मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ी चिंता, उत्तर भारत में अब भी बारिश का इंतजार

नई दिल्ली
 देश के सुदूर दक्षिणी छोर केरल में एक तो लेट से मानसून टकराया था। 1 जून को आने वाला यह मानसून इस बार 4 जून को आया। शुरुआत में इसकी रफ्तार मध्य भारत तक ठीक-ठाक रही, मगर जब तक यह ठीक से भिगोता हुआ आगे बढ़ता कि इसकी रफ्तार पर ब्रेक ही लग गया। इसके बाद तो इसके करीब-करीब गायब होने की बातें भी आईं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद यह मानसून अचानक लापता हो गया। अब पूरा उत्तर भारत मानसून का बेसब्री से बाट जोह रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मानसून के स्वागत में खड़े हैं।

12 दिनों से तेलंगाना-महाराष्ट्र में अटका था मानसून
ऐसी रिपोर्ट हैं कि महाराष्ट्र और तेलंगाना में यह मानसून बीते 12 दिनों से अटका हुआ था। मगर, अब इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के लापता होने में सोमाली जेट भी एक बड़ा कारण है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मानसून की रफ्तार को थाम दिया है।

सोमाली जेट क्या होता है, जिसने बिगाड़ा मानसून का मूड
    सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। भारतीय मानसून के लिए अहम सोमाली जेट को फाइंडलेटर जेट भी कहते हैं।
    सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है। दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है।
    सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है।
    बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मानसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में मददगार होती हैं।
    इस बार अल नीनो की वजह से भी मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका भी मौसम वैज्ञानिक बार-बार जता रहे हैं।

1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश
    मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है।
    आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।
    मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है।

23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचेगा
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है।

मध्य भारत में बन रहा चक्रवातीय घेरा
    इससे मध्य भारत में चक्रवातीय घेरा बना हुआ है, जिससे मानसून के बादल उत्तर भारत की तरफ आ सकते हैं। मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।
    इससे पहले बिहार में शुक्रवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की और झारखंड में 8 लोगों की जान गई। राजस्थान के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पूरे महाराष्ट्र में हाहाकार मचा, खुले में रात बिता रहे लोग
मानसून की इस बेरुखी की वजह से महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है मुंबई में मारे गर्मी के लोग समुद्री तट के किनारे खुले में रात बिता रहे हैं। यहां 11 जून को ही मानसून मुंबई पहुंचने वाला था, मगर अभी तक इसका अता-पता नहीं है।

इन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून केरल, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंच चुका है।

20 जून से 5 जुलाई के बीच इन राज्यों में मानसूनी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 20 जून से 5 जुलाई तक पहुंचेगा।

मध्य और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान, बंगाल में भारी बारिश

  • मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
  • वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है।
  • छत्तीसगढ़ में भी 19 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है।
  • मौसम का यह बदलाव सिर्फ मध्य भारत तक सीमित नहीं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में 19 से 21 जून के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि केरल में भी 19 से 23 जून के बीच भारी बारिश होने की संभावना है।
  • वहीं, बंगाल के कोलकाता, सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में शनिवार को भी भारी बारिश हुई। दार्जिलिंग में बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया।

मानसून की कमी के बीच पारा 40 डिग्री के पार

  •     मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.2°C दर्ज किया गया।
  •     वहीं यूपी के प्रयागराज में 43.6°C, एमपी के खजुराहो 42.4°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.1°C, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42°C, बिहार के छपरा में 41.8°C और झारखंड के डाल्टनगंज में 40°C रहा।

21 और 22 जून को क्या होगी बारिश
    21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना है। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
    असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
    राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
    22 जून को सिक्किम, उत्तर बंगाल, असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना है।
    राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश के साथ 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
    झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
    तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है।

खरीफ की फसल पर पड़ सकता है असर
    महाराष्ट्र में मानसून की देरी का असर खरीफ सीजन की शुरुआत में दिखाई दे रहा है। राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून के मध्य तक राज्य में केवल 1 प्रतिशत बुवाई पूरी हो पाई है।
    सामान्य तौर पर इस समय तक कई जिलों में बुवाई का काम तेज गति से चल रहा होता है, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण किसान इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं.

  

एनएमडीसी की CSR पहल: दंतेवाड़ा के 10 गांवों में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर से सैकड़ों ग्रामीण लाभान्वित

हैदराबाद
देश की अग्रणी खनन कंपनी एनएमडीसी अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के माध्यम से आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों के क्रम में कंपनी द्वारा दंतेवाड़ा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में समुदाय स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वास्थ्य सेवा पहुंच कार्यक्रम के तहत निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का सफल आयोजन किया जा रहा है।
इस पहल के अंतर्गत 19 मई से ग्राम पंचायत भांसी, बड़े बचेली, धुरली, पाड़ापुर, नेरली, दुगेली, गंजेनार, मसेनार, मोलसनार एवं कमलूर में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें सैकड़ों ग्रामीणों ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श सेवाओं का लाभ उठाया। लाभार्थियों में अधिकांश संख्या अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंधित ग्रामीणों की रही। एनएमडीसी की यह स्वास्थ्य सेवा पहल निरंतर जारी है और आने वाले समय में भी अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचकर ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती रहेगी।

सबसे हालिया चिकित्सा शिविर 19 जून को ग्राम पंचायत कमलूर में आयोजित किया गया, जहां 96 ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। बैलाडीला क्षेत्र मुख्यतः आदिवासी आबादी वाला दूरस्थ इलाका है, जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं तक नियमित पहुंच एक चुनौती बनी रहती है। ऐसे में एनएमडीसी द्वारा कलेपाल, टिकनपाल, कोडेनार, बेनपाल, कदमपाल, मदाड़ी, हिरोली, गुमियापाल, समलवार, चोलनार, मड़कामिरास एवं पालनार जैसे दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की यह पहल स्थानीय समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

चिकित्सा शिविरों के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप (बीपी) परीक्षण, रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) जांच, शरीर के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों का परीक्षण तथा स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया जा रहा है। साथ ही पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। आवश्यकता अनुसार मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार हेतु निकटवर्ती स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया जा रहा है।

इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों में न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही हैं, बल्कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान भी संभव हो सकी। दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से समय और संसाधनों की बचत हुई तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की आवश्यकता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो रहा है।

ग्रामीणों ने एनएमडीसी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं, जिन्हें अक्सर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गांव के निकट ही विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां उपलब्ध होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

एनएमडीसी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक और सतत विकास तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय स्वस्थ, जागरूक और सशक्त हो। इसी सोच के साथ कंपनी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, जन-जागरूकता को मजबूत करने और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एनएमडीसी ने हाल ही में जगदलपुर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन हेतु भी वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। यह पहल बस्तर क्षेत्र के हजारों लोगों को आधुनिक एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एनएमडीसी की ये पहलें केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने और स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास एवं सहभागिता का मजबूत रिश्ता बनाने की उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।

बिना टिकट यात्रा पर सख्ती: रेलवे ने बढ़ाया जुर्माना, अब देना होगा दोगुना दंड

नई दिल्ली
अगर आप ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हैं तो सावधान हो जाएं। पकड़े जाने पर अब पहले से दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा। रेलवे में नए नियमों के तहत अब बिना टिकट यात्रा करने या यात्रा का प्रयास करने पर देय न्यूनतम अतिरिक्त जुर्माना राशि को दोगुना करते हुए 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार, अनियमित यात्रा से संबंधित मामलों में भी अब 250 रुपये के स्थान पर 500 रुपये का न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार वसूला जाएगा।

जुर्माना राशि में कड़ा संशोधन
रेलवे में अनुशासन बनाए रखने, यात्रियों की सुविधा और रेल सेवाओं के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल अधिनियम में संशोधित दंड एवं जुर्माना प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश, अनधिकृत फेरी, महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों का जबरन प्रवेश और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करने जैसे अन्य विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित दंड प्रावधानों तथा जुर्माना राशि में भी कड़ा संशोधन किया गया है।

19 जून से प्रभावी
रेल मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत रेल अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में किए गए ये महत्वपूर्ण बदलाव 19 जून से प्रभावी हो चुके हैं। लंबे समय से अपरिवर्तित चली आ रही दंड राशियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और व्यावहारिक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने शनिवार को बताया कि इन संशोधित प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों में नियमों के प्रति जागरुकता बढ़ाना और बिना टिकट व अनियमित यात्रा पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों में पहले से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा फायदा
रेलवे प्रशासन का मानना है कि बढ़े हुए दंड प्रावधानों के डर से बिना टिकट और अनियमित यात्रा की घटनाओं में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा उन वैध टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा जो पूरा किराया देकर सफर करते हैं। इससे रेलवे परिसरों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

 

ओडिशा को 47,000 करोड़ की सौगात: पीएम मोदी ने विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास

भुवनेश्वर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा को बड़ा उपहार दिया है। 47 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के साथ ही ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूर्ति के उपलक्ष्य में आयोजित जनसभा को प्रधानमंत्री ने संबोधित किया।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति ने राष्ट्रपति को जन्म दिन की शुभकामना दी। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ रहीं।

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, आज पूर्वाह्न लगभग 11:15 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव पहुंचे।यहां वे संथाली जाहेरा और हो जाहेरा के पवित्र उपवनों में पूजा-अर्चना किए।

इसके अलावा वे स्किल सेंटर और पहाड़पुर स्कूल का भी किए।यह यात्रा जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करेगी।

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के साथ उनके गांव का भी भ्रमण किया है, राष्ट्रपति के स्कूल का भी प्रधानमंत्री ने परिदर्शन किया, ऐसे में उक्त क्षेत्र में सुबह से ही उत्सव एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला।लोग सुबह से ही सड़क किनारे पारंपरिक नृत्य गीत करते हुए प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति का स्वागत किए।

राष्ट्रपति का जन्म दिन होने से आज लोगों ने अपनी शुभकामना दी।विभिन्न प्लाकार्ड लेकर लोग जगह जगह खड़े रहे।पहाड़पुर जाते समय राष्ट्रपति ने अपने काफिले को रोककर बच्चों से मुलाकात की और उन्हें चाकलेट दिया।ये बच्चे राष्ट्रपति की एक झलक पाने को सड़क किनारे घंटे से खड़े थे। राष्ट्रपति महुलीपड़ा घर से निकलकर पहाड़पुर पहुंची जहां पर मुख्यममंत्री ने उनका स्वागत किया।

दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिए।कार्यक्रम का विषय “विकास की धारा, ओडिशा सारा” रखा गया है।

इस अवसर पर 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया और इस दौरान जनसभा को संबोधित किए

प्रमुख परियोजनाएं
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने ऊर्जा, औद्योगिक अवसंरचना, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किए।इन परियोजनाओं से राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूती, बेहतर संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

  •     600 मेगावाट की अपर इंद्रावती पंप्ड स्टोरेज परियोजना।
  •     आईबी थर्मल पावर स्टेशन के स्टेज-2 विस्तार परियोजना की दो नई 660-660 मेगावाट इकाइयां।
  •     झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) परियोजना।
  •     भुवनेश्वर में 300 टीपीडी क्षमता का स्रोत-आधारित पृथक्कृत ठोस कचरे से संचालित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र।
  •     कटक और भुवनेश्वर को सीधे जोड़ने के लिए काठजोड़ी नदी पर नया पुल।
  •     बौद्ध जिले में ढालपुर-हरभंगा सड़क का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण।
  •     नुआपड़ा से घाटीपाड़ा तक एनएच-353 के एक हिस्से का फोरलेन निर्माण।
  •     कुसुमढी मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना।
  •     रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और इंडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स।

इन परियोजनाओं का उद्घाटन

  •     बौद्ध में 300 बिस्तरों वाला जिला मुख्यालय अस्पताल भवन।
  •     ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड।
  •     नौ स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन)।
  •     एनएच-57 पर नयागढ़ टाउन बाईपास।
  •     कुसुमी स्मार्ट सिंचाई परियोजना का भूमिगत पाइपलाइन घटक।
  •     जखपुरा-जाजपुर-केंदुझर रोड-बैतरणी रोड मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना।
  •     हिंदोल रोड-मेरामंडली मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना।

रायरंगपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ट्राइबल रिसर्च सेंटर का प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति ने उद्घाटन किया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से ओडिशा में स्वास्थ्य, परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस पूरे कार्यक्रम में राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के सरकार राज्य सरकार के कई मंत्री एवं विधायक उपस्थित रहे।

 

कर्नाटक की ‘5 गारंटी’ योजनाओं का लाभ अब सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम वालों को मिलेगा

कर्नाटक
कर्नाटक सरकार की ‘पांच गारंटी’ योजनाओं का लाभ अब केवल उन्हीं नागरिकों को मिलेगा, जिनका नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में दर्ज होगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को यह साफ कर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि जो भी इन योजनाओं के असली हकदार हैं, उन्हें लाभ से वंचित न किया जाए, लेकिन अपात्र लोगों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।

वोटर लिस्ट में नाम होना अनिवार्य
विधान सौधा में एक समीक्षा बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार की ‘गृह ज्योति’ जैसी योजनाओं का लाभ अब सिर्फ पंजीकृत मतदाताओं तक सीमित रहेगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के दौरान यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची से उनका नाम न छूटे। मुख्यमंत्री ने कहा, “केवल वे मतदाता ही सरकारी योजनाओं के लाभार्थी होंगे, जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।”

दूसरे राज्यों के लोगों का रोका जाएगा फायदा
समीक्षा बैठक में यह बात भी सामने आई कि दूसरे राज्यों से आकर कर्नाटक में रह रहे कई लोग भी ‘गृह ज्योति’ जैसी योजना का लाभ ले रहे हैं। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सीएम ने कहा, “हमारे राज्य की योजनाओं का लाभ सिर्फ कर्नाटक के लाभार्थियों को ही मिलना चाहिए। हमने पाया है कि दूसरे राज्यों के वोटर भी यह लाभ ले रहे हैं, इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।”

गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
बैठक में कल्याणकारी योजनाओं में हो रहे कई तरह के फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई।

अधिकारियों ने बताया कि योजना का पैसा यूपीआई (UPI) खातों और कर्नाटक के बाहर के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है। सीएम ने ऐसे पैसे के प्रवाह पर रोक लगाने और लाभ को केवल राज्य के भीतर सीमित रखने के निर्देश दिए।

सीएम ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि मृत लाभार्थियों को भी पैसे का भुगतान जारी है। उन्होंने अधिकारियों को लाभार्थियों के रिकॉर्ड को ‘रियल-टाइम’ अपडेट करने का निर्देश दिया।

‘गृह लक्ष्मी’ योजना के तहत, बैंक खाते में पैसे आते ही कुछ बैंकों द्वारा उसे पुराने लोन की किस्तों (EMI) के रूप में काट लिए जाने के मामले भी सामने आए। इसके चलते कुछ महिलाओं ने अपने खाते बदल लिए। सीएम ने कहा कि लाभार्थियों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।

ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ‘गृह लक्ष्मी’ सहायता राशि एक ही बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भेजी गई, जिसमें लगभग 3 लाख किस्तों में करीब 60 करोड़ रुपये बांटे गए। ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सीएम ने निर्देश दिया कि योजना का पैसा खाते में आते ही लाभार्थियों को एक ऑटोमेटेड वॉइस मैसेज भेजा जाए।
क्या हैं कर्नाटक की 5 गारंटी योजनाएं और उनके ताज़ा आंकड़े?

समीक्षा बैठक में राज्य की फ्लैगशिप योजनाओं के आंकड़ों पर भी चर्चा की गई।

गृह ज्योति: हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। (अब तक 1.65 करोड़ लाभार्थी मुफ्त बिजली का लाभ उठा चुके हैं।)

गृह लक्ष्मी: परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक मदद।

अन्न भाग्य: बीपीएल (BPL) परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर महीने 10 किलो चावल। जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 के बीच 11,561.05 करोड़ रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजे गए हैं। साथ ही 4.44 करोड़ लाभार्थियों को 5 किलो अतिरिक्त चावल हर महीने दिया जा रहा है।

शक्ति योजना: महिलाओं के लिए राज्य की सरकारी (नॉन-लग्जरी) बसों में मुफ्त यात्रा। मई के अंत तक महिलाओं ने 763 करोड़ मुफ्त बस यात्राएं की हैं, जिनके टिकट की कीमत लगभग 20,047.69 करोड़ रुपये है। साथ ही 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में छात्रों को लगभग 10 लाख मुफ्त बस पास जारी किए जाने की उम्मीद है।

युवा निधि: 18 से 25 साल के बेरोजगार स्नातकों को 3,000 रुपये और बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को 1,500 रुपये प्रति माह का भत्ता- दो साल के लिए।

NEET-UG री-एग्जाम से पहले NTA की मेगा मॉक ड्रिल, 5,500 से अधिक केंद्रों पर सुरक्षा की परख

नई दिल्ली
 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने NEET-UG की री-एग्जाम परीक्षा से ठीक एक दिन पहले देशभर में मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया है। इस मॉक ड्रिल के जरिए एनटीए परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप से परख रही है।

यह फुल-स्केल रिहर्सल सुबह 9 बजे से रात के 8 बजे तक चलेगी। देश के 551 और विदेश के 14 शहरों में 5,500 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिन्हें हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील किया गया है।

इस री-एग्जाम में 22.79 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल होंगे। इस मॉक ड्रिल को करने का मुख्य उद्देश्य 21 जून की मुख्य परीक्षा को पूरी तरह से सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है?
इसमें परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्रों की सुरक्षित डिलीवरी, सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, और बहुस्तरीय सुरक्षा जांच जैसी सभी प्रक्रियाओं का वास्तविक समय में परीक्षण किया जाता है।

6,669 पर्यवेक्षक तैनात किए गए
एनटीए के अनुसार, पुनर्परीक्षा में कई एजेंसियों और प्रशासन के विभिन्न स्तरों के बीच घनिष्ठ समन्वय शामिल है, जिसमें 674 शहर समन्वयक शहर-स्तरीय संचालन की देखरेख कर रहे हैं और परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र निगरानी के लिए 6,669 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर केंद्र अधीक्षक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।

एनटीए ने बताया कि पुनर्परीक्षा के सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित कुल मिलाकर 2 लाख से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है। एनटीए इस बार किसी तरह की चूक करना नहीं चाहती है।

14 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदने का आरोप, उत्तराखंड में 12 अधिकारियों पर कार्रवाई

उत्तराखंड
उत्तराखंड की नौकरशाही में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक भूमि खरीद मामले ने प्रशासनिक तंत्र की इतनी बड़ी परतें उधेड़ दी हों. एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति, दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई, कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन और मुकदमे की तलवार.

करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के आरोपों से यह मामला शुरू हुआ था.  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जिस सख्ती के साथ कार्रवाई की है, उसने सचिवालय से लेकर जिलों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में अब लापरवाही भी भारी पड़ सकती है.

सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों
सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की है. वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट देने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन सैलरी इनक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

कैसे खुली पूरे मामले की परतें
अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई एक भूमि खरीद अचानक सुर्खियों में आ गई. आरोप लगा कि जिस जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये के आसपास थी, उसे करीब 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया. मामला सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सवाल उठने लगे. आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या जमीन की वास्तविक जरूरत थी? क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन में सचिव रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी.

100 पन्नों की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
रणवीर चौहान ने हरिद्वार पहुंचकर पूरे मामले की गहन जांच की. फाइलों की पड़ताल हुई, अधिकारियों के बयान लिए गए और भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया गया. लंबी जांच के बाद करीब 100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी गई. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला लिया गया. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

जांच में क्या मिला
रिपोर्ट के मुताबिक भूमि खरीद की प्रक्रिया कृषि भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शुरू हुई थी, लेकिन अंतिम खरीद वाणिज्यिक दरों पर की गई. जांच अधिकारियों को यह बिंदु सबसे अधिक संदिग्ध लगा. इसके अलावा भूमि खरीद के लिए जरूरी लैंड कमेटी का गठन नहीं किया गया. सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी खरीद से पहले कई स्तरों पर परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया होती है, लेकिन यहां कई महत्वपूर्ण चरण या तो पूरे नहीं किए गए या फिर अत्यधिक जल्दबाजी में निपटा दिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़ी धारा-143 की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेजी से पूरी की गई. बताया गया कि सामान्य तौर पर समय लेने वाली यह प्रक्रिया महज दो से तीन दिनों के भीतर पूरी हो गई. रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम स्तर पर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए स्टेनो से ही राजस्व संबंधी अभिमत तैयार करवाया गया. यदि यह तथ्य अंतिम रूप से सिद्ध होता है तो इसे प्रशासनिक नियमों की गंभीर अनदेखी माना जाएगा.

जमीन पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में केवल कीमत और प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि भूमि चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं. बताया गया कि खरीदी गई जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल आवश्यकता भी स्पष्ट नहीं थी. ऐसे में यह सवाल और बड़ा हो गया कि आखिर उसी भूमि को खरीदने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई. जांच एजेंसियां अब यह भी पड़ताल कर रही हैं कि भूमि चयन के दौरान क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं.

निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक
मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था. उस समय भी इस कार्रवाई को अभूतपूर्व माना गया था. लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया. अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति तक पहुंच गया है.

अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी. राज्य सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा की जाएगी. कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है. सरकार का दावा है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो कार्रवाई तय है.

कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान पर गिरी बिजली, 141 यात्रियों को सुरक्षित उतारा गया

नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से शुक्रवार को अगरतला जाने वाली इंडिगो की एक फ्लाइट एयरपोर्ट पर खड़ी थी. इसी दौरान जबरदस्त तूफान के दौरान बिजली गिरी और फ्लाइट उसकी चपेट में आ गई. सुरक्षा नियमों के तहत यात्रियों को विमान से उतारा गया और नियमों के मुताबिक जरूरी जांच की गई. इसके बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया.

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एहतियातन ग्राउंड पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा के लिए ले जाया गया. सूत्रों के मुताबिक, किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर तूफान के दौरान अगरतला जा रहे इंडिगो के एक विमान पर बिजली गिरी.

क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तूफान और बारिश के बीच हुई, जिसके लिए एयरपोर्ट ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर (AOCC) ने मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए थे. उन्होंने बताया कि इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ. इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 (VT-IPW) एरोब्रिज 56L पर खड़ी थी, तभी सुबह करीब 9:30 बजे उस पर बिजली गिरी. बिजली गिरने से विमान के पावर सिस्टम पर असर पड़ा, जिससे अचानक पावर ऑफ हो गया.

अधिकारी ने बताया कि जब बिजली गिरी, तो A320 विमान में 141 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे. एहतियात के तौर पर एयरलाइन ने यात्रियों को विमान से उतार दिया और बाद में उन्हें A321 विमान (VT-ICD) से रवाना किया गया. यह फ्लाइट असल में सुबह 9.20 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन यात्रियों के साथ दोपहर 12.50 बजे रवाना हुई.

इंडिगो के मुताबिक, दो ग्राउंड स्टाफ मामूली रूप से प्रभावित हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारी ने बताया कि मेडिकल चेकअप के तुरंत बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.

कोलकाता और आसपास के जिलों में शुक्रवार सुबह से ही आंधी-तूफान और बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलजमाव हो गया है और ट्रैफिक में रुकावट आने की खबरें आईं.

तेजस MK2 की ताकत से दुनिया हैरान! THAAD-आयरन डोम को दे सकता है चुनौती, राफेल जैसी रफ्तार का दावा

बेंगलुरु 

 दशकों पहले जिस देश के पास जितनी मजबूत आर्मी यानी थलसेना होती थी, उसे उतना पावरफुल माना जाता था. फिर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमले के बाद कॉम्‍बैट फील्‍ड में एयरफोर्स की धमाकेदार एंट्री हुई. आज 21वीं सदी में दुनिया दो भीषण सशस्‍त्र संघर्ष का साक्षी बनी है – रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जंग. इन दोनों युद्ध में एक बात कॉमन है – एरियल अटैक यानी हवाई हमले. इन संघर्षों में पैदल सेना यानी आर्मी का न के बराबर यूज किया गया. हवाई हमले प्रमुख रहे. फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने प्रतिद्वंद्वी देशों की हालत खराब करके रख दी. इसके दो परिणाम सामने आए हैं – पहला फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने वाले प्रोजेक्‍ट्स का रफ्तार मिली है. दूसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर जोर दिया जाने लगा है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र परियोजना नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम का हिस्‍सा है. इसके अलावा देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर फाइटर जेट डेवलप करने की प्रक्रिया को भी रफ्तार मिली है. इसी क्रम में भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. तेजस फाइटर जेट के MK2 वेरिएंट Mk1A की तुलना में काफी कम रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) हासिल करने में सफल रहा है। 

 इसका मतलब यह हुआ कि तेजस MK2 मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा दे सकता है. साथ ही THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को धता बताने से महज कुछ कदम ही दूर है. इस खासियत के चलते तेजस MK2 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के बीच का ब्रिज भी माना जा रहा है. साथ ही इसकी स्‍पीड राफेल फाइटर जेट जितनी होने वाली है। 

भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 फाइटर जेट (मीडियम वेट फाइटर) में रडार से बचने की क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सुधार किया गया है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा. इसका अर्थ है कि नए विमान की रडार पर दिखाई देने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन को चकमा देने और सर्वाइवल की क्षमता बढ़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ADA के परियोजना निदेशक ने बताया कि तेजस MK2 का फ्रंटल आरसीएस तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई होगा. स्वतंत्र आकलनों के अनुसार, साफ कॉन्फिगरेशन (बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों के) में इसका फ्रंटल आरसीएस 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है. यह आंकड़ा आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में काफी प्रभावशाली माना जाता है। 

  • RCS में कमी लाने वाली प्रमुख खासियतें
  •     एडवांस शेपिंग और एज अलाइनमेंट (किनारों का विशेष डिजाइन), जिससे रडार तरंगें अपने स्रोत की ओर वापस परावर्तित यानी रिफ्लेक्‍ट होने के बजाय दूसरी दिशा में मुड़ जाती हैं। 
  •     S-डक्ट (S-Duct) या ट्विस्टेड एयर इंटेक, जो इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को छिपाते हैं. कंप्रेसर ब्लेड्स किसी भी लड़ाकू विमान में रडार के लिए सबसे बड़े परावर्तक (रिफ्लेक्टर) माने जाते हैं। 
  •     विमान के पंखों, फ्यूजलाज (मुख्य ढांचे), कैनार्ड्स और अन्य सतहों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग, जो धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है। 
  •     स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग, जिसे एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है। 
  •     सतहों के बीच अधिक चिकने और निर्बाध संक्रमण (स्मूथ सरफेस ट्रांजिशन) तथा बाहरी उभारों और गैप्स की संख्या में कमी, जिससे रडार पर विमान की पहचान और भी कठिन हो जाती है। 

मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के साथ बड़ा आकार
दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 फाइटर जेट आकार में अपने पूर्ववर्ती एमके-1ए से बड़ा है. इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज कपल्ड कैनार्ड और अधिक ईंधन तथा हथियार ले जाने की क्षमता होगी. सामान्य तौर पर विमान का आकार बढ़ने से उसकी रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन डिजाइनरों ने एडवांस एयरोडायनामिक डिजाइन, स्मूथ ट्रांजिशन और व्यापक रूप से कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल के जरिए इसकी रडार पहचान को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफलता हासिल की है. तेजस एमके-1ए पहले से ही अपनी श्रेणी के विमानों में अपेक्षाकृत कम आरसीएस के लिए जाना जाता है. इसका अनुमानित फ्रंटल आरसीएस लगभग 0.5 वर्ग मीटर या उससे कम माना जाता है. अब इसमें चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को लो विजिबिलिटी वाले उन विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिनकी तुलना अक्सर महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से की जाती है। 

रडार को चकमा देने की क्षमता
रडार से कम दिखाई देने की यह क्षमता विमान को दुश्मन के रडार द्वारा देर से पकड़े जाने में मदद करेगी. इससे विशेष रूप से बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) एरियल वॉर में इंडियन एयरफोर्स को सामरिक बढ़त मिल सकती है. हालांकि, विमान को पूरी तरह हथियारों और ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम आरसीएस बनाए रखना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. बाहरी हथियार, पॉड और अतिरिक्त टैंक रडार सिग्नेचर को बढ़ा देते हैं. इसी कारण डिजाइनर एडवांस रडार और अन्य तकनीकों पर काम कर रहे हैं। 

भारत के एरियल पावर को नई ऊंचाई
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी सुधारों के बावजूद विमान के विकास और वायुसेना में शामिल किए जाने की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. भारतीय वायुसेना को अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजस MK2 की आवश्यकता है, खासकर तब तक जब तक एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो जाती. GE F414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और अन्य आधुनिक सिस्‍टम्‍स के साथ तेजस MK2 भारतीय वायुसेना के लिए एक शक्तिशाली लड़ाकू प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, एडवांस सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता से यह विमान भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। 

ब्रह्मोस की ताकत का दुनिया ने माना लोहा, अब रूस भी अपनी सेना में करेगा शामिल; जानिए इसकी खासियत

 नई दिल्ली

भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों से बनी दुनिया की सबसे तेज और सटीक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल ने वैश्विक रक्षा बाजार में एक नया इतिहास रच दिया है. अब तक जिस मिसाइल तकनीक के लिए भारत विदेशी ताकतों पर निर्भर रहता था, आज उसी भारत से रूस जैसा महाशक्ति देश ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। 

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने नागपुर में आयोजित एक रक्षा कार्यक्रम के इतर इसकी पुष्टि की है कि रूस अपनी सेना में ब्रह्मोस को शामिल करने का इच्छुक है और इसके लिए द्विपक्षीय बातचीत बेहद एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुकी है. भारत जल्द ही रूस को इन घातक प्रणालियों की आपूर्ति शुरू कर सकता है। 

यह घटनाक्रम न केवल वैश्विक भू-राजनीति में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सबसे बड़ी सफलता की गवाही भी देता है. जिस मिसाइल को फिलीपींस जैसे देश पहले ही खरीद चुके हैं, उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी संहारक क्षमता साबित कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। 

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की अचूक मारक क्षमता
मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना और थलसेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस ऑपरेशन के दौरान पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल केवल परीक्षणों या सिमुलेशन तक सीमित न रहकर वास्तविक युद्धक्षेत्र में किया गया। 

भारतीय सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी गई एयर-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलों ने दुश्मन के हवाई क्षेत्रों और आतंकी बुनियादी ढांचों पर पिन-पॉइंट सटीकता से हमला किया। 

रडार को चकमा देने की इसकी काबिलियत और मैक 2.8 से 3.0 की सुपरसोनिक रफ्तार के कारण दुश्मन का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक या इंटरसेप्ट नहीं कर सका. ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया, खासकर रूस के सैन्य कमांडरों का ध्यान खींचा. रूस ने देखा कि यह मिसाइल घने हवाई सुरक्षा कवच को भेदकर अत्यंत सटीक हमले करने में पूरी तरह सक्षम है। 

आखिर रूस को क्यों पड़ी ब्रह्मोस की जरूरत?
रणनीतिक तौर पर ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन- DRDO और रूस के NPO Mashinostroyenia ने मिलकर विकसित किया है. शुरुआत से ही इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत रहा है. वर्तमान में रूस द्वारा ब्रह्मोस को अपनी सेना में शामिल करने के पीछे कई बड़े कारण हैं…

    वॉर टेस्टेड और विश्वसनीय तकनीक: यूक्रेन संकट और हालिया वैश्विक तनावों के बीच रूस को ऐसी मिसाइलों की आवश्यकता है जो पहले से ‘बैटल-प्रूवन’ हो. ब्रह्मोस ने भारतीय सेना के तीनों अंगों में रहकर और ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लेकर अपनी विश्वसनीयता साबित की है। 

    तेज गति और रडार से बचने की क्षमता: ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है. ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज 3704.4 km/hr चलने के कारण यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल क्रूज मिसाइल है. समुद्र या जमीन की सतह से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने से रडार इसे बहुत देर से पकड़ पाते हैं, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता।  

    स्वदेशीकरण और लागत में कमी: भारत ने ब्रह्मोस में बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण किया है. इसके स्वदेशी बूस्टर और वॉरहेड अब भारत में ही बन रहे हैं, जिससे इसके निर्माण और कच्चे माल की लागत में भारी गिरावट आई है. रूस के लिए भारत से रेडी-टू-यूज़ मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति लेना आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूप से बेहद फायदेमंद है। 

वैश्विक बाजार में भारत का डंका: फिलीपींस के बाद रूस की बारी
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के लिए यह दौर रिकॉर्ड मुनाफे और वैश्विक विस्तार का रहा है. वर्ष 2022 में फिलीपींस ने भारत के साथ लगभग 3,100 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सौदा कर ब्रह्मोस का पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार बनने का गौरव हासिल किया था, जिसकी मिसाइल खेपें पहले ही पहुंचाई जा चुकी हैं। 

फिलीपींस के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ भी निर्यात वार्ता अंतिम चरण में है. अब इस कड़ी में रूस का नाम जुड़ना भारत के रक्षा निर्यात इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है. अब तक सैन्य साजो-सामान के लिए रूस पर निर्भर रहने वाला भारत अब खुद रूस को मिसाइल एक्सपोर्ट करेगा। 

इस कदम से न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध नए मुकाम पर पहुंचेंगे, बल्कि भविष्य में बनने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल ‘ब्रह्मोस-II’ और इसके छोटे वेरिएंट ‘ब्रह्मोस-एनजी’ के संयुक्त विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। 

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