UK-India FTA 15 जुलाई से लागू, व्हिस्की से ब्यूटी प्रोडक्ट तक कई सामान होंगे सस्ते; जानिए पूरी लिस्ट

 नई दिल्ली
भारत और ब्रिटेन ने ऐति
हासिक मुक्त व्यापार समझौता (UK-India FTS) लागू होने की तारीख का ऐलान कर दिया है. अगले महीने 15 जुलाई से ये प्रभावी हो जाएगा. एफटीए लागू होने के साथ ही आयात-निर्यात किए जाने वाले सामनों पर भारी टैरिफ कटौती (Tariff Cut) भी देखने को मिलेंगे। 

समझौते के तहत भारत में व्हिस्की पर लगने वाला टैरिफ (Whisky Tariffs) 150% से घटकर सिर्फ 40% हो जाएगा. इसके साथ ही ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि लॉन्गटर्म में इस करार से द्विपक्षीय व्यापार में प्रति वर्ष 25.5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी होगी. दोनों देशों ने इस एफटीए का ऐलान करते हुए कहा कि द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए ये एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। 

ब्रिटिश इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट
US Govt की ओर से कहा गया है कि भारत-ब्रिटेन के व्यवसायों को अब समझौते को लागू करने की तैयारी के लिए 28 दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद वे नई शर्तों के तहत व्यापार कर सकेंगे. ब्रिटिश अनुमानों के अनुसार, इस समझौते से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था (UK Economy) में 4.8 अरब पाउंड का इजाफा होगा और वास्तविक वेतन में 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि देखने को मिलेगी. लंदन इस समझौते को भारत द्वारा अब तक लागू किया गया सबसे बड़ा व्यापक व्यापार समझौता बता रहा है। 

PM मोदी बोले- 2047 के लक्ष्य में अहम
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि India-UK संबंधों के लिए ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. मुझे बेहद खुशी है कि व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा. यह समझौता हमारे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा. इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स के लिए अनेक अवसर खुलेंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में बड़ा योगदान मिलेगा। 

स्कॉच-व्हिस्की समेत ये चीजें होंगी सस्ती
UK-India FTA लागू होने के बाद जो चीजें सस्ती होंगी. उनमें सबसे ज्यादा लाभ ब्रिटेन के स्कॉच व्हिस्की बिजनेस को होने वाला है. भारत ने व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर 40% करने पर सहमति जताई है. इसके अलावा कोटा व्यवस्था के तहत ऑटोमोबाइल पर टैरिफ भी 100% से घटाकर सिर्फ 10% कर दिया जाएगा. ब्यूटी प्रोडक्ट्स समेत कई अन्य उत्पादों पर लगने वाले 22% तक के टैरिफ को या तो एफटीए के तहत तत्काल या फिर 10 वर्षों तक की अवधि में खत्म कर दिया जाएगा। 

वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन भारतीय निर्यात पर Tariff Cut या इसे कम करेगा. इनमें कपड़े, जूते और कुछ फूड प्रोडक्ट्स शामिल हैं. इस कदम से उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी और उन्हें अधिक विकल्प मिलेंगे। 

ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मामलों के राज्य सचिव पीटर काइल ने कहा कि हम भारत के साथ अपने ऐतिहासिक व्यापार समझौते को जितनी जल्दी हो सके लागू कर रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि व्यवसायों और आम जनता को इसका लाभ तुरंत मिले, जिसमें अकेले पहले वर्ष के भीतर ही 400 मिलियन पाउंड के टैरिफ में कटौती शामिल है। 

 

दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन, 150 KM रैपिड रेल कॉरिडोर से सफर होगा आसान

देहरादून

दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है. मेरठ से इसे आगे ऋषिकेश सेमी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को विस्तार देने की कवायद तेज हो गई है. यूपी, उत्तराखंड की सरकार और नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) के बीच इसको लेकर समझौता हुआ है. रैपिड रेल का विस्तार यूपी के मेरठ से उत्तराखंड के ऋषिकेश तक किया जाएगा.दिल्ली में सराय काले खां से अभी मेरठ के मोदीपुरम तक 82 किमी लंबे नमो भारत कॉरिडोर को 150 किलोमीटर बढ़ाया जाएगा. ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला तक रैपिड रेल स्टेशन बनाया जाएगा। 

दिल्ली से मेरठ 3 घंटे में नमो भारत ट्रेन पहुंचाएगी
इससे दिल्ली-मेरठ रूट 230 किलोमीटर लंबा हो जाएगा. 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नमो भारत ट्रेन 3 घंटे में ऋषिकेश पहुंचाएगी.  अभी सड़क से मेरठ होते हुए दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचने में करीब छह घंटे लगते हैं. यह समझौता उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने यह प्रोजेक्ट पेश हुआ था। 

नमो भारत स्टेशनों की लिस्ट 
नमो भारत ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से चलकर मेरठ के मोदीपुरम तक चल रही है. मोदीपुरम से आगे ये वेस्ट यूपी होते हुए हरिद्वार, ऋषिकेश तक बढ़ाई जाएगी. स्टेशनों की यह सूची शुरुआती एलाइनमेंट योजना पर आधारित है. आगामी DPR सर्वे के दौरान तकनीकी, भौगोलिक स्थिति और यात्रियों की संख्या के हिसाब से इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता है। 

मेरठ ऋषिकेश नमो भारत का एक्सटेंशन रूट

    दौराला
    खतौली
    मुजफ्फरनगर
    पुरकाजी (यूपी का आखिरी बड़ा पड़ाव)
    उत्तराखंड का पहला पड़ाव
    रुड़की
    हरिद्वार
    हर की पौड़ी
    ऋषिकेश
    लक्ष्मण झूला ( टर्मिनस स्टेशन)

मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत रूट का सर्वे
अब 150 किलोमीटर लंबे नमो भारत ट्रेन ट्रैक के लिए डीपीआर तैयार करने का सर्वे जल्द ही शुरू होगा. नमो भारत ट्रेन पिछले साल जनवरी में दिल्ली और मेरठ के बीच चलने लगी थी. उत्तराखंड सरकार ने अतिरिक्त सचिव रीना जोशी को नोडल अफसर बनाया है. NCRTC ने नोडल अधिकारी बनाया है. यूपी सरकार ने मंजूरी दे दी है। 

दिल्ली-मेरठ-ऋषिकेश रैपिड रेल रूट
रैपिड रेल ट्रैक मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से चलेगा और उत्तराखंड में प्रवेश करने से पहले मुजफ्फरनगर से गुजरेगा. यह रूट आईआईटी रुड़की और हरिद्वार में हर की पौड़ी से होते हुए ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला पर पूरा होगा.  नमो भारत ट्रैक का 72 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में और बाकी 78 किलोमीटर का हिस्सा उत्तराखंड में होगा. उत्तराखंड और दिल्ली तीर्थयात्रियों को भी बड़ा तोहफा मिलेगा.  सीएम धामी ने कहा कि ट्रेन सेवा का विस्तार पर्यटकों, तीर्थयात्रियों के साथ उत्तराखंड में पर्यटन को नए पंख लगाएगा। 

दिल्ली से मेरठ रैपिड रेल (चालू रूट)

    सराय काले खां (दिल्ली)
    न्यू अशोक नगर
    आनंद विहार
    साहिबाबाद
    गाजियाबाद
    गुलधर
    दुहाई
    मुरादनगर
    मोदीनगर साउथ
    मोदीनगर नॉर्थ
    मेरठ साउथ
    शताब्दी नगर
    बेगमपुल
    मोदीपुरम 

PM मोदी के सामने ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- भारत पर हमला हुआ तो हम युद्ध में कूद जाएंगे

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया. ट्रंप ने कहा कि अगर कभी भारत पर हमला होता है, तो अमेरिका उसके साथ खड़ा होगा. ट्रंप ने कहा, ‘अगर पीएम मोदी हैं और भारत पर क‍िसी ने अटैक क‍िया तो अमेरिका भारत के लिए मौजूद रहेगा, भले ही इस संबंध में कोई लिखित समझौता न हो. कोई और नेता होगा तो हम कह नहीं सकते। 

राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण र‍िश्तों के बीच आया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा विश्वास और साझेदारी है। 

ट्रंप के बड़े बयान
ट्रंप ने भारत के भविष्य की संभावनाओं को पीएम मोदी के पद पर बने रहने से जोड़ते हुए कहा, जब तक मोदी भारत के नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाएगा। 

ट्रंप ने कहा, पिछली बार भारत का दौरा बहुत शानदार रहा था. हमने उस नए स्टेडियम का उद्घाटन किया था… भारत में मेरा समय बहुत अच्छा बीता… मुझे लगता है कि हर चीज में भारत की बड़ी भूमिका है. जब तक वे (पीएम मोदी) वे नेता हैं. भारत बड़ी भूमिका निभाने वाला है… जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, व्हाइट हाउस में उनका एक बहुत अच्छा दोस्त है. मुझे नहीं पता कि कहां कोई समस्या है. मुझे ऐसा नहीं लगता. यहां हर कोई भारत को पसंद करता है और इस व्यक्ति (पीएम नरेंद्र मोदी) के लिए बहुत सम्मान रखता है। 

पीएम मोदी की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा- वह (पीएम मोदी) बहुत टफ न‍ेगोश‍िएटर हैं. मैं आपको एक बात बताता हूं. वह दिखने में बहुत अच्छे हैं, बहुत भले लगते हैं, जैसे कोई फरिश्ता हों. लेकिन वह बहुत टफ नेगोश‍िएटर हैं. वह बहुत कठोर हैं. वह बहुत ही कड़े मिजाज के इंसान हैं. लेकिन वह दिखते बहुत अच्छे हैं. इसी तरह वह आपको चौंका देते हैं। 

जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस पर फिर से कोई प्रतिबंध लगाए जाएंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हम इस पर विचार कर रहे हैं. हम देख रहे हैं कि तेल की कीमतें कितनी नीचे आती हैं, वे तेजी से गिर रही हैं… कीमतें कम हो रही हैं और जल्द ही उस स्तर पर आ जाएंगी जो 4 महीने पहले था. इसके अलावा, हमारे सामने बिना परमाणु हथियारों वाला ईरान होगा. मैं कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री भी इस बात को लेकर बहुत गंभीर हैं। 

हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, 500 मीटर गहरी खाई में गिरी बोलेरो; 3 सगे भाइयों समेत 7 की मौत

चंबा
 हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से बड़ा हादसा हुआ है. चंबा जिले में हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई है. इसमें तीन सगे भाई भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, चंबा जिले के चुराह के पुखरी-मसरूंड मार्ग पर रात को यह घटना पेश आई है. जिले के माणी जीरो के पास एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरा और सात लोगों की जान चली गई. हादसा इतना भयावह था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और सभी सवार सात लोगों की मौके पर ही प्राण त्याग दिए. बताया जा रहा है कि रात 2 बजे यह हादसा पेश आया है, जिसमें चार पुरुष और तीन महिलाओं की मौत हुई है. कुठेड़ गांव से ये सभी लोग थे और गांव में अब मातम परसा हुआ है। 

बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई बोलेरो पंचायत कुठेड़ के महल गांव की थी और महल गांव के लोग काकड़ोथा गांव में मुंडन संस्कार की धाम में शामिल होने के बाद घर लौट रहे थे. घटना की सूचना मिलने के बाद लोगों ने शवों को खाई से निकाला और फिर मामले में पुलिस भी मौके पर पहुंची. बताया जा रहा है कि सड़क किनारे क्रैश बैरियर भी नहीं थे, वर्ना हादसा बच सकता था.  एसपी चंबा विजय सकलानी ने बताया कि सभी शवों को खाई से निकाल लिया गया है और मृतकों की पहचान की जा रही है। 

विधायक ने जताया दुख
चंबा के चुराह के विधायक हंस राज ने कहा कि उन्हें सुबह मामले की जानकारी मिली थी. फौजी परिवार था और उनकी मित्रता थी. उन्होंने कहा कि क्रैश बैरियर इस इलाके में नहीं है और इस वजह से हादसे हो रहे हैं और यह बड़ी समस्या है. एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हुई है. विधायक ने कहा कि हादसे की वजह का तो पता नहीं चला है, लेकिन उन्होंने पुलिस और अस्पताल को अलर्ट किया है। 

गौर रहे कि चंबा में हाल ही में बड़े हादसे हुए हैं. इससे पहले, चंबा के बैरागढ़-सच पास-किलाड़ मार्ग पर भी 31 मई को एक इनोवा गाड़ी हादसे का शिकार हो गई थी और इसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी. 17 जून को भी चंबा में कार हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। 

Weather Update: 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, चक्रवाती तूफान की चेतावनी; मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार

नईदिल्ली 
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 (Monsoon) देश के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 4-5 दिनों के दौरान तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताई हैं। वर्तमान में मॉनसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फूलबनी, रांची, जमुई, मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए 18 जून से 24 जून 2026 तक का विस्तृत अनुमान और चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में 18 से 22 जून के बीच अधिकांश इलाकों में व्यापक रूप से बारिश की संभावना है। वहीं 23 और 24 जून को छिटपुट बारिश हो सकती है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 18 से 24 जून के दौरान लगातार छिटपुट बारिश के आसार हैं।

मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली एनसीआर में 18 से 22 जून के बीच गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी में 18, 19, 23 और 24 जून को, जबकि पूर्वी यूपी में 18-19 जून और फिर 22-24 जून को बारिश हो सकती है। पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में 18 से 24 जून तक छिटपुट बारिश जारी रहेगी।

आंधी-तूफान की चेतावनी
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है। इन राज्यों में 18 और 19 जून को ओलावृष्टि की भी संभावना है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 18-22 जून के दौरान 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज और झोंके वाली हवाओं की चेतावनी दी गई है।

राजस्थान में धूलभरी आंधी
18 और 19 जून को पश्चिमी राजस्थान में भयंकर धूलभरी आंधी चलने की आशंका है। इसके साथ ही 18 जून को पश्चिमी राजस्थान और 18-19 जून को पूर्वी राजस्थान में 60-70 किमी/घंटे की गति से तीव्र चक्रवाती तूफान आ सकता है। 19 जून को भी पश्चिमी राजस्थान में 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश
आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 और 19 जून को छिटपुट बारिश की संभावना है। वहीं, पूर्वी मध्य प्रदेश में 18-19 जून और फिर 22-24 जून के दौरान बारिश के आसार हैं। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विदर्भ में 18 से 24 जून तक लगातार छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में 18-19 जून को और छत्तीसगढ़ व विदर्भ 18-21 जून को बारिश के साथ 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश के आसार
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 से 24 जून तक भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। बंगाल में गंगा से सटे इलाकों में 18-19 जून को छिटपुट बारिश के बाद 20 से 24 जून के बीच बारिश की रफ्तार बढ़ेगी। ओडिशा में 19 और 20 जून को तेज और व्यापक बारिश होगी। बिहार और झारखंड में 18 से 24 जून के दौरान इन दोनों राज्यों में छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा।

नागपुर रेप और धर्मांतरण केस में बड़ा एक्शन, वायुसेना अधिकारी की पत्नी मामले में फरार मौलवी गिरफ्तार

नागपुर 

 महाराष्ट्र के नागपुर में वायुसेना के एक अधिकारी की पत्नी के साथ मारपीट, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले का तीसरा आरोपी मौलाना मजरत महमूद मकसूद, जो लंबे समय से फरार चल रहा था, बुधवार देर रात सोनेगांव पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मौलाना को आज यानी गुरुवार (18 जून) को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी रिमांड की मांग करेगी।

दरअसल, वायुसेना के एक अधिकारी की पत्नी के कथित धर्म परिवर्तन और दुर्व्यवहार का सनसनीखेज मामला इस सप्ताह की शुरुआत में सामने आया था। महिला ने अपने एक पुराने सहपाठी और उसके साथियों पर बलात्कार, ब्लैकमेल, काला जादू और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया है।

इस मामले में मुख्य आरोपी अय्याज मदारे उसका साथी अमीन शेख पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं। वहीं गिरफ्तार मौलवी ने धर्मांतरण और निकाह में सक्रिय भूमिका निभाई थी ।

पूछताछ में होगा खुलासा
मौलाना को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस का कहना है कि इससे पूछताछ के दौरान और भी जानकारी सामने आने की संभावना है। पुलिस अब निकाहनामा ( विवाह प्रमाण पत्र) प्राप्त करने और यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इसमें और भी लोग शामिल थे। वे यह भी पता लगाएंगे कि क्या अन्य महिलाओं को भी इसी तरह जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था।

क्या है पूरा मामला
एफआईआर के अनुसार, 8 फरवरी, 2025 को एक होटल में हुई बैठक के दौरान, अयाज ने 24 वर्षीय महिला के पेय में मादक पदार्थ मिला दिया। इसके बाद महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए थे। वीडियो और तस्वीरों के आधार पर महिला को ब्लैकमेल किया और धमकी दी कि वह वीडियो उसके पति को भेज देगा और उन्हें सोशल मीडिया पर फैला देगा।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ बार-बार यौन उत्पीड़न किया गया और उससे लगभग 4 लाख रुपये जबरन वसूले गए।
वीडियो में महिला रोती हुई और आरोपी अयाज मदारे से उसे छोड़ने की गुहार लगाती हुई दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला को ” छोड़ो मुझे ” कहते हुए सुना जा सकता है, जबकि अयाज जबरदस्ती उसके हाथ पकड़े हुए धार्मिक मंत्रों का जाप कर रहा है और बार-बार उस पर फूंक मार रहा है। महिला खुद को छुड़ाने के लिए संघर्ष करती हुई दिखाई दे रही है। महिला का आरोप है कि बाद में उसे धर्म परिवर्तित घोषित कर दिया गया और उसके बाद उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया गया।

एफआईआर में महिला ने आरोप लगायै कि अयाज उसके लिए अक्सर एक प्लास्टिक की बोतल में कोई तरल पदार्थ भरकर लाता था और उसे जबरदस्ती पिलाता था। इसके बाद वह कथित तौर पर उर्दू में कुछ बुदबुदाता था, उसके चेहरे पर फूंकता था और कहता था कि यह सम्मोहन और काला जादू है, फिर उसके साथ बलात्कार करता था।

31 मई को मदारे और उसके साथी ने महिला को जबरन कलमेस्वर ले गए। वहां, तीसरे आरोपी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया गांव के हजरत मौलाना ने धार्मिक अनुष्ठान किए और महिला को जबरन कुबूल है कहने के लिए मजबूर किया ताकि वह इस्लाम धर्म अपना ले।

महिला का कहना है कि यह सब उसके इच्छा के विरुद्ध किया गया था। अनुष्ठान के बाद, मौलाना ने घोषणा की कि महिला ने इस्लाम धर्म अपना लिया है और उसका अयाज के साथ निकाह हो गया है।

भारत को डबल राहत! होर्मुज खुलते ही LNG सप्लाई हुई पक्की, गैस संकट खत्म होने की उम्मीद

नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता और इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बीच भारत के लिए डबल खुशखबरी आई है. एक तरफ तो होर्मुज में महीनों से फंसे तेल-गैस भरे जहाज अब वहां से भारत की तरफ से रवाना होने लगे हैं. इसमें पहले जहाज दिशा 62000 हजार क्यूबिक टन एलएनजी लेकर होर्मुज पार करके भारत के सफर पर निकल चुका है और इसके साथ 34 दूसरे जहाजों की भी रवानगी का रास्ता साफ हो चुका है. वहीं इस बीच दुनिया के सबसे बड़े एनएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यातकों में शामिल कतर ने संकेत दिया है कि जैसे ही होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी, वह रिकॉर्ड गति से गैस उत्पादन बढ़ाना शुरू कर देगा. इसका सीधा फायदा भारत जैसे बड़े आयातक देशों को मिलने वाला है। 

बिजनस समाचार आउटलेट ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने अपने खरीदारों को बताया है कि होर्मुज के सुरक्षित रूप से खुलने के एक महीने के भीतर वह अपनी एनएलजी उत्पादन क्षमता को करीब 50 फीसदी तक बहाल कर देगी. इसके बाद अगले एक महीने में उत्पादन बढ़ाकर लगभग 80 फीसदी तक पहुंचाने की योजना है. यानी सिर्फ दो महीने के भीतर दुनियाभर के बाजार में गैस की आपूर्ति तेजी से बढ़ सकती है। 

भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित एनएलजी से पूरा करता है और इसमें कतर उसकी सबसे बड़ी सप्लाई लाइनों में से एक है. भारत और कतर के बीच लंबे समय से गैस आपूर्ति का समझौता है. ऐसे में कतर से सप्लाई बढ़ने का मतलब है कि भारत को गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उद्योगों, बिजली उत्पादन तथा शहरों में गैस वितरण पर दबाव कम होगा। 

हाल के महीनों में ईरान की इजरायल और अमेरिका के साथ जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुक गई है. इसकी वजह से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी और LNG की आपूर्ति पर भी असर पड़ा था। 

दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब फिर होगा एक्टिव
कतर का रास लाफान (Ras Laffan) एलएनजी कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे बड़ी गैस निर्यात सुविधाओं में गिना जाता है. पिछले साल अकेले इसी परिसर से दुनिया की कुल LNG आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात किया गया था. लेकिन मार्च में ईरानी मिसाइल हमलों और उसके बाद क्षेत्रीय संघर्ष के चलते इस विशाल परियोजना का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। 

युद्ध के शुरुआती दिनों में कतर को अपने एनएलजी टर्मिनलों का संचालन सीमित करना पड़ा था. होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण बड़े गैस जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी. नतीजतन वैश्विक बाजार में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया। 

हालात सामान्य होने में लगेगा समय
हालांकि कतर तेजी से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन पूरी क्षमता से वापसी में अभी समय लगेगा. जानकारी के अनुसार रास लाफान संयंत्र की दो उत्पादन इकाइयों को गंभीर नुकसान पहुंचा था. इनकी मरम्मत और पूर्ण बहाली में कई साल लग सकते हैं। 

फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि एक महीने में 50 फीसदी और दो महीने में 80 फीसदी क्षमता तक पहुंचना उम्मीद से कहीं तेज रिकवरी है. यही वजह है कि ऊर्जा बाजार इस खबर को बेहद सकारात्मक मान रहा है। 

सस्ती हो जाएगी गैस
अगर कतर योजना के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने में सफल रहता है और होर्मुज मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इसका फायदा भारत को सस्ती गैस और ऊर्जा सुरक्षा के रूप में मिल सकता है। 

यानी भारत के लिए यह सचमुच ‘डबल खुशखबरी’ है. एक तरफ होर्मुज के खुलने से सप्लाई चेन सामान्य होगी, दूसरी तरफ कतर से LNG की भारी आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है. इससे हाल के महीनों में बनी गैस की किल्लत और बाजार की अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है। 

भारत की चिंता बढ़ाने वाली चीन की नई चाल! बॉर्डर से 50KM दूर ब्रह्मपुत्र पर बना रहा दुनिया का सबसे बड़ा बांध

नई दिल्ली

 चीन हमेशा से भारत के खिलाफ नई-नई साजिश रचते रहता है. एक बार फिर चीन ने बॉर्डर के पास बड़ी साजिश रचने की कोशिश में है. दरअसल तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण चीन ने शुरू कर दिया है. इस निर्माण ने एक बार फिर भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह मेगा प्रोजेक्ट भारतीय सीमा से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर बनाया जा रहा है. ब्रह्मपुत्र जैसी जीवनदायिनी नदी पर चीन का यह प्रोजेक्ट है. चिंता इस बात की है कि यदि चीन भविष्य में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की स्थिति में पहुंचता है तो इसका असर करोड़ों लोगों की जिंदगी, खेती और पर्यावरण पर पड़ सकता है. यही वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सतर्क नजर बनाए हुए है। 

तिब्बत से निकलने वाली यारलुंग त्सांगपो नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग और फिर ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है. यह नदी अरुणाचल प्रदेश और असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. लाखों किसान इसकी जलधारा पर निर्भर हैं. ऐसे में नदी के ऊपरी हिस्से में चीन का विशाल बांध बनाना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि भू-राजनीतिक चुनौती भी माना जा रहा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भारत को आशंका है कि बांध के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है, इससे कभी अचानक बाढ़ और कभी पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हाल के सैटेलाइट चित्रों और खुफिया रिपोर्टों ने यह संकेत दिया है कि चीन इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे नई दिल्ली की चिंताएं और बढ़ गई हैं। 

सीमा के करीब चीन का मेगा डैम, क्यों बढ़ी चिंता?
    चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के निचले हिस्से पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांध के निर्माण की आधिकारिक शुरुआत कर दी है. यह स्थान अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगभग 50 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है. भारत लंबे समय से इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है. भारत का मानना है कि सीमा पार बहने वाली नदियों पर किसी भी बड़े निर्माण से पहले संबंधित देशों के बीच पारदर्शिता और समन्वय जरूरी है. हालांकि चीन ने अब तक अपने प्रोजेक्ट को केवल बिजली उत्पादन से जुड़ा कदम बताया है। 

    यारलुंग त्सांगपो नदी हिमालयी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है. यह तिब्बत से निकलकर भारत में सियांग के रूप में प्रवेश करती है और आगे असम में ब्रह्मपुत्र बन जाती है. इसी कारण नदी के ऊपरी हिस्से में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को प्रभावित कर सकता है. बड़े पैमाने पर जल संग्रहण और प्रवाह नियंत्रण से नदी की प्राकृतिक व्यवस्था बदल सकती है। 

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि वह ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन से जुड़ी हर गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है. सरकार के अनुसार चीन की हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और बांध निर्माण से जुड़े सभी घटनाक्रमों का अध्ययन किया जा रहा है. इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को भी मजबूत किया जा रहा है। 

कृषि और पर्यावरण पर पड़ सकता है असर
सबसे बड़ी चिंता नदी के प्रवाह में संभावित बदलाव को लेकर है. यदि किसी कारण से पानी का बहाव कम या अधिक होता है तो अरुणाचल प्रदेश और असम की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. ब्रह्मपुत्र घाटी की लाखों हेक्टेयर खेती इस नदी के पानी पर निर्भर करती है. पानी की कमी होने पर फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा, जबकि अचानक अधिक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट संवेदनशील मानी जा रही है. नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव से जलीय जीवों, वनस्पतियों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र पहले ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में इतने बड़े बांध का प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है। 

भारत की जवाबी रणनीति क्या है?
    भारत केवल चिंता जताने तक सीमित नहीं है. सरकार ने चीन के सामने कई बार सीमा पार नदी प्रोजेक्टओं में पारदर्शिता और डेटा साझा करने की मांग रखी है. भारत चाहता है कि चीन किसी भी बड़े जल प्रोजेक्ट से पहले निचले प्रवाह वाले देशों को जानकारी दे और नियमित रूप से जल स्तर का डेटा उपलब्ध कराए। 

    इसके अलावा भारत पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्था, नदियों की निगरानी और आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत कर रहा है. आधुनिक तकनीक के जरिए नदी के जलस्तर और प्रवाह की निगरानी बढ़ाई जा रही है. इससे किसी भी संभावित आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकेगी। 

क्या पानी बन सकता है रणनीतिक हथियार?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पानी को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. भविष्य में जल संसाधन भू-राजनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं. चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से में बड़े बांधों का निर्माण इसी बहस को और मजबूत करता है. हालांकि चीन बार-बार कहता रहा है कि उसका उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन है. लेकिन भारत सहित कई देशों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ब्रह्मपुत्र नदी का प्राकृतिक प्रवाह और पूर्वोत्तर राज्यों की जल सुरक्षा प्रभावित न हो. यही कारण है कि नई दिल्ली इस प्रोजेक्ट पर लगातार निगरानी रख रही है और कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय बनी हुई है। 

‘भारत को रोकने के लिए रचे जा रहे झूठे नैरेटिव’— मोहन भागवत का बड़ा बयान, देश-विदेश की ताकतों पर साधा निशाना

 नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दावा किया है कि लोगों को गुमराह करने के लिए गलत रिपोर्टें फैलाई जा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की बढ़ती ताकत और उत्थान को कमजोर करने के लिए देश के भीतर और बाहर, दोनों जगहों से झूठे नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं। 

महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, ‘आज कुछ लोग ये तय करने में जुटे हैं कि भारत का उत्थान न हो. इसके लिए झूठे नैरेटिव बनाए जा रहे हैं, गलत खबरें फैलाई जा रही हैं और लोगों को भटकाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। भागवत ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसा करने वालों के पास जनसंख्या, सत्ता, पैसा और संगठनात्मक क्षमता जैसी बड़ी ताकतें हैं. इसके बावजूद, लोगों को अपने मूल्यों के आधार पर मजबूती से खड़े रहना होगा। 

आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि भारत का आगे बढ़ना सिर्फ उसके अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘दुनिया के लिए भी एक मजबूत भारत का होना बेहद जरूरी है। 

‘हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, संघर्ष का है’
हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध की विरासत और महाराणा प्रताप को याद करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमारा इतिहास गुलामी का नहीं है. ये उन लोगों के खिलाफ संघर्ष का इतिहास है, जिन्होंने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की. महाराणा प्रताप का संघर्ष ‘धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान’ की रक्षा के लिए था। भागवत ने आगे कहा, ‘महाराणा प्रताप किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं लड़े. वो समाज, संस्कृति और अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे थे। 

उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें इतिहास के ऐसे नायकों से सीख लेनी चाहिए, जो विषम परिस्थितियों में भी अडिग रहे. भारत की असली ताकत सिर्फ संख्या या भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक मूल्यों में है। 

विविधता के बीच एकता की अपील
मोहन भागवत ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि जैसे मेवाड़ के लोग महाराणा प्रताप के साथ खड़े थे, वैसे ही हमें भारत की प्रगति के लिए मिलकर काम करना होगा. अलग-अलग पहचानें होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता के लिए समानता जरूरी नहीं है. एकता के लिए आपसी सद्भाव और सम्मान जरूरी है। 

हल्दीघाटी के युद्ध को भागवत ने विदेशी आक्रमण के खिलाफ भारतीय समाज के लंबे संघर्ष का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि खुद मुगल इतिहासकारों के रिकॉर्ड भी बताते हैं कि ये युद्ध कितना भीषण था और पहले हमले के बाद उन्हें कई मील पीछे हटना पड़ा था। 

भागवत के मुताबिक भारत ने कभी भी सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर गुलामी स्वीकार नहीं की. अगर भारत को आगे बढ़ना है, तो भारतीयों को अपने चरित्र और मूल्यों को ऊंचा उठाना होगा। 

‘साइबर अपराधी परजीवी की तरह होते हैं’— CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी, आरोपी की जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधी “परजीवी” की तरह होते हैं, जो लोगों की मेहनत की कमाई ठगकर समाज को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. CJI ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और समाज के हित में इन्हें जेल में रखना ही बेहतर है। 

साइबर अपराध का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ :  CJI सूर्यकांत
उन्होंने यह भी कहा कि साइबर अपराध का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है. आरोपी एक राज्य में ठगी करते हैं और फिर दूसरे राज्यों में जाकर अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं, जिससे इन अपराधों पर नियंत्रण पाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे संगठित अपराध से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों का स्वतः संज्ञान लिया था. यह कदम अंबाला के एक बुजुर्ग दंपत्ति द्वारा लिखे गए पत्र के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई ठगी की घटना का हवाला दिया था. इस घटना में उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी चली गई थी। 

इससे पहले शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी CBI को देशभर में डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करने की खुली छूट दी थी और केंद्र व राज्य सरकारों को ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। 

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