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थित पंडित देवकीनंदन दीक्षित सभा भवन में किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू होंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने रहे. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव और दिलीप लहरिया शामिल हुए. इसके अलावा महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी और जिला पंचायत उपाध्यक्ष ललिता संतोष कश्यप भी कार्यक्रम में उपस्थित हुए. शाला प्रवेशोत्सव के दौरान विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं पुष्प भेंट कर आत्मीय स्वागत किया. विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के साथ ही नियमित अध्ययन एवं अनुशासन का संदेश दिया. 

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को बड़ी राहत, शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक मिलेगी पुनर्नियुक्ति

रायपुर.

शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त शालाओं में कार्यरत शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक) को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है।

लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर शासन द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। आदेश में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देशित किया गया है कि पुनर्नियुक्ति संबंधी जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की आवश्यक कार्रवाई अपने स्तर पर शीघ्र सुनिश्चित करें।

शासन के इस निर्णय से शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनी रहेगी तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई निर्बाध रूप से संचालित हो सकेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए मंजूरी जारी कर दी है। मंत्रालय से जारी आदेश के मुताबिक, लोक शिक्षण संचालनालय को कहा गया है कि तय नियमों के अनुसार पात्र रिटायर शिक्षकों को जल्द स्कूलों में फिर से पढ़ाने की व्यवस्था की जाए।

शिक्षकों की कमी दूर, पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
इस फैसले का फायदा सरकारी और 100% अनुदान प्राप्त स्कूलों को मिलेगा। इससे जहां शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, वहीं छात्रों की पढ़ाई भी बिना रुकावट जारी रह सकेगी। अब सभी जिलों में पात्र शिक्षकों को सत्र 2026-27 के आखिर तक स्कूलों में पढ़ाने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

रायपुर : रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन

रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा, उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 6 पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स का किया सम्मान

रायपुर
रामगढ़ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, प्रकृति पूजा, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की यह पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के ऐतिहासिक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के  समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक शैल संरचना तथा यहां के प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस भव्यता के साथ इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव का आयोजन हुआ है, उसी भव्यता के साथ यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरगुजा जिले में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में लोगों के पक्के आवास का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनकर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। पुनर्वासित नक्सलियों तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये अंतरित किए जा रहे हैं। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया है। तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए विभिन्न विभागों में लगातार भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है, जिसके माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रवासियों की मांग पर उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत के गठन की घोषणा भी की।

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी को रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 50 वर्षों से आयोजित हो रहा यह महोत्सव ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंच से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल सहित अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, विधायक श्रीमती शकुंतला पोर्ते, विधायक श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

हिमाचल में मॉनसून का कहर: जिस्पा में बादल फटा, मंडी में भूस्खलन से महिला की मौत

शिमला
 हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री के साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हुई है. इस वजह से कई सड़कें बंद हो गई हैं. वहीं, लाहौल स्पीति के जिस्पा में बीती रात को बादल फटलने से लेह मनाली नेशनल हाईवे बंद हो गया. इस वजह से सैंकड़ों गाड़ियां फंस गई। 

मनाली की ओर से जाने वाले वाहनों को केलांग के पास ही रोक दिया गया था.  मंडी जिले के औट में शनि मंदिर के पास नालागढ़ की एक महिला पर पत्थर गिरने से मौत हो गई. एएसपी मंडी अभिमन्यू ने मौत की पुष्टि की और बताया कि सभी से अनुरोध है, सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन रोकें और सुरक्षित यात्रा करें। 

धराली-हर्षिल में पूरी रात जागकर नदी को ताक रहे लोग
बीते साल वर्ष अगस्त में उत्तराखंड के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा की भयावह यादें अभी ताजा हैं. उस आपदा में खीर गंगा से न केवल धराली बाजार और आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मची थी, बल्कि हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी मलबे और बाढ़ की चपेट में आ गया था. कई सैनिक लापता हुए थे और बाद में कुछ जवानों के शव भी बरामद हुए. इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से एक बार फिर पूरे हर्षिल क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। 

इसी गंभीर चिंता को लेकर हर्षिल क्षेत्र के आठ ग्राम प्रधानों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की। 

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल के ऊपर बनी अस्थायी झील और भागीरथी नदी की बदलती धारा लगातार खतरा पैदा कर रही है. हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने से जीएमवीएन का टीनशेड बह गया, कई बड़े पेड़ नदी में समा गए और कटाव लगातार बढ़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि अब जीएमवीएन परिसर, पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, आवासीय भवन, होटल और होमस्टे सीधे खतरे की जद में हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि रात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों को पूरी रात चौकसी करनी पड़ रही है। 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हर्षिल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 की धराली-हर्षिल आपदा में भारी जन-धन की क्षति हुई थी. अनेक होटल, मकान, सड़कें और अन्य ढांचे मलबे में समा गए थे. इस भीषण त्रासदी में लोगों की जानें गईं, बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी आपदा की चपेट में आ गया, जहां राहत कार्य के लिए तैयार सैनिक भी मलबे में फंस गए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह बुधवार को हर्षिल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य शीघ्र शुरू कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। 

बुधवार सुबह शिमला के मेहली शोघी रोड पर हैप्पी होम के पास लैंडस्लाइड से रोड़ बंद हो गई है। 

जानकारी के अनुसार, बीते रोज मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के सात जिलों में मॉनसून की एंट्री हुई और फिर बीती रात को प्रदेशभर में मूसलाधार बारिश देखने को मिली.जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गई. यहां पर लगातार बारिश के कारण पागोला नाला के पास भूस्खलन और मलबा आने से बंद हो गई है और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है. सलूणी उपमंडल की ग्राम पंचायत लनोट के लनोट और फगड़ोग गांवों में मूसलाधार बारिश के कारण मलबा और पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 

जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गया। 

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जिस्पा में बादल फटने की जानकारी दी. हालांकि, इससे कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लेह मनाली हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही थम गई. गौर रहे कि जिस्पा मनाली से करीब 100 किमी दूर है। 

इसके अलावा, मंडी जिले के धर्मपुर में भारी बारिश की वजह से सिद्धपुर धर्मपुर रोड हाजरी क्रशर के पास और धर्मपुर-जोगिन्द्रनगर सड़क भंडारी मिक्सर प्लांट के पास अवरुद्ध हो गया है. कांढापतन–रखेड़ा मार्ग पर सड़क पर मलबा गिरा है और आवागमन प्रभावित हुआ है। 

फिलहाल, सड़कों की बहाली की कोशिश की जा रही है. वहीं, मंडी जिले में ब्य़ास नदी का जलस्तर बढ़ गया है. लगातार बर्फ पिघलने और बारिस की वजह से पानी का लेवल बढ़ा है और लोगों को नदी नालों के पास ना जाने की अपील की गई है. लाहौल स्पीति के जाहलमा नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लोगों को रस्सी डालकर पार करवाया जा रहा है. इस वजह से किसानों की मटर और गोभी की फसलें फंस गई हैं. लाहौल की पंचायत रानिका के पढ़ाक गांव में बाढ़ से लगभग 5 बीघा गोभी की फसल तबाह हो गई है. इससे पहले, मंगलवार को शिमला के चक्कर बाइपास के पास लैंडस्लाइड हुआ था। 

पहली ही बारिश में 45 रोड बंद

हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन ने बुधवार रिपोर्ट में बताया कि बारिश की वजह से 30 जून को 45 सड़कें बंद हो गई थी. इसमें सबसे अधिक 28 रोड मंडी, कुल्लू में 12, ऊना में दो और लाहौल स्पीति में एक रोड बंद थे, हालांकि, अब 16 रोड ही बहाल होने से बची हैं और बारिश की वजह से 84 ट्रांसफार्मर बंद हैं. उधर, बरसात का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में धान की रिपोई का काम भी शुरू हो गया है। 

ऊना में स्कूलों की टाइमिंग बदली

ऊना जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक जुलाई से सामान्य समय के अनुसार पढ़ाई होगी. डीसी जतिन लाल ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं और भीषण गर्मी के मद्देनज़र पांच मई को स्कूलों के समय में किए गए बदलाव संबंधी आदेश भी वापस ले लिए गए हैं. अब जिले के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, मिडिल और सेकेंडरी स्कूल अब सुबह 9 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक खुलेंगे. डीसी ने एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के संशोधित समय के अनुरूप बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 

मौसम विभाग ने अगले छह दिन के लिए भारी बारिश का अनुमान लगाया है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून सामान्य से करीब एक सप्ताह की देरी से प्रदेश पहुंचा है. सामान्य तौर पर शिमला में मानसून 22 जून के आसपास पहुंच जाता है, जबकि 24 से 25 जून तक पूरे प्रदेश को कवर कर लेता है. इस बार 30 जून तक ही मानसून प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुंच पाया है। 

संदीप शर्मा ने बताया कि सोमवार को शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों, सिरमौर के कुछ इलाकों, कांगड़ा के बड़ा भंगाल क्षेत्र और शिमला जिला के आसपास के कुछ हिस्सों में मानसून का आगमन हो चुका है. वहीं शिमला के ऊपरी क्षेत्र, नारकंडा सहित अन्य हिस्सों के अलावा चंबा, किन्नौर, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और प्रदेश के अन्य शेष क्षेत्रों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून पहुंचने की संभावना है. परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और जल्द ही पूरा हिमाचल मानसून से कवर हो जाएगा। 

उन्होंने बताया कि इस बार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. केवल कांगड़ा और एक अन्य जिले में सामान्य के आसपास वर्षा हुई, जबकि बाकी 10 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई. मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन के दौरान भी प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य से कम रह सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई से बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी और 6 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। 

विभाग ने 1 जुलाई के लिए ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. 2 जुलाई को चंबा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट, जबकि ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 3 जुलाई को बिलासपुर और कांगड़ा में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा, जबकि ऊना, मंडी, शिमला और सिरमौर में बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 4 जुलाई को भी कांगड़ा, मंडी, शिमला, कुल्लू, ऊना और हमीरपुर सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके बाद 5 और 6 जुलाई को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है. संदीप शर्मा ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी मानसून 29 जून के आसपास हिमाचल पहुंचा था. वहीं सबसे अधिक देरी वर्ष 2010 में हुई थी, जब मानसून ने 5 जुलाई को प्रदेश में प्रवेश किया था. यानी वर्ष 2026 में मानसून का आगमन वर्ष 2010 के बाद सबसे देर से हुआ है। 

प्री मॉनसन में भी 128 लोगों की मौत

राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से जारी प्री-मानसून सीजन (1 मार्च से 30 जून 2026) की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण 128 लोगों की मौत, 398 लोग घायल हुए हैं, जबकि 354 पशुओं की भी जान गई. इसके अलावा प्रदेशभर में निजी और सरकारी संपत्तियों को मिलाकर करीब 29.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं में 75 लोगों की मौत पेड़ या चट्टान गिरने, 30 लोगों की डूबने, 5 लोगों की करंट लगने, 4 मौतें आग, 2 सर्पदंश, 1 व्यक्ति की आकाशीय बिजली गिरने और 11 लोगों की अन्य कारणों से मौत हुई है. इस दौरान सड़क हादसों में 270 लोगों की जान गई.  शिमला में सबसे अधिक 7.32 करोड़ रुपये, सोलन में 4.64 करोड़ रुपये, कुल्लू में 4.26 करोड़ रुपये और मंडी में 2.63 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 

 

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