संजय कपूर से बहुत कुछ सीखने को मिला, बोलीं निर्मित कौर अहलूवालिया

मुंबई
 अभिनेत्री निर्मित कौर अहलूवालिया ने कहा है कि शो अब होगा हिसाब के सेट पर अनुभवी अभिनेता संजय कपूर के साथ काम करना उनके लिए सीखने और खुद को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।निर्मित ने कहा कि संजय कपूर का लंबा अनुभव, सहज स्वभाव और सेट पर सभी के लिए सकारात्मक माहौल बनाने की क्षमता उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती है।उन्होंने कहा, “संजय सर हमारी पूरी कास्ट में सबसे वरिष्ठ कलाकार हैं और शुरू से ही मैंने इस प्रोजेक्ट को उनसे सीखने के अवसर के रूप में देखा। उनका परिवार कई दशकों से सिनेमा से जुड़ा रहा है और उनके साथ काम करना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा।”

निर्मित ने कहा कि संजय कपूर की सबसे बड़ी विशेषता उनका विनम्र और सहयोगी स्वभाव है। उन्होंने बताया कि इतने अनुभव और प्रतिष्ठा के बावजूद उन्होंने कभी भी अपने वरिष्ठ होने का एहसास नहीं होने दिया और हमेशा कलाकारों की मदद के लिए तैयार रहे।उन्होंने कहा, “वह हमेशा समय निकालकर सीन पर चर्चा करते थे, अपने अनुभव साझा करते थे और कलाकारों के साथ सहजता से घुलमिल जाते थे। हम अक्सर साथ बैठकर खाना खाते, बातचीत करते और काम पर चर्चा करते थे। इन छोटी-छोटी बातों ने पूरे माहौल को बेहद आरामदायक बना दिया था।”

निर्मित के अनुसार, इस अनुभव ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि यह भी सिखाया कि एक कलाकार को सेट पर किस तरह का व्यवहार करना चाहिए और दूसरों को सहज महसूस कराने का महत्व क्या होता है।

क्राइम-थ्रिलर आधारित शो ‘अब होगा हिसाब’ में निर्मित कौर अहलूवालिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने से उनके अभिनय को नई मजबूती मिली है और यह प्रोजेक्ट उनके करियर के यादगार अनुभवों में शामिल हो गया है।

महाराष्ट्र में सियासी भूचाल, उद्धव की बैठक से 23 विधायक गायब; पवार की गैरमौजूदगी से बढ़ीं अटकलें

मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। शाम को बुलाई गई गठबंधन की एक अहम रणनीतिक बैठक से 60 में से 23 विधायकों ने दूरी बना ली। विधायकों के अलावा, इनमें शरद पवार जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब विधायकों की इस गैरमौजूदगी ने गठबंधन के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुश्किल घड़ी में उद्धव ठाकरे का दर्द भी छलक पड़ा है और उन्होंने पूछा है- “क्या हम सच में एक साथ हैं?”

बैठक से नदारद रहे ये दिग्गज नेता
यह अहम बैठक मुख्य रूप से मॉनसून सत्र के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से बुलाई गई थी, लेकिन इसमें कई बड़े नेता नहीं पहुंचे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार और उनके वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल इस बैठक में शामिल नहीं हुए। बताया गया कि वे निजी कारणों से उपलब्ध नहीं थे।

कांग्रेस नेता नाना पटोले और विजय वडेट्टीवार भी बैठक से गायब रहे। वडेट्टीवार के कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई कि वे अस्वस्थ हैं। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और ठाकरे गुट के संकटमोचक संजय राउत इस बैठक में मौजूद रहे।

उद्धव ठाकरे ने जाहिर की अपनी पीड़ा
पिछले हफ्ते शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने बगावत करते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया था। चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी टूटने का दंश झेल रहे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बैठक में अपनी हताशा जाहिर की। उन्होंने गठबंधन के नेताओं से पूछा, “क्या हम वाकई एक साथ हैं?”

बागी सांसदों का जिक्र करते हुए उद्धव ने अपील की कि हमें उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो हमारे साथ हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, “जो चले गए… उन्हें जाने दें।” उद्धव ठाकरे ने एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम कहते हैं कि हम एक साथ हैं… लेकिन क्या हम सदन में महा विकास अघाड़ी के रूप में एकजुट हैं? क्या हम एक साथ मिलकर मुद्दे उठाते हैं?”

क्या था बैठक का असली मकसद?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में 6 बागी सांसदों के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। यह बैठक मुख्य रूप से तीन दिन पहले शुरू हुए मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। लेकिन सांसदों की बगावत के तुरंत बाद हुई इस बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी को गठबंधन की एकता के ‘टेस्ट’ में फेल होने के तौर पर देखा जा रहा है।

खतरे में एमवीए का अस्तित्व?
नवंबर 2019 में वजूद में आए एमवीए (MVA) गठबंधन की स्थिरता पर हमेशा से सवालिया निशान रहे हैं। सात साल, तीन बड़े चुनावों और कई बगावतों का सामना करने के बावजूद यह गठबंधन अब तक टिका हुआ है। जून 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी बगावत के बाद, ठीक उसी तर्ज पर जून 2023 में एनसीपी में भी टूट हुई थी।

कांग्रेस-एनसीपी और कट्टर हिंदुत्व वाली शिवसेना के एक साथ आने को आलोचकों ने हमेशा ‘अवसरवादी राजनीति’ करार दिया है। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार हो रही बगावत और अब विधायकों की दूरी यह संकेत दे रही है कि एमवीए गठबंधन अपने आखिरी दौर से गुजर रहा है।

 

मुख्य मंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है। 

अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। 

अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं। 

अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है। 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्रीसाय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक : खेती का नया और स्मार्ट विकल्प

रायपुर

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है।

क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?
          
हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।

कम संसाधनों में अधिक उत्पादन
        
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है।

पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक
          
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है।

युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर
          
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है।

सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा
         
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।

भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम
           
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
        
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए रासायनिक खाद छोड़ अपनानी होगी जैविक खेती: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर

अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देना है, तो रासायनिक खादों की अंधी दौड़ से बाहर निकलना होगा। धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और इंसानी सेहत को संवारने का एकमात्र रास्ता जैविक और प्राकृतिक खेती ही है। यह विचार प्रदेश के कृषि मंत्रीरामविचार नेताम ने भाटापारा में आयोजित ‘जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला’ के दौरान व्यक्त किए। शासकीय गजानन्द अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुए इस समारोह में राजस्व मंत्रीटंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और रायपुर लोकसभा सांसदबृजमोहन अग्रवाल भी विशेष रूप से मंच पर मौजूद रहे।

​अंधाधुंध रासायनिक उपयोग पर जताई चिंता
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कृषि मंत्रीनेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में 1 से 30 जून तक ‘खेत चलो अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य ध्येय किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लाना है। छत्तीसगढ़ के ‘धान का कटोरा’ होने के गौरव को रेखांकित करते हुए उन्होंने चिंता जताई कि अधिक उत्पादन की लालसा में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे तात्कालिक पैदावार भले बढ़ रही हो, लेकिन यह मानव स्वास्थ्य और मिट्टी, दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सिर्फ पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि पशुपालन, मछलीपालन और बकरी पालन को जोड़कर अपनी आय के नए स्रोत बनाएं।

 किसानों को आत्मनिर्भर बनाने सरकार प्रतिबद्ध
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किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने ‘कृषक उन्नति योजना’ का दायरा और बढ़ा दिया है। अब खरीफ सीजन में धान के बदले दलहन (दालें) और तिलहन (तेल बीज) की खेती करने वाले किसानों को सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि (इनपुट सब्सिडी) दी जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से इस योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठाने का आग्रह किया।

​पशुधन आधारित खेती ही समृद्धि का आधार: मंत्रीटंक राम वर्मा
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समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्रीटंक राम वर्मा ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का सपना जैविक खेती के जरिए ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुराने समय में हमारी कृषि का मूल आधार पशुधन हुआ करता था, जिससे पर्यावरण और जमीन दोनों सुरक्षित थे। आज रासायनिक खादों के कारण पानी, हवा और भोजन सब प्रदूषित हो रहे हैं। जैविक खेती से जब हमारी जमीन की सेहत सुधरेगी, तभी हमें शुद्ध अन्न मिलेगा और हमारा समाज स्वस्थ रहेगा। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, लोकसभा सांसदबृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधायकशिवरतन शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।

​योजनाओं के हितग्राहियों को मिला लाभ
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कार्यशाला केवल विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में अतिथियों के हाथों 5 किसानों को अरहर बीज किट, 5 किसानों को नैनो यूरिया और 2 मछुआ समितियों को आधुनिक महाजाल व आइस बॉक्स का वितरण किया गया। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम आशा योजना के तहत उत्कृष्ट काम करने वाले 5-5 किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, जिला पंचायत सीईओ, सहित भारी संख्या में प्रगतिशील किसान और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

‘जो खुद को नहीं संभाल पा रहा, वह मुझे क्या संभालेगा?’ नशे में धुत दूल्हे को देख दुल्हन ने लौटाई बारात

जांजगीर-चांपा.

जो शादी के दिन नशे मे धुत्त हैं अपने आप को नहीं संभाल पा रहा हैं, वह मुझे क्या संभालेगा. यह कहते हुए मुस्कान प्रधान ने नशे में धुत्त दूल्हे के साथ घर में आई बारात को बैरंग लौटाकर समाज को एक बड़ा संदेश दिया है. मुस्कान की इस हिम्मत की दाद देते हुए पुलिस अधीक्षक ने उनका सम्मान करते हुए जिले का आईकॉन करार दिया.

कोसमंदा की बेटी मुस्कान प्रधान ने वह काम किया है, जिसे करने की बहुत से लोग हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. घटना 23 जून की रात की है. मुस्कान के घर शराब पीकर दूल्हा बारात लेकर पहुंचा था. इस बात की जानकारी मिलते ही सोलह श्रृंगार कर बैठी ने मुस्कान ने शादी से इंकार कर दिया. दुल्हन के इंकार किया जाना दूल्हे पक्ष को मंजूर नहीं हुआ, और दुल्हन को ले जाने के लिए अड़ा रहा. दुल्हन के इंकार और दूल्हे की जिद की वजह से स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

लेकिन दूल्हे की हरकत को देखते हुए मुस्कान के परिवारवालों ने भी उसका साथ दिया. फिर भी जब दूल्हे पक्ष वाले नहीं माने तो फिर पुलिस का बुलाना पड़ा. आखिरकार पूरे माहौल को खिलाफ में देखते हुए बारात वापस खोखरा गांव लौट गई. मुस्कान के इंकार करने के पीछे एक बड़ा दर्द भी छिपा था. दरअसल, 10वीं कक्षा तक पढ़ी मुस्कान तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी है. मुस्कान का पिता भी शराबी था, जिसका शादी के 15 साल बाद निधन हो गया. परिवार की बड़ी बेटी होने के नाते माता और भाई-बहनों की तकलीफ को देख चुकी मुस्कान ने अपनी जिंदगी को अपनी मां की तरह बर्बाद नहीं होने देने का निर्णय लिया.

शराबी दूल्हे को लौटाए जाने की केवल परिवार और गांव वाले के ही नहीं बल्कि प्रशासन भी मुस्कान के साथ खड़ा है. कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ महिला और सामाजिक संगठनों ने मुस्कान के इस साहसिक कदम का सम्मान किया. एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने मुस्कान को नशे के खिलाफ जिला का आइकान बताया. इसके साथ ही मुस्कान को काउंसलर की नियुक्ति दी गई है. यही नहीं पुलिस ने मुस्कान के कॉलेज तक शिक्षा का खर्च वहन करने का निर्णय लिया है. 

सहकारिता सप्ताह को जनआंदोलन बनाने की तैयारी, प्रदेशभर में होंगे विविध आयोजन

रायपुर

भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक पूरे देश में सहकारी सप्ताह मनाया जाएगा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे।

सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप ने तैयारियों की समीक्षा की
               
गौरतलब है कि सहकारी सप्ताह के सफल आयोजन के लिए सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप ने विगत 23 जून को विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इसके साथ ही उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की पैक्स समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों एवं संभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्रीकश्यप ने सभी संबंधित संस्थाओं और समितियों को आयोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

2573 पैक्स समितियों में होंगे विविध कार्यक्रम
            
सहकारी सप्ताह के दौरान प्रदेश की सभी 2573 पैक्स समितियों सहित दुग्ध, मत्स्य, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से सहकारी ध्वजारोहण,सदस्यता अभियान,माइक्रो एटीएम, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं रू-पे केसीसी कार्ड वितरण,सहकार दौड़,वृक्षारोपण अभियान,मृदा परीक्षण,कृषक संगोष्ठियां एफपीओ एवं पैक्स की भूमिका पर परिचर्चा आदि कार्यक्रम शामिल हैं।

9 पैक्स गोदामों का होगा भूमिपूजन
           
 सहकारी सप्ताह के समापन अवसर पर 6 जुलाई 2026 को भारत सरकार के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत प्रदेश के 9 पैक्स में गोदाम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा।

रायपुर में होगा राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर एवं सहकार मेला
            
राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन 3 एवं 4 जुलाई 2026 को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, लाभांडी (रायपुर) में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे। सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय संगठनों की होगी भागीदारी कार्यक्रम में पैक्स, दुग्ध, मत्स्य, लघु वनोपज, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों के साथ-साथ नाबार्ड, एनसीडीसी, एनसीसीएफ, नैफेड, सीएससी, इफको, कृभको, राज्य सहकारी संघ तथा अन्य प्रमुख संस्थाएं अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगी।

सहकारिता से समृद्धि के मॉडल होंगे प्रदर्शित
             
सहकार मेले में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों और सफल मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही किसानों, महिला समूहों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, बुनकरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को सहकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

आयोजन की रूपरेखा पर हुई विस्तृत चर्चा
          
बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, सहभागिता और विभिन्न गतिविधियों के सफल संचालन पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सभी ने सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने तथा सहकारी सप्ताह को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
          
सहकारी सप्ताह के आयोजन को लेकर सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्या० (अपेक्स बैंक) के प्राधिकृत अधिकारीकेदार नाथ गुप्ता, छ०ग०राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड के अध्यक्षशशिकांत द्विवेदी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्षप्रीतपाल बेलचंदन, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक राजनांदगांव अध्यक्षसचिन बघेल, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक …

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में रायगढ़ के खनन प्रभावित क्षेत्रों को 26 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर

 मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्रीओ.पी. चौधरी के सतत प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पशु चिकित्सा एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों ग्रामीण परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

स्वीकृत कार्यों में सर्वाधिक 16 करोड़ 73 लाख 27 हजार रुपये की लागत से रायगढ़ शहर के विजयपुर क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले सीनियर सिटीजन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण किया जाएगा। यह आधुनिक केंद्र वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा।

स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण एवं उन्नयन हेतु कुल 9 करोड़ 52 लाख 71 हजार रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन कार्यों के पूर्ण होने से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए जिले में नवीन पशु चिकित्सालय भवनों के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। रायगढ़ विकासखंड के पतरापाली सहित विभिन्न ग्रामों में पशु चिकित्सालय भवनों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार एवं परामर्श सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लैलूंगा, तमनार, घरघोड़ा एवं रायगढ़ विकासखंड के विभिन्न गांवों में नलकूप खनन एवं पंप स्थापना के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं से ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत मिलेगी और जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी।

शिक्षा, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए तमनार विकासखंड के पेलमा एवं लालपुर में नवीन आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण तथा पेलमा एवं खर्रा में प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। वहीं रायगढ़ विकासखंड के लामीदरहा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भवन निर्माण के लिए भी राशि मंजूर की गई है, जिससे ग्रामीणों को राशन वितरण की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

जिला प्रशासन ने सभी निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पशु चिकित्सा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह विकास पैकेज रायगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

‘सेफ क्लिक’ अभियान के तहत प्रदेशभर के नव आरक्षकों को दिया जा रहा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

भोपाल 

पुलिस महानिदेशककैलाश मकवाणा के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित साइबर जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक 2.0’ को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों को 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी प्रशिक्षण में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 637 नव आरक्षकों को राज्य साइबर पुलिस उज्जैन इकाई के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी (फाइनेंशियल फ्रॉड), ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकारों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। नव आरक्षकों को साइबर अपराध होने की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र, साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों एवं डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग, साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के प्रभावी उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों ने मानव श्रृंखला बनाकर साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने तथा समाज को जागरूक करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन श्रीमती मनीषा पाठक सोनी, राज्य साइबर पुलिस उज्जैन इकाई की पुलिस अधीक्षक श्रीमती लीना मारोठ, उप पुलिस अधीक्षकनंदकिशोर मालवीय, श्रीमती शैलजा भदोरिया, सहायक लोक अभियोजन अधिकारीप्रहलाद घटिया सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘सेफ क्लिक’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेशभर में विभिन्न प्रशिक्षण, जनसंवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

 

मानसून को लेकर नया अपडेट, 45 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

भोपाल

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अब 27 से 30 जून के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) सक्रिय होने की संभावना है। इसके बाद ही मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

भोपाल में तेज धूप, नौगांव सबसे गर्म

राजधानी भोपाल में गुरुवार को दिनभर तेज धूप रही। बारिश नहीं होने के कारण उमस और गर्मी का असर बढ़ गया। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। छतरपुर जिले का नौगांव गुरुवार को प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मंडला में तापमान सामान्य से 4.9 डिग्री ज्यादा 37.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
दक्षिणी हिस्सों में आंधी और बौछारें

प्रदेश के आसपास बने प्रेरित चक्रवात के प्रभाव से गुरुवार को दक्षिणी हिस्सों में मौसम बदला। कई जगह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और गरज-चमक के साथ बौछारें हुईं।

सबसे अधिक 11 मिलीमीटर वर्षा श्योपुर और बालाघाट जिले के मलाजखंड में दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा में भी हल्की से तेज वर्षा हुई।
 

45 जिलों के लिए अलर्ट जारी

मौसम केंद्र ने प्रदेश के 45 जिलों के लिए आरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

आरेंज अलर्ट: सीहोर, आगर

येलो अलर्ट: भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपूर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, मैहर और पांढ़ुर्णा।
वर्षा आंकड़े (शाम साढ़े पांच बजे तक)
शहर     वर्षा (मिलीमीटर)

इंदौर     9.0
खंडवा     6.0
श्योपुर     11.0
शिवपुरी     4.0
छिंदवाड़ा     0.6
बालाघाट जिले का मलाजखंड     11.0
चार बड़े शहरों का तापमान

शहर     अधिकतम तापमान     न्यूनतम तापमान

भोपाल     32.8     22.0
इंदौर     33.9     21.5
ग्वालियर     40.5     29.5
जबलपुर     38.1     26.1

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