14 लाख सालाना कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा मेंटिनेंस, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

भोपाल 

भोपाल की रहने वाली एक महिला की ओर से पति से अंतरिम भरण-पोषण (मेंटिनेंस) की मांग को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति को भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि यह मांग पति से “एक पाउंड मांस” वसूलने के प्रयास जैसी प्रतीत होती है, जिसकी अनुमति न्यायालय नहीं दे सकता।

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने की। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें तलाक संबंधी लंबित प्रकरण के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था।

2022 में हुई थी शादी, 2023 से अलग रह रहे
दंपति का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था। 2023 से दोनों अलग रह रहे हैं। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी।

फैमिली कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि तलाक प्रकरण लंबित रहने के दौरान महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा। इसी आदेश को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

पहले 20 लाख, अब 14 लाख सालाना आय का दावा
महिला ने अदालत में स्वीकार किया कि वह नौकरी करती हैं। पहले उनकी वार्षिक आय लगभग 20 लाख रुपए थी, जबकि पति की आय 30 लाख रुपए से ज्यादा बताई गई थी। बाद में महिला ने कहा कि उनकी आय घटकर करीब 14 लाख रुपए सालाना रह गई है, इसलिए उन्हें आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने वेतन रिकॉर्ड देखे
हाईकोर्ट ने महिला की आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। रिकॉर्ड के अनुसार महिला की मासिक आय लगभग 1.25 लाख रुपए है, जिससे उनकी वार्षिक आय करीब 14.81 लाख रुपए बनती है।

अदालत ने कहा कि यह आय स्वयं का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में महिला को आर्थिक रूप से आश्रित नहीं माना जा सकता।

कोई संतान नहीं, आय में भी बड़ा अंतर नहीं
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि दंपति की कोई संतान नहीं है। साथ ही पति और पत्नी की आय में इतना बड़ा अंतर भी नहीं है कि आर्थिक निर्भरता का आधार बनाया जा सके।

अदालत ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद या आश्रित जीवनसाथी की सहायता करना है, न कि समान आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति को अतिरिक्त वित्तीय लाभ देना।

फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के आदेश को यथावत रखा।

अदालत ने अपने फैसले में दोहराया कि मेंटिनेंस का प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर जीवनसाथी की मदद के लिए है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं पर्याप्त आय अर्जित कर रहा है और अपना खर्च उठाने में सक्षम है, तो उसे भरण-पोषण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

 

धार की टीही टनल का काम अधूरा, 60 मीटर खुदाई बाकी; 12 मीटर में बिछाया गया ट्रैक

इंदौर
 इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत टीही के आगे टनल बन रही है। टनल के एक हिस्से (टीही एंड, पी-1) पर 60 मीटर का काम बचा है। सारी मशीनरी और लेबर यहीं लगी हुई है। इसे रेलवे 15 दिन में पूरा कर लेगा। इसके बाद तीन किमी लंबी टनल की लाइनिंग का काम पूरा हो जाएगा।

इसी टनल के बीच के हिस्से में कट एंड कवर था, उसे रेलवे ने पूरा कर लिया है, अब यहां लिफ्ट और सीढ़ियों का काम चल रहा है। टनल के सबसे आखिरी हिस्से (पीथमपुर एंड, पी-2) में काम पूरा कर ट्रैक बिछाने के लिए यह हिस्सा दे दिया गया है।

कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने कहा– टनल का कुल 261 मीटर का काम बचा था, इसमें से 201 मीटर काम कर लिया है। बचा काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं टनल का लाइनिंग काम 8 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। दो पारियों में 12-12 घंटे की शिफ्ट में 300 मजदूर काम कर रहे हैं।

ऐसे तैयार हो रहा प्रोजेक्ट

    शिलान्यास: 18 फरवरी 2008
    लागत वर्तमान में: 1680 करोड़ से ज्यादा।
    कुल 200.97 किमी लंबी लाइन।

    वर्तमान स्थिति: टीही तक का काम पूरा हो गया है। दूसरी ओर दाहोद से कटवाड़ा और आगे कुछ हिस्से में काम चल रहा है।
    देरी का खामियाजा: 678.56 करोड़ रुपए लागत थी। प्रोजेक्ट के हर साल देरी के साथ लागत भी बढ़ती जा रही है।

टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे
हर दिन की टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। टीही एंड पर जिस हिस्से में टनल का काम चल रहा है, उससे 1208 मीटर आगे तक रेलवे ने ट्रैक बिछा लिया है। यहां बैलास्ट लेस ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो आम ट्रैक से अलग और खास होता है। करीब 1800 मीटर से ज्यादा हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम बचा है। रेलवे का कहना है कि हर दिन 50 से ज्यादा मीटर हिस्से में ट्रैक का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। टनल के अंदर केबल-ट्रे, सीसीटीवी, ओएचई ब्रैकेट लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था
रेलवे ने पहले टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य फरवरी-2026 रखा था। अब संभावना है कि सितंबर-अक्टूबर तक धार तक ट्रेन चलाई जा सकती है। हालांकि रेलवे का कहना है कि टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय लग रहा है। दो-तीन महीने का समय और लग सकता है। बारिश के कारण फिर काम की गति धीमी हो सकती है।

टनल की वजह से ही अटका है काम
रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा- 2017-18 से टनल का काम चल रहा है। कोरोना के बाद कॉन्ट्रैक्ट भी शॉर्ट टर्मिनेट हुए। फिर नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट होकर काम शुरू हुआ। टनल की वजह से काफी समय लग गया। रेलवे को चाहिए कि अब तेजी से काम कर जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा- 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी।

यह प्रोजेक्ट हमारे लिए महत्वपूर्ण
    इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट हमारे लिए सबसे अहम है। टीही टनल का काम जल्द पूरा हो और धार तक ट्रेन का संचालन शुरू हो, इसके लिए हम टाइम लाइन बनाकर काम काम कर रहे हैं। हर दिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। टनल में हमने सारे संसाधन लगाए हैं, 300 से ज्यादा मजदूर 24 घंटे काम कर रहे हैं। – विनीत अभिषेक, सीपीआरओ, पश्चिम रेलवे

लोकसभा में NDA को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, 5 सांसदों के समर्थन से बदलेगा सीटों का गणित

नई दिल्ली

मॉनसून सत्र से पहले ही एनडीए का संख्याबल लोकसभा में बढ़ने के आसार हैं। अटकलें हैं कि एक और विपक्षी दल के सांसद टूटकर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि हाल ही में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे के सदस्यों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है।

क्या टूटेगी शरद पवार की पार्टी?
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वरिष्ठ नेता शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी के सांसदों में टूट हो सकती है। कहा जा रहा है कि 5 पार्टी सांसद एनडीए को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं हो सका है कि ये सांसद कौन हैं।

कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद एनसीपी में टूट की अटकलें होने जा रही थीं। खबरें ये भी थीं कि शिवसेना यूबीटी में टूट के बाद शरद पवार ने सांसदों से संपर्क साधा था। हालांकि, पार्टी ने इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है।

नंबर गेम समझें
टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने का ऐलान कर दिया था। इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को समर्थन पत्र भी सौंपा जा चुका है। वहीं, सोमवार को ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने बगावत कर एनडीए को समर्थन दे दिया है। ये सभी सांसद महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे।

फिलहाल, एनसीपी एसपी के पास 8 लोकसभा सांसद हैं और अगर 5 टूटते हैं, तो एनडीए को फायदा हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

लोकसभा में कुल सीटें 543 हैं और दो तिहाई के लिए 362 सीटों की जरूरत है। अब जब निचले सदन में नौगांव, बशीरहाट और शिलॉन्ग के रूप में 3 सीटें खाली हैं, तो यह संख्या घटकर 360 पर आ जाती है। अप्रैल में एनडीए कमजोर समर्थन के चलते परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं करा पाया था। फिलहाल, एनडीए के पास 293 सदस्य हैं।

अटकलें ये भी हैं कि 37 लोकसभा सांसदों वाली समाजवादी पार्टी में भी टूट हो सकती है। भाजपा के कई नेता ऐसा दावा कर रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने इससे इनकार कर दिया है।

गणित
NCPI के 20 सांसदों, शिवसेना के 6 सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए 319 सीटों पर पहुंच जाएगा। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत के आंकड़े से खासा दूर है। अगर एनसीपी एसपी के 5 और सांसद समर्थन देते हैं, तो संख्या 324 पर पहुंच जाएगी। अगर द्रमुक मतदान से दूर रहती है, तो सदन में एनडीए को लाभ हो सकता है।

 

पूरी रात रोई, तब शुभेंदु अधिकारी ने दिया साथ’—क्या महुआ मोइत्रा छोड़ेंगी ममता का हाथ?

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रही हैं। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस में बागियों की झरी लग गई। हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी विधायकों और अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी को उनकी ही बनाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से बेदखल कर दिया। इस बीच उनकी सबसे करीबी सांसद और टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने भी चौंकाने वाला बयान दिया है।

महुआ मोइत्रा (TMC) और शुभेंदु अधिकारी (BJP) मौजूदा समय में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। हालांकि, उनका यह बयान ममता की चिंता बढ़ा सकती है।

महुआ मोइत्रा ने बीते 22 जून को बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की है। उन्हें एक अच्छा दोस्त बताया और पुराने दिनों को याद किया जब शुभेंदु ने उनकी मदद की थी।

शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त
महुआ कहती हैं, “शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त हैं। जब हम एक पार्टी में थे तो उन्होंने मेरा काफी साथ दिया। जब मैं करीमपुर से चुनाव लड़ी थी तो सिर्फ वही मेरे लिए प्रचार करने के लिए आए थे। मुझे जो भी मदद चाहिए होता था वह मुझे भेजते थे। जब 2014 में मुझे लोकसभा का टिकट मिलने वाला था और नहीं मिला। मैं पूरी रात रोई थी। उस समय सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ने ही मेरा साथ दिया था। उन्होंने मुझसे कहा था- नहीं बहन, मैं हूं न। ये सारे भावनात्मक कनेक्शन रहते हैं। आज हम दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। बात नहीं होती है। यह अलग बात है।”

आपको बता दें कि उस समय शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में हुआ करते थे और ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। महुआ इस समय अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद कर रही थीं।

2016 में लड़ी थी विधानसभा चुनाव
महुआ मोइत्रा ने साल 2016 में पश्चिम बंगाल की करीमपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था और जीता था। उस समय शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के कद्दावर संगठनकर्ता और नदिया जिले के पार्टी पर्यवेक्षक हुआ करते थे। महुआ उसी दौर का जिक्र कर रही हैं कि जब संगठन के अन्य नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया, तब शुभेंदु अधिकारी ने जमीन पर उतरकर उनके लिए चुनाव प्रचार किया था।

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महुआ मोइत्रा कृष्णानगर सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन शुरुआती चर्चाओं में जब उन्हें टिकट मिलने में संशय था तब वे भावुक हो गई थीं। उस समय शुभेंदु ने एक सीनियर सहकर्मी के नाते उन्हें ढांढस बंधाया था। बाद में महुआ को कृष्णानगर से टिकट मिला और वे जीतकर संसद पहुंचीं।

बहुमंजिला भवनों, कोचिंग संस्थानों, होटलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का होगा विशेष ऑडिट

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बहुमंजिला आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कोचिंग संस्थानों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और विशेष ऑडिट के निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नागरिकों, विद्यार्थियों और आमजन की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी विषय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव विकास शील ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, अग्निशमन विभाग तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को विशेष निरीक्षण अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के अंतर्गत बहुमंजिला आवासीय भवनों, कोचिंग सेंटरों, ट्यूशन कक्षाओं, होटल, लॉज, मॉल, व्यावसायिक परिसरों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संबंधित संस्थानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, वैध फायर एनओसी, आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, विद्युत वायरिंग एवं उपकरणों की स्थिति, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, प्राथमिक उपचार सुविधा, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही भवनों की क्षमता के अनुरूप लोगों की संख्या, पार्किंग व्यवस्था तथा आपदा की स्थिति में निकासी एवं राहत प्रबंधन की तैयारियों का भी परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के संबंध में संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिए जाएं तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक कर सकेंगे विद्यार्थी

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक कर सकेंगे विद्यार्थी

स्पर्श पोर्टल के माध्यम से होगा आवेदन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया

भोपाल 

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक किये जा सकेंगे। योजना के प्रभावी संचालन के लिए एनआईसी मध्यप्रदेश के सहयोग से स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है, जिसके माध्यम से पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकेंगे।

योजना के अंतर्गत अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थी पात्रतानुसार स्वयं स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही जिला कार्यालयों में प्राप्त ऑफलाइन आवेदनों को भी संयुक्त अथवा उप संचालक, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।

ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का परीक्षण जिला स्तर पर किया जाएगा। पात्रता एवं नियमानुसार आवेदनों को स्वीकृत किया जाएगा तथा अपात्र पाए जाने वाले आवेदनों को अस्वीकृत किया जाएगा। विद्यार्थियों से आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण एवं स्वीकृति-अस्वीकृति की प्रक्रिया 15 सितम्बर 2026 तक पूर्ण की जाएगी।

योजना के तहत स्वीकृत हितग्राहियों को उनकी पात्रतानुसार सामग्री का वितरण विश्व दिव्यांग दिवस 3 दिसम्बर 2026 के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रमों में किया जाएगा।

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने सभी पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राओं से निर्धारित समय-सीमा में आवेदन करने का आग्रह किया। जिला अधिकारियों से योजना के ऑनलाइन क्रियान्वयन की समस्त प्रक्रिया का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।

 

श्रावण मास से बदल सकती है कालभैरव मंदिर की दर्शन व्यवस्था, सामान्य-सशुल्क और प्रोटोकॉल के लिए अलग लाइन

 उज्जैन
श्रावण महीने की शुरुआत से कालभैरव मंदिर में दर्शन व्यवस्था बदल सकती है। मंदिर प्रबंध समिति अभी से तैयारी कर रही है।कुछ दिनों पहले ही मंदिर में 500 रुपए सशुल्क वीआईपी दर्शन की व्यवस्था भी शुरू की गई है। ऐसे में अभी मंदिर में निःशुल्क सामान्य व सशुल्क दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग दो कतार लगाई जा रही है। इनमें से सशुल्क दर्शन वाली कतार में ही प्रोटोकॉल व वीआईपी वाले श्रद्धालुओं को भी दर्शन करवाए जा रहे हैं। इससे सुविधा बनाने में मुश्किलें हो रही हैं, क्योंकि इस कतार वाले सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन करवाने होते हैं। अगले महीने 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में समिति यहां की दर्शन व्यवस्था को और भी सरल बनाने की तैयारी कर रही है।

यह है समिति की प्लानिंग
दर्शन की नई प्लानिंग यह की जा रही है कि दो की बजाय दर्शन के लिए तीन कतार का प्रबंध किया जाएगा। इनमें से पहली कतार निःशुल्क सामान्य दर्शनार्थियों के लिए रहेगी। दूसरी कतार 500 रुपए सशुल्क वाले दर्शनार्थियों के लिए और तीसरी कतार प्रोटोकॉल- वीआईपी वाले श्रद्धालुओं के लिए। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एलएन गर्ग पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि व्यवस्थाओं में परिवर्तन करेंगे और ऑनलाइन पर भी जोर देंगे।

श्रावण में बढ़ेगी भीड़
श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद अधिकांश श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में इस मंदिर में भी भीड़ का दबाव रहता है।
महाकाल दर्शन रूट पर भी बदलाव की तैयारी

श्रावण माह की शुरुआत और महाकाल लोक में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को ट्रैफिक डीएसपी दिलीपसिंह परिहार और थाना प्रभारी इंद्रपाल सिंह की उपस्थिति में ऑटो व ई-रिक्शा संघ के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक में सर्वसम्मति बनी है कि बेगमबाग-हरिफाटक से नीलकंठ मार्ग पर लगने वाले जाम से मुक्ति के लिए अब इस रूट पर ऑटो और ई-रिक्शा का प्रवेश बंद करना जरूरी है। डीएसपी परिहार ने बताया कि इस प्रस्ताव को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर के समक्ष अंतिम नोटिफिकेशन के लिए रखा जाएगा।

मंदिर जाने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग तय (साइड बॉक्स)

    रूट नंबर 1: हरिफाटक- बेगमबाग के बजाय ऑटो व ई-रिक्शा गऊघाट और यंत्र महल के रास्ते होते हुए श्रद्धालुओं को नृसिंह घाट छोड़ेंगे।

    रूट नंबर 2: हरिफाटक ब्रिज टी-पॉइंट से इंटरप्रिटेशन सेंटर होते हुए ई-रिक्शा सीधे चारधाम तक जा सकेंगे।

(नोट- यदि किसी श्रद्धालु या स्थानीय नागरिक को ई-रिक्शा व ऑटो से गोपाल मंदिर की तरफ जाना है, तो ऑटो व ई-रिक्शा चालक दौलतगंज के रास्ते का उपयोग कर तोपखाना होते हुए जा सकेंगे।)

सागर वालों के लिए रेलवे का तोहफा, अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस से दिल्ली का सफर आसान

सागर
 सागर में रेल सुविधाओं के विस्तार के प्रयासों के चलते एक और सौगात सागर शहर को मिली है. अब अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन सागर से होकर गुजरेगी. लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 

रेलवे बोर्ड द्वारा गाड़ी संख्या 22407/22408 अंबिकापुर–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस की फ्रीक्वेंसी को साप्ताहिक से बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन संचालित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”उन्होंने सागर लोकसभा क्षेत्र की जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों एवं नौकरीपेशा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मांग को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने प्रमुखता से रखा था. रेल मंत्रालय द्वारा इस जनहितकारी मांग को स्वीकार किया जाना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। 

व्यापारियों और स्टूडेंट्स के लिए दिल्ली का सफर हुआ आसान
सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ”ये ट्रेन सागर के यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक होगी. दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से रात लगभग 11 बजे चलकर ये ट्रेन अगले दिन सुबह 8:30 बजे सागर पहुंचती है, जिससे यात्रियों को रातभर में आरामदायक यात्रा कर सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलती है। 

उन्होंने बताया कि, ”अब तक दिल्ली जाने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारी गोंडवाना एक्सप्रेस पर निर्भर थे, जिसके लिए उन्हें ट्रेन पकड़ने हेतु दोपहर लगभग 3 बजे ही स्टेशन के लिए निकलना पड़ता था. इससे उनके पूरे दिन का समय प्रभावित होता था. नई व्यवस्था से व्यापारियों का समय बचेगा, यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी तथा व्यवसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। 

प्रधानमंत्री और रेलमंत्री का माना आभार
डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि, ”इस निर्णय से सागर, दमोह, कटनी एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, व्यापारियों तथा नौकरीपेशा लोगों को दिल्ली आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी.” इस सौगात के लिए सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, ”केंद्र सरकार निरंतर जनभावनाओं के अनुरूप रेल सुविधाओं का विस्तार कर रही है और सागर क्षेत्र के विकास के लिए वे आगे भी इसी प्रकार प्रयासरत रहेंगी। 

उच्च शिक्षा विभाग की पहल : नए सत्र में महाविद्यालयों में होंगे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम

भोपाल

उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में इंडक्शन (अभिमुखीकरण) कार्यक्रम के दौरान “मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम” आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें तनाव, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से प्रारंभ होने वाले नवप्रवेशित विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच, ध्यान एवं जीवन कौशल जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग एवं सहायता सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग नियमों, शिकायत निवारण तंत्र, मेंटर-मेंटी प्रणाली, साइबर बुलिंग से बचाव तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के संबंध में भी जागरूक किया जाएगा। महाविद्यालयों में उपलब्ध काउंसलर, मेंटर, एंटी-रैगिंग समिति, आंतरिक शिकायत समिति एवं अन्य सहायता तंत्रों की जानकारी भी विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया है कि कार्यक्रम के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित प्रतिवेदन, फोटोग्राफ्स, वीडियो एवं समाचार प्रकाशन की प्रतियां विभाग को निर्धारित समय सीमा में भेजी जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि यह पहल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित नेशनल टास्‍क फोर्स की अनुशंसाओं के अनुरूप की जा रही है। विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण हो सके।

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने में महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण : मंत्रीपरमार

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की सशक्त संस्कृति विकसित होने से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्राप्त होगी तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

उच्च शिक्षा मंत्रीपरमार बुधवार को भोपाल स्थित अपने निवास कार्यालय में शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन कर अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्रीपरमार ने कहा कि शोध पत्रिकाएं एवं जर्नल ज्ञान के सृजन, संरक्षण एवं प्रसार के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे प्रकाशनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों को व्यापक मंच प्रदान करने का अवसर मिलता है तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारपरक, शोधोन्मुख एवं समाजोपयोगी बनाना है।

मंत्रीपरमार ने महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में ऐसे प्रयास प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा “रोजगारपरक शिक्षा के विविध आयाम” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया था। इस वेबिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा को रोजगारपरक बनाने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जागरूक करने तथा शिक्षण संस्थानों, शोध एवं उद्योग जगत के मध्य समन्वय स्थापित करना था। वेबिनार में देशभर के विभिन्न शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही तथा 54 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन्हें समीक्षित एवं संकलित कर शोध जर्नल के रूप में प्रकाशित किया गया।

इस अवसर पर शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता मोदी, समन्वयक डॉ. अलका प्रधान, डॉ. आर. एस. रघुवंशी, शोध एवं प्रकाशन समिति के सदस्य डॉ. चन्द्रभान माकोड़े, डॉ. उमाशंकर पटेल, डॉ. नीतू शर्मा तथा डॉ. एल.एन. गौड़ सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

 

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