मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों पर अवैध रेत कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज

मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों पर अवैध रेत कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज

अवैध रेत भंडारण पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, गुडलू में 135 घनमीटर रेत जब्त

83 हजार रुपये से अधिक अर्थदंड व राजस्व वसूला गया, नियम तोड़ने वालों को चेतावनी

रायपुर, 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, जवाबदेही और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण संबंधी स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप जशपुर जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज गतिविधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अवैध रेत भंडारण एवं रेत तस्करी संबंधी शिकायत पर खनिज विभाग ने त्वरित जांच कर बड़ी कार्रवाई की है।

जांच के दौरान बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत गुडलू में 19 जून 2026 को 135 घनमीटर रेत का अवैध भंडारण पाया गया। शिकायत प्राप्त होते ही खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर लिया। मामले में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

कार्रवाई के दौरान अवैध रेत भंडारण के मामले में 40 हजार 780 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। वहीं अवैध रेत परिवहन के चार अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 42 हजार 736 रुपये की राशि खनिज मद में जमा कराई गई। इस प्रकार कुल 83 हजार रुपये से अधिक की राशि अर्थदंड एवं राजस्व के रूप में वसूल की गई।

सहायक खनि अधिकारी ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा शासन को होने वाली राजस्व हानि को रोकना है।

 प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन या भंडारण की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें, ताकि त्वरित कार्रवाई कर ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी दिव्यांग चांदनी के लिए सहारा, एक शिकायत पर मिली पेंशन की सुविधा

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी दिव्यांग चांदनी के लिए सहारा, एक शिकायत पर मिली पेंशन की सुविधा

समयबद्ध कार्रवाई से दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ हुआ सुनिश्चित

रायपुर
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रदेशवासियों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच बनकर सामने आई है। हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायतों पर तत्परता से कार्रवाई कर पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है।

इसी क्रम में जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घरजियाबथान निवासी योगेश यादव ने अपनी 65 प्रतिशत दिव्यांग पुत्री चांदनी यादव को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत दिव्यांग पेंशन का लाभ नहीं मिलने की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई थी।

शिकायत प्राप्त होते ही जनपद पंचायत पत्थलगांव एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पंचायत सचिव के माध्यम से आवेदन एवं आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर प्रकरण की जांच की गई। जांच में चांदनी यादव को दिव्यांग पेंशन योजना के लिए पात्र पाया गया, जिसके बाद उनकी पेंशन स्वीकृत करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

अब चांदनी यादव को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत नियमित रूप से पेंशन का लाभ प्राप्त होगा। निर्धारित समय-सीमा में शिकायत का सफल निराकरण कर प्रकरण का निस्तारण किया गया।

चांदनी के पिता योगेश यादव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी और भरोसेमंद साबित हो रही है। उन्होंने अपनी पुत्री को समय पर न्याय एवं योजना का लाभ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

24 घंटे सक्रिय है मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेश के नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कराने के साथ-साथ सुझाव एवं फीडबैक भी साझा कर सकते हैं। हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक आसानी से अपनी समस्याएं शासन तक पहुंचा सकते हैं।

राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं और 1195 श्रेणियों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है।

यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण और जांच के लिए भेज दिया जाता है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे संचालित रहती है। इसके संचालन के लिए तीन पालियों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है तथा सचिव स्तर के अधिकारी और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शासन की संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितैषी कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर जरूरतमंद नागरिकों तक समय पर राहत और योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

खेतों तक समय पर पहुंच रहे कृषि आदान, किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

खेतों तक समय पर पहुंच रहे कृषि आदान, किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रायपुर, 
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है। सहकारिता विभाग और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, रासायनिक खाद, डीएपी और नैनो यूरिया समय पर एवं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाने से किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसका लाभ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला अंतर्गत ग्राम पंचायत लालपुर के प्रगतिशील किसान विष्णु राठौर को भी मिला है, जिन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया है।

धान की खेती के साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसान विष्णु राठौर बताते हैं कि पहले खेती के मौसम में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। कई बार आवश्यक कृषि आदान समय पर नहीं मिलने से बुआई और फसल प्रबंधन प्रभावित होता था। लेकिन अब सहकारी समिति के माध्यम से उन्हें जरूरत के अनुसार उन्नत बीज, रासायनिक खाद, डीएपी और नैनो यूरिया समय पर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे खेती की पूरी योजना व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है और फसलों का पोषण भी बेहतर तरीके से हो पा रहा है।

राठौर ने बताया कि नैनो यूरिया तथा संतुलित उर्वरकों के उपयोग से धान की फसल में अच्छी बढ़वार हुई है और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं सब्जी फसलों की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ पैदावार भी बढ़ी है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता से खेती की लागत नियंत्रित हुई है तथा कृषि कार्यों का प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक आसान और प्रभावी हो गया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाएं और सहकारिता विभाग की प्रभावी व्यवस्था किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही हैं। सहकारी समिति के माध्यम से खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता से अब किसानों को कृषि सामग्री के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता और खेती का कार्य समय पर पूरा हो जाता है। इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और खेती के प्रति उनका उत्साह भी पहले से अधिक हुआ है।

राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों, सहकारिता विभाग की सुदृढ़ वितरण व्यवस्था तथा सहकारी समितियों की सक्रिय भूमिका से प्रदेश में कृषि व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा और किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। किसान विष्णु राठौर की सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। साय सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

CM साय ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद-बीज उपलब्धता पर हुई अहम चर्चा

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान जनस्वास्थ्य, चिकित्सा अधोसंरचना, औषधि एवं उर्वरक क्षेत्र सहित विभिन्न विभागीय और समसामयिक विषयों पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई।

ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर उपचार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हों।

किसानों के लिए खाद और बीज आपूर्ति पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि और उर्वरक क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी कि राज्य में किसानों को खाद और बीज की पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े तथा खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक कृषि आदानों की आपूर्ति सुचारु रूप से बनी रहे।

कालाबाजारी पर सख्ती और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खाद वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जाए और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा लापरवाही को कतई बर्दाश्त न किया जाए। साथ ही गांव-गांव अभियान चलाकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि राज्य सरकार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। किसानों को इनके लाभों की जानकारी देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि खेती में उत्पादन क्षमता बढ़े, लागत कम हो और कृषि अधिक लाभकारी बन सके।

केंद्र से सहयोग से राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए प्रयासरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भारत सरकार के पूर्ण सहयोग से स्वास्थ्य, कृषि और जनकल्याण के क्षेत्रों में विकास को नई गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों तथा जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने स्वास्थ्य एवं अन्य विकासात्मक क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

महतारी वंदन योजना में फिर जुड़ेंगे नए नाम, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पोर्टल खोलने का दिया भरोसा

रायपुर.

महतारी वंदन योजना से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. योजना से अब तक नहीं जुड़ पाईं विवाहित महिलाओं के लिए जल्द ही पोर्टल खोलने की तैयारी है. महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री की अनुमति मिल चुकी है, और अगले एक सप्ताह के भीतर पोर्टल शुरू करने की तैयारी की जा रही है.

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में बताया कि पोर्टल खोलने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जाएगी. सबसे पहले बस्तर संभाग के जिलों में पोर्टल खोला जाएगा, जिसके बाद प्रदेश के अन्य संभागों में भी आवेदन और पंजीयन की सुविधा शुरू की जाएगी. इस माध्यम से सरकार का उद्देश्य उन पात्र महिलाओं को योजना का लाभ पहुंचाना है, जो किसी कारणवश अब तक आवेदन नहीं कर सकी हैं, या जिनका नाम योजना में शामिल नहीं हो पाया है.

बता दें कि महतारी वंदन योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है. पोर्टल खुलने से बड़ी संख्या में ऐसी महिलाओं को राहत मिलेगी जो लंबे समय से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रही थीं. पोर्टल शुरू होने के बाद पात्र महिलाएं आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकेंगी. इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे. महतारी वंदन योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक पात्र महिलाओं को इसका लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है.

मध्य प्रदेश में हर चुनाव लड़ेगी शिवसेना, राष्ट्रीय सचिव बोले- उद्धव के घमंड से टूटी पार्टी

छिन्दवाड़ा 
 शिवसेना मध्य प्रदेश में हर तरह के चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी. ये कहना है शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल का. छिंदावाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे अभिजीत ने कहा कि शिवसेना अब पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा में भी अपने कैंडिडेट उतारकर चुनाव लड़वाने जा रही है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी है। 

उद्धव के घमंड से टूट गई शिवसेना : अभिजीत
शिंदे गुट शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल ने छिन्दवाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया. कार्यकर्ताओं के इस सम्मेलन में उन्होंने पार्टी विस्तार की रणनीति के साथ ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को पार्टी से जोड़ने और सदस्यता अभियान चलाने की बात कही. महाराष्ट्र में चले ऑपरेशन टाइगर पर अभिजीत ने कहा, ” शिवसेना UBT को छोड़कर 6 सांसद शिवसेना शिंदे में शामिल हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उद्धव ठाकरे की अकड़बाजी (घमंड) है क्योंकि वे कार्यकर्ताओं से ठीक से व्यवहार और उनसे मुलाकात भी ठीक से नहीं करते थे, जिसकी वजह से कार्यकता दूर होते गए और फिर उन्होंने लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे का साथ पकड़ लिया। 

2 साल पहले भी चला था एक ऑपरेशन
अभिजीत अडसूल ने कहा, ” 2 साल पहले भी एक ऐसा ही ऑपरेशन महाराष्ट्र में चला था क्योंकि शिवसेना के हाई कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को वक्त नहीं देते थे. 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ अलग हुए. शिंदे मुख्यमंत्री बने थे और हमने पार्टी को खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की लेकिन अपनी आंखों के सामने पार्टी की स्थिति खराब होती देखना पसंद नहीं था. इसलिए हमें उद्धव ठाकरे को अलग करना पड़ा क्योंकि बाला साहब ठाकरे ने जिस उद्देश्य से पार्टी का गठन किया था, वो अपने उद्देश्यों से भटक रही थी। 

बीजेपी और शिंदे शिवसेना के विचार एक : अभिजीत
शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल ने कहा, ” बालासाहेब ठाकरे के सपनों को सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने उसी दिन तोड़ दिया था, जब कांग्रेस और NCP ने मिलकर सरकार बनाई थी, जिससे महाराष्ट्र का विकास रुक रहा था. शिंदे की सरकार बीजेपी के साथ बनी तो महाराष्ट्र ने फिर से विकास की रफ्तार पकड़ ली क्योंकि बीजेपी के साथ विचार भी मिलते हैं. अब केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार मिलकर विकास कर रही है। 

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

विद्यार्थियों में कौशल, योग और सामाजिक सरोकार करें विकसित  
विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक लोकभवन में

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

भोपाल 

भारतीय संस्कृति में जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का साक्षात स्वरूप और चेतना का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में ‘अपः पुरुषरूपेण’ कहकर जल की वंदना की गई है, जिसका सीधा अर्थ है कि जल में ही साक्षात ईश्वर का वास है। इसी पावन और दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैमाना बनाते हुए ‘हर घर जल’ के संकल्प को साकार किया। उनके मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहलें हुईं, जिन्होंने देश को जल संरक्षण की एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के इसी वैश्विक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में जल क्रांति का सूत्रपात किया है। उन्होंने जल संरक्षण को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाते हुए संस्कृति, आदत और राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बना दिया है, जिसके कारण आज उन्हें संपूर्ण प्रदेश में एक जनप्रिय ‘जल नायक’ के रूप में देखा जा रहा है।

उज्जैन विकास प्राधिकरण से मुख्यमंत्री पद तक: 22 वर्षों से अधिक का भागीरथ संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की जल संपदा को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण की यह यात्रा कोई तात्कालिक प्रयास नहीं है, बल्कि इसके पीछे 22 वर्षों से अधिक का अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और दूरगामी सोच है। इस यात्रा की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने उज्जैन की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना लिया। महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, उनके नवरत्नों की गौरवशाली परंपरा तथा मालवा की जीवनदायिनी माँ शिप्रा के संरक्षण और जल संवर्धन के प्रति उनकी गहरी आस्था ने एक व्यापक सांस्कृतिक चेतना को जन्म दिया। उनके द्वारा आरंभ की गयी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक आस्था को सशक्त करने के साथ-साथ उज्जैन और शिप्रा नदी से जुड़े सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन महत्व को पुनर्स्थापित कर रही है। इस पहल के माध्यम से शिप्रा के घाटों, तीर्थ स्थलों और प्राचीन परंपराओं को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नदी संरक्षण महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा जन सामान्य सीधे जुड़ रहा है। एक युवा जननेता के रूप में उन्होंने तत्कालीन समय में ही यह समझ लिया था कि बिना जल स्रोतों के संरक्षण के किसी भी सभ्यता या नगर का विकास दीर्घकालिक नहीं हो सकता और अगर इस चिंता पर समाधान के कार्य नहीं किए गए तो भविष्य के लिए सकंट पैदा होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक की अपनी यात्रा में डॉ. मोहन यादव ने हमेशा जल संवर्धन के मुद्दों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा। वे समय-समय पर तत्कालीन मुख्यमंत्रियों और नीति-निर्माताओं को माँ शिप्रा के संरक्षण एवं जल संवर्धन के लिए प्रेरित करते रहे। वर्षों से उनके मन में नदियों और पर्यावरण के प्रति जो संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता रही, वही आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे विराट जनआंदोलन के रूप में साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले दो दशकों में जल संरक्षण के जो बीज बोए थे, वे आज एक विशाल वटवृक्ष बनकर पूरे मध्यप्रदेश को अपनी शीतलता और समृद्धि से सराबोर कर रहे हैं। उनकी इसी सजगता, दूरदर्शिता और अटूट निष्ठा ने उन्हें मध्यप्रदेश के ‘जल नायक’ के रूप में स्थापित किया है।

आस्था की जीवनदायिनी माँ शिप्रा का पुनरुद्धार और अविरल प्रवाह

मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है और इसी मायके की सबसे पवित्र और पूजनीय नदियों में से एक है माँ शिप्रा। मालवा की गंगा कही जाने वाली और प्राचीन नगरी अवंती को अपने आंचल में समेटने वाली शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। इसी पावन तट पर विश्व प्रसिद्ध ‘सिंहस्थ’ महापर्व का आयोजन होता है, जहाँ बाबा महाकाल की छत्रछाया में देश-विदेश से आए श्रद्धालु पुण्य लाभ कमाते हैं। परंतु, समय के साथ बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण शिप्रा के आंचल पर प्रदूषण का साया मंडराने लगा था। इंदौर से आने वाली खान नदी और सीवरेज का गंदा पानी इसमें मिलने से इसकी पवित्रता प्रभावित हो रही थी। जब आस्था की इस जीवनदायिनी पर संकट आया, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अपनी व्यक्तिगत और शासकीय प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा। इंदौर जिले के निकट काकरी बर्डी पहाड़ी से निकलने वाली 195 किलोमीटर लंबी इस पवित्र नदी को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाना उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प बन गया।

साल 2024 की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिप्रा नदी के जीर्णोद्धार के लिए स्वयं कमान संभाली और एक के बाद एक कई उच्च स्तरीय बैठकें कर कड़े निर्णय लिए। उन्होंने 7 जनवरी 2024 को उज्जैन में आयोजित पहली बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवरेज का गंदा पानी शिप्रा में मिलना तुरंत रोका जाए। इसके लिए उन्होंने सांवेर, रामवासा, पंथपिपलई और राघौपिपल्या में स्टॉपडैम और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की व्यापक कार्ययोजना तैयार करवाई। टाटा प्रोजेक्ट्स के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि नृसिंह घाट से लेकर रामघाट तक गंदगी का एक कतरा भी दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके बाद 13 फरवरी 2024 को हुई दूसरी बैठक में उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कान्ह नदी के गंदे पानी का ट्रीटमेंट धर्मपुरी से ही शुरू किया जाए और उस साफ किए गए पानी को डायवर्ट कर किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि नदी में केवल शुद्ध जल ही प्रवाहित हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह मुहिम यहीं नहीं रुकी। उन्होंने 2 जुलाई 2024 को तीसरी उच्च स्तरीय बैठक लेकर प्रगति की समीक्षा की और कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। जल संरक्षण के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता का परिणाम था कि 1 दिसंबर 2024 को उज्जैन में केंद्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा की गरिमामयी उपस्थिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एक ऐसी अभिनव कार्ययोजना पर काम कर रही है जिससे न्यूनतम लागत में शिप्रा नदी अविरल होगी और आगामी सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालु किसी अन्य बाहरी नदी के पानी से नहीं, बल्कि माँ शिप्रा के ही शुद्ध और पावन जल से स्नान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केवल बंद कमरों में निर्देश नहीं दिए, बल्कि स्वयं ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत उज्जैन के रामघाट पर हाथों में झाड़ू थामकर स्वच्छता गतिविधियों में हिस्सा लिया और मां शिप्रा का पूजन-अभिषेक कर श्रमदान की अलख जगाई। नदियों के संरक्षण के इसी संकल्प के तहत उन्होंने 26 मई साल 2026 को माँ शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में सहभागिता कर नदी को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की, जिसने पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई दिव्य प्रेरणा का संचार किया।

सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: सिंहस्थ 2028 का दिव्य संकल्प

एक कुशल जल नायक के दूरदर्शी विज़न का ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश में ₹614.53 करोड़ की भारी-भरकम लागत वाली ‘सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना’ पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत उज्जैन के ग्राम सेवरखेड़ी में शिप्रा नदी पर एक विशाल बैराज का निर्माण किया जा रहा है। आधुनिक पंपिंग सिस्टम के ज़रिये सिलारखेड़ी जलाशय में पानी इकट्ठा किया जाएगा और आवश्यकतानुसार उसे शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी में जल का स्तर हमेशा बना रहेगा। इस भगीरथ प्रयास का लगभग 50 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना से न केवल उज्जैन शहर की पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि भविष्य में होने वाले सभी धार्मिक पर्वों पर शिप्रा नदी हमेशा अविरल और निर्मल बहती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मुख्य लक्ष्य सिंहस्थ 2028 के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलौकिक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। इसके लिए उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे आधुनिक और सुविधायुक्त घाटों का निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति से जारी है। यह भव्य इंफ्रास्ट्रक्चर इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि महापर्व के दौरान 24 घंटे में 5 करोड़ श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के सुगमता से पवित्र स्नान कर सकेंगे।

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’: जन आंदोलन से राज्यव्यापी कायाकल्प

भारतीय संस्कृति में यह अनादि काल से माना गया है कि पृथ्वी, पर्वत, नदी और पेड़-पौधों में साक्षात जीवंतता है और वे हमारे लिए परम पूजनीय हैं। जिस प्रकार मानव देह में धमनियों के माध्यम से रक्त का संचार होता है, ठीक उसी प्रकार नदियां भी इस पृथ्वी पर साक्षात जीवन का संचार करती हैं। यही कारण है कि हम सबके अस्तित्व के लिए नदियों का अक्षुण्ण और निरंतर प्रवाह अनिवार्य है। नदियों के प्रवाह को दूषित करना या उनमें मानवीय अवरोध उत्पन्न करना, वास्तव में मानव जीवन की प्रगति में अवरोध उत्पन्न करने के समान है। इसी पावन और वैज्ञानिक दृष्टि को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल स्रोतों के संरक्षण को सर्वोपरि माना और विश्व पर्यावरण दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 5 जून 2024 को रायसेन जिले के झिरी बहेडा स्थित बेतवा नदी के पावन उद्गम स्थल पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया। इस पुनीत अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेतवा नदी के उद्गम स्थल की वैदिक रीति से पूजा-अर्चना की तथा वहां बरगद का पौधा रोपकर संपूर्ण प्रदेश में इस अभियान को एक महा-आंदोलन का रूप दे दिया।

हाल ही में जारी हुई यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट ने संपूर्ण विश्व को जलवायु परिवर्तन और जल संकट के प्रति सचेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के सीधे खतरे में हैं, जबकि राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे चिंताजनक वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में मध्यप्रदेश की स्थिति आज जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भगीरथ प्रयासों से काफी सुदृढ़ है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और चेकडैम का संरक्षण, संवर्धन, गहरीकरण और जीर्णोद्धार करना है।

मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियाँ और तालाब हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, और इनका पुनरुद्धार न केवल जल संकट से मुक्ति दिला रहा है बल्कि हमारे सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित कर पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत 3,61,001 कार्यों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2,40,386 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। प्रदेश का हर जिला, प्रशासन और वहां का हर नागरिक इस जल संरक्षण महायज्ञ में अपनी सर्वश्रेष्ठ आहुति दे रहा है।

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0: पूरे देश में मध्यप्रदेश और उसके जिलों का शानदार प्रदर्शन

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देश भर में अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। पानी बचाने और जल स्रोतों को सहेजने के पूरे हो चुके कार्यों के आधार पर हमारा मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर चमक रहा है। राज्य में अब तक 21,90,930 कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जबकि 1,81,506 कार्यों पर अभी तेज़ी से काम चल रहा है। केवल राज्य ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के जिलों ने भी राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत के शीर्ष 10 जिलों की सूची में प्रदेश का डिंडोरी जिला तीसरे स्थान पर, खंडवा (पूर्वी निमार) पांचवें स्थान पर और शहडोल जिला नौवें स्थान पर अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। शहरों की बात करें तो नगर निगमों की श्रेणी में भी प्रदेश का सुंदर प्रदर्शन रहा है, जिसमें खंडवा नगर निगम ने देश भर में दूसरा स्थान और इंदौर नगर निगम ने पांचवां स्थान पाया है। यह सफलता दर्शाती है कि पानी की हर बूंद को सहेजने के इस पुनीत कार्य में मध्यप्रदेश का प्रशासन और वहां की जनता कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं।

कृषि समृद्धि और जल संचय जनभागीदारी का व्यवहारिक मॉडल

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कृषि समृद्धि और जल संचय जनभागीदारी के व्यवहारिक मॉडल जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए राज्य सरकार द्वारा 10,475.14 करोड़ रूपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। धरातल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संचय को मजबूती देने के लिए रिकॉर्ड कार्य हुए हैं। इसके तहत राज्य में 65,763 फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) का निर्माण कर उन्हें भौतिक रूप से पूर्ण किया गया है, जबकि कूप पुनर्भरण के लिए 96,670 डग वेल रीचार्ज संरचनाएं तैयार की गई हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं रीचार्ज से जुड़े 34,488 कार्यों को पूरा किया गया है। जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के उद्देश्य से प्रदेश में 208 भव्य अमृत सरोवरों का निर्माण व विकास सुनिश्चित किया गया है, 3,129 पारंपरिक जल संरचनाओं का मरम्मत और रखरखाव कर उन्हें नया जीवन दिया गया। साथ ही 5,448 वॉटरशेड संबंधी कार्यों को सफलता के साथ धरातल पर उतारा गया है।

जल चौपालों और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलों, ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी तकनीकों के प्रति प्रशिक्षित किया जा रहा है। “प्रति बूंद अधिक फसल” और “कम पानी में अधिक उत्पादन” के इस मंत्र ने न केवल भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है, बल्कि किसानों की लागत को कम कर उनके उत्पादन और आय में वृद्धि की है। यह मॉडल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि जल नीतियों को जनभागीदारी और कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जाए, तो वे राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा स्तंभ बन सकती हैं।

‘सदानीरा समागम’: वैश्विक पटल पर गूंजा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन अभिनव और दूरदर्शी प्रयासों की गूंज अब केवल मध्यप्रदेश या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भरपूर सराहना मिल रही है। वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ ने जल संरक्षण को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर जैसे विभिन्न देशों के राजनयिकों, राजदूतों और नीति विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

समागम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा संचालित जल प्रबंधन के ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ को आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकता बताया। उन्होंने जनभागीदारी और शासकीय संकल्प के इस अनूठे समन्वय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस मॉडल को अपने-अपने देशों में भी लागू करने की तीव्र इच्छा जताई। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मिली यह स्वीकृति इस बात को प्रमाणित करती है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जल-आत्मनिर्भरता की दिशा में विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो रहा है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और जल-संपन्न मध्यप्रदेश की सुदृढ़ नींव का संकल्प

जल संरक्षण अब मात्र एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में महिलाओं, युवाओं और कृषकों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को एक पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी बना दिया है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ और ‘जल संचय जनभागीदारी’ जैसे प्रयास केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और जल-संपन्न मध्यप्रदेश की सुदृढ़ नींव रख रहे हैं। मध्यप्रदेश आज जल संरचनाओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि, नदियों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में देश का एक अनुकरणीय राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के ‘जल नायक’ के रूप में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास आने वाले समय में स्वर्णिम मध्यप्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होंगे। स्वच्छ, समृद्ध और जल-आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का यह सपना तभी पूर्णता को प्राप्त करेगा, जब हर नागरिक इस महा-अभियान से जुड़कर जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लेगा। आइए, हम सब मिलकर इस जल-आंदोलन के सहभागी बनें और प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के संकल्पों को सिद्ध कर राज्य को प्रगति के शिखर पर ले जाएं।

 

श्रीराम तिवारी

 

आपातकाल के 51 साल: ‘संविधान हत्या दिवस’ पर BJP का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और कार्यक्रम

भोपाल 

आज आपातकाल की 51वीं बरसी है. भारतीय जनता पार्टी इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रुप में मनाती है. आज प्रदेशभर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, संगोष्ठियों की प्रदर्शनी, व्याख्यान, छात्र युवा कार्यक्रम और जन जागरूकता गतिविधियां बीजेपी की ओर से आयोजित की जा रही हैं। आपातकाल दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। समारोह में लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आए मीसाबंदी परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार करीब दो हजार परिवार इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंच से लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर उनके योगदान को याद करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन लोगों के प्रति सम्मान प्रकट करना है जिन्होंने उस दौर में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 

इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे। 

25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

आपातकाल दिवस क्या है?
‘इमरजेंसी डे’ भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक अहम और विवादित दौर की याद दिलाता है. यह उस समय को दर्शाता है जब 25 जून 1975 की रात को पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में घोषित यह आपातकाल लगभग 21 महीनों तक, यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई, प्रेस और मीडिया की आज़ादी पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए और सेंसरशिप लागू की गई थी.  इसके अलावा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था. यह दौर भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। 

मानहानि मामले में राहुल गांधी का यू-टर्न, बोले- बयान का आशय शिवराज या कार्तिकेय से नहीं था

जबलपुर 

कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहे बहुचर्चित मानहानि विवाद में समझौते की संभावनाओं के संकेत उभरते दिखाई दिए हैं। हाई कोर्ट में राहुल गांधी ने एक विस्तृत लिखित आवेदन प्रस्तुत कर कहा है कि उनके वर्ष 2018 के चुनावी भाषण को गलत संदर्भ में लिया गया, जबकि उनका आशय न तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से था और न ही कार्तिकेय सिंह चौहान से।

बुधवार को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राहुल गांधी का आवेदन रिकॉर्ड पर लेते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान से लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की सुनवाई 25 जून को पुनः होगी।

‘राहुल गांधी ने पैर पकड़ कर माफी मांगी’
बीजेपी नेता और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने एक्स पर लिखा है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से ‘पैर पकड़ कर माफी मांगी’ है। बग्गा ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने शिवराज सिंह चौहान के बेटे के खिलाफ झूठे आरोप लगाए और इसकी वजह से उन्हें मानहानि के केस का सामना करना पड़ा।

राहुल गांधी के आवेदन में क्या था?
अब वहीं, राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि उनका बयान कार्तिकेय सिंह के संबंध में नहीं था. उनके वकील ने कोर्ट में बताया कि जिस टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ, उसका संबंध कार्तिकेय सिंह से नहीं था और अगर किसी तरह की गलतफहमी हुई है तो इसके लिए उन्हें बहुत खेद है। 

BJP ने साधा राहुल गांधी पर निशाना
वहीं, इस मामले को लेकर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी को शायद अपने नाम के साथ ‘सॉरी’ जोड़ लेना चाहिए, क्योंकि उन्हें कई बार अपने बयानों पर माफी मांगनी पड़ी है. अमित मालवीय ने कहा कि अगर राहुल गांधी का बयान कार्तिकेय सिंह के बारे में नहीं था, तो फिर उनका नाम क्यों लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर बिना वजह बड़े-बड़े आरोप लगाते हैं और बाद में कोर्ट या तथ्यों के सामने आने पर अपने बयान से पीछे हट जाते हैं। 

मालवीय ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है. उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान देते समय फैक्ट्स की जांच कर लेनी चाहिए। 

तेजिंदर बग्गा का दावा
बीजेपी नेता और भाजपा युवा मो
र्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से जुड़े मानहानि मामले में पैर पकड़कर माफी मांगी है। 

    राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के बेटे कार्तिकेय सिंह से पैर पकड़ कर माफ़ी माफ़ी । राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह पर झूठे आरोप लगाए थे और मानहानि का केस झेल रहे थे ।

बग्गा का आरोप है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ. हालांकि, मामले में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और अदालत में सुनवाई चल रही है। 

राहुल के वकील ने दी यह दलील
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अजय गुप्ता ने दलील दी कि झाबुआ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयान में मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के एक पूर्व मुख्यमंत्री का संदर्भ था। आवेदन में यह भी कहा गया कि बयान को लेकर यदि कोई भ्रम उत्पन्न हुआ, तो उस पर पहले ही खेद व्यक्त किया जा चुका है। 

कार्तिकेय सिंह ने लगाया मानहानि केस
दरअसल, कार्तिकेय सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण का उल्लेख करते हुए ऐसा वक्तव्य दिया, जिससे उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मामला दायर किया था। कोर्ट से राहुल गांधी को समन जारी हुआ था। 

इसी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी हाई कोर्ट पहुंचे हैं। अब उनके ताजा स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने प्रतिपक्ष का पक्ष जानना जरूरी माना है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा है कि मामला टकराव के बजाय सहमति के रास्ते की ओर बढ़ सकता है। आज की सुनवाई इस बहुचर्चित विवाद की दिशा तय कर सकती है।

राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से खेद जताया

    दरअसल, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका डाली है।
    इस याचिका में उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह के खिलाफ अपने कथित अपमानजनक बयान के लिए खेद प्रकट किया है।
    याचिका में राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने जो टिप्पणी की थी, उसका कार्तिकेय सिंह से संबंध नहीं था।

राहुल गांधी के खिलाफ किया मानहानि केस

    इससे पहले कार्तिकेय सिंह ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत की थी।
    उनका आरोप है कि राहुल गांधी के बयान से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।
    एमपी-एमएलए कोर्ट में कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर शिकायत में कहा गया कि 2018 में झाबुआ की एक चुनावी रैली में राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक स्कैंडल का जिक्र करते हुए, उससे उनका नाम जोड़ दिया।
    इसी शिकायत के आधार पर अदालत ने राहुल गांधी को उसके सामने निजी तौर पर पेश होने के लिए समन जारी किया था।
    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसी समन और मानहानि की कार्यवाही को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया है।

 

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