आधी बारिश, सूखा जून! अल नीनो के असर से देश ने देखा सबसे खराब मॉनसून का दौर

 नई दिल्ली

भारत में चल रहे मॉनसून सीजन की शुरुआत काफी चिंताजनक रही है. 21 जून 2026 तक देश में औसतन सिर्फ 46mm बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 84.4mm बारिश होती आई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह 46% की कमी है. इस शुरुआती कमी से खेती, जल स्रोतों और किसानों के लिए आने वाले महीनों में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं. मॉनसून की इस कमजोर शुरुआत ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। 

मौजूदा स्थिति के लिए कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं. सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में अल-नीनो है, जो सीजन के आगे बढ़ने के साथ और मजबूत होने की उम्मीद है. अल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. इससे दुनिया भर का मौसम बिगड़ जाता है. भारत में बारिश कम हो जाती है। 

इसके अलावा इंडियन ओशन डाईपोल (IOD) की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. फिलहाल IOD न्यूट्रल है, जो बारिश को कोई सपोर्ट नहीं दे रहा. पॉजिटिव IOD अल-नीनो के निगेटिव इफेक्ट को कम कर सकता है, लेकिन इस साल अभी ऐसा नहीं हुआ. मेडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) भी साथ नहीं दे रहा है, जो भूमध्य रेखा के आसपास बादलों और बारिश के बंटने के प्रोसेस को प्रभावित करता है। 

इन सबके कारण नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ गई हैं. खासकर मध्य भारत में क्रॉस-इक्वेटोरियल हवाएं कमजोर होने से बारिश काफी कम हुई है. IMD के आंकड़ों के मुताबिक कई राज्यों में सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई। 

मॉनसून का इतिहास 
भारतीय मॉनसून का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. 1901 से अब तक भारत में कई बार सूखे पड़े हैं. 1871-2015 के बीच 26 बार सूखे वर्ष आए, जिसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा कमी वाले वर्ष शामिल हैं. सबसे भयानक सूखा 1972 में था, जब बारिश 23.9 प्रतिशत कम हुई. 2009 में भी 22 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। 

अल-नीनो वर्षों में अक्सर बारिश कम होती है. 1950 के बाद के अधिकांश सूखा अल-नीनो से जुड़े रहे. 1982 और 2015 में मजबूत अल-नीनो के दौरान बारिश की भारी कमी हुई. लेकिन 1997 जैसे मजबूत अल-नीनो में भी पॉजिटिव IOD के कारण सामान्य बारिश हुई. 1951-2023 के दौरान ट्रिपल ला-नीना (2020-2022) में बारिश सामान्य या उससे ज्यादा रही। 

पिछले कुछ दशकों में मॉनसून में परिवर्तन देखा गया. 1950-2002 तक उत्तर और मध्य भारत में बारिश घट रही थी, लेकिन 2002 के बाद कुछ सुधार हुआ. फिर भी जलवायु परिवर्तन के कारण भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं और सूखा भी लंबा हो रहा है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार 2026 में मॉनसून सामान्य से कम (90 प्रतिशत LPA) रहने की 60 प्रतिशत संभावना है। 

भविष्य की बारिश की उम्मीदें
वर्तमान चुनौतियों के बावजूद मॉनसून के फिर से सही होने की कुछ उम्मीद है. IMD के अनुसार जून के आखिरी सप्ताह में स्थिति सुधर सकती है. सोमाली जेट, जो अरब सागर से नमी लाता है, मजबूत होने वाला है. इससे महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार आदि राज्यों में बारिश बढ़ सकती है। 

फिलहाल कई राज्यों में अधिक तापमान और हीटवेव की स्थिति बनी हुई है. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. हालांकि भारतीय मॉनसून की टाइमलिमिट हमेशा अनियमित रही है. पिछले सीजनों में देरी के बाद भी अच्छी बारिश हुई है. आने वाले सप्ताह बताएंगे कि बारिश कैसी होगी। 

कृषि और जल स्रोतों पर असर
मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. खासकर खरीफ फसलों पर इसका सीधा असर पड़ता है. 46 प्रतिशत की कमी से धान, मक्का, दालें आदि की बुआई प्रभावित हो सकती है. जलाशयों में पानी का स्तर कम होने से सिंचाई और पीने के पानी की समस्या बढ़ सकती है. मुंबई जैसे शहरों में जल संकट पहले से दिखने लगा है. किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और फसल चयन में सावधानी से करें. सरकार को जल संरक्षण, सूखा प्रतिरोधी बीजों और सिंचाई सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 

क्लाइमेट चेंज और मॉनसून का भविष्य
वैश्विक तापमान बढ़ने से मॉनसून पैटर्न बदल रहे हैं. गर्म हवा ज्यादा नमी सोखती है, जिससे कभी भारी बारिश और कभी सूखे की स्थिति बनती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में एक्स्ट्रीम वेदर इवेंट्स बढ़ेंगी.  2026 का मॉनसून शुरुआती कमी के साथ शुरू हुआ है. अल-नीनो और अन्य कारकों के बावजूद IMD आखिरी जून में सुधार की उम्मीद जता रहा है. इतिहास गवाह है कि मॉनसून खुद को संभाल लेता है, लेकिन तैयारी के बिना चुनौतियां बढ़ सकती हैं। 

 

Mumbai Monsoon: बारिश से बेहाल मुंबई, अंधेरी सबवे डूबा; कई इलाकों में जलभराव, IMD का येलो अलर्ट जारी

 मुंबई

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने दस्तक दे दी है. सोमवार सुबह से जारी बारिश के बीच कई इलाकों में जलभराव की खबरें सामने आ रही हैं. अंधेरी सबवे में पानी भर गया है. वहीं, कई सड़कों पर भी पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 22 जून को शहर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, बीते दिन यानी रविवार को शहर के कई इलाकों में सीजन की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने आज भी आंधी-बारिश की चेतावनी दी है। 
 
मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में मॉनसून दक्षिण कोंकण तक पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मॉनसून सोलापुर के पास रुका हुआ था. महाराष्ट्र में एक बार फिर मॉनसून एक्टिव हुआ है लेकिन रफ्तार अभी धीमी है. बता दें कि मुंबई में हर साल मॉनसून में मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस बार मॉनसून ने अभी तक अच्छी रफ्तार नहीं पकड़ी है। 
 
IMD के अनुसार, मुंबई और आसपास के इलाकों में आज पूरे दिन बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी. कुछ जगहों पर गरज और बिजली चमकने के भी आसार हैं. मौसम विभाग ने मुंबई में आज येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि मौसम खराब रह सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा खतरा नहीं है। 

मौसम विभाग के अनुसार, मुंबई के ऊपर कुछ बादल छाए हुए हैं. हालांकि, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में अभी मॉनसून की अच्छी बारिश नहीं हुई है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में ही बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं। 

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआत इस बार थोड़ी देरी से हुई है. लेकिन अब हवाओं में नमी बढ़ने से बारिश शुरू हो गई है. मुंबई के आसमान में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं. जबकि कई इलाकों में हल्की बारिश भी हो रही है. वहीं, कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल रही हैं। 

इस बीच मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अलर्ट है. मॉनसून की बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए पंपिंग मशीनें चेक की जा रही हैं. ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि लोगों को बारिश से होने वाले ट्रैफिक जाम से ना जूझना पड़े। 

मॉनसून की बारिश किसानों के लिए अच्छी खबर है. महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो सकेगी. मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून और मजबूत हो सकता है. पूरे महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। 

भारत ने बढ़ाई रूस और UAE से तेल खरीद, अमेरिकी आयात में भारी गिरावट

नई दिल्ली
 ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने तक भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले अपना ‘ऑयल स्टोरेज’ सुरक्षित करने की रणनीति अपनाई.

मैरीटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म क्लेपेर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, जून में 19 तारीख तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जबकि मई में यह 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन था. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.

संयुक्त अरब अमीरात से आयात जून में 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है. वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा. सऊदी अरब की आपूर्ति 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रही.

भारत ने 60% तक घटाई अमेरिकी तेल खरीद
दूसरी ओर, अमेरिका से तेल आयात घटकर केवल 91 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बैरल प्रतिदिन था. रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला तेल भारत के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से बढ़ी खरीद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनिश्चितता के बीच आपूर्ति संतुलित करने में मदद की.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और कच्चे तेल, एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. होर्मुज दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत के परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह के अंत से होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति धीरे-धीरे बहाल होने लगी है.

होर्मुज के खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार
फिर भी, ईरान द्वारा इजरायल पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद स्थिति को अब भी नाजुक माना जा रहा है. लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद ईरानी सेना ने शनिवार को फिर से होर्मुज बंद करने की घोषणा की. इस तरह यह समुद्री मार्ग जहाजों की आवाजाही के लिहाज से अब भी पूरी तरह खुल नहीं सका है. क्लेपेर में मॉडलिंग के सीनियर मैनेजर सुमित रितोलिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी आपूर्ति में मिलेगी, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है.

उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों के व्यवधान के दौरान भारत ने तेल और गैस आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों और अन्य समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया है. रितोलिया के अनुसार, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का फिर से खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा मील का पत्थर होगा, लेकिन भारत पर इसका असर अलग-अलग ईंधनों पर अलग तरीके से पड़ेगा.’ उन्होंने कहा कि एलपीजी सबसे ज्यादा प्रभावित ईंधन रहा, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही. क्योंकि भारत ने रूस, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ा दिया था.

भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर
सुमित रितोलिया का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत से धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बनने पर सबसे पहले फंसे हुए कार्गो को निकाला जाएगा और शिपिंग गतिविधियां बहाल की जाएंगी. इसके बाद खाड़ी देशों का निर्यात धीरे-धीरे बढ़ेगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत नेचुरल गैस और लगभग 65 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. ईरान युद्ध से पहले भारत के लगभग आधे कच्चे तेल, दो-तिहाई एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी. हाल के दिनों में होर्मुज में भारत के लिए स्थिति सामान्य होने के संकेत भी मिले हैं.

भारत के झंडे वाले तीन तेल टैंकर, जिनमें 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल था, और एक भारतीय एलएनजी जहाज ने अमेरिका-ईरान समझौते के बाद सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है. रितोलिया ने कहा कि रूस का कच्चा तेल अब भी भारत की आयात रणनीति का प्रमुख आधार बना हुआ है. जून में रूस से आयात 23.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान है और यह नया रिकॉर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमतों और आपूर्ति सुरक्षा के कारण होर्मुज सामान्य होने के बाद भी रूस भारत के लिए अहम आपूर्तिकर्ता बना रहेगा.

भारत ने वेनेजुएला से भी तेल की खरीद बढ़ाई
भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च के बाद से अटलांटिक बेसिन और वेनेजुएला से भी खरीद बढ़ाई है ताकि खाड़ी क्षेत्र की सीमित आपूर्ति की भरपाई की जा सके. जून में वेनेजुएला से आयात 3 से 4 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और उत्पादन सीमाओं के कारण दीर्घकालिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी क्षेत्र में देखा गया है. खाड़ी आपूर्ति बाधित होने के बाद अमेरिका भारत के लिए बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. पिछले साल हुए दीर्घकालिक समझौते ने इसमें मदद की, हालांकि लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है.

सुमित रितोलिया के अनुसार, होर्मुज सामान्य होने के बाद खाड़ी देशों की बाजार हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी, लेकिन भारत की आयात रणनीति पहले की तुलना में अधिक विविध बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने से माल ढुलाई लागत कम होगी, आपूर्ति जोखिम घटेंगे और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा. हालांकि, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और व्यापारियों का भरोसा पूरी तरह लौटने में अभी कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं.

रेलवे का बड़ा कदम: रेलवन ऐप में AI फीचर, वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की संभावना बताएगा

नई दिल्ली
ट्रेन से यात्रा का प्लान बनाते समय सबसे बड़ी टेंशन बर्थ कंफर्म होने की होती है। इस मामले में रेलवे से यात्रियों के लिए बड़ी राहत वाली खबर आई है। भारतीय रेलवे ने अपने आधिकारिक रेलवन एप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से लैस कर दिया है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे के अनुसार, एप में जोड़ा गया नया एआई आधारित फीचर टिकट कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है और इसकी सटीकता लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी सरकारी रेलवे एप में यात्रियों को वेटिंग टिकट की स्थिति के बारे में एआई आधारित पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद करना है। यदि किसी यात्री का टिकट वेटिंग में है, तो एप उपलब्ध आंकड़ों और पूर्व रिकॉर्ड के आधार पर यह अनुमान बताएगा कि टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है।

एआई मॉडल लाखों पुराने रिजर्वेशन रिकॉर्ड, टिकट कैंसिलेशन के पैटर्न, विभिन्न रूटों पर यात्रियों की मांग, मौसम, छुट्टियों और त्योहारों के दौरान होने वाली अतिरिक्त भीड़ जैसे कई कारकों का विश्लेषण करता है। इसके बाद सिस्टम संभावित परिणाम का आकलन करता है। रेलवे का दावा है कि हालिया परीक्षणों और समीक्षा में इस तकनीक ने लगभग 94 प्रतिशत तक सटीक परिणाम दिए हैं।

हालांकि रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक पूर्वानुमान है, कोई अंतिम गारंटी नहीं। टिकट का वास्तविक कन्फर्मेशन सीटों की उपलब्धता, कैंसिलेशन और चार्ट तैयार होने तक होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को एआई के अनुमान को केवल एक मार्गदर्शक के रूप में देखना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रेलवे सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कारण होने वाली अनिश्चितता से काफी हद तक राहत मिलेगी और वे समय रहते वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था भी कर सकेंगे।

उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ पीआरओ डॉ. अमित मालवीय का कहना है कि भविष्य में एआई आधारित सेवाओं का दायरा और बढ़ाया जाएगा, जिससे यात्रियों को अधिक सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। रेलवन एप में जोड़ी गई यह नई सुविधा भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

अंबुबाची मेला 2026 की तैयारी पूरी, कामाख्या मंदिर में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु

 गुवाहाटी
पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक अंबुबाची मेला 2026 के लिए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी की ऐतिहासिक नीलाचल पहाड़ी पर स्थित माँ कामाख्या मंदिर में इस वर्ष देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के जुटने की उम्मीद है।

देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र और स्त्री शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय उत्सव 22 जून को ‘प्रवृत्ति’ के साथ शुरू होगा और 26 जून को ‘निवृत्ति’ के साथ समाप्त होगा। इस दौरान तीन दिनों तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं

असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग ने मेले की व्यवस्था को लेकर कहा, “यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक अंबुबाची मेला है। भारत और विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। हम श्रद्धालुओं को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर तरह से तैयार हैं। हमने निचले स्थानों पर शिविर और भोजन की व्यवस्था की है।

लगभग 8 लाख लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस आयोजन का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। हम श्रद्धालुओं से अनुरोध करते हैं कि वे मेले के दौरान सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक कामाख्या मंदिर अवश्य आएं।”

असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की
मेले के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और आवास सुविधाओं के लिए 24 विभागों में 4.55 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंदिर अधिकारियों ने सभी ऑफलाइन विशेष दर्शन काउंटरों को भी बंद कर दिया है। विशेष दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पास बुक करना होगा, जबकि सामान्य दर्शन नि:शुल्क रहेंगे।

अंबुबाची मेले का महत्व
मां कामाख्या मंदिर में साल में एक बार अंबुबाची मेला लगता है। । इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं।

इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से हो रही है, जो 26 जून तक चलेगा।

भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी युद्धपोतों का भव्य समावेश, समुद्री शक्ति को मिली नई मजबूती

नई दिल्ली
 पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को स्पष्ट संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं।’

समंदर में ताकत बढ़ा रही भारतीय नौसेना
कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे।

नेवी को मिला P17A क्लास का पांचवा वॉरिशप
इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती INS दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया।

INS दूनागिरी की खासियत
    INS दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।
    यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।
    यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
    INS दूनागिरी लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
    6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।

INS अग्रेह की खासियत
    दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

    INS अग्रेह की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है।
    यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।
    तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

INS संशोधक की खासियत
    संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है।
    जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
    इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
    110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है।
    यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है।
    भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

IMD का अलर्ट: 17 राज्यों में आंधी-बारिश का खतरा, 70 किमी/घंटा तक चलेंगी तेज हवाएं

नई दिल्ली
देश के कई राज्यों में एक बार फिर मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने 17 राज्यों में तूफानी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम के लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती है, क्योंकि यहां पर कल यानी 22 जून को भारी बारिश होने की आशंका है। इस दौरान कई इलाकों में बिजली गिरने, जलभराव और भूस्खलन होने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, 23 जून के आसपास महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं।

17 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट
IMD के अनुसार, 17 राज्यों में तेज हवाओं के साथ 22 जून को बारिश हो सकती है। अगले दो दिनों के दौरान पूर्वी भारत, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तथा अगले 24 घंटों के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में मध्यम से गंभीर आंधी-तूफान की गतिविधि होने की संभावना है। इस दौरान 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं अगले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में कहीं-कहीं ओलावृष्टि और को राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने की भी संभावना है।

दिल्ली में कल कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली में हल्की बारिश की संभावना (22-24 जून): मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 22 जून को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और अधिकतम तापमान 35 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। 23 जून को भी राजधानी दिल्ली में 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के आसार है। हालांकि 23 और 24 जून को बारिश होने की संभावना काफी कम है।

यूपी में कल कैसा रहेगा मौसम
उत्तर प्रदेश में अभी नहीं मिलेगी गर्मी से राहत (22-25 जून): उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर अभी जारी रहने वाला है। IMD के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 24 जून तक लू चलने की संभावना है, जबकि राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि 25 जून को पूर्वी उत्तर प्रदेश और 26 जून को दोनों क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद और कन्नौज में कल मौसम शुष्क रहेगा। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर में कल मौसम शुष्क रहेगा, साथ ही लू चलने की संभावना है।

आपके शहर में कल कैसा रहेगा मौसम
शहर      अधिकतम तापमान (20 जून)     न्यूनतम तापमान (20 जून)
दिल्ली      41°C     27°C
मुंबई      35°C     30°C
चेन्नई      39°C     29°C
कोलकाता       36°C     28°C
लखनऊ       42°C     31°C
पटना      40 °C     31°C
रांची       33°C     24°C
भोपाल     36°C     26°C
जयपुर     37°C     27°C
शिमला     26°C     15°C
नैनीताल     27°C     17°C

बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम
बिहार के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट (22- 28 जून): बिहार में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में अगले सात दिनों तक बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। मौसम विभाग ने अररिया, कटिहार और किशनगंज जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश, मेघगर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण में कल एक-दो स्थानों पर बारिश की संभावना है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा में कल कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। अररिया, सुपौल, कटिहार और किशनगंज में भारी बारिश, वज्रपात और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट है। रोहतास, कैमूर (भभुआ), भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद में कल एक-दो स्थानों पर बारिश की संभावना है।

हिमाचल प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम
हिमाचल प्रदेश में हल्की बारिश का अलर्ट (22-27 जून): मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 22 से 27 जून के दौरान छिटपुर बारिश हो सकती है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, चंबा, सिरमौर, सोलन, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में बारिश और बिजली गिरने की आशंका है।

उत्तराखंड में कल कैसा रहेगा मौसम
उत्तराखंड में बारिश का अलर्ट ( 22-27 जून): IMD ने उत्तराखंड में 22 से 27 जून तक बारिश होने की संभावना जताई है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग में बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। 23 जून को गरजम-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम
राजस्थान में धूलभरी आंधी का अलर्ट (22-27 जून): मौसम विभाग के अनुसार, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, अलवर, भरतपुर, सीकर, झुंझुनूं, जैसलमेर, बाड़मेर में तेज आंधी और हल्की बारिश की संभावना है। 22 और 23 जून को कुछ इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। जबकि कल पश्चिमी राजस्थान में डस्ट स्टॉर्म की चेतावनी जारी की गई है।

जम्मू-कश्मीर में कल कैसा रहेगा मौसम
जम्मू-कश्मीर में बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट (22 जून): मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में कल यानी 22 जून को बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। श्रीनगर, जम्मू, बारामूला, अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम, डोडा, राजौरी, पुंछ, उधमपुर में बारिश, आंधी और कुछ जगह ओलावृष्टि की संभावना है।

हरियाण में कल कैसा रहेगा मौसम
हरियाणा में हल्की बारिश की संभावना (22-24 जून): हरियाणा में 22 से 24 जून को छिटपुट बारिश होने की संभावना है। राज्य के गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, यमुनानगर, भिवानी में आंधी और हल्की बारिश की संभावना है।

झारखंड में कल कैसा रहेगा मौसम
झारखंड में आंधी-बारिश का अलर्ट (22-27 जून): रांची, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह, दुमका, पलामू में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। मौसम विभाग ने 22 से 27 जून के दौरान बारिश का दौर जारी रहेगा की संभावना जताई है। इस दौरान करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

ओडिशा में कल कैसा रहेगा मौसम
ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट (22-27 जून): मौसम विभाग ने ओडिशा में 22 और 23 जून को भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 70 की स्पीड से तेज हवाएं भी चलेंगी।

 

मुंबई में बढ़े स्वाइन फ्लू और कोविड के मामले, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

मुंबई
मुंबई में इन दिनों सांस और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है। डॉक्टरों की प्राइवेट क्लीनिक्स पर भी लोगों की लाइन लगी रहती है। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पतालों में स्वाइन फ्लू (H1N1) और कोविड के लिए बनाए गए ओपीडी काउंटर्स पर एक बार फिर मरीजों का आना शुरू हो गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के नामी ब्रीच कैंडी अस्पताल की लैब में रोज कम से कम सात कोविड या फिर स्वाइन फ्लू के केस सामने आ रहे हैं।

क्या होते हैं मरीजों के लक्षण
आम तौर पर ऐसे मरीजों को तेज बुखार होता है। बुखार 102 से 103फारेन हाइट्स के बीच पहुंच जाता है। शरीर में दर्द, सीने में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण देखे जाते हैं। फोर्टिस अस्पता के डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों स्टमक फ्लू के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।

क्या मॉनसून में देरी की वजह से बढ़ रहीं बीमारियां
बीएमसी के हेल्थ ऑफिसर डॉ. दक्ष शाह के मुताबिक मौसम में बदलाव की वजह से बीमारियां बढ़ी हैं। मॉनसून में देरी होने की वजह से आर्द्रता बहुत ज्यादा है और उमस बर्दाश्त से बाहर हो गई है। ऐसी स्थिति में वायरस भी हवा में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जब बारिश शुरू हो जाएगी तो अपने आप इस तरह की दिक्कतें कम होने लगेंगी।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों प्रेग्नेंट महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों सो पीड़ित लोगों को ज्यादा देखरेख की जरूरत है। सांस के मरीजों को भी स्वास्थ्य का ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अधिकारियों का कहना है कि बिना डॉक्टर के सलाह के दवाइयां लेना भी हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे में लोगों को सीधे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जहां तक हो सके भीड़ में मास्क का उपयोग करें। इसके अलावा साफ सफाई का भी ध्यान रखें।

क्या हैं कोरोना के लक्षण
कोरोना होने पर अचानक तेज बुखार आता है। इसके अलावा ठंड भी लग सकती है। शरीर में तेज दर्द, मांस पेशियों में ऐंठन, गले में खराश, सूखी खांसी, पेट की खराबी और डायरिया जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। वहीं स्वाइन फ्लू में तेज बुखार के साथ सीने में दर्द हो सकता है। तेज सिरदर्द, खूब पीना आना, नाक बहना और कमजोरी इसके लक्षण हैं।

बारिश से मिली राहत
चमचमाती धूप और उमस से परेशान मुंबईकरों को रविवार को थोड़ी राहत मिली है। मुंबई के बड़े इलाके में रविवार सुबह बारिश हुई जिसके बाद तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। बता दें कि महाराष्ट्र में मॉनसून के अटकने की वजह से जल संकट भी पैदा हो गया है। अब तक मॉनसून मुंबई नहीं पहुंच पाया है। हालांकि अब मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल हैं और जल्द ही यह मुंबई पहुंच जाएगा।

मॉनसून महीने की शुरुआत में ही दक्षिण कोंकण में प्रवेश कर गया था। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ समेत अन्य कारणों से मॉनसून पर ब्रेक लग गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, सुबह छह बजे से सात बजे के बीच घाटकोपर स्थित महानगरपालिका द्वारा संचालित रामाबाई विद्यालय में सबसे अधिक 24 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। इसके बाद चेंबूर अग्निशमन केंद्र में 20 मिलीमीटर और मानखुर्द अग्निशमन केंद्र में 16 मिलीमीटर बारिश हुई।

इसके बाद सुबह सात बजे से आठ बजे के बीच महानगरपालिका द्वारा संचालित वर्ली सी-फेस विद्यालय और सावित्रीबाई फुले विद्यालय में 25-25 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो शहर में सर्वाधिक रही। इसके अलावा, लोअर परेल स्थित जी-दक्षिण वार्ड कार्यालय में 21 मिलीमीटर और वर्ली अग्निशमन केंद्र में 17 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान जलभराव या बारिश से संबंधित किसी बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली।

तमिलनाडु के तिरुवल्लुर में फैक्ट्री हादसा, अमोनिया गैस रिसाव से 2 की मौत

तमिलनाडु
तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया. पेरियापालयम के पास कन्निगापेर गांव स्थित ‘सेंट पीटर्स पॉल सीफ़ूड प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट कंपनी’ में अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया. गैस फैलते ही फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे.

इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी गैस की चपेट में आ गए, जिनमें इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है. वहीं, उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं. गैस का असर होते ही कई कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और बेचैनी की शिकायत होने लगी. इसके बाद पर फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया. प्रभावित कर्मचारियों को अलग-अलग वाहनों के जरिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया.

अस्पतालों में भर्ती किए गए कर्मचारी
प्रभावित कर्मचारियों को इलाज के लिए तुरंत गाड़ियों से पास के वेल्स प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और वेंकटेश्वर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की टीम ने सभी मरीजों की तत्काल जांच शुरू की और इलाज किया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, 6 कर्मचारी गैस के प्रभाव से बेहोश हो गए.

उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. वहीं, दो लोगों के नाक से खून आने की भी जानकारी है, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया है. गांव के लोगों और फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भी इस घटना के बाद भय का माहौल है. बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों और फैक्ट्री परिसर के बाहर जमा हो गए हैं.

तीन गंभीर मरीजों को किया गया रेफर
घटना की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम ने गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों का प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद तीन गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए चेन्नई स्थित स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचाया गया. बता दें कि अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में रेफ्रिजरेशन सिस्टम के लिए किया जाता है.

वहीं, राज्य के मंत्री कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हादसे में 60 महिलाएं और 4 पुरुष प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है और अधिकारियों को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

FIR दर्ज, दो फैक्ट्री मालिक हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. शुरुआती कार्रवाई के तहत फैक्ट्री के दो मालिकों को हिरासत में लिया गया है. उनसे पूछताछ की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच जारी है. वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
 

NEET परीक्षा के बीच PM मोदी का संवेदनशील फैसला, एयरपोर्ट पर किया इंतजार

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए एक संवेदनशील फैसला लिया। उन्होंने NEET परीक्षा के चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर करीब 45 मिनट तक इंतजार किया। पीएम मोदी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि दोपहर 2 बजे नीट परीक्षा आयोजित होनी थी और पीएम के प्रोटोकॉल के हिसाब से जिस जगह काफिला निकलता वहां पर कुछ समय तक ट्रैफिक बाधित हो जाता है। ऐसे में छात्रों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में पीएम मोदी ने 2 बजे तक के लिए एयरपोर्ट पर ही इंतजार का फैसला लिया।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री का काफिला निर्धारित समय एक बजकर 15 मिनट पर रवाना हो सकता था, लेकिन NEET परीक्षा देने जा रहे छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो और उनके आवागमन में बाधा न आए, इसके लिए उन्होंने कुछ समय तक रुकने का निर्णय लिया। इस दौरान सुरक्षा और यातायात से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा गया।

कोलकाता से लौटे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में योग कार्यक्रम और भारतीय नौसेना के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौटे थे।

री-नीट यूजी एग्जाम को लेकर प्रशासन अलर्ट
देशभर में री-नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया और परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अभ्यर्थियों ने कड़ी जांच के बाद परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दीं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नीट परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफल तरीके से आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि किसी भी परिस्थिति में युवाओं और छात्रों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में नीट की दोबारा परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के 127 केंद्रों पर 50,000 से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नीट परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है; नौ केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और प्रश्न पत्रों को पुलिस व आईटीबीपी की सुरक्षा में केंद्रों तक पहुंचाया गया है।

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