₹60 की पानी की बोतल ₹175 में बेचना पड़ा महंगा, भोपाल के होटल रेडिसन को चुकाने होंगे ₹8 हजार

भोपाल

60 रुपए की पानी की बोतल पर 175 रुपए वसूलने वाले भोपाल के एक बड़े होटल पर उपभोक्ता आयोग का फैसला आया है। आयोग ने माना कि होटल एमआरपी से ज्यादा कीमत ले सकता है, लेकिन उसी राशि पर अलग से जीएसटी वसूलना गलत है।
होटल को उपभोक्ता से अतिरिक्त लिए गए 10.80 रुपए लौटाने, 5 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 3 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

पानी की बोतल की कीमत देखकर आपत्ति जताई
मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे। भोजन के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली। बोतल पर एमआरपी 60 रुपए अंकित थी, लेकिन बिल में इसके 175 रुपए जोड़े गए।

जब बिल आया तो कुल राशि 6809.88 रुपए थी। पानी की बोतल की कीमत देखकर हुकुम सिंह ने आपत्ति जताई, लेकिन होटल प्रबंधन ने राशि वापस नहीं की। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने जून 2026 में फैसला सुनाया।

होटल प्रबंधन बोला- MRP से ज्यादा कीमत लेना जायज
होटल प्रबंधन ने आयोग के सामने तर्क दिया कि होटल और रेस्टोरेंट में बेची जाने वाली वस्तुएं सिर्फ उत्पाद नहीं होतीं। उनके साथ एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा, लाउंज, संगीत, सर्विस और अन्य आतिथ्य सेवाएं भी दी जाती हैं।

होटल का कहना था कि इसलिए मेन्यू कार्ड में दर्ज कीमतें लागू होती हैं। बोतल पर अंकित एमआरपी रिटेल दुकानों के लिए होती है, होटल में परोसी जाने वाली वस्तुओं पर नहीं। होटल ने यह भी कहा कि मेन्यू में पहले से स्पष्ट था कि जीएसटी अलग से लिया जाएगा।

आयोग ने कहा: कीमत सही, लेकिन टैक्स वसूली में गलती
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि होटल में एमआरपी से ज्यादा कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है और इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

हालांकि आयोग ने कहा कि 175 रुपए की कीमत में ही जीएसटी शामिल माना जाएगा। ऐसे में होटल द्वारा उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी के रूप में अतिरिक्त 10.80 रुपए वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी है।

शिकायतकर्ता बोले- स्टाफ ने बदसलूकी भी की
शिकायतकर्ता हुकुम सिंह ठाकुर का कहना है कि कीमत पर आपत्ति जताने पर होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस की और अभद्र व्यवहार भी किया। इसी के बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि आयोग ने अतिरिक्त जीएसटी वसूली को गलत माना, लेकिन एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के मुद्दे पर उन्हें आंशिक राहत ही मिली।

वकील बोले- मामला उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है
परिवादी (शिकायत) पक्ष के वकील शशिकांत वर्मा ने कहा कि मामला सिर्फ 10.80 रुपए का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है। उनके अनुसार होटल और रेस्टोरेंट अक्सर सुविधाओं के नाम पर ऊंची कीमतें वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग का फैसला उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय मिल सकता है।

एमआरपी (MRP) को लेकर आयोग ने 2 केस का हवाला दिया
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया (सिविल अपील नं. 21790/2017, निर्णय दिनांक 12.12.2017) इसके अलावा आयोग ने एक और फैसले ITC Ltd vs K.C. Khanna (अपील नं. A/2013/2201, निर्णय दिनांक 04.09.2023) का जिक्र किया गया है।

इन फैसलों में माना गया कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन और रेलवे जैसे संस्थागत उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तुएं खरीदकर अपनी सेवाओं के साथ ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। इसलिए उन पर सामान्य रिटेल एमआरपी नियम उसी तरह लागू नहीं होते जैसे दुकानों पर होते हैं। इसी आधार पर आयोग ने माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है।

अवैध खाद से भरा मिनी ट्रक पकड़ा गया, पुलिस ने 3 लाख से ज्यादा का माल किया जब्त

गरियाबंद.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में अवैध खाद परिवहन के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। पुलिस ने 280 बोरा अवैध DAP खाद से भरे एक मेटाडोर को पकड़ा है। जब्त खाद की कीमत 3.50 लाख रुपए आंकी गई है।

यह पूरा मामला देवभोग थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान अवैध DAP खाद से भरे मेटाडोर को पकड़ा। पुलिस ने मेटाडोर के अंदर से 280 खाद का बोरा जब्त किया, जिसकी कीमत 3.50 लाख रुपए आंकी गई है।

वाहन चालक ने किया खुलासा
वाहन चालक ने बताया कि उसने 8 हजार के किराए पर उरमाल के एक लाइसेंसी व्यापारी के कहने पर यह अवैध परिवहन कर रहा था। खाद को ओडिसा सीनापाली से जांगड़ा ले जाया जा रहा था, जहां एक मक्का कारोबारी को दिया जाता। पुलिस ने जब्त 280 बोरा डीएपी खाद को आगे की कार्रवाई के लिए कृषि विभाग के सुपुर्द कर दिया है।

मुनाफाखोरी के लिए खाद का कलाबाजारी
दरअसल, इस बार युद्ध के चलते रासायनिक खाद का उत्पादन प्रभावित हुआ है,सरकारी सप्लाई भी घट गया है।ऐसे में कुछ कारोबारी मुनाफाखोरी के लिए नियम को ताक में रख कर खाद के कलाबाजारी को अंजाम दे रहे है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी ‘हॉर्नबिल सफारी’, वन मंत्री करेंगे शुभारंभ

रायपुर.

‘हॉर्नबिल सफारी’ से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है।

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।

संरक्षण और आजीविका साथ-साथ
वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है।

बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम की अहम भूमिका
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।

प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण
प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार
हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है।

वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र
यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम
विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। स्थल के संबंध में अधिक जानकारी मोबाइल नंबर – 7976688165, 7566510937 अथवा वेबसाइट www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

राजनांदगांव में GST का बड़ा खुलासा, 76 करोड़ की फर्जी बिल ट्रेडिंग का भंडाफोड़; संचालक गिरफ्तार

रायपुर.

राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी), छत्तीसगढ़ ने कर चोरी एवं फर्जी बिलिंग के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव स्थित मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार किया है।विभागीय जांच में सामने आया है कि फर्म द्वारा लगभग छह माह के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये के लेन-देन केवल कागजी रूप से दर्शाए गए।

उपलब्ध अभिलेखों, जीएसटी रिटर्न एवं अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) संदिग्ध पाई गई, जिसके माध्यम से शासन को राजस्व हानि पहुंचाने का प्रयास किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि फर्म ने पश्चिम बंगाल स्थित संदिग्ध फर्मों से आयरन एवं स्टील की वास्तविक खरीदी किए बिना करोड़ों रुपये के खरीदी बिल प्राप्त किए थे। इन बिलों के आधार पर फर्जी आईटीसी का लाभ लिया गया तथा आगे अन्य करदाताओं को भी इसका लाभ हस्तांतरित किया गया। जांच के दौरान अधिकांश आपूर्तिकर्ता फर्मों के जीएसटी पंजीयन निरस्त पाए गए तथा उनके द्वारा वास्तविक व्यापार किए जाने के कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुए।

विभाग के अनुसार यह पूरा लेन-देन केवल पेपर ट्रेडिंग (कागजी बिलिंग) एवं बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्मों से खरीदी दर्शाई गई थी, उनमें से कई केवल फर्जी बिल जारी करने एवं अवैध आईटीसी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही थी। उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि माल का वास्तविक आवागमन नहीं हुआ और केवल बिलों के माध्यम से कर लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था बनाई गई थी।

इस नेटवर्क में अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी जुड़े होने के संकेत
प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। विभाग बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। राज्य कर विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा तथा फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी जैसे अवैध कृत्यों पर प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

1 जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, ग्राम सभाओं में दी जा रही जानकारी

रायपुर.

प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।

सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला
योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने की सराहना
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।

पात्र परिवारों को लाभ दिलाने का लिया संकल्प
मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

ग्राम सभा मे अधिकारियों ने दी जानकारी
ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।

एक जुलाई से लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी दी जानकारी
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

नगरीय निकायों को मरम्मत-संधारण के लिए 22.6 करोड़ की आपात निधि जारी

नगरीय निकायों को मरम्मत-संधारण के लिए 22.6 करोड़ की आपात निधि जारी

रायपुर
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए 22 करोड़ 6 लाख रुपए की आपात निधि जारी की है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर संचालनालय ने सभी निकायों को राशि हस्तांतरित कर दी है। विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही अप्रैल से जून के लिए यह राशि जारी की गई है।

नगरीय प्रशासन विभाग ने मरम्मत-संधारण आपात निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 13 करोड़ 76 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 56 नगर पालिकाओं के लिए कुल 5 करोड़ 18 लाख रुपए जारी किए गए हैं। विभाग ने 124 नगर पंचायतों के लिए भी कुल 3 करोड़ 66 लाख रुपए जारी किए हैं।

46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 2-3 दिन में पूरे प्रदेश को कवर करेगा मानसून

भोपाल
 मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आखिरकार मानसून की एंट्री हो गई है। मौसम विभाग ने छिंदवाड़ा समेत 15 जिलों में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पिछले 24 घंटों में हुई अच्छी बारिश और दक्षिण-पश्चिम से आने वाली नमी युक्त हवाओं के आधार पर यह घोषणा की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा।

भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती
गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की संभावना है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, रीवा, सिंगरौली, मंदसौर और नीमच समेत कई जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा
मौसम विभाग के अनुसार आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा।

प्रदेश के बाकी हिस्सों को अगले 2 से 3 दिन में मानसून कवर कर लेगा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। सीधी में लू चल सकती है, जबकि नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस-भरी गर्मी रहेगी।

इन जिलों में आ चुका मानसून आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी, डिंडौरी में मानसून के आने की घोषणा हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिन के अंदर मानसून पूरे प्रदेश में छा जाएगा। यह सबसे आखिरी में ग्वालियर-चंबल में मानसून पहुंचेगा।

9 दिन लेट हो गया मानसून
एमपी में मानसून की एंट्री की सामान्य तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार यह 9 दिन लेट यानी, 24 जून को प्रदेश में आया। मानसून आ गया है? इसका आंकलन कैसे होता है? यह मौसम वैज्ञानिक अरुण कुमार से जाना। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटे में 75 मिमी यानी, 3 इंच बारिश हो गई।

सीमा से जुड़े जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहा। कई जिलों में पर्याप्त बारिश हुई और दक्षिण-पश्चिम से नमी वाली मानसूनी हवाएं भी आईं। इन्हीं के अध्ययन से मानसून की एंट्री की अधिकारिक घोषणा की जाती है।

इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून
मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।

नौ दिन की देरी से हुई एंट्री
मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।

बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा
मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। 

इस साल कम बरसात की आशंका
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है।

केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा। 

विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है
इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि 15 जून के बजाय 24 जून को पहुंचा, यानी करीब 9 दिन की देरी से। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि लगातार वर्षा, हवा की दिशा, नमी और अन्य मौसमीय संकेतकों का विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है।

खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी
हालांकि इस बार मानसून के बावजूद बारिश को लेकर चिंता बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। 1 जून से 24 जून तक प्रदेश में औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश की जल स्थिति और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

 

SPS से IPS प्रमोशन पर आज फैसला, 9 अफसरों की किस्मत का होगा निर्णय

भोपाल 

मध्य प्रदेश के 9 राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आईपीएस अवार्ड करने गुरुवार को डीपीसी मीटिंग होगी। गृह विभाग के प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग ने इस तारीख को मंजूरी दी थी जिसके बाद आज यह बैठक होने वाली है। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी और संघ लोक सेवा आयोग। 

आईपीएस अवार्ड के लिए गृह विभाग की प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग से आगे चल रही है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की डीपीसी के लिए अभी तक सामान्य प्रशासन विभाग प्रस्ताव नहीं भेज पाया है। दूसरी ओर राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की प्रस्तावित डीपीसी की बैठक में इस बार 1997 और 1998 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा के लिए जिन अफसरों के नाम पर विचार किया जाएगा उनमें 1997 बैच के सीताराम ससत्या, अमृत मीणा, वर्ष 1998 बैच के निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा, सत्येन्द्र सिंह तोमर समेत कुल 27 नाम शामिल हैं।

इनकी पदोन्नति अटक सकती है
इसमें से अमृत मीणा की जाति प्रमाण पत्र और राजेश मिश्रा की विभागीय जांच के चलते डीपीसी अटक सकती है और इनका लिफाफा बंद हो सकता है। अंतिम दौर में सीताराम ससत्या के नाम को लेकर भी शिकायत के चलते डीपीसी में उनका नाम कटने के कयास लगाए जा रहे हैं।

 

देवी-देवताओं या भारत माता के नाम पर शपथ नहीं, केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

तिरुवनंतपुरम
केरल हाई कोर्ट ने शपथ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि स्थानीय निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि शपथ लेते समय कानून में तय शब्दों से बाहर नहीं जा सकते. यानी शपथ  ईश्वर के नाम पर ली जा सकती है या फिर बिना ईश्वर का नाम लिए सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा की जा सकती है. उसमें देवी-देवताओं, भारत माता, किसी संगठन, राजनीतिक शहीद या किसी व्यक्ति का नाम जोड़ना मान्य नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ पार्षदों की शपथ को अवैध माना. कोर्ट ने कहा कि अपनी तरफ से कोई भी नया शब्द जोड़ना पूरी तरह गलत माना जाएगा। 

यह मामला तब अदालत पहुंचा जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने शपथ लेते समय अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं, ‘भारतम्बा’, ‘भारत माता’, गुरुदेव, अपने राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम लिए. इसी से जुड़ी एक दूसरी याचिका पलक्कड़ जिले के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य की शपथ को लेकर भी थी. उस सदस्य ने ‘ईश्वर की कृपा से उम्मन चांडी के नाम पर’ शपथ ली थी. इन दोनों मामलों को देखते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या कानून शपथ के तय प्रारूप से बाहर जाने की इजाजत देता है। 

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट (नगरपालिका अधिनियम), केरल पंचायत राज एक्ट के तहत शपथ का सिर्फ दो ही तरीका है. पहला, ईश्वर के नाम पर शपथ लेना. दूसरा, ईश्वर का नाम लिए बिना सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करना. अदालत ने साफ कहा कि ईश्वर शब्द का दायरा बढ़ाकर किसी खास देवी-देवता, भारत माता, राजनीतिक शहीद, संगठन या व्यक्ति का नाम जोड़ना कानून के खिलाफ है। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह जनता के प्रति एक गंभीर वादा है कि चुना हुआ प्रतिनिधि संविधान का पालन करेगा, कानून के मुताबिक काम करेगा, ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा. इसलिए शपथ वही मानी जाएगी जो कानून में लिखे तरीके से ली गई हो। 

पार्षदों की सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
हाई कोर्ट ने कहा कि शपथ गलत तरीके से ली गई थी, इसलिए वह वैध नहीं मानी जा सकती. लेकिन सिर्फ इस वजह से चुने हुए प्रतिनिधियों का जनादेश खत्म नहीं किया जाएगा. अदालत ने आदेश दिया है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद, वडक्कनचेरी पंचायत सदस्य चार हफ्ते के भीतर दोबारा सही तरीके से शपथ लें. अदालत ने यह भी माना कि इन लोगों ने शायद यह सोचकर ऐसा किया कि उनका तरीका कानूनी रूप से सही है, इसलिए उन पर कोई सजा या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। 

तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों के मामले में अदालत ने राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि अब तक उनके द्वारा किए गए काम केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 531 के तहत सुरक्षित रहेंगे. यानी उनकी अब तक की कार्रवाई सिर्फ शपथ की गलती के आधार पर रद्द नहीं होगी. लेकिन वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के मामले में तस्वीर अलग है. कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज एक्ट में ऐसी सुरक्षा का प्रावधान नहीं है, इसलिए उस सदस्य ने अब तक जो काम किए, वे अमान्य माने जाएंगे. हालांकि उसे भी दोबारा शपथ लेने का मौका दिया गया है। 

फैसले में नारायण गुरु की सीख और संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता का जिक्र करते हुए कहा गया कि लोग भगवान को भले ही अलग-अलग नामों से पुकारें, लेकिन कानूनन शपथ सिर्फ ईश्वर के नाम पर या सत्यनिष्ठा से ही ली जा सकती है. इसमें अपनी तरफ से कोई भी नाम जोड़ना ठीक नहीं है। 

 

CG में मानसून हुआ एक्टिव, अगले 2 दिनों तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अलर्ट

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में मानसून के दस्तक से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में आंधी-तूफान के साथ ही बारिश का दौर भी जारी है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन कई जिलों में गरज और चमक के साथ ही मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना जताई है, तो चलिए जानते हैं कि आपके जिले में आज का मौसम कैसा रहेगा ?

पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम ?
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में प्रदेश के सभी संभागों के कुछ स्थानों पर मध्यम से तीव्र मेघगर्जन के साथ वर्षा हुई है। दंतेवाड़ा और रायगढ़ के एक-दो जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। बुधवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 39.0 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में रिकॉर्ड किया गया। मौसमी द्रोधणका राजस्थान से उत्तरी मध्य प्रदेश, दधिणी उत्तर प्रदेश, धिहार और झारखांड होते हुए गांगीय पधिम पश्चिम तक समुद्र तल पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश के दधिण पूर्व भागों में ऊपरी हवा का चक्रवाती पररसांचरण समुद्र तल से 3.1 धकमी ऊपर धस्थत है।

प्रदेश में आज कैसा रहेगा मौसम
प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। साथ ही एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात होने की आशंका है। अगले 2 दिनों में प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात होने की संभावना है। रायपुर शहर में 25 जून को आकाश आंशिक रूप से मेघमय रहने, गरज-चमक के साथ बारिश तथा अंधड़ चलने की संभावना है। शहर का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

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