अब 2 मिनट में पहुंचेगी डायल 112, देरी होने पर भोपाल में अफसरों को मिलेगा अलर्ट

भोपाल 

मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में पुलिस की आपकालीन सेवा डायल- 112 में कुछ जिलों में रिस्पांस में देरी की शिकायतों के बाद व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। पुलिस रेडियो मुख्यालय द्वारा अब डायल-112 के आपातकालीन वाहनों के सिस्टम से जिले के जिम्मेदार पुलिस अफसरों को जोड़ा गया है।

यानी की अब डायल 112 में घटना की सूचना आने के बाद यदि वाहन दो मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना नहीं होता है तो सीधे एडिशनल एसपी के पास अलर्ट जाएगा। जिसमें वाहन नंबर और थाना क्षेत्र भी होगा। दरअसल इस व्यवस्था से पहले सभी जिलों के एसपी को जोड़ा गया था। लेकिन बाद में परिवर्तन करते हुए यह जिम्मेदारी एडिशनल एसपी को दी गई है।

2 मिनट के भीतर करना होगा पायलट को एनरूट
फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) यानी डायल- 112 के पायलट के पास जैसे ही कोई इवेंट आता है तो सबसे पहले उसे एकनॉलेज करना होता है यानी की उसे इवेंट की जानकारी प्राप्त हो गई है। उसके बाद उसे घटनास्थल रवाना होने से पहले एनरूट करना होता है यानी की वो मौके के लिए रवाना हो गया है। अब इस प्रक्रिया को एफआरवी का पायलट 2 मिनट तक नहीं करते है तो सिस्टम सीनियर अधिकारियों को देरी का अलर्ट देने लगेगा।

78 लाख लोगों ने मांगी 9 माह में मदद
डॉयल 112 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिंतबर 2025 ले 26 मई 2026 तक यानी नौ माह में 78 लाख लोगों ने फोन कर आपातकालीन सेवा से मदद मांगी। जिसमें 21 लाख से ज्यादा जगहों पर एफआरवी वाहन मदद के लिए भेजे गए। जिसमें सबसे ज्यादा साइबर क्राइम, महिला अपराध से जुड़े है।

रिस्पांस टाइम बढ़ने की शिकायतों के बाद बदलाव
पुलिस रेडियो मुख्यालय की मॉनिटरिंग में यह शिकायत लगातार सामने आ रही थी कि एफआरवी समय से कई जगहों पर मूवमेंट नहीं मूवमट कर रही है, जिस कारण रिस्पांस टाइम बढ़ रहा है। पड़ताल में पता चला कि पायलट गाड़ी खड़ी कर किसी अन्य काम में लग जाता था। जिस कारण इवेंट आने पर घटनास्थल पर पहुंचने में समय लगता था। खामी सामने आने के बाद सिस्टम में ही बदलाव कर दिया है।

सीएम ने दी थी सौगात
जानकारी के लिए बता दें कि एमपी में साल 2025 में एमपी पुलिस को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आधुनिक सुविधाओं और तकनीकों से लैस 1200 नई महिंद्रा स्कॉर्पियो और बोलोरो गाड़ियों की सौगात दी इसी के साथ पुलिस सहायता का नंबर भी डायल-100 के बजाए डायल-112 किया गया।

यानी पुलिस सहायता के लिए आपको 112 पर कॉल करना होगा। कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया थी। बीते स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों को ये नए तकनीकी डायल-112 के वाहन सौंपे गए। इन अत्याधुनिक वाहनों के माध्यम से पुलिस रिस्पॉन्स टाइम को कम करने और आमजन तक त्वरित सहायता पहुंचाने में उल्लेखनीय सुधार होने का दावा किया गया। इसी पर अब काम किया जा रहा है।

भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब, 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

नई दिल्ली

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने कैपिटल हिल में आयोजित ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाना है. इस रणनीति को ‘मिशन 500’ का नाम दिया गया है। 

परिणाम-उन्मुख संबंधों पर जोर
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देश अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका ध्यान सीधे परिणामों पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में की गई आधिकारिक घोषणा के बाद से दोनों देशों की टीमों ने इस पर दिन-रात काम किया है. इस समझौते के लागू होने से अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारत का 140 करोड़ (1.4 बिलियन) उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार पूरी तरह खुल जाएगा, जो दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। 

क्या है समझौते की प्रमुख बातें?
500 अरब डॉलर की भारतीय खरीद: इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है। 

ऊर्जा साझेदारी में उछाल: दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार 2025 से तेजी से बढ़ा है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. साथ ही नए ‘शांति अधिनियम’ के तहत दोनों देश नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने की राह तलाश रहे हैं। 

रिकॉर्ड भारतीय निवेश: आर्थिक मोर्चे पर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में हुए ‘SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट’ में भारतीय कंपनियों द्वारा 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं जताई गईं, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी निवेश घोषणाओं में से एक है। 

टैरिफ नीति में बदलाव के बाद नए सिरे से बातचीत
हाल ही में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में आए बड़े बदलावों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते के ढांचे को फिर से समायोजित किया जा रहा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी मुख्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समझौते के आखिरी हिस्सों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की कोशिश है कि 24 जुलाई 2026 से पहले (जब अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ समाप्त हो रहा है) एक अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर दिया जाए. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने यानी जुलाई के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में होंगे। 

व्यापार संतुलन और शिक्षा का योगदान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली बढ़त के साथ 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत का आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष जो पहले 40.89 अरब डॉलर था, वह घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. व्यापार के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र भी इस रिश्ते को मजबूती दे रहा है; वर्तमान में 3,30,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 14 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। 

बांग्लादेश की सेना में बढ़ रहा चीन का दखल, J-10CE डील से भारत को घेरने की तैयारी?

ढाका
 साउथ एशिया के डिफेंस मार्केट में इन दिनों तगड़ी हलचल है. पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश भी चीन का लड़ाकू विमान J-10CE को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है. बांग्लादेश वायु सेना चीन से ऐसे 24 फाइटर जेट्स खरीदने की डील के बेहद करीब है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस लड़ाकू विमान के फुस्स हो जाने के बावजूद, ड्रैगन ने उल्टा नैरेटिव सेट करके इस जेट को जी-जान से प्रमोट किया. अब ढाका उसके जाल में फंस गया है. करीब 40 मिलियन डॉलर कीमत वाला ये सौदा अगर पक्का हुआ तो भारत की दोनों सरहदों पर चीनी हथियारों का पहरा मजबूत हो जाएगा। 

बांग्लादेश में चीन का डिफेंस जाल
बांग्लादेश की सेनाएं पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी हथियारों पर निर्भर हैं. चीन धीरे-धीरे बांग्लादेश के तीनों सेनाओं में घुस चुका है. थल सेना की बात करें तो बांग्लादेश का पूरा टैंक बेड़ा चीनी मूल का है, उनकी एयर डिफेंस और आर्टिलरी में भी चीनी उपकरणों की भरमार है. नौसेना के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने चीन से ही पनडुब्बी हासिल की थीं। 

अब इस प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए बांग्लादेशी वायु सेना को भी पूरी तरह चीनी रंग में रंगने की तैयारी है. बांग्लादेश के पास फिलहाल रूसी मिग-21 का चीनी वर्जन F-7 फाइटर्स है, जिसे वो काफी समय से बदलने की कोशिश में था. हालांकि उसने यूरोफाइटर जैसी पश्चिमी तकनीकों पर भी विचार किया लेकिन चीन ने नई चाल चल दी. चीन ने बांग्लादेश को कम कीमत और आसान शर्तें ऑफर कीं और आखिरकार पासा चीन के पक्ष में झुकता दिख रहा है। 

J-10CE, जिसे चीन में ‘विगोरस ड्रैगन’ के नाम से जाना जाता है, कोई साधारण विमान नहीं है. ये चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का सबसे भरोसेमंद फाइटर जेट है. ये विमान चीन की खतरनाक PL-15 मिसाइलों से लैस होता है। 

चीन का गिरता एक्सपोर्ट और तीन देशों का खतरनाक नेक्सस
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है. ऐसे में चीन के लिए ये डील संजीवनी की तरह है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन जितने भी हथियार एक्सपोर्ट करता है, उसका 80% हिस्सा एशिया में ही आता है। 

भारत के लिए क्या बदलेगा?
चीन के कुल सैन्य निर्यात का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ तीन देश खरीदते हैं- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और पूर्व डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के मुताबिक, चीन ने भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक खतरनाक मिलिट्री नेक्सस बना लिया है, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी। 

अगर बांग्लादेश-चीन की ये डील फाइनल होती है तो भारत के पश्चिमी बॉर्डर यानी पाकिस्तान और पूर्वी बॉर्डर यानी बांग्लादेश दोनों तरफ चीनी फाइटर जेट्स तैनात हो जाएंगे यानी चीन की एंट्री हो जाएगी. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि संकट के समय भारत को दोतरफा हवाई खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में चीनी तकनीशियनों और सैन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी बढ़ेगी जो भारतीय सीमा के बेहद करीब रहकर खुफिया कूटनीति और निगरानी को अंजाम दे सकते हैं। 

भोपाल में कुकर्म का विरोध करने पर गार्ड की पत्थर से कुचलकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

भोपाल

कटाराहिल्स थाना क्षेत्र में ईकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे मिले युवक के अंधे कत्ल की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने युवक के साथ जबरन अप्राकृतिक कृत्य करने का प्रयास किया था। विरोध करने पर उसने पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी और मोबाइल फोन लेकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट पेश कर दिया है। मामले में आगे पूछताछ की जा रही है।
29 मई को मिला था शव

पुलिस के अनुसार 29 मई को ईकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे एक युवक का शव मिला था। शव कई दिन पुराना होने के कारण शुरुआत में उसकी पहचान नहीं हो सकी थी।

बाद में मृतक की पहचान मंडीदीप निवासी युवक के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
गायब मोबाइल से मिला पुलिस को सुराग

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक का मोबाइल फोन घटना के बाद से गायब था। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की तो वह एक व्यक्ति के पास मिला।

पूछताछ में उस व्यक्ति ने बताया कि उसने मोबाइल मिसरोद में रहने वाले एक परिचित युवक से खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने मिसरोद निवासी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार कर लिया।

खाना खिलाकर पुलिया के नीचे ले गया

आरोपी ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात वह साथी की तलाश में न्यू मार्केट और वीआइपी रोड क्षेत्र में घूम रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसकी मुलाकात नशे की हालत में मिले युवक से हुई।

आरोपी उसे खाना खिलाकर पुलिया के नीचे ले गया, जहां उसने जबरन कुकर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उसने पत्थर उठाकर युवक के सिर पर कई वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मृतक का मोबाइल लेकर वहां से फरार हो गया।
पहले भी जेल जा चुका है आरोपी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल पहले भी इसी तरह के एक मामले में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ मिसरोद थाने में केस दर्ज था। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

 

खंडवा के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 80 वर्षीय बुजुर्ग को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल

खंडवा जिले के थाना हरसूद क्षेत्र में डायल- 112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से रास्ता भटक गए 80 वर्षीय बुजुर्ग को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से बुजुर्ग सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सके।

23 जून 2026 को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना हरसूद क्षेत्र अंतर्गत चौपाटी के पास स्थित यात्री प्रतीक्षालय में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति मिले हैं, जो अपने घर का रास्ता भटक गए हैं। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही हरसूद थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक शंकर कसदे एवं पायलट सैय्यद अली ने मौके पर पहुँचकर बुजुर्ग व्यक्ति को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पूछताछ के दौरान ज्ञात हुआ कि बुजुर्ग व्यक्ति ठीक से देख नहीं सकते थे तथा अपने भाई के घर जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ता भटक गए थे। बुजुर्ग ने अपने भाई के निवास संबंधी जानकारी डायल-112 टीम को दी।इसके उपरांत डायल-112 जवानों ने बुजुर्ग को डायल 112 वाहन में बैठाकर बताए गए पते के अनुसार नंदगांव पहुँचाया, जहाँ उनके भाई से संपर्क स्थापित कर आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत उन्हें सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया।

अपने परिजन को सकुशल पाकर सभी ने डायल-112 पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

एमपी ट्रांसको के एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशनों की सुरक्षा के लिए हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरे लगे : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल 

ऊर्जा मंत्री  प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर सहित राज्य के अपने एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों की सुरक्षा सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरों की स्थापना शुरू कर दी है। लगभग 8.15 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना विद्युत ग्रिड को चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और संभावित नुकसान से सुरक्षित रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के 417 सबस्टेशनों पर कैमरे चरणबद्ध तरीके से लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की स्थापना से सबस्टेशनों की सुरक्षा एवं गश्त में मानव संसाधन के साथ तकनीक के उपयोग से सुरक्षा की दोहरी परत सुनिश्चित की जा सकेगी।

टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा कवच

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह पहल एमपी ट्रांसको द्वारा एक्स्ट्रा हाई टेंशन लाइनों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग के बाद उठाया गया एक और तकनीकी कदम है, जो कंपनी के टेक्नोलॉजी-आधारित सुरक्षा समाधान की दिशा में बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है। कैमरे लगाने का निर्णय पूर्व में ट्रांसफॉर्मरों से कॉपर न्यूट्रल स्ट्रिप की बढ़ती चोरी की घटनाओं के मद्देनजर लिया गया था। ये कॉपर स्ट्रिप ट्रांसफॉर्मर का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग हैं, जिनके हटाए जाने से व्यापक क्षति और विद्युत आपूर्ति में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है। चोर इन कॉपर स्ट्रिप्स को निशाना बना रहे थे, जिनका उनके लिए भले ही सीमित मूल्य हो, लेकिन ट्रांसफॉर्मरों के लिए यह अत्यंत आवश्यक हैं। इन स्ट्रिप्स को हटाने से न केवल चोरों के जीवन को खतरा होता है, बल्कि ट्रांसफॉर्मर फेल होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को तीन से चार माह तक बिजली आपूर्ति से वंचित होना पड़ सकता है।

कॉपर स्ट्रिप की चोरी से विद्युत आपूर्ति में हो सकता है लंबा व्यवधान

कॉपर स्ट्रिप चोरी के कारण यदि ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त होता है, तो कंपनी को आर्थिक क्षति के साथ-साथ महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था दो से तीन माह तक प्रभावित हो सकती है। ट्रांसफॉर्मर प्रायः ऑर्डर पर निर्मित होते हैं, इसलिए उन्हें बदलने में कई महीने लग जाते हैं।

स्थापित एचडी कैमरे सबस्टेशनों को 360 डिग्री कवरेज प्रदान कर रहे हैं तथा इनमें नाइट विजन, मोशन डिटेक्शन और हाई-रिजॉल्यूशन रिकॉर्डिंग जैसी आधुनिक तकनीकें भी उपलब्ध हैं। इससे रात के समय या दूरस्थ क्षेत्रों में भी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी।

लाइव फीड अधिकारियों के मोबाइल पर

इन कैमरों की लाइव फीड संबंधित सबस्टेशन प्रभारियों को उनके मोबाइल उपकरणों पर उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के एकीकरण के माध्यम से जबलपुर स्थित शक्तिभवन मुख्यालय के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से प्रदेश के सभी 417 सबस्टेशनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग का कार्य प्रगति पर है।

इस तकनीकी व्यवस्था से न केवल सुरक्षा में वृद्धि होगी, बल्कि किसी भी तकनीकी गड़बड़ी, अनाधिकृत प्रवेश या आपात स्थिति की त्वरित जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी। इससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी। अब मुख्यालय से एक क्लिक पर किसी भी सबस्टेशन की निगरानी की जा सकती है, जिससे निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो गई है।

एमपी ट्रांसको का उद्देश्य अपनी आधारभूत संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रदेश के उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखना है, ताकि कॉपर चोरी जैसी घटनाओं से होने वाली वित्तीय एवं ऑपरेशनल चुनौतियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

 

मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का भव्य समापन: 25 से 30 जून तक

भोपाल 

प्रदेश में जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ऐतिहासिक “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” का 25 जून से 30 जून 2026 की अवधि में प्रदेश में समारोहपूर्वक समापन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में वर्ष प्रतिपदा (19 मार्च 2026) को प्रारंभ हुए इस अभियान के तहत प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन के अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। इस व्यापक जन-आंदोलन के दौरान ग्रामीण, नगरीय, वन, सिंचाई, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3.62 लाख से अधिक कार्यों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। इसके अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर, चेकडेम, जलाशयों के जीर्णोद्धार, नालों की सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और नदी पुनर्जीवन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण कर प्रदेश को जल संसाधनों से समृद्ध बनाया गया है।

अभियान की उपलब्धियों को जन-सामान्य के समक्ष लाने और जन-सहभागिता का सम्मान करने के उद्देश्य से 25 से 30 जून के बीच राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष समापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजनों के दौरान विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी, जिनमें निष्पादित कार्यों, उपलब्धियों और लाभान्वित परिवारों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने के साथ जल संरचनाओं पर आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। सभाओं में मुख्यमंत्री के प्रेरणादायी संदेश का वाचन कर जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा। साथ ही, जनप्रतिनिधियों द्वारा महत्वपूर्ण जल संरचनाओं का लोकार्पण कराया जाएगा और खेत तालाब जैसी व्यक्तिगत संरचनाएं संबंधित हितग्राहियों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित की जाएंगी। इस अवसर पर जन-सहभागिता, श्रमदान और नवाचार के माध्यम से उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, जलदूतों, पंचायत प्रतिनिधियों और शासकीय कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा तथा सामुदायिक जल संरचनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को इनके रख-रखाव एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ दिलाई जाएगी।

समापन कार्यक्रमों में न केवल पिछले कार्यों की समीक्षा की जाएगी, बल्कि आगामी प्राथमिकताओं और भावी योजनाओं पर भी विशेष चर्चा होगी। इसके तहत 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने वाले “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)” (VB – GRAM G) के विभिन्न आयामों और लाभों के संबंध में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, आगामी मानसून ऋतु में व्यापक पौध-रोपण के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता सुनिश्चित करने तथा पूर्व में किए गए पौध-रोपण की समीक्षा की जाएगी, और किसानों के साथ खरीफ-2026 की तैयारियों तथा भावी कृषि कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा होगी। शासन के निर्देशानुसार इन कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला व जनपद पंचायत प्रतिनिधियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

 

TMC सरकार पर ₹2.29 लाख करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, विधानसभा में पेश हो सकती है CAG रिपोर्ट

कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात। 

पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया!
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। 

पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है। 

आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली
सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। 

बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान
अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

भारतमाला परियोजना के दो राष्ट्रीय राजमार्गों के काम मार्च-2027 तक होंगे पूरे

रायपुर

 लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के पेंशनबाड़ा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में ठेकेदारों को निर्माणाधीन सड़कों पर वैकल्पिक या डायवर्टेड मार्ग बनाकर काम करने के दिए निर्देश दिए, ताकि बरसात में लोगों को आवाजाही में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने केशकाल घाटी बायपास सड़क के काम में तेजी लाते हुए सड़क के साथ ही इस मार्ग में बनने वाले दो बड़े पुलों के काम भी जल्दी शुरू करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी श्री अभिजीत कुमार तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। 
 
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार ने बैठक में बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन रायपुर-विशाखापटनम एक्सप्रेस-वे और दुर्ग-आरंग बायपास मार्ग के काम अगले वर्ष मार्च तक पूरे कर लिए जाएंगे। भारतमाला परियोजना के तहत ही निर्माणाधीन रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरीडोर का काम भी तेज गति से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले भारतमाला परियोजना की सड़कों का पूरा लाभ उठाने राज्य की सड़कों को इनसे जोड़ने टू-लेन और फोर-लेन सड़कों के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए, जिससे इन इकोनॉमिक कॉरीडोर्स का पूरा लाभ राज्य को मिल सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के इन सड़क खंडों के चालू हो जाने से राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। माल और यात्री परिवहन की दृष्टि से ये सड़कें बहुत महत्वपूर्ण हैं। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में एनएचएआई द्वारा रायपुर के तेलीबांधा चौक, उद्योग भवन चौक और सरोना चौक में प्रस्तावित फ्लाईओवर्स की स्वीकृति की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित भूमि अधिग्रहण और वन-व्यपवर्तन के लंबित मामलों की जानकारी यथासमय उच्च कार्यालयों को देने के निर्देश दिए, जिससे कि इनके जल्द निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर की जा सके। उन्होंने विभिन्न जिलों में सड़कों और पुलों के अपने निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन तथा कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली।

श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान ब्लैक-स्पॉट्स को खत्म करने के साथ ही सड़क सुरक्षा के मापदंडों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने मानकों के अनुरूप ही सड़कों पर गति अवरोधकों का निर्माण करने को कहा। उन्होंने सभी अधिकारियों को लगातार फील्ड में जाकर कार्यों के बारिकी से निरीक्षण करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्धारित समयावधि में काम पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्ता और समय-सीमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री ज्ञानेश्वर कश्यप और अधीक्षण अभियंता श्री एस.एस. माझी सहित पांचों राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के कार्यपालन अभिंयता और अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

ठेकेदारों की बैठक लेकर समस्याओं की ली जानकारी, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कर रहे ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्य एवं कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्णता में कोई समझौता नही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से राज्य की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इनके निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निर्धारित समायवधि में अच्छा काम होना चाहिए।

अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार, बढ़ा जुर्माना और कार्रवाई हुई सख्त

रायपुर

 छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और उनके सख्त प्रशासनिक रुख के तहत राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू हो गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाना, राजस्व बढ़ाना और खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है।

सबसे बड़ा बदलाव अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन पर लगने वाले जुर्माने में किया गया है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से समझौता शुल्क देना होगा। इसके अलावा अवैध रूप से ले जाए जा रहे खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करता है, तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये और खनिज का मूल्य अलग से देना होगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क तथा रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन आसानी से दोबारा अपराध में इस्तेमाल न हो सकें। अब जब्त वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन सुपुर्द किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र के नियम भी आसान बनाए हैं। शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध होगा और व्यवस्थित खनन को बढ़ावा मिलेगा।

खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना भी की गई है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है।

सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। इससे अलग-अलग प्रकार से स्वीकृत पट्टों के एकीकरण में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयां दूर होंगी और शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी।

निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को भी एक समान बनाया गया है। अब सभी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर और सुरक्षा के तौर पर अतिरिक्त राशि निर्धारित नियमों के अनुसार काटेंगे। खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी, अन्यथा विभाग इसे खनिज मद में जमा करेगा। इससे अवैध स्रोतों से खनिज के उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत गौण खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ अब केवल नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला पंचायतों को भी इसका हिस्सा मिलेगा।
करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। राज्य में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए डेड रेंट से केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। जो खदानें संचालित नहीं होंगी, वे समर्पित होकर दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार के जीरो टॉलरेंस और सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा सख्त कदम माना जा रहा है। नए नियमों से एक ओर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, वहीं राज्य के राजस्व में वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu