कमर्शियल सिलिंडर पर केंद्र का बड़ा फैसला, गैर-घरेलू पैक्ड LPG से हटे सभी प्रतिबंध

 नई दिल्ली

 पश्चिम एशिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट के कम होने के संकेतों के बीच केंद्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हालिया संकट के दौरान लागू किए गए अधिकांश सेक्टर-विशिष्ट प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि घरेलू उत्पादन में सुधार और आयातित एलपीजी कार्गो की उपलब्धता बढ़ने से आपूर्ति स्थिति बेहतर हुई है। इसी के मद्देनजर गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं।

उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद

मंत्रालय के अनुसार, संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोकी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल करते हुए पूर्व खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए लगाए गए थे प्रतिबंध

दरअसल, ईरान संघर्ष के बाद वेस्ट एशिया से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई थी। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में सरकार ने घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

बाद में स्थिति में कुछ सुधार होने पर सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया, लेकिन कई क्षेत्रों में आवंटन सामान्य स्तर से काफी कम रखा गया था।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर से LPG उत्पादन की ओर मोड़ा गया कच्चा माल

संकट के दौरान एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विशेष निर्देश जारी किए थे। इसके तहत सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर एलपीजी निर्माण में इस्तेमाल किया गया। इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों, विशेष रूप से रिफाइनिंग सेक्टर की कंपनियों को उत्पादन समायोजन करना पड़ा।

अब आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने इन स्ट्रीम्स का आवंटन धीरे-धीरे फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य उद्योगों के लिए बहाल करने का फैसला किया है। हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि देश में एलपीजी उत्पादन प्रतिदिन 40,000 टन से नीचे न जाए।
कच्चे तेल की कीमतें भी लौटीं सामान्य स्तर पर

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। यही वजह है कि आपातकालीन राशनिंग उपायों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
PNG पर शिफ्ट करने की योजना को मिलेगी रफ्तार

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट एलपीजी उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसके साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जोड़ने की योजना को भी तेज किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिटी गैस नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पात्र एलपीजी उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से PNG पर स्थानांतरित किया जाएगा।
एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने का दिया निर्देश

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं का एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने तथा आपूर्ति प्रबंधन को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

 

NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार ‘आपातकाल’ अध्याय शामिल, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को मिली जगह

नई दिल्ली
भारत में इमरजेंसी लागू होने के लगभग पांच दशक बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पहली बार कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है. इसमें इसे ‘प्रमुख चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज़्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। 

यह जिक्र हाल ही में तैयार की गई सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में मिलता है, जिसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों का विश्लेषण करने वाले एक अध्याय में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। 

एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल’ (Emergency) पर एक सेक्शन जोड़ा गया है. स्कूल के पाठ्यक्रम में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, खासकर तब जब देश ने हाल ही में 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 साल पूरे होने का समय देखा है। 

इस सेक्शन में लिखा गया, ‘भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में आपातकाल लगाया गया. 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता में असंतोष बढ़ रहा था. बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए। 

‘Emergency’ टाइटल से से जोड़ा गया खंड
नई किताब के चैप्टर 6 में लोकतंत्र और उसके सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में बताया गया है. इसी चैप्टर में ‘Emergency’ टाइटल से एक खंड जोड़ा गया है, जिसमें 1975–77 के आपातकाल को भारत में लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। 

किताब के मुताबिक, जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बढ़ते जन-असंतोष, बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रशासन के आरोपों के बीच आपातकाल लगाया गया था. इसमें कहा गया है कि इस दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई. इसके साथ ही कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। 

चैप्टर में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जनआंदोलनों का भी जिक्र है. इसमें बताया गया है कि बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में छात्रों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही. 1977 में आपातकाल हटाया गया, जिसके बाद आम चुनाव हुए और लोगों को मतदान के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। 

अब तक कक्षा 12 के पाठ्यक्रम तक सीमित था विषय
अब तक आपातकाल का विषय कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताबों में पढ़ाया जाता था, जहां आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र के विकास और उसके सामने आई चुनौतियों के संदर्भ में इस दौर को विस्तार से समझाया जाता था। 

कक्षा 9 में इस विषय को शामिल किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि NCERT अब स्टूडेंट्स को भारतीय लोकतंत्र, संविधान और राजनीतिक इतिहास से जुड़े अहम मौकों को स्कूली शिक्षा के शुरुआती चरण में ही रुबरू कराना चाहता है। 

‘Democracy and You’ सेक्शन भी पहली बार जोड़ा गया
नई किताब में पहली बार ‘Democracy and You’ नाम से एक अलग खंड भी जोड़ा गया है. NCERT का कहना है कि इस खंड का मकसद किताब के कंटेंट और छात्रों के असल सामाजिक-राजनीतिक अनुभवों के बीच की दूरी को कम करना है. इसके जरिए छात्रों को ये समझाने की कोशिश की गई है कि वो भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं और उसमें योगदान दे सकते हैं। 

आपातकाल जैसे ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से अहम चैप्टर के साथ इस नए खंड को जोड़कर NCERT ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास और नागरिक भागीदारी को एक ही शैक्षणिक ढांचे में रखने की कोशिश की है। 

इसमें आगे कहा गया,’जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर देश में आपातकाल लागू किया. इस दौरान, ज़्यादातर मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया. लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई। 

किताब में आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया. ‘जयप्रकाश नारायण – जो एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से जाना जाता है – के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, ख़ासकर बिहार और गुजरात में, बड़े पैमाने पर लामबंद किया. 1977 में आपातकाल हटा लिया गया और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला. सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया। 

‘आपातकाल’ (Emergency) वाला हिस्सा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर हो रही व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है. आपातकाल के अलावा यह पाठ्यपुस्तक लोकतांत्रिक कामकाज के लिए चुनौतियों के तौर पर फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है। 

इस अध्याय में ‘लोकतंत्र और आप’ (Democracy and You) नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है. एनसीईआरटी का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। 

आपातकाल के अलावा, संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है. इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास हिस्सा है, जिसमें मीडिया को ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ बताया गया है और लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। 

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए इस किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं. इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और देश भर में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का जिक्र किया गया है। 

यह चैप्टर शासन-व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जिनमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत शामिल हैं. महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में उनके लिए आरक्षण पर भी एक अलग हिस्सा दिया गया है। 

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’, जमीन से आसमान तक रहेगी कड़ी निगरानी

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में सालाना श्री अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए अनंतनाग ज़िले की पुलिस ने ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ शुरू किया है, जो एक व्यापक निगरानी और सुरक्षा पहल है, जिसे पूरे यात्रा मार्ग पर ज़मीन से आसमान तक चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा अगले हफ़्ते अनंतनाग में पहलगाम और गांदरबल में बालटाल दोनों रास्तों से शुरू हो रही है। इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किये गये हैं। सरकार ने जम्मू से गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों यात्रा मार्गों को ‘नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित किया है। पवित्र गुफा मंदिर तक जाने वाले दो पारंपरिक रास्तों में से एक पहलगाम वाला रास्ता चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुज़रता है और दक्षिण कश्मीर हिमालय में लगभग 12,756 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर पर समाप्त होता है।

‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के तहत अनंतनाग पुलिस ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक रूप से जवानों की तैनाती के ज़रिए कई स्तरों वाला सुरक्षा और निगरानी तंत्र तैयार किया है। पुलिस के एक बयान में कहा गया, “ हवाई निगरानी के लिए अहम जगहों पर पांंच ड्रोन तैनात किये जा रहे हैं, जो रियल-टाइम (सही समय पर) निगरानी और हालात की बेहतर जानकारी देंगे। हवाई निगरानी नेटवर्क किसी भी उभरती हुई स्थिति का तुरंत आकलन करने और ज़मीनी इकाइयों द्वारा त्वरित कार्रवाई करने में मदद करता है।”

पुलिस के अनुसार ज़मीन पर निगरानी क्षमता को मज़बूत करने और इलाके पर बेहतर नियंत्रण रखने के लिए संवेदनशील जगहों पर 28 रणनीतिक ‘मचान मोर्चे’ (ऊंचे निगरानी पोस्ट) बनाये गये हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने और प्रभावी कार्रवाई की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए तय जगहों पर 22 विशेष रूप से प्रशिक्षित निशानेबाज टीमें भी तैनात की गयी हैं। निगरानी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, यात्रा मार्ग पर अहम जगहों पर 416 हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और चेहरा पहचानने वाली प्रणाली (ईआरएस) स्थापित की गयी है। 

पुलिस ने कहा, “यह प्रणाली लगातार रियल-टाइम निगरानी करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों या हरकतों की समय पर पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे सुरक्षा के एहतियाती उपाय मज़बूत होते हैं।”

‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के ज़रिए, अनंतनाग पुलिस ने आसमान और ज़मीन पर अपनी नज़रें प्रभावी ढंग से जमा ली हैं और एक ऐसा बेहतरीन निगरानी नेटवर्क बनाया है, जो यात्रा मार्ग की पूरी निगरानी सुनिश्चित करता है।

पुलिस ने कहा, “यह पहल सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल देने के लिए आधुनिक तकनीक और पेशेवर पुलिसिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के प्रति अनंतनाग पुलिस की प्रतिबद्धता को दिखाती है।”

रामगढ़ महोत्सव को भव्य बनाने में जुटा प्रशासन, मंत्री राजेश अग्रवाल ने तैयारियों का लिया जायजा

रायपुर

 पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने गुरुवार को सरगुजा जिले के विकासखंड उदयपुर स्थित रामवनगमन पर्यटन परिपथ एवं विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला रामगढ़ का विस्तृत स्थल निरीक्षण कर महोत्सव की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने आयोजन स्थल पर पहुंचकर विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होने वाला यह महोत्सव प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता का महत्वपूर्ण उत्सव होगा, इसलिए आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं आकर्षक होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मंत्रीअग्रवाल ने सीताबेंगरा, हाथी पोल, हेलीपैड, मुख्य मंच, पार्किंग स्थल, पंडाल, बैठक व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, पेयजल, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों द्वारा लगाए जाने वाले प्रदर्शनी एवं विभागीय स्टॉलों की तैयारियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से सीताबेंगरा और हाथी पोल क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि महोत्सव में आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा, आगंतुकों की आवाजाही, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा प्रबंधन तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आयोजन को सफल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें ताकि रामगढ़ महोत्सव प्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप भव्य और यादगार आयोजन के रूप में स्थापित हो।

मंत्रीअग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, ऐतिहासिक धरोहरों और पुरातात्विक महत्व को नई पहचान देने का अवसर है। यह आयोजन न केवल पर्यटन को नई गति देगा, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं रोजगार के नए अवसरों को भी प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण रामगढ़ की ओर बढ़ेगा और सरगुजा क्षेत्र पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

उन्होने आगे कहा कि रामगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम है। रामगढ़ की विश्वविख्यात धरोहरों, सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाओं तथा रामवनगमन पर्यटन परिपथ को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य को लेकर आगामी 29 एवं 30 जून को आयोजित होने वाले दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव की सभी तैयारियां समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण की जा रही हैं।

कलेक्टरअजीत वसंत ने भी सभी विभागीय अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का समय पर निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकराजेश अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीविनय कुमार अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंतावीरेंद्र चौधरी, अनुविभागीय अधिकारीरामराज सिंह, उदयपुर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीवेद प्रकाश गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ विजेताओं को 26 जून को वितरित होंगे उपहार

रायपुर

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 के अंतर्गत लक्की ड्रॉ में चयनित हितग्राहियों को उपहार वितरण समारोह 26 जून 2026 को न्यू सर्किट हाउस परिसर, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा। इसी अवसर पर मंडल के नवीन लोगो का भी विमोचन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा 23 नवम्बर 2025 से 31 दिसम्बर 2025 तक विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों के लिए 22 जून 2026 को विशेष लक्की ड्रॉ आयोजित किया गया था। इस ड्रॉ में विजेताओं का चयन मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन सहित अनेक आकर्षक उपहारों के लिए किया गया है।

उपहार वितरण समारोह में लक्की ड्रॉ के चयनित विजेताओं को सम्मानपूर्वक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही मंडल द्वारा आयोजित नवीन लोगो डिजाइन प्रतियोगिता के विजेता रचनाकार को 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी।

समारोह में मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण मंत्रीओ.पी. चौधरी करेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्षअनुराग सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम का आयोजन 26 जून 2026, शुक्रवार को दोपहर 1:30 बजे से किया जाएगा। कार्यक्रम उपरांत आवास एवं पर्यावरण मंत्रीओ.पी. चौधरी दोपहर 3:00 बजे प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे।

मंडल ने सभी लक्की ड्रॉ विजेताओं, हितग्राहियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों को समारोह में सहभागी बनने हेतु आमंत्रित किया है।

CM साय ने केंद्रीय नेताओं से की बस्तर के विकास पर चर्चा, आयुर्वेदिक AIIMS खोलने की उठाई मांग

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने दो दिवसीय दिल्ली प्रवास से रायपुर लौटे। इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि दिल्ली में केंद्रीय नेताओं के साथ छत्तीसगढ़ के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सार्थक बातचीत हुई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान बस्तर क्षेत्र के विकास और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी सौजन्य मुलाकात की। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी मिलकर छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक एम्स स्थापित करने की मांग रखी। सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है और यहां विभिन्न प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसे में राज्य में आयुर्वेद आधारित शोध और उपचार को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना आवश्यक है। इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी गई है।

यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए बेहतर व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बनाए गए यूथ हॉस्टल का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वहां रहकर पढ़ाई करने वाले 13 विद्यार्थियों ने यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) उत्तीर्ण की है। अब इन अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा (Mains) की बेहतर तैयारी के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

आपातकाल को बताया संविधान हत्या दिवस
भाजपा आपातकाल को आज काला दिवस के रूप में आज मना रही है। 25 जून को आपातकाल की वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है। 25 जून 1975 को देश में लोकतंत्र की हत्या हुई थी और उस दौरान गैर-कांग्रेसी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया था। सीएम साय ने कहा कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के संवैधानिक अधिकार छीन लिए गए थे और लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया गया था। नई पीढ़ी को उस दौर की जानकारी हो, इसलिए एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में आपातकाल को शामिल किया गया है।

कोचिंग सेंटरों की होगी जांच
हाल ही में लखनऊ के कोचिंग संस्थान में हुए हादसे का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव (सीएस) को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी कोचिंग सेंटरों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

धार्मिक पहचान छिपाकर शादी का मामला, कोर्ट ने पत्नी-बेटी के लिए ₹20 हजार मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया

 इंदौर
 धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने और बाद में मतांतरण के लिए दबाव बनाने से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने कहा कि यदि किसी महिला से धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह किया और उससे संतान भी जन्मीं हो, तो केवल विवाह की वैधता के तकनीकी आधार पर महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने पीड़िता और उसकी अवयस्क पुत्री के लिए 10-10 हजार रुपये, यानी कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया है।

याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि 23 फरवरी 2020 को कोरोना के दौरान मुस्तफा ने स्वयं को हिंदू बताकर एक महिला से मंदिर में विवाह किया था।

जब महिला गर्भवती हुई, तब उसे आधार कार्ड के माध्यम से पति की वास्तविक धार्मिक पहचान का पता चला। आरोप है कि इसके बाद पति ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई।

महिला ने परिवार न्यायालय में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन 2023 में परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया कि वह कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है।

अदालत ने केवल उसकी पुत्री के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसके बाद अदालत ने परिवार न्यायालय के फैसले को पलटते हुए दोनों के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये भरण-पोषण की राशि का आदेश दिया।

 

CA इंटरमीडिएट में भोपाल के ईशान का जलवा, देश के टॉप-15 में बनाई जगह

भोपाल
 द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने सीए इंटरमीडिएट परीक्षा मई 2026 के परिणाम जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में भोपाल परीक्षा केंद्र के छात्र ईशान मुकेश मंगल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में 15वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. ईशान मुकेश मंगल ने 600 में से 476 अंक (79.33 प्रतिशत) हासिल कर भोपाल में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 

ईशान मुकेश ने देश में रोशन किया भोपाल का नाम
वहीं, भोपाल में दूसरे स्थान पर मान्या गोस्वामी (64.50 प्रतिशत) रहीं. जबकि मोहित कछवानी और नंदिनी गुप्ता ने 62.83 प्रतिशत अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरा और सक्षम अग्रवाल (58.67 प्रतिशत) ने चौथा स्थान प्राप्त किया है. इस परीक्षा में भोपाल से दोनों ग्रुप में शामिल हुए 215 उम्मीदवारों में से 13 छात्रों ने दोनों ग्रुपों को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। 

9 महीने की मेहनत में पाई सफलता
ईशान ने ईटीवी भारत को बताया, “सीए फाउंडेशन का परिणाम जारी होते ही आगे की पढ़ाई का एक खाका खींच लिया था. 9 महीनों में समय का पूरा सदुपयोग किया. इसके लिए सिलेबस को भी छोटे-छोटे भागो में बांट कर पढ़ाई की. शुरुआत के चार महीनों में ग्रुप-2 के सभी विषयों के साथ-साथ टैक्सेशन के पाठ्यक्रम को पूरा किया। 

शॉर्ट फॉर्म तकनीक ने दिलाई सफलता
उन्होंने आगे बताया, “ग्रुप-1 की पढ़ाई के साथ ही रिवीजन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी और अंतिम ढाई महीने केवल रिवीजन पर केंद्रित रखा. टैक्सेशन विषय को बार-बार प्रोविजन्स पढ़कर मजबूत किया. वहीं, ऑडिट जैसे थ्योरी विषय को सरल रूप में याद रखने के लिए शिक्षकों द्वारा सिखाई गई शार्ट फॉर्म तकनीक का उपयोग किया। 

रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन
ईशान ने आगे बताया, “नियमित दिनचर्या में रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन करते थे, जिसे मुख्य परीक्षा से एक महीना पहले बढ़ाकर 12 घंटे तक कर दिया था. विषयों को समझने के लिए क्लासेस की मदद ली और खुद के मूल्यांकन के लिए सेल्फ स्टडी का सहारा लिया. वहीं, अंतिम समय में किसी भी तरह के मानसिक तनाव से बचने के लिए कोई भी नया टॉपिक नहीं छुआ. बस पहले से पढ़े गए नोट्स का ही अभ्यास किया. इस दौरान इंस्टाग्राम जैसे मनोरंजन आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूरी बना ली थी। 

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, छतरपुर के 54 गांवों से होगा भूमि अधिग्रहण

छतरपुर 

बुंदेलखंड क्षेत्र के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतर रही है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छतरपुर जिले के 54 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तीव्र गति पकड़ ली है। वहीं, परियोजना के विस्तार के क्रम में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है। कलेक्टर की वर्तमान गाइडलाइन दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा।

छतरपुर में धारा 11 का प्रकाशन पूरा
छतरपुर जिले में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि जिले के 54 प्रभावित गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा 11 वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। धारा 19 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नहर परियोजना प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के बदले सरकारी गाइडलाइन से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रशासन अब मुआवजा वितरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तत्पर है।

उत्तर प्रदेश में भी प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार
परियोजना की व्यापकता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी कार्य ने गति पकड़ी है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई (सीमांकन) के लिए 15 जून 2026 को निविदा जारी कर दी गई है। यह निविदा झांसी जिले में केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई के कार्य के लिए जारी की गई है, जिससे परियोजना के इस हिस्से में भी निर्माण कार्य की नींव रखी जा सके।

पारदर्शिता का अधिकार
मुआवजे की राशि तय करने के लिए गांव की सरकारी गाइडलाइन और क्षेत्र में हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री की औसत दर में से जो भी अधिक होगा, उसी को आधार मानकर भुगतान किया जाएगा।

एक्सपेरिमेंट ने बर्बाद किए कीमती दो साल
परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआत में अधिकारियों ने 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के एक बड़े हिस्से (लगभग 65 किमी) को भूमिगत सुरंग के जरिए ले जाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रयोगात्मक मॉडल के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे भूमि अधिग्रहण कम होगा और पानी का वाष्पीकरण रुकेगा। लेकिन हकीकत के धरातल पर यह योजना अत्यधिक महंगी और जोखिम भरी साबित हुई। लंबे समय तक चले विचार-मंथन के बाद अंतत: इस टनल प्रस्ताव को अव्यावहारिक मानकर निरस्त कर दिया गया है।

इस तकनीकी हेर-फेर के चक्कर में परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से लिंक नहर का काम दो साल पिछड़ गया है। नहर का मार्ग आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर से निर्धारित किया गया है. जिससे किसी भी गांव के पूर्ण विस्थापन का संकट नहीं है। नहर की मुख्य संरचना और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 100 मीटर चौड़ी पट्टी में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि कानून के तहत मिलने वाले उचित मुआवजे से स्थानीय किसानों के आर्थिक स्तर में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी।

218 किमी लंबी नहर और चार गुना मुआवजा
केन नदी पर निर्माणाधीन ढोड़न बांध से बेतवा नदी तक बनने वाली यह 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए संजीवनी साबित होगी। छतरपुर जिले से होकर गुजरने वाले इसके 107 किलोमीटर के हिस्से के लिए किसानों को मध्य प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। जिसको लेकर राज्य केबिनेट ने भी बीते माह चार गुना मुआवजा पर मुहर लगाई थी। परियोजना के लिए कुल 1488.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है जिसमें 54 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है।

विकासखंड/तहसील गांवों की संख्या मुख्य प्रभावित गांव

छत्तरपुर विकासखंड 17-बंधीकला, ईशानगर, लहेरा, दिदौल, राजापुरवा आदि

महाराजपुर तहसील 12-मऊ, नुना, पड़वाहा आदि

राजनगर विकासखंड 11- गंज, करी, पहरा, सीलोन, कोटा, बरद्वाहा आदि

नौगांव विकासखंड 07 – लुगासी, नयागांव, तिंदनी आदि

बिजावर व सटई तहसील 07-करोदिया, दिदौनियां आदि

मॉनसून में तालाब नहीं बनेंगी सड़कें! नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश, जानिए क्या कहा

मुंबई 

मॉनसून में अक्सर सड़कों के तालाब बन जाने की खबरों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बारिश आने से पहले ही तैयारी करने के जरूरी निर्देश दिए हैं. गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत किया जाए और खराब मौसम के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं। 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के अनुसार, यह निर्देश उन समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का आकलन किया गया है. गडकरी ने सड़क परिवहन की नींव राष्ट्रीय राजमार्गों पर खासतौर पर ध्यान रखने के लिए कहा है। 

इन परियोजनाओं में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिली प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई। 

बैठकों के दौरान गडकरी ने चल रही परियोजनाओं, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी राजमार्ग बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की। 

गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर काम पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा। 

मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) तैनात करने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, ये कदम राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। 

गडकरी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। 

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