IMD Alert: 80KM/H की रफ्तार से आएगा अंधड़, अगले 24 घंटे 21 राज्यों में भारी मौसम का खतरा

नईदिल्ली 
कई राज्यों में मानसून ने दस्तक दे दी है और कई राज्यों में मानसून जल्द पहुंचने वाला है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटे को बेहद अहम बताया है. कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी, बिजली गिरने और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और उत्तर भारत में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का एक साथ का असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई देगा. ऐसे में कई जगहों पर खतरनाक अंधड़, पेड़ गिरने, बिजली बाधित होने और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला मौसम बन रहा है. खासकर किसानों, यात्रियों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। 

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. वहीं दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून पहले से सक्रिय है और लगातार बारिश का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 72 घंटे के दौरान कई राज्यों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं. कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है. राहत की बात यह है कि बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से कुछ राहत मिलेगी. लेकिन तेज हवाएं और तूफानी मौसम जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए IMD ने लोगों से मौसम अपडेट पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। 

    दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय दक्षिण भारत में मजबूत स्थिति में बना हुआ है. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है. दूसरी तरफ पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम बिगड़ने के संकेत हैं. उत्तर भारत में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज आंधी और बारिश की संभावना बढ़ गई है। 

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की रफ्तार और तेज हो सकती है. महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बादल जमकर बरस सकते हैं. ऐसे में देश के बड़े हिस्से में मौसम का असर एक साथ दिखाई देगा। 

दिल्ली-NCR में आंधी और बारिश का डबल अटैक
दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से बादलों की आवाजाही बनी हुई है. मौसम विभाग के अनुसार 17 जून को राजधानी में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं. नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है लेकिन बारिश के बाद गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। 

यूपी में 80KM की रफ्तार से चलेगा अंधड़
उत्तर प्रदेश में मौसम का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य हिस्सों में देखने को मिल सकता है. मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, कानपुर, झांसी, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई जिलों में बारिश और तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. किसानों को फसल और पशुधन की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। 

बिहार में बारिश और बिजली गिरने का खतरा
बिहार में 17 से 19 जून के बीच मौसम बेहद सक्रिय रहेगा. पटना, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश और आंधी की संभावना है. तेज हवाओं की गति 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। 

झारखंड में गरजेंगे बादल, बरसेंगे पानी
रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, दुमका और बोकारो समेत कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है. तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। 

राजस्थान में धूलभरी आंधी के साथ बारिश
राजस्थान के जयपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर और अलवर समेत कई जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. मरुस्थलीय इलाकों में धूलभरी आंधी भी देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग ने वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। 

मध्य प्रदेश में बदलने वाला है मौसम का मिजाज
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सतना और कटनी समेत कई जिलों में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है. मानसून की आगे बढ़ती गतिविधियों के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे. कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 

पंजाब-हरियाणा में तूफानी हवाओं का खतरा
    पंजाब के जालंधर, अमृतसर, पटियाला, बठिंडा और गुरदासपुर में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना है. मौसम विभाग ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। 

    हरियाणा के अंबाला, करनाल, हिसार, रोहतक और पंचकूला समेत कई जिलों में भी मौसम खराब रह सकता है. गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है. किसानों को खेतों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

पहाड़ों पर बारिश और भूस्खलन का खतरा
    उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका भी बनी हुई है। 

    हिमाचल प्रदेश में शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और किन्नौर में मध्यम बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है. 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि भी संभव है।     जम्मू-कश्मीर के जम्मू, अनंतनाग, पुलवामा, बारामूला और उधमपुर समेत कई जिलों में बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की गई है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम अस्थिर बना रहेगा. पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। 

पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून का जोरदार असर
असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश की संभावना है. कई जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं का भी अलर्ट जारी किया गया है. लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। 

दक्षिण भारत में मानसून की मजबूत दस्तक
तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मानसून पूरी तरह सक्रिय है. कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है. चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहरों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी। 

किन राज्यों में सबसे ज्यादा आंधी और बारिश का खतरा है?
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. इन राज्यों में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश होने की संभावना है। 

क्या दिल्ली-NCR में अगले 24 घंटे खतरनाक रहेंगे?
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो सकती है. इससे पेड़ गिरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। 

क्या मानसून अब तेजी से आगे बढ़ेगा?
IMD के अनुसार परिस्थितियां मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हैं. अगले कुछ दिनों में यह मध्य और उत्तर भारत के और हिस्सों में सक्रिय हो सकता है, जिससे बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। 

किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
किसानों को कटाई और भंडारण किए गए अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. पशुओं को खुले स्थानों से हटाकर सुरक्षित शेड में रखना जरूरी है. बिजली कड़कने के दौरान खेतों में काम करने से बचना चाहिए। 

क्या बारिश से गर्मी से राहत मिलेगी?
हां, अधिकांश राज्यों में बारिश के कारण तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है। 

 

Yoga Day से पहले कोलकाता का रेड रोड 7 दिन बंद, शुभेंदु सरकार के फैसले को HC में चुनौती

कलकत्ता
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल योग दिवस के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर 7 दिनों तक वाहनों की आवाजाही रोकने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है. एडवोकेट शमीम अहमद ने जस्टिस सौगत भट्टाचार्य (कोर्ट-5) के सामने ये मामला उठाया है। 

रेड रोड पर PM मोदी के साथ शामिल होंगे 35 हजार लोग

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार पश्चिम बंगाल देश को एक अनूठी तस्वीर दिखाने की तैयारी में है। 21 जून को हुगली नदी में 500 से अधिक नौकाओं पर हजारों लोग एक साथ योग करेंगे, जबकि कोलकाता के रेड रोड पर राष्ट्रीय स्तर का मुख्य योग कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों के साथ योग करेंगे। पहली बार पश्चिम बंगाल इस आयोजन की मेजबानी कर रहा है और इसे लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग रखी गई है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि अभी भारत दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश है, लेकिन अगले 25-50 वर्षों में यह सबसे ज्यादा बुजुर्गों वाला देश हो सकता है। ऐसे में सभी बुजुर्ग स्वस्थ्य रहें, इसके लिए प्रधानमंत्री ने इस बार का थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” तय किया है।

राज्य सरकार और आयुष मंत्रालय की योजना के तहत हुगली नदी में सैकड़ों नौकाओं पर प्रतिभागी सामूहिक रूप से योगासन और प्राणायाम करेंगे। सुरक्षा और समन्वय के लिए नदी पुलिस, आपदा प्रबंधन बल और स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें तैनात रहेंगी। 

रेड रोड पर मोदी करेंगे योग
21 जून को मुख्य आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में किया जा रहा है। इस मौके पर खास रूप से  मोदी यहां करीब 35 हजार लोगों के साथ योग करेंगे। योग दिवस कार्यक्रम को देखते हुए कोलकाता के रेड रोड पर सुरक्षा और मंच निर्माण की तैयारियां जोरों पर प्रशासन ने रेड रोड को सात दिनों के लिए आम यातायात के लिए बंद कर दिया है।   

योग दिवस कार्यक्रम से पहले रेड रोड एक सप्ताह तक बंद रहेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस प्रमुख सड़क पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने तक, रेड रोड एक सप्ताह के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से यातायात के लिए बंद रहेगी।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क रविवार तक बंद रहेगी और उस पर यातायात की अनुमति “आवश्यकतानुसार” ही दी जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि रेड रोड पर यह अब तक का सबसे लंबा बंद रहेगा।“यह निर्णय लिया गया है कि 21 जून तक रेड रोड के दोनों किनारों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, यातायात की मात्रा के आधार पर एक किनारा खुला रखा जा सकता है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। “जमीनी अधिकारी आवश्यकतानुसार निर्णय लेंगे।”

सोमवार को राजभवन की ओर जाने वाली रेड रोड की एक तरफ को बंद कर दिया गया था और सड़क के बीचोंबीच एक विशाल चबूतरा बनाया गया था। वाहनों को दूसरी तरफ से, लेकिन राजभवन की ओर जाने की अनुमति दी गई थी।

रेड रोड को इतने लंबे समय तक यातायात के लिए शायद ही कभी बंद किया गया हो। 23 से 29 मई, 2016 के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के लिए इसे पांच दिनों तक बंद रखा गया था।

इसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की परेड और ममता बनर्जी के दुर्गा पूजा उत्सव के लिए भी बंद किया गया था, लेकिन ये प्रतिबंध केवल कुछ घंटों या एक दिन तक ही चले।

राज्य की भाजपा सरकार ने इससे पहले रेड रोड पर यातायात सुचारू रखने के महत्व पर जोर दिया था और मई में वहां ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी, बल्कि उसे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में स्थानांतरित कर दिया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तब कहा था कि कोई भी धर्म कानून से ऊपर नहीं है।कई मार्गों से आने वाले वाहनों की भारी संख्या के कारण रेड रोड शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “एजेसी बोस रोड फ्लाईओवर, डीएल खान रोड, विद्यासागर सेतु और हेस्टिंग्स से काफी संख्या में वाहन रेड रोड के राजभवन की ओर जाने वाले हिस्से में प्रवेश करते हैं।”

वैकल्पिक मार्ग की योजना तैयार कर ली गई है, लेकिन अगले सप्ताह यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।इस योजना के तहत, रेड रोड होते हुए राजभवन की ओर जाने वाले वाहनों को जेएन आइलैंड से आउट्राम रोड-जवाहरलाल नेहरू रोड चौराहे या डफरिन रोड-मेयो रोड क्रॉसिंग की ओर मोड़ दिया जाएगा।

अलीपुर में जीरत ब्रिज से होकर आने वाली डलहौजी और हावड़ा जाने वाली बसें बेलवेडियर रोड और एजेसी बोस रोड के चौराहे से एजेसी बोस रोड, टर्फ व्यू रोड, एजेसी बोस रैंप और सेंट जॉर्ज गेट रोड-स्ट्रैंड रोड की ओर मोड़ दी जाएंगी ताकि वे आगे हावड़ा और डलहौजी की ओर जा सकें।

रेड रोड के रास्ते जेके द्वीप की ओर जाने वाले वाहनों को रेड रोड-मेयो रोड चौराहे से मेयो रोड-डफरिन रोड के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।

 

16 महीने बाद PM मोदी-ट्रंप की मुलाकात, सिर्फ हैंडशेक से दिया बड़ा संदेश; रिश्तों पर क्या बोले प्रधानमंत्री?

नई दिल्ली

आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी। 

जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई। 

पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था
प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं.
पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया। 

कैसे दोनों की हुई मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही। 

मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया
अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी। 

पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक
जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले। 

इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही। 

मोदी के नो हग का मैसेज
हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा। 

पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते
कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं। 

मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे। 

भारत का उदाहरण देकर समझाया
पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं.  जब संकट आया तो भारत ने दुन‍िया की मदद करना अपना दाय‍ित्‍व समझा. कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयां और vaccines भेजी. श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोजाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव Humanity First के सिद्धांत पर कार्य किया. हम पार्टनर को ऐसे ही देखते हैं. जंग ऐसे भरोसे को खत्‍म करती है. आज जरूरत है भरोसे को बनाए रखने की. यह सीधा ट्रंप को मैसेज था। 

नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले IPS सुंदरराज पी अब NIA में IG, आतंकियों पर करेंगे बड़ा प्रहार

 नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों को लीड करने वाले सीनियर आईपीएस अफसर सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र जारी कर उनके प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) की जानकारी दी। 

गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सुंदरराज पी की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद NIA में की गई है. मंत्रालय ने राज्य सरकार से उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने को कहा है, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें। 

बस्तर में लंबे समय तक की है सर्विस

46 वर्षीय सुंदरराज पी को बस्तर क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईपीएस अधिकारियों में गिना जाता है. उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर संभाग में करीब 12 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. इनमें से लगभग सात वर्ष उन्होंने लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) या पुलिस प्रमुख के रूप में बिताए. बस्तर रेंज में दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिले शामिल हैं, जो लंबे समय तक देश में नक्सल हिंसा के सबसे बड़े केंद्र माने जाते रहे हैं। 

कई नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की
अपने कार्यकाल के दौरान सुंदरराज पी ने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की. उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने और कई शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ सफल अभियानों में उनका योगदान अहम रहा। 

पिछले कुछ वर्षों में जब भी सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली या किसी अभियान में नुकसान हुआ, तब मीडिया से संवाद करने के लिए सुंदरराज पी ही प्रमुख चेहरा रहे. बस्तर में सुरक्षा स्थिति, अभियान और रणनीति से जुड़ी जानकारी अक्सर उन्हीं के माध्यम से साझा की जाती थी। 

तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं सुंदरराज पी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य तय किया था. अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में बस्तर क्षेत्र में मिली सफलताओं में सुंदरराज पी के नेतृत्व और रणनीतिक भूमिका का बड़ा योगदान रहा है. इसी कारण उनकी सेवाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। 

पीटीआई से बातचीत में एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने सुंदरराज पी को NIA में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए विशेष सिफारिश की है. अधिकारी के अनुसार, यह फैसला बस्तर में माओवादियों के खिलाफ अभियानों में उनके नेतृत्व, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के प्रति सम्मान स्वरूप लिया गया है। 

तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सुंदरराज पी ने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया. अब NIA में IG के रूप में उनकी नियुक्ति को नक्सल विरोधी अभियानों में उनके अनुभव और विशेषज्ञता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी नेटवर्क और आतंकी गतिविधियों से निपटने के उनके व्यापक अनुभव का लाभ अब देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी NIA को भी मिलेगा। 

US-Iran Deal का असर: 2 महीने बाद खुला होर्मुज मार्ग, फिर शुरू हुआ ईरानी तेल का निर्यात

नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है। 

4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला
टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं। 

बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला। 

एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर
रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी। 

मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था। 

डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल 
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है। 

 

36 साल की शानदार सेवा के बाद भारतीय नौसेना ने सी-किंग हेलिकॉप्टर स्क्वॉड्रन को दी विदाई

नई दिल्ली

भारतीय नौसेना ने अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली सी किंग एमके 42बी (Sea King Mk 42B) हेलिकॉप्टर के मुख्य स्क्वाड्रन को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया है. तीन दशकों से भी अधिक समय तक भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने वाले और नौसैनिक अभियानों की रीढ़ माने जाने वाले इस हेलिकॉप्टर को फ्लाइंग फ्रिगेट यानी उड़ता हुआ युद्धपोत के नाम से जाना जाता था।  

मुंबई स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन ‘आईएनएस शिक्रा’ (INS Shikra) पर तैनात आईएनएएस 330 हारपून्स स्क्वाड्रन द्वारा संचालित इस सी किंग बेड़े ने देश की 36 वर्षों तक शानदार सेवा की. अब इसे आधिकारिक तौर पर नंबर-प्लेटेड यानी निष्क्रिय कर दिया गया है। 

मुख्य स्क्वाड्रन के हटने के बाद अब नौसेना के पास केवल एक अंतिम सक्रिय सी किंग स्क्वाड्रन बचा है, जिसमें पुराने सी किंग एमके 42सी वेरिएंट के कुछ ही हेलिकॉप्टर बचे हैं, जिनका इस्तेमाल भी आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। 

क्या रही सी किंग की ऐतिहासिक भूमिका?
मुख्य बेड़े की विदाई के बाद बचे हुए कुछ गिने-चुने सी किंग हेलिकॉप्टर्स का संचालन अब विशाखापत्तनम स्थित ‘आईएनएस डेगा’ पर तैनात आईएनएएस 350 ‘सारस’ स्क्वॉड्रन द्वारा किया जा रहा है. इन हेलिकॉप्टरों को अब मुख्य युद्धक भूमिकाओं से हटाकर प्राथमिक रूप से खोज और बचाव अभियानों तथा विशेष नौसैनिक अभियानों के बैकअप सपोर्ट के काम में लगाया गया है। 

अपने गौरवशाली इतिहास में ब्रिटिश-निर्मित सी किंग हेलिकॉप्टरों ने समुद्र में भारत की ताकत का लोहा मनवाया था. यह अकेला ऐसा विमान था जो दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करने, समुद्री जहाजों पर हमला करने, चौबीसों घंटे समुद्री निगरानी रखने के साथ-साथ गंभीर चक्रवातों और आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता व बचाव कार्यों में सबसे आगे रहता था। 

बड़े युद्धपोतों पर आसानी से लैंड करने और अत्यधिक घातक हथियारों से लैस होने के कारण ही नौसैनिक इसे ‘फ्लाइंग फ्रिगेट’ कहते थे। 

अमेरिकी ‘रोमियो’ की एंट्री: एमएच-60आर सीहॉक संभालेंगे देश की कमान
सी किंग हेलिकॉप्टरों की इस विदाई का मतलब यह नहीं है कि समुद्र में भारत की नजर कमजोर होगी; बल्कि यह नौसेना के आधुनिक और अधिक घातक रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने का एक बड़ा रणनीतिक कदम है। 

इन बूढ़े हो चुके हेलिकॉप्टरों की जगह लेने के लिए भारत ने अमेरिका से अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक रोमियो हेलिकॉप्टरों को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर दिया है. भारत ने अमेरिकी सरकार के साथ एक सरकारी सौदे के तहत कुल 24 एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से 21 हेलिकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं। 

इन 21 में से 15 रोमियो हेलिकॉप्टर वर्तमान में फ्रंटलाइन युद्धपोतों के साथ पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं, जबकि तीन हेलिकॉप्टरों को अमेरिकी जमीन पर ही भारतीय पायलटों और क्रू मेंबर्स की एडवांस ट्रेनिंग के लिए रखा गया है। 

बाकी बचे हेलिकॉप्टरों में भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल जरूरी बदलाव और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद वे भी मुख्य सेना का हिस्सा बन जाएंगे। 

अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एमएच-60आर को दुनिया का सबसे आधुनिक नौसैनिक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो एडवांस सेंसर, एमके-54 टॉरपीडो और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलों से लैस है. इसके आने से हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों पर नजर रखना भारत के लिए बेहद आसान हो जाएगा। 

फैमिली पेंशन पर RBI का बड़ा फैसला, पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद भी जॉइंट अकाउंट रहेगा चालू

ई दिल्ली
 केंद्रीय पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है. पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, मुख्य पेंशनभोगी के निधन के बाद उनके पति या पत्नी के साथ चल रहा जॉइंट बैंक अकाउंट बंद नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, फैमिली पेंशन शुरू कराने के लिए जीवित जीवनसाथी को कोई भी नया सिंगल बैंक अकाउंट खोलने की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य संकट की घड़ी में बुजुर्गों को बैंकों की लंबी कागजी कार्रवाई और चक्कर काटने से बचाना है। 

क्या है नया नियम और व्यवस्था?
पेंशन विभाग और बैंकिंग नियमों के मुताबिक, यदि पेंशनभोगी का अपने जीवनसाथी के साथ “आइदर और सर्वाइवर” (Either or Survivor) या “फॉर्मर और सर्वाइवर” मोड में संयुक्त खाता है, तो पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसी खाते में फैमिली पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. बैंक इस मौजूदा जॉइंट अकाउंट को ही सिंगल अकाउंट में परिवर्तित कर देगा. इसके लिए पूरी बैंकिंग प्रक्रिया को नए सिरे से दोहराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। 

फैमिली पेंशन शुरू कराने की आसान प्रक्रिया
पेंशनभोगी के निधन के बाद परिवार को सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. इसके लिए जीवनसाथी को केवल निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

    मृत्यु प्रमाण पत्र: पेंशनभोगी के निधन की आधिकारिक पुष्टि के लिए.
    PPO की कॉपी
: यदि पीपीओ में पति/पत्नी का नाम फैमिली पेंशन के लिए पहले से दर्ज है, तो काम बेहद आसान हो जाता है। 

    साधारण आवेदन पत्र और KYC: बैंक खाते का स्टेटस अपडेट करने के लिए एक साधारण फॉर्म और पहचान पत्र। 

इन दस्तावेजों को जमा करते ही बैंक केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) को सूचना भेजेगा और उसी खाते में फैमिली पेंशन क्रेडिट होना शुरू हो जाएगी. इस प्रक्रिया में जीवित पति/पत्नी को ‘फॉर्म 14’ भरने की भी जरूरत नहीं पड़ती। 

देरी से बचने के लिए अभी करें ये काम

विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर फैमिली पेंशन में देरी नियमों की वजह से नहीं, बल्कि दस्तावेजों में कमियों के कारण होती है. इसलिए पेंशनभोगियों को समय रहते ये कदम उठाने चाहिए:

नाम की स्पेलिंग जांचें: सुनिश्चित करें कि पीपीओ, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते में जीवनसाथी के नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी हो। 

KYC अपडेट रखें: बैंक खाते का नो-योर-कस्टमर (KYC) रिकॉर्ड हमेशा अपडेटेड रखें ताकि खाता कभी फ्रीज न हो। 

जॉइंट अकाउंट मोड: यदि खाता जॉइंट नहीं है, तो उसे तुरंत ‘आइदर या सर्वाइवर’ मोड में बदलवा लें। 

E85 और E100 ईंधन कितना किफायती? माइलेज, कीमत और खर्च का पूरा हिसाब जानिए

नई दिल्ली
 भारत में अब E85 पेट्रोल मिलना शुरू हो गया है. E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. फिलहाल यह कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, जिनमें दिल्ली जैसे शहर भी शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक इसे देशभर के करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का है. दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर है, वहीं E85 करीब 82 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है. यानी इसकी कीमत लगभग 20 रुपये कम रखी गई है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि आज देश में मिलने वाले सामान्य पेट्रोल में भी लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल पहले से मिलाया जा रहा है, जिसे E20 कहा जाता है। 

E20 पेट्रोल लगभग सभी पेट्रोल वाहनों के लिए उपलब्ध है, लेकिन E85 हर गाड़ी में नहीं डाला जा सकता. इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली कार या मोटरसाइकिल होना जरूरी है. ऐसी गाड़ियों की खासियत यह है कि इनमें E20, E85 या भविष्य में आने वाला E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल वाला ईंधन भी इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत में अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारें और दोपहिया वाहन बाजार में आने लगे हैं. सरकार का उद्देश्य लोगों को धीरे धीरे ऐसे वाहनों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और देश का आयात बिल घट सके। 

सरकार एथेनॉल को बढ़ावा क्यों दे रही है
एथेनॉल का उत्पादन भारत में ही किया जाता है, जबकि कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है. अगर अधिक लोग एथेनॉल आधारित ईंधन अपनाते हैं तो देश को कम कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी. इसी सोच के तहत सरकार ने तेल कंपनियों से E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखने को कहा है। 

क्या 20 रुपये सस्ता ईंधन सच में सस्ता साबित होगा
पहली नजर में 20 रुपये प्रति लीटर कम कीमत काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असली सवाल माइलेज का है. एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है, इसलिए एक लीटर एथेनॉल पर गाड़ी उतनी दूरी तय नहीं कर पाती जितनी एक लीटर पेट्रोल पर करती है. यही वजह है कि केवल प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी एक लीटर ईंधन में कितने किलोमीटर चलती है। 

ब्राजील का अनुभव क्या कहता है
एथेनॉल आधारित परिवहन की बात करें तो ब्राजील दुनिया के सबसे पुराने और सफल उदाहरणों में शामिल है. वहां 1975 से एथेनॉल को बढ़ावा देने की नीति लागू है और 2003 के बाद फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का तेजी से विस्तार हुआ. आज वहां अधिकांश गाड़ियां ऐसी हैं जिनमें पेट्रोल और एथेनॉल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

ब्राजील में एक मशहूर सिद्धांत है जिसे 70 प्रतिशत नियम कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि एथेनॉल वाला ईंधन तभी आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है जब उसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की कीमत के लगभग 70 प्रतिशत या उससे कम हो, यानी करीब 30 प्रतिशत सस्ती हो. इसका कारण यह है कि वहां के अनुभव के अनुसार एथेनॉल पर माइलेज पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम मिलती है. अगर कोई गाड़ी एक लीटर शुद्ध पेट्रोल पर 10 किलोमीटर चलती है तो वही गाड़ी एक लीटर शुद्ध एथेनॉल पर लगभग 7 किलोमीटर चलती है। 

भारत के E20 और E85 का गणित
अगर मान लिया जाए कि कोई वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल पर 10 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है, तो E20 में मौजूद 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल के आधार पर उसकी अनुमानित माइलेज करीब 9.4 किलोमीटर प्रति लीटर बैठती है. इसी तरह E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. उसी गणना के आधार पर इसकी अनुमानित माइलेज करीब 7.5 किलोमीटर प्रति लीटर हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि E20 की तुलना में E85 पर माइलेज लगभग 20 प्रतिशत कम हो सकती है. इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है। 

क्या उपभोक्ता को फायदा होगा
मौजूदा गणना के आधार पर ऐसा लगता है कि कम कीमत और कम माइलेज लगभग एक दूसरे को संतुलित कर देते हैं. यानी E85 इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता को कोई बड़ा अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन उसे कोई खास नुकसान भी नहीं होना चाहिए। 

देश को हो सकता है बड़ा लाभ
अगर बड़ी संख्या में लोग फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां अपनाते हैं और E85 या भविष्य में E100 जैसे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश को होगा. इससे पेट्रोल और कच्चे तेल के आयात में कमी आ सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और डॉलर पर निर्भरता घट सकती है. लंबे समय में इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है. कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर E85 उपभोक्ता के लिए कोई चमत्कारी बचत का साधन नहीं दिखता, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम जरूर साबित हो सकता है। 

 

होर्मुज से आई बड़ी राहत, 34 जहाजों की खेप से किसानों को मिलेगा फायदा; पेट्रोल-LPG आपूर्ति भी रहेगी सुचारु

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 

भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है। 

आखिर क्यों खास है ‘दिशा’?
दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे। 

किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज
जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 

भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज?
भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है। 

कब तक खत्म हो सकेगा संकट?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। 

भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं। 

सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

जेद्दाह जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट में तकनीकी खराबी, कन्नूर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

कन्नूर
 केरल के कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जेद्दाह जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक फ़्लाइट में तकनीकी खराबी आने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. टेकऑफ के तुरंत बाद ही इस दिक्कत का पता चला, जिससे एयरक्राफ़्ट एक घंटे से ज़्यादा समय तक हवा में चक्कर लगाता रहा और फिर सुरक्षित रूप से लैंड कर गया. इस तरह पायलट के समय पर दखल देने से एक बड़ी मुसीबत टल गई। 

फ़्लाइट कन्नूर से सुबह 7.30 बजे 150 यात्रियों को लेकर निकली थी. रास्ते में जब एयरक्राफ़्ट मंगलुरु के एयरस्पेस में पहुंचा तो पायलट को तकनीकी दिक्कतें नजर आई. यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फ़्लाइट को तुरंत कन्नूर वापस डायवर्ट करने का तुरंत फैसला लिया गया। 

पायलट ने एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी. हालाँकि, सुरक्षित लैंडिंग के लिए एयरक्राफ़्ट का फ़्यूल लेवल कम करना पड़ा. ऐसा करने के लिए फ़्लाइट ने मंगलुरु एयरस्पेस के ऊपर लगभग पंद्रह बार चक्कर लगाए। 

इमरजेंसी में एयरक्राफ्ट को सुरक्षित रूप से लैंड कराने के लिए फ्यूल जलाना एक स्टैंडर्ड तरीका है. पायलट एयरक्राफ्ट का वजन कम करने और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चत करने के लिए यह तरीका अपनाते हैं. ज़्यादा फ्यूल खत्म करने से बड़ी मुसीबतों को रोकने में मदद मिलती है. इसमें लैंडिंग के समय आग लगने का खतरा भी शामिल है, और यह काम एविएशन नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा सावधानियों के मुताबिक है. एक घंटे से ज़्यादा हवा में चक्कर लगाने के अनुभव से यात्रियों में काफी चिंता हो गई। 

फ्यूल लोड को काफी कम करने के बाद फ्लाइट कन्नूर एयरपोर्ट के रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंड हो गई. इमरजेंसी लैंडिंग की आशंका को देखते हुए एयरपोर्ट ने फायर फोर्स, एम्बुलेंस और मेडिकल टीमों सहित इमरजेंसी सिस्टम को स्टैंडबाय पर रखा. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि एयरक्राफ्ट में सवार सभी 150 यात्री और क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित उतर गए। 

एयरक्राफ्ट के रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंड करने के बाद अधिकारियों और यात्रियों दोनों ने राहत की सांस ली. इसके बाद यात्रियों को टर्मिनल ले जाया गया, जहाँ एयरपोर्ट अधिकारियों ने जरूरी मेडिकल मदद और दूसरी सुविधाओं का इंतजाम किया. यात्रियों का सामान सुरक्षित रूप से निकालने का प्रोसेस भी पूरा कर लिया गया। 

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन समेत एविएशन अथॉरिटीज, टेक्निकल खराबी की सही वजह का पता लगाने के लिए डिटेल में इंस्पेक्शन करेगी. इंस्पेक्शन के बाद ही यह साफ होगा कि खराबी एयरक्राफ्ट के लैंडिंग गियर में थी या किसी दूसरे टेक्निकल सेक्शन में। 

मेंटेनेंस का काम करने के लिए एक एक्सपर्ट इंजीनियरिंग टीम कन्नूर पहुंच गई है, और खराबी पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही एयरक्राफ्ट को अगली सर्विस के लिए क्लियर किया जाएगा. एयर इंडिया एक्सप्रेस खाड़ी देशों और केरल के बीच सर्विस देने वाली बड़ी एयरलाइन्स में से एक है. मालाबार इलाके में बाहर से आए लोगों के लिए बहुत ज़्यादा भरोसेमंद फ्लाइट से जुड़ी ऐसी घटनाओं ने यात्रियों में काफ़ी चिंता पैदा कर दी है। 

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